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भारतीय बैडमिंटन संघ (बाई) के अध्यक्ष और असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की कि बाई पेरिस पैरालंपिक 2024 के पदक विजेताओं को उनके उत्कृष्ट प्रयासों के लिए 50 लाख रुपये के संयुक्त पुरस्कार से सम्मानित करेगा, जिन्होंने इतिहास रच दिया।
भारत ने पेरिस पैरालंपिक में पांच पदक जीते – एक स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य – जो पैरालंपिक खेलों के किसी भी संस्करण में उनका सबसे अधिक है, और हाल ही में पेरिस में संपन्न कार्यक्रम में पहली बार महिलाओं की स्पर्धाओं में पोडियम हासिल किया। नितेश कुमार ने पुरुष एकल एसएल3 श्रेणी में प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक जीता, जबकि सुहास यतिराज (पुरुष एकल एसएल4) ने पेरिस में दोहराई जीत के साथ टोक्यो से अपने रजत पदक में इजाफा किया। थुलसिमथि मुरुगेसन, मनीषा रामदास और नित्या श्री सिवन ने पैरालंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला शटलर बनकर इतिहास रच दिया। थुलसिमथि ने महिला एकल एसयू5 में रजत और मनीषा ने कांस्य पदक जीता। इस बीच, नित्या ने एसएच6 श्रेणी में कांस्य पदक जीता। स्वर्ण पदक विजेता नितेश को 15 लाख रुपये, रजत पदक विजेता सुहास और थुलसिमथि को 10-10 लाख रुपये और कांस्य पदक विजेता मनीषा और नित्या को 7.5-7.5 लाख रुपये मिलेंगे।
भारत के पैरा बैडमिंटन खिलाड़ियों के ऐतिहासिक अभियान पर टिप्पणी करते हुए, बाई के महासचिव संजय मिश्रा ने कहा, “भारतीय पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी विश्व मंच पर लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और नकद पुरस्कार बाई के लिए पैरालंपिक में देश को पदक जीतने में मदद करने के उनके प्रयासों को मान्यता देने का एक तरीका है।”
उन्होंने कहा, “बाई देश भर में पैरा-बैडमिंटन को विकसित करने और बढ़ावा देने तथा इन खिलाड़ियों को और अधिक सफलता हासिल करने में मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है और पैरा-बैडमिंटन को विकसित करने के लिए कई और पहल की जा रही हैं।” खिलाड़ियों के व्यस्त टूर्नामेंट शेड्यूल को देखते हुए, बाई इन खिलाड़ियों को बधाई देने और निरंतर विकास के लिए उनकी आवश्यकताओं को समझने के लिए उनके साथ एक वर्चुअल इंटरेक्शन सेशन भी आयोजित करेगा।
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इस स्पर्धा में ईरान के यासिन कोसावनी ने 15.96 मीटर थ्रो के साथ स्वर्ण पदक और वहीं थिएगो पॉलिनो ने 15.06 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक मिला।
24 दिसंबर 1983 को जन्में होकाटो सेमा नागालैंड के किसान परिवार से आते है। वह सेना में थे और वर्ष 2002 में जम्मू कश्मीर के चौकीबल में आंतकवाद विरोधी अभियान में होकाटो सेमा ने भाग लिया। इस दौरान बारूदी सुरंग में विस्फोट उन्हें अपना बायां पैर गवांना पड़ा। पैर गवांने के बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कई चुनौतियों के बावजूद उन्होंने 2016 में पैरा एथलीट बनने की ओर रूख किया।
सेमा ने एशियाई पैरा खेल 2022 (2023) कांस्य पदक, विश्व चैम्पियनशिप 2024 में चौथा स्थान पर रहे और
मोरक्को ग्रैंड प्रिक्स 2022 में रजत पदक जीता।
शॉटपुट एफ57 का फाइनल मुकाबला कितना चुनौतीभरा रहा इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भाग ले रहे कुल 12 खिलाड़ियों में फ्रांस, यमन, हैती और सोमालिया के खिलाड़ियों ने इस सीजन का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन दर्ज कराया, जबकि उज्बेकिस्तान के एथलीट वाई ओडिलोव ने अपना निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
इनके अलावा अर्जेंटीना और फिनलैंड के खिलाड़ियों ने भी चुनौती पेश की। पदक विजेताओं के अलावा दो और खिलाड़ी ऐसे रहे जिन्होंने 14 मीटर की लाइन पार करने में सफलता पाई। कांस्य पदक जीतने वाले भारतीय एथलीट होकाटो दशमलव के बाद चंद अंकों (महज 0.41) के अंतर से रजत जीतने से चूक गए।
मीलों दूर से पेरिस की सरजमीं पर आकर देश को पदक दिलाने वाले एथलीट अपने प्रदर्शन से बेहद उत्साहित दिखे। ब्राजीली खिलाड़ी ने जहां रजत पदक जीत देश का नाम बढ़ाया तो दूसरी तरफ ईरानी खिलाड़ी यासिन खोसारवी ने पैरालंपिक के इतिहास में अभूतपूर्व प्रदर्शन कर इन खेलों का नया रिकॉर्ड कायम कर दिखाया।
प्रवीण कुमार के गोल्ड मेडल के साथ ही पेरिस पैरालंपिक में भारत के पदकों की संख्या अब 26 हो गई है. भारत अब तक 6 गोल्ड, 8 सिल्वर और 12 ब्रॉन्ज मेडल जीत चुका है. भारत 26 पदकों के साथ मेडल टैली में 14वें नंबर पर आ चुका है.
