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खर्च बढ़ाने और देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए नेपाल की नई बालेंद्र शाह सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की सैलरी को लेकर बड़ा फैसला किया है. ताजा जानकारी के मुताबिक हर सरकारी कर्मियों को अब से हर दो हफ्ते में सैलरी दी जाएगी।
फाइनेंस मिनिस्ट्री के सूत्रों ने इस संबंध में बताया कि मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने इस बारे में फ़ैसला लिया और जरूरी इंतजाम करने के लिए फाइनेंशियल कंट्रोलर जनरल ऑफिस को एक लेटर भेजा है. नए नियम के अनुसार, कर्मचारियों की मौजूदा महीने की सैलरी को दो हिस्सों में बांटा जाएगा और हर दो हफ्ते में इसे दिया जाएगा. फाइनेंस मिनिस्ट्री ने पहले ही संबंधित अधिकारियों को सरकारी कर्मचारियों को हर 15 दिन में सैलरी बांटने का निर्देश दिया है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस कदम का मकसद यह पक्का करना है कि कर्मचारियों को समय पर पेमेंट मिले, जिससे खर्च बढ़ेगा और इकॉनमी में नई जान आएगी. कंट्रोलर जनरल के ऑफिस के एक अधिकारी ने इस बात को कन्फर्म किया है कि मंत्रालय से एक सर्कुलर मिला है और यह फैसला जल्द ही लागू किया जाएगा।
सिलसिलेवार समझें सैलरी का पूरा गणित
भारत के पड़ोसी देश नेपाल में अब से हर सरकारी कर्मचारियों को 15-15 दिन सैलरी दी जाएगी.
इसका मतलब महीने की सैलरी को दो हिस्सों में बांटा जाएगा.
इसके पीछे सरकार का उद्देश्य देश की इकॉनमी को मजबूत करना है.
इसके पीछे मार्केट खर्च को बढ़ाने की कोशिश भी है.
कानूनी बदलाव की भी जरूरत हो सकती है.
अब जानते हैं सरकार ने क्यों लिया यह फैसला
काफी समय से नेपाल की अर्थव्यवस्था काफी धीमी चल रही है.
नेपाल की नई सरकार का मानना है कि महीने में दो बार सैलरी मिलने से लोगों के पास पैसा जल्दी-जल्दी पहुंचेगा और वे लोग इसे खर्च भी करेंगे.
खर्च बढ़ने से बाजार में सामानों की डिमांड बढ़ेगी।
रुपयों का फ्लो तेजी से होगा.
इससे इकॉनमी की स्थिति सुधरेगी.
यह भी जानें
पहले सैलरी महीने में एक बार आती थी. नए नियम के मुताबिक अब हर 15 दिन पर सैलरी आया करेगी. ऐसे समझिए, जैसे नेपाल में किसी सरकारी कर्मचारी की महीने की सैलरी 50 हजार है, तो 15-15 दिन पर उसे 25-25 हजार रुपये मिलेंगे।
अन्य देशों में भी लागू है सैलरी का यह नियम
नेपाल ऐसा पहला देश नहीं है, जहां हर 15 दिन पर सैलरी मिला करेगी. अन्य देशों जैसे- अमेरिका में भी हर सरकारी कर्मचारी को हफ्ते में 2 बार सैलरी दी जाती है. इसके अलावा कनाडा में भी सैलरी का यह नियम लागू है. यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) में भी कुछ सेक्टर्स में हर 15 दिन में सैलरी दी जाती है. वहीं, मैक्सिको में भी यह नियम फॉलो किया जाता है।
महंगाई भत्ते में वृद्धि
लेबर ब्यूरो, शिमला से प्राप्त जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के आधार पर औद्योगिक सूचकांक में औसतन 11.28 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी आधार पर श्रमिकों के महंगाई भत्ते में 226 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, सूचकांक में 34 अंकों की वृद्धि के चलते कृषि श्रमिकों के भत्ते में 170 रुपये प्रतिमाह का इजाफा हुआ है।
अगरबत्ती श्रमिकों को भी लाभ
अगरबत्ती निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों के लिए भी दरों में वृद्धि की गई है। प्रति हजार अगरबत्ती निर्माण पर 8.53 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी निर्धारित की गई है, जिससे इस क्षेत्र के श्रमिकों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
श्रेणी और जोन के अनुसार वेतन
सरकार द्वारा निर्धारित नई दरों के अनुसार अकुशल, अर्द्धकुशल, कुशल और उच्च कुशल श्रमिकों के लिए अलग-अलग वेतन तय किए गए हैं। जोन ‘अ’, ‘ब’ और ‘स’ के आधार पर मासिक वेतन 10,882 रुपये से लेकर 13,612 रुपये तक निर्धारित किया गया है।
