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लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने आज कबीरधाम जिले में निर्माणाधीन पोड़ी-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-130ए का स्थल निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता एवं तकनीकी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मुख्य मार्ग के साथ बायपास मार्ग का भी अवलोकन किया तथा अधिकारियों और निर्माण एजेंसी से कार्यों की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली।
सचिव बंसल ने निरीक्षण के दौरान स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता में कमी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण कार्य निर्धारित मानकों एवं तय समय-सीमा के भीतर पूर्ण होना चाहिए। उन्होंने जिन स्थानों पर सुधार की आवश्यकता है, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
बंसल ने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण के सभी मापदंडों का कड़ाई से पालन किया जाए तथा प्रत्येक चरण में तकनीकी जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने और नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड में पहुंचकर निरीक्षण करने व गुणवत्ता परीक्षण सुनिश्चित करने को कहा।
फील्ड निरीक्षण से पहले लोक निर्माण विभाग के सचिव ने कवर्धा सर्किट हाउस में लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग तथा सेतु संभाग के अधिकारियों के साथ कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने इस दौरान कवर्धा जिले में चल रहे भवनों, सड़कों एवं पुलों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा कर सभी कार्यों को समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने जिन परियोजनाओं में लंबे समय से प्रगति नहीं हुई है या कार्य प्रारंभ करने में अनावश्यक देरी हो रही है, उन मामलों में संबंधित एजेंसियों एवं जिम्मेदार पक्षों को नोटिस जारी करने को कहा। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में अनावश्यक विलंब और लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सचिव बंसल ने सड़क निर्माण या अन्य प्रस्तावित विकास कार्यों में संबंधित अधिकारियों को पहले स्थल का निरीक्षण कर तकनीकी जांच व अन्य सभी आवश्यक पहलुओं का परीक्षण करने के बाद आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। यदि किसी निर्माण कार्य में तकनीकी बाधा, स्थल संबंधी समस्या या अन्य कठिनाई आ रही हो तो उसकी जानकारी तत्काल वरिष्ठ स्तर पर उपलब्ध कराई जाए। इससे समस्या का निराकरण कर कार्यों की प्रगति को प्रभावित होने से बचाया जा सकता है। कवर्धा के कलेक्टर गोपाल वर्मा, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता व्ही.के. भतपहरी, दुरेग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता नागेश जयंत, राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता ज्ञानेश्वर कश्यप और कवर्धा संभाग के कार्यपालन अभियंता रंजीत घाडगे भी मौजूद थे।
]]>भोपाल
लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों के गुणवत्ता सुधार के उद्देश्य से प्रदेशभर में निर्माण कार्यों के औचक निरीक्षण की व्यवस्था प्रारंभ की गई है।इसी क्रम में 04 नवंबर को मुख्य अभियंताओं के सात दलों द्वारा हरदा, जबलपुर, श्योपुर, खरगोन, सिंगरौली, नीमच एवं सागर जिलों में औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान कुल 35 निर्माण कार्यों का रैंडम आधार पर चयन कर निरीक्षण किया गया, जिनमें से 21 कार्य लोक निर्माण विभाग (सड़क/पुल) के, 4 कार्य परियोजना क्रियान्वयन इकाई (भवन) के, 7 कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के तथा 3 कार्य मध्यप्रदेश भवन विकास निगम शामिल है।
निरीक्षण प्रतिवेदन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री भरत यादव द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। बैठक में प्रमुख अभियंता श्री के.पी.एस. राणा, भवन शाखा के प्रमुख अभियंता श्री एस.आर. बघेल, मुख्य अभियंता श्री पी.सी. वर्मा, मुख्य अभियंता श्री बी.पी. बौरासी, मुख्य अभियंता श्री बी.एस. मीणा, तथा मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के महाप्रबंधक श्री अजय श्रीवास्तव सहित सभी मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री एवं निरीक्षण दल के अधिकारी ऑनलाइन उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान श्योपुर जिले में लोक निर्माण विभाग (सड़क/पुल) के पिपरवास से वामनवास तक सुदृढ़ीकरण मार्ग का कार्य प्रगतिरत पाया गया, किन्तु कार्य संतोषजनक नहीं होने के कारण संबंधित कार्यपालन यंत्री, अनुविभागीय अधिकारी एवं उपयंत्री को नोटिस जारी करने तथा ठेकेदार मेसर्स मुन्ना लाल राठौर को कालीसूची में डालने हेतु निर्देश दिए गए। इसी प्रकार श्योपुर जिले में ही दादूनी से चिमलका तक के मार्ग (पीजी अंतर्गत) का कार्य भी संतोषजनक नहीं पाया गया, जिसके चलते संबंधित कार्यपालन यंत्री, अनुविभागीय अधिकारी एवं उपयंत्री की दो वेतनवृद्धियाँ रोकने, ठेकेदार मेसर्स जे.के. ट्रेडर्स (प्रोप्रायटर देवेन्द्र कुमार गर्ग) को कालीसूची में डालने, परफॉर्मेंस गारंटी जब्त करने तथा हर्जे-खर्चे पर मार्ग का सुधार कार्य कराने हेतु निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त 23 अन्य कार्यों में आंशिक सुधार के निर्देश दिए गए।
