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1978 में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान घर छोड़कर गए हिंदू परिवार को 47 वर्ष बाद न्याय मिला। मंगलवार को प्रशासन ने उनकी भूमि वापस कराई। माली समाज के इस परिवार की कुछ भूमि पर दूसरे समुदाय के लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया था। पीड़ित परिवार वर्तमान में चन्दौसी और नरौली में रह रहा है। परिवार ने कुछ दिन पहले डीएम और एसपी को शिकायती पत्र देकर भूमि को कब्जामुक्त कराने की गुहार लगाई थी। मंगलवार को एसडीएम राजस्व विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचीं और भूमि की पैमाइश कराने के बाद उसे कब्जामुक्त कराया।
चन्दौसी के गणेश कॉलोनी निवासी आशा देवी (पत्नी स्वर्गीय कमलेशचंद्र) व नरौली के काजी टोला निवासी रघुनंदन शर्मा ने डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई को शिकायती पत्र देकर कहा कि संभल में रोडवेज के पास उनका दो बीघा का बाग था। 1978 के दंगे में वह परिवार के साथ घर छोड़कर चले गए और परिवार के सभी लोग अलग-अलग रहने लगे। उस भूमि पर दूसरे समुदाय के लोगों ने कब्जा कर लिया।
दंगे के बाद पीड़ित परिवारों ने पुलिस प्रशासन से भूमि कब्जा मुक्त कराने की गुहार लगाई लेकिन भूमि कब्जा मुक्त नहीं हो पाई। वर्ष 2020 में भी रघुनंदन शर्मा ने पुलिस प्रशासन के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर भूमि कब्जामुक्त कराने की गुहार लगाई थी लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। इसके बाद चन्दौसी निवासी आशा देवी और उनके परिवार के लोगों ने फिर डीएम व एसपी को शिकायती पत्र और जमीन के दस्तावेज सौंपे थे।
दंगे के बाद तीन परिवारों ने छोड़ा था घर आशादेवी
संभल में वर्ष 1978 के दंगों की चश्मदीद आशादेवी ने बताया कि इन दिनों वह चन्दौसी के गणेश कॉलोनी में रह रही हैं। वह पति और परिवार के साथ रोडवेज के पास रहती थीं। उनके ससुर की हलवाई की दुकान थी। उनके पति कमलेशचंद्र जागरण करते थे। 1978 के दंगा में मुसलमानों ने जब परिवार को धमकाया, तो उन्होंने घर छोड़ दिया था। रोडवेज के पीछे पौने दो बीघा का बाग था, जिस पर मुसलमानों ने कब्जा कर लिया था। देवर ने नखासा थाने में शिकायत की थी, कई बार अधिकारियों से भी मिले लेकिन अफसरों ने कोई ध्यान नहीं दिया। अब माहौल बदला है, तो उन्होंने डीएम व एसपी से मिलकर भूमि को कब्जामुक्त कराने की गुहार लगाई है। उनके तीन परिवारों ने घर छोड़ा था।
स्कूल भवनों में लिखा मिला फायर स्टेशन का नाम
संभल। जन्नत निशा स्कूल ने भूमि पर कब्जा किया हुआ था। कब्जा भूमि पर बने भवन व स्कूल भवन में दो स्थानों पर फायर पुलिस स्टेशन संभल का नाम लिखा होने के साथ फोन नंबर अंकित थे। एएसपी श्रीश्चंद्र व एसडीएम ने बोर्ड का निरीक्षण किया। कमरों को भी चेक किया लेकिन फायर स्टेशन जैसा अंदर कुछ नहीं दिखा। इस पर एसडीएम ने अग्निशमन अधिकारी बाबूराम को मौके पर बुलाया और जांच कराई।
टीम गठित कर एसडीएम को दी जिम्मेदारी
