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सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए एक पहले से शादीशुदा जोड़े द्वारा दोबारा विवाह करने का मामला सामने आया है। यह घटना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत पखांजूर में आयोजित कार्यक्रम से जुड़ी है। मामले के उजागर होने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने जांच कर कार्रवाई की है।
जानकारी के अनुसार, 10 फरवरी 2026 को पखांजूर में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में ग्राम पीवी-34 निवासी सुदीप विश्वास और पीवी-64 निवासी स्वर्ण मिस्त्री ने विवाह किया। जबकि इन दोनों की शादी इससे पहले ही 3 जून 2025 को हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि यह जोड़ा संगम सेक्टर का निवासी है, लेकिन योजना का लाभ लेने के लिए इनका पंजीयन 20 किलोमीटर दूर हरनगढ़ सेक्टर में कराया गया।
जांच के बाद कार्रवाई
मामले के संज्ञान में आने के बाद कलेक्टर निलेश क्षीरसागर के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने जांच शुरू की। जांच में दोबारा विवाह की पुष्टि हुई। इसके बाद हरनगढ़ सेक्टर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जानवी शाह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। वहीं, पूरे मामले में निगरानी और सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाली सुपरवाइजर पुष्पलता नायक के खिलाफ भी विभाग ने कार्रवाई करते हुए उनका वेतन रोक दिया है।
कोयला घोटाले में EOW और ACB ने आईपीसी की धारा 384, 420, 120-बी, 467, 468, 471 और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट PMLA की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। प्रवर्तन निदेशालय ED की जांच में सामने आया है, कोयला परिवहन पर अवैध वसूली का बड़ा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। इसके जरिए प्रति टन 25 रुपए की अवैध वसूली की जा रही थी।
जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच सिंडिकेट की ओर से तकरीबन 540 करोड़ रुपए की अवैध वसूली की गई। इस पूरे मामले में कई नौकरशाह, कारोबारी और अन्य लोग शामिल पाए गए हैं।
मास्टरमाइंड और घोटाले के किंगपीन सूर्यकांत का करीबी है देवेंद्र डडसेना
आरोप है, कोल लेव्ही के मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी ने अफसरों और नेताओं की सरपरस्ती और मिलीभगत से 570 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली कराई। वसूली का काम देवेंद्र डडसेना और एक अन्य व्यक्ति संभालते थे। लेन-देन के लिए वॉट्सऐप पर पाल, दुर्ग, वीकली, टावर और जुगनू नाम से ग्रुप बनाए गए थे। पूरी बातचीत कोडवर्ड में की जाती थी।
जांच एजेंसियों द्वारा हाई कोर्ट में पेश दस्तावेजों और केस डायरी के अनुसार देवेंद्र डडसेना कथिततौर पर सिंडिकेट की अहम कड़ी था, उस पर अवैध वसूली की रकम लेने और बांटने का आरोप है। जब्त की गई डायरी और गवाहों के बयानों में लगभग 52 करोड़ रुपए के लेन-देन का जिक्र है।
मास्टरमाइंड सूर्यकांत का करीबी रहा है देवेंद्र डडसेना
आरोप है कि मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी ने अफसरों और नेताओं की मिलीभगत से 570 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली कराई। वसूली का काम देवेंद्र डडसेना और एक अन्य व्यक्ति संभालते थे। लेन-देन के लिए वॉट्सऐप पर पाल, दुर्ग, वीकली, टावर और जुगनू नाम से ग्रुप बनाए गए थे, जिनमें बातचीत में कोडवर्ड का इस्तेमाल किया जाता था।
आरोपी देवेंद्र करता था पैसों की वसूली और वितरण
हाईकोर्ट में पेश दस्तावेजों और केस डायरी के अनुसार देवेंद्र डडसेना कथित तौर पर इस सिंडिकेट की अहम कड़ी था, उस पर अवैध वसूली की रकम लेने और बांटने का आरोप है। जब्त की गई डायरी और गवाहों के बयानों में लगभग 52 करोड़ रुपए के लेन-देन का जिक्र है।
जांच में यह भी सामने आया कि यह राशि राजनीतिक और अन्य खर्चों में उपयोग की गई। आरोपी की ओर से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है और कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है, केवल सह-आरोपी के बयान हैं।
वहीं राज्य सरकार ने दलील दी कि मामला गंभीर आर्थिक अपराध का है, आरोपी की भूमिका महत्वपूर्ण और सक्रिय रही है। साक्ष्य से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है और जांच अभी जारी है, इसलिए जमानत देना उचित नहीं है।
