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उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास दीवार गिरने में मारे गए युवक अजय योगी के परिवार वालों ने सड़क पर शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी और 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की। उधर प्रशासन और नगर निगम ने दुर्घटनास्थल के पास से दुकानें हटाने का काम शुरू कर दिया है।
प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल जाएंगे दुर्घटनास्थल पर
यहां पर अवैध रूप से फूल और प्रसाद की दुकाने लगाई गईं थी। प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल कुछ देर में उज्जैन पहुंचेंगे। वे महाकाल मंदिर के सामने दुर्घटनास्थल पर भी जाएंगे। प्रशासन ने दुर्घटना के बाद से आम लोगों के लिए यह रास्ता बंद कर दिया था। उज्जैन कलेक्टर नीरज सिंह ने हादसे को लेकर जांच बैठाई है।
महाकाल मंदिर और आसपास पहले भी हो चुके हादसे
वर्ष 2013-14 में महाकाल टनल के निर्माण के दौरान नवनिर्मित दीवार के गिरने से कुछ श्रमिक दब गए थे। इस हादसे में दो महिला श्रमिकों की मौत हो गई थी।
श्री महाकाल महालोक में निर्माण के दौरान बीते वर्ष बारिश के दिनों में काम करते समय एक श्रमिक की करंट लगने से मौत हो गई थी।
कुछ वर्षों पहले महाकाल मंदिर परिसर में मार्बल चबूतरे के समीप बरगद का पेड़ गिरने से दो बच्चों की मौत हो गई थी।
महाकाल मंदिर के गर्भगृह में इसी वर्ष होली पर केमिकल युक्त गुलाल के उपयोग से आग लग जाने के कारण कई पुजारी, पुरोहित व सेवक घायल हो गए थे।
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एग्जिट पोल में ले पेन की पार्टी आगे
एग्जिट पोल करने वाली एजेंसियों आईएफओपी, इप्सोस, ओपिनियनवे और एलाबे ने अनुमान लगाया है कि मरीन ले पेन की नेशनल रैली 34 फीसदी वोट के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनने जा रही है। वामपंथी न्यू पॉपुलर फ्रंट (NFP) को लगभग 29 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मध्यमार्गी एनसेंबल एलायंस तीसरे नंबर पर है और उसे लगभग 20.3 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है।
मुस्लिम विरोधी मानी जाती है नेशनल रैली
पिछले महीने हुए यूरोपीय संसद के चुनाव में दक्षिणपंथी पार्टियों को बड़ी सफलता मिली थी। इसमें फ्रांस की नेशनल रैली भी शामिल थी। नेशनल रैली से मिली करारी शिकस्त के बाद मैक्रों ने फ्रांस में मध्यावधि चुनाव की घोषणा की थी। ‘नेशनल रैली’ का नस्लवाद और यहूदी-विरोधी भावना से पुराना संबंध है और यह फ्रांस के मुस्लिम समुदाय की विरोधी मानी जाती है। मरीन ले पेन की ‘नेशनल रैली’ पार्टी ने आव्रजन विरोधी असंतोष को चुनाव में भुनाया है और सोशल मीडिया के मंचों के माध्यम से इसे हवा दी है।
यूरोप में सबसे उदार देशों में गिने जाने फ्रांस में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से ही दक्षिणपंथी पार्टियां कभी सत्ता में नहीं आई हैं। नेशनल रैली के बढ़ते उभार ने फ्रांस से उदारवादी समाज को चिंता में डाल दिया है। वहीं, एग्जिट पोल के रुझानों के बाद उत्तरी फ्रांस में नेशनल रैली नेता मरीन ले पेन के निर्वाचन क्षेत्र में समर्थकों ने फ्रांसीसी झंडे लहराए और फ्रांस का राष्ट्रीय गीत गाया। ले पेन के शिष्य और नेशनल रैली के अध्यक्ष जॉर्डन बार्डेला ने बताया कि चुनाव का दूसरा दौर फ्रांसीसी गणराज्य के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण होगा। दो चरणों में होने वाला फ्रांस का संसदीय चुनाव 7 जुलाई को सम्पन्न होगा।
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