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राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षक दिवस पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में मध्यप्रदेश के 2 शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्य के लिये राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया। इस मौके पर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान भी मौजूद थे। पुरस्कार स्वरूप सम्मानित शिक्षकों को शॉल-श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।
प्राथमिक शिक्षक श्रीमती शीला पटेल
श्रीमती शीला पटेल दमोह जिले की शासकीय प्राथमिक शाला देवरान टपरिया में पदस्थ हैं। श्रीमती पटेल ने अपनी शाला में बच्चों को खेल-खेल में आनंदमयी शिक्षा दी है। उन्होंने गीत, कविता, कहानी और अभिनय के माध्यम से फाउण्डेशन लिटरेसी मिशन (एफएलएन) का क्रियान्वयन किया है। इसी के साथ उन्होंने अवकाश के दिनों में महिला साक्षरता को बढ़ावा देने के लिये विशेष कक्षाओं का संचालन किया। श्रीमती शीला पटेल ने अवकाश के दिनों में समर कैम्प एवं विंटर कैम्प का आयोजन किया। उन्होंने अपनी पदस्थापना के शाला के गाँव की हर गली व मोहल्लों में जगह-जगह पर बच्चों को सिखाने के उद्देश्य से शैक्षिक पटल व लर्निंग प्लेस तैयार करवाया। शिक्षिका श्रीमती पटेल ने बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने के लिये शून्य लागत पर टीचिंग लर्निंग मटेरियल (टीएलएम) तैयार किया। बच्चों में समझ को बढ़ावा देने के लिये समूह में आपस में चर्चा और उनकी सहभागिता को बढ़ाने का काम प्रमुख रूप से किया।
प्राथमिक शिक्षक भेरूलाल ओसारा
प्राथमिक शिक्षक श्री भेरूलाल ओसारा आगर-मालवा जिले के शासकीय ईपीईएस माध्यमिक शाला में पदस्थ हैं। ने अपनी पदस्थ शाला में विषय-वस्तु की गहन समझ के साथ शिक्षण कार्य किया और बच्चों में नैतिकता और सृजनात्मकता को प्रोत्साहित किया। विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिये ईको क्लब और क्लैप क्लब के संयोजन से ठोस कार्य किया। बच्चों को स्वच्छता, जल संरक्षण, पौधरोपण, प्लास्टिक उन्मूलन और हरित जीवन-शैली के बारे में नवाचार करते हुए शिक्षा दी। शिक्षक श्री भेरूलाल ने बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने के लिये नुक्कड़ नाटक, रैलियों, पोस्टर, निबंध प्रतियोगिता के साथ लेखन की वर्कशॉप भी निरंतर आयोजित की। उन्होंने डिजिटल युग की महत्ता को समझते हुए विद्यार्थियों में ऑनलाइन सुरक्षा जागरूकता फैलाने के लिये महत्वपूर्ण काम किया। बच्चों को साइबर अपराध के खतरों, सोशल मीडिया का सुरक्षित रूप से उपयोग, पासवर्ड की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जानकारी दी। उनके इस कार्य से आसपास के अनेक शिक्षकों ने भी प्रेरणा ली है।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने शिल्पकारों से चर्चा के दौरान कहा कि हमारी पुरानी संस्कृति एवं परम्परा को संजो कर संरक्षित रखने की जरूरत है। यहाँ के शिल्पकार इसमें अच्छा योगदान दे रहे हैं। इन्हें प्रोत्साहन देने की जरूरत है, जिससे इन्हें रोजगार के अवसर मिल सकें। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने शिल्पकारों के आग्रह पर उनके साथ तस्वीर भी खिंचवाई। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने धार जिले के कारीगर श्री मुबारिक खत्री से चर्चा के दौरान उनकी कला बाग प्रिन्ट के बारे में जानकारी ली और पूछा कि वे कब से यह काम कर रहे हैं। कारीगर मुबारिक खत्री ने बताया कि उनकी 11 पीढ़ियों से बाग प्रिंट का कार्य किया जा रहा है। वे अपनी इस कला को आने वाली पीढ़ियों को भी सिखा रहे हैं। उन्होंने कॉटन के कपड़े पर बाग प्रिंट कैसे किया जा सकता है, यह करके भी दिखाया। उन्होंने बताया कि अब बांस एवं सिल्क की साड़ियों पर भी बाग प्रिंट किया जाता है।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु को खरगोन जिले के महेश्वर के बुनकर श्री अलाउद्दीन अंसारी ने राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हथकरघा साड़ी के बारे में अवगत कराया। उन्होंने बताया कि नर्मदा नदी में दोपहर के समय सूर्य की जो किरणें पड़ती हैं और उनसे नदी में जो लहरें चमकती हैं, उन्हीं लहरों का प्रिंट हथकरघा साड़ियों की बॉर्डर पर उतारा जाता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु इस कलाकारी से बहुत प्रभावित हुई और उन्होंने पूछा कि वे यह काम कब से कर रहे हैं। श्री अंसारी ने बताया कि उनका परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी यह कार्य कर रहा है। वर्तमान समय में वे अपने इस कार्य से 300 से अधिक लोगों को रोजगार दे रहे हैं, जिसमें 70 महिलाएं शामिल हैं।
