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मध्य प्रदेश में पिछले तीन महीनों से चल रही एलपीजी (घरेलू गैस सिलेंडर) की भारी किल्लत से आम जनता परेशान है। राजधानी भोपाल में भी यह संकट लगातार बना हुआ है और गैस एजेंसियों पर सिलेंडरों की बुकिंग को लेकर लोग चक्कर काट रहे हैं। बुधवार को ही एक गैस एजेंसी पर सिलेंडर न मिलने को लेकर उपभोक्ताओं ने भारी हंगामा किया। इस बड़े संकट से निपटने के लिए अब खाद्य विभाग भोपाल को 'सिलेंडर फ्री' बनाने की एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत जिन इलाकों में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की पाइपलाइन बिछ चुकी है, वहां भविष्य में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।
चार बड़ी कॉलोनियों से होगी शुरुआत
फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि भोपाल में 'थिंक गैस' कंपनी के जरिए घरों तक सीधे पाइपलाइन से गैस पहुंचाने का काम किया जा रहा है। यह लाइन मिसरोद से शुरू होकर होशंगाबाद रोड के दोनों तरफ की कॉलोनियों को कवर कर रही है। वर्तमान में बावड़ियाकलां, सलैया, अयोध्या बायपास, अवधपुरी और साकेत नगर के अधिकांश घरों में कनेक्शन दिए जा चुके हैं। अब विभाग ने योजना बनाई है कि जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछ रही है, वहां पहले शत-प्रतिशत (100%) घरों को कनेक्शन दिया जाए और उसके बाद ही अगली कॉलोनी में काम शुरू हो। इसके लिए पहले चरण में चार बड़ी कॉलोनियों— बावड़ियाकलां की केराल केनसिप, अवधपुरी की सौम्या पार्कलैंड, अयोध्या बायपास की सागर लैक व्यू होम्स और सलैया की आकृति ग्रीन को चुना गया है।
172 कॉलोनियों के सामने से गुजर रही है लाइन
अधिकारियों के मुताबिक, थिंक गैस कंपनी ने होशंगाबाद रोड के दोनों ओर समेत कुल 172 कॉलोनियों के मुख्य रास्तों पर गैस लाइन बिछा दी है। यहां रहने वाले लोग कंपनी के पास आवेदन करके अपने घरों में कनेक्शन लगवा रहे हैं और कटारा हिल्स समेत कई अन्य इलाकों से भी लोग इसके लिए तेजी से फॉर्म भर रहे हैं। विभाग अब चार-चार कॉलोनियों का समूह बनाकर फोकस कर रहा है ताकि काम जल्दी पूरा हो सके। एक तय समय सीमा के बाद इन इलाकों में एलपीजी सिलेंडरों की होम डिलीवरी हमेशा के लिए बंद कर दी जाएगी।
मंत्री और अफसरों के बंगलों में भी बिछेगी पाइपलाइन
भोपाल के दो सबसे बड़े और वीआईपी इलाके 'चार इमली' और '74 बंगला' में भी इस समय भूमिगत (अंडरग्राउंड) गैस पाइपलाइन बिछाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। आपको बता दें कि इन दोनों क्षेत्रों में मध्य प्रदेश के 75 फीसदी से ज्यादा मंत्रियों, सीनियर आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों के सरकारी बंगले हैं। इन इलाकों के अधिकांश हिस्सों में लाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है और कुछ ही दिनों में बंगलों के भीतर कनेक्शन देने की शुरुआत हो जाएगी।
अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते गहराया संकट