दैनिक वेतन और जानकारी
दैनिक वेतन की बात करें तो यह श्रमिकों की श्रेणी और जोन के अनुसार 419 रुपये से 524 रुपये के बीच रहेगा। श्रमायुक्त हिमशिखर गुप्ता ने इन दरों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। अधिक जानकारी के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.shramevjayate.cg.gov.in या श्रमायुक्त कार्यालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर से संपर्क किया जा सकता है।
इसी क्रम में अर्द्धकुशल श्रमिकों हेतु वेतन क्रमशः 12,052.00 रुपये (जोन अ), 11,792.00 रुपये (जोन ब) और 11,532.00 रुपये (जोन स) निर्धारित है। कुशल श्रमिकों को जोन 'अ' में 12,832.00 रुपये, 'ब' में 12,572.00 रुपये और 'स' में 12,312.00 रुपये प्राप्त होंगे, जबकि उच्च कुशल श्रमिकों के लिए यह दरें क्रमशः 13,612.00 रुपये, 13,352.00 रुपये और 13,092.00 रुपये प्रतिमाह होंगी।
दैनिक वेतन की बात करें तो यह श्रेणी और जोन के अनुसार 419 रुपये से लेकर 524 रुपये के मध्य देय होगा। विस्तृत जानकारी विभाग की वेबसाइट https://shramevjayate.cg.gov.in/ या श्रमायुक्त कार्यालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर से प्राप्त की जा सकती है
]]>महंगाई भत्ते में वृद्धि
लेबर ब्यूरो, शिमला से प्राप्त जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के आधार पर औद्योगिक सूचकांक में औसतन 11.28 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी आधार पर श्रमिकों के महंगाई भत्ते में 226 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, सूचकांक में 34 अंकों की वृद्धि के चलते कृषि श्रमिकों के भत्ते में 170 रुपये प्रतिमाह का इजाफा हुआ है।
अगरबत्ती श्रमिकों को भी लाभ
अगरबत्ती निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों के लिए भी दरों में वृद्धि की गई है। प्रति हजार अगरबत्ती निर्माण पर 8.53 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी निर्धारित की गई है, जिससे इस क्षेत्र के श्रमिकों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
श्रेणी और जोन के अनुसार वेतन
सरकार द्वारा निर्धारित नई दरों के अनुसार अकुशल, अर्द्धकुशल, कुशल और उच्च कुशल श्रमिकों के लिए अलग-अलग वेतन तय किए गए हैं। जोन ‘अ’, ‘ब’ और ‘स’ के आधार पर मासिक वेतन 10,882 रुपये से लेकर 13,612 रुपये तक निर्धारित किया गया है।
दैनिक वेतन और जानकारी
दैनिक वेतन की बात करें तो यह श्रमिकों की श्रेणी और जोन के अनुसार 419 रुपये से 524 रुपये के बीच रहेगा। श्रमायुक्त हिमशिखर गुप्ता ने इन दरों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। अधिक जानकारी के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.shramevjayate.cg.gov.in या श्रमायुक्त कार्यालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर से संपर्क किया जा सकता है।
इसी क्रम में अर्द्धकुशल श्रमिकों हेतु वेतन क्रमशः 12,052.00 रुपये (जोन अ), 11,792.00 रुपये (जोन ब) और 11,532.00 रुपये (जोन स) निर्धारित है। कुशल श्रमिकों को जोन 'अ' में 12,832.00 रुपये, 'ब' में 12,572.00 रुपये और 'स' में 12,312.00 रुपये प्राप्त होंगे, जबकि उच्च कुशल श्रमिकों के लिए यह दरें क्रमशः 13,612.00 रुपये, 13,352.00 रुपये और 13,092.00 रुपये प्रतिमाह होंगी।
दैनिक वेतन की बात करें तो यह श्रेणी और जोन के अनुसार 419 रुपये से लेकर 524 रुपये के मध्य देय होगा। विस्तृत जानकारी विभाग की वेबसाइट https://shramevjayate.cg.gov.in/ या श्रमायुक्त कार्यालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर से प्राप्त की जा सकती है
