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तमिलनाडु की राजनीति में रविवार को एक नया युग की शुरूआत हो गई है। 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के संस्थापक जोसेफ विजय ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। यह राज्य में पहली बार है जब किसी गैर-द्रविड़ पार्टी ने सरकार बनाई है। नई सरकार के गठन के साथ ही डीएमके और एआईएडीएमके का दशकों पुराना दबदबा खत्म हो गया है। विजय के साथ में 9 और मंत्रियों ने सपथ ली है। अब विजय को 13 मई तक विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना होगा। विजय के साथ जिन नौ मंत्रियों ने सपथ ली है आइये उनके बार में हम आपको बताते है।
एन आनंद
61 साल के एन आनंद को लोग 'बुसी आनंद' के नाम से भी जानते हैं। वह विजय के सबसे भरोसेमंद साथी माने जाते हैं। साल 2006 में वह पुडुचेरी से विधायक चुने गए थे। अब उन्होंने चेन्नई की टी नगर सीट से जीत हासिल की है। वह टीवीके के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और पहले विजय रसिगर मंदरम के प्रमुख के तौर पर काम कर चुके हैं।
आधव अर्जुना
बास्केटबॉल खिलाड़ी और बिजनेसमैन रहे आधव अर्जुना अब राजनीति में सक्रिय हैं। वह बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी हैं। वह वीसीके पार्टी छोड़कर टीवीके में शामिल हुए थे। पार्टी के महासचिव के रूप में उन्होंने चुनाव अभियान में बड़ी भूमिका निभाई और चेन्नई की विल्लिवाक्कम सीट से जीत दर्ज की।
राजमोहन अरुमुगम
डिजिटल प्लेटफॉर्म 'पुट चटनी' से मशहूर हुए राजमोहन ने युवाओं और नए वोटरों को पार्टी से जोड़ने में मदद की। प्रचार सचिव के तौर पर उन्होंने सोशल मीडिया और यूट्यूब वीडियो के जरिए पार्टी की नीतियों को लोगों तक पहुँचाया। उनके मजाकिया अंदाज और रील्स को युवाओं ने काफी पसंद किया।
सी टी आर निर्मल कुमार
44 साल के निर्मल कुमार टीवीके की डिजिटल रणनीति के मुख्य चेहरा हैं। उनके पास बीजेपी और एआईएडीएमके के सोशल मीडिया सेल में काम करने का अनुभव है। उन्होंने व्हाट्सएप और मीम नेटवर्क का एक बड़ा जाल तैयार किया, जिससे 2025 और 2026 के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पार्टी का दबदबा बना रहा।
के जी अरुणराज
पूर्व आईआरएस अधिकारी और डॉक्टर अरुणराज ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर टीवीके जॉइन की। वह पार्टी में प्रचार और नीति के महासचिव हैं। उन्होंने तमिलनाडु, बिहार और महाराष्ट्र में आयकर विभाग में सेवा दी है। उन्होंने तिरुचेंगोडु सीट से चुनाव जीता है।
के ए सेंगोट्टैयन
50 साल से ज्यादा का राजनीतिक अनुभव रखने वाले सेंगोट्टैयन पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता हैं। वह एआईएडीएमके के दिग्गज नेता रहे हैं और नवंबर 2025 में टीवीके में शामिल हुए। उन्होंने गोबीचेट्टीपलयम सीट से नौवीं बार जीत हासिल की है। वह पार्टी की कार्यकारी समिति के मुख्य समन्वयक हैं।
कीर्तना एस
कीर्तना एस विजय की कैबिनेट में फिलहाल इकलौती महिला मंत्री हैं। चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके पास 22.6 लाख रुपये की संपत्ति और 12.8 लाख रुपये की देनदारी है। उनकी सालाना कमाई 6.4 लाख रुपये है और उन पर कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
पी वेंकटरमणन
48 साल के वेंकटरमणन ने मायलापुर सीट से 70,070 वोटों के साथ जीत दर्ज की है। वह पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उन पर कोई आपराधिक केस नहीं है। उनके पास कुल 5.4 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जिसमें 3.2 करोड़ रुपये की चल संपत्ति शामिल है।
