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रायपुर
छत्तीसगढ़ रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की बैठक आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।
बैठक में कटघोरा- डोंगरगढ़ रेल लाइन सहित प्रदेश में चल रही अन्य रेल परियोजनाओं की प्रगति और बोर्ड के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति, तकनीकी पहलुओं और समयसीमा पर चर्चा की।
बैठक में सचिव वाणिज्य एवं उद्योग विभाग एवं रेल परियोजनाएं श्री रजत कुमार, विशेष सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय एवं आयुक्त जनसंपर्क तथा संचालक खनिज विकास निगम श्री रजत बंसल सहित वित्त विभाग एवं रेलवे कॉर्पोरेशन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
]]>इटारसी-भोपाल-बीना रेलखंड देश के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल
इटारसी-भोपाल-बीना रेलखंड देश के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। यहां यात्री और मालगाडिय़ों का भारी दबाव रहता है। इधर पश्चिम मध्य रेलवे के न्यू कटनी जंक्शन से सिंगरौली तक तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना से सिंगरौली की कोयला तथा कटनी के सीमेंट उद्योगों को फायदा पहुंचेगा।
करीब 4329 करोड़ रुपए की इस परियोजनाा में 9 सुरंगें, 39 बड़े और 151 छोटे पुल, 43 ओवरब्रिज और 39 अंडरब्रिज बनेंगे
रेलवे ने इटारसी-भोपाल-बीना रेलखंड चौथी रेल लाइन बनाने का निर्णय लिया है। यह लाइन 237 किमी लंबी बनेगी। करीब 4329 करोड़ रुपए की इस परियोजनाा में 9 सुरंगें, 39 बड़े और 151 छोटे पुल, 43 ओवरब्रिज और 39 अंडरब्रिज बनेंगे। रेलवे ने इस वित्तीय वर्ष में इसके लिए 100 करोड़ रुपए जारी भी कर दिए हैं।
जबलपुर मंडल अंतर्गत न्यू कटनी जंक्शन से सिंगरौली तक तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना को भारत सरकार ने स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट घोषित किया
वहीं पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर मंडल अंतर्गत न्यू कटनी जंक्शन से सिंगरौली तक तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना को भारत सरकार ने स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट घोषित किया है। 264 किमी के इस कॉरिडोर पर 6779.87 करोड़ खर्च होंगे। परियोजना कटनी, उमरिया, शहडोल, सीधी और सिंगरौली जिलों से होकर गुजरेगी। इसके सिंगरौली की कोयला और ऊर्जा बेल्ट तथा कटनी के सीमेंट व खनिज उद्योगों को इससे सबसे अधिक फायदा होगा।
बता दें कि एमपी का कटनी जिला, प्रदेश के माइनिंग सेेंटर के रूप में उभर रहा है। यहां बाक्साइट की खदानों के साथ ही अब सोना भी मिला है। खदानों में प्रचुर मात्रा में स्वर्ण अयस्क होने का दावा किया जा रहा है। कटनी का सीमेंट उद्योग देशभर में विख्यात है।
इन परियोजनाओं को हरी झंडी
इटारसी-भोपाल-बीना चौथी रेल लाइन
लंबाई: 237 किमी
लागत: 4329 करोड़
समयसीमा: 4 वर्ष
आवंटन: 100 करोड़ रुपए
न्यू कटनी जंक्शन-सिंगरौली तीसरी-चौथी रेल लाइन
लंबाई: 264.070 किमी
ट्रैक विकास: 578.675 किमी
लागत: 6779.87 करोड़ रुपए
समयसीमा: 4 वर्ष
इंदौर-बुधनी रेल परियोजना में मांगलिया रेलवे स्टेशन को बड़े जंक्शन के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां एक ओर यात्री सुविधाओं के विस्तार का काम तेज रफ्तार से चल रहा है तो दूसरी ओर माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने पर भी फोकस किया गया। पत्रिका न्यूज टुडे की टीम ने मौके पर काम का जायजा लेकर हकीकत जानी। स्टेशन परिसर में कई निर्माण कार्य तेजी से होते नजर आए तो कई काम अधूरे दिखाई दिए। वर्तमान में यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है जो भविष्य में बड़ी सुविधा बन सकती है।
