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अमेरिका-ईरान के बीच पीस डील को लेकर महीनों से चल रही खींचतान अब खत्म होती नजर आ रही है. दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौते (पीस डील) का एक ड्राफ्ट सामने आया है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम से लेकर तेल कारोबार, होर्मुज स्ट्रेट और अरबों डॉलर फ्रीज किए हुए तक कई बड़े मुद्दों पर सहमति बनने का दावा किया गया है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान ने यह वादा किया है कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही किसी अन्य तरीके से उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा. यह अमेरिका की सबसे बड़ी मांगों में से एक रही है.
ड्राफ्ट के मुताबिक, ईरान के पास मौजूद उच्च स्तर पर संवर्धित (हाईली एनरिच्ड) यूरेनियम का संवर्धन स्तर भी कम किया जाएगा. हालांकि यह प्रक्रिया कैसे होगी, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. दोनों पक्ष अगले 60 दिनों के भीतर इसकी तकनीकी रूपरेखा तय करेंगे.
25 अरब डॉलर फ्रीज्ड फंड ईरान कर पाएगा हासिल
इस समझौते का सबसे बड़ा आकर्षण ईरान के फ्रीज्ड फंड को लेकर है. ईरानी अधिकारी का दावा है कि अमेरिका करीब 25 अरब डॉलर फ्रीज किए गए फंड को जारी करने पर सहमत हो गया है. इसमें डायरेक्ट कैश ट्रांसफर, क्षेत्रीय देशों के सहयोग और वित्तीय क्रेडिट लाइन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं.
इसके अलावा अमेरिका कुछ समय के लिए ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों में भी छूट देगा. इससे ईरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोबारा तेल बेच सकेगा और उससे होने वाली कमाई अपने पास रख सकेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत दे सकता है, जो वर्षों से पश्चिमी प्रतिबंधों की मार झेल रही है.
डील पर साइन होने के बाद खुल जाएगा होर्मुज स्ट्रेट
डील में होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा भी शामिल है. यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोल देगा. इसके बदले अमेरिका ईरानी जहाजों और बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करेगा.
अगर यह समझौता लागू होता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी राहत मिल सकती है. पिछले कई महीनों से होर्मुज में तनाव के कारण तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है. निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों की नजरें इस समझौते पर टिकी हुई हैं.
समझौते की टाइमिंग अब भी तय नहीं!
समझौते को लेकर अभी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं. वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हस्ताक्षर की तैयारियां चल रही हैं और इसके बाद तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी.
लेकिन दूसरी तरफ ईरान के भीतर इस समझौते को लेकर विरोध भी देखने को मिल रहा है. कट्टरपंथी समूहों और कुछ राजनीतिक धड़ों ने डील के समय और शर्तों पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता.
फिलहाल यह ड्राफ्ट समझौता अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है, लेकिन अगर दोनों पक्ष इस पर सहमत हो जाते हैं तो यह हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जाएगी. इससे न सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है.
]]>एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में शांति समझौते को लेकर दो पक्ष बंटे हुए हैं। एक तरफ कुछ लोग शांति समझौते के लिए राजी हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इस युद्ध में शहीद सुप्रीम लीडर और तमाम साथियों का बदला चाहते हैं। शनिवार को जब विदेश मंत्री अराघची मसहद शहर में एक सम्मेलन में हिस्सा ले रहे थे। उसी दौरान सैंकड़ों की संख्या में लोगों ने नारे बाजी शुरू कर दी। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों में कई महिलाएं भी शामिल थीं, जिन्होंने काले चाहत पहने हुए थे और वह लाल झंडे लिए नारे लगा रही थीं।
इस प्रदर्शन की एक वीडियो भी वायरल हुई है, जिसमें प्रदर्शन कारी डेथ टू अराघची, अराघची शर्म करो, झुकना बंद करो और अराघची इस्तीफा दो' जैसे नारे लगाती सुनी जा सकती हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक मसहद के एक निवासी ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारी लगातार अराघची का विरोध कर रहे थे।
अराघची के खिलाफ बढ़ रहा गुस्सा
एएफपी की रिपोर्ट के मताबिक, ईरान में इस शांति समझौते को लेकर लगातार गुस्सा बढ़ रहा है। दरअसल, प्रदर्शनकारियों का तर्क यह है कि जब युद्ध हो ही चुका है और अमेरिका झुक गया है तो फिर ट्रंप की शर्तों के आधार पर समझौता करने की जरूरत क्या है। इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों का मानना है कि अराघची और गालिबाफ जिस समझौते को स्वीकार करने की तैयारी कर रहे हैं, वह ईरान के हितों को नहीं साधता। इससे होर्मुज पर भी ईरान की पकड़ कमजोर हो सकती है। भले ही प्रदर्शनकारी अराघची के ऊपर ईरान के साथ धोखेबाजी का आरोप लगा रहे हों लेकिन अराघची लगातार ईरान के पक्ष में बातचीत करने का दावा कर रहे हैं।
अराघची और गालिबेफ के खिलाफ यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब दोनों ही पक्षों की तरफ से शांति समझौते को लेकर आम राय बन रही है। ईरान की तरफ से कहा गया है कि जल्दी ही अमेरिका के साथ 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम' पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। वहीं, इस समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने भी दावा किया है कि जल्दी ही समझौता हो सकता है। ट्रंप ने भी अपने 80वें जन्मदिन के दिन समझौता करने दावा किया है।
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