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योगी सरकार ने वंदना को दिलाई थी ट्रेनिंग, चार साल पहले सॉफ्ट टॉयज का शुरू किया काम
झांसी का प्रतिष्ठित वैद्यनाथ समूह भी लेगा आईआईटीएफ में हिस्सा
झांसी से शजर सिल्वर ज्वैलरी बनाने वाली महाविद्या ई-कॉमर्स कंपनी भी आईआईटीएफ में लेगी हिस्सा
झांसी
प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देशन और उत्साहवर्धन ने उत्तर प्रदेश सहित देशभर के बहुत सारे उद्यमियों को आत्मनिर्भरता का रास्ता दिखाने के साथ ही उनके सपनों को भी पंख लगाया है। झांसी की वंदना चौधरी भी इसकी एक मिसाल हैं। वंदना ने ओडीओपी के तहत चार साल पहले प्रशिक्षण लेकर सॉफ्ट टॉयज का काम शुरू किया था। देश के कई शहरों में अपने ओडीओपी उत्पाद को प्रदर्शित कर चुकी वंदना अब 14 नवंबर से नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू होने जा रहे इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाएंगी। वंदना के अलावा झांसी का प्रतिष्ठित वैद्यनाथ समूह और महाविद्या ई कॉमर्स भी इस ट्रेड फेयर में हिस्सा लेगा।
आर्थिक और समाजिक रूप से वंचित तबके से ताल्लुक रखने वाली वंदना चौधरी ने 2021 में ओडीओपी के अंतर्गत उद्योग विभाग के माध्यम से सॉफ्ट टॉयज बनाने का प्रशिक्षण हासिल किया। वंदना को इस प्रशिक्षण के बाद एक सिलाई मशीन निःशुल्क प्रदान की गयी। इसके बाद वंदना ने सॉफ्ट टॉयज बनाने और बेचने का काम शुरू किया, जिससे आजीविका की स्थिति बेहतर हुई। प्रयागराज, हरिद्वार सहित कई स्थानों पर आयोजित प्रदर्शनी में वंदना ने अपने द्वारा बनाए गए सॉफ्ट टॉयज का प्रदर्शन किया। वंदना अब अपने सॉफ्ट टॉयज को इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में प्रदर्शित करने जा रही हैं।
झांसी से वंदना के सॉफ्ट टॉयज के अलावा अन्य उद्यमियों की भी इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में भागीदारी रहेगी। आयुर्वेद के प्रतिष्ठित समूह वैद्यनाथ, शजर सिल्वर ज्वैलरी बनाने वाले महाविद्या ई-कॉमर्स की भी इस ट्रेड शो में हिस्सेदारी रहेगी। झांसी के उपायुक्त उद्योग मनीष चौधरी ने बताया कि इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में झांसी के उद्यमियों की भागीदारी रहेगी।
]]>लखनऊ
उत्तर प्रदेश सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना ने न केवल राज्य के पारंपरिक उद्योगों को नई जान फूंकी है, बल्कि हजारों कारीगरों, किसानों और छोटे उद्यमियों की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया है। 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई यह योजना अब 75 जिलों में 74 उत्पादों को कवर कर रही है, और इसके तहत अब तक 40 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिल चुका है। निर्यात में 76% की वृद्धि हो चुकी है, जो ₹2 लाख करोड़ को पार कर गया है। लेकिन ODOP की असली ताकत तो उसके लाभार्थियों की प्रेरणादायक कहानियों में छिपी है। आइए, विस्तार से जानें कैसे यह योजना साधारण लोगों को उद्यमी बना रही है, और कैसे योगी सरकार का यह कदम लाखों परिवारों का सहारा बन गया है।
ODOP की सफलता: आंकड़ों से परे, जिंदगियों का बदलाव
