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निजी स्कूलों की मनमानी पर सरकार ने नकेल कसना शुरू कर दी है। निजी विद्यालयों द्वारा एनसीईआरटी की पुस्तक के स्थान पर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें क्रय करने विद्यार्थियों एवं पालकों को बाध्य किए जाने की शिकायत को लेकर राज्य शासन ने कड़े मुख्य निर्देश जारी किए हैं।
इस संबंध में सचिव छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समस्त कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी को 24 अप्रैल को भेजे पत्र में स्पष्ट किया गया है कि निजी विद्यालय जहां सीजी बोर्ड से संबद्धता प्राप्त कर अध्यापन कराया जाता है, वहां पहली से दसवीं तक पाठ्य पुस्तकें एससीईआरटी की छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम से प्रकाशित पुस्तकें विद्यार्थियों को निःशुल्क प्रदाय किया जाना है। लिहाजा इन विद्यालयों में विद्यार्थियों / पालकों को किसी अन्य प्रकाशकों की पुस्तकें क्रय करने हेतु बाध्य नहीं किया जाए। इसी प्रकार सीबीएसई से संबद्धता प्राप्त विद्यालयों में एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम का अध्यापन कराया जाता है। पालकों से प्रायः यह शिकायत प्राप्त होती है कि अशासकीय विद्यालयों द्वारा उन्हें दुकान विशेष से निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है।
इस संबंध में कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कक्षा पहली से आठवीं तक निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू है। यह सभी विद्यार्थियों को शिक्षा सुलभ कराने की दृष्टि से लागू किया गया है। अतः कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों हेतु एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित पुस्तकें लागू करवायें ताकि पालकों पर निजी पुस्तकों का अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े।
तीन पालकों और दो नागरिकों की शिकायत
विगत 18 व 20 अप्रैल को जिला कार्यालय दुर्ग के कम्प्यूटर कक्ष में उपस्थित 5 सदस्यीय जांच दल के समक्ष तीन पालकों और दो नागरिकों द्वारा शिकायत की गई। शिकायत में कह गया कि कुछ स्कूलों द्वारा एक निजी दुकान खासकर सेक्टर 6 भिलाई से किताबें खरीदने बाध्य किया जाता है। इन शिकायतों को लेकर संबंधित स्कूल प्रबंधन का भी पक्ष सुना गया, जिसमें कुछ स्कूल प्रबंधक अपनी गलती स्वीकार किए और कुछ का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।
जिले में संचालित निजी स्कूलों द्वारा मनमानी किए जाने का आरोप लगा है। जिला शिक्षा विभाग को विभिन्न माध्यमों से इसकी शिकायत प्राप्त हुई है। इसे संज्ञान में लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने पांच सदस्यीय जांच दल का गठन किया है। आरोप में कहा गया है कि कई निजी स्कूलों द्वारा गणवेश में परिवर्तन, पाठ्य पुस्तक को एक ही दुकान से क्रय करने बाध्य करना, पाठ्य पुस्तक बदलना सहित मनमाने ढंग से फीस वृद्धि की गई है।
इसे लेकर विभिन्न माध्यमों से प्राप्त निजी स्कूलों संबंधी शिकायतों पर जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग द्वारा कार्यवाही करते हुए सर्व नोडल प्राचार्यों, शासकीय हाईस्कूल / हायर सेकेण्डरी जिला दुर्ग को 7 अप्रैल 2026 को सभी अशासकीय विद्यालयों से प्रतिवेदन मांगा गया। प्रतिवेदन प्राप्त होने उपरांत शिकायतों का निराकरण करने समिति का गठन किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित पांच सदस्यीय जांच दल में जे. पी. पाण्डेय, प्राचार्य, सेजेस पाहुंदा पाटन, राजेन्द्र चन्द्राकर, व्याख्याता, सेजेस बोरसी दुर्ग, सुनील कश्यप, व्याख्याता, शा.उ.मा.वि. कन्या भिलाई 03 पाटन, संदेश पाण्डेय, व्याख्याता, सेजेस मर्रा पाटन, सुमीत नायडु, सहायक ग्रेड 02, शा.क.उ.मा.वि. वैशालीनगर, भिलाई शामिल है।
सर्व पालक निजी विद्यालय अपना साक्ष्य सहित बयान दर्ज कराने हेतु कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, दुर्ग में जांच समिति के 20 अप्रैल तक उपस्थित होने कहा गया है। इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ बजरंग दल व जिला अध्यक्ष, भीम आर्मी भारत एकता मिशन छग को अपना पक्ष जांच समिति के समक्ष साक्ष्य सहित प्रस्तुत करने कहा गया है। इन्हें डीईओ कार्यालय में जांच समिति के समक्ष 18 अप्रैल को प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक उपस्थित होने कहा गया है।
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