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कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र के गाजा से जुड़े प्रस्ताव पर विचार न करने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने केंद्र सरकार के निर्णय को शर्मनाक और निराशाजनक बताया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "यह शर्मनाक और निराशाजनक है कि हमारी सरकार ने गाजा में नागरिकों की सुरक्षा, कानूनी और मानवीय दायित्वों को पूरा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर विचार न करने का फैसला किया है। 60,000 लोग, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं, वे पहले ही मारे जा चुके हैं और एक पूरी आबादी को बंधक बनाकर भूख से मारा जा रहा है। मगर, हम कोई कदम उठाने से इनकार कर रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "यह हमारी औपनिवेशिक-विरोधी विरासत का दुखद उलटफेर है। वास्तव में, न केवल हम नेतन्याहू द्वारा पूरे देश को नष्ट किए जाने पर चुप खड़े हैं, बल्कि हम उनकी सरकार द्वारा ईरान पर हमला किए जाने और उसके नेतृत्व की हत्या के प्रयासों पर खुशी मना रहे हैं, जो उसकी संप्रभुता का घोर उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय नियमों की पूर्ण अवमानना है।"
प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार से सवाल पूछते हुए कहा, "हम, एक राष्ट्र के रूप में अपने संविधान के मूल्यों और स्वतंत्रता संग्राम के सिद्धांतों को कैसे त्याग सकते हैं, जिन्होंने शांति और मानवता पर आधारित अंतरराष्ट्रीय मंच का मार्ग प्रशस्त किया था? इसका कोई औचित्य नहीं है। सच्चा वैश्विक नेतृत्व न्याय की रक्षा करने के साहस की मांग करता है, भारत ने अतीत में यह साहस निरंतर दिखाया है।"
उन्होंने कहा, "एक तेजी से विभाजनकारी दुनिया में हमें मानवता के लिए अपनी आवाज को फिर से उठाना होगा और सत्य व अहिंसा के लिए निडर होकर खड़ा होना होगा।"
बता दें कि इजरायल-ईरान में बढ़ते तनाव के बीच शनिवार को इजरायल में आवासीय इमारतों पर मिसाइल हमले किए गए, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। इनके अलावा 34 लोग घायल हो गए। इस बीच, सुरक्षा परिषद ने इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) के शीर्ष अधिकारी को चेतावनी दी है कि न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमलों के 'गंभीर परिणाम' हो सकते हैं।
वायनाड की सांसद ने शुक्रवार को ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘आपदाएं राजनीति का विषय नहीं होनी चाहिए। ऐसी आपदाओं के पीड़ितों के सहयोग के प्रयासों में मानवता और करुणा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।'' कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘वायनाड के लोग राज्य और केंद्र सरकारों की ओर आशा से देख रहे हैं, उन्हें बहाने नहीं चाहिए, उन्हें गरिमा के साथ अपने जीवन पटरी पर लाने में सक्षम होने के लिए तत्काल मदद की जरूरत है।'' उनका कहना था कि जब सरकार में हर स्तर पर घावों को भरने और जीवन के पुनर्निर्माण के लिए मिलकर काम किया जाता है तो भारत मजबूत होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र और राज्य सरकार को आगे बढ़कर वायनाड के लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
प्रियंका गांधी ने अपने पोस्ट में ‘‘वायनाड में भूस्खलन और बाढ़ के लिए सहायता पर नोट'' के स्क्रीनशॉट साझा किए। इस नोट में लिखा है, ‘‘केंद्र सरकार वायनाड के प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशील है और राज्य सरकार को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए सक्रिय रूप से आगे बढ़ी है।'' इसमें कहा गया है कि वायनाड में भूस्खलन आपदा के बाद प्रभावित लोगों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए केंद्र के सहयोग की पहली किस्त 145.60 करोड़ रुपये 31 जुलाई, 2024 को और 145.60 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त एक अक्टूबर, 2024 को जारी की गई।
