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अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में एकतरफा जीत हासिल करने वाली बीजेपी के नेता पेमा खांडू ने आज तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। शपथग्रहण समारोह के दौरान राज्यपाल केटी परनाइक ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित अन्य नेताओं की मौजूदगी में शपथ दिलाई। एक दिन पहले ही खांडू को सर्वसम्मति से भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया था, जिसके बाद उन्होंने राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया था।
गौरतलब है कि बीजेपी आलाकमान द्वारा केंद्रीय केंद्रीय प्रर्यवेक्षक नियुक्त किए गए बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद और तरुण चुघ बुधवार को ईटानगर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई और विधायक दल का नेता चुना गया था। शाम को खांडू चुघ और कई विधायकों के साथ राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) केटी परनायक से मुलाकात करने राजभवन पहुंचे थे। उन्होंने इस दौरान सरकार बनाने का दावा पेश किया था।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने रखा था प्रस्ताव
राज्यपाल केटी परनाइक ने पेमा खांडू और उनके मंत्रियों को शपथ ग्रहण के लिए आज आमंत्रित किया था। इसकी जानकारी बीजेपी नेता तरुण चुघ ने दी थी। इस दौरान उन्होंने कहा कि बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष बियुराम वाघ ने मुख्यमंत्री के रूप में खांडू के नाम का प्रस्ताव रखा था। पार्टी के सभी 46 विधायकों ने इसका समर्थन किया।
वहीं पेमा खांडू ने इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा की सराहना करते हुए उन्हें तीसरी बार सीएम बनाने के लिए धन्यवाद दिया था।
चाउना मीन बने डिप्टी सीएम
बता दें कि राज्यपाल केटी परनाइक ने राज्य के सीएम के तौर पर पेमा खांडू को शपथ दिलाई इसके अलावा उप मुख्यमंत्री के तौर पर चाउना मीन को भी शपथ दिलाई गई है। सीएम और डिप्टी सीएम के अलावा बीजेपी के दस विधायकों ने मंत्रीपद की शपथ ली है।
कल विधायक दल के नेता चुने गए थे
बुधवार 12 जून को ईटानगर में हुई बैठक में खांडू को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया। मीटिंग में भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक रविशंकर प्रसाद और तरुण चुघ शामिल थे। इसके बाद खांडू सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राज्यपाल केटी परनायक से मिले थे।
पेमा खांडू 2016 से अरुणाचल के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने नबाम तुकी के इस्तीफे के बाद पहली बार पदभार संभाला था। जब खांडू पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने थे, तब वे कांग्रेस के साथ थे। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान वे भाजपा में शामिल हो गए। पेमा खांडू के पिता दोरजी खांडू भी अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
ये है पेमा खांडू सरकार में मंत्री
चाउना मीन – उपमुख्यमंत्री
कैबिनेट मंत्री
बियुराम वाघगे
न्यातो दुकम
गेब्रियल डेनवांग वांगसू
वांगकी लोवांग
पासंग दोरजी सोना
मामा नटुंग
दसांगलु पुल (निर्विरोध)
बालो राजा
केंटो जिनी
ओजिंग तासिंग
अरुणाचल प्रदेश: भाजपा को 2019 से 5 सीटें ज्यादा मिलीं
अरुणाचल में इस बार भाजपा को 60 में से 46 सीट पर जीत मिली है। पेमा खांडू सहित पार्टी के 10 प्रत्याशी निर्विरोध विधायक चुने गए थे। इसलिए चुनाव 50 सीटों पर ही हुए थे। राज्य में भाजपा का नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के साथ गठबंधन है।
NPP को 5 सीटें मिलीं। इस लिहाज से अरुणाचल में NDA के पास 51 सीटें हैं। अरुणाचल में भाजपा गठबंधन ने सभी 60 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जबकि कांग्रेस ने केवल 19 सीटों पर कैंडिडेट्स उतारे थे।
2014 चुनाव के बाद अरुणाचल में सियासी संकट आया
2014 के चुनाव में कांग्रेस ने 42 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया था। भाजपा को 11, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) को 5 और दो सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों को मिलीं।
