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सऊदी अरब और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सऊदी सरकार ने ईरान पर “खुलेआम हवाई हमलों” का आरोप लगाते हुए कड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में ईरान की कार्रवाई को “स्पष्ट आक्रामकता” बताया। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले न केवल सऊदी अरब बल्कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के अन्य देशों और कई अरब-इस्लामिक राष्ट्रों को भी निशाना बना रहे हैं। सऊदी अरब का कहना है कि ईरान ने उसकी संप्रभुता, नागरिकों, आर्थिक हितों और राजनयिक परिसरों को निशाना बनाया, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन है।
इस बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने ईरानी दूतावास के सैन्य अटैची, सहायक सैन्य अटैची और तीन अन्य अधिकारियों को निष्कासित करते हुए 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया गया है। सऊदी सरकार ने यह भी कहा कि ईरान की गतिविधियां बीजिंग समझौता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के खिलाफ हैं। रियाद ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए साफ कहा कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।इस घटनाक्रम से मिडिल ईस्ट में पहले से जारी संकट और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
]]>अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने खाड़ी देशों में जिस तरह से हमले किए हैं उससे अरब के समीकरण ही बिगड़ गए हैं। सऊदी अरब ने ईरानी दूतावास के अधिकारियों को तत्काल देश छोड़ने का फरमान सुना दिया है। सऊदी अरब ने कहा है कि ईरान के सभी अधिकारी 24 घंटे के अंदर देश छोड़ दें। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने रविवार सुबह यह आदेश जारी किया है।
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान ने सभी अंतरराष्ट्रीय समझौतों को उल्लंघन किया है। एक अच्छे पड़ोसी को अपने पड़ोसी की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। ईरान ने बीजिंग समझौते और यूएन सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2817 का उल्लंघन किया है। सऊदी अरब ने कहा कि तेहरान ने जो कुछ भी किया है उससे इस्लामिक एकता खतरे में पड़ गई है।
सऊदी अरब ने कहा कि बार-बार समझाने के बाद भी ईरान अपने पड़ोसी देशों को निशाना बना रहा है। आने वाले समय में उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। सऊदी अरब ने साफ कहा है कि अपनी सुरक्षा के लिए कोई भी कदम उठाने से परहेज नहीं किया जाएगा। इस आदेश के कुछ देर बाद ही सऊदी अरब प्रशासन ने ईरानी ड्रोन को मार गिराने की भी पुष्टि की है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि रियाद की तरफ तीन बैलिस्टिक मिसाइल छोड़ी गई थीं जिन्हें असामान में ही ध्वस्त कर दिया गया।
सऊदी अरब इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थलों का घर है। उसने 1952 में शराब की बिक्री पर बैन लगा दिया था। लेकिन अपनी छवि को बदलने के बड़े प्रयास के तहत, सऊदी अरब ने हाल के सालों में बड़े सामाजिक और आर्थिक सुधार किए हैं। उसने खुद को एक ज्यादा उदार और निवेश-अनुकूल देश के रूप में पेश करने का प्रयास भी किया है। ये बदलाव क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में आए हैं, जो सऊदी अरब के प्रधानमंत्री हैं, लेकिन उन्हें किंगडम के असली शासक माना जाता है।
सऊदी अरब में हो रहे बदलावों को जानें
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में सऊदी अरब में सिनेमाघर फिर से खोले गए हैं, बड़े म्यूजिक फेस्टिवल और फैशन शो आयोजित किए हैं, महिलाओं के ड्राइविंग पर बैन हटाया है, और धार्मिक पुलिस की शक्तियों को कम किया गया है। हालांकि शराब की बिक्री से प्रतिबंध हटाने का फैसला सबसे बड़ा और साहसिक कदम माना जा रहा है।
सऊदी अरब में शराब की बिक्री शुरू
सऊदी अरब में शराब की पहली दुकान जनवरी 2024 में रियाद में खुली थी। लेकिन, शुरुआत में इसमें खरीदारी की सिर्फ गैर-मुस्लिम डिप्लोमैट्स को ही इजाजत दी गई थी। अब रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 के आखिर में बिना किसी घोषणा के लागू किए गए नए नियमों के तहत, अमीर, गैर-मुस्लिम विदेशी निवासी अब बीयर, वाइन और स्पिरिट खरीदने के लिए वहां जा सकते हैं।
सऊदी अरब में शराब खरीदने की योग्यता क्या है
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब में शराब खरीदने के लिए योग्यता एक विदेशी के पास या तो प्रीमियम रेजिडेंसी परमिट होना चाहिए, जिसकी कीमत सालाना 100,000 सऊदी रियाल ($27,000; £19,300) है; या यह दिखाना होगा कि वह हर महीने कम से कम 50,000 रियाल कमाता है। प्रीमियम रेजिडेंसी स्कीम के लिए अलग-अलग योग्यता मानदंड हैं, और यह आमतौर पर सीनियर विदेशी अधिकारियों, निवेशकों और खास स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स के लिए खुली है।
इस्लामिक देश सऊदी अरब में हाल के सालों में फांसी के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. इसी बीच खबर है कि सऊदी ने एक ही दिन में आठ लोगों को फांसी दे दी है. फांसी की सजा पाने वालों में अधिकांश लोग ड्रग्स तस्करी के आरोपों में दोषी पाए गए थे.
बीते शनिवार को सऊदी प्रेस एजेंसी ने बताया कि चार सोमाली और तीन इथियोपियाई नागरिकों को किंगडम में हशीश की तस्करी के लिए दक्षिणी क्षेत्र नजरान में फांसी दे दी गई. वहीं, एक सऊदी नागरिक को अपनी मां की हत्या के जुर्म में फांसी दे दी गई.
