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नई दिल्ली देश के दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा (Ratan Tata) के निधन को लगभग एक महीना बीत चुका है. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें याद करते हुए एक लेख लिखा है. उन्होंने लिखा कि रतन टाटा जी के हमसे दूर चले जाने की वेदना अभी मन में है. इस पीड़ा को भुला पाना आसान नहीं है. उन्होंने अपनी लेख में कहाकि रतन टाटा के रूप में देश ने एक महान सपूत को खो दिया है… एक अमूल्य रत्न को खोया है. आज भी शहरों, कस्बों से लेकर गांवों तक, लोग उनकी कमी को गहराई से महसूस कर रहे हैं. चाहे कोई उद्योगपति हो, उभरता हुआ उद्यमी हो या कोई प्रोफेशनल हो, हर किसी को उनके निधन से दुख हुआ है. पर्यावरण रक्षा से जुड़े लोग…समाज सेवा से जुड़े लोग भी उनके निधन से उतने ही दुखी हैं और ये दुख हम सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया महसूस कर रही है. 'कोई लक्ष्य नहीं जो हासिल ना हो सके' ईमानदारी का प्रतीक बना टाटा ग्रुप दूसरों के सपनों के लिए जीते थे रतन टाटा युवा पीढ़ी को दिया हौसला बेहतरीन क्वालिटी के प्रोडक्ट पर जोर जीव-जंतुओं के प्रति करुणा रतन टाटा जी का जीवन इस बात की याद दिलाता है कि लीडरशिप का आकलन केवल उपलब्धियों से ही नहीं किया जाता है, बल्कि सबसे कमजोर लोगों की देखभाल करने की उसकी क्षमता से भी किया जाता है. जब गुजरात में साथ मिलकर किया काम कैंसर के खिलाफ लड़ाई एक और ऐसा लक्ष्य था, जो उनके दिल के करीब था. मुझे दो साल पहले असम का वो कार्यक्रम याद आता है, जहां हमने संयुक्त रूप से राज्य में विभिन्न कैंसर अस्पतालों का उद्घाटन किया था. उस अवसर पर अपने संबोधन में, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि वो अपने जीवन के आखिरी वर्षों को हेल्थ सेक्टर को समर्पित करना चाहते हैं. स्वास्थ्य सेवा एवं कैंसर संबंधी देखभाल को सुलभ और किफायती बनाने के उनके प्रयास इस बात के प्रमाण हैं कि वो बीमारियों से जूझ रहे लोगों के प्रति कितनी गहरी संवेदना रखते थे. मैं रतन टाटा जी को एक विद्वान व्यक्ति के रूप में भी याद करता हूं – वह अक्सर मुझे विभिन्न मुद्दों पर लिखा करते थे, चाहे वह शासन से जुड़े मामले हों, किसी काम की सराहना करना हो या फिर चुनाव में जीत के बाद बधाई संदेश भेजना हो. 'मुझे जब रतन टाटा जी की आई बहुत याद' सदैव आभारी रहेंगे पीढ़ियां: पीएम मोदी
अपनी लेख में प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं के लिए रतन टाटा एक प्रेरणास्रोत थे. उनका जीवन, उनका व्यक्तित्व हमें याद दिलाता है कि कोई सपना ऐसा नहीं जिसे पूरा ना किया जा सके, कोई लक्ष्य ऐसा नहीं जिसे हासिल नहीं किया जा सके. रतन टाटा जी ने सबको सिखाया है कि विनम्र स्वभाव के साथ, दूसरों की मदद करते हुए भी सफलता पाई जा सकती है.
रतन टाटा जी, भारतीय उद्यमशीलता की बेहतरीन परंपराओं के प्रतीक थे. वो विश्वसनीयता, उत्कृष्टता और बेहतरीन सेवा जैसे मूल्यों के अडिग प्रतिनिधि भी थे. उनके लीडरशिप में टाटा समूह दुनिया भर में सम्मान, ईमानदारी और विश्वसनीयता का प्रतीक बनकर नई ऊंचाइयों पर पहुंचा. इसके बावजूद, उन्होंने अपनी उपलब्धियों को पूरी विनम्रता और सहजता के साथ स्वीकार किया.
पीएम ने अपनी लेख में आगे लिखा कि रतन टाटा जी दूसरों के सपनों का खुलकर समर्थन करते थे, दूसरों के सपने पूरा करने में सहयोग करना, ये रतन टाटा के सबसे शानदार गुणों में से एक था. हाल के समय में वो भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का मार्गदर्शन करने और भविष्य की संभावनाओं से भरे उद्यमों में निवेश करने के लिए जाने लगे. उन्होंने युवा आंत्रप्रेन्योर की उम्मीदों और आकांक्षाओं को समझा, साथ ही भारत के भविष्य को आकार देने की उनकी क्षमता को पहचाना.
भारत के युवाओं के प्रयासों का सपोर्ट करके, उन्होंने नए सपने देखने वाली नई पीढ़ी को जोखिम लेने और सीमाओं से परे जाने का हौसला दिया. उनके इस कदम ने भारत में इनोवेशन और आंत्रप्रेन्योरशिप के कल्चर को विकसित करने में बड़ी मदद की है. आने वाले दशकों में हम भारत पर इसका सकारात्मक प्रभाव जरूर देखेंगे.
पीएम मोदी आगे लिखते हैं कि रतन टाटा जी ने हमेशा बेहतरीन क्वालिटी के प्रॉडक्ट…बेहतरीन क्वालिटी की सर्विस पर जोर दिया और भारतीय उद्यमों को ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित करने का रास्ता दिखाया. आज जब भारत 2047 तक विकसित होने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तो हम ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित करते हुए ही दुनिया में अपना परचम लहरा सकते हैं. मुझे आशा है कि उनका ये विजन हमारे देश की भावी पीढ़ियों को प्रेरित करेगा और भारत वर्ल्ड क्लास क्वालिटी के लिए अपनी पहचान मजबूत करेगा.