वर्तमान में भोपाल निवासी एवं मूलत: डिंडोरी की निवासी गोंड भित्तिचित्र की कलाकार पदमश्री श्रीमती दुर्गाबाई श्याम की कला को देखकर राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु बहुत प्रभावित हुई और सराहना की। उन्होंने कहा दुर्गाबाई संस्कृति एवं कला को जीवित रखने और उसे आगे बढ़ाने के लिये कार्य कर रही हैं। पद्मश्री दुर्गा बाई ने बताया कि वे बच्चों को इस कला को सीखा रही है और एक संस्था के माध्यम से अन्य लोगों को भी नि:शुल्क इस कला का प्रशिक्षण दे रही है।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने झाबुआ जिले के कलाकार दंपत्ति पदमश्री श्री रमेश एवं श्रीमती शांति परमार द्वारा निर्मित "झाबुआ डॉल्स" को देखकर पूछा कि क्या यह गुड़िया मिट्टी से बनाई गई है। कलाकारों ने बताया कि उनके द्वारा कपास एवं कपड़े से आकर्षक गुड़ियों का निर्माण किया जाता है। वे अपनी इस कला को जीवित रखने के लिये अन्य लोगों को भी नि:शुल्क प्रशिक्षण देते हैं। उन्होंने बताया कि बाजार और मेलों में वे जितनी गुड़िया लेकर जाते हैं, वे सभी बिक जाती हैं।
राष्ट्रपति ने खरीदी साड़ी और यूपीआई से किया डिजिटल पेमेंट
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने मृगनयनी एंपोरियम में हथकरघा पर निर्मित साड़ियों को देखा और उनकी कलाकारी देखकर प्रसन्न हुई। वहां कार्यरत महिला कर्मचारियों से उन्होंने साड़ियों के नाम एवं पैटर्न की जानकारी ली। इस पर उन्हें चंदेरी, महेश्वरी, कॉटन एवं सिल्क की साड़ियां दिखायी गई और उनके बारे में विस्तार से बताया गया। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने वहां की महिला कर्मचारियों से अपनी पसंद की हल्के रंग की एक साड़ी उनके लिये चुनने का अनुरोध किया। इस पर सरिता गव्हाड़े ने राष्ट्रपति के लिए हल्के पिंक रंग की महेश्वरी साड़ी पसंद कर दी। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने इस साड़ी का काउंटर पर जाकर यूपीआई से डिजिटल भुगतान भी किया। काउंटर के कर्मचारी कविता भिलवारे एवं विपुल सिंह द्वारा डिजिटल पेमेंट जमा कराया गया। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु को महिला कर्मचारी अरूणा रापोतू, साधना शुक्ला, संगीता शुक्ला, मीना चौरसिया एवं वंदना कोठारी द्वारा साड़ियां एवं सिल्क के कपड़े दिखाये गये।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भेंट की चंदेरी साड़ी
राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु के मृगनयनी एम्पोरियम इंदौर में हस्तशिल्प कलाकारों से संवाद एवं उनकी कला के अवलोकन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी प्रदेश की ओर से राष्ट्रपति को चंदेरी साड़ी भेंट की।
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राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का एयरपोर्ट पर स्वागत पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन, अध्यक्ष अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम श्री सावन सोनकर, राज्य सफाई कर्मचारी आयोग अध्यक्ष श्री प्रताप करोसिया, स्थानीय सांसद श्री शंकर लालवानी, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, विधायकगण श्री महेंद्र हार्डिया, श्री रमेश मेंदोला, श्रीमती मालिनी गौड़, श्री मधु वर्मा, सुश्री उषा ठाकुर, श्री गोलू शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीना मालवीया, श्री चिंटू वर्मा, श्री गौरव रणदिवे ने भी किया।
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