टीम जब स्टेशन पहुंची तो प्लेटफॉर्म और बीच के हिस्से का निर्माण काफी हद तक पूरा नजर आया। नया एफओबी (फुट ओवर ब्रिज) भी लगभग तैयार हो चुका है। हालांकि स्टेशन परिसर में बनने वाला यात्री और गुड्स शेड अभी अधूरा है। लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया गया है, लेकिन उस पर छत नहीं डाली गई है। गर्मी के मौसम में यात्री खुले में ट्रेनों का इंतजार करने को मजबूर हैं।
पेट्रोलियम और सोयाबीन सप्लाई के लिए हब
स्टेशन के दोनों ओर नए गुड्स शेड बनाए जा रहे हैं ताकि माल ढुलाई का दबाव संभाला जा सके। यहां पेट्रोलियम डिपो और सोयाबीन बायप्रोड क्ट्स की सह्रश्वलाई के लिए माल परिवहन सुविधा को मजबूत किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार मांगलिया आने वाले समय में माल ढुलाई का बड़ा केंद्र बन सकता है। इसके लिए ट्रैक कनेक्टिविटी और लोडिंग सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है।
10 नए क्रॉसिंग और 7 हाल्ट
इंदौर के इस रेल मार्ग पर 10 नए क्रॉसिंग और 7 नए हाल्ट स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। वहीं आगे एक फ्लाईओवर भी बनाया जाना है, जिसके लिए पिलर निर्माण का काम शुरू हो चुका है। स्टेशन परिसर में बनने वाले कुछ कमरों का निर्माण अभी अधूरा है। कुल मिलाकर मांगलिया स्टेशन पर काम तेजी से चल रहा है, लेकिन यात्रियों को पूरी सुविधाएं मिलने में अभी समय लगेगा।
इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर जारी अर्थवर्क
इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर भी काम तेजी से जारी है। स्टेशन के आगे रेलवे क्रॉसिंग के पास नई लाइन डालने के लिए अर्थवर्क किया जा रहा है। मौके पर बड़ी मशीनों से मिट्टी भराई और जमीन समतल करने का काम चलता मिला। कई स्थानों पर गड्ढे खोदकर बेस मजबूत किया जा रहा है। रेलवे स्लीपर भी साइट पर पहुंच चुके हैं और ट्रैक बिछाने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि अभी कुछ स्थानों पर किसानों के विरोध के कारण बीच-बीच में काम अटका हुआ है, आगे देवास जिले में भी काम चल रहा है।
ये भी जानें- पहले कैसा था रूट
अभी इंदौर से भोपाल या जबलपुर जाने के लिए ट्रेनों को उज्जैन और सीहोर के साथ ही संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) होकर जाना पड़ताहै। ऐसे में इस घुमावदार रास्ते की दूरी भी बढ़ जाती है।
वहीं उज्जैन-भोपाल रूट पहले से ही दिल्ली – मुंबई और अन्य रूट की ट्रेनों के कारण बेहद व्यस्त रहता है, इससे गाड़ियां लेट होती हैं। इससे ट्रेन के संचालन में कम से कम 20-30 मिनट का समय बर्बाद होता था।
अब क्या बदलेगा, कैसे बचेंगे 2 घंटे
इंदौर-बुधनी प्रोजेक्ट यानी नई रेल लाइन करीब 204 किमी लंबी है। इसके बनने से इंदौर सीधे भोपाल-जबलपुर की मुख्य रेल लाइन से जुड़ेगा।
इंदौर बुधनी और आगे भोपाल या जबलपुर जाने की दूरी 45 किमी तक कम हो जाएगी। इसके बाद सीधे-सीधे 2 घंटे का सफर कम किया जा सकेगा।
मांगलिया को महा जंक्शन बनाया जाना है। यानी ये अब छोटा स्टेशन नहीं रहेगा। बल्कि मालवा और महाकौशल को जोड़ने एक विशाल बिजनेस और लॉजिस्टिक हब बन जाएगा। यहां से पेट्रोलियम और सोयाबीन सप्लाई पूरे देशभर में तेजी से की जा सकेगी।
10 नए क्रॉसिंग और 7 हाल्ट बनने से ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। स्थानीय व्यापार को पंख लग जाएंगे
]]>क्या है नया सिस्टम?