संभल। डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने जांच करने के बाद टीम गठित की। मंगलवार को एसडीएम बंदना मिश्रा पुलिस फोर्स और राजस्व विभाग की टीम को लेकर मौके पर पहुंचीं। जिस भूमि को आशा देवी और रघुनंदन का परिवार अपनी बता रहा था। वहां जन्नत निशा स्कूल का संचालन हो रहा था। एसडीएम ने भूमि की पैमाइश कराई, तो स्कूल संचालक डॉ. शाहबेज ने दस्तावेज दिखाए। उनके पास कुछ क्षेत्रफल का एक तिहाई भूमि का बैनामा 1976 का था। मौके पर एएसपी श्रीश्चंद्र व एसडीएम ने जांच की। जांच और पैमाइश करने के बाद एसडीएम ने करीब एक हजार स्क्वायर फिट भूमि को स्कूल संचालक के कब्जे से मुक्त कराया।
प्रशासन की बात
एसडीएम डॉ.वंदना मिश्रा ने कहा कि परिवार के लोगों ने शिकायती पत्र देकर अवैध कब्जे की शिकायत की थी। मंगलवार को पीड़ित परिवार को बुलाकर भूमि की पैमाइश कराई गई, तो पाया गया है कि उनकी भूमि बची हुई है। परिवार को बुलाकर उनकी भूमि पर कब्जा दिला दिया गया।
क्या बोली पुलिस
एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने कहा कि वर्ष 1978 के दंगे में जो परिवार घर छोड़कर चला गया था। उस परिवार को उसकी भूमि की पैमाइश कराकर कब्जा मुक्त कराया है। बुधवार को मैं मौके पर पहुंचुंगा और आगे की कार्रवाई होगी।
]]>प्राचीन तीर्थ श्मशान मंदिर
टीम ने क्षेत्र में मौजूद 19 प्राचीन कूपों की स्थिति और ऐतिहासिक महत्व का भी गहन अध्ययन किया गया. सूत्रों के अनुसार, ASI ने इस निरीक्षण के दौरान प्रशासन से आग्रह किया था कि इसे मीडिया कवरेज से दूर रखा जाए. संभल क्षेत्र अपने प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है. ASI की इस गतिविधि से इतिहास के नए पहलुओं पर प्रकाश डालने की उम्मीद की जा रही है.
क्या बोले संभल के डीएम?
संभल के जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने बताया है कि मंदिर का सर्वेक्षण सुरक्षित तरीके से पूरा कर लिया गया है. संभल के प्राचीन कार्तिकेय मंदिर की कार्बन डेटिंग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा गुप्त तरीके से की गई. सुरक्षा कारणों से इस प्रक्रिया को मीडिया कवरेज से दूर रखा गया. चार सदस्यीय ASI टीम ने प्रशासन से अनुरोध किया था कि निरीक्षण को गोपनीय रखा जाए. जिलाधिकारी संभल राजेंद्र पेंसिया के अनुसार, मंदिर का सर्वेक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है.
46 साल से बंद था मंदिर
बता दें कि संभल में हिंसा के बाद जब उपद्रवियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया गया तो बिजली चोरी का मामला सामने आया था. 14 दिसंबर को पुलिस उस वक्त हैरान रह गई जब दीपा राय इलाके में चेकिंग के समय अचानक एक मंदिर मिल गया जो कि सन 1978 का बताया जा रहा है. यह मंदिर 46 सालों से बंद था. जो सपा सांसद के घऱ से 200 मीटर की दूरी पर था. इसके बाद 15 दिसंबर को मंदिर को खोला गया और वहां पूजा पाठ की गई. इसके बाद कुएं मिलने की जानकारी सामने आई और उसकी खुदाई कराई गई. वहीं, इसी बीच संभल के और इलाके सरायतरीन में भी मंदिर मिला. अब इसी मिले मंदिर की जांच और सर्वे के लिए ASI की टीम पहुंची है.
यूपी के संभल में 48 साल बाद खुले मंदिर के पास स्थित कुएं की खुदाई के दौरान एक के बाद एक तीन मूर्तियां निकली हैं. करीब 15 से 20 फीट तक मंदिर की खुदाई हो चुकी है. इस दौरान कुएं में से खंडित हो चुकी ये मूर्तियां निकली हैं. जो कि 7 से 8 इंच लंबी है. देखने से ये मूर्ति माता-पार्वती जी, गणेश जी और लक्ष्मी जी की प्रतीत हो रही हैं. फिलहाल, जांच-पड़ताल जारी है और मौके पर भारी पुलिस बल मौजूद है.
