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पुणे के एक अधिकारी के नेतृत्व में एक पुलिस दल ने बुधवार को मध्य प्रदेश के जबलपुर और उमरिया में पोर्श कार दुर्घटना में मारे गए दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के परिवार से मुलाकात की. अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (एसीपी) मनोज पाटिल के नेतृत्व में दल ने 19 मई को अपनी जान गंवाने वाले 24 वर्षीय आईटी पेशेवरों अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा के परिवारों को स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया.
मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे
बता दें कि यह घातक घटना तब हुई जब पुणे शहर में एक तेज रफ्तार पोर्श, जिसे कथित तौर पर एक 17 वर्षीय लड़का चला रहा था, उनकी मोटरसाइकिल से टकरा गई. मृतक अश्विनी जबलपुर की रहने वाली थी और अनीश उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली के रहने वाले थे. एसीपी पाटिल ने उमरिया में पत्रकारों से बात करते हुए परिवारों के साथ एकजुटता व्यक्त की और चल रही गहन जांच की पुष्टि की. पाटिल ने कहा कि वे युवा इंजीनियर अश्विनी की मौत पर शोक व्यक्त करने आए हैं.
जांच अंतिम चरण में, कोर्ट में पेश करेंगे दस्तावेज
एसीपी पाटिल ने कहा, "हम सही दिशा में जांच कर रहे हैं. मामला पूरी तरह से सही है और पूरी क्राइम ब्रांच मामले पर नजर रखे हुए है.'' जबलपुर में पाटिल ने मृतक अश्विनी कोष्टा के माता-पिता से उनके घर पर मुलाकात की. अश्विनी के पिता सुरेश कोष्टा ने कहा, "एसीपी पाटिल ने हमें मामले में निष्पक्ष जांच और आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है. पुलिस अधिकारी ने हमें बताया है कि जांच अंतिम चरण में है और जल्द ही दस्तावेज अदालत में पेश किए जाएंगे.''
नाबालिग रईसजादे ने पोर्शे कार से दो इंजीनियरों को कुचला
दिल दहलाने वाली घटना पुणे में 19 मई को घटी. एक नाबालिग रईसजादे ने पुणे में अपनी एक लग्जरी कार पोर्शे से बाइक सवार युवक-युवती को टक्कर मार दी थी. दोनों छात्र जबलपुर और उमरिया के रहने वाले थे. घटना के बाद आरोपी नाबालिग लड़के को स्थानीय किशोर बाल न्यायालय में पेश किया गया था. जहां जज ने उसे बेहद हास्यासपद सजा सुनाई और मात्र 15 घंटे में जमानत भी दे दी थी. साथ ही कहा कि ट्रैफिक पुलिस के साथ निबंध लिखकर बताओ. इस घटना के बाद पूरे देश में गुस्से का माहौल है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी घटना पर दुख जताते हुए देश की कानून व्यवस्था और केंद्र सरकार पर निशाना साधा था.
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पुणे पोर्श कांड के आरोपी किशोर की मां के ब्लड सैंपल डीएनए टेस्ट के लिए कलेक्ट किए गए हैं. इस मामले की जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह सैंपल ये जानने के लिए लिया गया है कि शराब के सेवन की पुष्टि करने के लिए फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) में टेस्ट के लिए ससून जनरल अस्पताल में किशोर की जगह गिरफ्तार की गई महिला के नमूने का इस्तेमाल किया गया था या नहीं?
इससे पहले, पुलिस ने इस सिलसिले में ससून अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अजय तावड़े और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीहरि हल्नोर के साथ-साथ एक अन्य कर्मचारी को गिरफ्तार किया था. उन पर शराब की जांच को प्रभावित करने और ब्लड सैंपल की अदला-बदली करने के लिए आरोपी किशोर के माता-पिता के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप है.
किशोर के माता-पिता को पहले एक स्थानीय अदालत ने 5 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया था. क्राइम ब्रांच के अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि मंगलवार को महिला के ब्लड सैंपल लिए गए और इसे डीएनए सैंपलिंग के लिए एफएसएल को भेज दिया गया है.
इस बीच, एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वे मामले में एक विशेष वकील की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं और जल्दी से जल्दी आरोप पत्र दाखिल करने की कोशिश कर रहे हैं.