ODOP ने उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ सामाजिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दिया है। योजना के तहत 80,000 से अधिक कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण दिया गया, ₹50,000 से ₹5 लाख तक के बिना गारंटी ऋण वितरित किए गए, और GI टैग प्राप्त 15 उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहचान मिली। लेकिन ये आंकड़े सिर्फ संख्याएं नहीं – ये उन कारीगरों की कहानियां हैं जो कभी बाजार की मार झेलते थे, आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चमक रहे हैं। योजना ने महिलाओं और ग्रामीण युवाओं को विशेष रूप से सशक्त किया, जिससे पलायन रुक गया और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। अब ODOP उत्पाद अमेज़न, फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म पर बिक रहे हैं, और G20 जैसे वैश्विक आयोजनों में उपहार के रूप में भेजे जा रहे हैं।
सफलता की प्रेरक कहानियां: कारीगरों की यात्रा से प्रेरणा
ODOP की सफलता लाखों कहानियों में बिखरी हुई है। यहां कुछ चुनिंदा उदाहरण हैं, जो दर्शाते हैं कि कैसे योजना ने लोगों की किस्मत पलट दी:
1. झांसी की सॉफ्ट टॉयज क्रांति: रानी लक्ष्मीबाई की धरती पर खिलौनों का साम्राज्य झांसी जिले का ODOP उत्पाद सॉफ्ट टॉयज है, जो भारतीय खिलौना उद्योग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्थानीय कारीगर शिवानी शर्मा (28 वर्ष) की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। एक साधारण सिलाई मशीन पर घर से काम करने वाली शिवानी को ODOP के तहत ₹2 लाख का ऋण और 45-दिवसीय डिजाइन ट्रेनिंग मिली। पहले उनकी मासिक आय ₹5,000 थी, लेकिन आज वे 'झांसी क्राफ्ट टॉयज' ब्रांड के तहत 20 महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। मासिक टर्नओवर ₹3 लाख हो गया है, और उनके उत्पाद दिल्ली के क्राफ्ट म्यूजियम में बिक रहे हैं। "ODOP ने मुझे सिर्फ पैसा नहीं, आत्मविश्वास दिया। अब मेरी बेटी भी इसी व्यवसाय में हाथ बंटाएगी," शिवानी बताती हैं। योजना ने झांसी में 500+ कारीगरों को जोड़ा, जिससे जिले का खिलौना निर्यात 40% बढ़ा।
2. देवरिया की बांस उत्पाद: पूजा शाही की 'ग्रीन क्राफ्ट' कंपनी – पर्यावरण और रोजगार का संगम देवरिया का ODOP उत्पाद बांस से बने हस्तशिल्प (जैसे थ्रेड्स, कैरी बैग्स और ऑर्गेनिक कंपोस्ट) है। पूजा शाही (32 वर्ष), एक ग्रामीण महिला उद्यमी, ने ODOP के तहत ₹3 लाख सब्सिडी प्राप्त की और देवरिया डिजाइनर प्राइवेट लिमिटेड शुरू की। पहले वे खेतों में मजदूरी करती थीं, आय ₹4,000 मासिक। अब उनकी कंपनी 30 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर मासिक ₹8 लाख का कारोबार कर रही है। उत्पाद फ्लिपकार्ट पर बिकते हैं, और पर्यावरण-अनुकूल होने से अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर आ रहे हैं। पूजा कहती हैं, "ODOP ने बांस को कचरा से खजाने में बदल दिया। अब मेरा गांव आत्मनिर्भर है।" यह कहानी योजना की सस्टेनेबल डेवलपमेंट को दर्शाती है, जहां 200+ परिवार लाभान्वित हुए।
