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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केरल द्वारा राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण कोष के तहत 311.95 करोड़ रुपये हासिल करने के लिए आवेदन नहीं किए जाने का उल्लेख करते हुए सोमवार को लोकसभा में कहा कि केंद्रीय अनुदानों के लिए मंजूरी मिलना एक बात है और राज्यों द्वारा उस राशि को प्राप्त करने के लिए आवेदन करना दूसरी बात है।
केंद्र सरकार की ओर से केरल का अनुदान लंबित रहने संबंधी कांग्रेस सदस्य मणिकम टैगोर के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए सीतारमण ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य को उपयोगिता प्रमाणपत्र देना होता है ताकि आगे की राशि उसे जारी की जा सके। सीतारमण ने कहा कि उदाहरण के लिए केरल से संबंधित एक विषय था जिसमें आवंटन किए जाने के बावजूद केरल सरकार ने राशि प्राप्त नहीं की।
उन्होंने कहा कि केरल को राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण कोष के तहत 311.95 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, जिसमें वायनाड के भूस्खलन प्रभावित इलाकों में जोखिम प्रबंधन की परियोजना के लिए 72 करोड़ रुपये शामिल हैं। सीतारमण ने कहा, ''जिन 311.95 करोड़ रुपये के लिए स्वीकृति दी गई, उसमें एक भी पैसा जारी नहीं किया गया है। मैं इस राशि को तभी जारी करूंगी जब राज्य इसके लिए आवेदन करेगा, मांगेगा।
इसलिए मंजूरी देना एक बात है, उसके लिए आवेदन करना और मांगना दूसरी बात है।'' केरल में वायनाड आपदा प्रबंधन के लिए वित्तीय सहायता के संबंध में केंद्र और राज्य सरकार के बीच कुछ गतिरोध की स्थिति है। केरल में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं।
]]>निर्मला सीतारमण ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘वास्तव में जीएसटी में व्यापक सुधारों का काम पहले ही शुरू हो चुका था। राजस्थान के जैसलमेर में हुई पिछली जीएसटी परिषद की बैठक से पहले ही प्रधानमंत्री ने मुझे फोन किया था। उन्होंने कहा, ‘एक बार आप जीएसटी को देख लो, व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाओ और दरों पर इतने सारे भ्रम की स्थिति क्यों है? मुझे लगता है कि 9 महीने पहले हुई जैसलमेर बैठक से पहले की बात है।’ उन्होंने कहा, ‘फिर बजट के दौरान जब हम आयकर उपायों पर चर्चा कर रहे थे, तो उन्होंने मुझे याद दिलाया कि आप जीएसटी के ऊपर काम कर रही हैं न। यह एक चीज थी।’
पीएम ने फोन पर क्या कहा
सीतारमण ने कहा, ‘दूसरा, मंत्री समूह डेढ़ साल से काम कर रहे थे। मैं उनमें से प्रत्येक की सराहना करती हूं कि उन्होंने रिपोर्ट तैयार करने के लिए बहुत मेहनत की और उनके सुझाव सामने आए।’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की बात सुनने के बाद मैंने यह फैसला लिया कि अब समय आ गया कि हम GST के सभी पहलुओं की गहन समीक्षा करें। न केवल दरों की, न केवल स्लैब की संख्या की, बल्कि इस दृष्टिकोण से भी देखें कि एक व्यवसाय, लघु या मझोले व्यवसाय के लिए यह कितना और बेहतर होगा।’ वित्त मंत्री ने कहा कि हमने इन सब बातों पर गौर किया। वस्तुओं के वर्गीकरण को देखा जिससे काफी भ्रम पैदा हो रहा था। स्वभाविक रूप से दर पर भी गौर किया। 1 फरवरी, 2025 से लेकर लगभग 15 मई तक हम इसकी अध्ययन समीक्षा आदि का काम करते रहे।’
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, ‘मई के मध्य में मैं प्रधानमंत्री के पास गई। उन्हें जानकारी दी और बताया कि हम कदम उठाने के करीब हैं। यह एक प्रस्ताव का रूप ले सकता है और उनसे समय देने का अनुरोध किया। उसके बाद उन्होंने कहा कि आप देखिए इसे कैसे जीएसटी परिषद में ले जा सकती हैं। फिर मैं टीम के साथ बैठी और तय किया कि यह केंद्र का प्रस्ताव होगा, जो जीओएम को भेजा जाएगा क्योंकि जीओएम में राज्यों के मंत्री हैं। मैं वहां नहीं हूं। वास्तव में हम चाहते थे कि यह स्पष्ट हो जाए कि हम जीओएम की ओर से किए गए सभी कार्यों का सम्मान करते हैं। लेकिन यहां एक प्रस्ताव विशेष रूप से केंद्र की ओर से आ रहा है, जो परिषद में एक-तिहाई भागीदार है।’
