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पहलगाम आतंकी हमले की चार्जशीट ने उस खौफनाक साजिश की परतें खोल दी हैं, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में सामने आया है कि पहलगाम घूमने आए निर्दोष पर्यटकों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया. इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. शुरुआती जांच में ही पता चल गया था कि इस वारदात को लश्कर-ए-तैयबा के संगठन TRF यानी द रजिस्टेंस फ्रंट ने अंजाम दिया. हमले के कुछ ही देर बाद TRF ने इसकी जिम्मेदारी ली थी, लेकिन बाद में उसने अपने बयान से पलटते हुए इसे फॉल्स नैरेटिव बता दिया।
इस हमले की जांच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अनंतनाग के एडिशनल एसपी गुलाम हसन को सौंपी थी. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि हमले को तीन आतंकियों ने मिलकर अंजाम दिया था. इनमें फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी शामिल थे. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे इस पूरे हमले के मास्टरमाइंड का नाम भी सामने आया. जांच एजेंसियों ने बताया कि इस हमले की साजिश सज्जाद जट्ट उर्फ अली भाई ने रची थी, जो लंबे समय से आतंकी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था।
हमले के तुरंत बाद घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया और पुलिस व फॉरेंसिक टीमों ने घटनास्थल को अपने कब्जे में ले लिया. पूरे इलाके की घेराबंदी की गई और सबूत जुटाने का काम शुरू हुआ. मौके से हथियारों से जुड़े अहम सुराग, कारतूसों के खोखे और अन्य फॉरेंसिक सबूत बरामद किए गए. इसके साथ ही मृतकों के परिवार वालों और घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए. शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया था कि हमला पूरी प्लानिंग के साथ किया गया था।
30 अप्रैल को NIA ने पूरे इलाके में बड़े स्तर पर ग्रिड सर्च ऑपरेशन चलाया. इस अभियान में NIA, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स, सुरक्षा बलों और एंटी-सैबोटाज टीमों को शामिल किया गया. पूरे जंगल और आसपास के इलाकों को खंगाला गया. जांच एजेंसियों ने हर संभावित जगह से सबूत जुटाने की कोशिश की. इसके बाद CBI से उस लोकेशन की 3D मैपिंग कराई गई, जिसकी रिपोर्ट 7 मई को NIA को सौंप दी गई. इस मैपिंग से आतंकियों की मूवमेंट और हमले के एंगल को समझने में मदद मिली।
जांच के दौरान NIA ने स्थानीय लोगों से भी बड़े पैमाने पर पूछताछ की. दुकानदारों, पोनी वालों, ढोक में रहने वाले लोगों और टैक्सी ड्राइवरों समेत कुल 1,113 लोगों से सवाल-जवाब किए गए. यही पूछताछ बाद में जांच की सबसे अहम कड़ी साबित हुई. एक अज्ञात गवाह ने एजेंसी को बताया कि हमले से एक दिन पहले उसने बशीर अहमद जोठाड़ को तीन हथियारबंद लोगों के साथ देखा था. गवाह के मुताबिक, बशीर उन तीनों को परवेज के ढोक यानी झोपड़ी में लेकर गया था।
गवाह ने आगे बताया कि 22 मई की सुबह जब वह बैसरन पार्क गया, तब उसने वहां बशीर और परवेज दोनों को देखा था. कुछ घंटों बाद ही बैसरन में गोलीबारी की खबर आ गई. इसी गवाह ने जांच एजेंसियों को यह भी बताया कि बाद में आतंकियों ने उसे भी पकड़ लिया था और उससे कलमा पढ़ने को कहा था. जब उसने कलमा पढ़ दिया, तब जाकर आतंकियों ने उसे छोड़ा. इस बयान ने जांच एजेंसियों को यह यकीन दिलाया कि हमलावर धर्म के आधार पर लोगों को निशाना बना रहे थे।
गवाह से मिली जानकारी के बाद NIA ने कई जगहों पर छापेमारी की. जांच में कुछ और अहम सबूत हाथ लगे, जिसके बाद 22 जून को पोनी वाले बशीर अहमद और परवेज अहमद को गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ के दौरान परवेज अहमद ने उस रात की पूरी कहानी जांच एजेंसियों को बताई. उसने कहा कि 21 अप्रैल की शाम करीब 5 बजे वह अपनी पत्नी और छोटे बेटे के साथ ढोक में चाय पीने की तैयारी कर रहा था, तभी उसका मामा बशीर वहां पहुंचा और सबको चुप रहने के लिए कहा।
कुछ देर बाद बशीर बाहर गया और फिर तीन हथियारबंद लोगों के साथ लौटा. तीनों के हाथों में बंदूकें थीं और वे बेहद थके हुए लग रहे थे. उन्होंने पानी मांगा और अंदर बैठ गए. परवेज ने बताया कि उन लोगों ने कहा कि वे लंबा सफर तय करके आए हैं. इसके बाद उन्होंने अल्लाह के रास्ते में लड़ने वालों की मदद करने पर सवाब मिलने की बात कही. परवेज के मुताबिक, वे लगातार जिहाद और कश्मीर की आजादी की बातें कर रहे थे।
परवेज ने बताया कि उसकी पत्नी ताहिरा ने उन आतंकियों के लिए खाना बनाया था. खाना खाते समय आतंकी अमरनाथ यात्रा, सुरक्षा बलों की आवाजाही और इलाके में तैनाती के बारे में सवाल पूछ रहे थे. परवेज ने जांच एजेंसियों को बताया कि आतंकी उर्दू बोल रहे थे, लेकिन उनकी बोली में पंजाबी लहजा साफ महसूस हो रहा था. आपस में भी वे पंजाबी में ही बात कर रहे थे. परवेज की पत्नी ताहिरा ने भी जांच के दौरान यही बयान दिया।
जांच एजेंसियों ने बाद में बशीर अहमद जोठाड़ से भी पूछताछ की. उसने बताया कि हमले से एक दिन पहले वह अपने घोड़े को देखने जंगल की तरफ गया था. तभी अचानक पेड़ों के पीछे से तीन हथियारबंद लोग उसके सामने आ गए. उनके हाथों में बंदूकें थीं. उन्होंने बशीर से कहा कि उन्हें किसी सुरक्षित जगह पर ले जाया जाए और खाने का इंतजाम किया जाए. बशीर ने बताया कि उसे तुरंत समझ आ गया था कि वे मुजाहिद हैं।