रतन टाटा की महानता बोर्डरूम या सहयोगियों की मदद करने तक ही सीमित नहीं थी. सभी जीव-जंतुओं के प्रति उनके मन में करुणा थी. जानवरों के प्रति उनका गहरा प्रेम जगजाहिर था और वे पशुओं के कल्याण पर फोकस हर प्रयास को बढ़ावा देते थे. वो अक्सर अपने डॉग्स की तस्वीरें साझा करते थे, जो उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा थे. मुझे याद है, जब रतन टाटा जी को लोग आखिरी विदाई देने के लिए उमड़ रहे थे…तो उनका डॉग ‘गोवा’ भी वहां नम आंखों के साथ पहुंचा था.
नरेंद्र मोदी ने बताया कि व्यक्तिगत तौर पर मुझे पिछले कुछ दशकों में उन्हें बेहद करीब से जानने का सौभाग्य मिला. हमने गुजरात में साथ मिलकर काम किया. वहां बड़े पैमाने पर निवेश किया गया. इनमें कई ऐसे प्रोजेक्ट्स भी शामिल थें, जिसे लेकर वे बेहद भावुक थे. पीएम ने कहा कि जब वे केंद्र में आए तो ये घनिष्ठ बातचीत जारी रही और वो हमारे राष्ट्र-निर्माण के प्रयासों में एक प्रतिबद्ध भागीदार बने रहे. स्वच्छ भारत मिशन के प्रति रतन टाटा का उत्साह विशेष रूप से मेरे दिल को छू गया था. अक्टूबर की शुरुआत में स्वच्छ भारत मिशन की दसवीं वर्षगांठ के लिए उनका वीडियो संदेश मुझे अभी भी याद है. यह वीडियो संदेश एक तरह से उनकी अंतिम सार्वजनिक उपस्थितियों में से एक रहा है.
अभी कुछ सप्ताह पहले, मैं स्पेन सरकार के राष्ट्रपति पेड्रो सान्चेज के साथ वडोदरा में था और हमने संयुक्त रूप से एक विमान फैक्ट्री का उद्घाटन किया. इस फैक्ट्री में सी-295 विमान भारत में बनाए जाएंगे. रतन टाटा ने ही इस पर काम शुरू किया था. उस समय मुझे रतन टाटा की बहुत कमी महसूस हुई.
पीएम नरेंद्र मोदी ने लिखा कि आज जब हम उन्हें याद कर रहे हैं, तो हमें उस समाज को भी याद रखना है जिसकी उन्होंने कल्पना की थी. जहां व्यापार, अच्छे कार्यों के लिए एक शक्ति के रूप में काम करें, जहां प्रत्येक व्यक्ति की क्षमता को महत्व दिया जाए और जहां प्रगति का आकलन सभी के कल्याण और खुशी के आधार पर किया जाए. रतन टाटा जी आज भी उन जिंदगियों और सपनों में जीवित हैं, जिन्हें उन्होंने सहारा दिया और जिनके सपनों को साकार किया. भारत को एक बेहतर, सहृदय और उम्मीदों से भरी भूमि बनाने के लिए आने वाली पीढ़ियां उनकी सदैव आभारी रहेंगी.
उद्योगपति रतन टाटा का मुंबई में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। वर्ली स्थित श्मशान घाट में उन्हें पंचतत्व में विलीन किया गया। कोलाबा स्थित टाटा के आवास से लेकर NCPA (राष्ट्रीय प्रदर्शन कला संस्थान) और फिर श्मशान घाट तक लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। उनके अंतिम दर्शन के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से लेकर राजनीतिक, कारोबारी, खेल, मनोरंजन जगत के कई बड़े नाम पहुंचे। बुधवार को 86 वर्ष की उम्र में उन्होंने मुंबई के अस्पताल में अंतिम सांस ली। महाराष्ट्र और झारखंड व गुजरात सरकार ने टाटा के निधन पर एक दिन के राजकीय शोक का ऐलान किया है। इससे पहले रतन टाटा के पार्थिव शरीर को दक्षिण मुंबई स्थित राष्ट्रीय कला प्रदर्शन केंद्र (एनसीपीए) में जनता के अंतिम दर्शन के लिए सुबह 10.30 बजे से अपराह्न 3.55 बजे तक रखा गया था जहां विभिन्न वर्गों के हजारों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। टाटा समूह को विश्व स्तर पर प्रसिद्धि दिलाने का श्रेय रतन टाटा को दिया जाता है। उनका बुधवार रात शहर के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
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शवदाह गृह में मौजूद एक धर्म गुरु ने बताया कि अंतिम संस्कार पारसी परंपरा के अनुसार किया गया। उन्होंने बताया कि अंतिम संस्कार के बाद दिवंगत उद्योगपति के दक्षिण मुंबई के कोलाबा स्थित बंगले में तीन दिन तक अनुष्ठान किए जाएंगे। पंचतत्व में विलीन हुए अनमोल रतन, पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार। मुंबई पुलिस ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल इस दौरान मध्य मुंबई स्थित शवदाह गृह में उपस्थित थे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और अन्य नेता मुंबई में दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा के अंतिम संस्कार में मौजूद हैं। दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा का अंतिम संस्कार मुंबई के वर्ली श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया जा रहा है।
दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा का 9 अक्टूबर की देर रात देहांत हो गया। यह भारतीय कारोबार जगत के लिए एक स्वर्णिम युग के अंत सरीखा है। रतन टाटा साल 1991 में जेआरडी टाटा की जगह टाटा ग्रुप के चेयरमैन बने। उन्होंने एक के बाद एक कंपनियों को खरीदकर टाटा ग्रुप के साम्राज्य को बढ़ाया। ये सौदे न सिर्फ देश में हुए, बल्कि रतन टाटा ने कई बड़ी विदेशी कंपनियों को खरीदा। टाटा कंज्यमूर प्रोडक्ट्स पहले टाटा टी नाम से कारोबार करती थी। इसने साल 2000 में दिग्गज ब्रिटिश चाय कंपनी- टेटली (Tetley Tea) को खरीदा। यह डील 45 करोड़ डॉलर में हुई। इस डील ने दुनिया को इसलिए भी हैरान किया, क्योंकि टेटली साइज में टाटा के मुकाबले दोगुनी बड़ी थी। इस डील के बाद टाटा टी दुनिया की सबसे बड़ी चाय कंपनियों में शुमार हो गई। यह पहली दफा था, जब किसी भारतीय कंपनी ने विदेशी कंपनी का अधिग्रहण किया हो। इससे टाटा ग्रुप के वैश्विक विस्तार की शुरुआत भी हो गई।
दो बड़े ऑटोमेकर की खरीद
टाटा मोटर्स ने दुनिया के दो बड़े ऑटोमेकर को खरीदा। पहली डील साल 2004 में हुई दक्षिण कोरिया की देवू (Daewoo) से। टाटा मोटर्स ने देवू की कमर्शियल व्हीकल यूनिट को 10.2 करोड़ डॉलर में खरीद लिया। इससे टाटा ग्रुप के पास ट्रक बनाने वाली एडवांस तकनीक आ गई। फिर टाटा मोटर्स ने 2008 में अमेरिकी ऑटोमेकर फोर्ड से Jaguar Land Rover (JLR) की खरीदा। इस 230 करोड़ डॉलर की डील ने टाटा मोटर्स को ऑटो सेक्टर की वैश्विक कंपनी बना दिया।
दो स्टील कंपनियों से डील
टाटा स्टील ने रतन टाटा की अगुआई में दो बड़े सौदे करके अपना दबदबा बढ़ाया। पहली डील2004 में हुई, जब टाटा स्टील ने सिंगापुर की स्टील कंपनी NatSteel को 48.6 करोड़ डॉलर में खरीदा। वहीं, दूसरा सौदा 2007 में हुआ। इस बार टाटा स्टील ने ब्रिटेन की Corus Steel को 1290 करोड़ डॉलर में खरीदा। यह अपने समय की सबसे बड़ी डील थी और इसने टाटा स्टील की दुनिया की टॉप-10 स्टील कंपनियों में शुमार कर दिया।
अमेरिकी होटल में भी चेक-इन
टाटा ग्रुप की होटल कंपनी- ताज होटल ने साल 2006 में अमेरिका के The Ritz-Carlton Boston Hotel को खरीदा। यह सौदा करीब 17 करोड़ डॉलर में हुआ। इससे ताज लग्जरी ब्रांड को वैश्विक विस्तार का मौका मिला और कंपनी ग्लोबल हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में अपना दबदबा मजबूत किया।
Brunner Mond को खरीदा
टाटा ग्रुप की केमिकल कंपनी टाटा केमिकल्स ने 9 करोड़ पौंड में ब्रिटेन की सोडा ऐश बनाने वाली Brunner Mond को अपना बना लिया। इस अधिग्रहण की बदौलत टाटा केमिकल्स सोडा ऐश बनाने के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हो गई।
Starbucks के साथ ज्वाइंट वेंचर
टाटा ग्लोबल बेवरेजेज ने अमेरिका की Starbucks के साथ फ्रेंचाइजी मॉडल की डील की। यह एक ज्वाइंट वेंचर था। इसकी बदौलत टाटा ग्रुप को भारत में स्टारबक्स आउटलेट्स लॉन्च करने की इजाजत मिल गई और उसने तेजी से बढ़ रहे कॉफी रिटेल मार्केट में एंट्री कर ली।
BigBasket का अधिग्रहण
रतन टाटा ने साल 2012 में रिटायर हो गए थे, लेकिन वह टाटा ग्रुप के चेयरमैन एमेरिटस बने रहे। टाटा ग्रुप ने मई 2021 में बिग बास्केट का अधिग्रहण किया। टाटा डिजिटल ने बिग बास्केट में मेजॉरिटी हिस्सेदारी खरीदी। इससे टाटा ग्रुप के लिए ई-कॉमर्स सेक्टर में एंट्री का रास्ता साफ हो गया।
Air India को फिर अपना बनाया
एयर इंडिया के साथ टाटा ग्रुप का भावनात्मक रिश्ता रहा है। इसकी शुरुआत 1930 के दशक में जेआरडी टाटा ने की थी। लेकिन, साल 1953 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। साल 2022 में टाटा सन्स ने 18,000 करोड़ में एयर इंडिया को खरीदा। तब टाटा ग्रुप के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन और चेयरमैन एमेरिटस रतन टाटा थे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा के निधन पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने सोशल मीडिया X पर किए अपने पोस्ट में कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, मानव कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में रतन टाटा के योगदान को भारतवासी सदैव याद रखेंगे.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पोस्ट में लिखा कि सुप्रसिद्ध उद्योगपति, पद्म भूषण व पद्म विभूषण से सम्मानित रतन टाटा के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है. उन्होंने भारतीय उद्योग जगत को सर्वोच्च स्थान पर स्थापित किया. उनका सादगी पूर्ण जीवन, नैतिक नेतृत्व और परोपकार की भावना एक मिसाल थी. वह सदैव हमारी यादों में जीवित रहेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि रतन टाटा का निधन भारत और उद्योग जगत के लिए अपूरणीय क्षति है. देश और समाज में बेहतर बदलाव के लिए उनके द्वारा किए गए अभूतपूर्व कार्य हम सबके लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे. ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजनों, उनके शुभचिंतकों को संबल प्रदान करने की विनम्र प्रार्थना करता हूं. ॐ शांति!