एक के पीछे एक दौड़ेंगी ट्रेनें पुरानी व्यवस्था में एक स्टेशन से दूसरी ट्रेन तब तक रवाना नहीं की जाती थी, जब तक कि आगे चल रही ट्रेन अगले स्टेशन तक न पहुंच जाए।
अब क्या बदला: नई तकनीक में ट्रैक को छोटे-छोटे ब्लॉक (करीब 1-1 किमी) में बांट दिया गया है।
■ इलेक्ट्रॉनिक नजर: आधुनिक सेंसर्स और इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क के जरिए ट्रेन की लोकेशन बदलते ही सिग्नल का रंग अपने आप बदल जाता है। अब एक ही ट्रैक पर सुरक्षित दूरी बनाकर एक के पीछे दूसरी ट्रेनें आसानी से दौड़ सकेंगी। इससे ट्रैक की क्षमता कई गुना बढ़ गई है।
लोको पायलट को ग्रीन सिग्नल की राहत, आउटर का रेड सिग्नल गायब
1. ड्राइवर्स का बढ़ा भरोसा: अब लोको पायलट को काफी पहले ही आगे के सिग्नल की सटीक स्थिति का पता चल जाता है। खराब मौसम या धुंध में भी ड्राइवर पूरे आत्मविश्वास के साथ ट्रेन की रफ्तार बनाए रख सकेंगे।
2. आउटर पर नो वेटिंग: अक्सर अगले स्टेशन से हरी झंडी न मिलने के कारण ट्रेनों को आउटर पर रोक दिया जाता था। अब ऑटोमेटिक ब्लॉक सिस्टम के कारण ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे चलती रहेंगी, जिससे स्टेशन मास्टर को भी मैन्युअली सिग्नल ऑपरेट नहीं करना पड़ेगा।
ग्वालियर में ट्रैक लोड हर दिन गुजरती हैं 236 ट्रेनें
ग्वालियर से गुजरने वाले ट्रैफिक का दबाव इतना ज्यादा है कि यह सिस्टम 'लाइफलाइन' साबित होगा-
■ झांसी-आगरा रूट: 170 ट्रेनें
■ ग्वालियर-गुना रूट: 28 ट्रेनें
■ ग्वालियर-भिंड रूट: 06 ट्रेनें
■ ग्वालियर-कैलारस : 06 ट्रेनें
■ थ्रू (बिना रुके) ट्रेनें: 26 ट्रेनें
■ कुल: 236 ट्रेनें प्रतिदिन
हर किलोमीटर पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम
रेलवे ट्रैक के हर किलोमीटर पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम लगाया जा रहा है। इससे ट्रैक की कैपेसिटी और ट्रेनों की स्पीड दोनों बढ़ती है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि ट्रेनों को अब किसी स्टेशन या आउटर पर बेवजह इंतजार नहीं करना पड़ता। झांसी मंडल में यह काम लगभग पूरा हो चुका है।
-शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे
]]>क्या है नया सिस्टम?
एक के पीछे एक दौड़ेंगी ट्रेनें पुरानी व्यवस्था में एक स्टेशन से दूसरी ट्रेन तब तक रवाना नहीं की जाती थी, जब तक कि आगे चल रही ट्रेन अगले स्टेशन तक न पहुंच जाए।
अब क्या बदला: नई तकनीक में ट्रैक को छोटे-छोटे ब्लॉक (करीब 1-1 किमी) में बांट दिया गया है।
■ इलेक्ट्रॉनिक नजर: आधुनिक सेंसर्स और इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क के जरिए ट्रेन की लोकेशन बदलते ही सिग्नल का रंग अपने आप बदल जाता है। अब एक ही ट्रैक पर सुरक्षित दूरी बनाकर एक के पीछे दूसरी ट्रेनें आसानी से दौड़ सकेंगी। इससे ट्रैक की क्षमता कई गुना बढ़ गई है।
लोको पायलट को ग्रीन सिग्नल की राहत, आउटर का रेड सिग्नल गायब
1. ड्राइवर्स का बढ़ा भरोसा: अब लोको पायलट को काफी पहले ही आगे के सिग्नल की सटीक स्थिति का पता चल जाता है। खराब मौसम या धुंध में भी ड्राइवर पूरे आत्मविश्वास के साथ ट्रेन की रफ्तार बनाए रख सकेंगे।
2. आउटर पर नो वेटिंग: अक्सर अगले स्टेशन से हरी झंडी न मिलने के कारण ट्रेनों को आउटर पर रोक दिया जाता था। अब ऑटोमेटिक ब्लॉक सिस्टम के कारण ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे चलती रहेंगी, जिससे स्टेशन मास्टर को भी मैन्युअली सिग्नल ऑपरेट नहीं करना पड़ेगा।
ग्वालियर में ट्रैक लोड हर दिन गुजरती हैं 236 ट्रेनें
ग्वालियर से गुजरने वाले ट्रैफिक का दबाव इतना ज्यादा है कि यह सिस्टम 'लाइफलाइन' साबित होगा-
■ झांसी-आगरा रूट: 170 ट्रेनें
■ ग्वालियर-गुना रूट: 28 ट्रेनें
■ ग्वालियर-भिंड रूट: 06 ट्रेनें
■ ग्वालियर-कैलारस : 06 ट्रेनें
■ थ्रू (बिना रुके) ट्रेनें: 26 ट्रेनें
■ कुल: 236 ट्रेनें प्रतिदिन
हर किलोमीटर पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम
रेलवे ट्रैक के हर किलोमीटर पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम लगाया जा रहा है। इससे ट्रैक की कैपेसिटी और ट्रेनों की स्पीड दोनों बढ़ती है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि ट्रेनों को अब किसी स्टेशन या आउटर पर बेवजह इंतजार नहीं करना पड़ता। झांसी मंडल में यह काम लगभग पूरा हो चुका है।
-शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे
]]>रेलवे ट्रैक की लंबाई बढ़कर हुई 5,200 किमी
देश का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क
डबल इंजन सरकार का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा मध्यप्रदेश
बेहतर रेल संपर्क से अगले दो सालों में अर्थ-व्यवस्था में आएगा बदलाव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों का परिणाम, केंद्र से मिला सहयोग
भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अथक प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश में पिछले दो सालों में रेल सेवाओं और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। मध्यप्रदेश 'डबल इंजन सरकार' का एक शानदार उदाहरण बनकर उभरा है। अब प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है और रेल कनेक्टिविटी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वाले शीर्ष दस राज्यों में से एक है। रेलवे ट्रैक की लंबाई बढ़कर 5,200 किलोमीटर हो गई है, जो देश के कुल रेल नेटवर्क का 7.6% है। बेहतर रेल सेवाओं के माध्यम से देश के सभी हिस्सों तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। मध्यप्रदेश के लिए आवंटित रेलवे बजट में 24 गुना वृद्धि हुई है। इस वर्ष 15,188 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो एक रिकॉर्ड है। पिछले वर्ष यह राशि 14,745 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2009 से 2014 तक, वार्षिक बजट केवल 632 करोड़ रुपये था। वर्तमान में 1,18,379 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न रेल परियोजनाएँ अलग-अलग चरणों में चल रही हैं।
आर्थिक विकास में आयेगी तेजी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से केंद्र सरकार ने कई प्रमुख रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिससे राज्य को आर्थिक परिवर्तन की गति तेज करने में मदद मिली है। इस प्रगति का श्रेय केंद्र और राज्य सरकारों के बीच गहरी आपसी समझ और समन्वय को जाता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जबलपुर-गोंदिया रेलवे लाइन और इंदौर-मनमाड रेलवे लाइन के दोहरीकरण, तथा सिंहस्थ कुंभ मेला : 2028 के संदर्भ में अन्य अधोसंरचना विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है। बड़ी उपलब्धि यह है कि राज्य में रेल लाइनों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। अमृत भारत स्टेशन योजना में छह स्टेशनों – कटनी दक्षिण, नर्मदापुरम, ओरछा, सिवनी, शाजापुर और श्रीधाम – पर पुनर्विकास का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा, पूरे राज्य में 74 स्टेशनों को अपग्रेड किया जा रहा है। यात्रियों के लिये 3,163 करोड़ रुपये की आधुनिक सुविधाएँ विकसित की जा रही है। वंदे भारत ट्रेनें यात्रियों के लिए वरदान साबित हुई हैं। इनमें भोपाल-नई दिल्ली, इंदौर-नागपुर, भोपाल-रीवा और खजुराहो-बनारस शामिल हैं। इंदौर और भोपाल में 2 मेट्रो ट्रेनें चल रही हैं, जिनसे शहरी आबादी को राहत मिली है। रायसेन ज़िले के उमरिया गाँव में 1800 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक रेल कोच निर्माण इकाई बनाई जा रही है। इससे 5000 लोगों को रोजगार मिलेगा।
बड़े राज्यों में सीधा संपर्क
जबलपुर-गोंदिया रेल लाइन के दोहरीकरण से महाकौशल क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा। इससे पर्यटन, धार्मिक गतिविधियों और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रोजेक्ट में 5,200 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश किया गया है। कान्हा नेशनल पार्क और धुआँधार जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। इससे जबलपुर सहित मण्डला, सिवनी और बालाघाट जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय और पर्यटन क्षेत्र का विस्तार होगा। कोयला, इस्पात, सीमेंट, खाद्यान्न और उर्वरक के परिवहन में तेजी आयेगी। उद्योगों के लिये मजबूत सप्लाई चेन बनेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इंदौर-मनमाड रेलवे लाइन 18,036 करोड़ रुपये से ज़्यादा की लागत से बनाई जा रही है। इन रेलवे प्रोजेक्ट्स से मध्यप्रदेश को बड़े आर्थिक लाभ की उम्मीद है। इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन धार, खरगौन और बड़वानी जिलों को सीधा लाभ होगा। कृषि और व्यापार बढ़ेगा। बाजरा और अनाज उत्पादक जिलों की पहुँच बड़े बाजारों तक बनेगी। उज्जैन और ओंकारेंश्वर जैसे धार्मिक महत्व के शहरों से सम्पर्क बढ़ेगा। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, 3 नई ट्रेनें शुरू की गई हैं। रीवा से पुणे (जबलपुर और सतना होते हुए), जबलपुर से रायपुर (नैनपुर, बालाघाट और गोंदिया होते हुए), और ग्वालियर से बेंगलुरु (गुना और भोपाल होते हुए)। ये सेवाएँ कनेक्टिविटी को और भी बेहतर बनाएँगी।
