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'कैसे हराया… उन लोगों के घमंड की धज्जियां उड़ा दीं…'जीत के बाद इसी तेवर वाले भाषण और 'मुंबई को हरे रंग में रंग देने' की बात कहकर चर्चा में आईं AIMIM की युवा नेता सहर शेख अब एक नए विवाद में हैं. ठाणे महानगर पालिका के वार्ड नंबर 30 से पार्षद चुनी गईं सहर शेख पर चुनाव के दौरान फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप लगा है. लगातार बढ़ते विवाद के बीच सहर शेख ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने साफ कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं और उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
सहर शेख ने कहा कि पिछले 5-6 दिनों में जिस तरह से खबरें चल रही हैं, उसने उन्हें व्यक्तिगत तौर पर झकझोर दिया. उन्होंने कहा कि मुझे फरार बताया गया, नॉट रीचेबल कहा गया, जबकि मैं लगातार ग्राउंड पर काम कर रही थी. जब आप लोगों के बीच रहकर काम कर रहे हों और उसी समय आपके बारे में झूठ फैलाया जाए, तो यह हैरान करने वाला होता है. उनका कहना है कि शुरुआत में उन्होंने जानबूझकर मीडिया से दूरी बनाई ताकि वे पहले कानूनी प्रक्रिया को समझ सकें और उसी के तहत जवाब दें।
हम संविधान और कानून पर भरोसा रखते हैं
सहर शेख ने कहा कि वे इस पूरे मामले को कानूनी तरीके से लड़ेंगी. उन्होंने कहा कि हम संविधान में विश्वास रखने वाले लोग हैं. हमें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है, इसलिए हमने पहले कानूनी प्रक्रिया को समय दिया. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब वे हर आरोप का जवाब कोर्ट में देंगी और जिन लोगों ने उन पर आरोप लगाए हैं, उन्हें कानूनी रूप से चुनौती दी जाएगी. उनका कहना है कि उनके खिलाफ जानबूझकर गलत तस्वीरें और बैनर चलाए गए, जो एक राजनीतिक अभियान का हिस्सा थे. उन्होंने कहा कि जिन्होंने मेरी छवि खराब करने की कोशिश की है, उन्हें कानूनी नोटिस भेजा गया है. जो भी जिम्मेदार हैं, उन्हें कोर्ट में जवाब देना होगा।
तहसीलदार ने लगाई रिपोर्ट
ठाणे तहसीलदार कार्यालय ने सहर शेख के पिता यूनुस इकबाल शेख के खिलाफ कथित रूप से फर्जी जाति प्रमाणपत्र का उपयोग करने और उसी के आधार पर अपनी बेटी के लिए जाति प्रमाणपत्र प्राप्त करने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की थी. यह सिफारिश तहसीलदार उमेश पाटिल द्वारा की गई जांच के बाद आई है, जो एनसीपी के प्रत्याशी सिद्दीकी फरहा शबाब अहमद द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर की गई थी, जिसमें सहर के जाति प्रमाणपत्र की वैधता को चुनौती दी गई थी. 25 मार्च को एसडीओ को सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया कि यूनुस शेख ने राज्य चुनाव आयोग सहित चार सरकारी एजेंसियों को गुमराह किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि उनका वर्ष 2011 का ओबीसी प्रमाणपत्र आधिकारिक प्रारूप के अनुरूप नहीं था, उस पर एसडीओ के अनिवार्य हस्ताक्षर नहीं थे और उसके शीर्षक में स्टेट ऑफ महाराष्ट्र भी नहीं लिखा था. जांच में यह भी पाया गया कि शेख के पिता और चाचा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के निवासी थे. महाराष्ट्र जाति प्रमाणपत्र अधिनियम, 2000 के तहत, प्रवासियों को फॉर्म-10 के तहत प्रमाणपत्र प्राप्त करना होता है. आरोप है कि शेख ने दस्तावेजों में हेरफेर कर फॉर्म-8 के तहत प्रमाणपत्र हासिल किया, जो मूल निवासियों के लिए निर्धारित है।
रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अपने प्रथम दृष्टया फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर वर्ष 2018 में सहर शेख के लिए भी जाति प्रमाणपत्र प्राप्त किया. हालांकि परिवार ठाणे में रहता था, लेकिन सहर का प्रमाणपत्र मुंबई सिटी कलेक्टर कार्यालय से जारी कराया गया. तहसीलदार ने ऐसे सभी प्रमाणपत्रों को तत्काल रद्द करने और यूनुस शेख के खिलाफ धोखाधड़ी एवं जालसाजी के आरोप में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।
हरे रंग वाले बयान पर भी दी थी सफाई
इस विवाद से पहले चर्चा उनके उस बयान की भी हुई थी, जिसमें उन्होंने मुंब्रा को “हरे रंग में रंगने” की बात कही थी. इस बयान को लेकर उन्हें घेरने की कोशिश की थी. इस पर सहर शेख ने कहा था कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया. मैंने ‘हरा रंग’ इसलिए कहा क्योंकि वह मेरी पार्टी का रंग है. अगर पार्टी का झंडा किसी और रंग का होता, तो मैं वही कहती. इसे धार्मिक रंग देना गलत है. उन्होंने यह भी कहा था कि संविधान किसी रंग को किसी धर्म से नहीं जोड़ता और सभी रंग सबके हैं।
हार बर्दाश्त नहीं कर पा रहे विरोधी
सहर शेख ने अपने विरोधियों पर आरोप लगाया था कि वे चुनाव में मिली हार को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे. उस समय उन्होंने कहा था कि यह पूरा मामला राजनीतिक प्रोपेगेंडा है. कुछ लोग हार को पचा नहीं पा रहे हैं, इसलिए इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।