]]>मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों से जुड़ा प्रोबेशन पीरियड वेतन कटौती मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में बड़ा फैसला सुनाते हुए तत्कालीन कमलनाथ सरकार के 12 दिसंबर 2019 के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसमें नए नियुक्त कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि के दौरान पूरा वेतन देने के बजाय 70%, 80% और 90% वेतन देने का प्रावधान किया गया था। अदालत ने इसे भेदभावपूर्ण और अवैध करार देते हुए स्पष्ट कहा था कि प्रभावित कर्मचारियों को काटी गई राशि एरियर सहित लौटाई जाए। इस निर्णय से करीब 1 लाख कर्मचारियों में उम्मीद जगी थी कि उन्हें लगभग 400 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान मिल सकेगा।
अब सर्वोच्च अदालत की शरण में जाने की तैयारी
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मामला थमता नजर आ रहा था, लेकिन अब मोहन सरकार ने इसे चुनौती देने की तैयारी कर ली है। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने की योजना बना रही है। यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है तो एरियर भुगतान पर फिलहाल रोक लग सकती है, जिससे कर्मचारियों की आर्थिक उम्मीदों को बड़ा झटका लगेगा। इस कदम को लेकर कर्मचारी संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है।
वेतन कटौती केस, SC जाएगी सरकार
मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा अवधि) के दौरान वेतन कटौती का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचने वाला है। जबलपुर हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तत्कालीन कमलनाथ सरकार के 12 दिसंबर 2019 के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें नए कर्मचारियों को प्रोबेशन पीरियड के दौरान शत-प्रतिशत वेतन न देकर 70%, 80% और 90% वेतन देने का प्रावधान था। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि प्रभावित कर्मचारियों को काटा गया वेतन एरियर्स समेत लौटाया जाए। हालांकि, अब मोहन सरकार इस फैसले को मानने के बजाय इसे चुनौती देने का मन बना चुकी है।
एमपी हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
बीजेपी ने कमलनाथ सरकार की तरफ से लागू किए गए इस नियम को बदलने का वादा किया था. लेकिन, एमपी सरकार की तरफ से अब तक यह नियम नहीं बदला गया है. ऐसे में कर्मचारी संगठनों ने एमपी का हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और प्रोबेशन पीरियड 2 साल ही करने और पूरी सैलरी देने को लेकर याचिका लगाई. जहां एमपी हाईकोर्ट ने मामले में बड़ा फैसला सुनाया. जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोत की डिवीजन बेंच ने मामले में कहा कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह से न केवल भेदभावपूर्ण है. बल्कि कर्मचारियों को वेतन कम देना भी नियम नहीं है. क्योंकि जब कर्मचारियों से काम पूरा लिया जा रहा है तो फिर उन्हें वेतन भी पूरा देना चाहिए. हाईकोर्ट ने इसे समानता के अधिकार का खुला उल्लंघन मानते हुए कर्मचारियों को सामान वेतन और एरियर देना का फैसला सुनाया.
सु्प्रीम कोर्ट जाएगी एमपी सरकार
अब इस मामले में एमपी सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है. क्योंकि एमपी हाईकोर्ट ने एमपीपीएससी का हवाला दिया था. जिसमें कहा गया था कि एमपीपीएससी के तहत होने वाली नियुक्तियों में दो साल का प्रोबेशन पीरियड और सैलरी भी पूरी दी जाती है. तो फिर कर्मचारी चयन मंडल में यह अंतर क्यों हो रहा है. अब सरकार का कहना है कि एमपीपीएससी और कर्मचारी चयन मंडल की भर्ती प्रक्रियाओं में अंतर है. एमपीपीएससी में प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार होता है, जबकि कर्मचारी चयन मंडल में केवल एक परीक्षा होती है. ऐसे में दोनों की चयन प्रक्रिया अलग है.
400 करोड़ मामला
अगर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है तो इस अवधि में चयनित 1 लाख सरकारी कर्मचारियों को हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक एरियर के जो 400 करोड़ रुपए मिलने थे. वह फिलहाल अटक सकते हैं. क्योंकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जो फैसला आएगा यह एरियर उस फैसले पर मायने रखेगा.