जांच में यह भी सामने आया कि उगाही की गई धनराशि का उपयोग राजनीतिक और अन्य खर्चों में की गई। आरोपी की ओर से कहा गया है, उसे झूठा फंसाया गया है और कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है, केवल सह-आरोपी के बयान हैं। राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के ला अफसरों ने कहा, मामला गंभीर आर्थिक अपराध का है, आरोपी की भूमिका महत्वपूर्ण और सक्रिय रही है। साक्ष्य से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है और जांच अभी जारी है, इसलिए जमानत देना उचित नहीं है।
हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी- आर्थिक अपराध, समाज और अर्थव्यवस्था के लिए खतरा
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, आर्थिक अपराध अलग श्रेणी के होते हैं। समाज और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डालते हैं। ये अपराध योजनाबद्ध और संगठित तरीके से निजी लाभ के लिए किए जाते हैं। आरोपी की भूमिका गंभीर है और साक्ष्यों से सिद्ध हो रहा है। अपराध की गंभीरता और रकम अत्यधिक होने के कारण जमानत देना न्याय के हित में नहीं होगा। इसी आधार पर कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
क्या है छत्तीसगढ़ का कोयला लेव्ही स्कैम
जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ED का दावा है, छत्तीसगढ़ में कोयला घोटाला किया गया है। इस मामले में 36 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। ईडी का आरोप है कि कोयले के परिचालन, ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन करने समेत कई तरीकों से करीब 570 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध वसूली की गई है।
छत्तीसगढ़ में अवैध कोल लेवी वसूली का मामला ईडी की रेड में सामने आया था। जांच एजेंसी का दावा है, कोल परिवहन में कोल व्यापारियों से वसूली करने के लिए ऑनलाइन मिलने वाले परमिट को ऑफलाइन कर दिया गया था। खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक आईएएस समीर विश्नोई ने 15 जुलाई 2020 को इसके लिए आदेश जारी किया था।
2 पूर्व मंत्रियों, विधायकों समेत 36 पर FIR
कोयला लेव्ही घोटाले में ED की रिपोर्ट पर ACB, EOW ने दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों सहित 36 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। जिस पर अब ACB-EOW की टीम जांच कर रही है। इस मामले में IAS रानू साहू के अलावा IAS समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया, जेडी माइनिंग एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को गिरफ्तार किया गया था।
पढ़िए सूर्यकांत तिवारी की क्या थी भूमिका
ईडी की जांच के मुताबिक, सूर्यकांत तिवारी ने कोयला परिवहन और परमिट प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के जरिए करोड़ों की अवैध वसूली का मास्टरमाइंड माना गया है। आरोप है, प्रति टन 25 रुपए की दर से वसूली की जाती है और वसूली की रकम उसके कर्मचारियों के जरिए जमा कराई जाती थी। इसके बदले संबंधित कोल व्यापारियों को खनिज विभाग से परमिट जारी किए जाते थे।
2 पूर्व मंत्रियों, विधायकों समेत 36 पर FIR
छत्तीसगढ़ में कोयला घोटाले मामले में ED की रिपोर्ट पर ACB /EOW ने दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों सहित 36 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। जिस पर अब ACB-EOW की टीम जांच कर रही है। इस मामले में IAS रानू साहू के अलावा IAS समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया, जेडी माइनिंग एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को गिरफ्तार किया गया था।
सूर्यकांत तिवारी की क्या थी भूमिका
ईडी की जांच के मुताबिक सूर्यकांत तिवारी ने कोयला परिवहन और परमिट प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के जरिए करोड़ों की अवैध वसूली का मास्टरमाइंड माना गया है। आरोप है कि प्रति टन 25 रुपए की दर से वसूली कर रकम उसके कर्मचारियों के जरिए जमा कराई जाती थी, और इसके बदले संबंधित व्यापारियों को खनिज विभाग से परमिट जारी किए जाते थे।
मध्य प्रदेश के मैहर जिले में स्कूलों में लघु निर्माण कार्य जैसे पार्किंग शेड और साइकिल स्टैंड बनाने के नाम पर हुए 3.72 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच शुरू हो गई है. दरअसल खबर प्रसारित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच दल गठित कर दिया गया. जांच में सामने आया कि जिन स्कूलों में लाखों रुपये का भुगतान दिखाया गया, वहां ज़मीन पर कोई ठोस निर्माण कार्य नजर ही नहीं आया.
