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अपने बयानों से विवादों में रहने वालीं बीजेपी की पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने एक बार फिर ऐसी बात कह दी है, जो चर्चा का विषय बन गई है. पहलगाम आतंकी हमले में धर्म पूछ कर लोगों की हत्या के बदले में भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर पर प्रज्ञा ठाकुर ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा, "आतंकियों ने नहीं, सीधी सी बात है कि पाकिस्तान से मुस्लिम आए और नाम और धर्म पूछकर हिन्दुओं को मार दिया."
पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा, "मुस्लिम ने हिन्दुओं पर गोलियां बरसाईं और उनकी हत्या की. इसलिए ऑपरेशन सिंदूर हिन्दुत्व का प्रतीक है. सिन्दूर हिन्दुओं में सुहाग का प्रतीक माना जाता है. पाकिस्तान से आए लोगों ने पहलगाम में महिलाओं के सुहाग को उजाड़ दिया, इसलिए इसका नाम ऑपरेशन सिंदूर रखा गया. पाकिस्तान और मुसलमानों ने हमारी भावनाओं को आहत किया है."
प्रज्ञा ठाकुर ने आगे कहा, ''यह बहुत ही वीभत्स और हृदयविदारक घटना है. जिन लोगों ने हत्याएं की हैं, उनको भारत नहीं छोड़ेगा. उस देश को भारत नहीं छोड़ेगा, जहां से ये पनपते और पलते हैं."
उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा,‘‘पाकिस्तान के गोला-बारूद और आतंकवादी कुछ नहीं कर पाए। उन्होंने जितने भी हथियार चलाए, वे हथियार भारत की सीमा के बाहर ही भस्म हो गए। वे एक आक्रमण नहीं कर पाए और भारत ने उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया।’’
भाजपा नेता ने भारत-पाक संघर्ष विराम के संदर्भ में पाकिस्तान पर प्रहार किया और कहा,‘‘लोगों ने कहा कि यह क्या हो गया? युद्ध क्यों बंद कर दिया? अरे, युद्ध तो बराबरी वालों से लड़ा जाता है। एक कुत्ते से हाथी कभी युद्ध नहीं करता।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर प्रश्नवाचक चिन्ह खड़े कर रहे हैं।
ठाकुर ने कांग्रेस के इतिहास को ‘‘देशद्रोह का इतिहास’’ करार देते हुए कहा कि यह इतिहास किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने कहा,‘‘हमारे देश की जनता चुन-चुन कर जवाब दे और कांग्रेस का सूपड़ा साफ करे।’’
'पाकिस्तान में सभी आतंकी हैं'- प्रज्ञा ठाकुर
पाकिस्तान पर हमला बोलते हुए प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा, "यह बात सत्य है कि पाकिस्तान में सभी आतंकी हैं. चाहे उनकी सेना हो, चाहे मुख्यमंत्री हों या प्रधानमंत्री हों, सभी आतंकवादी हैं. इसलिए उनको आतंकवादी कह सकते हैं, लेकिन ये भारत में मुसलमान बनकर आए थे और हिन्दुओं को धर्म पूछकर मारा. मुसलमानों को नहीं मारा. ये तय कर के आए थे. अगर किसी ने झूठ कह दिया कि हम मुसलमान हैं, तो उनसे कलमा पढ़ने के लिए बोला. नहीं पढ़ पाए तो उन्हें मार दिया गया."
उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती पर प्रज्ञा ठाकुर
आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा था केंद्र शासित प्रदेश की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य के पास नहीं बल्कि उप राज्यपाल के पास होती है. इसपर बीजेपी नेता प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, "उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ऐसे लोग हैं जो कभी नहीं चाहते कि अनुच्छेद-370 हटाया जाए. महबूबा मुफ्ती ने कहा भी था कि अगर 370 हटाई गई तो खून की नदियां बह जाएंगी. इन लोगों के रहते हुए कश्मीर में कभी शांति स्थापित नहीं हो सकती."
2008 के मालेगांव बम विस्फोट(Malegaon bom Blast) मामले में आरोपी पूर्व भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर(Pragya Singh Thakur) के खिलाफ जारी जमानती वारंट गुरुवार को एक विशेष अदालत में पेश होने के बाद रद्द कर दिया गया. नवंबर 2024 में, राष्ट्रीय जांच एजेंसी से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत ने ठाकुर के खिलाफ वारंट जारी किया था, क्योंकि वह कई बार अदालत के समक्ष पेश होने में विफल रही थीं.
वर्तमान में मुकदमे का अंतिम चरण चल रहा है, जिसमें सभी आरोपियों को रोजाना सुनवाई में उपस्थित होने का आदेश दिया गया है. गुरुवार को प्रज्ञा ठाकुर ने अपने वकील के माध्यम से जमानती वारंट को रद्द करने की मांग की. प्रज्ञा ठाकुर ने अपनी अर्जी में कहा कि वह अस्वस्थ होने के कारण अदालत में पेश नहीं हो सकती थीं.
