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देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी कड़ी में शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके समर्थकों पर बेहद तीखा तंज कसा है। मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए राउत ने ईंधन की कीमतों में इजाफे को प्रत्याशित बताया और तंज कसते हुए बीजेपी पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि यह तो होना ही था।
संजय राउत ने पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "इसमें नया क्या है? यह तो होना ही था। अगर आप बीजेपी के समर्थक हैं तो बस 'जय श्री राम' का नारा लगाइए और कीमतें 10 रुपये कम हो जाएंगी। बीजेपी का यही तो असली मंत्र है। 'जय श्री राम' बोलिए और आपको वह सब कुछ मिल जाएगा जो आप चाहते हैं।"
उन्होंने बीजेपी को वोट देने वाले आम वोटरों पर भी निशाना साधते हुए आगे कहा, "जिन्होंने बीजेपी को वोट दिया है, उन्हें अब आराम से बैठना चाहिए और इस स्थिति का सामना करना चाहिए।"
संजय राउत का यह बयान पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आए नए उछाल के बाद आया है, जिसने आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में औसतन 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर 98.64 रुपये और डीजल 91 पैसे बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। इससे ठीक चार दिन पहले भी केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में देश भर में 3 रुपये प्रति लीटर का बड़ा इजाफा किया था।
ईंधन की कीमतों में यह तेजी मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित होने के कारण आई है, जिससे वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। हालांकि भारत सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त तेल और ऊर्जा भंडार है, लेकिन घरेलू बाजार में लगातार बढ़ रही कीमतों ने विपक्ष को सरकार को घेरने का बड़ा मौका दे दिया है। संजय राउत के अलावा कांग्रेस नेताओं ने भी इस बढ़ोतरी को लेकर केंद्र की आर्थिक नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
]]>अब इस मामले में संजय राउत ने सफाई भी देने की कोशिश की है। उनका कहना है कि राजनीतिक समीकरण पक्ष में नहीं थे और शरद पवार जैसे सीनियर नेता राज्यसभा जाना चाहते थे। इसलिए प्रियंका चतुर्वेदी का नाम आगे नहीं बढ़ाया गया। यदि समीकरण अनुकूल होते और शरद पवार जैसे नेता का नाम नहीं होता तो निश्चित तौर पर पार्टी की ओर से प्रियंका को ही दोबारा राज्यसभा भेजने पर विचार किया जाता। उन्होंने कहा कि यह बात रही है कि उद्धव सेना में अंदरखाने यह इच्छा प्रबल थी कि प्रियंका चतुर्वेदी को फिर से राज्यसभा में भेजा जाए। लेकिन पार्टी के पास अपने स्तर पर नंबर कम थे और फिर जब शरद पवार जैसे सीनियर नेता ने दावा कर दिया तो प्रियंका चतुर्वेदी के लिए मुकाबले में बने रहना मुश्किल हो गया।
संजय राउत ने कहा, 'पार्टी में यह प्रबल इच्छा थी कि प्रियंका चतुर्वेदी को एक और मौका दिया जाए। लेकिन जरूरी नंबर नहीं थे। यदि शरद पवार खुद मुकाबले में ना आना चाहते और नंबर होते तो उन्हें ही भेजा जाता। उन्हें 100 फीसदी चांस दिया जाता।' बता दें कि महाराष्ट्र में 7 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से 6 पर एनडीए जीतने की स्थिति में है। एकमात्र सीट विपक्ष जीत सकता है, जिस पर शरद पवार को उतारा गया है। इस एकमात्र सीट पर उद्धव सेना, कांग्रेस और एनसीपी-एसपी तीनों ही दावा कर रहे थे, लेकिन अंत में शरद पवार के नाम पर ही सहमति बनी।