""सुप्रसिद्ध उद्योगपति, पद्म भूषण व पद्म विभूषण से सम्मानित श्री रतन टाटा जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।
उन्होंने भारतीय उद्योग जगत को सर्वोच्च स्थान पर स्थापित किया। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, मानव कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों और देश की अर्थव्यवस्था को…""
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) October 9, 2024
कौन हैं नोएल टाटा
नवल एच टाटा और सिमोन एन टाटा के बेटे हैं। टाटा इंटरनेशनल की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, नोएल टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। वह टाटा समूह से 40 सालों से जुड़े हुए हैं और टाटा ग्रुप की कई कंपनियों में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हैं। वह ट्रेंट, टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड, वोल्टास और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन के चेयरमैन हैं।
साथ ही वह नोएल स्टील और टाइटन कंपनी लिमिटेड के वाइस चेयरमैन हैं। वह सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के बोर्ड के ट्रस्टी भी हैं। उन्होंने ब्रिटेन की ससेक्स यूनिवर्सिटी से शिक्षा हासिल की है। साथ ही INSEAD से इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम पूरा किया है।
नोएल टाटा के 3 बच्चे टाटा ट्रस्ट्स में हैं शामिल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा समूह ने नोएल टाटा के 3 बच्चों को परोपकारी संस्थाओं के बोर्ड में शामिल किया था। इनमें लेह, माया और नेविल का नाम शामिल है। खास बात है कि इन नियुक्तियों से ट्रस्ट्स की 132 साल पुरानी परंपरा में भी बदलाव के संकेत मिलते हैं, जहां पहले आमतौर पर दिग्गजों को ट्रस्टीशिप दी जाती थी। लेह, माया और नेविल टाटा की कई कंपनियों में मैनेजर लेवल के पदों पर भी हैं।
इन ट्रस्टों में शामिल अन्य लोगों ने सिटी इंडिया के पूर्व सीईओ परमीत झावेरी सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और रतन टाटा के छोटे भाई जिमी टाटा और जहांगीर अस्पताल के सीईओ जहांगीर एचसी जहांगीर सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं.
कैसे चुने जाते हैं इन ट्रस्टों के चेयरमैन
टाटा ट्रस्ट के प्रमुख का चुनाव ट्रस्टियों में से बहुमत के आधार पर होता है. विजय सिंह और वेणु श्रीनिवास इन दोनों ट्रस्टों के उपाध्यक्ष हैं. लेकिन इनमें से किसी एक के प्रमुख चुने जाने की संभावना अपेक्षाकृत कम है. जिस व्यक्ति को टाटा ट्रस्ट का प्रमुख बनाए जाने की अधिक संभवाना है, वो है 67 साल के नोएल टाटा. नोएल की नियुक्ति से पारसी समुदाय भी खुश होगा. रतन टाटा पारसी थे. इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि एक पारसी है इस संगठन का नेतृ्त्व करे. इस ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 2023 में 470 करोड़ रुपये से अधिक का दान दिया था.
पारसी को प्राथमिकता
एक ऐतिहासिक तय्थ यह भी है कि केवल पारसियों ने ही टाटा ट्रस्ट की कमान संभाली है. हालांकि कुछ के नाम में टाटा नहीं लगा था और उनका ट्रस्ट के संस्थापक परिवार से कोई सीधा रिश्ता नहीं था. अगर नोएल टाटा इन ट्रस्टों के प्रमुख चुने जाते हैं तो वे सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के 11वें अध्यक्ष और सर रतन टाटा ट्रस्ट के छठे अध्यक्ष बनेंगे. नोएल चार दशक से अधिक समय से टाटा समूह से जुड़े हुए हैं. वो ट्रेंट, टाइटन और टाटा स्टील समेत छह प्रमुख कंपनियों के बोर्ड में हैं. उन्हें 2019 में सर रतन टाटा ट्रस्ट का ट्रस्टी नियुक्त किया गया था. वो 2022 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में शामिल किए गए थे.
टाटा का कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद माना जाता था कि वो टाटा संस के चेयरमैन का पद संभालेंगे. लेकिन उस पर नोएल के बहनोई साइरस मिस्त्री को बैठा दिया गया. टाटा संस से साइरस मिस्त्री के निकाले जाने के बाद टाटा संस के अध्यक्ष की कमान टीसीएस के सीईओ एन चंद्रशेखरन ने संभाली.नोएल और रतन टाटा कभी एक साथ नजर नहीं आए. दोनों ने अपने बीच दूरी बनाए रखी.हालांकि रतन टाटा के अंतिम दिनों में अपने सौतेले भाई से रिश्ते काफी मधुर हो गए थे.