]]>राहुल गांधी को किया धन्यवाद
उन्होंने पिछले पांच वर्षों में वायनाड के लोगों के लिए किए गए कार्यों के लिए अपने भाई राहुल गांधी को भी धन्यवाद दिया। प्रियंका गांधी ने वायनाड में सभा को संबोधित करते हुए कहा, ''मैं अपने भाई को पिछले पांच वर्षों में यहां किए गए सभी कार्यों के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। यह आपके उस विश्वास के कारण है कि आपने मुझ पर भरोसा किया है। मैं सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं नेताओं… आपने मुझे जो प्यार दिया है उसके लिए मैं आप सभी को धन्यवाद देती हूं।''
आपको निराश नहीं करूंगी- प्रियंका गांधी
प्रियंका ने आगे कहा कि वह निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से सीखने के लिए यहां आई हैं, उन्होंने कहा कि वह यहां की "समस्याओं से अवगत हैं। उन्होंने कहा, "मैं आपसे सीखने के लिए यहां हूं। मैं आपकी समस्याओं को गहराई से समझने के लिए यहां हूं। बेशक, मैं रात्रि प्रतिबंध, मानव-पशु संघर्ष, स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता, बेहतर शैक्षणिक संस्थानों की आवश्यकता के बारे में जानता हूं। लेकिन मैं हूं अब इन सबके लिए लड़ने, आपके साथ काम करने और उन्हें ठीक से समझने के लिए मैं आपके घर आऊंगी, आपसे मिलूंगी, मेरे कार्यालय के दरवाजे खुले हैं… मैं आपको निराश नहीं करूंगी।''
कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले 35 सालों में वह प्रचार करती रही हैं लेकिन यह पहली बार है जब उन्होंने चुनाव लड़ा है। प्रियंका ने कहा, "मुझे चुनाव प्रचार करते हुए 35 साल हो गए हैं और यह पहली बार है, जब मैंने चुनाव लड़ा है। इन वर्षों में, मैं इन अभियानों में लाखों लोगों से मिला हूं… मैं कहना चाहती हूं कि मुझे उनमें से हर एक याद है आप, जिन्होंने वायनाड में मेरा इंतजार किया, मुझे आपकी हर मां, बच्चे याद हैं… मुझे आपका हर एक आलिंगन, चुंबन, फूल याद हैं।''
28 नवंबर को लोकसभा में सांसद के रूप में शपथ ली
कांग्रेस महासचिव ने इससे पहले 28 नवंबर को संविधान की प्रति हाथ में लेकर लोकसभा में सांसद के रूप में शपथ ली थी। दक्षिणी राज्य के प्रतिनिधि के रूप में शपथ लेते समय प्रियंका को केरल कसावु साड़ी पहने देखा गया। प्रियंका गांधी वाड्रा ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के सत्यन मोकेरी को हराकर वायनाड लोकसभा सीट 4,10,931 वोटों के अंतर से हासिल की। वायनाड सीट उनके भाई राहुल गांधी द्वारा खाली की गई थी, जो पहले वायनाड का प्रतिनिधित्व करते थे लेकिन इस साल के आम चुनावों के दौरान वहां से लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद उत्तर प्रदेश के रायबरेली में स्थानांतरित हो गए।
हलफनामे में दी गई जानकारी के मुताबिक कांग्रेस नेत्री के कुल स्टॉक पोर्टफोलियो की वैल्यू 18 अक्टूबर तक 65,72,012 रुपये है। इसमें से 19,08,875 रुपये सरकारी शेयरों में निवेशित हैं। उनके पोर्टफोलियो में शामिल पीएसयू में रेलवे और खनन क्षेत्र की कंपनियां हैं।
प्रियंका गांधी वाड्रा के पास इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के 1,000 शेयर हैं और इनकी वैल्यू 2,21,800 रुपये है। उनके पास नेशनल एलुमिनियम के 2,000 और एनएमडीसी के 1,000 शेयर हैं, जिनकी वैल्यू क्रमश: 4,64,000 रुपये और 2,31,450 रुपये है। इसके अतिरिक्त प्रियंका गांधी वाड्रा के पास रेल विकास निगम लिमिटेड और राइट्स लिमिटेड के 1,000-1,000 शेयर हैं। इनकी वैल्यू क्रमश: 4,77,200 रुपये और 3,02,800 रुपये है।
वायनाड से कांग्रेस की प्रत्याशी के पास रेलटेल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के 500 शेयर हैं। इसकी वैल्यू 2,11,625 रुपये है। इसके अलावा प्रियंका गांधी वाड्रा ने उषा मार्टिन, इन्फोसिस, एनआईआईटी, टाटा पावर, स्पाइसजेट, पीसी ज्वेलर्स और फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों में भी निवेश किया हुआ है।