सरकार के वादे और कर्मचारियों का संघर्ष
साल 2019 में कमलनाथ सरकार ने प्रोबेशन पीरियड को 2 साल से बढ़ाकर 4 साल कर दिया था और वेतन में कटौती लागू की थी। 2020 में सत्ता परिवर्तन के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कई बार सार्वजनिक मंचों से इस नियम को खत्म करने का वादा किया था, लेकिन यह कभी लागू नहीं हो सका। शिवराज सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो थक-हारकर कर्मचारियों ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
2019 का आदेश और बढ़ी परिवीक्षा अवधि का प्रभाव
विवाद की जड़ 2019 का वह शासनादेश है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार ने प्रोबेशन अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 4 वर्ष कर दी थी। साथ ही इस अवधि में पूर्ण वेतन के स्थान पर चरणबद्ध वेतन देने का नियम लागू किया गया था। नए कर्मचारियों को पहले वर्ष 70%, दूसरे वर्ष 80% और तीसरे वर्ष 90% वेतन दिया जाता था। चौथे वर्ष के बाद ही उन्हें नियमित वेतनमान का लाभ मिलता था। इस नीति का तर्क वित्तीय भार कम करना बताया गया था, लेकिन कर्मचारियों ने इसे अन्यायपूर्ण माना।
सत्ता परिवर्तन के बाद अधूरे रहे वादे
2020 में सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई मंचों से इस वेतन कटौती नियम को समाप्त करने का आश्वासन दिया था। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि नई सरकार इस प्रावधान को खत्म कर देगी, लेकिन व्यवहार में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। लंबे इंतजार और अनदेखी के बाद कर्मचारी संगठनों ने न्यायिक हस्तक्षेप का रास्ता चुना और हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
1 लाख कर्मचारियों की उम्मीदों पर असमंजस
हाईकोर्ट के फैसले के बाद कर्मचारियों को राहत की उम्मीद बंधी थी। अनुमान है कि लगभग 1 लाख कर्मचारियों को मिलाकर करीब 400 करोड़ रुपये का एरियर बनता है। यदि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित रहता है तो भुगतान प्रक्रिया अनिश्चित काल तक टल सकती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह केवल वेतन का मामला नहीं, बल्कि सम्मान और समानता का प्रश्न भी है।
आगे क्या? कानूनी और राजनीतिक दोनों दांव
अब यह मामला कानूनी लड़ाई के अगले चरण में प्रवेश कर सकता है। यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश पर स्थगन देता है तो एरियर भुगतान पर तत्काल प्रभाव पड़ सकता है। वहीं यदि हाईकोर्ट का निर्णय बरकरार रहता है तो सरकार को बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी निभानी होगी। यह विवाद न सिर्फ कर्मचारियों के आर्थिक हितों से जुड़ा है, बल्कि प्रदेश की प्रशासनिक नीतियों और राजनीतिक विश्वसनीयता से भी सीधे तौर पर संबंधित हो गया है।
यह सर्वे देश की 45 अलग-अलग इंडस्ट्रीज की 1,400 से ज्यादा कंपनियों के डेटा पर आधारित है, जो यह संकेत देता है कि बाजार में तेजी बनी हुई है। सर्वे के अनुसार, एट्रिशन रेट यानी नौकरी छोड़ने की दर साल 2025 में गिरकर 16.2 प्रतिशत पर आ गई है। यह रेट 2023 में 18.7 प्रतिशत और 2024 में 17.7 प्रतिशत थी।
किस सेक्टर को कितनी सैलरी हाईक?