बशीर ने जांच एजेंसियों को बताया कि आतंकियों ने अपने बैग और पाउच उसे छिपाने के लिए दिए थे. बाद में उन सामानों को परवेज ने कंबलों के नीचे छिपा दिया था. तीनों आतंकी करीब पांच घंटे तक ढोक में रुके रहे. रात करीब 10 बजे वे एक-एक करके वहां से निकल गए. जाते समय छोटे कद वाले आतंकी ने परवेज को 3000 रुपये भी दिए. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह रकम मदद के बदले दी गई थी।
दोनों आरोपियों से पूछताछ में कई अहम राज सामने आए. इसके बाद 28 जून को बशीर अहमद के ढोक, परवेज अहमद के ढोक और बैसरन मार्गूजा इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया. जांच एजेंसियों ने वहां से कई संदिग्ध चीजें बरामद कीं. हालांकि पूछताछ के दौरान NIA को लगा कि दोनों कुछ अहम बातें छिपा रहे हैं. इसी वजह से 9 जुलाई को एजेंसी ने दोनों का नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की अनुमति मांगी, लेकिन 29 अगस्त को कोर्ट ने यह अर्जी खारिज कर दी।
चार्जशीट में हमले के तरीके का भी बेहद डरावना खुलासा हुआ है. गवाहों के मुताबिक, तीनों आतंकी हथियारों के साथ ब्रेडांगन की तरफ से बैसरन पार्क पहुंचे थे. पार्क में दाखिल होने से पहले वे एक पेड़ के नीचे बैठे और खाना खाया. इसके बाद उन्होंने अपने बैग से कंबल निकाले और खुद को ढक लिया. फिर दो आतंकी पार्क के अंदर हालात देखने गए और कुछ देर बाद वापस लौट आए. इसके बाद तीनों ने अपना सामान एक जगह छोड़ा और हमले की पोजिशन लेने आगे बढ़ गए।
चार्जशीट के मुताबिक, दो आतंकी पार्क के मेन गेट और ढाबों की तरफ बढ़े, जबकि तीसरा आतंकी जिपलाइन वाले हिस्से की तरफ चला गया. उन्होंने ऐसी जगहें चुनीं, जहां से पूरे पार्क को चारों तरफ से निशाना बनाया जा सके. हबीब ताहिर और हमजा अफगानी ढाबों के पास आम लोगों की तरह बैठ गए, जबकि उनमें से एक आतंकी हथियार के साथ पीछे छिपकर निगरानी करता रहा. दूसरी ओर सुलेमान जिपलाइन वाले हिस्से में पहुंच गया, जहां बाद में कारतूसों के खोखे भी मिले थे।
गवाहों ने बताया कि आतंकियों ने लोगों से पहले उनका धर्म पूछा. वे हर शख्स से पूछ रहे थे कि वह हिंदू है या मुसलमान. कई लोगों से कलमा पढ़ने को कहा गया. जो लोग कलमा नहीं पढ़ पाए या जिन्होंने खुद को मुसलमान नहीं बताया, उन्हें बेहद करीब से गोली मार दी गई. इस दौरान आतंकी बार-बार कहते रहे- मोदी को बोलो. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह हमला सिर्फ हत्या नहीं बल्कि एक सुनियोजित आतंकी संदेश भी था।
चार्जशीट के मुताबिक, दोपहर 2 बजकर 23 मिनट पर पहली गोली जिपलाइन वाले हिस्से से सुलेमान ने अपनी M-4 कार्बाइन से चलाई. इसके तुरंत बाद बाकी दोनों आतंकियों ने AK-47 से फायरिंग शुरू कर दी. जिपलाइन और ढाबों की तरफ से हुई गोलीबारी ने पार्क के बीचों-बीच मौजूद मैदान को मौत के मैदान में बदल दिया. चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे. हमलावर लगातार गोलियां बरसाते रहे।
जांच में यह भी सामने आया कि हमला करने के बाद भागते समय आतंकियों ने एक गवाह को रोका और उससे फिर कलमा पढ़ने को कहा. जब उसने कलमा पढ़ दिया तो उसे छोड़ दिया गया. बाद में जांच एजेंसियों को पार्क से बाहर निकलने वाले रास्ते पर चार और खाली कारतूस मिले. एजेंसियों का मानना है कि ये फायरिंग आतंकियों ने हमला करने के बाद खुशी मनाने के लिए की थी. चार्जशीट में कहा गया है कि इससे साफ साबित होता है कि आतंकियों को अपने किए पर जरा सा भी पछतावा नहीं था।
]]>22 अप्रैल 2025 का दिन जम्मू-कश्मीर के लिए किसी बुरे ख्वाब से कम नहीं था. यहां पहलगाम स्थित बैसरन घाटी (Baisaran Valley) में हुए घातक आतंकी हमले ने पूरे कश्मीर घाटी को झकझोर दिया था. ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहलाने वाली इस खूबसूरत घाटी में आतंकियों ने पर्यटकों का धर्म पूछकर उन्हें गोलियों से भून डाला था. इस नृशंस आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर हिंदू पर्यटक थे. इस हमले ने न सिर्फ मानवीय क्षति पहुंचाई, बल्कि पहलगाम के पर्यटन उद्योग को बुरी तरह चोट पहुंचाई. पर्यटन उद्योग ठप पड़ गया था, दुकानें बंद हो गई थीं और स्थानीय कारीगरों-दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया था. लेकिन ठीक एक साल बाद पहलगाम के घाव भरने लगे हैं. इस वसंत में पर्यटकों की रौनक लौट आई है. हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट की दुकानों पर फिर भीड़ उमड़ रही है. पर्यटक कश्मीरी शॉल, कालीन, पशमीना, कढ़ाई वाले सूट, काठ की नक्काशीदार वस्तुएं और सेब की लकड़ी से बने सामान खरीद रहे हैं. स्थानीय दुकानदारों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है और कमाई भी पहले जैसी होने लगी है।
पहलगाम के मुख्य बाजार लिद्दर बाजार, मलिक बाजार और चंदनवाड़ी रोड पर इन दिनों सुबह से शाम तक चहल-पहल है. दुकानों पर फिर से भीड़ दिखने लगी है. पर्यटक बसों और प्राइवेट गाड़ियों से उतरते ही दुकानों की ओर बढ़ रहे हैं. कई दुकानें सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक खुली रह रही हैं।
हम साथ देने आए हैं…
इंदौर के रहने वाले फखरुद्दीन अपने परिवार के साथ पहली बार पहलगाम घूमने आए है. वह यहां की सुंदरता और लोगों की मेहमाननवाजी को देखकर कहते हैं, ‘हमने जम्मू-कश्मीर के बारे में बहुत नकारात्मक बातें सुनी थीं, लेकिन यहां आकर हमारा अनुभव बिल्कुल उल्टा है. लोग बेहद मिलनसार हैं और यहां के हस्तशिल्प अद्भुत हैं. हम कश्मीरी शॉल, पशमीना और हाथों से बने सामान खरीद रहे हैं ताकि स्थानीय समुदाय को सपोर्ट मिल सके।
