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भारत के पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री ने संजू सैमसन के मानसिक दृढ़ता की जमकर प्रशंसा करते हुए कहा कि इस अनुभवी बल्लेबाज ने मौजूदा टी20 वर्ल्ड कप में प्रदर्शन में निरंतरता और बेहतर शॉट चयन की जरूरत को समझते हुए अपनी परिपक्वता साबित कर दी है। सलामी बल्लेबाज सैमसन ने इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में 42 गेंदों में 89 रन बनाकर भारत को गुरुवार को सात रन से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इससे पहले उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 97 रन बनाकर भारत को जीत दिलाई थी।
शास्त्री ने 'द आईसीसी रिव्यू' में कहा, ''मुझे लगता है कि आखिरकार उन्हें यह अहसास हो रहा है और वह इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि उन्हें अपने प्रदर्शन में अधिक निरंतरता की जरूरत है। उन्हें अपने शॉट चयन में अधिक समझदारी दिखानी होगी और अपने मजबूत पक्षों पर भरोसा करना होगा। संजू के साथ दिक्कत यह है कि उनके पास हर तरह के शॉट हैं, लेकिन एकाग्रता में कमी है।''
उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि वह मानसिक रूप से मजबूत हो गया है। जब से वह टीम में आया है तब से किसी ने भी उसकी काबिलियत या प्रतिभा पर शक नहीं किया। लोग इस बात से निराश हैं कि उनके प्रदर्शन में अब तक जो निरंतरता दिखनी चाहिए थी वह नहीं दिख रही है। लेकिन अब वह परिपक्व हो गया है।'' फाइनल भारत और न्यूजीलैंड के बीच रविवार को अहमदाबाद में खेला जाएगा।
सैमसन के सलामी जोड़ीदार अभिषेक शर्मा की फॉर्म फाइनल से पहले भारत के लिए चिंता का विषय है। अभिषेक टी20 विश्व कप में सात पारियों में केवल 89 रन ही बना पाए हैं, लेकिन शास्त्री का मानना है कि भारत को टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज को ही मौका देना चाहिए।
शास्त्री ने कहा, ''मुझे लगता है कि उन्हें टीम में बनाए रखना चाहिए। टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है और उसमें किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं है। टीम को अपनी क्षमता, अपने मजबूत पक्षों पर भरोसा करना चाहिए। उसे बेखौफ होकर खेलना चाहिए।''
]]>शास्त्री ने 'द आईसीसी रिव्यू' में कहा, ''मुझे लगता है कि आखिरकार उन्हें यह अहसास हो रहा है और वह इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि उन्हें अपने प्रदर्शन में अधिक निरंतरता की जरूरत है। उन्हें अपने शॉट चयन में अधिक समझदारी दिखानी होगी और अपने मजबूत पक्षों पर भरोसा करना होगा। संजू के साथ दिक्कत यह है कि उनके पास हर तरह के शॉट हैं, लेकिन एकाग्रता में कमी है।''
उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि वह मानसिक रूप से मजबूत हो गया है। जब से वह टीम में आया है तब से किसी ने भी उसकी काबिलियत या प्रतिभा पर शक नहीं किया। लोग इस बात से निराश हैं कि उनके प्रदर्शन में अब तक जो निरंतरता दिखनी चाहिए थी वह नहीं दिख रही है। लेकिन अब वह परिपक्व हो गया है।'' फाइनल भारत और न्यूजीलैंड के बीच रविवार को अहमदाबाद में खेला जाएगा।