दरअसल, संभल के दीपसराय से सटे खग्गू सराय में करीब 4 दशक साल से बंद पड़े पुराने शिव मंदिर को प्रशासन ने शनिवार को फिर से खुलवाया. मंदिर के खुलते ही यहां पुलिस प्रशासन और लोगों की भीड़ लग गई. पूजा-अर्चना भी शुरू हो गई. वहीं, प्रशासन की ओर से मंदिर के बिल्कुल पास पाट दिए गए एक कुएं की भी खुदाई करवाई गई. जब इसकी 15 फीट तक खुदाई हुई तो इसमें एक-एक कर देवी-देवताओं की मूर्तियां निकलने लगीं.
संभल के मंदिर पर खुदाई के दौरान कुएं से तीन मूर्तियां निकालने के बाद एडिशनल एसपी श्रीशचंद्र और सीओ अनुज चौधरी मौके पर पहुंचे हैं. उन्होंने खुदाई में निकली मूर्तियां देखीं और मीडिया से बात की. उन्होंने कहा कि इन्हें जांच के लिए भेजा जाएगा.
गौरतलब हो कि संभल जिले में बिजली चोरी चेकिंग के दौरान मिले प्राचीन हिंदू मंदिर से अब पुराने अवशेष मिल रहे हैं. आज मंदिर के पास मौजूद कुएं की खुदाई के दौरान और खंडित मूर्तियां मिली हैं. फिलहाल, इसे प्रशासन को सौंप दिया गया है. अब इसकी जांच की जाएगी.
इन सबके बीच संभल में मुस्लिम बहुल इलाके में बंद मिले 46 साल पुराने मंदिर की कार्बन डेटिंग कराने की तैयारी चल रही है. संभल के जिला प्रशासन ने भस्म शंकर मंदिर, शिवलिंग और वहां मिले कुएं की कार्बन डेटिंग कराने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को पत्र लिखा है. इस जांच के जरिए प्रशासन पता करना चाहता है कि मंदिर और इसकी मूर्ति आखिर कितनी पुरानी है.
आपको बता दें कि बता दें कि बिजली चोरी रोकने पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने बीते शनिवार को 1978 से बंद पड़े इस मंदिर को ढूंढा था. इसके बाद 15 सितंबर को इस मंदिर में विधि-विधान और मंत्रोचारण के साथ पूजा आरती की गई. जिला मजिस्ट्रेट राजेंद्र पेंसिया के मुताबिक यह कार्तिक महादेव का मंदिर है. यहां एक कुआं मिला है, जो अमृत कूप है. मंदिर मिलने के बाद यहां 24 घंटे सुरक्षा के लिए टीम तैनात की गई है. सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं. यहां जो अतिक्रमण है, उसे हटाया जा रहा है.
स्थानीय लोगों का दावा है कि सांप्रदायिक दंगों और हिंदू आबादी के विस्थापन के कारण ये मंदिर 1978 से बंद पड़ा था. नगर हिंदू महासभा के संरक्षक विष्णु शंकर रस्तोगी (82) ने बाताया कि वह मैं जन्म से ही खग्गू सराय में रहते आए हैं. 1978 के दंगों के बाद हिंदू समुदाय को इस इलाके से पलायन करना पड़ा था. तब से ही हमारे कुलगुरु को समर्पित यह मंदिर बंद था.
46 सालों से बंद पड़ा ये मंदिर सपा सांसद जियाउररहमान बर्क के घर से 200 मीटर की दूरी पर मिला है. मंदिर के अंदर हनुमान जी की प्रतिमा, शिवलिंग और नंदी स्थापित हैं. फिलहाल यहां डीएम और एसपी ने सुरक्षा के चाक-चौबंद व्यवस्था की है.
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