भाजपा ने रामदास आठवले और विनोद तावड़े जैसे नेताओं को चांस दिया है। संजय राउत से जब एनडीए उम्मीदवारों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि आठवले के बारे में तो पहले से ही तय लग रहा था। अब विनोद तावड़े को भेजना अहम है। दरअसल विनोद तावड़े बीते कई सालों से संगठन में काम कर रहे हैं। कई राज्यों के प्रभारी रहे हैं। उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति से दूर रखा गया और वह चुपचाप करते रहे। माना जा रहा है कि अब उसका इनाम उन्हें राज्यसभा भेजकर दिया जा रहा है।
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राउत ने पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर भी कटाक्ष किया। शनिवार को आरएसएस शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में अभिनेता सलमान खान को संघ प्रमुख मोहन भगवत से बातचीत करते देखा गया था। राज्यसभा सदस्य ने पूछा, "क्या यह फिल्म अभिनेता सलमान खान का स्वागत था या (यह संदेश था कि) संघ व उसकी शाखाओं में मुसलमानों का भी स्वागत है?" उन्होंने आरोप लगाया कि भागवत को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए क्योंकि जिस तरह से हिंदू-मुस्लिम नफरत और बदले की भावना से प्रेरित दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है, उसमें संघ भी शामिल है।
राउत ने मुंबई के महापौर पद के लिए भाजपा द्वारा रितु तावडे (53) को उम्मीदवार बनाए जाने पर कहा कि वह मूल रूप से कांग्रेस से हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के पास अपना कोई उम्मीदवार नहीं है। राज्यसभा सदस्य ने कहा, "जिस तरह से मराठी लोगों ने भारी बहुमत से शिवसेना (उबाठा) और मनसे को वोट दिया, भाजपा को मुंबई में एक मराठी महापौर बनाना ही पड़ा।" रितु तावडे, मुंबई की महापौर बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और शिवसेना (उबाठा) द्वारा किसी प्रतिद्वंद्वी को मैदान में नहीं उतारने के फैसले के बाद चार दशकों में सत्तारूढ़ पार्टी की वह पहली महापौर बनेंगी। रितु के निर्विरोध चुने जाने से ठाकरे परिवार का बीएमसी पर 25 साल का वर्चस्व समाप्त हो गया।
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संजय राउत ने कहा कि यदि ये लोग मिलकर चुनाव लड़ते तो काउंटिंग के शुरुआती एक घंटे में ही भाजपा की हार तय हो जाती। यही नहीं संजय राउत ने भले ही ईवीएम का नाम लेकर सवाल नहीं उठाया, लेकिन इशारों में गड़बड़ी के आरोप लगा दिए। उन्होंने कहा कि शायद पीएम की आखिरी इच्छा थी कि मेरे कार्यकाल में एक बार दिल्ली में जीत मिल जाए तो इसलिए हर मुमकिन कोशिश हुई और किसी भी तरह जीत पाने के प्रयास हुए। इससे पहले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद भी संजय राउत, उद्धव ठाकरे जैसे लीडर्स ने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि ईवीएम के साथ धांधली की गई है। यही नहीं उनका कहना था कि आखिर वोट प्रतिशत में इलेक्शन के अगले दिन क्यों इतना ज्यादा इजाफा किया गया।
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संजय राउत ने कहा, 'गठबंधन में, व्यक्तिगत पार्टियों के कार्यकर्ताओं को अवसर नहीं मिलते हैं, और यह राजनीतिक दलों के संगठनात्मक विकास में बाधा डालता है. हम अपनी ताकत के दम पर मुंबई, ठाणे, नागपुर और अन्य नगर निगमों, जिला परिषदों और पंचायतों में चुनाव लड़ेंगे. इन चुनावों में हम अपने कार्यकर्ताओं को मौका देंगे.' महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एमवीए की करारी हार पर आरोप-प्रत्यारोप में शामिल होने के लिए कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार पर निशाना साधते हुए, संजय राउत ने कहा, 'जो लोग आम सहमति और समझौते में विश्वास नहीं करते हैं, उन्हें गठबंधन में रहने का कोई अधिकार नहीं है.'