केंद्रीय मंत्रीमंडल ने 2 बड़े कमर्शियल हब-मुंबई और इंदौर – के बीच 309 किलोमीटर लंबी एक नई रेलवे लाइन को भी मंज़ूरी दी है। इन कमर्शियल केंद्रों को जोड़ने के अलावा, यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के उन क्षेत्रों को भी जोड़ेगा जहाँ अभी रेलवे कनेक्टिविटी नहीं है। यह रेलवे लाइन महाराष्ट्र के 2 ज़िलों और मध्यप्रदेश के 4 ज़िलों से होकर गुज़रेगी। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 18,036 करोड़ रुपये है, और यह 2028-29 तक पूरा हो जाएगा। यह प्रोजेक्ट पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। एकीकृत योजना के माध्यम से, यह यात्रा को आसान बनायेगा। सामान और सेवाओं के निर्बाध प्रवाह को संभव बनाएगा।
यह परियोजना महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के 6 जिलों को कवर करेगी। इसमें 30 नए स्टेशन बनाए जाएंगे। इससे बड़वानी जैसा आकांक्षी जिला भी रेलवे कनेक्टिविटी से लाभान्वित होगा। लगभग 1,000 गांवों और लगभग 30 लाख लोगों को रेलवे कनेक्टिविटी की सुविधा मिलेगी। यह परियोजना जवाहरलाल नेहरू पोर्ट गेटवे पोर्ट और अन्य बंदरगाहों को पीथमपुर ऑटो क्लस्टर औद्योगिक केंद्र से भी जोड़ेगी। इस क्लस्टर में 90 बड़े उद्योग और 700 छोटे और मध्यम उद्यम हैं। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना मध्यप्रदेश के बाजरा उत्पादक जिलों को महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक जिलों से जोड़ेगी, जिससे इन उत्पादों का देश के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों तक परिवहन आसान हो जाएगा।
नई परियोजनाओं की शुरूआत
भोपाल-रामगंज मंडी रेललाइन से राजगढ़ और भोपाल का सीधा संपर्क राजस्थान में हो जायेगा। इस 276 किमी लाइन में से 169 किमी पर काम पूरा हो गया है। इससे व्यापार, खेती और आम नागरिकों को सुविधा होगी। इटारसी-भोपाल-बीना और इटारसी-नागपुर चौथी रेललाइन को मंजूरी मिल चुकी है।
वर्ष 2009 से 2014 के बीच जहां 145 कि.मी. नई रेल पटरियाँ बिछाई गईं, जिनका औसत 29 कि.मी. प्रति वर्ष रहा वहीं 2014 से 2025 तक, 2,651 कि.मी. नई पटरियाँ बिछाई गईं, जिनका औसत 241 कि.मी. प्रति वर्ष रहा, जो कि लगभग 8 गुना ज़्यादा है।
वर्तमान में, 4,740 किमी के रेलवे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनकी अनुमानित लागत 89,543 करोड़ रूपये है। ये प्रोजेक्ट्स विकास के अलग-अलग चरणों में हैं। अब तक 2,092 किमी पर काम पूरा हो चुका है, जिस पर 41,401 करोड़ रूपये खर्च हुए हैं।
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रेलवे ट्रैक की लंबाई बढ़कर हुई 5,200 किमी
देश का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क
डबल इंजन सरकार का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा मध्यप्रदेश
बेहतर रेल संपर्क से अगले दो सालों में अर्थ-व्यवस्था में आएगा बदलाव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों का परिणाम, केंद्र से मिला सहयोग
भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अथक प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश में पिछले दो सालों में रेल सेवाओं और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। मध्यप्रदेश 'डबल इंजन सरकार' का एक शानदार उदाहरण बनकर उभरा है। अब प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है और रेल कनेक्टिविटी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वाले शीर्ष दस राज्यों में से एक है। रेलवे ट्रैक की लंबाई बढ़कर 5,200 किलोमीटर हो गई है, जो देश के कुल रेल नेटवर्क का 7.6% है। बेहतर रेल सेवाओं के माध्यम से देश के सभी हिस्सों तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। मध्यप्रदेश के लिए आवंटित रेलवे बजट में 24 गुना वृद्धि हुई है। इस वर्ष 15,188 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो एक रिकॉर्ड है। पिछले वर्ष यह राशि 14,745 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2009 से 2014 तक, वार्षिक बजट केवल 632 करोड़ रुपये था। वर्तमान में 1,18,379 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न रेल परियोजनाएँ अलग-अलग चरणों में चल रही हैं।
