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प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ चर्चा का विषय बना हुआ है। सरकार द्वारा यहां आने वाले लोगों के लिए खास प्रबंध किए हैं। लेकिन पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व पर हेलिकॉप्टर से श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा समय पर नहीं हो सकी। इस पर अब सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है और एविएशन कंपनी के सीईओ, पायलट समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
आरोप है कि हेलिकॉप्टर कंपनी ने बिना जानकारी दिए हेलिकॉप्टर को अयोध्या भेज दिया, जिससे महाकुंभ में श्रद्धालुओं पर समय से पुष्प वर्षा नहीं हो पाई। इस मामले में FIR यूपी के सिविल एविएशन डिपार्टमेंट के अधिकारी केपी रमेश ने महाकुंभ नगर की कोतवाली में दर्ज कराई है। FIR हेलिकॉप्टर कंपनी के सीईओ रोहित माथुर, पायलट कैप्टन पुनीत खन्ना और परिचालक प्रबंधन के खिलाफ गंभीर आरोपों के तहत दर्ज की गई है।
योगी सरकार ने महाकुंभ में श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा करने का फैसला लिया था, और इसके लिए एम.ए हेरीटेज एविएशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को जिम्मेदारी दी गई थी। कंपनी को पौष पूर्णिमा के दिन सुबह से फूलों की बारिश करनी थी, लेकिन बिना किसी जानकारी के हेलिकॉप्टर को अयोध्या भेज दिया गया। इसके कारण श्रद्धालुओं पर समय पर फूलों की वर्षा नहीं हो सकी। बाद में दूसरा हेलिकॉप्टर बुलाया गया और शाम 4:00 बजे के आसपास फूलों की वर्षा की गई। अब इस मामले में FIR दर्ज होने के बाद महाकुंभ पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
महाकुंभ में श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा के लिए लखनऊ सिविल एविएशन डिपार्टमेंट ने हेलिकॉप्टर का कॉन्ट्रैक्ट किया था। यह कॉन्ट्रैक्ट MA हेरिटेज एविएशन प्राइवेट लिमिटेड से किया गया था। कंपनी को पौष पूर्णिमा और मकर संक्रांति स्नान पर श्रद्धालुओं और संतों पर फूल बरसाने थे। लेकिन, कंपनी ने बिना पहले से बताए हेलिकॉप्टर को अयोध्या भेज दिया। इससे सुबह पुष्पवर्षा नहीं हो सकी।
जब सुबह फूलों की बारिश नहीं हुई, महाकुंभ प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में दूसरी कंपनी को कॉल किया गया और फूलों की बारिश कराई गई। मामला बढ़ने पर इस मामले को शासन ने बेहद गंभीरता से लिया और कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
एग्रीमेंट की शर्तों का उल्लंघन किया गया इस घटना पर सख्त नाराजगी जताते हुए सिविल एविएशन डिपार्टमेंट के मैनेजर परिचालक केपी रमेश ने महाकुंभ नगर कोतवाली में FIR दर्ज कराई। उन्होंने कहा- हेलिकॉप्टर को दूसरी जगह भेजना अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन और सरकारी काम में बाधा है।
पुलिस ने MA हेरिटेज एविएशन के CEO रोहित माथुर, प्रबंधक परिचालन और पायलट कैप्टन पुनीत खन्ना के खिलाफ केस दर्ज किया है। प्रशासन ने कहा कि अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने वाले संगठनों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुष्प वर्षा में देरी, श्रद्धालुओं की नाराजगी पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर लाखों श्रद्धालुओं और संतों ने संगम में डुबकी लगाई। पुष्प वर्षा का इंतजार करने वाले श्रद्धालु तब निराश हो गए, जब यह समय पर नहीं हुई। प्रशासन ने बाद में वैकल्पिक व्यवस्था की, लेकिन तब तक कई श्रद्धालु महाकुंभ से जा चुके थे।
महाकुंभ में व्यवस्था पर उठे सवाल महाकुंभ जैसे भव्य आयोजन में हुई यह चूक सवाल खड़े कर रही है। क्या एग्रीमेंट के बाद ऐसी लापरवाही को नजरअंदाज किया जा सकता है? प्रशासन ने इस मामले में साफ कर दिया है कि आगे से इस तरह की चूक के लिए कोई जगह नहीं होगी।
महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। संगम पर पुष्पवर्षा न होना आयोजन की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। श्रद्धालुओं ने भी इस घटना पर गहरी असंतोष जाहिर किया है।
महाकुंभ प्रशासन ने अपनी सफाई में कहा- ऐसे आयोजनों में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एग्रीमेंट का उल्लंघन करने वाले संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। महाकुंभ के दौरान हर पल की व्यवस्था को सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
बता दें प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक चलने वाला महाकुंभ 144 वर्ष बाद आया है. मकर संक्रांति के दिन महाकुंभ मेले का पहला शाही स्नान था और अब अगला शाही स्नान मौनी अमावस्या पर यानी 29 जनवरी को है.
प्रयागराज महाकुंभ में इस बार संगम में पवित्र स्नान के लिए 6 प्रमुख तिथियां निर्धारित हैं-
पौष पूर्णिमा: 13 जनवरी
मकर संक्रांति: 14 जनवरी
मौनी अमावस्या: 29 जनवरी
वसंत पंचमी: तीन फरवरी
माघी पूर्णिमा: 12 फरवरी
महाशिवरात्रि: 26 फरवरी
कुंभ के लिए प्रयागराज आएंगे 45 करोड़ लोग
दुनिया का सबसे बड़ा मेला सज चुका है. ये वो मेला है जिसमें 140 करोड़ भारतियों में से लगभग 45 करोड़ हिस्सा लेने जा रहे हैं. लगभग डेढ़ महीने के इस मेले का नाम है महाकुंभ. वो महाकुंभ जो 12 साल बाद आता है. अब जहां डेढ़ महीने में करीब एक तिहाई भारतीय यानि 45 करोड़ हिंदुस्तानी एक ही शहर की सरजमीन पर होंगे. तो सुरक्षा भी तो अभूतपूर्व ही होगी. जमीन से आसमान तक, संगम से तट तक, शहर से गलियों तक, नाव से गाड़ियों तक. पानी के ऊपर से पानी के नीचे तक. रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, गाड़ियां, रेलगाड़ियां शायद ही ऐसी कोई चीज हो जो सुरक्षा एजेंसियों की पैनी निगाहों से बच या छुप जाए.