]]>संजय राउत ने कहा कि उनकी पार्टी आगामी स्थानीय निकाय चुनाव अकेले लड़ेगी। राज्यसभा सदस्य ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि विपक्षी गठबंधन इंडिया और महा विकास आघाडी (MVA) गठबंधन लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए है। उन्होंने कहा, ‘ गठबंधन में अलग-अलग दलों के कार्यकर्ताओं को अवसर नहीं मिलते और इससे संगठनात्मक विकास में बाधा आती है। हम अपने दम पर मुंबई, ठाणे, नागपुर और अन्य नगर निगमों, जिला परिषदों व पंचायतों के चुनाव लड़ेंगे।’ उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी को संकेत दिए हैं कि उसे अकेले चुनाव लड़ना चाहिए।
'…उन्हें गठबंधन में रहने का कोई अधिकार नहीं'
राज्य विधानसभा में एमवीए की हार को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के लिए कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार पर संजय राउत ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग आम सहमति और समझौते में विश्वास नहीं करते, उन्हें गठबंधन में रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इंडिया गठबंधन ने लोकसभा चुनावों के बाद एक भी बैठक नहीं की। शिवसेना यूबीटी नेता ने कहा, ‘हम इंडिया गठबंधन के लिए एक संयोजक भी नियुक्त नहीं कर पाए। यह ठीक नहीं है। गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बैठक बुलाना कांग्रेस की जिम्मेदारी है।’
यह ईवीएम का कमाल
संजय राउत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ''महाराष्ट्र में महायुति की जीत के बाद से सरकार के सभी फैसले राज्य के बजाय दिल्ली में लिए जाएंगे।'' राउत ने एक बार फिर ईवीएम पर संदेह जताते हुए दावा किया कि गठबंधन ''ईवीएम के कमाल'' की वजह से खुश है। उन्होंने कहा, ''आजकल उनके चेहरों पर काफी खुशी है, लोकसभा चुनाव के बाद उनके चेहरों की चमक गायब हो गई थी, जो अब लौट आई है, यह ईवीएम का कमाल है। ईवीएम का एक मंदिर बनना चाहिए, इसमें तीन मूर्ति होनी चाहिए। एक तरफ पीएम और दूसरी तरफ अमित शाह और बीच में ईवीएम।''
महाराष्ट्र के फैसले दिल्ली में लिए जाएंगे- राउत
राउत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "गर्व, जो अब नहीं रहा। एकनाथ शिंदे और अजित पवार को अपने मुद्दे रखने के लिए बार-बार दिल्ली आना पड़ेगा। भले ही वे अलग-अलग पार्टियों से हैं, लेकिन उनका हाईकमान दिल्ली में है, मोदी और शाह उनके हाईकमान हैं।" उन्हें (एकनाथ शिंदे और अजित पवार) महाराष्ट्र में जो कुछ भी करवाना है, उसे दिल्ली से मंजूरी लेनी होगी, कल भी वे (दिल्ली में) मिले थे। तो अब महाराष्ट्र में बैठक कर वे क्या करेंगे? इसलिए मोदी और शाह जो भी आदेश दे रहे हैं, उन्हें सुनना होगा।"
आत्मसम्मान जैसी कोई चीज नहीं बची
उन्होंने आगे देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा नेताओं की राजनीतिक यात्रा काफी घटनापूर्ण रही है, क्योंकि वे मुख्यमंत्री से उपमुख्यमंत्री (डीसीएम) तक बदलते रहे हैं। "पहले भी देवेंद्र फडणवीस सीएम थे, वे डीसीएम बन गए, एकनाथ शिंदे उनसे काफी जूनियर थे। एकनाथ शिंदे ने फडणवीस के मंत्रिमंडल में भी काम किया है, अचानक फडणवीस शिंदे के मंत्रिमंडल में काम करने लगे। महाराष्ट्र में जिस तरह की राजनीति हो रही है, उसमें अब आत्मसम्मान जैसी कोई चीज नहीं बची है।''
