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शासन के नियमों के अनुरूप रोस्टर निर्माण करते हुए शीघ्र भर्ती प्रक्रिया के लिए विज्ञापन करें जारी
नियत समय पर हो प्रवेश, परीक्षा और परिणाम
भोपाल
उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने मंत्रालय स्थित सभाकक्ष में सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों के साथ, विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया की प्रगति सहित विविध विषयों की विस्तृत समीक्षा की। मंत्री परमार ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय, शासन के नियमों के अनुरूप रोस्टर निर्माण करते हुए भर्ती प्रक्रिया के लिए शीघ्र विज्ञापन जारी करें। मंत्री परमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक, अकादमिक एवं प्रशासनिक सुधार की दृष्टि से, रिक्त पदों की पूर्ति करना हमारी प्राथमिकता है।
मंत्री परमार ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय शैक्षणिक कैलेंडर का दृढ़ता के साथ शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें, इसके लिए पिछले सत्र के परीक्षा परिणाम समयपूर्वक घोषित किए जाएं जिससे अगले सत्र में नियत समय पर प्रवेश, परीक्षा एवं परिणाम सुनिश्चित हो सकें। मंत्री परमार ने कहा कि विद्यार्थियों के समग्र हितों की रक्षा, हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्री परमार ने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया है कि सभी विश्वविद्यालय अपने छात्रावासों को विद्यार्थियों की आवश्यकता अनुरूप बेहतर बनाएं और छात्रों को सुलभ रूप से गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध हो। मंत्री परमार ने विश्वविद्यालयों के छात्रावासों के निरीक्षण के लिए एक कमेटी गठित करने के निर्देश दिए, यह कमेटी छात्रावासों में विद्यार्थियों को दी जा रही सुविधाओं की गुणवत्ता का निरीक्षण करेगी।
मंत्री परमार ने विश्वविद्यालयों द्वारा डिजिटल मूल्यांकन को लेकर हो रहे क्रियान्वयन की गति को बढ़ाने पर बल देते हुए कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता को प्रभावी रूप से बनाए रखना हमारा ध्येय है और पारदर्शितापूर्ण परीक्षा पद्धति के लिए डिजिटल मूल्यांकन की महती आवश्यकता है। मंत्री परमार ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय डिजिटल मूल्यांकन की पद्धति को लागू करने के लिए प्रयास करें। मंत्री परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय अपने शैक्षणिक अमले के कार्यों के मूल्यांकन के लिए भी आंतरिक पद्धति विकसित करे जिससे शैक्षणिक एवं अकादमिक गुणवत्ता में उत्तरोत्तर वृद्धि हो सके।
मंत्री परमार ने सभी विश्वविद्यालयों को अन्य भारतीय भाषाओं को क्रेडिट से जोड़कर पढ़ाने की कार्ययोजना को भी शीघ्र लागू करने के प्रयास करने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल को तमिल, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर को कन्नड़, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इन्दौर को मराठी एवं तेलगू, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर को तेलगू एवं पंजाबी, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा को सिंधी और गुजराती, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन को मलयालम,सिंधी और असमिया, महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर को गुजराती, राजा शंकरशाह विश्वविद्यालय छिन्दवाड़ा को तमिल और मराठी, पंडित शंम्भूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय शहडोल को बांग्ला, क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय खरगोन को गुजराती, महात्मा गाँधी विश्वविद्यालय चित्रकूट को उड़िया और महर्षि पाणिनी विश्वविद्यालय उज्जैन को उड़िया भाषा सिखाने के लिए भाषा का आवंटन किया गया है। ये विश्वविद्यालय, उक्त आवंटित भाषा सिखाने के लिए क्रियान्वयन कर रहे हैं।
मंत्री परमार ने सभी विश्वविद्यालयों को समर्थ पोर्टल पर क्रियान्वयन के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय, स्वयं पोर्टल के विनियमन को अपनाएं और स्वयं पोर्टल पर हर विद्यार्थी को कम से एक कोर्स में पंजीयन कराएं।
बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने सभी विश्वविद्यालयों को सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर अपनी ग्रेडिंग सुधारने के लिए भी निर्देशित किया। राजन ने सभी विश्वविद्यालयों को कर्मचारी कल्याण से जुड़े विविध विषयों को शीघ्र निराकृत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लंबित पेंशन प्रकरण एवं अनुकम्पा नियुक्ति प्रकरणों का शीघ्र निदान करें। बैठक में विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा अनिल पाठक सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को भोपाल में भेंट कर उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा को लेकर सारगर्भित चर्चा की।
उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान को "राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020" के परिप्रेक्ष्य में राज्य शासन के नीतिगत निर्णयों, शिक्षा में किए जा रहे कार्यों एवं नवाचारों से अवगत कराया। परमार ने "राष्ट्रीय शिक्षा नीति" के अनुसरण में प्रदेश के समस्त जिलों में स्थापित किए गए प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस और उनमें भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ की स्थापना एवं प्रगति के सम्बंध में अवगत कराया। परमार ने पाठ्यक्रमों में "भारतीय ज्ञान परम्परा" के द्रुतगति से समावेश के लिए विभिन्न कार्यशालाओं एवं संगोष्ठियों से प्राप्त अनुशंसाओं की जानकारी भी दी।
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान को उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा में भारतीय भाषा के समावेश के लिए हो रहे कार्यों की जानकारी से भी अवगत कराया। परमार ने विद्यार्थियों के गुणात्मक एवं संज्ञानात्मक विकास के लिए मजबूत आधार तैयार करने, उद्योगजगत की आवश्यकता अनुरूप रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की समावेशिता को बढ़ावा देने और देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करने के लिए किए जा रहे कार्यों एवं प्रगति से भी अवगत कराया।
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, सचिव स्कूल शिक्षा डॉ संजय गोयल, आयुक्त तकनीकी शिक्षा अवधेश शर्मा सहित उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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संस्कृत भाषा के बिना आयुर्वेद की कल्पना भी संभव नहीं : परमार
आयुर्वेद, भारत ही नहीं अपितु विश्व की प्राचीनतम विधा : परमार
महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान में "आयुर्वेद में संस्कृत भाषा की महत्ता" पर हुई संगोष्ठी
भोपाल
आयुर्वेद भारत ही नहीं अपितु विश्व की प्राचीनतम विधा है। जीवन जीने की पद्धति है, जिसमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता के भाव का समावेश है। प्रकृति एवं मानव सहित समस्त चराचर के प्रति कृतज्ञता के भाव का प्रकटीकरण संस्कृत भाषा के माध्यम से भावानुकूल होता है। संस्कृत भाषा के बिना आयुर्वेद की कल्पना भी संभव नहीं है। भारत के दर्शन में कृतज्ञता का भाव है। किसी के भी कृत कार्यों से कृतज्ञ होकर उसके प्रति आभार व्यक्त करना भारत की संस्कृति, परम्परा और पहचान है। इस परम्परा का संरक्षण करने की आवश्यकता है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को भोपाल स्थित महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान (संस्कृत भवनम्) के भरतनाट्यगृहम् में संस्कृत सप्ताह महोत्सव के उपलक्ष्य पर "आयुर्वेद में संस्कृत भाषा की महत्ता" विषय पर आयोजित संगोष्ठी के शुभारंभ के अवसर पर कही। परमार ने कहा कि भारत का पुरातन ज्ञान संस्कृत भाषा में ही है। भारतीय ज्ञान परम्परा में संस्कृत भाषा का महत्व परिलक्षित होता है। भारत के लोगों को भारतीय ज्ञान पर गर्व करने का भाव जागृत करना होगा, अपनी उपलब्धियों पर गर्व करने की आदत बनानी होगी। परमार ने कहा कि भारत के ज्ञान के क्षेत्र में विश्वगुरु कहलाता था, पूर्वजों के उसी ज्ञान परम्परा का अनुसरण करना होगा। स्वतंत्रता की शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को विश्वमंच पर ज्ञान के क्षेत्र में पुनः सिरमौर बनाने के लिए समग्र ज्ञान की आवश्यकता है। इसके लिए भारतीय ज्ञान परम्परा को शोध एवं अनुसंधान के साथ युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में रखना होगा।
आयुष मंत्री परमार ने कहा कि विश्व भर में विभिन्न जटिल स्वास्थ्य समस्याओं का निदान चिकित्सा जगत के समक्ष चुनौती है, जिसका मात्र आधुनिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से निदान कर पाना संभव नहीं है। परम्परागत चिकित्सा पद्धतियों को भी इस चुनौती के लिए समाधान खोजना होगा। इस अनुक्रम में आयुर्वेद को शोध एवं अनुसंधान के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में भारतीय ज्ञान परम्परा को तथ्यों के साथ शिक्षा में समावेश करना होगा। परमार ने कहा कि भाषा जोड़ने का काम करती है, यह भारत का दृष्टिकोण है। देश के विभिन्न प्रांतों की भाषाओं जैसे तमिल, तेलुगु, गुजराती, मराठी, आदि भाषाओं को सिखाने का कार्य प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में हो रहा है। प्रदेश, क्षेत्रीय भाषाओं को सिखाकर राज्यों के मध्य भाषाई सौहार्द प्रकट करने वाला अग्रणी राज्य होगा। परमार ने कहा कि हमें भारत की गौरवशाली परम्परा और भाषाओं पर गर्व करना होगा, जिससे आने वाली पीढ़ी परंपरागत रूप से संस्कृत जैसी प्राचीनतम भाषा को अग्रसर रखें। मंत्री परमार ने सभी को संस्कृत दिवस एवं संस्कृत सप्ताह की बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं।
इस अवसर पर डॉ अशोक कुमार वार्ष्णेय, डॉ जागेश्वर पटले एवं संस्थान के निदेशक प्रभात राज तिवारी सहित विभिन्न विषयविद, गणमान्य जन एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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