सैमसन के सलामी जोड़ीदार अभिषेक शर्मा की फॉर्म फाइनल से पहले भारत के लिए चिंता का विषय है। अभिषेक टी20 विश्व कप में सात पारियों में केवल 89 रन ही बना पाए हैं, लेकिन शास्त्री का मानना है कि भारत को टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज को ही मौका देना चाहिए।
शास्त्री ने कहा, ''मुझे लगता है कि उन्हें टीम में बनाए रखना चाहिए। टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है और उसमें किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं है। टीम को अपनी क्षमता, अपने मजबूत पक्षों पर भरोसा करना चाहिए। उसे बेखौफ होकर खेलना चाहिए।''
]]>रवि शास्त्री ने आईसीसी रिव्यू से कहा, “भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह तुरंत जवाबी हमला करे। जब आप इस तरह का टेस्ट मैच हारते हैं, एक ऐसा मुकाबला जिसमें आप ज्यादातर समय हावी रहते हैं और फिर आखिरी दिन हार जाते हैं। इंग्लैंड को अपना संयम बनाए रखने के लिए पूरा क्रेडिट मिलता हैं। ऐसे में सीरीज में वापसी करने के लिए बहुत अधिक जज्बे की जरूरत होती है।” उन्होंने आगे कहा, “अभी भी तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के दूसरे टेस्ट में खेलने पर सवाल बना हुआ है, क्योंकि उनके वर्कलोड को मैनेज किया जा रहा है, जबकि टीम इस बात पर भी विचार कर रही है कि स्पिन ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा की मदद के लिए दूसरे स्पिनर को टीम में शामिल किया जाए, या नहीं।”
शास्त्री ने कहा, “अब, बुमराह खेलेंगे या नहीं, यह तो कोई नहीं जानता। लेकिन उम्मीद करते हैं कि वह खेलेंगे, क्योंकि यह बहुत महत्वपूर्ण टेस्ट मैच है। सब कुछ खत्म नहीं हुआ है। बस आपको एक बार में एक मैच पर ध्यान देना है। यह पांच मैचों की सीरीज है। भारत वापसी की उम्मीद कर रहा होगा।” रवि शास्त्री का मानना है कि टेस्ट टीम के नए कप्तान शुभमन गिल ने सीरीज के पहले मैच में भारत की हार से बहुत कुछ सीखा होगा। शास्त्री को उम्मीद है कि युवा कप्तान सीरीज के बाकी मैचों में अधिक सक्रिय रहेंगे।
रवि शास्त्री ने कहा, “लोग कहते हैं कि वह थोड़ा रिएक्टिव थे। ऐसा तब हो सकता है, जब आप अपना पहला टेस्ट मैच (बतौर कप्तान) खेल रहे हों। खासकर उस वक्त, जब बल्लेबाजी के लिए अच्छी परिस्थितियां हों। आउटफील्ड तेज हो, तो चीजें इस तरह से हो सकती हैं, लेकिन गिल ने इससे बहुत कुछ सीखा होगा। अब जब मौका आएगा तो वह थोड़ा और सक्रिय होना चाहेंगे, जिसका मतलब है कि गेंदबाजों और फील्डर्स को उन्हें सपोर्ट करना होगा। गिल को पता होना चाहिए कि उनकी भूमिका क्या है और उन्हें वहां जाकर उसे अंजाम देना चाहिए।”
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रवि शास्त्री ने आईसीसी रिव्यू से कहा, “भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह तुरंत जवाबी हमला करे। जब आप इस तरह का टेस्ट मैच हारते हैं, एक ऐसा मुकाबला जिसमें आप ज्यादातर समय हावी रहते हैं और फिर आखिरी दिन हार जाते हैं। इंग्लैंड को अपना संयम बनाए रखने के लिए पूरा क्रेडिट मिलता हैं। ऐसे में सीरीज में वापसी करने के लिए बहुत अधिक जज्बे की जरूरत होती है।” उन्होंने आगे कहा, “अभी भी तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के दूसरे टेस्ट में खेलने पर सवाल बना हुआ है, क्योंकि उनके वर्कलोड को मैनेज किया जा रहा है, जबकि टीम इस बात पर भी विचार कर रही है कि स्पिन ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा की मदद के लिए दूसरे स्पिनर को टीम में शामिल किया जाए, या नहीं।”