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
70 लाख की आबादी वाले प्रयागराज में अगले डेढ़ महीने में लगभग 45 करोड़ लोग आने वाले हैं, यानि औसतन एक दिन में एक करोड़ लोग संगम पहुंचेंगे. इन 45 करोड़ लोगों की सुरक्षा करीब 75 हजार सुरक्षाकर्मियों के हाथों में होगी. इनमें यूपी पुलिस के अलावा तमाम सेंट्रल एजेंसियां और पैरामिलिट्री फोर्सेज़ शामिल हैं.
ये हैं सुरक्षा इंतजाम
75,000 सुरक्षा कर्मी, 70 जिलों की 50 हजार पुलिस, यूपी होमगार्ड्स, पीएसी, एटीएस, 2700 सीसीटीवी कैमरे, NSG के 100 कमांडो, एंटी टेरर स्कॉड (ATS), स्पेशल टास्क फोर्स (STF), नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), 4,300 फायर सेफ्टी यूनिट, 56 थाने, 155 चौकी, 10 पिंक बूथ, 3 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, 400 महिला पुलिसकर्मी, 30 स्पाटर्स (गुप्तचर) की टीम, 123 वॉच टावर, फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर, आसमान और पानी वाले ड्रोन, डिजिटल वॉरियर्स. ब्लैक कैट कमांडो की भी तैनाती की गई है.
]]>प्रयागराज में संगम के तट पर 45 दिवसीय महाकुंभ मेला, जिसे पहले पूर्ण कुंभ के नाम से जाना जाता था, 13 जनवरी से शुरु होकर 45 दिनों तक चलेगा। महाकुंभ के पहले ही दिन करीब दस लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जनवरी से 26 फरवरी के बीच 40 करोड़ आगंतुकों के आने का अनुमान लगाया है। अनुमान है कि महाकुंभ 2025 से सरकार को 25,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता है, जिससे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 2 लाख करोड़ रुपए अरब रुपये का आर्थिक लाभ हो सकता है। इस आयोजन से स्थानीय स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों, होटल व्यवसायियों, होमस्टे मालिकों, रेस्तरां संचालकों और खाद्य विक्रेताओं को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिसमें डाबर, मदर डेयरी और आईटीसी जैसे प्रमुख ब्रांडों द्वारा ~3,000 करोड़ खर्च किए जाने का अनुमान है।
महाकुंभ 2025 के प्रमुख व्यापारिक आंकड़े
आवास और पर्यटन : स्थानीय होटलों, धर्मशालाओं और अस्थायी ठहराव की व्यवस्था से ₹40,000 करोड़ के व्यापार की संभावना है.
भोजन और पेय पदार्थ : पैक खाद्य सामग्री, पानी, बिस्किट, जूस, और भोजन पर ₹20,000 करोड़ तक का व्यापार होगा.
पूजा सामग्री और प्रसाद : तेल, दीपक, गंगाजल, मूर्तियां, अगरबत्ती, धार्मिक पुस्तकों आदि की बिक्री से ₹20,000 करोड़ का व्यापार होने की उम्मीद है.
परिवहन और लॉजिस्टिक्स : स्थानीय और अंतरराज्यीय परिवहन, माल ढुलाई और टैक्सी सेवाओं से ₹10,000 करोड़ का व्यापार होगा.
पर्यटन सेवाएं : टूर गाइड, ट्रैवल पैकेज और पर्यटक सेवाओं से ₹10,000 करोड़ का अनुमानित व्यापार.
हस्तशिल्प और स्मृति चिन्ह : स्थानीय उत्पादों, कपड़ों, गहनों और स्मृति चिन्हों से ₹5,000 करोड़ की आय.
स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाएं : अस्थायी मेडिकल कैंप, आयुर्वेदिक उत्पाद और दवाइयों से ₹3,000 करोड़ का व्यापार.
आईटी और डिजिटल सेवाएं : डिजिटल भुगतान, वाई-फाई सेवाएं, और ई-टिकटिंग से ₹1,000 करोड़ का व्यापार.
मनोरंजन और मीडिया : विज्ञापन और प्रचार गतिविधियों से ₹10,000 करोड़ का व्यापार.
यूपी और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
महाकुंभ जैसे आयोजन स्थानीय व्यापार, रोजगार और पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हैं. यह न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश के आर्थिक विकास में योगदान देगा. श्री खंडेलवाल ने कहा, 'महाकुंभ 2025 न केवल आस्था और अध्यात्म का केंद्र है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक शक्ति का प्रतीक भी है यह आयोजन भारत की धार्मिक अर्थव्यवस्था को विश्व स्तर पर प्रदर्शित करेगा और उत्तर प्रदेश को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र बनाएगा.'