चुनावी हलफनामे के मुताबिक, कांग्रेस नेत्री ने म्यूचुअल फंड में भी निवेश किया हुआ है, जिसकी वैल्यू 2 करोड़ 24 लाख है। इसके अलावा उनके पीपीएफ खाता में 17 लाख रुपये जमा है। प्रियंका गांधी ने सोने और चांदी में भी निवेश किया हुआ है। उनके पास 59.83 किलो के चांदी से बनी चीजें हैं, जिसकी वैल्यू 29.55 लाख रुपये और 4.41 किलो की ज्वेलरी है, जिसमें 2.5 किलो सोने से बनी चीजें शामिल हैं और इनकी कीमत 1.15 करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त उनके पास शिमला में घर और गाड़ी भी है।
]]>बता दें कि केरल की वायनाड लोकसभा सीट और विभिन्न राज्यों की 47 विधानसभा सीट के लिए 13 नवंबर को उपचुनाव होगा। वहीं नतीजे 23 नवंबर को आएंगे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव में वायनाड और रायबरेली सीट से जीत दर्ज की थी। राहुल गांधी ने वायनाड सीट खाली कर दी थी और रायबरेली सीट को बरकरार रखा था। इस सीट से राहुल गांधी की बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा पार्टी की उम्मीदवार बनाया गया है। अगर प्रियंका गांधी वाड्रा लोकसभा उपचुनाव जीत जाती हैं, तो गांधी परिवार के तीनों सदस्य पहली बार संसद में होंगे।
राहुल गांधी द्वारा वायनाड सीट खाली करने के बाद ही कांग्रेस ने घोषणा कर दी थी कि प्रियंका गांधी वाड्रा वहां उपचुनाव लड़ेंगी। राहुल ने रायबरेली सीट इसलिए चुनी क्योंकि इस निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस का मजबूत इतिहास रहा है, जिसने 1977, 1996 और 1998 को छोड़कर सभी लोकसभा चुनाव जीते हैं। राहुल के दादा-दादी, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी भी इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। रायबरेली में राहुल अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाना चाहते हैं। यह सीट पहले 2004 से 2019 तक सोनिया गांधी के पास थी। 2019 में राहुल ने अमेठी और वायनाड दोनों सीटों से चुनाव लड़ा, लेकिन केवल केरल की वायनाड में ही जीत हासिल की।
सोनिया गांधी अब राज्यसभा सांसद हैं। प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में आने की संभावना के साथ, गांधी परिवार संसद में अपना प्रभाव मजबूत करना चाहेगा। इसके अलावा, वायनाड में प्रियंका की मौजूदगी से पार्टी को उम्मीद है कि वह जनता को एक रणनीतिक संदेश भेजकर उत्तरी और दक्षिणी दोनों क्षेत्रों में कांग्रेस की मौजूदगी का संकेत देगी।
]]>विनेश फोगाट का जिक्र करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि जब फोगाट अन्याय के खिलाफ खड़ी हुई तो बड़े-बड़े नेताओं ने उनका साथ छोड़ दिया। मोदी जी भी इनसे नहीं मिले। विनेश को सड़क पर घसीटा गया, लेकिन फिर भी ये झुकी और टूटी नहीं, बल्कि ये ओलंपिक में गई और हमारे लिए लड़ीं। देश की जनता इनके साथ खड़ी रही, देश सत्य को पहचानता है। कुरुक्षेत्र और अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी गई थी, उसमें और आज की लड़ाई में कोई फर्क नहीं है। ये लड़ाई भी अन्याय, असत्य और दुष्टों के खिलाफ है।
उन्होंने आगे कहा कि जब नेता मंच पर आते हैं, तो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जब काम का समय आता है, तो हमें देखते तक नहीं हैं। मंत्री के बेटे द्वारा किसान कुचले जाते हैं। सरकार और नेताओं को बनाने का काम जनता करती है। नेताओं को अब टोकने का समय आ गया है। भाजपा सरकार ने पिछले 10 साल में आपके लिए कोई काम नहीं किया है। जब ये लोग भ्रष्टाचार की बात करते हैं, तो मुझे हंसी आती है, इससे बड़ा भ्रष्टाचार क्या होगा कि देश के सारे उद्योग आपने अपने दो मित्रों को दे दिया। ऐसा कानून लाने जा रहे थे, जिससे इस देश का किसान पिस जाता और आपके दो मित्रों को कानून का फायदा मिल जाता, लेकिन जनता ने पहचाना और संघर्ष किया। प्रियंका गांधी ने कहा कि सत्यमेव जयते सिर्फ कहने वाली बात नहीं है, बल्कि ये हमारे संविधान में गढ़ी हुई है। आपके पास वोट की शक्ति है, जिससे आप अपना भविष्य बदल सकते हैं। इस बात को गहराई से समझ लीजिए। कुछ दिन पहले लोकसभा चुनाव हुआ था, उसका नतीजा सबने देखा कि क्या हुआ?