फखरुद्दीन ने बताया कि उनकी पत्नी और बेटी ने कई पशमीना शॉल, सूट पीस और कालीन खरीदे. वह कहते हैं, ‘हमने सोचा था कि सुरक्षा की वजह से यहां घूमना मुश्किल होगा, लेकिन हर जगह सुरक्षा बल तैनात हैं और वातावरण पूरी तरह शांतिपूर्ण है।
बैसरन घाटी का वह काला दिन
पिछले साल 22 अप्रैल को दोपहर करीब 1 से 2 बजे के बीच बैसरन घाटी में हथियारबंद आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला बोल दिया. घनी देवदार के जंगलों से घिरी इस घाटी में पर्यटक घोड़े की सवारी या पैदल घूम रहे थे. आतंकियों ने M4 कार्बाइन और AK-47 से अंधाधुंध फायरिंग की. उन्होंने पुरुषों से उनकी धार्मिक पहचान पूछी और गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाया. इस हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय घोड़ा चालक शहीद हुए।
हमले के बाद पूरे कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई. कई पर्यटन स्थल अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए. पहलगाम की हैंडलूम-हैंडीक्राफ्ट दुकानों पर ताला लग गया. कारीगर परिवार महीनों बिना कमाई के गुजारा करते रहे. पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अप्रैल-मई में पर्यटकों की संख्या में 80 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई।
कश्मीर में लौट रही रौनक
2026 के वसंत में हालात अब बदल रहे हैं. मार्च के अंत से अप्रैल के पहले दो सप्ताह में पहलगाम में रोजाना 800 से 1200 पर्यटक पहुंच रहे हैं. बैसरन घाटी सहित आसपास के कई पर्यटन स्थल फिर से खुल रहे हैं. जम्मू-कश्मीर सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘Kashmir Travel Mart 2026’ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिसमें हस्तशिल्प को विशेष जगह दी गई है।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं. पहलगाम में अतिरिक्त सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है. पर्यटक बसों और वाहनों की सुरक्षा के लिए स्पेशल एस्कॉर्ट व्यवस्था की गई है. साथ ही ‘एक्सपीरियंस कश्मीर’ अभियान के तहत सोशल मीडिया पर सकारात्मक रुख बढ़ाया जा रहा है।
पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल 2026 में अब तक पिछले साल की तुलना में 65 प्रतिशत ज्यादा पर्यटक कश्मीर घाटी आए हैं. पहलगाम के अलावा गुलमर्ग, सोनमर्ग, गांदेरबल और डल झील क्षेत्र भी पर्यटकों से गुलजार हैं।
पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जख्म अब भर रहा है. आतंकी हमले की यादें अभी भी ताजा हैं, लेकिन पर्यटकों की वापसी ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई जान दी है. फखरुद्दीन जैसे परिवार दिखाते हैं कि पर्यटक अब सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय को सपोर्ट करने भी आ रहे हैं।
]]>नजाकत शाह का ग्रैंड वेलकम
पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश में गुस्से की लहर दौड़ गई। फिर भारतीय सेना ने पाकिस्तान में बैठे आतंकियों को ऑपरेशन सिंदूर से सबक सिखाया। पहलगाम हमले के पीड़ित और प्रत्यक्षदर्शी आज भी उस घटना को याद कर सिहर उठते हैं। इस बुरे वक्त में दोस्ती के रिश्ते भी बने। सर्दियों में कंबल का कारोबार करने वाले नजाकत अहमद शाह हर साल की तरह गुरुवार को चिरमिरी पहुंचे। इस बार नजाकत अहमद के लिए यह यात्रा यादगार बन गई। चिरमिरी पहुंचते ही अरविंद अग्रवाल समेत इलाके लोग 50 लोग उनके स्वागत के लिए पहुंचे। सभी ने नजाकत को माला पहनाकर सम्मानित किया। उन्होंने अग्रवाल परिवार के साथ लंच पर वक्त बिताया और अपनी यादें साझा कीं।
अरविंद अग्रवाल की बचाई थी जान
अरविंद अग्रवाल ने पहलगाम हमले को याद करते हुए बताया कि जब आतंकियों ने गोलीबारी शुरू की, तब नजाकत अहमद शाह ने उन्हें बचा लिया। उस समय उनकी पत्नी और चार साल की बेटी थोड़ी दूर थीं। नजाकत ने सबको नीचे बैठने को कहा, फिर मेरी बेटी और मेरे दोस्त के बेटे को गले लगा लिया, जिससे उनकी जान बच गई। नजाकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले गए और वापस मेरी पत्नी को बचाने के लिए दौड़े। हम कभी नजाकत के एहसान को नहीं भूल सकते हैं। नजाकत अहमद शाह ने बताया कि उनका परिवार सालों से छत्तीसगढ़ में कपड़े बेचने आता रहा है। मुझे बहुत खुशी हुई कि पहलगाम से लौटने के बाद भी अग्रवाल परिवार उनसे फोन पर संपर्क में रहा। अब उनसे मिलकर बहुत अच्छा लग रहा है। शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ हमारे लिए घर जैसा है और हम हर साल तीन महीने व्यापार के लिए यहां आते हैं।
आतिशबाजी से स्वागत
नजाकत अहमद शाह जब अरविंद अग्रवाल के घर पहुंचे तो उनका ग्रैंड वेलकम हुआ। अरविंद अग्रवाल के घर पहुंचते ही बीजेपी नेता ने पहले गुलदस्ता देकर स्वागत किया। फिर आतिशबाजी की गई। इस स्वागत से नजाकत अहमद शाह भी गदगद थे।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक अहम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की जिम्मेदारी ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने दो बार ली थी और हमले की साइट की तस्वीरें भी जारी की थीं. यह हमला 22 अप्रैल 2025 को हुआ था, जिसमें आतंकियों ने 26 पर्यटकों की जान ले ली थी.
यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र की 1267 इस्लामिक स्टेट (दाएश) और अल-कायदा प्रतिबंध समिति को सौंपी गई 36वीं सहायता और निगरानी टीम की रिपोर्ट में दी गई है. रिपोर्ट में कहा गया कि पांच आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम में हमला किया था. उसी दिन टीआरएफ ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी और साथ ही हमले की जगह की एक तस्वीर भी प्रकाशित की गई थी. अगले दिन एक बार फिर टीआरएफ ने जिम्मेदारी दोहराई, लेकिन 26 अप्रैल को उसने अपना दावा वापस ले लिया और इसके बाद समूह की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया.
‘लश्कर की मदद के बिना नहीं हो सकता था पहलगाम हमला’
रिपोर्ट के मुताबिक, एक सदस्य देश ने कहा है कि यह हमला पाकिस्तान-आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) की मदद के बिना संभव नहीं था. वहीं एक अन्य सदस्य देश ने टीआरएफ और लश्कर को एक ही संगठन करार दिया है. हालांकि, एक सदस्य देश ने इस बात को नकारते हुए लश्कर को ‘अब सक्रिय नहीं’ बताया है.
संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका ने टीआरएफ को विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) और वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित कर दिया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि क्षेत्रीय संबंध काफी संवेदनशील स्थिति में हैं और आतंकी संगठन इन तनावों का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं.
पाकिस्तान के दबाव से हटा था TRF का नाम
गौरतलब है कि पहलगाम हमले के बाद 25 अप्रैल को सुरक्षा परिषद ने एक प्रेस बयान जारी कर दोषियों को सजा दिलाने की मांग की थी, लेकिन टीआरएफ का नाम उस बयान में नहीं था. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में बताया कि पाकिस्तान के दबाव में टीआरएफ का नाम उस प्रेस बयान से हटवा दिया गया. भारत ने हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया गया.
रिपोर्ट में इस्लामिक स्टेट के खुरासान मॉड्यूल को दक्षिण एशिया और मध्य एशिया में सबसे बड़ा खतरा बताया गया है. ISIL-K के पास करीब 2,000 लड़ाके हैं और यह संगठन अफगानिस्तान और पड़ोसी देशों में बच्चों तक को आत्मघाती हमलों की ट्रेनिंग दे रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तरी अफगानिस्तान और पाकिस्तान सीमा के पास मदरसों में लगभग 14 वर्ष की उम्र के बच्चों को आत्मघाती हमलावर बनने की ट्रेनिंग दी जा रही है.
]]>जम्मू-कश्मीर में पहलगाम नरसंहार के मास्टरमाइंड के मारे जाने से मृतकों के परिवारों को खुशी और राहत मिली है. पीड़ितों में एक परिवार मध्य प्रदेश के इंदौर का है. पहलगाम आतंकी हमले में सुशील नथानियल को खोने वाले छोटे भाई ने आतंकियों के मारे जाने पर खुशी जताई. हालांकि, कहा कि उनका परिवार इस दुःख से उबरने की कोशिश कर रहा है.
पहलगाम हमले के 'मास्टरमाइंड' माने जा रहे सुलेमान उर्फ आसिफ और उसके दो साथियों को सोमवार को जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के बाहरी इलाके के जंगलों में 'ऑपरेशन महादेव' के तहत सेना के शीर्ष पैरा कमांडो ने मार गिराया.
22 अप्रैल को आतंकवादियों ने कश्मीर के 'मिनी स्विट्जरलैंड' यानी पहलगाम के एक प्रमुख पर्यटन स्थल बैसरन पर हमला किया, जिसमें 26 लोग मारे गए. मृतकों में ज्यादातर पर्यटक थे, जिनमें इंदौर निवासी सुशील नथानियल (58) भी शामिल थे. उनके छोटे भाई विकास कुमरावत ने आतंकी मास्टरमाइंड के मारे जाने पर खुशी जताई.
कुमरावत ने एक न्यूज एजेंसी को बताया, "हम लंबे समय से सोच रहे थे कि पहलगाम हमले में शामिल आतंकवादी अभी तक पकड़े क्यों नहीं गए? सेना द्वारा इस हमले के मास्टरमाइंड को मार गिराए जाने की खबर से हम बेहद खुश और राहत महसूस कर रहे हैं. यह कार्रवाई हमारी सरकार और सेना की एक विशेष उपलब्धि है."
हालांकि, उन्होंने कहा कि आतंकी हमले में उनके बड़े भाई की मौत के जख्म उनके परिवार के लिए अभी भी ताजा हैं और नरसंहार के तीन महीने से भी ज्यादा समय बाद वे इस दुःख से उबरने की कोशिश कर रहे हैं.
कुमरावत ने कहा, "मेरा भाई अब कभी हमारे पास नहीं लौट पाएगा, लेकिन सरकार और सेना द्वारा (पहलगाम हमले के बाद) की गई कार्रवाई हमारे लिए संतोष की बात है।"
नथानियल इंदौर से लगभग 200 किलोमीटर दूर अलीराजपुर में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में मैनेजर थे. वह अपनी पत्नी जेनिफर, बेटी आकांक्षा और बेटे ऑस्टिन उर्फ गोल्डी के साथ कश्मीर घूमने गए थे.
]]>इसके बाद तुरंत मुठभेड़ शुरू हो गई। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कितने आतंकी मारे गए हैं, लेकिन शुरुआती संकेतों से लगता है कि सभी आतंकी मारे जा चुके हैं और इलाके में कोई आतंकी जिंदा नहीं बचा है। सेना ने पूरे क्षेत्र को घेर कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
भारतीय सेना की चिनार कोर के अनुसार, लिडवास क्षेत्र में गोलीबारी शुरू हुई. इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि पुलिस, सेना और सीआरपीएफ की एक संयुक्त टीम ने मुलनार के वन क्षेत्र में घेराबंदी और सर्च ऑरपेशन शुरू किया.
पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड हाशिम मूसा फौजी हुआ ढेर
हाशिम मूसा को न सिर्फ पहलगाम हमले का साजिशकर्ता माना जाता था, बल्कि वह सोनमर्ग टनल हमले का भी जिम्मेदार था. आइए, समझते हैं कि यह ऑपरेशन कैसे हुआ, हाशिम मूसा कौन था और इस घटना का भारत की सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा.