आर्थिक विकास में आयेगी तेजी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से केंद्र सरकार ने कई प्रमुख रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिससे राज्य को आर्थिक परिवर्तन की गति तेज करने में मदद मिली है। इस प्रगति का श्रेय केंद्र और राज्य सरकारों के बीच गहरी आपसी समझ और समन्वय को जाता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जबलपुर-गोंदिया रेलवे लाइन और इंदौर-मनमाड रेलवे लाइन के दोहरीकरण, तथा सिंहस्थ कुंभ मेला : 2028 के संदर्भ में अन्य अधोसंरचना विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है। बड़ी उपलब्धि यह है कि राज्य में रेल लाइनों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। अमृत भारत स्टेशन योजना में छह स्टेशनों – कटनी दक्षिण, नर्मदापुरम, ओरछा, सिवनी, शाजापुर और श्रीधाम – पर पुनर्विकास का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा, पूरे राज्य में 74 स्टेशनों को अपग्रेड किया जा रहा है। यात्रियों के लिये 3,163 करोड़ रुपये की आधुनिक सुविधाएँ विकसित की जा रही है। वंदे भारत ट्रेनें यात्रियों के लिए वरदान साबित हुई हैं। इनमें भोपाल-नई दिल्ली, इंदौर-नागपुर, भोपाल-रीवा और खजुराहो-बनारस शामिल हैं। इंदौर और भोपाल में 2 मेट्रो ट्रेनें चल रही हैं, जिनसे शहरी आबादी को राहत मिली है। रायसेन ज़िले के उमरिया गाँव में 1800 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक रेल कोच निर्माण इकाई बनाई जा रही है। इससे 5000 लोगों को रोजगार मिलेगा।
बड़े राज्यों में सीधा संपर्क
जबलपुर-गोंदिया रेल लाइन के दोहरीकरण से महाकौशल क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा। इससे पर्यटन, धार्मिक गतिविधियों और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रोजेक्ट में 5,200 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश किया गया है। कान्हा नेशनल पार्क और धुआँधार जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। इससे जबलपुर सहित मण्डला, सिवनी और बालाघाट जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय और पर्यटन क्षेत्र का विस्तार होगा। कोयला, इस्पात, सीमेंट, खाद्यान्न और उर्वरक के परिवहन में तेजी आयेगी। उद्योगों के लिये मजबूत सप्लाई चेन बनेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इंदौर-मनमाड रेलवे लाइन 18,036 करोड़ रुपये से ज़्यादा की लागत से बनाई जा रही है। इन रेलवे प्रोजेक्ट्स से मध्यप्रदेश को बड़े आर्थिक लाभ की उम्मीद है। इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन धार, खरगौन और बड़वानी जिलों को सीधा लाभ होगा। कृषि और व्यापार बढ़ेगा। बाजरा और अनाज उत्पादक जिलों की पहुँच बड़े बाजारों तक बनेगी। उज्जैन और ओंकारेंश्वर जैसे धार्मिक महत्व के शहरों से सम्पर्क बढ़ेगा। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, 3 नई ट्रेनें शुरू की गई हैं। रीवा से पुणे (जबलपुर और सतना होते हुए), जबलपुर से रायपुर (नैनपुर, बालाघाट और गोंदिया होते हुए), और ग्वालियर से बेंगलुरु (गुना और भोपाल होते हुए)। ये सेवाएँ कनेक्टिविटी को और भी बेहतर बनाएँगी।
केंद्रीय मंत्रीमंडल ने 2 बड़े कमर्शियल हब-मुंबई और इंदौर – के बीच 309 किलोमीटर लंबी एक नई रेलवे लाइन को भी मंज़ूरी दी है। इन कमर्शियल केंद्रों को जोड़ने के अलावा, यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के उन क्षेत्रों को भी जोड़ेगा जहाँ अभी रेलवे कनेक्टिविटी नहीं है। यह रेलवे लाइन महाराष्ट्र के 2 ज़िलों और मध्यप्रदेश के 4 ज़िलों से होकर गुज़रेगी। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 18,036 करोड़ रुपये है, और यह 2028-29 तक पूरा हो जाएगा। यह प्रोजेक्ट पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। एकीकृत योजना के माध्यम से, यह यात्रा को आसान बनायेगा। सामान और सेवाओं के निर्बाध प्रवाह को संभव बनाएगा।