शास्त्री ने कहा, “अब, बुमराह खेलेंगे या नहीं, यह तो कोई नहीं जानता। लेकिन उम्मीद करते हैं कि वह खेलेंगे, क्योंकि यह बहुत महत्वपूर्ण टेस्ट मैच है। सब कुछ खत्म नहीं हुआ है। बस आपको एक बार में एक मैच पर ध्यान देना है। यह पांच मैचों की सीरीज है। भारत वापसी की उम्मीद कर रहा होगा।” रवि शास्त्री का मानना है कि टेस्ट टीम के नए कप्तान शुभमन गिल ने सीरीज के पहले मैच में भारत की हार से बहुत कुछ सीखा होगा। शास्त्री को उम्मीद है कि युवा कप्तान सीरीज के बाकी मैचों में अधिक सक्रिय रहेंगे।
रवि शास्त्री ने कहा, “लोग कहते हैं कि वह थोड़ा रिएक्टिव थे। ऐसा तब हो सकता है, जब आप अपना पहला टेस्ट मैच (बतौर कप्तान) खेल रहे हों। खासकर उस वक्त, जब बल्लेबाजी के लिए अच्छी परिस्थितियां हों। आउटफील्ड तेज हो, तो चीजें इस तरह से हो सकती हैं, लेकिन गिल ने इससे बहुत कुछ सीखा होगा। अब जब मौका आएगा तो वह थोड़ा और सक्रिय होना चाहेंगे, जिसका मतलब है कि गेंदबाजों और फील्डर्स को उन्हें सपोर्ट करना होगा। गिल को पता होना चाहिए कि उनकी भूमिका क्या है और उन्हें वहां जाकर उसे अंजाम देना चाहिए।”
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भारत के पूर्व मुख्य कोच शास्त्री ने ‘द आईसीसी रिव्यू’ में कहा, ''अगर भारत को कोई टीम हरा सकती है तो वह न्यूजीलैंड है। भारत प्रबल दावेदार है लेकिन बहुत ज्यादा फायदा नहीं है।’’ भारत और न्यूजीलैंड का सामना 2000 चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में भी हुआ था, जिसमें न्यूजीलैंड ने चार विकेट से जीत दर्ज की थी। 62 वर्ष के शास्त्री ने न्यूजीलैंड के चार खिलाड़ियों का जिक्र किया जो फाइनल का रूख बदल सकते हैं। उन्होंने रचिन रविंद्र को ‘बेहद प्रतिभाशाली’ करार दिया, जबकि केन विलियमसन की ‘स्थिरता और संत जैसे शांत स्वभाव’ की तारीफ की। उन्होंने कप्तान मिचेल सैंटनर को बुद्धिमान कप्तान और ग्लेन फिलिप्स को टीम का ‘एक्स फैक्टर’ कहा।
शास्त्री ने विराट कोहली के मौजूदा फॉर्म को ‘गेम चेंजर’ करार दिया जबकि निर्णायक क्षणों में अच्छे प्रदर्शन के लिये विलियमसन की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, ''कोहली के मौजूदा फॉर्म की बात करें तो अगर ऐसे खिलाड़ियों को शुरूआती दस रन बना लेने दें तो बाद में वे लंबा खेलते हैं । विलियमसन हों या कोहली। न्यूजीलैंड के लिये मैं कहूंगा विलियमसन। कुछ हद तक रविंद्र भी जो शानदार युवा खिलाड़ी है।’’