]]>टाटा ने आठ साल पहले अपस्टॉक्स में निवेश किया था। टाटा ने साल 2016 में कंपनी में 1.33% हिस्सेदारी खरीदी थी। इस शेयर बिक्री के बाद अपस्टॉक्स में टाटा की हिस्सेदारी 1.27% रह गई। अपस्टॉक्स में अब भी उनकी होल्डिंग्स का 95% हिस्सा बचा हुआ है। इस कंपनी के भविष्य में पब्लिक होने की योजना है। अपस्टॉक्स से पहले रतन टाटा ने आईपीओ रूट के माध्यम से बेबी केयर प्लेटफॉर्म फर्स्टक्राई के कुछ शेयर बेचे थे।
किस-किसमें था निवेश
कई दशक तक टाटा ग्रुप का नेतृत्व करने के बाद रतन टाटा ने कई स्टार्टअप कंपनियों में बतौर एंजेल इनवेस्टर निवेश किया। इनमें आईवियर ब्रांड Lenskart, बेबी प्रॉडक्ट्स ब्रांड Firstcry, सर्विसेज प्लेटफॉर्म Urban Company और बिजनस-टु-बिजनस मार्केटप्लेस Moglix शामिल हैं। पेटीएम, ओला और स्नैपडील में भी उनका निवेश रहा। टाटा ने करीब 50 स्टार्टअप कंपनियों में निवेश किया और इमें से ज्यादातर का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा। FirstCry जैसी कंपनियों ने आईपीओ के दौरान शानदार रिटर्न दिया।
]]>बचपन में माता-पिता हुए अलग, दादी ने पाला
दिवंगत रतन टाटा (Ratan Tata) का जन्म 28 दिसंबर 1937 को हुआ था और लेकिन उनका बचपन बहुच अच्छा नहीं बीता, दरअसल बचपन में ही 1948 उनके माता-पिता अलग हो गए थे और इसके बाद रतन टाटा का पालन-पोषण उनकी दादी नवाजबाई टाटा ने किया था.
अमेरिका से ली आर्किटेक्चर की डिग्री
शुरुआती शिक्षा के बाद Ratan Tata हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी गए और वहां से बी.आर्क की डिग्री प्राप्त की थी. पढ़ाई पूरी कर भारत लौटने से पहले उन्होंने करीब 2 साल तक लॉस एंजिल्स में जोन्स और इमन्स के साथ कुछ समय के लिए नौकरी भी की थी. साल 1962 के अंत में दादी नवाजबाई टाटा की तबीयत खराब होने चलते वह नौकरी छोड़कर भारत वापस लौट आए थे.
विदेश में प्यार, लेकिन नहीं हो सकी शादी
रतन टाटा ने कभी शादी नहीं की, लेकिन ऐसा नहीं है कि उन्हें कभी किसी से प्यार नहीं हुआ. एक इंटरव्यू के दौरान खुद रतन टाटा ने अपनी लव लाइफ के बारे में विस्तार से बताया था. उन्होंने कहा था कि उनकी जिंदगी में प्यार ने एक नहीं बल्कि चार बार दस्तक दी थी, लेकिन मुश्किल दौर के आगे उनके रिश्ते शादी के मुकाम तक पहुंच नहीं सके. दादी की तबीयत खराब होने के चलते वे अमेरिका से भारत आ गए थे, लेकिन उनकी प्रेमिका भारत नहीं आना चाहती थीं. उसी वक्त भारत-चीन का युद्ध भी छिड़ा हुआ था. आखिर में उनकी प्रेमिका ने अमेरिका में ही किसी और से शादी कर ली. इसके बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान टाटा ग्रुप पर लगाया और समूह की कंपनियों को आगे बढ़ाने पर काम किया.
टाटा स्टील से ऐसे की शुरुआत
अमेरिका से भारत लौटने के बाद अपने पारिवारिक बिजनेस ग्रुप Tata के साथ करियर शुरू किया. लेकिन आपको बता दें कि जिस कंपनी ने Tata Family के सदस्य मालिक की पोजीशन पर थे, उस कंपनी में रतन टाटा ने एक सामान्य कर्मचारी के तौर पर काम शुरू किया. इस दौरान उन्होंने टाटा स्टील के प्लांट में चूना पत्थर को भट्ठियों में डालने जैसे काम भी किए और बिजनेस की बारीकियों को सीखीं थी.
Tata Steel में काम करने के बाद साल 1991 में उन्होंने टाटा ग्रुप की कमान थामी और फिर शुरू हो गया टाटा की कंपनियों के बुलंदियों पर पहुंचने का सिलसिला. उन्होंने कारोबार विस्तार पर फोकस करना शुरू कर दिया.
कारोबार के विस्तार पर किया फोकस
टाटा समूह की बागडोर संभालने के बाद, उन्होंने वैश्विक विस्तार किया और टाटा टी (Tata Tea), टाटा मोटर्स (Tata Motors), टाटा स्टील (Tata Steel) जैसी कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया. आज इन कंपनियों का कोराबार बहुत बड़ा हो चुका है और ये कंपनियां लाखों लोगों को रोजगार मुहैया करा रही हैं.
JRD Tata के बाद सबसे योग्य उत्तराधिकारी
जब Tata Group में जेआरडी का उत्तराधिकारी चुनने की बारी आई, तो उस समय रतन टाटा सबसे योग्य व्यक्ति थे, जो उनकी जगह ले सकते थे और समूह की कमान संभालने के बाद उन्होंने इसे साबित भी किया.
हर बड़े फैसले में JRD की राय
JRD Tata के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए उन्होंने टाटा ग्रुप के कारोबार के विस्तार से जुड़े कई अहम फैसले लिए. हालांकि, कमान हाथ में लेने के बाद भी वो जेआरडी टाटा से हर बड़े कदम पर पर राय मशविरा जरूर करते थे. साल 1993 की ये तस्वीर कुछ यही बयां कर रही है.
