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पिछले कई सालों से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध को रोकने की कोशिश में लगे हुए हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही। इस बीच, रूस ने सितंबर के पहले हफ्ते में यूक्रेन पर हमले बढ़ाते हुए कई इलाकों को धुआं-धुआं कर दिया। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने शनिवार को जानकारी दी कि रूस ने सितंबर के पहले छह दिनों में ही यूक्रेन के खिलाफ 1,300 से ज्यादा हमलावर यूएवी ड्रोन और लगभग 900 गाइडेड हवाई बमों, साथ ही विभिन्न प्रकार की 50 मिसाइलें दागी हैं, जो चल रहे संघर्ष में एक महत्वपूर्ण वृद्धि का संकेत है। 'एक्स' पर पोस्ट किए गए एक विस्तृत बयान में, जेलेंस्की ने रूसी हमलों की लगातार हो रही घटनाओं की निंदा की और स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबंधों में वृद्धि, मजबूत सैन्य समर्थन और दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी का आह्वान किया।
जेलेंस्की ने कहा, "सितंबर की शुरुआत से ही, रूस ने यूक्रेन के खिलाफ 1,300 से ज़्यादा हमलावर यूएवी, लगभग 900 निर्देशित हवाई बम और विभिन्न प्रकार की पचास से ज़्यादा मिसाइलें दागी हैं। कल रात, नागरिक बुनियादी ढांचे पर फिर से हमला हुआ। सभी आवश्यक सेवाएं प्रभावित स्थलों पर काम कर रही हैं।" उन्होंने कहा कि सितंबर के पहले सप्ताह के दौरान यूक्रेन के लगभग हर क्षेत्र में विस्फोटों की सूचना मिली थी, जिसमें चेर्निहाइव, खार्किव, ओडेसा, खेरसॉन, कीव, ज़ापोरिज़िया, डीनिप्रो, किरोवोह्रद, खमेलनित्सकी, ज़ाइटॉमिर, वोलिन, इवानो-फ्रैंकिव्स्क, रिव्ने और लविव क्षेत्रों को निशाना बनाकर हमले किए गए थे।
जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस टिप्पणी का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने रूसी तेल और गैस व्यापार पर कड़े प्रतिबंध लगाने की जरूरत बताई थी, जो अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार, कीव के खिलाफ मास्को के युद्ध प्रयासों को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा, ''रूस इस युद्ध को लगातार लंबा खींच रहा है और कूटनीति को पूरी तरह से तमाशा बनाना चाहता है। और इसका जवाब एकजुट होकर दिया जाना चाहिए, हमलों और विनाश के खिलाफ, कूटनीतिक प्रयासों और सभ्य संवाद की अवहेलना के खिलाफ। राष्ट्रपति ट्रंप बिल्कुल सही कह रहे हैं कि कूटनीति को पटरी पर लाने के लिए रूसी तेल और गैस व्यापार पर प्रभावी प्रतिबंध जरूरी है।
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व्लादिमीर पुतिन ने जब हाल ही में तुर्की में वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ शांति वार्ता में शामिल होने पर अपनी सहमति दी तो दुनिया को लगा कि रूस और यूक्रेन के बीच वर्षों से जारी संघर्ष का अंत हो सकता है। लेकिन अब जो खबर सामने आ रही है वह परेशान करने वाली है। कहा जा रहा है कि पुतिन ने तुर्की में प्रस्तावित यूक्रेन-रूस शांति वार्ता में फिलहाल शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं, जेलेंस्की ने भी अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा है कि जब तक पुतिन नहीं आते हैं तो वह भी इस वार्ता में शामिल नहीं होंगे। पुतिन के इस निर्णय के पीछे मुख्य वजह यह मानी जा रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस वार्ता में शामिल होने की कोशिश कर रहे थे। अगर दोनों देशों के बीच सहमति बनती है तो वह इसका श्रेय लेने की कोशिश करते।
सूत्रों का मानना है कि पुतिन ट्रंप को कूटनीतिक स्तर पर किसी भी तरह की बढ़त नहीं देना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने न केवल खुद को इस वार्ता से दूर रखा, बल्कि अपने वरिष्ठ राजनयिकों को भी वार्ता में शामिल नहीं होने दिया। हालांकि, डिप्टी स्तर के कुछ मंत्रियों और अधिकारियों को जरूर भेजने की बात कही है।
14 मई को क्रेमलिन द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, रूस ने शांति वार्ता के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी कर दी है। इसमें ना तो पुतिन शामिल हो रहे हैं और ना ही विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव। रूसे ने किसी वरिष्ठ अधिकारी को भी इसमें भेजना का फैसला टाल दिया है। हालांकि एक प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात जरूर कही है। जिसमें राष्ट्रपति के सलाहकार और प्रचार रणनीतिकार व्लादिमीर मेडिंस्की, उप विदेश मंत्री मिखाइल गैलुजिन, सैन्य खुफिया प्रमुख इगोर कोस्त्युकोव और उप रक्षा मंत्री अलेक्जेंडर फोमिन शामिल होंगे।
पुतिन के अलावा किसी से बात नहीं करेंगे जेलेंस्की
पुतिन के इस फैसल पर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने तुर्की में व्लादिमीर पुतिन के साथ संभावित बैठक से पहले यह कहकर दांव बढ़ा दिया कि वह राष्ट्रपति के अलावा किसी अन्य रूसी प्रतिनिधि से बातचीत नहीं करेंगे। जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पुतिन से मिलने के आग्रह के बाद ही तुर्की की यात्रा करेंगे। सीएनएन ने जब उनसे बैठक के एजेंडे के बारे में पूछा तो जेलेंस्की ने कहा कि युद्धविराम समझौते के अलावा कुछ भी विफल ही साबित होगा। ऐसे में अगर दोनों देशों के प्रमुख के बगैर यह वार्ता होती भी है तो इसका खास संदेश नहीं जाएगा।
यह भी एक कारण
हालांकि एक तर्क भी दिया जा रहा है कि पुतिन द्वारा स्वयं को वार्ता से दूर रखना इस बात का संकेत हो सकता है कि रूस फिलहाल वार्ता को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया के रूप में देख रहा है, ना कि वास्तविक समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम है।
2022 वाली वार्ता फिर से होगी शुरू?