जांच अधिकारी ने कहा, 'हम प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज कर रहे हैं, महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटा रहे हैं, साथ ही अदालत में पेश करने के लिए दुर्घटना स्थल का डिजिटल पुनर्निर्माण भी कर रहे हैं. मुख्य फोकस एक विशेष वकील की नियुक्ति, जल्दी से आरोप पत्र दाखिल करना और तेजी से सजा सुनिश्चित करने के लिए मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाना है.'
एक आरोप पत्र किशोर न्याय बोर्ड में नाबालिग के खिलाफ और दूसरा माता-पिता और गिरफ्तार डॉक्टरों के खिलाफ नियमित अदालत में दाखिल किया जाएगा. यह मामला खून के नमूने की अदला-बदली और ड्राइवर को बंधक बनाने से संबंधित होगा.'
सूत्रों ने यह भी बताया कि पुलिस 5 जून को किशोर के पर्यवेक्षण गृह में रहने की अवधि को और बढ़ाने की मांग कर सकती है, जब प्रारंभिक अवधि समाप्त हो जाएगी.
आपको बताते चलें कि 19 मई की सुबह पुणे के कल्याणी नगर इलाके में एक तेज रफ्तार पोर्श कार ने मध्य प्रदेश के रहने वाले दो आईटी पेशेवरों की मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी थी. वो पोर्श कार नशे में धुत एक नाबालिग लड़का चला रहा था. इस मामले में पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया था. बाद में उसके पिता को गिरफ्तार किया गया था. फिर उसके दादा की गिरफ्तारी हुई थी. और बीते शनिवार को आरोपी किशोर की मां को गिरफ्तार किया गया था.
]]>पुणे पोर्श कांड में एक के बाद एक नए खुलासे हो रहे हैं. पुलिस ने अब इस मामले में फॉरेंसिंक डिपार्टमेंट के HOD सहित 2 डॉक्टरों को गिरफ्तार कर लिया है. इन पर नाबालिग आरोपी के ब्लड सैंपल गायब करने का आरोप है. ऐसा करने से ही उसके सैंपल में शराब की पुष्टि नहीं हुई थी.
बता दें कि नाबालिग को सबसे पहले सुबह 11 बजे मेडिकल टेस्ट के लिए ससून हॉस्पिटल ले जाया गया था. इस दौरान उसके ब्लड सैंपल को ऐसे शख्स के ब्लड सैंपल से बदल दिया गया था, जिसने शराब का सेवन नहीं किया हुआ था.
पहले ब्लड सैंपल लेने के बाद जांच रिपोर्ट में शराब की पुष्टि नहीं हुई थी. इससे संदेह पैदा हो गया था. इसके बाद दोबारा ब्लड रिपोर्ट आने पर शराब की पुष्टि हुई थी. इससे पता चला था कि 19 मई को सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने नाबालिग को बचाने के लिए ब्लड सैंपल से छेड़छाड़ की थी.
क्या है मामला?
हिट एंड रन की ये घटना 19 मई की है. पुणे के कल्याणी नगर इलाके में रियल एस्टेट डेवलपर विशाल अग्रवाल के 17 साल के बेटे ने अपनी स्पोर्ट्स कार पोर्श से बाइक सवार दो इंजीनियरों को रौंद दिया था, जिससे दोनों की मौत हो गई. इस घटना के 14 घंटे बाद आरोपी नाबालिग को कोर्ट से कुछ शर्तों के साथ जमानत मिल गई थी.कोर्ट ने उसे 15 दिनों तक ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने और सड़क दुर्घटनाओं के प्रभाव-समाधान पर 300 शब्दों का निबंध लिखने का निर्देश दिया था. हालांकि, पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी शराब के नशे में था और बेहद तेज गति से कार को चला रहा था. नाबालिग इस समय सुधार गृह में है.
दो पुलिसकर्मी निलंबित
हाल ही में इस घटना से जुड़े दो पुलिसवालों पर लापरवाही बरतने के लिए गाज गिरी थी. ये दोनों अफसर वारदात के बाद सबसे पहले घटनास्थल पर पहु्ंचे थे. लेकिन दोनों ने ही घटना के बारे में अपने सीनियर्स और कंट्रोल रूम को जानकारी नहीं दी थी. येरवडा पुलिस स्टेशन के इन दोनों पुलिस अफसरों को पुणे आयुक्त ने निलंबित कर दिया था. इनके नाम पुलिस निरीक्षक राहुल जगदाले और एपीआई विश्वनाथ टोडकरी है.
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