ऑटो दिग्गज फोर्ड को झुकाया
90 के दशक में ऑटोमोबाइल सेक्टर में फोर्ड (Ford) का बड़ा नाम था, लेकिन टाटा ग्रुप की कंपनी Tata Motors के हाल ठीक नहीं थे और रतन टाटा ने इसकी पैसेंजर कार डिविजन को बेचने का मन बनाते हुए फोर्ड के साथ डील की थी. लेकिन अमेरिकन कार निर्माता फोर्ड मोटर्स के चेयरमैन बिल फोर्ड ने डील के दौरान मजाक उड़ाते रतन टाटा का अपमान किया था. इसके बाद उन्होंने बिक्री का प्लान कैंसिल किया और टाटा मोटर्स को आगे बढ़ाने पर फोकस किया, महज 9 साल में बाजी पलटी और फोर्ड के दो लोकप्रिय ब्रांड जैगुआर और लैंड रोवर को खरीदकर Bill Ford को झुकने पर मजबूर कर दिया.
सरकार से मिला बड़ा सम्मान
रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा ग्रुप का कारोबार (Tata Group Business) तेजी से आगे बढ़ा और देश ही नहीं दुनियाभर में TATA का डंका बजा. अपने मेहनत और काबिलियत की दम पर विशान साम्राज्य खड़ा करने वाले रतन टाटा को भारत सरकार की ओर से बड़े सम्मान मिले. साल 2000 में जहां रतन टाटा को पद्म भूषण दिया गया, तो साल 2008 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था.
देश को दी लखटकिया कार
रतन टाटा ने एक ऐसा सपना देखा था, जिसे पूरा करना शायद हर किसी के बस में नहीं होता, लेकिन Ratan Tata ने ये कर दिखाया. हम बात कर रहे हैं देश की पहली लखटकिया कार Tata Nano के बारे में, भारत के आम आदमी को एक लाख में कार खरीदने का मौका रतन टाटा ने ही दिया था. उन्होंने बाजार में 2008 में टाटा नैनो उतारी, हालांकि यह कार उनकी उम्मीदों के अनुसार बाजार में धमाल नहीं दिखा पाई.
रतन टाटा थे बड़े डॉग लवर
दिवंगत Ratan Tata को बड़ा बिजनेसमैन, दरियादिल इंसान के साथ ही 'डॉग लवर' के तौर पर जाना जाता था. आवारा जानवरों के प्रति उनका प्यार देखते ही बनता है. सोशल मीडिया (Social Media) पर भी अरबपति उद्योगपति कुत्तों के साथ अपनी तस्वीरें और उनकी सुरक्षा के लिए अपील भरी पोस्ट शेयर करते रहते थे. रतन टाटा के ड्रीम प्रोजेक्ट 98,000 वर्ग फीट में फैला और 5 मंजिला पशु अस्पताल साउथ मुंबई के महालक्ष्मी क्षेत्र इसी साल शुरू हुआ.
जब बयां किया था अकेलेपन का दर्द
रतन टाटा (Ratan Tata) जीवनभर अकेले रहे और उन्होंने शादी नहीं की, लेकिन अकेलेपन का दर्द उन्हें हमेशा होता था. साल 2022 में बुजुर्गों की सेवा के लिए एक स्टार्टअप गुड फेलोज (Startup Goodfellows) में इन्वेस्टमेंट का ऐलान करते हुए उनका ये दर्द दुनिया के सामने आया था. उन्होंने कहा था कि 'आप नहीं जानते कि अकेले रहना कैसा होता है? जब तक आप अकेले समय बिताने के लिए मजबूर नहीं होते तब तक अहसास नहीं होगा.' जब तक आप वास्तव में बूढ़े नहीं हो जाते, तब तक किसी को भी बूढ़े होने मन बिल्कुल भी नहीं करता.
कारों के बेहद शौकीन थे रतन टाटा
रतन टाटा का सिर्फ अपनी ऑटोमोबाइल कंपनी Tata Motors पर ही विशेष फोकस नहीं था, बल्कि वे लग्जरी कारों की सवारी करने के भी शौकीन थे. उनके कार कलेक्शन में एक से बढ़कर एक कारें शामिल थीं.
दिखावे से दूर और सादगी भरा जीवन
रतन टाटा की पहचान जहां देश के एक बड़े बिजनेसमैन के रूप में होती थी, तो उनके सादा स्वाभाव की भी चर्चा होती थी. उन्होंने कभी दिखावे पर भरोसा नहीं किया और पूरी जिंदगी सागदी भरा जीवन जिया.
रतन टाटा को विमान उड़ाने का था शौक
रतन टाटा बेहद सादगीपूर्ण जीवन जीते थे, लेकिन उनके कई बड़े शौक भी थे. इनमें पिआनो बजाना, लग्गजरी कारों और विमान उड़ाने का शौक शामिल था. वह 2007 में F-16 फाल्कन उड़ाने वाले पहले भारतीय बने.
विदेशों में भी मिला सर्वोच्च सम्मान
भारतीय उद्योगपति रतन टाटा (Ratan Tata) को देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी सम्मानित किया गया था. जहां एक ओर उन्हें ऑस्ट्रेलिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया (Order of Australia) से सम्मानित किया गया था, तो वहीं फ्रांस से भी उन्हें सर्वोच्च सम्मान मिला था.
टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा अब नहीं रहे. उनका 86 साल की उम्र में निधन हो गया. रतन टाटा ने बुधवार रात मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. यहां उन्हें कुछ दिन पहले उम्र संबंधी दिक्कतों की वजह से भर्ती कराया गया था. बुधवार रात ही उनके पार्थिव शरीर को अस्पताल से घर लाया गया. अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को मुंबई के नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स हॉल में रखा जाएगा. यहां गुरुवार सुबह 10 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे.
भारत के बाहर भी प्रेरणादायक रहे हैं रतन टाटा: नेपाल के PM
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने रतन टाटा के निधन पर कहा कि उद्योग जगत के अनमोल रत्न रतन टाटा के निधन की खबर से दुखी हूं. बिजनेस और सामाजिक कार्यों में उनका दूरदर्शी नेतृत्व भारत के बाहर भी बहुत प्रभावकारी और प्रेरणादायक रहा है, इससे बहुत लोगों को प्रेरणा मिली.