संजय राउत ने पत्रकारों के साथ बातचीत में आरोप लगाया, ‘चंद्रचूड़ ने दलबदलुओं के मन से कानून का डर खत्म कर दिया। उनका नाम इतिहास में काले अक्षरों में लिखा जाएगा।’ वर्ष 2022 में अविभाजित शिवसेना में विभाजन के बाद, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले पार्टी के गुट ने एकनाथ शिंदे के साथ दलबदल करने वाले पार्टी विधायकों की अयोग्यता पर उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। एससी ने अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने का दायित्व विधानसभा अध्यक्ष पर छोड़ था। विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट को ‘असली राजनीतिक दल’ घोषित किया था। राउत ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के नतीजे पहले से तय थे। उन्होंने कहा कि अगर तत्कालीन पूर्व न्यायाधीश ने अयोग्यता याचिकाओं पर समय पर फैसला किया होता, तो परिणाम अलग होते।
ICU में हैं अदालतें, बोले संजय राउत
संजय राउत ने कहा, ‘हम दुखी हैं, लेकिन निराश नहीं हैं। हम लड़ाई को अधूरा नहीं छोड़ेंगे। मतों का विभाजन भी एक कारक था और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जहरीले अभियान ने हम पर नकारात्मक प्रभाव डाला।’ राउत ने कहा कि नई सरकार का शपथग्रहण समारोह पड़ोसी गुजरात में होना चाहिए। इस बीच, पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में अपने साप्ताहिक स्तंभ ‘रोखठोक’ में शिवसेना नेता राउत ने दावा किया कि निर्वाचन आयोग के प्रति संवेदना व्यक्त करने का समय आ गया है, जिसने धनबल के इस्तेमाल पर आंखें मूंद लीं। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालतें लंबे समय से आईसीयू में हैं।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों से विपक्षी इंडिया गठबंधन सदमे में है। उसके घटक दल नतीजों को मानने को तैयार नहीं हैं। शिवसेना उद्धव गुट के संजय राउत ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि ये नतीजे न तो पार्टी और न ही महाराष्ट्र की जनता को स्वीकार हैं। वहीं, आज उन्होंने कहा है कि हम निराश नहीं हैं।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम पर शिवसेना(UBT) नेता संजय राउत ने कहा कि हम निराश नहीं हैं। हम लड़ने वाले लोग हैं। हम बाला साहेब ठाकरे के शिव सैनिक हैं। बाला साहेब ठाकरे साहब ने भी उनके जीवन में ऐसी बहुत हार-जीत देखी। हम चुनाव हारे या हमने सत्ता गवाई लेकिन उसको लेकर हमें कोई दुख नहीं है। हम लड़ते रहेंगे और महाराष्ट्र के खिलाफ जा काम हो रहे हैं, हम उसका विरोध करते रहेंगे। संजय राउत ने आगे कहा कि इन नतीजों से महाराष्ट्र की जनता भी दुखी है, वे खुश नहीं हैं, जश्न कहां है? भाजपा कार्यालय या एकनाथ शिंदे के आवास पर कुछ हुआ होगा, लेकिन जो नतीजे आए हैं, लोग अभी भी आश्चर्यचकित हैं कि यह कैसे हुआ।
रुझान आ रहे थे तब भी राउत ने किया था विरोध
इससे पहले संजय राउत ने रुझानों पर भी कहा था कि जय पराजय, हार जीत होती रहती है। लोकशाही में ये सब होता है लेकिन आज जो हो रहा है वह जनता का फैसला नहीं है। नतीजों में कुछ तो गड़बड़ है। संजय राउत ने जनादेश को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने गौतम अडाणी और उनके भतीजे पर अमेरिका में लगे आरोपों पर भी बयान दिए थे। उन्होंने कहा था, 'दो दिन पहले गौतम अडाणी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में एक अरेस्ट वारंट निकला। दो हजार करोड़ के रिश्वत के केस से भाजपा की पोल खुल गई है और उसी को छिपाने के लिए अब चुनाव में खेल किए जा रहे हैं। महाराष्ट्र अब गौतम अडानी की जेब में जा रहा है। हम इसे अडाणी राष्ट्र नहीं होने देंगे।'