पच्चीस वर्ष के रविंद्र आईसीसी 50 ओवरों के टूर्नामेंटों में पांच शतक जमा चुके हैं और ऐसा करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी हैं। शास्त्री ने कहा, ''जिस तरह से क्रीज में वह मूव करता है, मुझे बहुत पसंद है। वह प्रवाहमयी बल्लेबाजी करता है और उसके पास कई स्ट्रोक्स हैं। बड़े टूर्नामेंटों में शतक ऐसे ही नहीं बन जाते। वह बेहद प्रतिभाशाली है।’’ विलियमसन के बारे में उन्होंने कहा, ''वह बहुत स्थिर है और शांत रहता है। वह अपने काम को लेकर बहुत संजीदा है। वह संत की तरह है मानो ध्यान में लगा हो। लोग बड़े शॉट्स में यकीन करते हैं लेकिन वह प्रवाह के साथ पारी को आगे बढाता है। जो रूट, विलियमसन, कोहली इन सभी का फुटवर्क कमाल का है।''
उन्होंने सेंटनेर की तारीफ करते हुए कहा,‘‘ वह काफी चतुर है और कप्तानी उसे रास आ रही है। इससे बतौर बल्लेबाज , गेंदबाज और एक क्रिकेटर के तौर पर उसे फायदा हो रहा है ।’’ शास्त्री ने यह भी कहा कि प्लेयर आफ द मैच कोई हरफनमौला होगा। उन्होंने कहा ,‘‘ भारत की ओर से अक्षर पटेल या रविंद्र जडेजा और न्यूजीलैंड की ओर से ग्लेन फिलिप्स हो सकता है।’’
]]>भारत के पूर्व मुख्य कोच शास्त्री ने ‘द आईसीसी रिव्यू’ में कहा, ''अगर भारत को कोई टीम हरा सकती है तो वह न्यूजीलैंड है। भारत प्रबल दावेदार है लेकिन बहुत ज्यादा फायदा नहीं है।’’ भारत और न्यूजीलैंड का सामना 2000 चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में भी हुआ था, जिसमें न्यूजीलैंड ने चार विकेट से जीत दर्ज की थी। 62 वर्ष के शास्त्री ने न्यूजीलैंड के चार खिलाड़ियों का जिक्र किया जो फाइनल का रूख बदल सकते हैं। उन्होंने रचिन रविंद्र को ‘बेहद प्रतिभाशाली’ करार दिया, जबकि केन विलियमसन की ‘स्थिरता और संत जैसे शांत स्वभाव’ की तारीफ की। उन्होंने कप्तान मिचेल सैंटनर को बुद्धिमान कप्तान और ग्लेन फिलिप्स को टीम का ‘एक्स फैक्टर’ कहा।
शास्त्री ने विराट कोहली के मौजूदा फॉर्म को ‘गेम चेंजर’ करार दिया जबकि निर्णायक क्षणों में अच्छे प्रदर्शन के लिये विलियमसन की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, ''कोहली के मौजूदा फॉर्म की बात करें तो अगर ऐसे खिलाड़ियों को शुरूआती दस रन बना लेने दें तो बाद में वे लंबा खेलते हैं । विलियमसन हों या कोहली। न्यूजीलैंड के लिये मैं कहूंगा विलियमसन। कुछ हद तक रविंद्र भी जो शानदार युवा खिलाड़ी है।’’
पच्चीस वर्ष के रविंद्र आईसीसी 50 ओवरों के टूर्नामेंटों में पांच शतक जमा चुके हैं और ऐसा करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी हैं। शास्त्री ने कहा, ''जिस तरह से क्रीज में वह मूव करता है, मुझे बहुत पसंद है। वह प्रवाहमयी बल्लेबाजी करता है और उसके पास कई स्ट्रोक्स हैं। बड़े टूर्नामेंटों में शतक ऐसे ही नहीं बन जाते। वह बेहद प्रतिभाशाली है।’’ विलियमसन के बारे में उन्होंने कहा, ''वह बहुत स्थिर है और शांत रहता है। वह अपने काम को लेकर बहुत संजीदा है। वह संत की तरह है मानो ध्यान में लगा हो। लोग बड़े शॉट्स में यकीन करते हैं लेकिन वह प्रवाह के साथ पारी को आगे बढाता है। जो रूट, विलियमसन, कोहली इन सभी का फुटवर्क कमाल का है।''
उन्होंने सेंटनेर की तारीफ करते हुए कहा,‘‘ वह काफी चतुर है और कप्तानी उसे रास आ रही है। इससे बतौर बल्लेबाज , गेंदबाज और एक क्रिकेटर के तौर पर उसे फायदा हो रहा है ।’’ शास्त्री ने यह भी कहा कि प्लेयर आफ द मैच कोई हरफनमौला होगा। उन्होंने कहा ,‘‘ भारत की ओर से अक्षर पटेल या रविंद्र जडेजा और न्यूजीलैंड की ओर से ग्लेन फिलिप्स हो सकता है।’’