रतन टाटा के लिए भारत रत्न की मांग
शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के लिए भारत रत्न की मांग की है. पार्टी नेता राहुल कनाल ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को चिट्ठी लिखकर भारत रत्न के लिए रतन टाटा का नाम केंद्र सरकार को भेजने का आग्रह किया है.
नीतीश कुमार ने रतन टाटा के निधन पर जताया शोक
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उद्योगपति एवं टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा जी का निधन दुखद है. उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, सहजता और सादगी भरे जीवन से सबको प्रेरित किया. उन्होंने अपने कार्यों से देश की अर्थव्यवस्था में अपना सराहनीय योगदान दिया. रतन टाटा जी के निधन से उद्योग जगत को अपूरणीय क्षति हुई है. दिवंगत आत्मा की चिर शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना है.
प्रख्यात उद्योगपति एवं टाटा संस के पूर्व चेयरमैन, पद्म विभूषण रतन टाटा जी का निधन दुःखद। उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, सहजता और सादगी भरे जीवन से सबको प्रेरित किया। उन्होंने अपने कार्यों से देश की अर्थव्यवस्था में अपना सराहनीय योगदान दिया। रतन टाटा जी के निधन से उद्योग जगत को अपूरणीय…
रतन टाटा के जीवन की दिलचस्प बातें
साल 1937 में जन्मे रतन टाटा का पालन-पोषण 1948 में उनके माता-पिता के अलग होने के बाद उनकी दादी नवाजबाई टाटा ने किया था.
रतन टाटा साल 1962 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से बी.आर्क की डिग्री प्राप्त की थी. 1962 के अंत में भारत लौटने से पहले उन्होंने लॉस एंजिल्स में जोन्स और इमन्स के साथ कुछ समय काम किया.
2008 में भारत सरकार ने उन्हें देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म विभूषण, प्रदान किया था. वह 28 दिसंबर 2012 को टाटा संस के चेयरमैन के रूप में रिटायर हुए थे.
रतन टाटा का सफ़र:
रतन टाटा का सफर एक प्रेरणादायक कहानी है, जो उनकी दूरदर्शिता, मेहनत और नेतृत्व कौशल को दर्शाता है-
जन्म
28 दिसंबर 1937
कॉलेज डिग्री
1962 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से बी.आर्क (Bachelor of Architecture)
विदेश में कार्य अनुभव
1962 के अंत में भारत लौटने से पहले लॉस एंजिल्स में जोन्स और इमन्स के साथ काम किया
मैनेजमेंट ट्रेनिंग
1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस्ड मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया
टाटा संस के चेयरमैन बने
मार्च 1991
रिटायर
28 दिसंबर 2012
टाटा समूह की आय
1991 में ₹10,000 करोड़ से बढ़कर 2011-12 में USD 100.09 बिलियन
टाटा के मुख्य अधिग्रहण
– 2000 में टाटा टी द्वारा 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर में टेटली का अधिग्रहण
– 2007 में टाटा स्टील द्वारा 6.2 बिलियन पाउंड में कोरस का अधिग्रहण
– 2008 में टाटा मोटर्स द्वारा 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर में जगुआर लैंड रोवर का अधिग्रहण
सम्मान
2008 में पद्म विभूषण (भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान)
निधन
09 अक्टूबर 2024
…जब रतन टाटा ने संभाली कमान:
रतन टाटा की उल्लेखनीय यात्रा तब शुरू हुई जब उन्होंने साल 1991 में ऑटोमोबाइल से लेकर स्टील तक के विभिन्न उद्योगों में फैले टाटा समूह की बागडोर संभाली. साल 1996 में उन्होंने टाटा टेली-सर्विसेज की स्थापना की और 2004 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध करवाया, जो कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ.
रतन टाटा के नेतृत्व में ऐतिहासिक अधिग्रहण:
टेटली (2000): टाटा टी द्वारा 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर में ब्रिटिश चाय कंपनी टेटली का अधिग्रहण किया गया. यह भारतीय कंपनी का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण था.
कोरस (2007): टाटा स्टील ने 6.2 बिलियन पाउंड में यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी कोरस का अधिग्रहण किया. यह भारतीय स्टील उद्योग का अब तक का सबसे बड़ा सौदा था.
जगुआर लैंड रोवर (2008): टाटा मोटर्स ने 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर में प्रतिष्ठित ब्रिटिश कार ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर का अधिग्रहण किया। यह सौदा टाटा मोटर्स के लिए एक बड़ी सफलता साबित हुआ और कंपनी को वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में मजबूती दी.
टाटा ग्रुप की कमान किसके हाथ?
रतन टाटा की सेवानिवृत्ति के बाद, टाटा ग्रुप की कमान एन चंद्रशेखरन (Natarajan Chandrasekaran) के हाथों में है. उन्होंने 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पदभार संभाला था. एन चंद्रशेखरन इससे पहले टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं.
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टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा अब इस दुनिया में नहीं रहे. 86 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया. उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. कुछ दिनों पहले उन्हें उम्र संबंधी मेडिकल कंडीशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनके स्वास्थ्य को लेकर खबरें चल रही थी और इस बारे में उन्होंने एक बयान जारी कर बताया भी था कि उनकी तबीयत ठीक है और सामान्य चेक-अप के लिए अस्पताल में हैं. उन्होंने अपने स्वास्थ्य को लेकर "गलत सूचना" न फैलाने की सलाह दी थी.
