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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में फिर से अफीम की खेती का मामला सामने आया है। जिले में दूसरी बार अवैध रुप से अफीम की खेती की जानकारी सामने आई है। अफीम की खेती की जानकारी मिलते ही प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और खेत को सील कर दिया। करीब 50 डिसमिल में अफीम की खेती की जा रही है थी। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने अफीम की खेती का वीडियो सोशल मीडिया में शेयर किया है।
जानकारी के अनुसार, लैलूंगा थाना क्षेत्र में 50 डिसमिल में अफीम की खेती की जा रही थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। जबकि तीसरा मौके से फरार हो गया। पुलिस के खेत में पहुंचते ही मौके से भागने की कोशिश कर रहे थे लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर जगतराम नाग और मनोज नाग को गिरफ्तार किया है। जबकि साधराम नाग मौके से फरार हो गया।
लोकल व्यापारी से लिए थे बीज
सोमवार पुलिस को सूचना मिली थी कि लैलूंगा थाना क्षेत्र के पास अफीम की खेती हो रही है। जिसके बाद पुलिस की टीम यहां पहुंची थी। पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि उन्होंने अफीम की खेती करने के लिए बीज पत्थलगांव के एक लोकल कारोबारी से लिए थे। पुलिस अधिकारियों ने उस कारोबारी के तलाश की बात कही है।
23 मार्च को तमनार में पकड़ी गई थी खेती
दो दिन पहले तमनार ब्लॉक के आमाघाट क्षेत्र में भी अफीम की खेती का मामला सामने आया था। जानकारी के अनुसार, झारखंड का रहने वाला मार्शल सांगा यहां 10-12 साल से खेती कर रहा था। उसने आमाघाट के किसान से तरबूज, ककड़ी उगाने के लिए खेत लिया था।
तमनार में भी पकड़ी गई थी अफीम की खेती
इससे पहले तमनार ब्लॉक के आमाघाट क्षेत्र में भी अफीम की खेती का मामला सामने आया था। जानकारी के मुताबिक, झारखंड का रहने वाला एक व्यक्ति, मार्शल सांगा, पिछले 10–12 वर्षों से यहां अफीम की खेती कर रहा था। उसने एक किसान से तरबूज और ककड़ी उगाने के लिए खेत लिया था, लेकिन उसकी देखरेख में अफीम की खेती शुरू हुई। मार्शल सांगा, जो पहले झारखंड में भी अफीम की खेती करता था, ने उसी मॉडल को रायगढ़ में अपनाया।
गांववालों में आक्रोश
घटना के बाद घटगांव क्षेत्र के लोग हैरान और परेशान हैं, क्योंकि अफीम की खेती जिस इलाके में की जा रही थी, वहां से एक सशक्त सब्जी की बाड़ी का प्रचार हुआ था। लोग इस अवैध गतिविधि के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हुए पुलिस से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
भूपेश बघेल ने बोला हमला
इस मामले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा- "रायगढ़ ज़िले के लैलूंगा ब्लॉक के नवीन घट गांव में एक या दो नहीं बल्कि तीन अलग-अलग खेतों में अफीम पाई गई है। अब तो ऐसा लग रहा है कि भाजपा को अपना चुनाव निशान बदलकर “कमल के फूल” की जगह पर “अफ़ीम का फूल” कर लेना चाहिए।'
मार्च के महीने में 5वां मामला
छत्तीसगढ़ में मार्च के महीने में अफीम की खेती का यह 5वां मामला है। सबसे पहले दुर्ग जिले के सिमोदा गांव में अफीम की खेती का मामला सामने आया था। यह खेती बीजेपी नेता ताम्रकार कर रहा था। उसके बाद बलरामपुर जिले के दो थाना क्षेत्रों में अफीम की फसल मिली थी। अब रायगढ़ के आमाघाट क्षेत्र के बाद लैलूंगा थाना क्षेत्र में अफीम की खेती का मामला सामने आया है।
जानकारी के अनुसार, लैलूंगा थाना क्षेत्र में 50 डिसमिल में अफीम की खेती की जा रही थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। जबकि तीसरा मौके से फरार हो गया। पुलिस के खेत में पहुंचते ही मौके से भागने की कोशिश कर रहे थे लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर जगतराम नाग और मनोज नाग को गिरफ्तार किया है। जबकि साधराम नाग मौके से फरार हो गया।
लोकल व्यापारी से लिए थे बीज
सोमवार पुलिस को सूचना मिली थी कि लैलूंगा थाना क्षेत्र के पास अफीम की खेती हो रही है। जिसके बाद पुलिस की टीम यहां पहुंची थी। पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि उन्होंने अफीम की खेती करने के लिए बीज पत्थलगांव के एक लोकल कारोबारी से लिए थे। पुलिस अधिकारियों ने उस कारोबारी के तलाश की बात कही है।