आगे प्रियंका गांधी ने कहा कि आज छोटे व्यापारी और खेती किसानी करने वालों के रोजगार खत्म हो चुके हैं। इस सरकार की नीतियां ही आपके खिलाफ हैं। भाजपा अग्निवीर लेकर आई, जिसमें 4 साल की नौकरी है और कोई पेंशन नहीं है। युवा 4 साल बाद बेरोजगार हो जाए और फिर नौकरी ढूंढें। इसी तरह हरियाणा के लोगों को फैमिली आईडी के झांसे में फंसाकर, सरकारी सुविधाओं से दूर किया जा रहा है। हरियाणा की जनता के साथ हर स्तर पर अन्याय हो रहा है। उन्होंने मंच से पूछा कि सरकार बनाता कौन है? नेताओं को कौन बनाता है? क्या आपके बिना हम आगे बढ़ सकते हैं? उन्होंने लोगों से अपील की कि आप लड़ाई लड़ो, हम सब साथ में लड़ेंगे, एक नई सरकार लाओ भाजपा के एक-एक नेता को दिखाओ की ये असत्य, लूट, भ्रष्टाचार ये सब नहीं चलेगा।
उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले मैं अपनी बेटी को बास्केटबॉल कैंप के लिए हरियाणा लेकर आई थी। मुझे उसके कैंप से लौटने तक इंतजार करना था। जहां मैं इंतजार कर रही थी, वहां से कुछ दूरी पर एक दादा जी खेतों में कटाई कर रहे थे। मैंने उनसे कहा कि मुझे भी कटाई सिखाइए। उन्होंने मुझे थोड़ी कटाई सिखाई और फिर कहा कि आप थक गए होगे, घर चलो थोड़ा आराम कर लेना। मैं उनके घर गई तो उनके परिवार ने मुझे चाय पिलाई, पराठे खिलाए और ढेर सारी बातें की। इस बात को 8-10 साल बीत गए हैं। आज भी जब कभी वे घर आते हैं तो घी, गन्ना या बच्चों के लिए कुछ न कुछ लेकर आते हैं। यही अपनापन तो हरियाणा की संस्कृति और संस्कार हैं।
प्रियंका ने कहा मेरी बेटी हरियाणा के लिए खेलती थी। एक बार मैं उसके साथ बास्केटबाल कैंप के लिए पांडिचेरी गई। वहां एक रितिका नाम की बच्ची थी, जो हरियाणा से थी और बास्केटबाल टीम की कैप्टन थी। उसे मैच के दिन 102 डिग्री बुखार था, लेकिन वो मेहनत के साथ खेली। हरियाणा की हर लड़की के दिल में कुछ कर गुजरने की आग होती है। विनेश ने भी ऐसा संघर्ष किया और जब मेडल जीतकर आई तो सभी को गर्व हुआ, पीएम मोदी उनसे मिले। लेकिन, फिर सरकार, सिस्टम से भरोसा उठ गया, क्योंकि विनेश और उसके साथियों के साथ अन्याय हुआ।
]]>एक्स प्लेटफॉर्म पर की अपनी पोस्ट में प्रियंका ने लिखा, 'कोलकाता, बिहार, उत्तराखंड और यूपी में महिलाओं के साथ हुई क्रूरताओं ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस समय देश भर की महिलाएं दुख और गुस्से में हैं। जब भी ऐसी घटनाएं होती हैं तो देश की महिलाएं देखती हैं कि सरकारें क्या कर रही हैं? उनकी बातों और उपायों में कितनी गंभीरता है? जहां भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सख्त संदेश देने की जरूरत हुई, वहां आरोपियों को बचाने की कोशिशें की गईं।'
आगे उन्होंने लिखा, 'महिलाओं पर जघन्य अत्याचार के मामलों में बार-बार नरमी बरतना, आरोपी को राजनीतिक संरक्षण देना और सजायाफ्ता कैदियों को जमानत/पैरोल देने जैसी हरकतें महिलाओं को हतोत्साहित करती हैं। इससे देश की महिलाओं में क्या संदेश जाता है? जब सरकारी आंकड़ों में हर दिन 86 रेप हो रहे हों, महिलाएं सुरक्षा की आशा किससे करें?'