]]>मेलबर्न में चौथे टेस्ट से पहले उन्हें आधिकारिक तौर पर बाहर कर दिया गया था, बीसीसीआई की मेडिकल टीम ने घुटने में सूजन का हवाला दिया था। शास्त्री और पोंटिंग का मानना है कि शमी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा और सीरीज के अंत में वापसी में तेजी लाई जा सकती थी। शास्त्री ने कहा कि शमी को ऑस्ट्रेलिया ले जाया जा सकता था और फिर उनकी भागीदारी पर निर्णय लिया जा सकता था।
शास्त्री ने आईसीसी रिव्यू में कहा, जब उनसे पूछा गया कि क्या शमी मेलबर्न या सिडनी में सीरीज को अपने पक्ष में कर सकते थे, "बिल्कुल, इसमें कोई संदेह नहीं है। ईमानदारी से कहूं तो, मैं मीडिया में चल रही इस बातचीत से बहुत हैरान था कि मोहम्मद शमी के साथ वास्तव में क्या हुआ। रिकवरी के मामले में वह कहां है? वह एनसीए में कब से बैठा है, मुझे नहीं पता। वह कहां खड़ा है, इस बारे में उचित बातचीत क्यों नहीं हो पा रही है? उसकी क्षमता के अनुसार खिलाड़ी होने के कारण मैं उसे ऑस्ट्रेलिया ले आता।''
उन्होंने कहा, "मैं उसे टीम का हिस्सा बनाए रखता और सुनिश्चित करता कि उसका पुनर्वास टीम के साथ हो। और फिर अगर तीसरे टेस्ट मैच तक हमें लगता कि नहीं, यह खिलाड़ी सीरीज के बाकी मैच नहीं खेल सकता, तो मैं उसे जाने देता।'' शास्त्री ने कहा, "लेकिन मैं उसे टीम के साथ लाता, उसे रखता, सर्वश्रेष्ठ फिजियो से उसकी निगरानी करता और ऑस्ट्रेलिया में मौजूद अंतरराष्ट्रीय फिजियो से भी सर्वश्रेष्ठ सलाह लेता, जो देखते हैं कि वह कैसा प्रदर्शन कर रहा है। लेकिन मैं उसे टीम में बनाए रखता।"
पोंटिंग ने शास्त्री की भावना को दोहराया, इससे पहले कि इस बात पर जोर दिया जाए कि ऑस्ट्रेलिया सीरीज के अंत में यह तेज गेंदबाज कितना महत्वपूर्ण हो सकता था। "मुझे वास्तव में आश्चर्य हुआ जब उसे सीरीज के बीच में भी नहीं बुलाया गया, दो टेस्ट मैच हो चुके थे। भारत की ओर से नितीश रेड्डी निश्चित रूप से टीम में थे। इसलिए आपके पास वैसे भी एक और तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर था। "इसलिए अगर शमी, भले ही वह पूरी तरह से फिट न हो, अगर उसे एक दिन में कम ओवर गेंदबाजी करनी पड़े, तो आपके पास उसकी मदद करने के लिए एक बैकअप सीम गेंदबाजी विकल्प था और मुझे लगता है कि वह अंतर पैदा कर सकता था। "
पोंटिंग ने आईसीसी रिव्यू को बताया, "जब आपने मुझसे (पहले आईसीसी रिव्यू में) पूछा कि मुझे क्या लगता है कि परिणाम क्या होगा, तो मैंने कहा कि 3-1 से ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में क्योंकि शमी टीम में नहीं था। मैंने सबसे पहले यही कहा। मुझे लगा कि वह भारत के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, "अगर शमी, बुमराह और सिराज उनकी शुरुआती टीम में होते, तो मुझे लगता है कि ऑस्ट्रेलिया में चीजें पूरी तरह से अलग हो सकती थीं।''