आधिकारिक अनुमान है कि 2019 के कुंभ में 24 करोड़ श्रद्धालुओं ने भाग लिया था, जबकि 2013 के पूर्ण कुंभ में, जिसे तब इलाहाबाद के नाम से जाना जाता था, 12 करोड़ श्रद्धालु आए थे। 2016 के उज्जैन कुंभ (सिंहस्थ) में 7.5 करोड़ श्रद्धालु आए थे।
उत्तर प्रदेश में आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने महाकुंभ के लिए बुनियादी ढांचे से लेकर स्वच्छता तक 549 परियोजनाओं की शुरुआत की है, जिसकी लागत ~6,900 करोड़ है। 2019 में, इसने ~3,700 करोड़ की लागत से 700 परियोजनाएँ शुरू की थीं। राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए व्यापक व्यवस्था की है कि महाकुंभ मेला बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हो जाए। मेले का सफल प्रबंधन, 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए “ब्रांड यूपी” बनाने की इसकी कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
महाकुंभ मेला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जनवरी 2024 में अयोध्या में भगवान राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद आयोजित होने वाला पहला कुंभ मेला है। महाकुंभ 2025 में अखाड़ा क्षेत्र में अखाड़ों समेत विभिन्न संगठनों के शिविर पूरी भव्यता से स्थापित हो चुके हैं। जहां शिविरों को हमेशा की तरह खूबसूरती से डिजाइन किया गया है, वहीं इस साल प्रवेश द्वार अपने अनूठे और विषयगत डिजाइनों से सुर्खियां बटोर रहे हैं। मेला क्षेत्र में थीम वाले प्रवेश द्वार देखने में आश्चर्यजनक होने के अलावा पहचान के चिह्न के रूप में भी काम कर रहे हैं और तीर्थयात्रियों को विशिष्ट संगठनों का पता लगाने और उन तक पहुंचने में मदद कर रहे हैं। विभिन्न अखाड़ों और संगठनों ने न केवल अपने शिविरों को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध किया है, बल्कि अपने प्रवेश द्वारों को भी विशिष्ट थीम के साथ डिजाइन किया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, 2016 में अयोध्या में केवल 283,000 पर्यटक आए थे, जो मंदिर के निर्माण के कारण सितंबर 2024 तक बढ़कर 13 करोड़ 44 लाख हो गए और इस वर्ष का अंतिम आंकड़ा लगभग 16 करोड़ श्रद्दालुओं के रामलला के दर्शन करने का संभावित है। इसी तरह, वाराणसी में पहले सालाना भक्तगणों की संख्या 50 लाख थी, जो काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के निर्माण के बाद बढ़कर 6 करोड़ हो गई।
प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के अनुसार 4,000 हेक्टेयर में फैले महाकुंभ टेंट सिटी को धार्मिक मेले की अवधि के लिए यूपी का 76वां जिला घोषित किया गया है। इसमें 56 पुलिस स्टेशन और 133 पुलिस चौकियाँ होंगी। टेंट सिटी में 67,000 स्ट्रीट लाइटें, श्रद्धालुओं को लाने-ले जाने के लिए 7000 भगवा रंग की बसें, 1,249 किलोमीटर लंबी पानी की पाइपलाइनें, 300,000 पौधे लगाए जाएंगे, 12 किलोमीटर तक फैले अस्थायी घाटों सहित 16 घाट, निर्बाध बिजली आपूर्ति के प्रावधान, त्योहार की अवधि के दौरान प्रयागराज को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली 100 विशेष ट्रेनें और शहर के लिए उड़ानों की संख्या और प्रयागराज हवाई अड्डे पर विमानों के लिए पार्किंग बे बढ़ाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने 2,200 लग्जरी टेंट सहित 160,000 टेंट लगाए हैं। प्रयागराज में 218 होटल, 204 गेस्ट हाउस, 90 धर्मशालाएँ और कई होमस्टे भी हैं। नदी के किनारे भी उच्च श्रेणी के विकल्प हैं, जहाँ प्रतिदिन ~80,000 तक का शुल्क लगता है, जैसे कि एरियल घाट पर 3.25 एकड़ में फैला डोम सिटी।
विभिन्न संप्रदायों के संतों के 13 अखाड़े इस महाकुंभ में भाग ले रहे हैं, जो सभी का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। प्रयागराज में विभिन्न कार्यालयों की दीवारों को हिंदू धर्म, देवी-देवताओं और धार्मिक ग्रंथों में वर्णित प्रमुख घटनाओं के विभिन्न पहलुओं को दर्शाने वाले चित्रों से सजाया गया है। शहर के चौराहों को भी विभिन्न धार्मिक वस्तुओं जैसे कलश, शंख और सूर्य नमस्कार आसन की विभिन्न मुद्राओं से सजाया गया है। इसके अलावा, शहर के अधिकांश प्रमुख चौराहों को नया रूप दिया गया है। पुलिस द्वारा विभिन्न चौराहों और तिराहों पर बैरिकेड भी लगाए गए हैं, जो पुलिस को भीड़ की आवाजाही को नियंत्रित करने में मदद करेंगे। संगम क्षेत्र या फाफामऊ में 30 से अधिक पंटून पुल भी नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक लोगों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए तैयार किए गए हैं।
2019 कुंभ की एक और सफलता 122,500 शौचालयों, 20,000 कूड़ेदानों और 160 कचरा परिवहन वाहनों के साथ इसकी कुशल स्वच्छता थी। इसने “गंध दूर करने वाले घोल” का भी सफलतापूर्वक प्रयोग किया, जिसका पहला परीक्षण 2018 माघ मेले के दौरान किया गया था; 2019 कुंभ के दौरान छात्र शोधकर्ताओं द्वारा साइट पर प्रतिदिन 65,000 लीटर घोल बनाया गया था।
महाकुंभ मेला क्षेत्र में 55 से अधिक थाने स्थापित किये गये हैं और लगभग 45 हजार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगायी गयी है। किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए सोशल मीडिया पर लगातार नजर रखने से सम्बन्धित परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है। सुरक्षा के लिए 329 एआई कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिनमें कुल 10,000 सीसीटीवी कैमरे शामिल हैं। उद्घाटन समारोह में 2,500 ‘मेक इन इंडिया’ ड्रोन शामिल होंगे।
यह समागम 12 वर्षों में चार स्थानों पर चार बार मनाया जाता है – हरिद्वार (गंगा के तट पर), मध्य प्रदेश में उज्जैन (शिप्रा नदी के तट पर), महाराष्ट्र में नासिक (गोदावरी के तट पर), और चारों में से सबसे पवित्र प्रयागराज में गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर।