GST को लेकर किस तरह की चर्चा
सीतारमण ने कहा, ‘हमने मंत्री समूहों को प्रस्ताव दिया और मंत्री समूहों ने उस पर विचार करना शुरू कर दिया। इस बीच और उससे भी पहले जैसलमेर में वित्त राज्यमंत्री को क्षतिपूर्ति उपकर पर गठित मंत्री समूह का चेयरमैन बनाया गया था। वह उस पर विचार कर रहे थे। लेकिन वहां भी क्षतिपूर्ति उपकर के बाद, अगर वह उसे समाप्त करने का फैसला लेते हैं, तो उन मदों का क्या होगा जो क्षतिपूर्ति उपकर के अंतर्गत आती हैं? अब वे कहां जाएंगी? यह दरों को युक्तिसंगत बनाने का मामला है। इसलिए मंत्रिसमूह ने यह निर्णय लिया कि उपकर और उसे समाप्त करने के संबंध में, उन्हें हर नियम व शर्तों पर काम करना होगा। इसके अलावा, दरें तय करने के लिए गठित मंत्रियों का समूह दरों को युक्तिसंगत बनाने पर विचार कर रहा था। इसलिए मंत्रिसमूह के सदस्यों की सहमति से यह तय किया गया कि उपकर पर काम कर रहे सदस्य भी दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समूह समिति में भाग लेंगे।’ इसके बाद दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समिति (जिसकी शुरुआत वास्तव में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बासवराज सोमप्पा बोम्मई से हुई थी और जिसका नेतृत्व बाद में बिहार के उपमुख्यमंत्री ने किया) ने मंत्रिसमूह के कार्यों के अलावा, केंद्र की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर भी विचार किया।
निर्मला सीतारमण के अनुसार, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि बेहतर होगा कि यह पूरा मामला परिषद में ही रखा जाए, बजाय इसके कि वे इस प्रस्ताव पर आगे विचार करें। फिर यह सब परिषद के पास आया और परिषद ने इसे स्वीकार कर लिया। जीएसटी परिषद ने पिछले सप्ताह बुधवार को माल एवं सेवा कर के 4 स्लैब की जगह 2 स्लैब करने का फैसला किया। अब कर की दरें पांच और 18 प्रतिशत होंगी। विलासिता और सिगरेट जैसी अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर लागू होगी। सिगरेट, तंबाकू और अन्य संबंधित वस्तुओं को छोड़कर नई कर दरें 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएंगी। दरों को युक्तिसंगत बनाए जाने के तहत टेलीविजन व एयर कंडीशनर जैसे उपभोक्ता उत्पादों के अलावा खानपान और रोजमर्रा के कई सामान समेत करीब 400 वस्तुओं पर दरें कम की गई हैं। सीतारमण ने कहा कि ऐतिहासिक जीएसटी सुधार लोगों के लिए सुधार है।
]]>निर्मला सीतारमण ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘वास्तव में जीएसटी में व्यापक सुधारों का काम पहले ही शुरू हो चुका था। राजस्थान के जैसलमेर में हुई पिछली जीएसटी परिषद की बैठक से पहले ही प्रधानमंत्री ने मुझे फोन किया था। उन्होंने कहा, ‘एक बार आप जीएसटी को देख लो, व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाओ और दरों पर इतने सारे भ्रम की स्थिति क्यों है? मुझे लगता है कि 9 महीने पहले हुई जैसलमेर बैठक से पहले की बात है।’ उन्होंने कहा, ‘फिर बजट के दौरान जब हम आयकर उपायों पर चर्चा कर रहे थे, तो उन्होंने मुझे याद दिलाया कि आप जीएसटी के ऊपर काम कर रही हैं न। यह एक चीज थी।’
पीएम ने फोन पर क्या कहा
सीतारमण ने कहा, ‘दूसरा, मंत्री समूह डेढ़ साल से काम कर रहे थे। मैं उनमें से प्रत्येक की सराहना करती हूं कि उन्होंने रिपोर्ट तैयार करने के लिए बहुत मेहनत की और उनके सुझाव सामने आए।’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की बात सुनने के बाद मैंने यह फैसला लिया कि अब समय आ गया कि हम GST के सभी पहलुओं की गहन समीक्षा करें। न केवल दरों की, न केवल स्लैब की संख्या की, बल्कि इस दृष्टिकोण से भी देखें कि एक व्यवसाय, लघु या मझोले व्यवसाय के लिए यह कितना और बेहतर होगा।’ वित्त मंत्री ने कहा कि हमने इन सब बातों पर गौर किया। वस्तुओं के वर्गीकरण को देखा जिससे काफी भ्रम पैदा हो रहा था। स्वभाविक रूप से दर पर भी गौर किया। 1 फरवरी, 2025 से लेकर लगभग 15 मई तक हम इसकी अध्ययन समीक्षा आदि का काम करते रहे।’