दरअसल, वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े सैन्य टकराव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसी का असर है कि मध्य प्रदेश और भोपाल में पिछले कई महीनों से घरेलू गैस की भारी किल्लत देखी जा रही है। भोपाल में इस समय हर दिन 12 से 14 हजार सिलेंडरों की बुकिंग हो रही है, जबकि कंपनियों की तरफ से सप्लाई केवल 9 से 10 हजार सिलेंडरों की ही हो पा रही है। इस किल्लत की चपेट में आम जनता के साथ-साथ कई बड़े मंत्री और अफसर भी आ गए थे, जिसके बाद वीआईपी इलाकों में भी पाइपलाइन बिछाने के काम में तेजी लाई गई है।
होशंगाबाद रोड पर सबसे ज्यादा 43 हजार कनेक्शन
वर्तमान में पीएनजी पाइपलाइन का सबसे बड़ा जाल होशंगाबाद रोड पर फैला हुआ है, जहां करीब 43 हजार घरों में गैस पाइपलाइन के जरिए खाना बन रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस योजना को पुराने शहर (ओल्ड सिटी) की तरफ भी ले जाया जाएगा ताकि वहां के बड़े इलाकों को कवर करके घर-घर गैस पहुंचाई जा सके। इसके अलावा घरों के साथ-साथ शहर के सभी बड़े होटलों, रेस्टोरेंटों, व्यावसायिक संस्थानों और बहुमंजिला इमारतों (मल्टीस्टोरी बिल्डिंग) को भी अनिवार्य रूप से पीएनजी लाइन से जोड़ा जाएगा।
90 दिनों में कनेक्शन लेना होगा अनिवार्य
सरकार ने इस योजना को लेकर एक नई और सख्त गाइडलाइन भी जारी कर दी है। इसके नियम के मुताबिक, जिन इलाकों में गैस की अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछ जाएगी, वहां के निवासियों को 90 दिनों के भीतर पीएनजी कनेक्शन लेना अनिवार्य होगा। यदि कोई तय समय के भीतर नया कनेक्शन नहीं लेता है, तो उसका पुराना एलपीजी सिलेंडर वाला कनेक्शन सरकारी आदेश के तहत ब्लॉक या काट दिया जाएगा।
PNG को लेकर केंद्र सरकार ने गाइडलाइन भी जारी की गैस संकट के बीच ही भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 'अनिवार्य वस्तु अधिनियम, 1955' के तहत एक नया आदेश जारी किया था। इस नए नियम का मकसद देशभर में गैस पाइपलाइन बिछाने और उनके विस्तार के काम को रफ्तार देना है।
अब पाइपलाइन के काम में जमीन मिलने या मंजूरी मिलने में होने वाली देरी खत्म हो गई है। जिससे रिहायशी इलाकों (Residential areas) तक गैस इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से पहुंच सकेगा।
नए एक्ट के 4 नियम समझें
1. सोसाइटियों और RWA की मनमानी खत्म
कई बार हाउसिंग सोसाइटियों या RWA (रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) के विरोध की वजह से पाइपलाइन का काम रुक जाता था। अब ऐसा नहीं होगा।
अगर कोई कंपनी पाइपलाइन के लिए रास्ता मांगती है तो सोसाइटी को 3 दिन के भीतर मंजूरी देनी होगी।
अगर सोसाइटी ने मना किया या देरी की तो वहां रहने वाले सभी घरों की PNG सप्लाई पर रोक लगाई जा सकती है।
2. छोटे इलाकों को 10 दिन में मंजूरी मिलेगी
पाइपलाइन बिछाने के लिए अब सरकारी विभागों को फाइलों को लटकाने की इजाजत नहीं है।
छोटे नेटवर्क के लिए 10 दिन और बड़ी लाइनों के लिए 60 दिन में मंजूरी देना अनिवार्य है।
अगर विभाग तय समय में जवाब नहीं देता, तो उसे 'डीम्ड क्लियरेंस' यानी 'ऑटोमैटिक मंजूरी' मान लिया जाएगा और काम शुरू कर दिया जाएगा।
3. जमीन और मुआवजे का झंझट खत्म
अगर पाइपलाइन किसी की निजी जमीन से गुजर रही है, तो अब मुआवजे को लेकर सालों तक केस नहीं चलेंगे। सरकार ने सर्किल रेट के आधार पर एक फिक्स फॉर्मूला बना दिया है। अगर जमीन मालिक राजी नहीं होता है, तो जिला कलेक्टर हस्तक्षेप करके काम को आगे बढ़ाएंगे। ताकि सप्लाई में देरी न हो।
4. क्या यह आपकी सुरक्षा और बचत के लिए है?