भारत के इंपीरियल गजट, 1883 में इलाहाबाद में 1882 के ‘माघ मेले’ का उल्लेख किया गया था, जिसमें दस लाख भक्तों ने भाग लिया था। औपनिवेशिक अभिलेखों के अनुसार, 1900 के अर्ध कुंभ से सरकार की आय ~38,400 के व्यय के मुकाबले ~26,621 थी। 1906 के पूर्ण कुंभ में ~92,024 के व्यय के मुकाबले ~62,480 की कमाई हुई। 1906 के पूर्ण कुंभ में लगभग 30 लाख लोगों ने भाग लिया।
प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में सोमवार को होने वाले पौष पूर्णिमा के पहले स्नान से पहले मेला क्षेत्र में बसाई गई डोम सिटी और टेंट सिटी पूरी तरह भर चुकी है। संगम तट पर ठहरने के लिए देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों में होड़ मची है। वे इसके लिए लाखों रुपये तक खर्च करने को तैयार हैं। आलम यह है कि प्रयाग में कुंभ मेला क्षेत्र में अरैल बंधे पर बसी डोम सिटी में अब एक भी दिन के लिए जगह खाली नहीं बची है, जबकि टेंट सिटी में पर्व स्नान के दिनों के लिए सभी कॉटेज की एडवांस बुकिंग हो गई है। केवल सामान्य दिनों के लिए बमुश्किल दर्जन भर लोगों के रुकने की जगह है। इसकी भी बुकिंग तेजी से हो रही है।
महाकुंभ नगर में बनाई गई डोम सिटी में पांच सितारा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। हर डोम के नीचे चार कॉटेज बने हैं, जबकि एक लिविंग एरिया है। डोम सिटी को पॉश बंगले का रूप दिया गया है, जिसमें संगम तट तक ले जाने के लिए अत्याधुनिक याट की सुविधा है। डोम की संख्या फिलहाल 10 है, जिनमें 40 कॉटेज बने हैं। लोगों की जबरदस्त मांग को देखते हुए 10 और डोम सिटी बनाने का प्रस्ताव है। सामान्य दिनों में एक रात डोम में रुकने के लिए जीएसटी के अतिरिक्त 61,000 रुपये लिए जा रहे हैं, जबकि पर्व स्नान के दिनों का किराया जीएसटी के अतिरिक्त 91,000 रुपये है।
कुंभ मेले की व्यवस्था देख रहे अधिकारियों का कहना है कि एक लाख रुपये एक रात का किराया होने के बावजूद डोम सिटी में बुकिंग के लिए होड़ मची है। अनेक लोगों ने महीने भर पहले से बुकिंग करा ली है। डोम सिटी का निर्माण दिल्ली की कंपनी रीजेंटा ईवोलाइफ ने किया है। डोम सिटी व टेंट सिटी के निर्माण पर 50 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
डोम सिटी और टेंट सिटी में रुकने वालों में 50 फीसदी से ज्यादा विदेशी हैं। इनमें अनिवासी भारतीयों के अलावा कनाडा, मॉरीशस, नीदरलैंड, ब्रिटेन व अमेरिका से आने वाले श्रद्धालु हैं। विदेशी मेहमानों की सुविधा के लिए डोम सिटी व टेंट सिटी के भीतर स्पा, रेस्टोरेंट और सीधे स्नान के लिए घाट पर ले जाने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
वहीं टेंट सिटी का निर्माण दिल्ली की आगमन कंपनी ने किया है। महाकुंभ नगर के अरैल क्षेत्र में सेक्टर 25 में चार सितारा सुविधाओं से लैस कॉटेज बनाए गए हैं। टेंट सिटी में बनी कॉटेज की तीन श्रेणियां हैं, जिनका किराया क्रमश: 10,000, 15,000 और 20,000 रुपये प्रति रात है। इस किराये में लंच, ब्रेकफास्ट और डिनर शामिल हैं जो पूर्णतया सात्विक और बिना लहसुन-प्याज के होगा। टेंट सिटी की व्यवस्था देख रहे प्रतिनिधियों ने बताया कि पर्व स्नान के दिनों के लिए बुकिंग लगभग पूरी है, जबकि बाकी दिनों के लिए बुकिंग अभी तक 50 फीसदी से अधिक हो चुकी है। उनका कहना है कि यहां आने वाले लोगों में करीब 50 फीसदी विदेशी हैं। इस टेंट सिटी की बनावट गोवा बीच जैसी है। डोम सिटी हो या टेंट सिटी दोनों की बुकिंग उत्तर प्रदेश पर्यटन की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन की जा सकती है।
महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को आसपास के धार्मिक स्थलों का भ्रमण कराने के लिए टूर ऐंड ट्रैवल कंपनियों ने बड़े पैमाने पर गाड़ियां लगाई हैं। इतनी बड़ी तादाद में गाड़ियों की व्यवस्था के लिए दिल्ली व मुंबई की ट्रैवल एजेंसियां प्रयागराज के अलावा वाराणसी, लखनऊ और सीधे दिल्ली से सेवाएं दे रही हैं। सिंह ट्रैवल्स के दिनेश सिंह ने बताया कि कुंभ आने वाले ज्यादातर श्रद्धालु अयोध्या और वाराणसी भी जाना चाहते हैं, लिहाजा उसी तरह के पैकेज तैयार किए गए हैं। उनका कहना है कि महाकुंभ नगर में सेवाएं देने के लिए 25,000 गाड़ियां बाहर से मंगाई गई हैं, जबकि इतनी ही तादाद में प्रयागराज, लखनऊ व वाराणसी की लक्जरी गाड़ियां लगी हैं।
शंकर महादेवन, कैलाश खेर समेत अन्य कलाकार प्रयागराज में प्रस्तुति देंगे नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) मशहूर गायक कैलाश खेर, शंकर महादेवन, कविता कृष्णमूर्ति और कई अन्य दिग्गज कलाकार प्रयागराज में सोमवार से शुरू हो रहे महाकुंभ के दौरान प्रस्तुति देंगे। संस्कृति मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी दी।
मंत्रालय ने भारत की कला, संस्कृति और विरासत के संगम का जश्न मनाने के लिए कुंभ मेला क्षेत्र में एक जीवंत सांस्कृतिक स्थल ‘कलाग्राम’ स्थापित किया है। मंत्रालय ने कहा कि 4,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह क्षेत्र भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और उन्नत संगठनात्मक क्षमताओं का सामंजस्यपूर्ण मिश्रण दर्शाता है। इस जीवंत स्थान पर भारत की विविध शिल्प परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले सात ‘संस्कृति आंगन’ भी हैं, जिसका उद्घाटन केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने रविवार को प्रयागराज में किया।
संस्कृति मंत्रालय ने एक बयान में कुछ सबसे मशहूर गायकों के नाम साझा किए, जो महाकुंभ में प्रस्तुति देने वाले हैं। इनमें शंकर महादेवन, मोहित चौहान, कैलाश खेर, हंस राज हंस, हरिहरन, कविता कृष्णमूर्ति और मैथिली ठाकुर के नाम शामिल हैं।
]]>महाकुंभ में श्रद्धालुओं के आस्था की डुबकी लगाने का क्रम जारी हो गया है. आज पवित्र स्नान के पहले दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु संगम तट पर डुबकी लगा रहे हैं.