ग्लोबल कंसल्टेंसी कंपनी ‘मर्सर’ की रिपोर्ट में 9 से 10% तक वृद्धि संभव
इससे पहले दिसंबर 2025 में ग्लोबल कंसल्टेंसी कंपनी ‘मर्सर’ की सैलरी सर्वे रिपोर्ट 2026 में 9 से 10 % तक की वृद्धि की बात सामने आई थी। इस सर्वे में 1500 से ज्यादा कंपनियों और 8000 से ज्यादा पदों का एनालिसिस किया था। मर्सर के सर्वे के अनुसार, साल 2026 में हाई टेक वाले सेक्टरों और ऑटो इंडस्ट्री में ज्यादा वेतन वृद्धि होने की उम्मीद है। हाई टेक सेक्टर में 9.3 प्रतिशत और ऑटो इंडस्ट्री में 9.5 प्रतिशत सैलरी बढ़ने की संभावना है। सूचना प्रौद्योगिकी (IT), आईटी से जुड़ी सेवाएं (ITES) और वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) के कर्मचारियों को भी अच्छी सैलरी हाइक मिल सकती है।
]]>मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने सहायक प्रबंधक पद पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह भर्ती डिपुटेशन, कांट्रैक्ट और री-एम्प्लॉयमेंट के आधार पर की जाएगी। योग्य और अनुभवी उम्मीदवार 28 अक्टूबर 2025 तक आवेदन कर सकते हैं।
योग्यता और अनुभव
इस पद के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/संस्थान से मास कम्यूनिकेशन, जर्नलिज्म, पब्लिसिटी, पब्लिक रिलेशन या पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक डिग्री अनिवार्य है। इसके अलावा, इन विषयों में पोस्टग्रेजुएट डिग्री रखने वाले उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं।
इन पदों पर निकली नौकरी…
सहायक प्रबंधक का मुख्य कार्य जनसंपर्क, मीडिया संबंध और सार्वजनिक जानकारी से जुड़ा होगा। पद पर कार्य करने वाले उम्मीदवार मेट्रो परियोजनाओं के प्रचार-प्रसार और मीडिया रिपोर्टिंग, प्रेस कांफ्रेंस तथा अन्य जनसंपर्क गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।
आवेदन प्रक्रिया
इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन पत्र सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ MPMRCL के संबंधित विभाग में 28 अक्टूबर, 2025 तक भेज सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया और शैक्षिक योग्यताओं से संबंधित जानकारी के लिए उम्मीदवार MPMRCL की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।
कब तक कर सकेंगे आवेदन
आवेदन की अंतिम तिथि 28 अक्टूबर 2025 है। इस तिथि के बाद प्राप्त आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उम्मीदवारों से अनुरोध है कि वे समय रहते अपना आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।
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दमोह जिले के विभिन्न विभागों में कार्यरत 944 शासकीय कर्मचारियों को झटका लगा है। इन कर्मचारियों ने निर्धारित समय के भीतर अपनी-अपनी प्रोफाइल को आईएफएमआईएस (इंटीग्रेटेड फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम) पोर्टल पर समग्र और आधार से लिंक नहीं कराया है। लिहाजा अब ऐसे कर्मचारियों को जून महीने का वेतन नहीं मिलेगा। वित्त विभाग के निर्देशों के बाद कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति बन गई है। यदि, वेतन नहीं मिला, तो घर का खर्च कैसे चलेगा? जबकि इस कार्य को समय रहते पूर्ण कराने के लिए सभी कर्मचारियों को पहले से ही सूचित किया जा रहा था।
बताया गया है कि एक सप्ताह पहले कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष राकेश हजारी ने इसी सिलसिले में कलेक्टर सुधीर कोचर से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने आधार और समग्र में सुधार न हो पाने की परेशानी से कलेक्टर को अवगत कराया और कर्मचारियों को कुछ समय की छूट देने की मांग की थी। लेकिन, कलेक्टर ने इस विषय में जिला कोषालय अधिकारी से संपर्क करने की बात कही। इधर, कोषालय अधिकारी ने भी शासन के निर्देशों का हवाला देते हुए किसी भी प्रकार की छूट देने से इनकार कर दिया।
सबसे ज्यादा शिक्षक प्रभावित
वेतन नहीं मिलने वालों में सबसे अधिक संख्या शिक्षा विभाग के शिक्षकों व कर्मचारियों की बताई जा रही है। इनके अलावा जनजातीय कार्य, परिवहन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामान्य प्रशासन आदि विभागों के कर्मचारी भी शामिल हैं। जिले में कुल 10,543 शासकीय कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से 9,599 ने अपनी प्रोफाइल सफलतापूर्वक लिंक कर ली है। केवल 944 कर्मचारी ऐसे हैं, जिनकी प्रोफाइल अब तक लिंक नहीं हो सकी है।