पहलगाम और सोनमर्ग हमले: क्या हुआ था?
पहलगाम हमला (22 अप्रैल 2025): जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बाइसरन घाटी में पांच आतंकियों ने 26 पर्यटकों पर हमला किया था. इनमें ज्यादातर हिंदू थे. एक ईसाई पर्यटक व एक स्थानीय मुस्लिम भी मारा गया. हमले में M4 कार्बाइन और AK-47 का इस्तेमाल हुआ. द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF), जो लश्कर का मोहरा है, ने पहले जिम्मेदारी ली थी, लेकिन बाद में इनकार कर दिया.
सोनमर्ग टनल हमला (2024): सोनमर्ग के Z-मोर्ह टनल के पास हुए इस हमले में सात लोग मारे गए, जिसमें छह मजदूर और एक डॉक्टर शामिल थे. यह हमला भी लश्कर से जुड़े आतंकियों ने अंजाम दिया था. हाशिम मूसा का नाम इसमें सामने आया था.
हाशिम मूसा कौन था?
हाशिम मूसा, जिसे सुलैमान शाह मूसा फौजी भी कहा जाता है, लश्कर-ए-तैयबा का एक खतरनाक कमांडर था. उसकी कहानी कुछ इस तरह है…
पिछला बैकग्राउंड: हाशिम मूसा पाकिस्तान की स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) का पैरा-कमांडो था, जो एक खास ट्रेनिंग वाली सेना इकाई है.
लश्कर में शामिल: 2022 में वह भारत में घुसपैठ कर लश्कर में शामिल हो गया. कई हमलों की साजिश रची.
हमलों का मास्टरमाइंड: पहलगाम हमले की प्लानिंग और एग्जिक्यूशन में उसकी बड़ी भूमिका थी. वह बाइसरन घाटी में 15 अप्रैल से मौजूद था और सात दिन तक रेकी (जासूसी) की थी.
सोनमर्ग कनेक्शन: सोनमर्ग टनल हमले में भी उसने नेतृत्व किया था, जिसमें सात लोगों की जान गई थी.
छिपने की जगह: वह दाचीगाम और लिडवास के जंगलों में छिपा हुआ था, जहां से वह पाकिस्तान भागने की फिराक में था.
हाशिम मूसा को पकड़ने या मारने के लिए सेना ने 10 लाख रुपये का इनाम रखा था, क्योंकि वह कई हमलों (जैसे गंदरबल और बारामुला) में शामिल था.
ऑपरेशन महादेव और लिडवास एनकाउंटर
पहलगाम हमले के 96 दिन बाद शुरू हुआ ऑपरेशन महादेव हाशिम मूसा को खत्म करने में सफल रहा. यह मिशन कैसे चला, जानें…
तैयारी: सेना ने ड्रोन, थर्मल इमेजिंग, और मानव खुफिया (ह्यूमिंट) से हाशिम की लोकेशन ट्रैक की. लिडवास के जंगलों में उसकी मौजूदगी का पता चला.
एनकाउंटर: 28 जुलाई 2025 की सुबह सेना ने इलाके को घेर लिया. हाशिम और उसके दो साथियों ने गोलीबारी शुरू की, लेकिन 6 घंटे की मुठभेड़ के बाद तीनों मारे गए.
हथियार और सबूत: मुठभेड़ में AK-47, ग्रेनेड, और IED (बम) बरामद हुए. हाशिम के पास से पाकिस्तानी पासपोर्ट और सैटेलाइट फोन भी मिला, जो ISI से संपर्क दिखाता है.
तस्वीरें: लिडवास एनकाउंटर की तस्वीरें सामने आईं, जिसमें मारे गए आतंकियों के शव और हथियार दिख रहे हैं. ये तस्वीरें सेना की कामयाबी का सबूत हैं.
3 आतंकी हुए ढेर
अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही सुरक्षाबल संदिग्ध स्थान के पास पहुंचे, वहां छिपे आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसका सुरक्षाबलों ने मुंहतोड़ जवाब दिया. इसी के बाद सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई. अब इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी हासिल हुई है. 3 आंतकियों को मार गिराया गया है. ऑपरेशन अभी भी जारी है. जहां तीन आतंकी मारे गए हैं. वहीं, 2 आतंकी घायल बताए जा रहे हैं. ड्रोन के जरिए तीनों शव देखे गए हैं.
सूत्रों के अनुसार तीनों विदेशी आतंकी बताए जा रहे हैं. अभी भी तलाशी अभियान जारी है, जहां और आतंकियों के छिपे होने की आशंका है. आतंकियो की पहचान की कवायद चल रही है.
सेना (Indian Army) के जवानों ने आतंकियों को मार गिराने के लिए ऑपरेशन महादेव लॉन्च किया है। जानकारी के अनुसार, पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों को मार गिराया गया है। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को सील कर दिया है। पूरे इलाके में सर्च अभियान चलाया जा रहा है।
भारतीय सेना ने जानकारी दी है कि लिडवास इलाके में मुठभेड़ हुई। अभी ऑपरेशन जारी है। सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि आतंकियों को खत्म करने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और सीआरपीएफ की एक संयुक्त टीम ऑपरेशन महादेव चला रही है।
ऑपरेशन महादेव जारी
अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने सुरक्षाबलों ने एक खुफिया सूचना के आधार पर हरवान के मुलनार इलाके में आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया. अधिकारियों ने बताया कि जब सुरक्षाकर्मी सर्च ऑपरेशन चला रहे थे, तब दूर से दो राउंड गोलियों की आवाज सुनाई दी. इसी के बाद ऑपरेशन शुरू किया गया.
पहलगाम हमले के हो सकते हैं संदिग्ध
इस ऑपरेशन के तहत तीन आतंकवादियों को ढेर किया गया है. वहीं, सामने आया है कि यह तीनों आतंकी पहलगाम हमले के संदिग्ध हो सकते हैं. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकी हमला हुआ था. इस हमले में 26 निहत्थे लोगों पर आतंकवादियों ने हमला किया था और इनकी जान ले ली थी. इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपेरशन सिंदूर लॉन्च किया.
पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ सबक सिखाने के लिए भारत ने 7 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया. इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया और तबाह कर दिया गया. इसी के बाद पाकिस्तान ने भी भारत पर हमला करने की नाकाम कोशिश की. दोनों देशों के बीच 10 मई को युद्धविराम हुआ. इसी के बाद सोमवार को ऑपरेशन महादेव के तहत जिन आतंकवादियों को ढेर किया गया है वहीं सामने आरहा है कि यह पहलगाम हमले के संदिग्ध हो सकते हैं.
स्कैच हुए थी जारी
पहलगाम के अटैक के बाद तीन आतंकवादियों के स्कैच जारी हुए थे. इसी के बाद अब ऑपरेशन महादेव के तहत मारे गए आतंकियों को पहलगाम का संदिग्ध बताया जा रहा है. हालांकि, अभी इसको लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
]]>22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। इसके बाद लगातार एजेंसियां अपनी जांच में जुटी हुई हैं। आतंकी हमले के सबसे अहम चश्मदीद ने जांच करने वाली एजेंसियों के सामने चौंकाने वाला बयान दिया है। उसने बताया कि उसने 22 अप्रैल को घास के मैदानों में 26 लोगों की हत्या के बाद बंदूकधारियों को हवा में चार राउंड फायरिंग करते देखा था और वह जश्न मना रहे थे।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्टार प्रोटेक्टेड चश्मदीद गवाह को एनआईए ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी की मदद से ट्रैक किया था। इस गवाह का हमले के कुछ ही मिनटों के बाद बैसरन घाटी के मैदान में तीन पाकिस्तानी आतंकियों से सामना हुआ था। उसके बयान से वाकिफ एक सूत्र ने इंडियन एक्प्रेस को बताया, ‘उसे कलमा पढ़ने के लिए कहा गया और जब उसने अपने स्थानीय लहजे में बोलना शुरू किया, तो उन्होंने उसे छोड़ दिया। उन्होंने जश्न मनाने के लिए गोलियां चलानी शुरू कर दीं। उसने हवा में चार राउंड गोलियां चलाई गईं।’
चश्मदीद ने जांचकर्ताओं को बताया है कि उसने 22 अप्रैल को 26 टूरिस्टों की हत्या के बाद बंदूकधारियों को ‘जश्न’ में हवा में चार राउंड गोलियां चलाते देखा था. यह पता चला है कि ‘स्टार प्रोटेक्टेड गवाह, जिसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जम्मू और कश्मीर पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की मदद से ट्रैक किया था, हमले के कुछ मिनट बाद बैसरन घाटी में तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों का सामना किया था.
पिछले महीने एनआईए ने हमलावरों को कथित तौर पर पनाह देने के आरोप में दो स्थानीय लोगों परवेज अहमद जोथर और बशीर अहमद को गिरफ्तार किया था. एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘उन्होंने तीन सशस्त्र आतंकवादियों की पहचान उजागर की और पुष्टि की कि वे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पाकिस्तानी नागरिक थे. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, एनआईए को एक स्थानीय व्यक्ति मिला. अब वह मुख्य गवाह है. उसने हमले के कुछ ही मिनटों बाद हुई घटनाओं की अहम जानकारी साझा की.
बताया जा रहा है कि उसने जांचकर्ताओं को बताया कि नागरिकों की हत्या करने के बाद जब वे बैसरन से निकल रहे थे, तो बंदूकधारियों ने उसे रोक लिया. उसके बयान से वाकिफ एक सूत्र ने बताया, ‘उसे कलमा पढ़ने के लिए कहा गया और जब उसने अपने स्थानीय लहजे में बोलना शुरू किया, तो उन्होंने उसे छोड़ दिया. उन्होंने जश्न में गोलियां चलानी शुरू कर दीं. हवा में चार राउंड गोलियाँ चलाई गईं.’
उसके बयान के आधार पर जांच दल ने घटनास्थल से चार इस्तेमाल किए हुए कारतूस जब्त किए. बताया जा रहा है कि उस व्यक्ति ने जांचकर्ताओं को यह भी बताया कि उसने आतंकियों के मददगार परवेज और बशीर को कथित तौर पर एक पहाड़ी के पास खड़े होकर हमलावरों के सामान की देखभाल करते देखा था, जिसे बंदूकधारियों ने आखिरकार उनसे ले लिया था.
जांचकर्ताओं ने परवेज और बशीर से भी लंबी पूछताछ की है. उसके आधार पर अब उन्हें पता चला है कि हमले से पहले क्या हुआ था. एक केंद्रीय खुफिया एजेंसी के सूत्र ने बताया, ‘परवेज ने दावा किया है कि घटना से एक दिन पहले तीनों आतंकी दोपहर करीब साढ़े तीन बजे उसके घर आए और खाना मांगा. उनके पास हथियार थे. उसकी पत्नी ने उन्हें खाना परोसा और वे करीब चार घंटे तक बैसरन में सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटक स्थलों, रास्तों और टाइम टेबल से जुड़े सवाल पूछते रहे.’
सूत्रों के मुताबिक, जाने से पहले आतंकियों ने परवेज की पत्नी से कुछ मसाले और बिना पके चावल पैक करने को कहा और परिवार को 500 रुपये के पांच नोट दिए. सूत्र ने बताया, ‘इसके बाद वे बशीर से मिले. उन्होंने उनसे (दोनों स्थानीय परवेज और बशीर) 22 अप्रैल को दोपहर करीब साढ़े बारह बजे बैसरन पहुंचने को कहा. सूत्रों ने बताया कि हमलावरों में से एक सुलेमान शाह बताया जा रहा है, जो पिछले साल 20 अक्टूबर को श्रीनगर-सोनमर्ग राजमार्ग पर जेड-मोड़ सुरंग का निर्माण कर रही एक कंपनी के सात कर्मचारियों की हत्या में शामिल था.