जांच टीम को क्या मिला?
एसडीएम एस.पी. मिश्रा के नेतृत्व में बनी टीम ने कई स्कूलों का भौतिक सत्यापन किया. टीम में संदीपनी विद्यालय मैहर के प्राचार्य दिनेश गोस्वामी, तहसीलदार ललित धार्वे, बीईओ राजेश द्विवेदी, बीआरसीसी चंद्र प्रताप शुक्ला, सहायक लेखपाल विनय सिंह और पटवारी आनंद पांडेय शामिल थे. टीम ने पाया कि अधिकांश स्कूलों में सिर्फ रंगाई-पुताई दिखाई दी, जबकि पार्किंग शेड और साइकिल स्टैंड जैसे निर्माण कार्य का कोई प्रमाण नहीं मिला.
किन फर्मों को हुआ भुगतान
जांच में सामने आया कि भोपाल की वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर, मैहर की श्री रुद्र इंटरप्राइजेज और सतना की श्री महाकाल ट्रेडर्स को करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया. विभिन्न स्कूलों से 21 लाख से 24 लाख रुपये तक के बिलों का भुगतान दर्शाया गया है. कुल मिलाकर 17 स्कूलों में लगभग 3 करोड़ 72 लाख रुपये के बिल पास किए गए.
फर्जी हस्ताक्षरों की आशंका
कई प्राचार्यों का कहना है कि उन्होंने न तो कोई वर्क ऑर्डर जारी किया और न ही ऐसे किसी बिल को मंजूरी दी. इससे फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजी हेराफेरी की आशंका गहरा गई है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
जांच समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है. रिपोर्ट में संबंधित फर्मों के साथ-साथ लगभग 14 प्राचार्यों की भूमिका की जांच की सिफारिश की गई है. माना जा रहा है कि जल्द ही निलंबन, एफआईआर और वित्तीय वसूली जैसी कड़ी कार्रवाई हो सकती है. फिलहाल, मामला संभागीय स्तर तक पहुंच चुका है और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं.
]]>पूछताछ में पता चला परीक्षा तो साल्वर ने पास की थी। मामला 15वीं वाहिनी (महेश गार्ड लाइन) का है। निरीक्षक रोहित कास्डे द्वारा दुर्गेश राठौर और राघवेंद्र रावत के विरुद्ध केस दर्ज करवाया गया है। पुलिस के अनुसार एमएस रोड द्वारकापुरी बस्ती जौरा (मुरैना) निवासी दुर्गेश ने आरक्षक (जेडी) एवं आरक्षक (रेडियो) चयन परीक्षा वर्ष-2023 में भाग लिया था।
दुर्गेश का केंद्र रतलाम (मारुति एकेडमी) आया था। उसके द्वारा शारीरिक एवं लिखित परीक्षा पास कर ली गई थी। चयनित अभ्यर्थियों को आधार इतिहास, दस्तावेज परीक्षण एवं चरित्र सत्यापन के लिए कमेटी द्वारा बुलाया गया था।
पूछताछ में उसने बहाना बनाया
4 जून को दुर्गेश लिखित हस्तलिपि में संदिग्ध प्रतीत हुआ। पूछताछ में उसने बहाना बनाया और कहा कि चाकू से चोट लगने के कारण उस वक्त छोटे भाई ने लिखा था। परंतु हस्ताक्षर उसने ही किए हैं। शक होने पर अफसरों ने फोटो, बायोमेट्रिक आदि की जांच की गई।
सख्ती से पूछताछ भी की
दुर्गेश से सख्ती से पूछताछ भी की गई। उसने साल्वर राघवेंद्रसिंह रावत निवासी सबलगढ़ (मुरैना) का नाम स्वीकार कर लिया। बुधवार को उसके विरुद्ध थाना में एफआईआर दर्ज करवा दी गई। टीआई वेदेंद्रसिंह कुशवाह के मुताबिक दुर्गेश का परीक्षा केंद्र रतलाम का है। शून्य पर केस दर्ज कर डायरी रतलाम भेजी जा रही है।
]]>गुवाहाटी में हाल ही में सामने आए एक बहुचर्चित आर्थिक घोटाले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस मामले का मुख्य मास्टरमाइंड खुसदीप बंसल को बताया जा रहा है, जो आरोपों के केंद्र में हैं। उनके साथ, इस आपराधिक षड्यंत्र में प्रमुख भूमिका निभाने वाले परथा भारद्वाज को अदालत ने आज जमानत देने से इनकार कर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला पी.आर. केस नंबर 2252/2024 के तहत दर्ज है। मामले की जांच में पाया गया कि खुसदीप बंसल और उनके साथी, परथा भारद्वाज, ने करोड़ों रुपये की ठगी और जालसाजी के जरिए सैकड़ों लोगों को धोखा दिया। यह घोटाला सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों में फैला हुआ है।