एडीजी प्रयागराज जोन भानु भास्कर ने बताया कि अब तक एक करोड़ लोग प्रयागराज में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं. बता दें कि संगम तट पर पवित्र स्नान करने के लिए सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ लग रही है.
48 घंटे में 85 लाख लोग लगा चुके हैं डुबकी
सूचना निदेशक शिशिर ने बताया शनिवार की सुबह तक संगम में स्नान करने के लिए 33 लाख श्रद्धालु आए. पिछले दो दिनों में 85 लाख से ज्यादा लोगों ने नदी में स्नान किया. इस साल महाकुंभ में 45 करोड़ से ज्यादा लोगों के शामिल होने की उम्मीद है, जिससे यह इतिहास में सबसे बड़ा समागम बन जाएगा.
बताया जा रहा है कि सुबह-सुबह 60 लाख लोगों ने संगम में स्नान किया है.
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेले का दिव्य और भव्य शुभारंभ हो गया है. आज से शुरू होकर 26 फरवरी तक चलने वाले महाकुंभ में इस बार 40 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु शामिल होने का अनुमान है. पहले दिन से ही तीर्थ राज प्रयाग में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटना शुरू हो गई है. वैसे तो कुंभ में सभी दिन भक्तों की भारी भीड़ लगने की संभावना है, लेकिन शाही स्नान वाले दिन ये भीड़ कई गुना ज्यादा तक बढ़ सकती है.
महाकुंभ पहुंचे रूसी, स्पेनिश और अफ्रीकी श्रद्धालु
महाकुंभ में शामिल होने के लिए दुनियाभर से लोग पहुंचे हैं. एक रूसी श्रद्धालु ने महाकुंभ की दिव्यता देखकर कहा कि मेरा भारत महान. हम पहली बार कुंभ मेले में आए हैं. यहां हमें असली भारत देखने को मिला है. इस पवित्र स्थान की ऊर्जा से मैं कांप रही हूं. मुझे भारत से प्यार है.
60 लाख लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी
उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि करीब 60 लाख लोग अब तक आस्था की डुबकी लगा चुके हैं. इस बार यह आस्था और आधुनिकता का संगम है. हमने पारंपरिक पुलिस व्यवस्था से इतर तकनीक का अधिक से अधिक इस्तेमाल कर श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था दी है. आज पुष्प वर्षा भी होगी. सबकुछ सुचारू और निर्बाध चल रहा है. इस बार कुंभ भव्य, दिव्य, डिजिटल और सुरक्षित हो, इसके लिए सभी इंतजाम किए जा रहे हैं.
धर्म और आस्था की नगरी प्रयागराज में महाकुंभ की शुरुआत आज सोमवार को पौष पूर्णिमा स्नान से हो गई। पौष पूर्णिमा के अवसर पर लाखों की संख्या में लोग डुबकी लगा चुके हैं। इस पवित्र अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समस्त श्रद्धालुओं, संतों, महात्माओं, कल्पवासियों और आगंतुकों का स्वागत करते हुए महाकुंभ के प्रथम स्नान की शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में सीएम योगी ने कहा, “आइए, महाकुंभ 2025 में सहभागी बनकर सनातन संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनें। मां गंगा की कृपा से आपका जीवन सुख, शांति और समृद्धि से परिपूर्ण हो।”
35 लाख से ज्यादा श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं
आपको बता दें इस दिन संगम पर लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा, यमुन और सरस्वती के संगम में डुबकी लगाई। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि सुबह 7:30 बजे तक 35 लाख से ज्यादा श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं।
सीएम योगी ने महाकुंभ के प्रथम स्नान की शुभकामनाएं दीं
इस पवित्र अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समस्त श्रद्धालुओं, संतों, महात्माओं, कल्पवासियों और आगंतुकों का स्वागत करते हुए महाकुंभ के प्रथम स्नान की शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में सीएम योगी ने कहा, “आइए, महाकुंभ 2025 में सहभागी बनकर सनातन संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनें। मां गंगा की कृपा से आपका जीवन सुख, शांति और समृद्धि से परिपूर्ण हो।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकुंभ भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा का प्रतीक है। यह आयोजन ‘अनेकता में एकता’ की भावना को सजीव करता है। मां गंगा की पवित्र धारा में स्नान और साधना करने आए सभी श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण हों।
पौष पूर्णिमा पर आज पहला स्नान है
पौष पूर्णिमा पर आज पहला स्नान है। इस अवसर पर आज लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान कर रहे हैं। आज से ही श्रद्धालु पैंतालीस दिन का कल्पवास शुरू करेंगे। संगम तट पर आध्यात्मिक उल्लास और धार्मिक आस्था का अद्वितीय नजारा देखने को मिल रहा है। देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के लिए महाकुंभ जीवन का अद्वितीय अनुभव बन रहा है।
महाकुंभ में वाहनों के प्रवेश पर भी पाबंदी
संगम पर प्रवेश के सभी रास्तों में भक्तों की भीड़ जुटी है। महाकुंभ में वाहनों के प्रवेश पर भी पाबंदी है। सुरक्षा में हजारों की संख्या में जवान तैनात हैं। पुलिस स्पीकर के माध्यम से लाखों की भीड़ को मैनेज कर रही है। इस वर्ष की महाकुंभ की दिव्यता और भव्यता को लेकर श्रद्धालु भी खुश नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि इस बार जो व्यवस्थाएं की गईं, वे स्पष्ट रूप से नजर आ रही हैं। खाने, रहने और सुरक्षा की व्यवस्थाएं बेहतर तरीके से की गई हैं, जिससे श्रद्धालुओं को कोई परेशानी नहीं हो रही है।
स्वामी कैलाशानंद के आश्रम पहुंचीं स्टीव जॉब्स की पत्नी
महाकुंभ में एप्पल के दिवंगत सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स भी पहुंचीं हैं. लॉरेन आध्यात्मिक गुरु स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज के आश्रम पहुंचीं हैं. लॉरेन के बारे में स्वामी कैलाशानंद गिरि ने बताया,'वह बहुत धार्मिक और आध्यात्मिक हैं. वह मुझे एक पिता और एक गुरु के रूप में सम्मान देती हैं. भारतीय परंपराओं को दुनिया स्वीकार कर रही है.'