3. हार्दोई का हथकरघा जादू: इकबाल हुसैन – बुनकर से निर्यातक तक हार्दोई का ODOP उत्पाद हथकरघा वस्त्र (कुर्ता-पजामा) है। इकबाल हुसैन (45 वर्ष) एक पारंपरिक बुनकर थे, जिनकी दुकान बाजार की कमी से बंद होने को थी। ODOP ने उन्हें ₹10 लाख ऋण और मार्केटिंग सपोर्ट दिया। आज वे 50 बुनकरों की टीम के साथ मासिक ₹15 लाख का टर्नओवर कर रहे हैं। उनके उत्पाद ODOP मार्ट पोर्टल पर उपलब्ध हैं, और यूरोप में निर्यात हो रहा है। "पहले चीनी कपड़ों से हम हार जाते थे, अब ODOP ने हमें ब्रांड बना दिया," इकबाल कहते हैं। हार्दोई में योजना से 1,000+ नौकरियां पैदा हुईं।
4. मुरादाबाद का पीतल शिल्प: कारीगरों का वैश्विक बाजार मुरादाबाद का ODOP उत्पाद पीतल के हस्तशिल्प है। मोहम्मद शाहिद (38 वर्ष) ने ODOP के कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) से मशीनरी सब्सिडी ली। पहले उनकी आय ₹6,000 मासिक थी, अब 25 कारीगरों को रोजगार देकर ₹20 लाख वार्षिक कमाते हैं। उनके उत्पाद G20 समिट में उपहार बने। योजना ने मुरादाबाद के पीतल निर्यात को दोगुना कर दिया।
5. सिद्धार्थनगर का कलानामक चावल: किसानों की सुनहरी फसल सिद्धार्थनगर का ODOP उत्पाद कलानामक चावल (GI टैग प्राप्त) है। रामप्रसाद यादव (50 वर्ष), एक किसान, ने ODOP ट्रेनिंग से जैविक खेती सीखी और ₹1.5 लाख ऋण से प्रोसेसिंग यूनिट लगाई। पहले फसल बर्बाद हो जाती थी, अब मासिक ₹2 लाख कमाते हैं। 100+ किसान जुड़े, और चावल राष्ट्रीय बाजार में बिक रहा है।
6. गोरखपुर की टेराकोटा: स्थानीय कला का पुनरुत्थान गोरखपुर का ODOP उत्पाद टेराकोटा है। सीता देवी (42 वर्ष) ने योजना से ₹75,000 टूलकिट प्राप्त की। अब वे 15 महिलाओं को प्रशिक्षित कर रही हैं, मासिक आय ₹1 लाख। उनके उत्पाद पर्यटन स्थलों पर बिकते हैं।
7. मुजफ्फरनगर का गुड़ पाउडर: माधुरमीठास ब्रांड की मिठास मुजफ्फरनगर का ODOP उत्पाद रासायनिक-मुक्त गुड़ पाउडर है। माधुरमीठास ब्रांड की संस्थापक अंजली वर्मा ने ODOP से मार्केटिंग सहायता ली। अब राष्ट्रीय स्तर पर बिक्री हो रही है, और 50 किसानों को लाभ।
ये कहानियां साबित करती हैं कि ODOP ने न केवल आय बढ़ाई, बल्कि महिलाओं को सशक्त किया और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रेरक उद्गार: ODOP को आत्मनिर्भरता का आधार
मुख्यमंत्री योगी ने ODOP को बार-बार 'आत्मनिर्भर भारत' का आधार बताया है। 24 जनवरी 2024 को उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस पर अवध शिल्पग्राम में बोलते हुए उन्होंने कहा, "पहले निर्यात ₹86,000 करोड़ था, ODOP ने इसे ₹2 लाख करोड़ कर दिया। चीनी नकली उत्पादों की जगह अब ODOP उत्पाद बाजार में हैं।" 8 फरवरी 2024 को CFC उद्घाटन पर: "ODOP ने पारंपरिक उद्योगों को बाजार में प्रवेश दिलाया। यह आत्मनिर्भर भारत का आधार स्तंभ है।" 21 सितंबर 2025 को 'सेवा पखवाड़ा' में: "ODOP ने MSME में 2 करोड़ नौकरियां पैदा कीं, जो पलायन रोकने का माध्यम है।" इन भाषणों से स्पष्ट है कि योगी जी की दृष्टि ने योजना को जन आंदोलन बना दिया।
भाजपा सरकार का सराहनीय कदम: लाखों लाभार्थी, राष्ट्रीय प्रेरणा
भाजपा सरकार की ODOP योजना ने लाखों लोगों को सीधा लाभ पहुंचाया – ऋण, ट्रेनिंग और बाजार से। यह 'वोकल फॉर लोकल' का साकार रूप है, जो अन्य राज्यों के लिए मॉडल बनी। पारदर्शी वितरण और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने भ्रष्टाचार रोका, और GI टैगिंग ने विरासत को संरक्षित किया।