पेरिस पैरालंपिक 2024 में भारत के पदकवीर
1. अवनि लेखरा (शूटिंग)- गोल्ड मेडल, वूमेन्स 10 मीटर एयर राइफल (SH1)
2. मोना अग्रवाल (शूटिंग)- ब्रॉन्ज मेडल, वूमेन्स 10 मीटर एयर राइफल (SH1)
3. प्रीति पाल (एथलेटिक्स)- ब्रॉन्ज मेडल, वूमेन्स 100 मीटर रेस (T35)
4. मनीष नरवाल (शूटिंग)- सिल्वर मेडल, मेन्स 10 मीटर एयर पिस्टल (SH1)
5. रुबीना फ्रांसिस (शूटिंग)- ब्रॉन्ज मेडल, वूमेन्स 10 मीटर एयर पिस्टल (SH1)
6. प्रीति पाल (एथलेटिक्स)- ब्रॉन्ज मेडल, वूमेन्स 200 मीटर रेस (T35)
7. निषाद कुमार (एथलेटिक्स)- सिल्वर मेडल, मेन्स हाई जंप (T47)
8. योगेश कथुनिया (एथलेटिक्स)- सिल्वर मेडल, मेन्स डिस्कस थ्रो (F56)
9. नितेश कुमार (बैडमिंटन)- गोल्ड मेडल, मेन्स सिंगल्स (SL3)
10. मनीषा रामदास (बैडमिंटन)- ब्रॉन्ज मेडल, वूमेन्स सिंगल्स (SU5)
11. थुलासिमथी मुरुगेसन (बैडमिंटन)- सिल्वर मेडल, वूमेन्स सिंगल्स (SU5)
12. सुहास एल यथिराज (बैडमिंटन)- सिल्वर मेडल, मेन्स सिंगल्स (SL4)
13. शीतल देवी-राकेश कुमार (तीरंदाजी)- ब्रॉन्ज मेडल, मिक्स्ड कंपाउंड ओपन
14. सुमित अंतिल (एथलेटिक्स)- गोल्ड मेडल, मेन्स जैवलिन थ्रो (एफ 64 वर्ग)
15. नित्या श्री सिवन (बैडमिंटन)- ब्रॉन्ज मेडल, वूमेन्स सिंगल्स (SH6)
16. दीप्ति जीवनजी (एथलेटिक्स)- ब्रॉन्ज मेडल, वूमेन्स 400m (T20)
17. मरियप्पन थंगावेलु (एथलेटिक्स)- ब्रॉन्ज मेडल, मेन्स हाई जंप (T63)
18. शरद कुमार (एथलेटिक्स)- सिल्वर मेडल, मेन्स हाई जंप (T63)
19. अजीत सिंह (एथलेटिक्स)- सिल्वर मेडल, मेन्स जैवलिन थ्रो (F46)
20. सुंदर सिंह गुर्जर (एथलेटिक्स)- ब्रॉन्ज मेडल, मेन्स जैवलिन थ्रो (F46)
21. सचिन सरजेराव खिलारी (एथलेटिक्स)- सिल्वर मेडल, मेन्स शॉट पुट (F46)
22. हरविंदर सिंह (तीरंदाजी)- गोल्ड मेडल, मेन्स इंडिविजुअल रिकर्व ओपन
23. धर्मबीर (एथलेटिक्स)- गोल्ड मेडल, मेन्स क्लब थ्रो (F51)
24. प्रणव सूरमा (एथलेटिक्स)- सिल्वर मेडल, मेन्स क्लब थ्रो (F51)
25. कपिल परमार (जूडो)- ब्रॉन्ज मेडल, मेन्स 60 किलो (J1)
26. प्रवीण कुमार- गोल्ड मेडल, मेन्स हाई जंप (T44)
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क्रोएशिया के लुका बाकोविच ने कांस्य पदक जीता। खिलाड़ी का रजत पेरिस पैरालंपिक में एथलेटिक्स में भारत का 11वां पदक है। उन्होंने चीन में एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। एफ46 श्रेणी में वे खिलाड़ी होते हैं जिनकी भुजाओं में कमजोरी है, मांसपेशियों की शक्ति क्षीण है या भुजाओं में निष्क्रिय गति की सीमा क्षीण है। ऐसे एथलीट खड़े होकर प्रतिस्पर्धा करते हैं।
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा- #Paralympics2024 में सचिन को उनकी अविश्वसनीय उपलब्धि के लिए बधाई! शक्ति और दृढ़ संकल्प का शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने पुरुषों की शॉटपुट F46 स्पर्धा में रजत पदक जीता है। भारत को उन पर गर्व है।