घटनास्थल से चार कारतूस बरामद
पिछले महीने एनआईए ने हमलावरों को कथित तौर पर पनाह देने के आरोप में दो स्थानीय लोगों को अरेस्ट किया था। एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘उन्होंने तीन आतंकवादियों की पहचान का खुलासा किया और पुष्टि की कि वे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पाकिस्तानी थे।’ इस मामले में गवाहों के बयान के बाद जांच कर रही टीम ने घटनास्थल से चार कारतूस भी जब्त किए हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि उस व्यक्ति ने जांच करने वाली टीम को यह भी बताया था कि उसने परवेज और बशीर को कथित तौर पर पहाड़ी के पास खड़े होकर हमलावरों के सामान की देखभाल करते हुए देखा था।
बशीर और परवेज से एजेंसी ने की पूछताछ
एजेंसी ने परवेज और बशीर से भी काफी लंबी पूछताछ की है। एक सेंट्रल एजेंसी के सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘परवेज ने दावा किया है कि घटना से एक दिन पहले, तीनों हमलावर दोपहर करीब साढ़े तीन बजे उसके घर आए और खाना मांगा। उनके पास हथियार थे। उसकी पत्नी ने उन्हें खाना परोसा और वे करीब चार घंटे तक बैसरन में सिक्योरिटी अरेंजमेंट, टूरिस्ट प्लेस, रूट और टाइम से जुड़े हुए सवाल पूछते रहे।’ हमलावरों ने परवेज की पत्नी से कुछ मसाले और बिना पके चावल पैक करने को कहा और परिवार को 500 रुपये के पांच नोट दिए।
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22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। इसके बाद लगातार एजेंसियां अपनी जांच में जुटी हुई हैं। आतंकी हमले के सबसे अहम चश्मदीद ने जांच करने वाली एजेंसियों के सामने चौंकाने वाला बयान दिया है। उसने बताया कि उसने 22 अप्रैल को घास के मैदानों में 26 लोगों की हत्या के बाद बंदूकधारियों को हवा में चार राउंड फायरिंग करते देखा था और वह जश्न मना रहे थे।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्टार प्रोटेक्टेड चश्मदीद गवाह को एनआईए ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी की मदद से ट्रैक किया था। इस गवाह का हमले के कुछ ही मिनटों के बाद बैसरन घाटी के मैदान में तीन पाकिस्तानी आतंकियों से सामना हुआ था। उसके बयान से वाकिफ एक सूत्र ने इंडियन एक्प्रेस को बताया, ‘उसे कलमा पढ़ने के लिए कहा गया और जब उसने अपने स्थानीय लहजे में बोलना शुरू किया, तो उन्होंने उसे छोड़ दिया। उन्होंने जश्न मनाने के लिए गोलियां चलानी शुरू कर दीं। उसने हवा में चार राउंड गोलियां चलाई गईं।’
चश्मदीद ने जांचकर्ताओं को बताया है कि उसने 22 अप्रैल को 26 टूरिस्टों की हत्या के बाद बंदूकधारियों को ‘जश्न’ में हवा में चार राउंड गोलियां चलाते देखा था. यह पता चला है कि ‘स्टार प्रोटेक्टेड गवाह, जिसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जम्मू और कश्मीर पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की मदद से ट्रैक किया था, हमले के कुछ मिनट बाद बैसरन घाटी में तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों का सामना किया था.
पिछले महीने एनआईए ने हमलावरों को कथित तौर पर पनाह देने के आरोप में दो स्थानीय लोगों परवेज अहमद जोथर और बशीर अहमद को गिरफ्तार किया था. एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘उन्होंने तीन सशस्त्र आतंकवादियों की पहचान उजागर की और पुष्टि की कि वे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पाकिस्तानी नागरिक थे. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, एनआईए को एक स्थानीय व्यक्ति मिला. अब वह मुख्य गवाह है. उसने हमले के कुछ ही मिनटों बाद हुई घटनाओं की अहम जानकारी साझा की.
बताया जा रहा है कि उसने जांचकर्ताओं को बताया कि नागरिकों की हत्या करने के बाद जब वे बैसरन से निकल रहे थे, तो बंदूकधारियों ने उसे रोक लिया. उसके बयान से वाकिफ एक सूत्र ने बताया, ‘उसे कलमा पढ़ने के लिए कहा गया और जब उसने अपने स्थानीय लहजे में बोलना शुरू किया, तो उन्होंने उसे छोड़ दिया. उन्होंने जश्न में गोलियां चलानी शुरू कर दीं. हवा में चार राउंड गोलियाँ चलाई गईं.’
उसके बयान के आधार पर जांच दल ने घटनास्थल से चार इस्तेमाल किए हुए कारतूस जब्त किए. बताया जा रहा है कि उस व्यक्ति ने जांचकर्ताओं को यह भी बताया कि उसने आतंकियों के मददगार परवेज और बशीर को कथित तौर पर एक पहाड़ी के पास खड़े होकर हमलावरों के सामान की देखभाल करते देखा था, जिसे बंदूकधारियों ने आखिरकार उनसे ले लिया था.
जांचकर्ताओं ने परवेज और बशीर से भी लंबी पूछताछ की है. उसके आधार पर अब उन्हें पता चला है कि हमले से पहले क्या हुआ था. एक केंद्रीय खुफिया एजेंसी के सूत्र ने बताया, ‘परवेज ने दावा किया है कि घटना से एक दिन पहले तीनों आतंकी दोपहर करीब साढ़े तीन बजे उसके घर आए और खाना मांगा. उनके पास हथियार थे. उसकी पत्नी ने उन्हें खाना परोसा और वे करीब चार घंटे तक बैसरन में सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटक स्थलों, रास्तों और टाइम टेबल से जुड़े सवाल पूछते रहे.’
सूत्रों के मुताबिक, जाने से पहले आतंकियों ने परवेज की पत्नी से कुछ मसाले और बिना पके चावल पैक करने को कहा और परिवार को 500 रुपये के पांच नोट दिए. सूत्र ने बताया, ‘इसके बाद वे बशीर से मिले. उन्होंने उनसे (दोनों स्थानीय परवेज और बशीर) 22 अप्रैल को दोपहर करीब साढ़े बारह बजे बैसरन पहुंचने को कहा. सूत्रों ने बताया कि हमलावरों में से एक सुलेमान शाह बताया जा रहा है, जो पिछले साल 20 अक्टूबर को श्रीनगर-सोनमर्ग राजमार्ग पर जेड-मोड़ सुरंग का निर्माण कर रही एक कंपनी के सात कर्मचारियों की हत्या में शामिल था.
