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मध्य प्रदेश की राजनीति में दलबदल का मामला एक बार फिर गरमा गया है. बीना से विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. यह मामला तब चर्चा में आया जब लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने वाली निर्मला सप्रे ने बीजेपी का हाथ थाम लिया था।
कांग्रेस नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सप्रे के इस कदम को गलत बताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. सिंघार की याचिका में मांग की गई कि निर्मला सप्रे की विधायकी को तुरंत शून्य (रद्द) घोषित किया जाए. उनकी दलील है कि दल बदलने के बाद सप्रे को विधायक बने रहने का हक नहीं है।
हाईकोर्ट ने दी नई तारीख
कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखा. सरकार की तरफ से बताया गया कि 9 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष के सामने इस मामले की सुनवाई होनी थी. लेकिन, प्रशासनिक व्यस्तता के चलते उस दिन सुनवाई नहीं हो सकी. इस आधार पर सरकार ने हाईकोर्ट से थोड़ा और वक्त मांगा. कोर्ट ने स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष के सामने सुनवाई के लिए अब 22 अप्रैल की नई तारीख तय कर दी है।
खुद को बता दिया था कांग्रेसी
पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया था, जब पिछली सुनवाई में निर्मला सप्रे ने खुद को ‘कांग्रेसी’ बताया था. उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में सबको हैरान कर दिया था, क्योंकि वह सार्वजनिक रूप से बीजेपी में शामिल हुई थीं. अब सवाल यह है कि अगर वह खुद को कांग्रेसी कह रही हैं, तो उनकी सदस्यता पर क्या असर पड़ेगा?
हाईकोर्ट अब इस मामले पर 29 अप्रैल को अगली सुनवाई करेगा. तब तक यह देखना होगा कि 22 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष के सामने होने वाली सुनवाई में क्या नतीजे निकलते हैं. क्या निर्मला सप्रे अपनी विधायकी बचा पाएंगी या उन्हें अपनी सदस्यता गंवानी पड़ेगी?
]]>मध्यप्रदेश के बीना विधायक निर्मला सप्रे की बहुचर्चित सदस्यता मामले में संशय अभी भी बरकार है। लोगों और खुद विधायक को कोर्ट के निर्णय का इंतजार है। इस बीच निर्मला सप्रे का बड़ा बयान सामने आया है।
आमंत्रण के लिए सीएम से मिलने आती हूं
विधायक निर्मला सप्रे ने कहा- विधायक पद का मोह होता तो मैं मंत्री होती। कोर्ट के निर्णय का इंतजार करें, कोर्ट जो भी निर्णय देगा वह मंजूर है। मैं कोर्ट में अपना जवाब दूंगी, सार्वजनिक मंच पर नहीं। मैं जनता की विधायक हूं, मैं जनता के लिए काम कर रही हूं। 177 करोड़ के काम सरकार ने स्वीकृत किए हैं उनके शिलान्यास भूमिपूजन के आमंत्रण के लिए सीएम से मिलने आती हूं। मुझे विधायक पद का मोह नहीं है। अगर मोह होता तो मैं मंत्री होती।
बीना जल्द ही जिला बनेगा, जनता की यही इच्छा
बीजेपी को आज की स्थिति में किसी दूसरे दल के विधायक की जरूरत नहीं है। मैं जनता की सेवा के लिए काम कर हूं, जनता मेरे काम से बहुत खुश है। बीना जल्द ही जिला बनेगा, जनता की यही इच्छा है। बीना को जिला बनाने के लिए मैं खुद धरने पर बैठी हूं। सीएम ने बीना के विकास के लिए बहुत काम किया है।
विधानसभा का शीतकालीन सत्र 16 दिसंबर से शुरू हो रहा है। इसके ठीक पहले एमपी में कांग्रेस विधायक दल की बैठक प्रस्तावित है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने मीडिया से चर्चा के दौरान निर्मला सप्रे के मामले में स्पष्ट रूख अपनाते हुए कहा था कि उनको इसमें आमंत्रित नहीं किया जाएगा। दरअसल, बीना विधायक निर्मला सप्रे ने लोकसभा चुनाव के दौरान राहतगढ़ में सीएम मोहन यादव के मंच पर पहुंच गई थीं। उसके बाद से वे लगातार भाजपा के मंचों पर दिख रही हैं। लेकिन उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है।
विधानसभा अध्यक्ष को करना है निर्णय
विधायक निर्मला सप्रे पर दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई करने और उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म करने को लेकर कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष को लेटर लिखा है। कांग्रेस ने निर्मला सप्रे तीन नोटिस भी दिए, लेकिन उन्होंने किसी भी नोटिस का स्पष्ट जवाब नहीं दिया। विधानसभा अध्यक्ष को कांग्रेस की तरफ से शिकायत मिलने के बाद निर्मला सप्रे ने कहा था कि मैंने कांग्रेस नहीं छोड़ी है। ऐसे में अब माना जा रहा है कि शीतकालीन सत्र के पहले दिन यानी की 16 दिसंबर को उनकी सदस्यता और बैठक व्यवस्था को लेकर फैसला हो सकता है।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ काम किया
लोकसभा चुनाव के दौरान पाला बदलकर बीना विधायक निर्मला सप्रे भाजपा के साथ खड़ी हो गईं थीं। उन्होंने कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी चंद्रभूषण सिंह (गुड्डू राजा) बुंदेला के खिलाफ काम किया था। कांग्रेस प्रत्याशी को बीना विधानसभा से भी करारी हार मिली थी। इसके बाद से विधायक खुलकर भाजपा के सदस्यता अभियान का हिस्सा बनी। निर्मला सप्रे भाजपा के स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं के साथ नजर आ रही हैं।
विधायक की सोशल मीडिया पर भाजपा ही भाजपा
