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मध्य प्रदेश में लगातार हो रही तेज बारिश के चलते नर्मदा नदी पर बने इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। गुरुवार को इंदिरा सागर बांध के 12 गेट खोले गए, वहीं ओंकारेश्वर बांध से 21 गेटों के जरिए कुल 35.5 मीटर ऊंचाई तक खोले गए एवं10,533 क्यूमेक्स पानी नर्मदा नदी में छोड़ा गया।
दोनों ही बांधों का जलभराव क्षमता से ऊपर
नर्मदा नदी का जलस्तर वर्तमान में खतरे के निशान से केवल डेढ़ मीटर नीचे है। दोनों ही बांधों का जलभराव क्षमता से ऊपर पहुंच चुका है, जिसके चलते गेट खोलकर पानी निकाला जा रहा है। यह इस वर्ष का मात्र दो दिन में पांचवां अवसर है जब बांध प्रबंधन को गेट खोलने पड़े हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नर्मदा नदी के ऊपरी हिस्सों से कितनी अधिक मात्रा में पानी आ रहा है।
खतरे की स्थिति
लगातार हो रही वर्षा और ऊपरी क्षेत्रों से आ रहे प्रवाह के कारण नर्मदा नदी उफान पर है। ओंकारेश्वर से आगे खंडवा और खरगोन जिले में बसे नर्मदा किनारे के गांवों और कस्बों के लिए स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण बन गई है।
यदि वर्षा का सिलसिला जारी रहा और गेटों की संख्या व ऊंचाई और बढ़ाई गई तो नदी का जलस्तर और ऊपर जा सकता है। वर्तमान में नर्मदा नदी का जल स्तर 162,500 तक पहुंच गया है। अगर नदी का जलस्तर 163.980 पर पहुंचा तो खतरे के निशान को पार कर जाएगा।
प्रशासन की तैयारी
गंभीर हालात को देखते हुए प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। बाढ़ एवं आपदा प्रबंधन टीम लगातार निगरानी कर रही है। दोनों जिलों (खंडवा और खरगोन) के पुलिस अधीक्षकों ने सभी थानों को निर्देश दिए हैं कि नर्मदा किनारे जहां-जहां जनसमूह एकत्रित होता है, वहां सुरक्षा बल तैनात रहें।
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, होमगार्ड और स्थानीय गोताखोरों को भी तैयार रखा गया है। ग्राम पंचायत, नगर पंचायत और नगर पालिकाओं को सख्त आदेश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की घटना या दुर्घटना न हो।
जनता से अपील
प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि लोग नर्मदा नदी के किनारे न जाएं। लगातार गेट खुलने से जलस्तर कभी भी अचानक बढ़ सकता है। सावधानी बरतना ही सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है। नर्मदा के उफान और बांधों की लगातार जलनिकासी ने पूरे नर्मदा तट क्षेत्र को अलर्ट पर ला दिया है। आने वाले समय में नदी का जलस्तर किस ओर करवट लेगा, यह वर्षा पर निर्भर करेगा।
विभाग क्रूज संचालन के पूर्व अन्य सभी सुविधाएं मेघनाद घाट पर उपलब्ध करवाने की योजना पर कार्य कर रहा है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नर्मदा नदी पर मेघनाद घाट से गुजरात की स्टेच्यू ऑफ यूनिटी केवड़िया तक 120 किमी में प्रदेश का पहला अंतरप्रांतीय जलमार्ग बनेगा। क्रूज संचालन के लिए मध्यप्रदेश टूरिज्म और गुजरात सरकार में एमओयू पर हस्ताक्षर हो गए हैं।
मेघनाद घाट पर खड़े हैं दो पोंटून
इस 120 किमी के जल मार्ग पर मध्यप्रदेश और गुजरात सरकार को दो-दो फ्लोटिंग जेटी (पोंटून) क्रूज के टर्मिनल के रूप में कार्य करेगी। इसके लिए मध्यप्रदेश को दो पोंटून मिल गए हैं, जो मेघनाद घाट पर खड़े हैं।
जल्द ही गुजरात को भी दो पोंटून मिल जाएंगे। प्रदेश के पर्यटन विभाग द्वारा नर्मदा किनारे रिसोर्ट बनाने के लिए धार जिले के मेघनाद घाट के समीप और आलीराजपुर जिले के ककराना में जमीन उपलब्ध करवाने की निविदा आमंत्रित की गई। इसके बाद एक कंपनी की टीम ने मेघनाद घाट का दौरा किया। टीम के अमित महाजन ने बताया कि नर्मदा किनारे रिसोर्ट बनाने को लेकर हमारी मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग से चर्चा चल रही है।
स्टेशन के लिए बन रही डीपीआर
मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग भोपाल के सलाहकार अनिमेष श्रीवास्तव ने बताया कि मेघनाद घाट पर क्रूज संचालन के लिए विभाग ने चार करोड़ की लागत से डीपीआर तैयार कर ली है। इसमें जेटी तक जाने के लिए फ्लोटिंग पुल, क्रूज को खड़े रहने के स्थान के साथ अन्य आवश्यक सुविधाएं की जाएंगी। इसके लिए पहले चरण की डीपीआर बनाई है। पर्यटन विभाग द्वारा क्रूज संचालन के लिए कंपनियों से चर्चा की जा रही है।
यह है खास
गुजरात की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को मध्य प्रदेश के स्टैच्यू आफ वननेस ओंकारेश्वर से जोड़ा जाएगा।
गुजरात के केवड़िया से प्रदेश के मेघनाद तक 120 किमी की यात्रा जलमार्ग क्रूज से होगी।
मेघनाद घाट से ओंकारेश्वर तक की यात्रा बस द्वारा पर्यटकों को करवाई जाएगी।
120 किमी जल मार्ग में तीन स्थानों पर पर्यटकों को क्रूज से उतारकर आदिवासी संस्कृति से रूबरू कराने की योजना।
मध्य प्रदेश में मेघनाद घाट से ओंकारेश्वर तक सड़क मार्ग के मध्य बाग गुफा, डायनासोर पार्क, मांडू और महेश्वर जैसे पर्यटन स्थल का भ्रमण कराने की योजना है।
गुजरात के साथ मध्यप्रदेश से भी क्रूज संचालन किया जाएगा। इसमें गुजरात पर्यटन विभाग स्टैच्यू आफ यूनिटी के आसपास के पर्यटन स्थल जोड़ने की योजना पर कार्य कर रहा है।
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मध्यप्रदेश में भारी बारिश की वजह से बांध में 2 लाख 95 हजार 972 क्यूसेक पानी आया है, जिससे नर्मदा बांध 87 फीसदी भर चुका है. इस वक्त नर्मदा बांध में 3823.60 मिलियन क्यूबिक मीटर लाइव स्टोरेज पानी भर गया है.
इस सीजन में पहली बार नर्मदा बांध पर 134.59 मीटर पर पानी पहुंचा है, जबकि बांध की अधिकतम सतह 138.68 मीटर है. नर्मदा बांध अधिकतम स्तर से मात्र 4 मीटर दूर है.
वहीं, नर्मदा बांध से पानी छोड़े जाने के बाद गुजरात के भरूच और वडोदरा में नर्मदा किनारे बसे गांवों को अलर्ट किया गया है. लेकिन अभी चिंता की स्थिति नहीं है.
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