प्रियंका ने ट्वीट में किया इन 3 घटनाओं का जिक्र
कांग्रेस महासचिव का यह ट्वीट पिछले सप्ताह 9 अगस्त को कोलकाता में सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए जघन्य बलात्कार और हत्या को लेकर पूरे देश में आक्रोश के बीच आया है। साथ ही प्रियंका ने अपनी पोस्ट में उत्तराखंड के रुद्रपुर में हुई उस घटना का भी जिक्र किया, जिसमें एक निजी अस्पताल की नर्स के साथ बलात्कार करके और उसके चेहरे को पत्थर से कुचलकर उसकी हत्या कर दी गई। साथ ही आरोपी ने उसके शव को उत्तराखंड की सीमा के पास उत्तर प्रदेश के एक गांव में खाली पड़े प्लॉट में फेंक दिया। इसके अलावा प्रियंका ने जिस तीसरी घटना का जिक्र किया वो बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में हुई, जहां 14 वर्षीय दलित लड़की का उसके घर से अपहरण कर लिया गया और उसका शव एक तालाब में मिला, जिस पर चोट के निशान थे।
राष्ट्रपति भवन के दो महत्वपूर्ण हॉल – ‘दरबार हॉल’ और ‘अशोक हॉल’ – का नाम बदलकर अब ‘गणतंत्र मंडप’ और ‘अशोक मंडप’ कर दिया गया है। ‘दरबार हॉल’ में कई बड़े आयोजन होते रहे हैं। राष्ट्रीय पुरस्कारों की प्रस्तुति जैसे महत्वपूर्ण समारोहों का यह स्थान रहा है। ‘दरबार’ शब्द से भारतीय शासकों, राजा-महाराजाओं और अंग्रेजों के दरबार और सभाओं का आभास मिलता है।
सरकार ने कहा, "भारत के गणतंत्र बनने के बाद इसकी प्रासंगिकता खत्म हो गई है। 'गणतंत्र' की अवधारणा प्राचीन काल से ही भारतीय समाज में गहराई से निहित है, इसलिए दरबार हॉल का नाम बदलकर 'गणतंत्र मंडप' कर दिया गया है। बड़े आयोजन स्थल के लिए यह एक उपयुक्त नाम है।"
'अशोक हॉल' मूल रूप से एक बॉलरूम था। 'अशोक' शब्द का अर्थ है वह व्यक्ति जो "सभी दुखों से मुक्त" या "किसी भी दुख से रहित" हो। साथ ही, 'अशोक' सम्राट अशोक को संदर्भित करता है, जो एकता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का प्रतीक है। भारतीय गणराज्य का राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ में अशोक का शेर शीर्ष पर है। यह शब्द अशोक वृक्ष को भी संदर्भित करता है, जिसका भारतीय धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ कला और संस्कृति में भी गहरा महत्व है। 'अशोक हॉल' का नाम बदलकर 'अशोक मंडप' करने से भाषा में एकरूपता आती है और 'अशोक' शब्द से जुड़े प्रमुख मूल्यों को बनाए रखते हुए अंग्रेजीकरण के निशान मिट जाते हैं।
]]>उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "यूपीएससी देश की सबसे नामी परीक्षा है और उससे निकले लोग शासन व्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण स्तम्भ होते हैं। देश के करोड़ों लोगों का भरोसा और हमारे रोजमर्रा के शासन-प्रशासन का कामकाज इस संस्था की पेशेवर प्रणाली से जुड़ा है। मैंने खुद देखा है कि इस परीक्षा के लिए युवा कितनी मेहनत, आंखों में ढेर सारे सपने लिए और दिल में लगन के साथ तैयारियां करते हैं। ऐसे में यूपीएससी की प्रक्रियाओं में गड़बड़ी की खबरें बहुत हैरान करने वाली हैं। इस महत्वपूर्ण चयन प्रक्रिया में हुई एक भी गड़बड़ी बड़े सवाल खड़े करती है और लाखों युवाओं के सपनों और उनके विश्वास पर चोट करती है।"