सरकार ने इसे 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत जारी किया है, ताकि युद्ध जैसे हालात में भी आपको रसोई गैस की कमी न पड़े।
फायदा: आपको सिलेंडर बुकिंग या खत्म होने की टेंशन नहीं रहेगी।
नुकसान: जो लोग अपनी मर्जी से सिलेंडर इस्तेमाल करना चाहते थे, उनके पास अब विकल्प सीमित हो जाएंगे।
इस नीति का मुख्य उद्देश्य पाइपलाइन के माध्यम से प्राकृतिक गैस (PNG) को सीधे घरों तक पहुंचाना है। इसके लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग, आपूर्ति में देरी या उपलब्धता को लेकर होने वाली अनिश्चितताओं से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।
रायपुर सहित राज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से गैस पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे 24 घंटे निर्बाध और सुरक्षित गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
पारंपरिक सिलेंडर पर निर्भरता में कमी
राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों में पाइपलाइन गैस वितरण प्रणाली पहले से संचालित है और इसे व्यापक रूप से प्रभावी माना गया है। इन महानगरों में रसोई गैस के पारंपरिक सिलेंडर पर निर्भरता में कमी आई है और आपूर्ति अधिक नियमित व सुगम बनी है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय उसी दिशा में एक तार्किक विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में लंदन, टोक्यो और सिंगापुर जैसे शहरों में पाइपलाइन आधारित गैस वितरण लंबे समय से स्थापित व्यवस्था है। इन शहरों के अनुभव बताते हैं कि यह प्रणाली न केवल उपभोक्ताओं के लिए सुविधाजनक है, बल्कि ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज से भी बेहतर विकल्प प्रदान करती है।
निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी
नीति के लागू होने से राज्य में गैस अवसंरचना के विकास के साथ निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी, जिससे निर्माण, वितरण और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इसके साथ ही स्वच्छ ईंधन के उपयोग से वायु प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है, जो तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल छत्तीसगढ़ को ऊर्जा क्षेत्र में अधिक व्यवस्थित और भविष्य उन्मुख राज्य के रूप में स्थापित कर सकती है। उपभोक्ता सुविधा, औद्योगिक जरूरतों और पर्यावरणीय संतुलन—तीनों को ध्यान में रखकर तैयार की गई यह नीति राज्य के शहरी विकास को नई गति देने की क्षमता रखती है।
]]>मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट का असर भारत पर भी देखने को मिल रहा है. देश में लोगों को LPG गैस सिलेंडर को लेकर कई दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं. इसी बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है कि जिन इलाकों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) उपलब्ध है, वहां के परिवार यदि इसे अपनाते नहीं हैं, तो उनकी LPG सिलेंडर सप्लाई 3 महीने बाद बंद कर दी जाएगी. यह आदेश पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा नए नियमों, 'प्राकृतिक गैस तथा पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश, 2026' को अधिसूचित करते हुए जारी किया गया है. इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं, कि नया PNG कनेक्शन कैसे लिया जा सकता है और इसके लिए किन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है।