रतन टाटा ने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. भारतीय इतिहास में रतन टाटा का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा. भारत में जब भी उद्योगपतियों का जिक्र होगा. सबसे पहले रतन टाटा का नाम लिया जाएगा. उन्होंने अपने जीवन की सार्थक यात्रा में बहुत से ऐतिहासिक काम किए.
रतन टाटा की शख्सियत देखें तो वो सिर्फ एक बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि एक सादगी से भरे नेक और दरियादिल इंसान, लोगों के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत भी थे. वे साल 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे और इस दौरान उन्होंने बिजनेस सेक्टर में कई कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक टाटा समूह को बुलंदियों तक पहुंचाया. उन्होंने टाटा को इंटरनेशनल ब्रांड बना दिया.
रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को नवल और सूनू टाटा के घर हुआ था. उन्होंने 1962 में कॉर्नेल विश्वविद्यालय से वास्तुकला में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद 1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एडवांस मैनेजमेंट कार्यक्रम पूरा किया. उनके पिता नवल टाटा एक सफल उद्योगपति थे और उन्होंने टाटा समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वहीं रतन टाटा की मां सोनी टाटा एक गृहिणी थीं.
रतन टाटा 1962 में टाटा इंडस्ट्रीज में सहायक के रूप में टाटा ग्रुप में शामिल हुए थे. बाद में उसी वर्ष टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी (जिसे अब टाटा मोटर्स कहा जाता है) के जमशेदपुर संयंत्र में छह महीने की ट्रेनिंग ली. विभिन्न कंपनियों में सेवा देने के बाद उन्हें 1971 में नेशनल रेडियो एंड इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी का प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया. 1981 में, उन्हें समूह की अन्य होल्डिंग कंपनी टाटा इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहां वे इसे समूह रणनीति थिंक टैंक और उच्च-प्रौद्योगिकी व्यवसायों में नए उपक्रमों के प्रवर्तक में बदलने के लिए जिम्मेदार थे.
वे 1991 से 28 दिसंबर, 2012 को अपनी सेवानिवृत्ति तक टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अध्यक्ष थे. इस दौरान वे टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा पावर, टाटा ग्लोबल बेवरेजेज, टाटा केमिकल्स, इंडियन होटल्स और टाटा टेलीसर्विसेज सहित प्रमुख टाटा कंपनियों के अध्यक्ष थे. वे भारत और विदेशों में विभिन्न संगठनों से भी जुड़े हुए थे. रतन टाटा मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन और जेपी मॉर्गन चेस के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड में भी थे. वे सर रतन टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स, और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स के अध्यक्ष थे. वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष थे. वह कॉर्नेल विश्वविद्यालय और दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के न्यासी बोर्ड में भी कार्य करते थे.
]]>दरअसल, बुधवार की शाम में उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने की खबर आई थी. जिसके कुछ घंटे बाद ही खबर आई कि उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया है. रतन टाटा का जाना देश के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है. हालांकि उन्हें देश कभी भूल नहीं पाएगा. उन्होंने देश के एक से बढ़कर एक काम किए.
टाटा ग्रुप को ऊंचाईयों पर पहुंचाने में रतन टाटा की सबसे बड़ी भूमिका रही. इन्होंने देश और आम लोगों के लिए कई ऐसे काम किए, जिसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाता रहेगा. रतन टाटा एक दरियादिली इंसान थे और मुसीबत में देश के लिए हमेशा तैयार रहते थे.
दो दिन पहले ही कहा था- मैं बिल्कुल ठीक हूं
इससे पहले सोमवार को भी रतन टाटा की तबीयत बिगड़ने की खबर आई थी, जिसके कुछ ही घंटों बाद खुद रतन टाटा के एक्स (ट्विटर) हैंडल से एक पोस्ट शेयर किया गया था. इस पोस्ट में लिखा था कि मेरे लिए चिंता करने के लिए सभी का धन्यवाद! मैं बिल्कुल ठीक हूं. चिंता की कोई बात नहीं, मैं बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारियों की रूटीन जांच के लिए अस्पताल आया हूं. लेकिन देश को ये दर्द रहेगा कि वो इस बार अस्पताल से लौट नहीं पाए, और हमेशा के लिए अंतिम यात्रा पर निकल पड़े.
28 दिसंबर को हुआ था जन्म
अरबपति कारोबारी और बेहद दरियादिल इंसान रतन टाटा 86 साल के थे, 28 दिसंबर 1937 को उनका जन्म हुआ था. वे साल 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे और इस दौरान उन्होंने बिजनेस सेक्टर में कई कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक टाटा समूह को बुलंदियों तक पहुंचाया.
रतन टाटा की शख्सियत को देखें, तो वो सिर्फ एक बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि एक सादगी से भरे नेक और दरियादिल इंसान भी थे. वो देश के लिए हमेशा आदर्श और प्रेरणास्रोत रहेंगे. वे अपने समूह से जुड़े छोटे से छोटे कर्मचारी को भी अपना परिवार मानते और उनका ख्याल रखने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते, इसके कई उदाहरण मौजूद हैं.
1991 में बने थे चेयरमैन
गौरतलब है कि रतन टाटा को 21 साल की उम्र में साल 1991 में ऑटो से लेकर स्टील तक के कारोबार से जुड़े समूह, टाटा समूह का चेयरमैन बनाया गया था. चेयरमैन बनने के बाद रतन टाटा ने टाटा ग्रुप को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया. उन्होंने 2012 तक इस समूह का नेतृत्व किया, जिसकी स्थापना उनके परदादा ने एक सदी पहले की थी. 1996 में टाटा ने टेलीकॉम कंपनी टाटा टेलीसर्विसेज की स्थापना की और 2004 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को मार्केट में लिस्ट कराया था.
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