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, ‘मई के मध्य में मैं प्रधानमंत्री के पास गई। उन्हें जानकारी दी और बताया कि हम कदम उठाने के करीब हैं। यह एक प्रस्ताव का रूप ले सकता है और उनसे समय देने का अनुरोध किया। उसके बाद उन्होंने कहा कि आप देखिए इसे कैसे जीएसटी परिषद में ले जा सकती हैं। फिर मैं टीम के साथ बैठी और तय किया कि यह केंद्र का प्रस्ताव होगा, जो जीओएम को भेजा जाएगा क्योंकि जीओएम में राज्यों के मंत्री हैं। मैं वहां नहीं हूं। वास्तव में हम चाहते थे कि यह स्पष्ट हो जाए कि हम जीओएम की ओर से किए गए सभी कार्यों का सम्मान करते हैं। लेकिन यहां एक प्रस्ताव विशेष रूप से केंद्र की ओर से आ रहा है, जो परिषद में एक-तिहाई भागीदार है।’
GST को लेकर किस तरह की चर्चा
सीतारमण ने कहा, ‘हमने मंत्री समूहों को प्रस्ताव दिया और मंत्री समूहों ने उस पर विचार करना शुरू कर दिया। इस बीच और उससे भी पहले जैसलमेर में वित्त राज्यमंत्री को क्षतिपूर्ति उपकर पर गठित मंत्री समूह का चेयरमैन बनाया गया था। वह उस पर विचार कर रहे थे। लेकिन वहां भी क्षतिपूर्ति उपकर के बाद, अगर वह उसे समाप्त करने का फैसला लेते हैं, तो उन मदों का क्या होगा जो क्षतिपूर्ति उपकर के अंतर्गत आती हैं? अब वे कहां जाएंगी? यह दरों को युक्तिसंगत बनाने का मामला है। इसलिए मंत्रिसमूह ने यह निर्णय लिया कि उपकर और उसे समाप्त करने के संबंध में, उन्हें हर नियम व शर्तों पर काम करना होगा। इसके अलावा, दरें तय करने के लिए गठित मंत्रियों का समूह दरों को युक्तिसंगत बनाने पर विचार कर रहा था। इसलिए मंत्रिसमूह के सदस्यों की सहमति से यह तय किया गया कि उपकर पर काम कर रहे सदस्य भी दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समूह समिति में भाग लेंगे।’ इसके बाद दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समिति (जिसकी शुरुआत वास्तव में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बासवराज सोमप्पा बोम्मई से हुई थी और जिसका नेतृत्व बाद में बिहार के उपमुख्यमंत्री ने किया) ने मंत्रिसमूह के कार्यों के अलावा, केंद्र की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर भी विचार किया।
निर्मला सीतारमण के अनुसार, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि बेहतर होगा कि यह पूरा मामला परिषद में ही रखा जाए, बजाय इसके कि वे इस प्रस्ताव पर आगे विचार करें। फिर यह सब परिषद के पास आया और परिषद ने इसे स्वीकार कर लिया। जीएसटी परिषद ने पिछले सप्ताह बुधवार को माल एवं सेवा कर के 4 स्लैब की जगह 2 स्लैब करने का फैसला किया। अब कर की दरें पांच और 18 प्रतिशत होंगी। विलासिता और सिगरेट जैसी अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर लागू होगी। सिगरेट, तंबाकू और अन्य संबंधित वस्तुओं को छोड़कर नई कर दरें 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएंगी। दरों को युक्तिसंगत बनाए जाने के तहत टेलीविजन व एयर कंडीशनर जैसे उपभोक्ता उत्पादों के अलावा खानपान और रोजमर्रा के कई सामान समेत करीब 400 वस्तुओं पर दरें कम की गई हैं। सीतारमण ने कहा कि ऐतिहासिक जीएसटी सुधार लोगों के लिए सुधार है।
]]>रूस का कच्चा तेल भारत और अमेरिकी संबंधों के गले की फांस बना हुआ है. इस तेल की वजह से अमेरिका, भारत पर भारी भरकम टैरिफ भी लगा चुका है. लेकिन संबंधों में इन उतार-चढ़ावों के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ा बयान दिया है.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा कि रूस से भारत कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा क्योंकि भारत आर्थिक और व्यावसायिक वजहों से तेल खरीद रहा है.