केटी प्रभु
पेशे से डेंटिस्ट डॉ. केटी प्रभु ने शिवगंगा की करैकुडी सीट से चुनाव जीता है। वह पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 11.4 करोड़ रुपये है। उनकी सालाना आय 54.6 लाख रुपये है और उन पर 3.3 करोड़ रुपये की देनदारी है।
तमिल फिल्मों के सुपरस्टार विजय ने अपनी सियासी पारी के आगाज से न सिर्फ सबको हैरान कर दिया, बल्कि उनकी पार्टी तमिलागा वेट्री कषगम (टीवीके) अपने गठन के दो साल के भीतर ही देश के उन चंद सियासी 'स्टार्टअप' में शामिल हो गई जो अपने पहले ही चुनाव में सत्ता तक पहुंचने में सफल रहे। टीवीके अब आम आदमी पार्टी, असम गण परिषद और तेलुगु देशम पार्टी जैसी पार्टियों की जमात में शामिल हो गयी है जो अपने पहले चुनाव में ही सत्तासीन हो गए।
AAP ने भी किया था कमाल
आम आदमी पार्टी ने 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी सियासी पारी की शुरुआत की थी और 70 सदस्यीय विधानसभा चुनाव में 28 सीटें जीती थीं और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई थी। असम गण परिषद 1985 में अपने गठन के तुरंत बाद सत्ता पर काबिज हुई थी। तेदेपा ने अपने गठन के एक साल बाद 1983 में आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में 201 सीटें जीतकर भारी बहुमत के साथ जीत हासिल की थी।
सभी को नहीं मिली सफलता
कुछ राजनीतिक दल अपने आगाज के साथ ही कामयाबी के शिखर पर पहुंच गए, लेकिन कई ऐसे दल भी रहे जिन्होंने अस्तित्व में आने के बाद अपने पहले चुनाव में शानदार दस्तक दी, लेकिन सत्ता में आने के लिए इंतजार करना पड़ा। पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की 'जन सुराज पार्टी' चौतरफा चर्चा के बावजूद सफलता हासिल नहीं कर सकी। इसी तरह अभिनेता कमल हासन की पार्टी मक्कल निधि मय्यम 2021 को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली।
शुरुआत से ही चर्चा में रही टीवीके
टीवीके ने शुरू से ही जोरदार चर्चा पैदा की और अतीत में फिल्मी सितारों द्वारा बनाए गए कई राजनीतिक 'स्टार्टअप' के दक्षिण में अच्छे प्रदर्शन की तर्ज पर तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में इससे काफी उम्मीदें थीं। टीवीके ने तमिलनाडु के दो मुख्य दलों द्रमुक और अन्नाद्रमुक को पछाड़कर सब को हतप्रभ कर दिया।
बिहार और यूपी में आईं नई पार्टियां
बिहार और उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई राजनीतिक दल सियासी 'स्टार्टअप' के रूप में सामने आए, जिनमें कुछ नाकाम हुए और कुछ सीमित दायरे में कायम हैं। बिहार में पुष्पम प्रिया चौधरी की 'प्लूरल्स पार्टी' भी एक ऐसा दल है जो चर्चा के बावजूद कुछ सफलता हासिल नहीं कर सकी।
जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) और उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा बिहार में सीमित दायरे में अपना अस्तित्व बनाए हुए हैं। उत्तर प्रदेश में निषाद पार्टी, पीस पार्टी, अपना दल (सोनेलाल) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) जैसी कुछ ऐसे ही दल हैं।
]]>आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए ये हफ्ता किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा. सात दिनों के अंदर पार्टी ने राज्यसभा में अपने 10 में से 7 सांसदों को खो दिया. इसे एक सोचा-समझा राजनीतिक ऑपरेशन बताया जा रहा है. इसकी वजह से संसद में सियासत का गणित पूरा तरह बदल गया है.
बुधवार, 22 अप्रैल की सुबह जब अरविंद केजरीवाल को इस तरह के किसी कदम अंदेशा हुआ, तो उन्होंने तुरंत अपने सांसदों को फोन मिलाना शुरू किया. कुछ ने फोन उठाए, कुछ ने गोल-मोल जवाब दिए और कुछ ने फोन ही नहीं उठाए.