शास्त्री ने आगे कहा कि शमी जसप्रीत बुमराह के लिए पर्याप्त मदद कर सकते थे, जो सीरीज के अंत में फिटनेस से जूझ रहे थे। "मेलबर्न में 1-1 की बराबरी पर यह बहुत कड़ा हो गया था। आपको बस उस अनुभव और समर्थन की जरूरत थी। आप जानते हैं, वह भी स्तर बढ़ा सकते थे। और यह वहां मौजूद दो खिलाड़ियों (बुमराह और शमी) की वजह से हो सकता था। शास्त्री ने कहा, "पैट कमिंस अकेले ऐसा नहीं कर सकते थे; स्कॉटी बोलैंड को आगे आना पड़ा। इसलिए आपको उनके अनुभव वाले गेंदबाज की जरूरत थी। आप जानते हैं, मोहम्मद सिराज ने जितनी मेहनत की, आपको वहां शमी के अनुभव की जरूरत थी।''
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बुमराह, जिन्होंने पर्थ में रोहित के पितृत्व अवकाश के कारण मैच से बाहर रहने पर भारत को 295 रनों से जीत दिलाई थी, ने टॉस के समय कहा कि दाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज ने खुद ही मैच से बाहर रहने का फैसला किया, जिसे मेहमान टीम को बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी सीरीज ड्रा करने के लिए जीतना जरूरी था, और उन्होंने कहा कि इसके पीछे कोई स्वार्थ नहीं था।
शास्त्री ने फॉक्स स्पोर्ट्स पर कहा, "यह अभी भी एक कप्तान के लिए एक साहसी कदम है कि वह अपनी गलती स्वीकार करे और कहे कि 'मैं इस मैच में बेंच पर बैठने के लिए तैयार हूं।' अगर घरेलू सीजन आ रहा होता तो वह खेलना जारी रखने के बारे में सोच सकता था, लेकिन मुझे लगता है कि वह इस टेस्ट के अंत में खेल से बाहर हो सकता है। वह युवा नहीं हो रहा है… ऐसा नहीं है कि भारत में युवा खिलाड़ी नहीं हैं। विंग्स में बहुत-बहुत अच्छे खिलाड़ी हैं और अब आगे बढ़ने का समय है। कठिन निर्णय, लेकिन हर चीज का एक समय होता है।"
अगर रोहित आखिरकार अपना टेस्ट करियर खत्म करते हैं, तो वे 67 टेस्ट में 40.57 की औसत से 12 शतक और 18 अर्द्धशतक के साथ 4301 रन बनाकर खेल से विदा लेंगे। 2013 में डेब्यू पर शतक लगाने के बाद, रोहित टेस्ट टीम से अंदर-बाहर होते रहे, इससे पहले कि 2019 में उनका करियर एक सलामी बल्लेबाज के रूप में फिर से शुरू हुआ।
एक सलामी बल्लेबाज के रूप में, रोहित ने अपने टेस्ट करियर में एक सफल दौर का आनंद लिया, जिसमें उन्होंने 42.80 की औसत से 2697 रन बनाए, जिसमें नौ शतक शामिल हैं। उन्होंने विराट कोहली के दक्षिण अफ्रीका में 2-1 से सीरीज़ हारने के बाद 2022 की शुरुआत में इस्तीफा देने के बाद टेस्ट कप्तान का पद भी संभाला।
भारत के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल को लगता है कि रोहित का सिडनी टेस्ट से दूर रहना दिखाता है कि वह टीम के सर्वोत्तम हित के लिए कितने निस्वार्थ हैं। “मूल रूप से, एक शब्द है जो बहुत महत्वपूर्ण है, और वह है स्वार्थ नहीं। अगर कोई यह सबूत चाहता है कि रोहित शर्मा स्वार्थी व्यक्ति नहीं हैं और किस हद तक वह टीम को खुद से ऊपर रख सकते हैं, तो यह इसका सबूत है।'' "जाहिर है, आंकड़े और फॉर्म उनका साथ नहीं दे रहे हैं – चाहे वह ओपनिंग करना हो या छठे नंबर पर बल्लेबाजी करना हो। फॉर्म हासिल करने की हर कोशिश की गई, लेकिन आप कुछ भी योगदान नहीं दे सके।"