उन्होंने कहा कि ट्रंप सरकार की ओर से भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ के असर को कुछ हद तक जीएसटी सुधारों से संतुलित किया जाएगा, जिनमें कई वस्तुओं पर अप्रत्यक्ष कर दरों को कम किया गया है.
सीतारमण ने कहा कि सरकार उन लोगों की मदद के लिए भी कदम उठा रही है, जो अमेरिका के टैरिफ से प्रभावित हुए हैं. उन्होंने कहा कि फिर चाहे या रूस का तेल हो या कुछ और यह हमारा निर्णय है कि हमें कहां से खरीदना है और किस दर पर खरीदना है. हम हमराी जरूरतों के अनुरूप काम करेंगे. हम अपना तेल कहां से खरीदते हैं, खासकर जब यह विदेशी मुद्रा से जुड़ा एक बड़ा खर्च है, जहां हमें बहुत भुगतान करना पड़ता है तो हमें वही फैसला लेना होगा कि कौन-सा स्रोत हमारे लिए सबसे उपयुक्त है.
बता दें कि भारत कच्चे तेल का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और अपनी लगभग 88 फीसदी जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर करता है. रूसी कच्चे तेल ने पिछले तीन वर्षों में भारत को अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद की है.
सीतारमण की यह टिप्पणी उस समय आई, जब ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने 8 सितंबर को BRICS नेताओं की एक वर्चुअल बैठक बुलाई, ताकि ट्रंप प्रशासन के टैरिफ का जवाब तय किया जा सके. मालूम हो कि भारत और ब्राजील पचास फीसदी टैरिफ सूची में शीर्ष पर हैं.
]]>सीतारमण ने बताया कि Google Maps की मदद से उन जगहों का पता चला जहां लोग कैश छुपाते थे। Instagram अकाउंट्स से 'बेनामी' संपत्ति के मालिकों का पता लगाया गया। WhatsApp मैसेज से क्रिप्टो एसेट्स से जुड़े 200 करोड़ रुपये का काला धन पकड़ा गया।
टेक्नोलॉजी से पकड़े जा रहे हैं चोर
उन्होंने बताया, "Encrypted मैसेज से 250 करोड़ रुपये का काला धन मिला। क्रिप्टो एसेट्स के WhatsApp मैसेज से सबूत मिले हैं। WhatsApp से 200 करोड़ रुपये का काला धन पकड़ा गया।" इसका मतलब है कि टैक्स अधिकारी अब टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके टैक्स चोरों को पकड़ रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि टैक्स अधिकारियों को डिजिटल रिकॉर्ड देखने का अधिकार देना ज़रूरी है। इससे टैक्स चोरी और धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी वर्चुअल एसेट्स, जैसे कि क्रिप्टोकरेंसी, का इस्तेमाल करके टैक्स न बचा पाए।
नए बिल में ज्यादा अधिकार
नए बिल के अनुसार, अधिकारियों को ईमेल, WhatsApp और Telegram जैसे कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स को एक्सेस करने का अधिकार होगा। वे बिजनेस सॉफ्टवेयर और सर्वर भी देख सकेंगे, जिनका इस्तेमाल वित्तीय लेनदेन को छुपाने के लिए किया जाता है। सीतारमण जी ने कहा कि सरकार टेक्नोलॉजी के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि टैक्स कानून आधुनिक हों और टैक्स चोरी करने वालों को पकड़ा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का यह कदम टैक्स भरने वाले ईमानदार लोगों के लिए है, ताकि कोई भी टैक्स चोरी करके बच न सके। सरकार हर तरह से टैक्स चोरी रोकने के लिए तैयार है।
]]>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पीड़ितों या सही दावेदारों को 22,280 करोड़ रुपये की संपत्तियां वापस कर दी हैं और आर्थिक अपराधियों के खिलाफ लड़ाई निरंतर जारी रहेगी।
सीतारमण ने वर्ष 2024-25 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों के पहले बैच पर लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि भगोड़े विजय माल्या की 14,131.6 करोड़ रुपये की संपत्ति सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वापस कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि नीरव मोदी मामले में 1,052.58 करोड़ रुपये की संपत्ति सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और निजी बैंकों को वापस कर दी गई है। वित्त मंत्री के जवाब के अनुसार, मेहुल चोकसी मामले में 2,565.90 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं और उन्हें नीलाम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) मामले में, धोखाधड़ी के शिकार वास्तविक निवेशकों को 17.47 करोड़ रुपये की संपत्तियां वापस कर दी गईं।