सऊदी अरब में ड्रग्स से संबंधित मामलों में फांसी की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है और इसी क्रम में एक दिन में आठ लोगों को फांसी देने की घटना सामने आई है.
सऊदी में फांसी के मामलों पर मानवाधिकार समूह चिंतित?
ब्रिटेन स्थित संगठन Reprieve और यूरोपीय सऊदी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स (ESOHR) ने ड्रग्स मामलों से संबंधित फांसी की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है.
सऊदी अरब ड्रग्स की तस्करी आदि के लिए फांसी की सजा देता है जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी काफी आलोचना हो चुकी है. आलोचनाओं को देखते हुए ड्रग्स मामलों में फांसी पर अनौपचारिक रोक भी लगाई गई थी लेकिन फिर 2021 में सऊदी अधिकारियों ने इस रोक को हटा लिया था. रोक हटाने के बाद से ड्रग्स से जुड़े मामले के दोषियों को फांसी देने के मामले बढ़े हैं.
Reprieve के अनुसार, 2024 में सऊदी अरब ने रिकॉर्ड 345 लोगों को फांसी दी, जिनमें से लगभग आधे लोग का अपराध घातक नहीं था.
फांसी देने का 2024 का रिकॉर्ड तोड़ देगा सऊदी अरब
इस साल सऊदी अरब में पिछले साल का यह रिकॉर्ड टूटने वाला है, क्योंकि समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, इस साल अब तक 230 लोगों को फांसी दी जा चुकी है, जिनमें से 154 लोगों को ड्रग्स से संबंधित आरोपों में फांसी दी गई है.
पिछले साल सऊदी में फांसी की सजा पाने वालों में 92 विदेशी नागरिक थे. Reprieve और ESOHR के अनुसार, 2010 और 2021 के बीच, सऊदी अरब ने ड्रग्स से संबंधित अपराधों के लिए सऊदी नागरिकों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक विदेशी नागरिकों को फांसी दी. सऊदी अरब की आबादी में विदेशी नागरिकों की हिस्सेदारी मात्र 36 प्रतिशत है.
Reprieve के MENA (Middle East and North Africa) डेथ पेनाल्टी के प्रमुख जीद बसयूनी ने मिडिल ईस्ट आई से बात करते हुए कहा, 'ड्रग्स के खिलाफ युद्ध जीतने में दुनिया असफल रही है और फिर से हम वही पैटर्न देख रहे हैं कि अधिकारी ड्रग्स के खतरों का जवाब गरीब और हाशिए पर पड़े लोगों की हत्या करके देते हैं. ऐसे आरोपों से जूझ रहे लोगों को अपने मुकदमे के दौरान वकील या ट्रांसलेटर जैसी बुनियादी सुविधाओं का अधिकार भी शायद ही मिल पाता है.'
]]>सऊदी अरब का जब जिक्र होता है तो हमारे दिमाग में मक्का, मदीना और रेगिस्तान की तस्वीर बनती है। लेकिन अब यहां के हालात बदल गए हैं। भारी बारिश के बाद भीषण बाढ़ आ गई है। मक्का और मदीना के ज्यादातर हिस्सों में खास तौर से जेद्दा शहर और गवर्नरेट के अन्य क्षेत्रों में ओलावृष्टि और तूफान के साथ भारी बारिश हुई।
बारिश के बाद आई बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। मीडिया रिपोर्ट की माने तो बारिश बुधवार को भी जारी रह सकती है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में शहर आंशिक रूप से जलमग्न दिखाई दे रहे हैं।
लाखों मुस्लिम आते हैं हज और उमरा करने
सऊदी अरब में मक्का मदीना बेहद पवित्र तीर्थ स्थल है। यहां दुनियाभर से हर वर्ष लाखों मुसलमान हज और उमरा करने के इन शहरों में आते हैं। मगर इन दिनों भयंकर बारिश ने पूरे सऊदी का माहौल बदल दिया है। भारी बारिश के कारण सऊदी के कई शहर डूब गए हैं। आगे भी ऐसी स्थिति बने रहने की चेतावनी जारी की गई है। नेशनल मीटियोलॉजिकल सेंटर (NMC) ने इस सप्ताह के लिए मध्यम से भारी बारिश, गरज और धूल भरी आंधी का अनुमान व्यक्त किया है। पिछले एक घंटे में बारिश के लिए कई येलो वेदर वॉर्निंग जारी की गई हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
इस बारिश में सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका अल-उला और अल-मदीना है। अल-मदीना में मुस्लिमों का सबसे पवित्र स्थल मस्जिद-ए-नबवी है, जहां की वीडियो काफी वायरल हो रही है। वीडियो में मस्जिद के अंदर तेज बारिश के साथ पानी भरा हुआ दिख रहा है। राज्यों में कई जगहों पर आने-जाने की मनाही है और इसके साथ ही स्कूलों को भी बंद कर दिया गया है।
प्रशासन ने चेतावनी जारी की
प्रशासन ने चेतावनी जारी कर लोगों को घरों के अंदर रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। आपातकालीन सेवाएं किसी भी घटना के जवाब देने के लिए तैयार हैं। सरकार स्थिति को नियंत्रित करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। वहीं, मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह स्थिति कुछ और दिनों तक बनी रहेगी। वे लोगों से सतर्क रहने और आधिकारिक सलाह का पालन करने की अपील कर रहे हैं। सुरक्षा सुनिश्चित करने और मौसम की घटनाओं के प्रभाव को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।