23 मार्च को तमनार में पकड़ी गई थी खेती
दो दिन पहले तमनार ब्लॉक के आमाघाट क्षेत्र में भी अफीम की खेती का मामला सामने आया था। जानकारी के अनुसार, झारखंड का रहने वाला मार्शल सांगा यहां 10-12 साल से खेती कर रहा था। उसने आमाघाट के किसान से तरबूज, ककड़ी उगाने के लिए खेत लिया था।
तमनार में भी पकड़ी गई थी अफीम की खेती
इससे पहले तमनार ब्लॉक के आमाघाट क्षेत्र में भी अफीम की खेती का मामला सामने आया था। जानकारी के मुताबिक, झारखंड का रहने वाला एक व्यक्ति, मार्शल सांगा, पिछले 10–12 वर्षों से यहां अफीम की खेती कर रहा था। उसने एक किसान से तरबूज और ककड़ी उगाने के लिए खेत लिया था, लेकिन उसकी देखरेख में अफीम की खेती शुरू हुई। मार्शल सांगा, जो पहले झारखंड में भी अफीम की खेती करता था, ने उसी मॉडल को रायगढ़ में अपनाया।
गांववालों में आक्रोश
घटना के बाद घटगांव क्षेत्र के लोग हैरान और परेशान हैं, क्योंकि अफीम की खेती जिस इलाके में की जा रही थी, वहां से एक सशक्त सब्जी की बाड़ी का प्रचार हुआ था। लोग इस अवैध गतिविधि के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हुए पुलिस से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
भूपेश बघेल ने बोला हमला
इस मामले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा- "रायगढ़ ज़िले के लैलूंगा ब्लॉक के नवीन घट गांव में एक या दो नहीं बल्कि तीन अलग-अलग खेतों में अफीम पाई गई है। अब तो ऐसा लग रहा है कि भाजपा को अपना चुनाव निशान बदलकर “कमल के फूल” की जगह पर “अफ़ीम का फूल” कर लेना चाहिए।'
मार्च के महीने में 5वां मामला
छत्तीसगढ़ में मार्च के महीने में अफीम की खेती का यह 5वां मामला है। सबसे पहले दुर्ग जिले के सिमोदा गांव में अफीम की खेती का मामला सामने आया था। यह खेती बीजेपी नेता ताम्रकार कर रहा था। उसके बाद बलरामपुर जिले के दो थाना क्षेत्रों में अफीम की फसल मिली थी। अब रायगढ़ के आमाघाट क्षेत्र के बाद लैलूंगा थाना क्षेत्र में अफीम की खेती का मामला सामने आया है।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कोरंधा में पुलिस ने करीब ढाई एकड़ में लगी अफीम उखाड़कर जब्त की है। यहां से 285 बोरे अफीम के पौधे बरामद हुए, जिनका वजन 18 क्विंटल है। इनकी अनुमानित कीमत पौने दो करोड़ रुपए बताई जा रही है। मामला कोरंधा थाना क्षेत्र का है।
दरअसल, बुधवार शाम को खजूरी गांव में अफीम की खेती का पता चला था। गुरुवार को प्रशासनिक अधिकारियों और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में फसल उखाड़कर जब्त की गई। तीन ट्रैक्टरों में 285 बोरे अफीम को कोरंधा थाना लाया गया। इस मामले में अफीम की खेती करने वाले 2 किसानों को हिरासत में लिया गया है।
फिलहाल, हिरासत में लिए गए किसानों से पुलिस पूछताछ कर रही है। उनका कहना है कि वे अफीम को नहीं पहचानते थे। इस कारण उन्हें नहीं पता था कि यह गैर कानूनी है। जांच में सामने आया कि किसान ने हर साल 6 हजार रुपए देने की शर्त पर जमीन ली थी। बता दें कि कुसमी के बाद दूसरी बड़ी कार्रवाई है।
झारखंड के मजदूर करते थे पहरेदारी
अफीम की फसल दो किस्तों में बोई गई थी। इनमें सहादुर नगेशिया के खेत में लगी अफीम की फसल सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है, उसके खेत में लगे अफीम के डोडों पर छह से सात चीरे लगे हुए मिले, जिससे स्पष्ट है कि उनसे काफी मात्रा में अफीम निकाली जा चुकी थी।
टुईला राम के खेत में बोई गई अफीम की फसल में अभी डोडे लगे हुए हैं और कुछ पौधों में डोडे लग रहे हैं। कई डोडों में चीरा भी लगाया गया था और उनसे अफीम निकालने का काम किया जा रहा था। हालांकि, यहां से निकाली गई अफीम बरामद नहीं हो सकी है।
दोनों किसानों ने बताया कि झारखंड के चार से पांच लोग अफीम की पहरेदारी सहित अन्य काम करते थे। खेतों में काम भी वही लोग करते थे। पुलिस के पहुंचने से पहले ही वे मौके से फरार हो गए। किसानों का कहना है कि वे अफीम की फसल को पहचानते नहीं थे, इसलिए उन्हें यह भी पता नहीं था कि इसकी खेती गैरकानूनी है।
इसके अलावा अफीम की खेती के लिए पास के प्राकृतिक जल स्रोत से पानी खेतों तक पहुंचाया जाता था। इसके लिए पाइप लगाकर खेतों में सिंचाई की व्यवस्था की गई थी।
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