पुतिन ने युद्ध विराम के आह्वान को अस्वीकार करा और युद्ध विराम लागू होने से पहले शांति वार्ता शुरू करने पर दोर दिया है. वहीं जवाब में, ज़ेलेंस्की ने कहा है कि वह शांति वार्ता के लिए तुर्की जाएंगे और उन्होंने पुतिन को वहां मिलने के लिए आमंत्रित किया है. लेकिन पुतिन आज तुर्की नहीं जा रहे हैं.
रूस ने कहा है कि 15 मई की वार्ता, फरवरी 2022 में यूक्रेन के खिलाफ रूस के पूर्ण पैमाने पर युद्ध की शुरुआत के समय तुर्की में आयोजित 2022 शांति वार्ता की बहाली होगी. जिससे अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रभाव की वजह से यूक्रेन पीछे हट गया था.
क्या थी 2022 की डील?
लीक हुए 2022 शांति मसौदा प्रस्ताव के मुताबिक दोनों पक्ष क्रीमिया को संधि से बाहर करने पर सहमत हुए, जिससे वह रूसी कब्जे में रहेगा और यूक्रेन उस पर रूसी संप्रभुता को मान्यता नहीं देगा.
अन्य रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति का निर्णय बाद में राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की और पुतिन के बीच होने वाली वार्ता में किया जाना था. इस संधि के तहत यूक्रेन कथित तौर पर नाटो या किसी अन्य सैन्य गठबंधन में शामिल होने की आकांक्षाओं को त्याग देगा, लेकिन यूरोपीय संघ में प्रवेश की अनुमति देगा. रूस ने सभी प्रतिबंधों को हटाने, कीव के भाषा और राष्ट्रीय पहचान से संबंधित कानूनों को निरस्त करने और यूक्रेन की सशस्त्र सेनाओं को सीमित करने की भी मांग की थी.
]]>रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि चार कंपनिया- एंडुरिल इंडस्ट्रीज, इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस फॉर सिस्टम्स, इंक, लीडोस की सहायक कंपनी डायनेटिक्स और जोन 5 टेक्नोलॉजीज को सात महीने में नए मिसाइल कॉन्सेप्टस के डिजाइन, निर्माण और फ्लाइट टेस्ट के लिए चुना गया है। वार जोन ने बताया कि ईटीवी प्रोजेक्ट का लक्ष्य वाणिज्यिक और दोहरे इस्तेमाल वाले टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन का प्रोटोटाइप बनाना है। मिसाइलें कई प्रक्षेपण विधियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर तैनाती में सक्षम होंगी, जिससे विरोधियों के लिए रणनीतिक चुनौती पैदा होगी।
कीमत को कम करना लक्ष्य
अगर ये परियोजना सफल होती है तो लागत कम करते हुए अमेरिकी एयरफोर्स की रणनीतिक क्षमताओं को महत्वपूरण रूप से बढ़ा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक कहा गया है कि डिजाइन का लक्ष्य 500 समुद्री मील (926 किमी) उच्च सबसोनिक गति और थोक ऑर्डर में 150,000 अमेरिकी डॉलर प्रति यूनिट की लागत का लक्ष्य हासिल करना है। वर्तमान AGM-158B हवा से सतह पर मार करने वाली स्टेंडऑफ मिसाइल से काफी कम है। एक्सटेंडेड रेंज की कीमत 12-15 लाख रुपए प्रति यूनिट के बीच है।
मिसाइल भंडार पर कितना खर्च करता है अमेरिका
ETV परियोजना मिसाइल भंडार को बढ़ाने के लिए अमेरिका की ओर से बड़े पैमाने पर खर्च किए जाने के बाद आई है। मार्च 2023 में टास्क एंड पर्पस ने बताया कि पेंटागन ने अपनी सामरिक मिसाइल और युद्ध सामग्री शस्त्रागार को बढ़ाने के लिए 2024 के लिए अपने 842 बिलियन डॉलर के बजट में 30.6 बिलियन डॉलर आवंटित किए थे। यूक्रेन युद्ध ने बड़े पैमाने पर औद्योगिक युद्धों में सटीक-निर्देशित हथियारों की अत्यधिक मांग को गिखाया है, जिससे कम लागत वाले समाधान और भी जरूरी हो गए हैं।
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