केजरीवाल शुक्रवार सुबह तक संदीप पाठक को फोन करते रहे और उन्हें भरोसा दिया गया कि पाठक उनके ही साथ हैं. लेकिन शुक्रवार दोपहर तक पाठक सीधे बीजेपी मुख्यालय पहुंच गए और सत्ताधारी पार्टी का दामन थाम लिया.
पहले आप सांसदों का विलय सोमवार, 27 अप्रैल को होना था. गृह मंत्री पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार से लौटकर सभी सांसदों से मिलने वाले थे. लेकिन फिर बीजेपी को पता चला कि केजरीवाल को इस साजिश की भनक लग गई है और वो सांसदों को मनाने की कोशिश में जुट गए हैं. ऐसे में इस 'ऑपरेशन' की तारीख बदल दी गई और शाह की गैर-मौजूदगी में ही शुक्रवार को मिशन को अंजाम दे दिया गया.
इस ऑपरेशन के मुख्य किरदार
1. राघव चड्ढा: पर्दे के पीछे के रणनीतिकार
राघव चड्ढा इस पूरे ऑपरेशन के फील्ड कमांडर बताए जा रहे हैं. शराब नीति मामले के बाद से ही वो पार्टी से दूरी बनाए हुए थे. लंदन में उनकी आंखों की सर्जरी के दौरान ही बीजेपी से बातचीत का रास्ता साफ हुआ. वापस आकर उन्होंने एक-एक करके दूसरे सांसदों को भरोसे में लिया.
2. संदीप पाठक: सबसे बड़ा झटका
संदीप पाठक वो शख्स हैं जिन्होंने पंजाब में AAP की ऐतिहासिक जीत की नींव रखी थी. केजरीवाल को सबसे ज्यादा दुख पाठक के जाने का हुआ क्योंकि वो आखिरी मिनट तक केजरीवाल को वफादारी का भरोसा दिलाते रहे और फिर सीधे राघव चड्ढा के साथ बीजेपी में शामिल हो गए.
3. हरभजन सिंह: पहले ही तय था रुख
पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह का जाना चौंकाने वाला नहीं था. सूत्रों के मुताबिक, उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान ही BCCI से आए एक फोन ने उनका रुख साफ कर दिया था. वो पहले से ही बीजेपी के प्रभाव क्षेत्र में थे.
4. उद्योगपति सांसदों की 'मजबूरी'
राजिंदर गुप्ता (ट्राइडेंट ग्रुप), विक्रमजीत साहनी और अशोक मित्तल (LPU) जैसे सांसदों का आधार राजनीति से ज्यादा व्यापार था. अशोक मित्तल के संस्थानों पर विलय से ठीक 9 दिन पहले ED की छापेमारी हुई थी. इन सांसदों के लिए केंद्र सरकार के साथ चलना एक व्यावसायिक जरूरत भी थी.
बीजेपी को क्या मिला?
राजनीतिक रूप से पंजाब में बीजेपी को शायद तुरंत बड़ा फायदा न मिले, क्योंकि इनमें से ज्यादातर सांसद जमीनी नेता नहीं हैं. लेकिन संसदीय गणित में बीजेपी को बंपर जीत मिली है:
बीजेपी सांसदों की संख्या 113 पहुंच गई है और NDA ने पहली बार राज्यसभा में साधारण बहुमत पार कर लिया है. अब सरकार को 'वन नेशन वन इलेक्शन' जैसे बड़े बिल पास कराने के लिए क्षेत्रीय दलों के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी. विपक्ष अब राज्यसभा में बिलों को नहीं रोक पाएगा.
शुक्रवार शाम तक AAP के पास राज्यसभा में सिर्फ 3 सांसद (संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल) रह गए. केजरीवाल ने इसे पंजाबियों के साथ धोखा बताया, लेकिन बीजेपी के लिए 2027 के पंजाब मिशन का असली खेल अब शुरू हुआ है.
]]>छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर 1 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रायपुर के एकदिवसीय दौरे पर आने वाले हैं। उनके आगमन से पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री से 21 सवालों की सूची जारी करते हुए कहा कि मोदी सरकार की गारंटी दम तोड़ चुकी है। क्या राज्योत्सव में इसका जवाब देंगे। इसके अलावा कांग्रेस ने रोजगार, किसानों, महिलाओं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी जवाब मांगा है।
कांग्रेस के 21 सवाल पीएम मोदी से
मोदी की गारंटी दम तोड़ चुकी है क्या आप राज्योत्सव में इसका जवाब देंगे?