आरोपों की गंभीरता
आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120(B) (आपराधिक षड्यंत्र), 406 (आपराधिक विश्वासघात), 418 (धोखा देकर नुकसान पहुंचाना), 419 (प्रतिरूपण), 420 (धोखाधड़ी), 465 (जालसाजी), 467 (महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के इरादे से जालसाजी), और 471 (जाली दस्तावेजों का उपयोग) के तहत आरोप लगाए गए हैं। अभियोजन पक्ष का कहना है कि इस मामले में साजिश की गहराई और आर्थिक नुकसान का स्तर इतना बड़ा है कि इसे साधारण अपराध नहीं माना जा सकता।
खुसदीप बंसल: मास्टरमाइंड की भूमिका
जांच के दौरान पता चला कि खुसदीप बंसल ने एक सुव्यवस्थित नेटवर्क बनाया, जिसमें नकली दस्तावेज़, फर्जी कंपनियां और जालसाजी के अन्य तरीकों का उपयोग किया गया। इस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य भोले-भाले निवेशकों और व्यवसायियों को धोखा देना था।
बंसल ने अपने संपर्कों और प्रभाव का उपयोग करके कई सरकारी और गैर-सरकारी परियोजनाओं में निवेश के नाम पर भारी धनराशि इकट्ठा की। उनके खिलाफ दर्ज शिकायतों के अनुसार, इस पूरे घोटाले की योजना और क्रियान्वयन उनकी निगरानी में हुआ।
परथा भारद्वाज की संलिप्तता
परथा भारद्वाज, जिन्हें इस घोटाले में खुसदीप बंसल का दाहिना हाथ माना जाता है, पर आरोप है कि उन्होंने जाली दस्तावेज तैयार करने, गवाहों को डराने और धन के लेन-देन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अदालत ने आज उनकी जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगे आरोप बेहद गंभीर हैं।
अदालत की टिप्पणी
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने कहा, “आर्थिक अपराधों को गंभीरता से लेना जरूरी है। ये अपराध न केवल व्यक्तिगत धन हानि पहुंचाते हैं बल्कि देश की आर्थिक स्थिति को भी कमजोर करते हैं।”
अभियोजन पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि खुसदीप बंसल और परथा भारद्वाज जैसे अपराधी अगर जमानत पर बाहर आते हैं, तो वे गवाहों को डराने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की पूरी कोशिश करेंगे।
जमानत याचिका पर सुनवाई
अदालत में अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के बीच लंबी बहस हुई। अभियोजन पक्ष ने कई सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए यह स्थापित किया कि इस तरह के मामलों में जमानत देना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि परथा भारद्वाज को स्वास्थ्य कारणों से जमानत दी जानी चाहिए, लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा कि जेल प्रशासन उनकी चिकित्सा आवश्यकताओं का ध्यान रखेगा।
जांच की दिशा
अभी तक की जांच में यह सामने आया है कि खुसदीप बंसल और उनके नेटवर्क ने सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देकर फर्जी दस्तावेजों को वैध ठहराने की कोशिश की। साथ ही, बंसल के विदेशी खातों की भी जांच की जा रही है, जहां घोटाले की धनराशि स्थानांतरित की गई हो सकती है।
अगली सुनवाई की तारीख
इस मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी 2025 को निर्धारित की गई है। अदालत ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया है कि वे जांच में तेजी लाएं और सभी सबूतों को प्रस्तुत करें।
आम जनता के लिए संदेश
यह मामला उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो बिना सोचे-समझे निवेश करते हैं। खुसदीप बंसल जैसे अपराधी आम लोगों की मेहनत की कमाई को अपने आपराधिक इरादों के लिए इस्तेमाल करते हैं।