शहर के अरेरा कॉलोनी, शाहपुरा सहित कई पॉश इलाकों में पीएनजी लाइन बिछाई जा चुकी है। ऐसे में इन सभी इलाकों के एलपीजी उपभोक्ताओं को पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन लेना अब अनिवार्य हो गया है। यदि वह नए नियमों का पालन नहीं करते हैं तो तीन महीने बाद एलपीजी आपूर्ति बंद की जा सकती है।
इनमें से शहरी क्षेत्र में करीब साढ़े तीन लाख उपभोक्ता हैं, जिनमें से बाग मुगलिया, बागसेवनियां, रोहित नगर, सलैया और पिपलानी क्षेत्र में करीब 36 हजार घरों में पीएनजी कनेक्शन लगाए जा चुके हैं और आपूर्ति भी शुरू कर दी गई है।
जबकि अरेरा कॉलोनी, शाहपुरा, गुलमोहर, बावड़िया कलां, कोलार रोड, होशंगाबाद रोड, कटारा हिल्स, अयोध्या बायपास और करोंद सहित कई इलाकों में लाइन बिछाई जा चुकी है। ऐसे में अब इन इलाकों के करीब एक लाख से अधिक एलपीजी उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन देने की तैयारी है।
इन उपभोक्ताओं को नए नियमों के अनुसार पीएनजी कनेक्शन लेना होगा, यदि वह नहीं लेते हैं तो एलपीजी कनेक्शन काट दिया जाएगा। अब नए नियमों के तहत एक उपभोक्ता के पास एलपीजी-पीएनजी दोनों कनेक्शन नहीं हो सकते हैं, इनमें से उन उपभोक्ताओं को पीएनजी देने की तैयारी है, जिनके घर से तीन किमी दूर थिंक गैस की पाइपलाइन गुजरी है।
नए PNG कनेक्शन के लिए कैसे अप्लाई करें?
सबसे पहले अपने स्थानीय गैस प्रोवाइडर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं, जैसे इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) और महानगर गैस लिमिटेड (MGL)
वेबसाइट पर जाकर 'New PNG Connection' के ऑप्शन पर क्लिक करें.
वहां मांगी गई पर्सनल डिटेल्स और एड्रेस से जुड़ी जानकारी दर्ज करें.
इसके बाद जरूरी दस्तावेज अपलोड करें.
अब इंस्टॉलेशन या रजिस्ट्रेशन फीस का ऑनलाइन पेमेंट करें.
एप्लिकेशन सबमिट करने के बाद रेफरेंस नंबर नोट कर लें, ताकि भविष्य में एप्लिकेशन का स्टेटस चेक किया जा सके.
किन डॉक्यूमेंट्स की होती है जरूरत?
फोटो आइडेंटिटी प्रूफ (कोई एक): आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस
एड्रेस प्रूफ (कोई एक): हाल का बिजली बिल, BSNL टेलीफोन बिल, रेंट एग्रीमेंट, राशन कार्ड या प्रॉपर्टी टैक्स बिल
ओनरशिप प्रूफ (कोई एक): रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट या सेल डीड, सोसाइटी का लेटर या शेयर सर्टिफिकेट, या प्रॉपर्टी टैक्स रिसिप्ट
किराएदारों के लिए: मकान मालिक का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) और उनके ओनरशिप प्रूफ
पासपोर्ट साइज फोटो
कितना होता है खर्चा?
PNG गैस कनेक्शन लेते समय सिक्योरिटी डिपॉजिट एक अहम खर्च होता है. इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक घरेलू PNG कनेक्शन के लिए एक रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट लिया जाता है. यह राशि आमतौर पर करीब 5,000 रुपये से 10,000 रुपये के बीच होती है, जो कनेक्शन के टाइप और गैस की खपत पर निर्भर करती है. IGL के अनुसार, नए PNG कनेक्शन के लिए 7,000 रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट ली जाती है. इस सिक्योरिटी डिपॉजिट में 15 मीटर तक की GI या कॉपर पाइपलाइन शामिल होती है. अन्य सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां भी इसी तरह का डिपॉजिट सिस्टम अपनाती हैं, लेकिन अलग‑अलग शहरों और गैस प्रोवाइडर्स के हिसाब से डिपॉजिट की राशि में थोड़ा फर्क हो सकता है।
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