शंकर महादेवन, कैलाश खेर देंगे प्रस्तुति
प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर, शंकर महादेवन, कविता कृष्णमूर्ति सहित कई बड़े कलाकार महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में प्रस्तुति देंगे. संस्कृति मंत्रालय ने भारत की कला, संस्कृति और विरासत के संगम का जश्न मनाने के लिए कुंभ मेला क्षेत्र में एक जीवंत सांस्कृतिक स्थल – 'कलाग्राम' की स्थापना की है. मंत्रालय ने कहा 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह स्थल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और उन्नत संगठनात्मक क्षमताओं का सामंजस्यपूर्ण मिश्रण दर्शाता है.
पीएम मोदी ने महाकुंभ के शुभारंभ पर किया ट्वीट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ के शुभारंभ पर ट्वीट किया. उन्होंने कहा,'भारतीय मूल्यों और संस्कृति को संजोने वाले करोड़ों लोगों के लिए यह एक बहुत ही खास दिन है! महाकुंभ 2025 प्रयागराज में शुरू हो रहा है, जो आस्था, भक्ति और संस्कृति के पवित्र संगम में अनगिनत लोगों को एक साथ लाएगा. महाकुंभ भारत की शाश्वत आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है और आस्था और सद्भाव का जश्न मनाता है.'
]]>उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कुंभ मेला 2025 की तैयारियों के तहत शहर का स्वरूप पूरी तरह बदल रहा है. संगम नगरी को एयरपोर्ट से जोड़ने के लिए 16 किलोमीटर लंबा और 550 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा VVIP कॉरिडोर लगभग तैयार हो चुका है. लोगों का कहना है कि यह कॉरिडोर न केवल यातायात को सुगम बना रहा है, बल्कि शहर की सुंदरता से भी ध्यान खींच रहा है.
बता दें कि संगम की रेती पर कुंभ मेला की शुरुआत से पहले सज रही नगरी में प्रयागराज एयरपोर्ट (Prayagraj Airport) से संगम तक 16 किलोमीटर लंबा वीवीआईपी कॉरिडोर (VVIP Corridor) बनाया गया है. इस वीवीआईपी कॉरिडोर को बनाने में 550 करोड़ रुपये की लागत आई है.
वीवीआईपी कॉरिडोर में पड़ने वाले चौराहों पर नटराज, नंदी, ऋषि-मुनियों की कलाकृतियां लगाई गई हैं. वहीं प्रयागराज एयरपोर्ट से आधा किलोमीटर आगे 84 विशेष स्तंभ लगाए गए हैं, जो चौरासी स्तंभ सृष्टि के सार का प्रतीक हैं.
सनातन परंपरा में 84 लाख योनियां बताई गई हैं, यहां 84 स्तंभ उन्हीं के प्रतीक हैं. लाल पत्थर से तैयार किए जा रहे खंभों पर भगवान शिव के सहस्त्र नाम भी अंकित किए गए हैं. सड़कों के किनारे पौधे लगाए गए हैं, जिनमें फूलों के भी पौधे शामिल हैं.
यहां आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि एक समय इस सड़क से गुजरने से डर लगता था, क्योंकि यहां सन्नाट पसरा रहता था, लेकिन एयरपोर्ट से जुड़ने के बाद इस सड़क का महत्व तो बढ़ा ही, साथ ही आवागमन भी तेज हो गया. वहीं दूसरी ओर सुंदरीकरण से सड़क का कायाकल्प हो गया.
84 विशेष स्तंभ भी लगाए गए हैं
प्रयागराज एयरपोर्ट से आधा किलोमीटर आगे 84 विशेष स्तंभ लगाए गए हैं. ये चौरासी स्तंभ सृष्टि के सार का प्रतीक है. सनातन परंपरा में 84 लाख योनियां होती हैं, 84 स्तंभ 84 लाख योनियों का प्रतीक हैं. लाल पत्थर से तैयार किए जा रहे इन खंभों पर भगवान शिव के सहस्त्र नाम भी अंकित किए गए हैं. यही नहीं सड़कों के किनारे पेड़-पौधे भी लगाए गए हैं, जिसमें फूलों के भी पौधे भी शामिल हैं. जिसकी वजह से सड़क की खूबसूरती बढ़ गई है.
कभी इस सड़क पर सन्नाटा पसरा रहता था
आपको बता दें, एक समय था इस सड़क से लोग गुजरने से डरते थे, क्योंकि इन सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता था. लेकिन एयरपोर्ट पर जाने के बाद इस सड़क का महत्व तो बढ़ा ही साथ ही सड़क पर आवागमन भी तेज हो गया. वहीं दूसरी ओर सुंदरीकरण से इस सड़क का कायाकल्प भी हो गया. हर कोई इस सड़क से गुजरने वाला अब इस काम की जमकर तारीफ कर रहा है.
