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सीबीएसई बोर्ड परीक्षा का प्रश्न पत्र एक बार फिर विवादों में आ गया है। लेकिन इस बार मामला कठिनता के स्तर का नहीं, बल्कि कुछ अलग है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सोमवार को 12वीं कक्षा की गणित विषय की परीक्षा आयोजित की थी। पेपर के फौरन बाद छात्रों ने दावा किया कि उनकी गणित की परीक्षा के प्रश्न पत्र के पहले पेज पर छपे क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करने पर यह इंग्लिश गाना खुल रहा था। छात्रों ने कहा कि क्यूआर कोर्ड स्कैन करने पर ब्रिटिश गायक रिक एस्टली (Rick Astley) के 1987 के प्रसिद्ध गीत “Never Gonna Give You Up” के यूट्यूब वीडियो पर ले जा रहा है। आमतौर पर ये क्यूआर कोड ऑथेंटिकेशन और सिक्योरिटी वेरिफिकेशन के लिए होते हैं इसलिए आधिकारिक दस्तावेज पर ऐसी त्रुटि ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आपको बता दें कि इस बार सीबीएसई 10वीं का गणित का पेपर अपनी अत्यधिक कठिनता के स्तर को लेकर विवादों में आया था।
हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह गड़बड़ी सभी प्रश्नपत्रों में थी या नहीं, लेकिन इस घटना के वीडियो और स्क्रीनशॉट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। एक के बाद एक छात्रों ने अपने अनुभव साझा करना शुरू कर दिया है, कुछ ने तो अधिकारियों से सुरक्षा में संभावित चूक को लेकर सवाल भी पूछे। सीबीएसई पेपर में इस कथित चूक को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मीम्स की बाढ़ आ गई है।
सीबीएसई पर तंज कसते हुए एक यूजर ने लिखा, "सीबीएसई ने सच में क्लास 12 के मैथ के पेपर में सिर्फ हमें 'रिकरोल' करने के लिए क्यूआर कोड डाल दिया… मैं वहां बैठकर इंटीग्रल्स हल करने की कोशिश कर रहा हूं, और बोर्ड 'Never Gonna Give You Up' बजा रहा है। 2026 में सच में एग्जामिनर्स ने हमें ट्रोल कर दिया।
कुछ लोगों ने तो अधिकारियों से यह वेरिफाई करने के लिए सवाल पूछना भी शुरू कर दिया है कि क्या यह खबर सच है। "@cbseindia29, कई वायरल वीडियो और रिपोर्ट दावा कर रही हैं कि आपने 12वीं क्लास के स्टूडेंट्स को उनके मैथ्स के पेपर में "rickrolled" किया है। क्या आप कन्फर्म कर सकते हैं कि क्या सच में ऐसा हुआ है? इतने सारे वीडियो फेक नहीं हो सकते, क्या आप समझा सकते हैं?'यूजर अपने ट्वीट में शिक्षा मंत्रालय, सीबीएसई, और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को टैग कर रहे हैं।
अभी तक CBSE ने इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया है।
पेपर सेट्स पर QR कोड क्यों लगाए जाते हैं?
पेपर सेट्स पर QR कोड लगाना एक ऑथेंटिकेशन और लीक प्रूफ उपाय है। चूंकि हर QR कोड पेपर सेट के लिए यूनिक होता है, जो यह वेरिफाई करने में मदद करता है कि पेपर ऑफिशियल है या नहीं, इसलिए कई स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को संभावित लीक का डर सता रहा है, क्योंकि कोड स्टूडेंट्स को ऑफिशियल निर्देशों या संबंधित जानकारी के बजाय एक म्यूजिक वीडियो पर रीडायरेक्ट कर रहा है। इसके अलावा क्यूआर ट्रैकिंग, रिकॉर्ड रखने और जालसाजी को रोकने में मदद करता है।
स्टूडेंट्स लगातार अधिकारियों को टैग कर रहे हैं और जांच की मांग कर रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि पेपर के साथ छेड़छाड़ की गई थी और इस पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
]]>आयुक्त भौंसले ने बताया कि भारत सरकार द्वारा एक्सेसिबल इंडिया प्रोग्राम के तहत समाज में दिव्यांगों को आसान माहौल उपलब्ध कराये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सभी कार्यालय में व्यक्तियों के लिए क्यूआर कोड तैयार कराया गया है। डेप्थ कैन फाउंडेशन साइनेबल कंपनी के माध्यम से यह सुविधा उपलब्ध कराएगी। “डेप्थ कैन फाउंडेशन” की फाउंडर एसोसिएट सुप्रीति ने बताया के साइन लेवल कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले लाइव इंटर प्रिटेशन आरसीआई (रिहेल्विेशन कौसिल ऑफ इंडिया) से रजिस्टर्ड व्यक्ति होंगे। जिनके द्वारा किए गए इंटरप्रिटेशन को न्यायिक प्रक्रिया में भी मान्यता दी जाएगी। रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा तैयार किए गए इंटरप्रेटर के लिए सुविधा शुल्क राशि सामाजिक न्याय विभाग मध्यप्रदेश शासन एक साथ उपलब्ध कराएगी दी गई है। दिव्यांगों को यह सुविधा नि:शुल्क प्राप्त होगी।
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इन्हें स्कैन करते ही मूक-बधिरों को लाइव द्विभाषी मिलेगा, जो मूक- बधिर (Deaf and Dumb People) की समस्या को सुनकर, समझकर लाइव संबंधित अधिकारी, कर्मचारी को बताएगा। आमतौर पर मूक-बधिरों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जब उनके साथ कोई द्विभाषी नहीं होता, तब उनके साथ संवाद करना मुश्किल होता है। ऐसे में वे किसी कार्यालय में जाते हैं तो मदद नहीं मिल पाती। क्यूआर कोड के जरिए इसका समाधान किया जाएगा।
डेमो में बताया तरीका
मूक-बधिरों के लिए इस सेवा की शुरुआत आज बुधवार से हो गई। राजधानी भोपाल में पत्रकार कॉलोनी स्थित सामाजिक न्याय विभाग के कार्यालय में सुबह 11.30 बजे इसका डेमो दिया गया। इसमें बताया गया कि किस तरह इसके जरिए मूक-बधिर अनुवादक से जुड़कर इस सेवा का लाभ ले सकते हैं।
इस संबंध में विभाग की असिस्टेंट डायरेक्टर प्रभा सोमवंशी ने बताया कि मूक-बधिरों को सुविधा मिले इसके लिए इसकी शुरुआत की जा रही है। इसके तहत सभी प्रमुख विभागों में क्यूआर कोड लगाए जाएंगे।
सभी कार्यालयों में लगेंगे क्यूआर कोड
लाइव इंटरप्रिटेशन सेवा में वृद्धि करते हुए यह पहल की जा रही है। इसके लिए डेफ कैन फाउंडेशन ने भी भूमिका निभाई है। इस सेवा के तहत प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों में क्यूआर कोड (QR Code) लगाए जाएंगे।