हालांकि, 2016 में अरुणाचल प्रदेश में लंबे समय के लिए सियासी संकट देखने को मिला। राज्य में एक साल के भीतर 4 बार मख्यमंत्री बदले गए।
सबसे पहले दिसंबर 2015 में कांग्रेस के 42 में से 21 विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नबाम तुकी के खिलाफ बगावत की। इसके आधार पर राज्यपाल ने CM तुकी को बर्खास्त कर दिया। जनवरी 2016 के दौरान राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा।
इसके एक महीने के अंदर फरवरी में भाजपा ने पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) को समर्थन देकर कांग्रेस के बागी विधायकों के साथ सरकार बना ली। कांग्रेस के बागी गुट के नेता कालिखो पुल CM बने।
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने नबाम तुकी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को फिर से बहाल कर दिया। 13 जुलाई को कांग्रेस सरकार बहाल हुई, लेकिन 16 जुलाई को कांग्रेस विधायकों ने तुकी की जगह पेमा खांडू को विधायक दल का नेता चुन लिया।
पेमा खांडू को 44 विधायकों का समर्थन मिला। वे कांग्रेस की सरकार में राज्य के नए CM बने। हालांकि, 16 सितंबर 2016 को CM पेमा खांडू कांग्रेस के 42 विधायक के साथ भाजपा की सहयोगी पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) में शामिल हो गए।
21 दिसंबर को खांडू समेत 7 विधायकों को PPA अध्यक्ष ने निलंबित कर दिया। दिसंबर 2016 में खांडू ने PPA का साथ छोड़कर 43 विधायकों में से 33 के साथ भाजपा जॉइन की और बहुमत साबित किया।
भाजपा के पहले से ही 11 विधायक थे। उसने दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन से आंकड़ा 46 कर लिया। पेमा खांडू अरुणाचल प्रदेश में भाजपा के दूसरे मुख्यमंत्री बने। उनसे पहले 2003 में 44 दिनों के लिए गेगोंग अपांग के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी थी।
]]>अरुणाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बहुमत के साथ जीत हासिल की है। पूर्व मुख्यंमत्री दिवंगत दोरजी खांडू के बेटे पेमा खांडू राज्य में दो बार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। अब तीसरी बार मिली जीत के साथ ही खांडू तीसरी बार सत्ता का सिंहासन संभालेंगे। क्या आप जानते हैं कि तीसरी बार सीएम बनने वाले पेमा खांडू कौन हैं? उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत कब हुई? कांग्रेस से बगावत करने बाद वे पहली बार मुख्यमंत्री कब बने? किस तरह वे देश के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने?
पेमा खांडू का जन्म 21 अगस्त, 1979 को तवांग में हुआ था। चीन की सीमा से सटे तवांग जिले के ग्यांगखर गांव से ताल्लुक रखने वाले पेमा खांडू मोनपा जनजाति से आते हैं। उन्होंने तवांग के बोम्बा में सरकारी माध्यमिक विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद वर्ष 2000 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कला स्नातक की उपाधि हासिल की। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा।
ऐसे हुई राजनीतिक सफर की शुरुआत
यूं तो पेमा खांडू को राजनीति विरासत में ही मिली है। उनके पिता दोरजी खांडू अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। 2005 में पेमा खांडू राजनीति में कदम रख दिया था, जब उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन, उनके असल राजनीतिक सफर की शुरुआत तब होती है, जब उनके पिता दोरजी खांडू का हेलिकॉप्टर हादसे में निधन हो गया। दोरजी खांडू 2007 से 2011 तक अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे। इसके बाद पेमा खांडू ने वर्ष 2011 में अपने ही पिता के विधानसभा क्षेत्र मुक्तो से चुनाव लड़ा और विजयी हुए। इसके बाद पेमा खांडू को अरुणाचल प्रदेश मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। वर्ष 2014 में पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी के नेतृत्व वाली सरकार में पेमा खांडू को शहरी विकास मंत्री नियुक्त किया गया। इसके बाद उनके राजनीतिक जीवन में बड़ा मोड़ आया।