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 14 जनवरी से महाकुंभ की शुरुआत हो रही है। इससे पहले प्रशासनिक और सरकार की तैयारियों को पूरा कराया जा रहा है। देश-दुनिया से करीब 40 करोड़ लोगों के महाकुंभ मेला में पहुंचने की उम्मीद है। मेले में आने वाले लोगों की संख्या को देखते हुए तमाम व्यवसायी अपनी दुकान वहां लगाने की जुगत में हैं। ऐसे में मेला प्रशासन की ओर से भी दुकानों के आवंटन को लेकर स्थिति साफ होती दिख रही है। 30 X 30 फीट के दुकान के किराए को जानकर आप हैरान हो जाएंगे। एक प्लेट कचौड़ी की कीमत भले ही 30 रुपये हो, लेकिन करीब 900 स्क्वायर फीट की दुकान का किराया 92 लाख रुपये निर्धारित किया गया है।
13 जनवरी से शुरू होगा महाकुंभ
प्रयागराज महाकुंभ का आयोजन 13 जनवरी 2025 से शुरू होगा। इसको लेकर जमीनों का आवंटन शुरू हुआ है। यहां पर दुकान लगाने के लिए आवंटित होने वाली जमीन की कीमत कई-कई लाख में मिल रही है। प्राइम लोकेशन पर जमीन के किराए की दर काफी महंगी है। कचौड़ी की दुकान में बगल में लड्डू की दुकान के लिए जमीन का आवंटन किया गया है। इसका किराया 75 लाख रुपये रखा गया था। महाकुंभ में लगनी वाली दुकानों पर महाकुंभ के डेढ़ महीने ही भीड़ रहेगी।
भव्य महाकुंभ की है तैयारी
प्रयागराज महाकुंभ को इस वर्ष दिव्य और भव्य बनाने की योजना तैयार की गई है। 4000 हेक्टेयर यानी 15,840 बीघा क्षेत्र में मेला क्षेत्र को बनाया जाएगा। यहां पर पहली बार 13 किलोमीटर लंबा रिवर फ्रंट बन रहा है। इसमें 40 करोड़ लोगों के आने की संभावना है। भव्य आयोजन के कमाई की अपार संभावनाओं को देखते हुए हर व्यापारी यहां दुकान लगाना चाहता है। मेला क्षेत्र में निर्माण के लिए जगह-जगह जेसीबी से जमीन समतल की जा रही है। गंगा पर पांटून पुल (पीपा पुल) बन रहे हैं।
सजने लगी हैं दुकानें
मेला क्षेत्र में दुकान भी सजने लगे हैं। दुकानों में अब लोगों की भीड़ भी आने लगी है। संगम किनारे निर्धारित दुकानों के किराए सबसे अधिक हैं। कचौरी और लड्डू की दुकानें सबसे महंगी हैं। परेड ग्राउंड में महाराज कचौड़ी एवं प्रसाद भोग के नाम से एक दुकान है। 30 X 30 वर्गफीट की इस दुकान का टेंडर 92 लाख रुपए में फाइनल हुआ है। इस दुकान को पवन कुमार मिश्रा ने लिया है। वे कहते हैं कि कचौड़ी और लड्डू बनाने का काम पहले से करते रहे हैं, लेकिन कुंभ में पहली बार दुकान लगाने के बारे में सोचा।
पवन मिश्रा ने कहा कि मेला प्रशासन हमें अपनी दुकान से करीब 200 मीटर दूर जगह देगा। वह भी रोड पर स्थित है। 2 महीने हम वहीं दुकान लगाएंगे। उसके बाद वापस इस जगह पर आ जाएंगे। अभी बताया जा रहा है कि जिस जगह हमारी दुकान है, वहां विश्व हिंदू परिषद को जगह दी गई है। पवन कहते हैं कि भले किराया अधिक लगा हो, लेकिन सामग्रियों के दाम नहीं बढ़ाएंगे।
76 लाख में लड्डू की दुकान
लेटे हुए हनुमान मंदिर पर इस बार लड्डू की दुकानों में इजाफा हुआ है। जय बजरंग भोग नाम की एक दुकान अब यहां पर खुली है। इस लड्डू की दुकान के लिए टेंडर 76 लाख रुपये में खुला। वहीं, परेड ग्राउंड में ही महाकाल प्रसाद भोग एवं कचौड़ी भंडार दुकान 75 लाख रुपये में बकही है। झूंसी साइड और मेला क्षेत्र के अंदर भी दुकानों की बिक्री हो रही है। वहां भी रेट हाई है। गंगा की तराई में कुंभ के दौरान लगने वाली दुकानों का रेट अन्य जगहों के मुकाबले कम है।
10 हजार दुकानों का टारगेट
महाकुंभ के आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने 10 हजार दुकानें बेचने का टारगेट रखा गया है। 2019 के कुंभ में कुल 5721 स्टॉल के आवेदन आए थे। 2012 के महाकुंभ में यह संख्या करीब 2000 हजार थी। उस समय ऑफलाइन टेंडर के जरिए आवंटन होता था। 2019 से टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई। 13 नवंबर से दुकानों के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। अब तक 2000 से अधिक दुकानों का टेंडर हो चुका है। गंगा तराई में लगने वाली दुकानों का किराया भी तीन से 5 लाख रुपये तक पहुंच रहा है।
]]>उत्तर प्रदेश में प्रयागराज की पावन धरती पर 12 वर्षों बाद 2025 में महाकुंभ का आयोजन होने जा रहा है। महाकुंभ का आयोजन 13 जनवरी से 26 फरवरी तक होगा। महाकुंभ की तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। आधिकारिक अनुमान के अनुसार, महाकुंभ मेले में लगभग 43 करोड़ तीर्थयात्रियों के आने का अनुमान है।
व्यापक तैयारियां चल रही हैं और संगम से लेकर महाकुंभ तक सभी विकास गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। महाकुंभ मेला 2025 की तैयारियों की सक्रिय रूप से निगरानी कर रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस आयोजन में शामिल होने वाले भारत और विदेश के तीर्थयात्रियों के लिए एक सहज अनुभव प्रदान करें। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीडब्ल्यूडी ने भी अपनी रफ्तार बढ़ा दी है और पांटून पुलों के साथ-साथ सड़कों के रेनोवेशन के काम में भी तेजी देखने को मिल रही है। एक दिसंबर तक लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से 27 रोड्स का रिन्यूअल किया जा चुका है। जबकि, बाकी रोड्स के रिन्यूअल का काम 10 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी तरह 17 रोड्स के सौंदर्यीकरण का कार्य भी 5 दिसंबर तक पूरा होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि पीडब्ल्यूडी के पास कुल 89 परियोजनाएं हैं, जिसमें से करीब 60 परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि शेष 10 दिसंबर तक पूर्ण किए जाने का लक्ष्य है। बीते बुधवार को सीएम योगी महाकुंभ की तैयारियों की समीक्षा की थी और आश्वासन दिया था कि आयोजन की सभी व्यवस्थाएं तय समय से एक महीने पहले 10 दिसंबर तक पूरी कर ली जाएंगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर को प्रयागराज आएंगे। यहां पीएम मोदी मां गंगा की आरती करेंगे और कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। सीएम के अनुसार, प्रधानमंत्री 'डिजिटल कुंभ' पर एक प्रेजेंटेशन भी देखेंगे और आयोजन की भव्यता बढ़ाने के लिए तैयार किए गए कार्यों का निरीक्षण करेंगे।
]]>यूपी में बदल रही है पर्यटन की तस्वीर
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से उपेक्षित पड़े पर्यटन सेक्टर को प्रदेश की योगी सरकार ने नया आयाम दिया है। 16 नवंबर, 2022 को उत्तर प्रदेश की नई पर्यटन नीति-2022 को मंज़ूरी मिलने के बाद पर्यटन क्षेत्र के विकास का नक्शा बदलना शुरू हुआ। नई पर्यटन नीति से प्रदेश में 20 हजार करोड़ के निवेश और 10 लाख लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें भी सबसे पहले पर्यटन सेक्टर से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर को कौशल विकास और प्रबंधन से जोड़ना महत्वपूर्ण है। प्रयागराज महाकुंभ इसके लिए बड़ा मंच साबित हो रहा है। प्रयागराज की क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह का कहना है कि प्रयागराज महाकुंभ में पर्यटकों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क में आने वाले सभी सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित करने का अभियान शुरू किया गया है। नाविकों , टूर गाइड, स्ट्रीट वेंडर्स और स्ट्रीट वेंडर्स जैसे सेवा प्रदाताओं को कौशल विकास और मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जा रही है।
नाविकों को मिल रही नई भूमिका, रिवर गाइड होंगे नाविक
उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों में नदियों में नौका संचालन से आजीविका चलाने वाले नाविकों की आय बढ़ाने और क्षमताओं का विकास कर योगी सरकार उन्हें नई भूमिका दे रही है। पर्यटन विभाग 2000 नाविकों को इसका प्रशिक्षण दे रहा है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह बताती हैं कि पर्यटन विभाग ने मान्यवर कांशीराम पर्यटन प्रबंधन संस्थान और एक अन्य संस्था के साथ एक एमओयू साइन किया है जिसके अंतर्गत यह ट्रेनिंग चल रही हैं जिसमें अभी तक 300 नाविकों को कौशल विकास की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इस प्रशिक्षण से नाविक अब नौकायन से आगे बढ़कर रिवर गाइड की भूमिका का निर्वहन कर सकेंगे। इससे नदियों में धार्मिक स्थलों के किनारे नाव चलाने वाले हजारों नाविकों को रोजगार मिलेगा और पर्यटन स्थलों का वातावरण भी बेहतर होगा।
टूर गाइड भी किए जा रहे हैं स्किल्ड
पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के लिए इस स्थलों में बुनियादी संरचना के विकास के साथ यहां सेवा प्रदान करने सेवा प्रदाताओं को भी स्मार्ट बनाना होगा। पर्यटन विभाग ने इसी को देखते हुए प्रयागराज में 1000 टूर गाइड को स्किल डेवलेपमेंट और मैनेजमेंट की ट्रेनिंग प्रदान कर रहा है। मान्यवर कांशीराम पर्यटन प्रबन्ध संस्थान, लखनऊ के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रखर तिवारी की अगुवाई में यह ट्रेनिंग चल रही है। प्रखर तिवारी बताते हैं कि अब तक यहां टूर गाइड के 7 बैच की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है जिसमें 420 टूर गाइड प्रशिक्षित होकर सेवाएं देने को तैयार हैं।
स्ट्रीट वेंडर्स और टैक्सी ड्राइवर्स को भी दी जा रही है ट्रेनिंग
पर्यटकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की डिलीवरी देने के लिए पर्यटन सेक्टर में प्रशिक्षित जनशक्ति पूल का निर्माण करना बड़ी आवश्यकता है। महाकुंभ में आने वाले पर्यटकों के आतिथ्य में यह जन शक्ति उपयोगी साबित हो सकती है। प्रयागराज की क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह का कहना है कि महाकुंभ के पूर्व पर्यटन क्षेत्र से जुड़े सभी सेवा प्रदाताओं और जनशक्ति को कुशल बनाने के लिए टूर गाइड और नाविकों के साथ साथ अब शहर के स्ट्रीट वेंडर्स और टैक्सी ड्राइवर्स को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्ट्रीट वेंडर्स शहरी अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण घटक हैं जो एक तरफ जहां स्थानीय लोगों तक रोज़मर्रा की आवश्यक उपयोगी वस्तुओं को पहुंचाते हैं तो वहीं बाहर से आने वाले पर्यटकों के साथ भी उनका संपर्क होता है।
पर्यटकों के साथ व्यवहार के प्रति संवेदनशील बनाने और पर्यटक स्थलों एवं मार्गों पर स्वच्छता की जानकारी देने के लिए इनका प्रशिक्षण भी आवश्यक है। पर्यटन विभाग की तरफ से इनका प्रशिक्षण शुरू किया गया है। प्रयागराज में 600 स्ट्रीट वेंडर्स और 600 टैक्सी ड्राइवर्स को इसका प्रशिक्षण दिया जाना है। इसके अंतर्गत अभी तक 250 स्ट्रीट वेंडर्स और 120 टैक्सी ड्राइवर्स को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।