निष्कर्ष: ODOP – सपनों का बाजार, सफलता की कहानी
ODOP की ये सफलता कहानियां उत्तर प्रदेश की नारी शक्ति, युवा ऊर्जा और कारीगरी की ताकत दर्शाती हैं। योगी सरकार ने साबित किया कि सही नीतियां जिंदगियां बदल सकती हैं। आइए, हम सब 'लोकल को ग्लोबल' बनाएं। अधिक जानकारी के लिए odopup.in पर जाएं।
]]>निवेश और क्रेडिट का माहौल लगातार बेहतर, ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों तक पहुंच रहीं बैंकिंग सेवाएं
लखनऊ
उत्तर प्रदेश की बैंकिंग व्यवस्था में लगातार सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वित्तीय समावेशन की नीति और सरकारी योजनाओं को बैंकों से जोड़ने की रणनीति ने आमजन का विश्वास बैंकिंग व्यवस्था पर और मजबूत किया है। इसके चलते शहरों के साथ-साथ कस्बों और गांवों तक बैंकों का नेटवर्क मजबूत हुआ है। साथ ही, बैंकों का सीडी रेशियो भी बेहतर हुआ है। जून 2025 के आंकड़ों में इसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जो प्रदेश की आर्थिक मजबूती और बैंकिंग गतिविधियों में आई तेजी को साफ दर्शाते हैं।
जमा और ऋण वितरण में उल्लेखनीय वृद्धि
जून 2025 तक राज्य में बैंकों की जमा राशि ₹1.86 लाख करोड़ वृद्धि के साथ 19.39 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। जून 2024 की तुलना में यह 10.60% की वार्षिक वृद्धि रही। वहीं, ऋण वितरण के आंकड़े में ₹0.93 लाख करोड़ (8.79%) की वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई है। जून 2025 में यह कुल 11.45 लाख करोड़ रुपए रहा। यह इस बात का प्रमाण है कि राज्य में निवेश और क्रेडिट का माहौल लगातार बेहतर हो रहा है।
सीडी रेशियो में सुधार का संकेत
प्रदेश का सीडी रेशियो मार्च 2025 में 59.04% था, जो जून 2025 में मामूली बढ़त के साथ 59.05% पर स्थिर रहा। यह स्थिरता संतुलित बैंकिंग व्यवस्था का संकेत देती है। वहीं, जिलावार आंकड़े दर्शाते हैं कि कई जिलों में सीडी रेशियो में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 80% से अधिक सीडी रेशियो वाले जिलों की संख्या बढ़ रही है, जबकि 40% से कम सीडी रेशियो वाले जिलों की संख्या घटकर केवल 6 रह गई है।
ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में बढ़ा विस्तार
2014 की तुलना में अब अधिक जिलों में बैंकिंग गतिविधियां विस्तृत हुई हैं। 60% से 80% के बीच सीडी रेशियो वाले जिलों की संख्या 21 तक पहुंच गई है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में भी बैंकिंग सेवाओं का जाल फैला है और स्थानीय क्रेडिट जरूरतों की पूर्ति हो रही है।
सरकार और बैंकों के समन्वय का नतीजा
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव केवल सरकारी प्रयासों और बैंकिंग संस्थानों के मजबूत समन्वय से संभव हो पाया है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, स्टार्टअप इंडिया से वित्तीय सहयोग, ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) अभियान और डिजिटलीकरण की पहल ने बैंकिंग प्रणाली को मजबूती दी है। परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश न केवल कृषि प्रधान राज्य, बल्कि आर्थिक और वित्तीय रूप से भी सशक्त राज्य के रूप में उभर रहा है।