यह परियोजना महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के 6 जिलों को कवर करेगी। इसमें 30 नए स्टेशन बनाए जाएंगे। इससे बड़वानी जैसा आकांक्षी जिला भी रेलवे कनेक्टिविटी से लाभान्वित होगा। लगभग 1,000 गांवों और लगभग 30 लाख लोगों को रेलवे कनेक्टिविटी की सुविधा मिलेगी। यह परियोजना जवाहरलाल नेहरू पोर्ट गेटवे पोर्ट और अन्य बंदरगाहों को पीथमपुर ऑटो क्लस्टर औद्योगिक केंद्र से भी जोड़ेगी। इस क्लस्टर में 90 बड़े उद्योग और 700 छोटे और मध्यम उद्यम हैं। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना मध्यप्रदेश के बाजरा उत्पादक जिलों को महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक जिलों से जोड़ेगी, जिससे इन उत्पादों का देश के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों तक परिवहन आसान हो जाएगा।
नई परियोजनाओं की शुरूआत
भोपाल-रामगंज मंडी रेललाइन से राजगढ़ और भोपाल का सीधा संपर्क राजस्थान में हो जायेगा। इस 276 किमी लाइन में से 169 किमी पर काम पूरा हो गया है। इससे व्यापार, खेती और आम नागरिकों को सुविधा होगी। इटारसी-भोपाल-बीना और इटारसी-नागपुर चौथी रेललाइन को मंजूरी मिल चुकी है।
वर्ष 2009 से 2014 के बीच जहां 145 कि.मी. नई रेल पटरियाँ बिछाई गईं, जिनका औसत 29 कि.मी. प्रति वर्ष रहा वहीं 2014 से 2025 तक, 2,651 कि.मी. नई पटरियाँ बिछाई गईं, जिनका औसत 241 कि.मी. प्रति वर्ष रहा, जो कि लगभग 8 गुना ज़्यादा है।
वर्तमान में, 4,740 किमी के रेलवे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनकी अनुमानित लागत 89,543 करोड़ रूपये है। ये प्रोजेक्ट्स विकास के अलग-अलग चरणों में हैं। अब तक 2,092 किमी पर काम पूरा हो चुका है, जिस पर 41,401 करोड़ रूपये खर्च हुए हैं।
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इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के तहत बहुप्रतीक्षित टीही टनल का काम अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर और धार विधायक नीना वर्मा ने निर्माणाधीन टनल में करीब 70 फीट नीचे उतरकर कार्यों का जायजा लिया। दोनों जनप्रतिनिधियों ने सुरंग के भीतर पहुंचकर निर्माण की गुणवत्ता और प्रगति का बारीकी से निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश देते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांग है, जिसे तय समयसीमा में पूरा करना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न करने पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों ने दावा किया है कि आगामी जून-जुलाई तक टनल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही इंदौर से धार के बीच सीधा रेल संचालन शुरू होने की संभावना है। हाल ही में पीथमपुर से धार के बीच टॉवर वैगन इंजन के माध्यम से सफल परीक्षण भी किया जा चुका है।
टनल में युद्धस्तर पर चल रहा काम
रेलवे अधिकारियों के अनुसार करीब 3 किमी लंबी टीही टनल में तेजी से कार्य जारी है। अब तक लगभग 800 मीटर हिस्से में ट्रैक और पटरी बिछाने का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य भी तेज गति से प्रगति पर है। फिनिशिंग और अन्य तकनीकी कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
बुनियादी ढांचे को मिल रही मजबूती
केंद्र सरकार की पहल पर क्षेत्र में आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। टीही टनल और इंदौर-दाहोद रेल परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है जो आने वाले समय में पूरे मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।
कनेक्टिविटी से विकास को रफ्तार
राज्यमंत्री ठाकुर ने कहा कि इंदौर-धार रेल लाइन शुरू होने से क्षेत्र में आवागमन आसान होगा और व्यापार-उद्योग को नई गति मिलेगी। यह परियोजना न केवल यात्रियों के लिए राहत लेकर आएगी, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी खोलेगी।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
लंबाई और मार्ग: कुल लंबाई 204.76 किमी (183 किमी मप्र में, 22 किमी गुजरात में)।
मार्ग: इंदौर-टीही-पीथमपुर-सागौर- गुणावद-धार-दाहोद।
वर्तमान स्थिति : इंदौर-टीही (21 किमी) तक काम पूरा हो चुका है। टीही-धार के बीच 2.9 किमी लंबी सुरंग का काम पूरा हो चुका है, ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया में है। रेलवे स्टेशन (धार) निर्माण अंतिम चरण में है।