बीना विधायक निर्मला सप्रे के सोशल मीडिया अकाउंट में भी बीजेपी की फोटो लगी है। उनके ऑफिशियल फेसबुक अकाउंट पर उनकी डीपी के साथ भाजपा का सिम्बल और बैकग्राउंड में भाजपा के झंडे-बैनर ही नजर आ रहे हैं। उनकी पोस्ट व त्योहारों पर डाले जाने वाले पोस्टर और कार्यक्रमों में पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम डॉ. मोहन यादव सहित भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की फोटो लगाई जा रही है।
मामले को हाईकोर्ट लेकर जाएगी कांग्रेस
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार बीना विधायक सप्रे को लेकर अपनी स्पष्ट राय जता चुके हैं। बीते दिनों सिंघार ने कहा था कि भाजपा लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास नहीं करती है। उन्होंने यह भी कहा था कि निर्मला सप्रे को लेकर हमें कोई भ्रम नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष को उनकी सदस्यता पर निर्णय करना है।
]]>निर्मला सप्रे भले ही भाजपा के मंच से लेकर पार्टी दफ्तर में नजर आ रही हो लेकिन उन्होंने अपनी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है। वहीं कांग्रेस ने निर्मला सप्रे की सदस्यता खत्म करने को लेकर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के पास याचिका लगा चुकी है, लेकिन अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं हो सकता है। ऐसे में कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हाईकार्ट में याचिका लगाई है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस ने निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर विधानसभा अध्यक्ष के पास याचिका लगा चुका है लेकिन जब इस पर कोई निर्णय नहीं हो पाया है तब पार्टी ने हाईकोर्ट का रूख किया है। वहीं नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा बताएं कि निर्मला सप्रे उनके साथ है या नहीं। वहीं अब जब 16 दिसंबर में विधानसभा की शीतकालीन सत्र होना है तब कांग्रेस निर्मला सप्रे को लेकर काफी अक्रामक नजर आ रही है।
वहीं निर्मला सप्रे के विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा नहीं देने के पीछे कई कारण है। निर्मला सप्रे बीना को जिला बनाने की मांग को लेकर भाजपा में शामिल हुई थी, वहीं पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नए जिलों को लेकर परिसीमन आयोग के गठन का एलान कर बीना को जिला बनाए जाने की मांग को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। ऐसे में अब निर्मला सप्रे चुनाव का सामना करने से बचना चाह रही है।
निर्मला को साथ नहीं बैठाएगी कांग्रेस
कांग्रेस ने यह पहले ही साफ कर दिया है कि बीना से विधायक निर्मला सप्रे को वे अपने साथ नहीं बैठाएंगे। कांग्रेस ने इस बात को मान लिया है कि वे अब भाजपा की सदस्य हैं। वे भाजपा की बैठकों में भी शामिल हुई हैं।
16 दिसंबर से विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है, इसमें निर्मला को कांग्रेस सदस्य विपक्ष में अपने साथ नहीं बैठाएंगे। इसके साथ ही विधानसभा सत्र से पहले 15 दिसंबर को जो विधायक दल की बैठक होगी उसमें भी निर्मला सप्रे को नहीं बुलाया जाएगा।
वर्ष 2023 में कांग्रेस के टिकट पर निर्मला सप्रे बीना विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुई थीं। लोकसभा चुनाव के समय वे भाजपा के संपर्क में आईं और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में मंच भी साझा किया। उन्होंने क्षेत्र के विकास का हवाला देते हुए पार्टी प्रत्याशी के स्थान पर भाजपा के लिए काम किया। भाजपा में शामिल होने की बात भी कही। इसे लेकर कांग्रेस ने उनसे दूरी बना ली।
उमंग सिंघार ने किया था आवेदन
विधायक दल की बैठक में नहीं बुलाया और सदन में अपने साथ नहीं बैठाने का निर्णय लेकर विधानसभा सचिवालय को सूचित भी कर दिया था। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनकी और रामनिवास रावत के विरुद्ध दलबदल कानून के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए सदस्यता समाप्त करने का आवेदन दिया।
दलबदल नहीं किया है
इस पर कार्रवाई से पूर्व रावत ने विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया, परंतु सप्रे ने ऐसा नहीं किया। विधानसभा सचिवालय ने उन्हें नोटिस जारी कर दलीय स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा। इस पर पहले तो उन्होंने जवाब देने का समय मांग लिया और फिर दूसरे नोटिस के जवाब में आरोपों को नकारते हुए कहा कि उन्होंने दलबदल नहीं किया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष को निर्णय लेना है, जो अभी तक नहीं हुआ है।
भाजपा कार्यालय में हुई बैठक में नजर आईं थी सप्रे
उधर, सप्रे पिछले सप्ताह प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित बैठक में भाग लेने पहुंचीं। मीडिया ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा, पर वे टाल गईं। अब कांग्रेस विधायक दल सप्रे की पार्टी विरोधी गतिविधियों के प्रमाण सबके सामने होने को आधार बनाकर दलबदल संबंधी आवेदन पर शीघ्र निर्णय करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से मिलेगा।
अब कोई संशय की स्थिति नहीं है
विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे का कहना है कि अब कहीं कोई संशय की स्थिति नहीं है। मध्य प्रदेश विधानसभा की देशभर में प्रतिष्ठा है, पर ऐसे प्रकरणों से साख प्रभावित होती है। इसलिए अध्यक्ष को शीघ्र निर्णय लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
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