वेतन नहीं दिया जाएगा
जिला कोषालय अधिकारी अभिषेक हजारी ने कहा कि सभी शासकीय कर्मचारियों को बीते 9 महीने से प्रोफाइल लिंक कराने की जानकारी दी जा रही थी। 91 फीसदी कर्मचारियों ने प्रक्रिया पूरी कर ली है। शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश प्राप्त हुए हैं कि जिनकी प्रोफाइल लिंक नहीं है, उन्हें वेतन नहीं दिया जाएगा।
सामान्य प्रशासन विभाग के 22 जुलाई 2023 के सर्कुलर के आधार पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की रिपोर्ट पर यह वृद्धि 2.94 प्रतिशत तय की गई है। यानी अब हर अधिकारी और कर्मचारी को 31 मार्च 2025 की स्थिति में मिल रहे वेतन में 1 अप्रैल 2025 से 2.96 प्रतिशत बढ़ा हुआ वेतन मिलेगा। वित्त विभाग ने सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, संभागीय आयुक्त, राजस्व मंडल अध्यक्ष, सभी कलेक्टरों को वेतनवृद्धि के निर्देश जारी किए।
ये वेतनवृद्धि पिछले साल के मुकाबले कम मध्य प्रदेश संविदा अधिकारी-कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर का कहना है कि प्रदेश में संविदा पर काम करने वाले अधिकारी और कर्मचारी का न्यूनतम वेतन 12 हजार से लेकर 65 हजार रुपए प्रति माह तक है।
इसमें दो महीने से वृद्धि नहीं किए जाने पर उनके द्वारा शासन के संज्ञान में यह मामला लाया गया था। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह वृद्धि 3.78 प्रतिशत की गई थी। संविदा वर्ग को उम्मीद थी कि इस बार सरकार 4 प्रतिशत तक की वृद्धि कर लाभ देगी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया है।
वित्त विभाग ने वेतनवृद्धि संबंधी आदेश जारी कर दिए। इसके संबंध में वित्त विभाग ने सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, संभागीय आयुक्त, राजस्व मंडल अध्यक्ष, सभी कलेक्टरों को वेतनवृद्धि के निर्देश जारी कर दिया है। बताया जा रहा है कि सामान्य प्रशासन विभाग के 22 जुलाई 2023 के सर्कुलर के आधार पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की रिपोर्ट पर यह वृद्धि तय की गई है, जो कि 2.94 प्रतिशत है। इसके अनुसार हर अधिकारी और कर्मचारी को 31 मार्च 2025 की स्थिति में मिल रहे वेतन में 2.96 प्रतिशत बढ़ा हुआ वेतन मिलेगा। यह वृद्धि 1 अप्रैल 2025 से बढ़ी हुई मानी जाएगी।
महंगाई भत्ते के आधार पर मिले वेतन वृद्धि राठौर ने कहा कि आज जो वृद्धि की गई है, उससे कर्मचारियों को 300 रुपए से 1500 रुपए तक की वेतन वृद्धि मिलेगी, जो नाम मात्र है। पहले यह वृद्धि दो हजार से आठ हजार तक होती थी। इसलिए सरकार से मांग है कि जैसे पहले संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता मिलता था, वैसे ही महंगाई भत्ता दिया जाए।
वेतन वृद्धि से खुश नहीं हैं संविदा कर्मचारी
हालांकि संविदा अधिकारी-कर्मचारी महासंघ इस निर्णय से ज्यादा खुश नहीं है। संविदा पर काम करने वाले अधिकारी और कर्मचारी का न्यूनतम वेतन 12 हजार से लेकर 65 हजार रुपए प्रतिमाह तक है। ऐसे में उन्हें 300 रुपए से 1500 रुपए तक की वेतन वृद्धि मिलेगी, जो नाम मात्र है। पहले यह वृद्धि दो हजार से आठ हजार तक होती थी। बता दें कि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह वृद्धि 3.78 प्रतिशत की गई थी। संविदा वर्ग को उम्मीद थी कि इस बार सरकार 4 प्रतिशत तक की वृद्धि कर लाभ देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
]]>मध्यप्रदेश में कर्मचारियों के लिए खुशी की खबर सामने आई है। मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइ कार्पोरेशन MP Civil Supplies Corporation के कर्मचारियों की सेलरी बढ़ाई गई है। कार्पोरशन में रिक्त पदों पर भर्ती की कवायद भी जल्द शुरु की जाएगी। प्रदेश के खाद्य नागरिक आपूर्ति उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंदसिंह राजपूत ने इसके निर्देश दिए। संचालक मण्डल की बैठक में उन्होंने संगठनात्मक संरचना में सुधार का प्रस्ताव तैयार करने के भी निर्देश दिए। इसके लिए जरूरी होने पर कंसल्टेंट की सेवाएं लेने को भी कहा गया है।
मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइ कार्पोरेशन MP Civil Supplies Corporation की संचालक मंडल की बैठक में सदस्यों सहित खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण अपर विभाग की मुख्य सचिव रश्मि अरूण शमी, खाद्य आयुक्त कर्मवीर शर्मा, सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन के एमडी अनुराग वर्मा भी उपस्थित थे। विभाग की मुख्य सचिव ने कार्पोरेशन द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।
संगठनात्मक सुधार के लिए प्रस्ताव बनाने को कहा
बैठक में खाद्य नागरिक आपूर्ति उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंदसिंह राजपूत ने कार्पोरेशन के संगठनात्मक सुधार के लिए प्रस्ताव बनाने को कहा। उन्होंने कहा कि इसके लिये कंसल्टेंट की सेवा भी ले सकते हैं। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने उपार्जन के काम में गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इसके लिए अधिकारियों को उपार्जन केंदों के लगातार निरीक्षण करने को कहा। मंत्री ने कहा कि वे खुद भी उपार्जन केंदों का निरीक्षण करेंगे।
संविदा लेखापालों की नियुक्ति- मंत्री गोविंदसिंह राजपूत ने कार्पोरेशन में रिक्त पदों की भर्ती जल्द करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्पोरेशन MP Civil Supplies Corporation के लंबित लेखा संबंधी कार्य पूरे कराने के लिए संविदा लेखापालों की नियुक्ति करने को कहा। मंत्री ने आउटसोर्स में विशेषज्ञ कर्मचारियों को ही नियुक्त करने के निर्देश दिए।
वरिष्ठ सहायकों के वेतन में 10 प्रतिशत की वृद्धि की मंजूरी – संचालक मण्डल की बैठक में कर्मचारियों की वेतन वृद्धि का निर्णय भी लिया गया। वरिष्ठ सहायकों के वेतन में 10 प्रतिशत की वृद्धि की मंजूरी दे दी गई। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने वेतन वृद्धि सहित बैठक में लिए गए सभी निर्णयों का समय-सीमा में क्रियान्वयन करने को कहा।
]]>केंद्र सरकार ने सांसदों के वेत्तन और भत्ते में बढ़ी बढ़ोत्तरी की है। इसके साथ ही पूर्व सांसदों के पेंशन में भी इजाफा किया गया है। बड़ी बात यह है कि यह बढ़ोत्तरी 1 अप्रैल, 2023 से ही प्रभावी होगी। अब सांसदों को हर महीने 1,24,000 रुपये मिलेंगे, जो पहले एक लाख रुपये थी। इसके अलावा, सांसदों का दैनिक भत्ता भी बढ़ाकर अब 2000 से ढाई हजार कर दिया गया है। पूर्व सांसदों का पेंशन 25 हजार से बढ़ाकर अब 31 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।
यह बढ़ोत्तरी संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन अधिनियम, 1954 द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत किया गया है। यह आयकर अधिनियम, 1961 में उल्लिखित लागत मुद्रास्फीति सूचकांक पर आधारित है।सरकार ने वेतन बढ़ोत्तरी से जुड़ी अधिसूचना जारी कर दी है।संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार संसद सदस्यों के वेतन में लागत मुद्रास्फीति सूचकांक के आधार पर 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, जो एक अप्रैल, 2023 से प्रभावी होगी।
हर पांच साल पर होनी है वेतन की समीक्षा
सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, वैसे पूर्व सांसदों के अतिरिक्त पेंशन में भी बढ़ोत्तरी की गई है, जो एक से ज्यादा कई कार्यकाल तक सांसद रहे हैं। इसके तहत पूर्व सांसदों को सेवा के हरेक वर्ष के लिए अतिरिक्त पेंशन के तौर पर अब 2500 रुपये मासिक पेंशन मिलेंगे, जो पहले 2,000 प्रति माह थी। वेतन-भत्ते में यह बढ़ोत्तरी 2018 के बाद से लागू किए गए उस नियम के तहत किया गया है, जिसमें सांसदों के वेतन और भत्ते की हर पांच साल पर समीक्षा करने का प्रावधान है। यह समीक्षा महंगाई दर पर आधारित होती है।
बता दें कि यह कदम कर्नाटक सरकार द्वारा मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के वेतन में 100% वृद्धि को मंजूरी दिए जाने के कुछ दिनों बाद उठाया गया है। हालांकि, कर्नाटक विधानसभा में विधायकों के वेतन भत्ते में बढ़ोतेतरी पर तीखी बहस हुई थी।
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