"हालांकि कई लोग कहेंगे कि उन्होंने आराम करने का विकल्प चुना है या उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया है, लेकिन यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि एक बार जब आप कप्तान के रूप में टेस्ट मैच नहीं खेलने का फैसला करते हैं, तो वह व्यक्ति खुद निर्णय लेने में शामिल होता है।" उन्होंने क्रिकबज पर कहा, "यहां, किसी ने आपको बाहर नहीं किया है और कप्तान के पास विकल्प है – इसलिए इस स्थिति का वर्णन करने के लिए ऑप्ट आउट सही शब्द है। इसके लिए रोहित शर्मा को श्रेय दिया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने खुद महसूस किया कि वह टीम के 11, 15 या 16 खिलाड़ियों में से पर्याप्त नहीं हैं और उन्होंने खुद को अलग कर लिया।''
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बीजीटी में कमेंट्री कर रहे रवि शास्त्री ने कहा कि उन्हें "टेस्ट क्रिकेट के लिए इससे बड़ा विज्ञापन" याद नहीं आता। उन्होंने कहा कि एमसीजी टेस्ट यह साबित करता है कि लगातार बढ़ते टी20 क्रिकेट के सामने पांच दिवसीय खेल अपनी जगह बनाए हुए है। हालांकि, 62 वर्षीय शास्त्री ने कहा कि इससे उनके इस विचार को भी बल मिला कि टेस्ट क्रिकेट को जीवित रहने के लिए सबसे बड़ी टीमों को एक-दूसरे के साथ अधिक मैच खेलने चाहिए।
उन्होंने द ऑस्ट्रेलियन अखबार के लिए लिखे अपने कॉलम में कहा, "लगभग एक सदी से चले आ रहे दर्शकों के रिकॉर्ड को तोड़ना… इस बात का प्रमाण है कि जब बेस्ट टीमें खेलती हैं, तो खेल का सबसे कठिन और बेस्ट फॉर्मेट अभी भी जीवित है और फल-फूल रहा है। यह आईसीसी के लिए भी एक अच्छी याद दिलाने वाली बात थी कि टेस्ट क्रिकेट को जीवित रखने के लिए सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को सर्वश्रेष्ठ खेलना चाहिए। मैं कहूंगा कि अन्यथा बहुत अधिक अव्यवस्था है।"
उन्होंने आगे कहा, "यह मैच इस बात पर और जोर देता है कि हमें 2 टीयर सिस्टम की आवश्यकता क्यों है? जिसमें शीर्ष 6-8 टीमें हों और फिर प्रमोशन और डिमोशन शामिल हो। यदि आपके पास दो उचित टीमें नहीं खेल रही हैं तो आपको इस तरह की भीड़ नहीं मिलेगी।" एक तरह से उन्होंने नए डब्ल्यूटीसी फॉर्मेट पर बात की है। मौजूदा फॉर्मेट उतना ज्यादा पसंद फैंस को नहीं आ रही।
बता दें कि आईसीसी कई वर्षों से प्रतिस्पर्धी प्रारूप को बनाए रखने के लिए दो-स्तरीय प्रणाली पर विचार कर रहा है, लेकिन योजनाएं कभी जमीन पर नहीं उतर पाईं। 2016 में विश्व शासी निकाय के एजेंडे में शीर्ष सात टीमों की एक वास्तविक प्रीमियर लीग का प्रस्ताव था। हालांकि, शक्तिशाली भारतीय क्रिकेट बोर्ड के विरोध के बाद इसे रद्द कर दिया गया।
शास्त्री ने यह भी कहा कि मेलबर्न मैच ने साबित कर दिया है कि टेस्ट मैच पांच दिन के ही रहने चाहिए, इस बात की चर्चा के बीच कि शेड्यूल को सुव्यवस्थित करने के लिए उन्हें घटाकर चार दिन का कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "सोमवार (पांचवें दिन) के अंत में जो नाटकीय घटनाक्रम हुआ, वह इस बात का सबूत है कि हमें एक क्लासिक टेस्ट मैच के लिए पांच दिन की आवश्यकता क्यों है। हालांकि, यदि आप 2 टीयर सिस्टम नहीं बनाते हैं, तो आपके पास एक-दूसरे के खिलाफ बेजोड़ टीमें होंगी और फिर यह बहुत कम संभावना है कि वे खेल को पांचवें दिन तक ले जा सकें। फिर हमेशा चार दिवसीय टेस्ट की बात होगी।"
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