तकनीकी प्रगति: सागौर-धार खंड में ट्रैक बिछाने के लिए मशीन का उपयोग किया जा रहा है।
फायदे: इस लाइन के शुरू होने से इंदौर और मुंबई के बीच की दूरी लगभग 55 किमी. कम हो जाएगी।
सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने रेल मंत्री को लिखा पत्र
मनेन्द्रगढ़/एमसीबी
क्षेत्र की जनता की लंबे समय से चली आ रही अहम मांग को गंभीरता से उठाते हुए कोरिया लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर चिरमिरी–रीवा एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 11751/11752) को प्रतिदिन संचालित करने की मांग की है।
सांसद महंत ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि यह ट्रेन क्षेत्र के हजारों यात्रियों के लिए जीवनरेखा के समान है। कोविड-19 महामारी से पहले यह ट्रेन रोजाना चलती थी, जिससे आम नागरिकों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और व्यापारियों को बड़ी सुविधा मिलती थी। लेकिन वर्तमान में सीमित दिनों में संचालन होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से आग्रह किया कि जनहित को ध्यान में रखते हुए इस ट्रेन को जल्द से जल्द प्रतिदिन चलाने के निर्देश दिए जाएं, ताकि क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके और आवागमन सुगम हो।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने सांसद की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह मांग पूरी तरह जनभावनाओं से जुड़ी है। वहीं, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मनेंद्रगढ़ शहर सौरव मिश्रा ने भी इसे आम जनता की आवाज बताते हुए कहा कि इस ट्रेन के नियमित संचालन से क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी।
छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना विकास के लिए 7,470 करोड़ के ऐतिहासिक बजट प्रावधान किए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के सतत प्रयासों से छत्तीसगढ़ में आज रेलवे क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन परिलक्षित हो रहा है। वर्ष 2009–14 के दौरान वार्षिक औसत 311 करोड़ की तुलना में 2026–27 में 7,470 करोड़ का बजट प्रावधान लगभग 24 गुना वृद्धि का रिकॉर्ड है। वर्तमान में राज्य में 51,080 करोड़ के रेल कार्य प्रगति पर हैं, जिनमें नए ट्रैक निर्माण, स्टेशनों का पुनर्विकास तथा सुरक्षा उन्नयन जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुदूर वनांचल बस्तर में जगदलपुर को जोड़ने वाले रावघाट–जगदलपुर रेल प्रोजेक्ट का प्रारंभ होना बस्तर के जनजातीय समाज के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक अमूल्य उपहार है, जो क्षेत्रीय विकास की नई राह प्रशस्त करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परमलकसा–खरसिया कॉरिडोर के साथ-साथ नए फ्रेट कॉरिडोर को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में यात्री गाड़ियों की संख्या आने वाले समय में लगभग दोगुनी हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि अमृत स्टेशन योजना के अंतर्गत राज्य के 32 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिनमें डोंगरगढ़ (फेज-I), अंबिकापुर, भानुप्रतापपुर, भिलाई और उरकुरा जैसे स्टेशन पूर्ण हो चुके हैं। इसके साथ ही राज्य में वंदे भारत एक्सप्रेस की 2 जोड़ी तथा अमृत भारत एक्सप्रेस की 1 जोड़ी सेवाएँ यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक रेल सुविधा प्रदान कर रही हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2014 से अब तक लगभग 1,200 किलोमीटर नए रेल ट्रैक का निर्माण, 100 प्रतिशत विद्युतीकरण, 170 फ्लाईओवर/अंडरपास तथा ‘कवच’ जैसी आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों की स्थापना से रेल सुविधा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को इन युगांतकारी पहलों के लिए हृदय से धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि यह विकास केवल रेल पटरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रदेश के व्यापार, पर्यटन, उद्योग, रोजगार और आमजन के जीवन में नई ऊर्जा का संचार हो रहा है।
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