उन्होंने आगे लिखा, "जरूरी है कि इन सवालों का जवाब जनता और यूपीएससी की तैयारी करने वाले युवाओं को मिले। क्या इसके लिए यूपीएससी के उच्च पदों पर राजनीतिक नियुक्तियों से आए लोग जिम्मेदार हैं? यदि हां तो उन पर कार्रवाई कब? जिस सिस्टम में एक-एक नंबर के चलते उच्च स्तर का कंपटीशन होता है, उसमें क्या केवल सतही तौर पर जांच कर पल्ला झाड़ना उचित है? नकली सर्टिफिकेट का सिस्टम एससी, एसटी, ओबीसी, विकलांग और ईडब्ल्यूएस वर्ग के अभ्यर्थियों को मिलने वाले मौके पर चोट करता है। क्या सर्टिफिकेट जांचने की कोई ठोस संस्थागत प्रणाली विकसित नहीं की जा सकती?"
उन्होंने कहा, "यूपीएससी प्रणाली को और अधिक पारदर्शी व प्रामाणिक बनाने के लिए बदलावों की सख्त जरूरत है, क्या इस पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। यूपीएससी से जुड़े सवाल इस देश के शासन-प्रशासन के प्रति भरोसे और हमारे करोड़ों युवाओं के सपनों से जुड़े सवाल हैं। इस पर सरकार से जवाब आना जरूरी है।"
दस्तावेजों में फर्जीवाड़े के आरोपों से घिरी ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर ने नाम, माता-पिता का नाम, हस्ताक्षर, ईमेल, मोबाइल नंबर और पता बदलकर अपनी फर्जी पहचान बनाई। यही कारण है कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर के खिलाफ कार्रवाई शुरू की कर दी है।
]]>सरकार ने NTA के महानिदेशक सुबोध सिंह को हटा दिया
केंद्र सरकार ने शनिवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक सुबोध सिंह को हटा दिया और मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी' (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक) में अनियमितताओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी। प्रियंका ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि ‘नीट-यूजी' परीक्षा का प्रश्नपत्र ‘‘लीक'' हुआ, वहीं नीट-पीजी, यूजीसी नेट और सीएसआईआर-नेट ‘‘रद्द'' कर दिए गए।
शिक्षा का ढांचा माफियाओं-भ्रष्टाचारियों के हवाले हो चुका है
उन्होंने पोस्ट में कहा, ‘‘आज, देश की कुछ सबसे बड़ी परीक्षाओं का यह हाल है। भाजपा राज में समूची शिक्षा का ढांचा माफियाओं-भ्रष्टाचारियों के हवाले हो चुका है।'' प्रियंका ने पेास्ट में कहा, ‘‘लालची और चाटुकार किस्म के अयोग्य लोगों के हाथ में देश की शिक्षा और बच्चों का भविष्य सौंपने की राजनीतिक जिद और अहंकार ने पेपर लीक, परीक्षा रद्द, कैंपस से पढ़ाई-लिखाई का विलोप और राजनीतिक गुंडागर्दी को हमारी शिक्षा-व्यवस्था की पहचान बना दिया है।''
युवाओं के सामने भाजपा एकमात्र सबसे बड़ी बाधा…
उन्होंने कहा कि हालत यह हो गई है कि भाजपा सरकार साफ-सुथरे ढंग से एक परीक्षा तक नहीं करा सकती। पेास्ट में कहा गया है, ‘‘आज युवाओं के भविष्य के सामने भाजपा सरकार एकमात्र सबसे बड़ी बाधा बनकर खड़ी है। देश के काबिल युवा अपना बेशकीमती समय, सारी ऊर्जा भाजपा के भ्रष्टाचार से लड़ने में गंवा रहे हैं और मजबूर मोदी जी सिर्फ तमाशा देख रहे हैं।''