विस्फोट 2008 में हुआ था
29 सितंबर 2008 को मुंबई से लगभग 200 किलोमीटर दूर मालेगांव में एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल में विस्फोट हुआ, जिसमें छह लोग मारे गए और 100 से अधिक लोग घायल हुए. कोर्ट ने जमानती वारंट को रद्द कर दिया और प्रज्ञा ठाकुर को शुक्रवार को अदालत में उपस्थित रहने का आदेश दिया.
महाराष्ट्र एटीएस (ATS) ने पहले मामले की जांच की, लेकिन बाद में यह एनआईए (NIA) को सौंप दिया गया. अक्टूबर 2018 में आरोपियों के खिलाफ आरोप लगाए गए थे. इस समय अदालत मामले की अंतिम दलीलें सुन रही है. बीजेपी नेता प्रज्ञा ठाकुर ने अपने वकील को बताया कि प्रतिबंधित संगठन सिमी इस ब्लास्ट में शामिल हो सकता है.
]]>कोर्ट में रहना जरूरी
कोर्ट ने कहा है कि उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। इसके साथ ही एनआईए कोर्ट ने कहा कि इस केस में आखिरी बहस चल रही है। ऐसे में प्रज्ञा ठाकुर का कोर्ट में मौजूद रहना ज़रूरी है। हालांकि, प्रज्ञा ठाकुर ने अपनी तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है कि अगर वो जिंदा रहीं तो कोर्ट जरूर जाएंगी।
वारंट जारी किया
मुंबई की स्पेशल NIA कोर्ट 2008 के मालेगांव ब्लास्ट मामले में आखिरी बहस कर रही है। कोर्ट का कहना है कि इस मामले में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का मौजूद रहना बेहद जरूरी है। लेकिन प्रज्ञा ठाकुर कोर्ट नहीं पहुंच रही थीं, जिसके चलते स्पेशल जज एके लाहौती ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया। कोर्ट ने प्रज्ञा ठाकुर को 13 नवंबर को पेश होने का आदेश दिया है।
अपनी हाल बताया
इस बीच साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर अपनी खराब तबीयत का हवाला दिया है। उन्होंने लिखा कि कांग्रेस_का_टॉर्चर सिर्फ ATS कस्टडी तक ही नहीं, मेरे जीवन भर के लिए मृत्यु दाई कष्ट का कारण हो गया। ब्रेन में सूजन, आंखों से कम दिखना, कानों से कम सुनना, बोलने में असंतुलन, स्टेरॉयड और न्यूरो की दवाओं से पूरे शरीर में सूजन. एक हॉस्पिटल में उपचार चल रहा है, जिंदा रही तो कोर्ट अवश्य जाऊंगी।
गौरतलब है कि साध्वी प्रज्ञा ने जो तस्वीर शेयर की है, उसमें साफ सूजन दिख रहा है। साध्वी प्रज्ञा भोपाल से सांसद रही हैं। अपने बयानों से वह कई बार पार्टी को मुश्किल में डालती रही हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। साथ ही सार्वजनिक कार्यक्रमों से भी वह दूर रहती हैं।
मालेगांव विस्फोट में साध्वी को बनाया गया था आरोपी
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव शहर के नासिक शहर में एक मोटरसाइकिल पर रखे विस्फोटक उपकरण के फटने से 6 लोग मारे गए और 100 से अधिक अन्य घायल हो गए थे। मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का नाम आरोपियों में शामिल था। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर बार-बार दावा करती रही हैं कि कस्टडी के दौरान उन पर काफी अत्याचार हुआ। तभी से वो फिजिकली ठीक नहीं रही हैं। इसके लिए वो कांग्रेस की सरकार और एटीएस की प्रताड़ना को जिम्मेदार मानती रही हैं।
NIA कोर्ट ने प्रज्ञा के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया
साध्वी प्रज्ञा ने कुछ समय पहले अपनी खराब हेल्थ के चलते 2008 में हुए मालेगांव ब्लास्ट मामले में अदालत में उनकी उपस्थिति से छूट के लिए आवेदन दायर किया था। अदालत ने सिर्फ मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उन्हें छूट भी दी थी। हालांकि हाल ही में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत ने साध्वी प्रज्ञा को 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले के सिलसिले में जमानती वारंट जारी किया है।
मामले में आरोपी ठाकुर अदालत की कार्यवाही के लिए उपस्थित नहीं हुईं, जिसके बाद अदालत ने उनकी उपस्थिति की मांग की। वारंट 13 नवंबर तक 'वापस करने योग्य' है, जिसका अर्थ है कि वारंट रद्द करने के लिए ठाकुर को उस तिथि तक अदालत में उपस्थित होना चाहिए।
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