एक नजर चुनावी नतीजों पर
महाराष्ट्र चुनाव में महायुति गठबंधन ने 288 में से 230 सीटों पर जीत दर्ज की। जिसमें भाजपा ने 132, शिंदे की शिवसेना ने 57 और एनसीपी ने 41 सीटें जीतीं। वहीं महाविकास आघाड़ी ने सिर्फ 46 सीटें जीतीं। जिसमें कांग्रेस ने 16 और शिवसेना ने 20 सीटें जीतीं।
शिंदे की सेना ने 36 सीटों पर उद्धव गुट को दी मात
अब इस बात को ऐसे समझिए कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने महाराष्ट्र चुनावों में उद्धव ठाकरे की शिवसेना को 36 सीटों पर हराया। जिससे इस बात पर जनता का रूख सामने आता हुआ दिखा कि असली शिवसेना वही है जिसे दिवंगत बाल ठाकरे ने स्थापित किया था या नहीं।
एक नजर जीत हार के समीकरण पर
एक तरफ महायुति गठबंधन का हिस्सा एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 81 सीटों पर चुनाव लड़ी जिसमें 57 सीटों पर अपना कब्जा जमाया। दूसरी ओर महाविकास अघाड़ी गठबंधन का हिस्सा उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने 95 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे जिसमें केवल 20 सीटें ही जीती। देखा जाए तो केवल 14 सीटों पर उसने शिंदे के उम्मीदवारों को हराया।
उन्होंने कहा कि सारे एग्जिट पोल गलत दिखा रहे है, एमवीए जीत रहा है और हम सरकार बनाने जा रहे है। नतीजे कल सुबह तक आ जाएंगे। हमें विश्वास है कि हम बहुमत हासिल करेंगे। 160-165 सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ हमने चुनाव लड़ा है। जयंत पाटिल, बालासाहेब थोराट हम सभी कल बैठे और आकलन किया तो 160 सीटें हम जीत रहे है। सरकार गठन के लिए निर्दलीयों को साथ लाने को लेकर भी चर्चा हुई।
सीएम पद को लेकर उन्होंने कहा कि अभी कोई फार्मूला नहीं बना है। हम सब मिलकर मुख्यमंत्री का चेहरा चुनेगे। अभी कोई फार्मूला तय नहीं हुआ है। एमवीए बैठ कर निर्णय करेगी कि सरकार का नेतृत्व कौन करेगा। शरद पवार, कांग्रेस पार्टी और उद्धव ठाकरे आगे की योजना पर विचार करेंगे। महाराष्ट्र में और हमें सरकार बनने से कोई नहीं रोक सकता। हमारे 160 लोग चुनकर आ रहे हैं। हमारे 160 विधायक चुनकर आने के बाद विधायक दल की बैठक में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं ने अगर ज्यादा वोटिंग किया है तो उनका स्वागत करना चाहिए। अगर युवा और महिला वोटिंग के लिए आगे आते है तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए। महाराष्ट्र सीएम योगी का राज्य नहीं है कि पुलिस वाले रिवाल्वर उठाकर महिलाओं को वोट देने से रोकते हैं। यह महाराष्ट्र है और यहां महिलाओं को वोट करने का पूरा अधिकार है।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के धर्मयुद्ध वाले बयान पर राउत ने कहा कि जब भाजपा को हार का सामना करना पड़ता है तब वे धर्मयुद्ध की बातें करते हैं। महाराष्ट्र में केवल एक धर्म है और वह है छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत। नरेंद्र मोदी, अमित शाह, देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र को लूटने का जो बीड़ा उठाया है, उसके खिलाफ धर्मयुद्ध करेंगे।
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