उन्होंने कहा, 'पीएमएलए के मामले में, ईडी ने प्रमुख मामलों में कम से कम 22,280 करोड़ रुपये की संपत्तियां सफलतापूर्वक वापस हासिल की हैं… हमने किसी को नहीं छोड़ा है, भले ही वे देश छोड़कर भाग गए हों, हम उनके पीछे पड़े हैं। ईडी ने यह पैसा इकट्ठा किया है और बैंकों को वापस दे दिया है।'
सीतारमण ने कहा, 'इसलिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि हमने आर्थिक अपराध करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ा है। हम उनके पीछे पड़े हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जो पैसा बैंकों में वापस जाना है, वह वापस आ जाए।'
विदेशों में जमा काले धन के संबंध में कुछ सांसदों के सवालों पर वित्त मंत्री ने कहा कि 2015 का काला धन अधिनियम वास्तव में बहुत से करदाताओं पर निवारक प्रभाव डाल रहा है और वे अपनी विदेशी संपत्ति का खुलासा करने के लिए स्वयं आगे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी संपत्ति का खुलासा करने वाले करदाताओं की संख्या 2021-22 में 60,467 से बढ़कर 2024-25 में दो लाख हो गई है।
]]>श्रीमती सीतारमण ने कहा कि नीति निर्माताओं को उच्च ऋण लागत और घटती राजकोषीय समायोजन के बीच विवेकपूर्ण राजकोषीय और मौद्रिक प्रबंधन के साथ विकास लक्ष्यों को संतुलित करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि विकास को बनाए रखने के लिए राजकोषीय समेकन क्रमिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुशल सामाजिक व्यय के लिए पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देना और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का लाभ उठाना भारत में सफल साबित हुआ है।
वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर उत्पादन-मुद्रास्फीति का व्यापार खराब हो गया है,और आर्थिक गति धीमी हो सकती है – जिसके लिए स्पिलओवर की निगरानी के लिए निरंतर डेटा-संचालित नीति समायोजन की आवश्यकता है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन और अन्य साझा चुनौतियों से निपटने के लिए सार्वजनिक वस्तुओं में वैश्विक निवेश पर जोर दिया।
दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाओं का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि ब्रेटन वुड्स संस्थानों को अधिक कम लागत वाली, दीर्घकालिक वित्तपोषण प्रदान करके, निजी पूंजी का लाभ उठाकर और नवीन साधनों के साथ परियोजनाओं को जोखिम मुक्त करके विकास प्रभाव को बढ़ाना चाहिए।
यह स्वीकार करते हुए कि प्रौद्योगिकी और जनसांख्यिकीय बदलाव जैसे उभरते रुझान चुनौतियां पेश करते हैं लेकिन साथ ही अपार अवसर भी देते हैं, वित्त मंत्री ने कहा कि आईएमएफ पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक बदलावों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि विकास और लचीलेपन के लिए आर्थिक नींव को धीरे-धीरे मजबूत करने, साहसिक संरचनात्मक सुधारों और वैश्विक सहयोग को बढ़ाने की आवश्यकता होगी।