घटनास्थल से चार कारतूस बरामद
पिछले महीने एनआईए ने हमलावरों को कथित तौर पर पनाह देने के आरोप में दो स्थानीय लोगों को अरेस्ट किया था। एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘उन्होंने तीन आतंकवादियों की पहचान का खुलासा किया और पुष्टि की कि वे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पाकिस्तानी थे।’ इस मामले में गवाहों के बयान के बाद जांच कर रही टीम ने घटनास्थल से चार कारतूस भी जब्त किए हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि उस व्यक्ति ने जांच करने वाली टीम को यह भी बताया था कि उसने परवेज और बशीर को कथित तौर पर पहाड़ी के पास खड़े होकर हमलावरों के सामान की देखभाल करते हुए देखा था।
बशीर और परवेज से एजेंसी ने की पूछताछ
एजेंसी ने परवेज और बशीर से भी काफी लंबी पूछताछ की है। एक सेंट्रल एजेंसी के सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘परवेज ने दावा किया है कि घटना से एक दिन पहले, तीनों हमलावर दोपहर करीब साढ़े तीन बजे उसके घर आए और खाना मांगा। उनके पास हथियार थे। उसकी पत्नी ने उन्हें खाना परोसा और वे करीब चार घंटे तक बैसरन में सिक्योरिटी अरेंजमेंट, टूरिस्ट प्लेस, रूट और टाइम से जुड़े हुए सवाल पूछते रहे।’ हमलावरों ने परवेज की पत्नी से कुछ मसाले और बिना पके चावल पैक करने को कहा और परिवार को 500 रुपये के पांच नोट दिए।
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पर्यटकों से अपील घाटी आएं
आजीविका के लिए पर्यटकों पर निर्भर रहने वाले शिकारा मालिक हसन ने कहा, "हम पूरे दिन इंतजार करते हैं, लेकिन कोई नहीं आता. कश्मीर अपने आतिथ्य के लिए जाना जाता है. हम शांति और पर्यटन की बहाली की मांग करते हैं. पहलगाम हमले की हम कड़ी निंदा करते हैं, यह मानवता पर हमला है." वहीं स्थानीय निवासी मंजूर अहमद, जो पहले प्रतिदिन 1500 रुपये तक कमा लेते थे, अब मुश्किल से 100 रुपये कमा पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम पर्यटकों से अपील करते हैं कि वे घाटी में फिर से आएं और वुलर झील सहित कश्मीर की छिपी प्राकृतिक सुंदरता को देखें.
पहलगाम हमले के बाद बर्बाद हुए लोकल?
पहलगाम आतंकी हमले के बाद कश्मीर में पर्यटन उद्योग पर गहरा असर पड़ा है. अप्रैल-मई में वुलर झील और अन्य पर्यटन स्थलों पर रोजाना हजारों पर्यटक आते थे, लेकिन हमले के बाद पर्यटकों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. जिससे शिकारा मालिकों, टैक्सी चालकों और होटल मालिकों को भारी नुकसान हुआ है. वहीं होटल, रेस्तरां और स्थानीय हस्तशिल्प व्यवसायों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है.
सुरक्षा व्यवस्था कड़क, मॉक ड्रिल के निर्देश
इस बीच, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) ने श्रीनगर की डल झील में मॉक ड्रिल का आयोजन किया, ताकि आपातकालीन तैयारियों को परखा जा सके.केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 7 मई को देशभर में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का निर्देश दिया है. दूसरी ओर, नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सेना द्वारा 12 दिनों तक संघर्ष विराम उल्लंघन के बाद, पुंछ जिले में सुरक्षा बलों ने सतर्कता बढ़ा दी है. पुलिस, सीआरपीएफ और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने नाकेबंदी, वाहन जांच और गश्त तेज कर दी है, ताकि सीमा पार से संभावित आतंकी घुसपैठ को रोका जा सके.
पहलगाम आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में कई पर्यटक स्थलों को मौजूदा वक्त के लिए बंद कर दिया गया है. जानकारी के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों की सिफारिश पर ये फैसला लिया है. आतंकवादी हमलों की संभावना के बारे में खुफिया चेतावनी के कारण कश्मीर में 87 में से 48 पर्यटक स्थलों को बंद किया है. सूत्रों के मुताबिक, पहलगाम हमले के बाद घाटी में कुछ स्लीपर सेल एक्टिव हो गए हैं, उन्हें गतिविधि शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं.
पहलगाम हमले के बाद घाटी में सक्रिय आतंकवादियों के घरों को उड़ाने का बदला लेने के लिए टीआरटी द्वारा कुछ टार्गेटेड हत्याओं के साथ-साथ बड़े हमले को अंजाम देने की कोशिश के बारे में लगातार खुफिया चेतावनी भी मिल रही है. सुरक्षा बलों ने गुलमर्ग, सोनमर्ग और लेक इलाकों सहित कई संवेदनशील पर्यटन स्थलों पर पुलिस के विशेष ऑप्स समूह से एंटी फिदायीन दस्तों को तैनात किया है. घाटी में आतंकी घटना होने के बाद सामान्य तौर पर सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है.
हमले से इन सेक्टर्स पर होगा गहरा असर!
इस हमले का असर कश्मीर के सभी सेक्टर्स पर पड़ सकता है. खासकर पर्यटन पर ज्यादा प्रभाव दिखाई दे सकता है. वहां पर होटल, कंपनी खोलने और फल का व्यापार करने का इरादा रखने वाले निवेशकों का विश्वास हिल सकता है. इससे सालों की मेहनत के बाद वापस स्थिर हुई कश्मीर की आर्थिक प्रगति पटरी से उतर सकती है. इतना ही नहीं, कश्मीर के लोगों की इनकम पर भी गहरा असर दिखाई पड़ सकता है.
अभी तक मजबूत रही है कश्मीर की इकोनॉमी
जम्मू और कश्मीर की आर्थिक प्रगति मजबूत रही है. 2024-25 के लिए इसकी रीयल GSDP 7.06% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि नॉमिनल GSDP ₹2.65 लाख करोड़ होने का अनुमान है, जो निरंतर तरक्की का संकेत है. 2019 और 2025 के बीच, केंद्र शासित प्रदेश ने 4.89% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की, जबकि प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) वित्त वर्ष 25 में ₹1,54,703 तक पहुंचने की उम्मीद थी, जो साल-दर-साल 10.6% अधिक है.
यह शानदार तरक्की ऐसे ही नहीं है, बल्कि 2018 में आतंकवादी घटनाओं की संख्या 228 से घटकर 2023 में सिर्फ 46 रह गई थी, जो 99% की गिरावट है. यह अभी तक शांति का ही फायदा था, जिसने निवेश, पर्यटन का ध्यान कश्मीर की ओर खींचा.
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