आपने 1 लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा था, दो साल में 40 हजार नौकरी भी मिली नहीं।
संविदा कर्मचारियों को 100 दिन में नियमितीकरण करने का वादा कब पूरा होगा?
हर विवाहित महिला को महतारी वंदन के तहत 1000 रुपये प्रतिमाह देने का वादा था, काफी महिलाओं के नाम काटे गए, आपने 500 रुपये में सिलेंडर देने की बात कही थी?
आपके राज में हत्या, लूट, बलात्कार, आगजनी बढ़ी, कानून-व्यवस्था चरमराई?
छत्तीसगढ़ में बांग्लादेशी घुसपैठी आ रहे, पाकिस्तान से ड्रग्स आ रहे, इस पर लगाम क्यों नहीं?
सेंट्रल पुल में चावल क्यों नहीं खरीदा जा रहा, सोसाइटियों में आज भी धान का उठाव नहीं?
आपकी सरकार में साढ़े 18 लाख पीएम आवास दिए जाने की बात कही गई थी। शहरी और ग्रामीण कितने आवास स्वीकृत हुए? डिटेल बताएं?
किसानों को यूरिया-DAP की किल्लत क्यों?
प्रदेश में कितने स्कूल खोले गए, आपके राज में 10,000 से ज्यादा स्कूल बंद क्यों किए?
महादेव सट्टा ऐप चल रहा, शराब माफिया बेलगाम – कार्रवाई क्यों नहीं?
कोल माइंस बेचा जा रहा, अवैध रूप से पेड़ भी काटे जा रहे?
आपने हॉफ बिजली बिल योजना बंद कर, बिजली के दाम चार गुना बढ़ाए, लेकिन बिहार में 125 यूनिट फ्री बिजली ऐसा क्यों?
बस्तर बाढ़ पीड़ितों को केंद्र सरकार ने राहत पैकेज क्यों नहीं दिया?
छत्तीसगढ़ की यात्री ट्रेनें ही क्यों रद्द होती हैं?
नगरनार इस्पात संयंत्र का विनिवेशीकरण क्यों?
एनएमडीसी मुख्यालय बस्तर में कब खुलेगा?
बस्तर के खनिज संसाधनों को बेचा जा रहा?
रायपुर के इकलौते मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए भटक रहे लोग, एक ही बेड पर दो प्रसूताएं क्यों?
सरकारी अस्पतालों में दवाएं और इलाज क्यों नहीं?
2 करोड़ नौकरी और लोगों के खाते में 15 लाख खाते में कब देंगे?
भाजपा पर हमला
कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा के बयान “कांग्रेस दिल्ली से नहीं, इटली से चलने वाली पार्टी” पर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि भाजपा में पर्ची से मुख्यमंत्री बनते हैं, वे पसंदीदा मंत्री तक नहीं चुन पाते, दिल्ली से पर्ची आती है। भाजपा नेता कांग्रेस के लिए भी वही सपना देख रहे हैं।
घुसपैठियों पर बैज का पलटवार
घुसपैठियों को लेकर डिप्टी CM विजय शर्मा के बयान पर PCC चीफ दीपक बैज ने कहा कि आप गृह मंत्री हैं, सारे अधिकार आपके पास हैं। पाकिस्तान से ड्रग्स आ रहा है, बांग्लादेशी घुसपैठिए आ रहे हैं, कार्रवाई कौन करेगा?
राज्योत्सव में बाहरी कलाकारों पर सवाल
राज्योत्सव में बाहरी कलाकारों को बुलाने पर दीपक बैज ने कहा कि हम पहले दिन से कह रहे, स्थानीय कलाकारों को भी बाहरी कलाकारों जितना ही सम्मान और मंच मिलना चाहिए।
‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान है जारी – दीपक बैज
‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान को लेकर दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस का हस्ताक्षर अभियान जारी है। 10 से 12 लाख हस्ताक्षर फॉर्म आएंगे, जिन्हें हम AICC को भेजेंगे, चुनाव आयोग को भेजेंगे। चुनाव आयोग द्वारा यह बात कही जा रही थी कि राहुल गांधी को हलफनामा देना चाहिए। आम जनता इस पर सवाल उठा रही है।
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