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वित्त मंत्री ने कहा कि 80 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय वयस्कों के पास अब औपचारिक वित्तीय खाते (फॉर्मल फाइनेंशियल अकाउंट) हैं, जो 2011 में केवल 50 प्रतिशत थे। यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वित्तीय समावेशन के अभियान का परिणाम है, जिसने आधुनिक भारतीय इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन लाया है। रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि ग्रामीण भारत में 62 प्रतिशत दोपहिया वाहन खरीद अब ऋण द्वारा संचालित होते हैं, जो शहरी क्षेत्रों में 58 प्रतिशत से अधिक है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन की बिक्री में भी जबरदस्त वृद्धि हुई है। उद्योग के अनुसार, विभिन्न उपभोक्ता वित्त व्यवस्था (फाइनेंसिंग) विकल्पों ने इस शानदार वृद्धि को संभव बनाया है। सरकार के अनुसार, इन बैंक खातों में 2.3 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि जमा हुई है और इसके परिणामस्वरूप 36 करोड़ से अधिक मुफ्त रुपे कार्ड जारी किए गए हैं, जिन पर 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर भी मिलता है। मार्च 2015 में पीएमजेडीवाई खातों की कुल संख्या 14.7 करोड़ थी, जिसमें 15,670 करोड़ रुपये जमा थे, जो जमा राशि बढ़कर 53 करोड़ हो गई है, जिसमें कुल शेष राशि 2.31 लाख करोड़ रुपये है। बैंक खातों की संख्या और जमा राशि में वृद्धि इस योजना की वित्तीय समावेशन और आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है।
वित्त मंत्री सीतारमण के अनुसार, भारत की ग्रामीण आबादी को पहले एक ऐसी व्यवस्था ने छोड़ दिया था जो “वित्तीय समावेशन” की बातें तो करती थी, लेकिन वास्तव में गरीबों तक ऋण पहुंच का विस्तार करने में बाधाएं खड़ी करती थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व ने ग्रामीण गरीबों को वित्तीय प्रणाली में लाने और उनकी क्षमता को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने के लिए कई प्रो-पुअर सुधारों और कल्याणकारी नीतियों को लागू किया है, जबकि विपक्ष ने प्रगति को अवरुद्ध किया।
आरबीआई ने हाल ही में कहा कि चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2025) की दूसरी तिमाही में घरेलू खपत में तेजी से वृद्धि होने की संभावना है, क्योंकि मुख्य मुद्रास्फीति में कमी आ रही है और ग्रामीण मांग में पहले से ही सुधार हो रहा है।
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चुनावी बॉन्ड की आड़ में जबरन वसूली
इस मामले में सह-आरोपी कर्नाटक भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष नलिन कुमार कटील के खिलाफ दर्ज एफआईआर में आगे की जांच पर रोक लगा दी गई है। उनपर आरोप है कि उन्होंने चुनावी बॉन्ड की आड़ में जबरन वसूली की थी। इस मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी।
एफआईआर में किस-किसके नाम शामिल?
एक विशेष अदालत के आदेश के आधार पर सीतारमण, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। भाजपा कर्नाटक प्रमुख बी वाई विजयेंद्र, पार्टी नेता नलिन कुमार कटील का भी एफआईआर में नाम है। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा कि प्रतिवादी द्वारा आपत्ति दर्ज किए जाने तक, प्रथम दृष्टया भी जांच की अनुमति देना, कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसलिए मैं अगली सुनवाई की तारीख तक मामले में आगे की जांच को रोकना उचित समझता हूं। इससे पहले शुक्रवार को बेंगलुरु की एक अदालत ने चुनावी बॉन्ड के माध्यम से कथित रूप से जबरन वसूली करने के लिए निर्मला सीतारमण और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।
8000 करोड़ रुपये से अधिक का लाभ
बता दें कि जनाधिकार संघर्ष परिषद' (जेएसपी) के सह-अध्यक्ष आदर्श आर अय्यर ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने चुनावी बॉन्ड की आड़ में जबरन वसूली की और 8000 करोड़ रुपये से अधिक का लाभ उठाया।शिकायतकर्ता ने आगे आरोप लगाया कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने ईडी अधिकारियों की गुप्त सहायता और समर्थन के माध्यम से राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर दूसरों के लाभ के लिए हजारों करोड़ रुपये की जबरन वसूली की।