दूसरी ओर, भारत के अरशद शेख और ज्योति गडेरिया पैरालंपिक खेलों में अपनी-अपनी साइकिलिंग स्पर्धा में क्रमशः 11वें और 16वें स्थान पर रहे। ज्योति ने 5.8 किमी की महिला सी1 व्यक्तिगत टाइम ट्रायल में 30 मिनट और 0.16 सेकंड का समय लिया तथा वह 16वें और अंतिम स्थान पर रही। जर्मनी की माइक हॉसबर्गर ने 21:30.45 का समय लेकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि ब्रिटेन की फ्रांसिस ब्राउन और स्वीडन की एना बेक ने क्रमशः 21:46.18 और 21:54.71 के समय के साथ दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया।
पुरुषों के सी2 टाइम ट्रायल में अरशद 25:20.11 के समय के साथ 11वें और अंतिम स्थान पर रहे। फ्रांस के अलेक्जेंड्रे लीउते ने 19:24.25 के प्रयास के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि बेल्जियम के इवॉड वोरोमेंट और ऑस्ट्रेलिया के डेरेन हिक्स क्रमशः 19:26.45 और 19:26.61 समय के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
]]>पेरिस
पेरिस पैरालंपिक 2024 में भारत की निशानेबाज अवनि लेखरा ने कमाल कर दिखाया है. अवनि ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल (SH1) स्पर्धा में शुक्रवार (30 अगस्त) को स्वर्ण पदक जीता. अवनि ने पैरालंपिक रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया. इसी इवेंट में भारत की मोना अग्रवाल ने कांस्य पदक जीता. इन दो पदकों के साथ ही मौजूदा पैरालंपिक गेम्स में भारत का खाता खुल गया है. भारत के नाम एक गोल्ड और एक ब्रॉन्ज मेडल हैं.
…ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला
अवनि ने फाइनल में 249.7 अंक बनाए, जो एक पैरालंपिक रिकॉर्ड है. ब्रॉन्ज मेडलिस्ट मोना ने 228.7 अंक स्कोर किए. अवनि ने टोक्यो पैरालंपिक (2020) में भी इसी स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता था. यानी उन्होंने अपने टाइटल का बचाव किया है. साउथ कोरिया की ली युनरी ने इस इवेंट में सिल्वर मेडल जीता. अवनि ने टोक्यो पैरालंपिक में 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन में कांस्य पदक जीता था. अवनि पैरालंपिक में दो गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट हैं.
अवनि लेखरा क्वालिफिकेशन में दूसरे स्थान पर रहते हुए फाइनल में जगह बनाने में सफल रही थीं. पिछले एक साल से शानदार लय में चल रही हमवतन मोना अग्रवाल ने भी पांचवें स्थान पर रहते हुए आठ निशानेबाजों के फाइनल के लिए क्वालिफाई किया था. गत चैम्पियन अवनि ने 625.8 का स्कोर किया और वह इरिना शचेतनिक से पीछे रहीं. इरिना ने 627.5 के स्कोर के साथ पैरालंपिक क्वालिफिकेशन दौर में नया रिकॉर्ड कायम किया.
क्या होती है SH1 श्रेणी?
अपने पहले पैरालंपिक में प्रतिस्पर्धा कर रही दो बार की विश्व कप स्वर्ण पदक विजेता मोना ने 623.1 का स्कोर किया. अवनि तीन साल पहले टोक्यो पैरालंपिक में एसएच1 श्रेणी में स्वर्ण पदक जीतने के बाद देश की सबसे अधिक सुर्खियां बटोरने वाली पैरा खिलाड़ी बनी थीं. कार दुर्घटना में शरीर के निचले हिस्से में गंभीर चोट के बाद से अवनी व्हीलचेयर का इस्तेमाल करती हैं. निशानेबाजी में एसएच1 श्रेणी में ऐसे निशानेबाज शामिल होते हैं जिनकी बांहों, निचले धड़, पैरों की गति प्रभावित होती है या उनके हाथ या पैर में विकार होता है.
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