समीक्षा के दौरान उत्कृष्ट कार्य के लिए सिंगरौली जिले के पुरैल छन्दा से देवरा रेलवे स्टेशन तक 4.62 किलोमीटर लंबे बीटी नवीनीकरण मार्ग (पीजी अंतर्गत) की सराहना की गई। इस मार्ग की स्थिति अत्यंत अच्छी पाई गई, जिसके लिए कार्यपालन यंत्री श्री एस.बी. सिंह करचुली, अनुविभागीय अधिकारी श्री अरुण शुक्ला, उपयंत्री श्री संजय श्रीवास्तव तथा ठेकेदार मेसर्स श्री श्याम मुरारी की प्रशंसा की गई।
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि निरीक्षण प्रतिवेदन में की गई अनुशंसाओं का पालन सुनिश्चित किया जाए। सी.एम. हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों का निराकरण इस प्रकार किया जाए कि शिकायतकर्ता पूर्ण रूप से संतुष्ट हों, जिससे रैंकिंग में और सुधार हो सके। भास्कराचार्य संस्थान के समन्वय से लोक निर्माण विभाग के लिये कराए जा रहे कार्यों की समीक्षा बैठक आगामी सप्ताह में आयोजित की जाएगी। सड़क मरम्मत के साथ यातायात सुरक्षा, जंगल सफाई, रोड मार्किंग, पेंटिंग तथा ब्लैकस्पॉट के रेक्टिफिकेशन कार्य समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। वर्षाकाल के पश्चात सड़क एवं पुलिया के संधारण कार्य शीघ्र पूर्ण करने को कहा गया।
आगामी समीक्षा बैठक में लोक प्रबंधन परियोजना प्रणाली का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा, जिसके लिए सभी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि वे उक्त प्रणाली का सक्रिय उपयोग करें। लोकपथ ऐप में प्राप्त शिकायतों का निराकरण 4 दिवस की समय सीमा में किया जाए। कार्यों के आगामी औचक निरीक्षण में लोक कल्याण सरोवर का भी निरीक्षण किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वर्षाकाल समाप्त हो चुका है और वर्किंग सीजन प्रारंभ हो गया है, अब विभागीय लक्ष्यों की पूर्ति वित्तीय वर्ष के भीतर सुनिश्चित की जाए।
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ब्रिज परियोजनाओं का तकनीकी मापदंडों के अनुसार निर्माण सुनिश्चित करने की दिशा में लोक निर्माण विभाग द्वारा सतत कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने एक व्यापक दक्षता संवर्द्धन कार्यक्रम निर्धारित किया है, जिसके अंतर्गत राज्य के सभी अभियंताओं को इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) कोड्स और मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज़ (मोर्थ) के दिशा-निर्देशों का अध्ययन कर उनके आधार पर कार्यों का क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए गए हैं।
ब्रिज परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण निर्माण, मापदंड अनुसार डिजाइन, सतत सुपरविजन प्रणाली अपनाने एवं निर्माण के दौरान सतत निरीक्षण के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। रेलवे अथवा नगर निगम जैसे विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की गई है।
मुख्य अभियंता सेतु परिक्षेत्र पीसी वर्मा द्वारा स्पष्ट किया गया है कि पुराने अलाइनमेंट्स को रद्द नहीं किया गया है अपितु गलती से जारी हुआ एक त्रुटिपूर्ण आदेश उसी दिन निरस्त कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि पुलों और फ्लायओवर की जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (जीएडी) रेलवे और लोक निर्माण विभाग द्वारा संयुक्त रूप से जारी की जाती हैं। मुख्य अभियंता को इन्हें निरस्त करने का कोई अधिकार नहीं है और ऐसी कोई आवश्यकता किसी परियोजना में परिलक्षित नहीं हुई है। निर्माण कार्यों के दौरान अक्सर स्थान विशेष की परिस्थिति अनुसार अलाइनमेंट और डिजाइन में परिवर्तन की आवश्यकता होती है, जो कि सतत प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे परिवर्तनों के दौरान संबंधित आईआरसी कोड और मोर्थ के मापदंडों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाता है।
राज्य शासन ने निर्देश जारी किए हैं कि निर्माण के दौरान होने वाले सभी परिवर्तन अन्य स्टेकहोल्डर्स जैसे नगर निगम और रेलवे के समन्वय से ही किए जाएं। परियोजनाओं के रुकने जैसी कोई स्थिति नहीं है। ब्रिज परियोजनाओं में आने वाली जटिल बाधाओं के शीघ्र निराकरण के लिये प्रमुख अभियंता की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें आवश्यकता अनुसार शासकीय या निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया जा सकता है। अब समस्याओं का तकनीकी स्तर पर शीघ्र समाधान हो सकेगा और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। राज्य शासन ने यह भी निर्णय लिया है कि प्रदेश के सभी अभियंताओं का दक्षता संवर्द्धन किया जाए। मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) के तकनीकी सलाहकार को इंडियन अकादमी फॉर हाईवे इंजीनियरिंग के साथ मिलकर पुलों के गुणवत्तापूर्ण निर्माण हेतु प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग बड़ी परियोजनाओं के लिए अनुबंध के अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता और डिजाइन में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। बड़ी परियोजनाओं को इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर करने की कार्ययोजना पर विचार किया जा रहा है। साथ ही राज्य शासन विभागीय क्रियान्वयन में अधिकतम सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग पर भी विचार कर रहा है, जिसमें बड़ी परियोजनाओं की कैमरा युक्त निगरानी भी शामिल है।
इस संबंध में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सेतु परिक्षेत्र द्वारा किसी भी कार्य की जीएडी निरस्त नहीं की गई है और ना ही किसी कार्य को रोका गया है।
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