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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना छत्तीसगढ़ में हरित विकास और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का नया पर्याय बन चुकी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे व्यापक जागरूकता अभियानों के फलस्वरूप प्रदेश में सौर ऊर्जा को लेकर भारी उत्साह है। इस महा-अभियान में रायगढ़ जिला उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर पूरे प्रदेश में अग्रणी बनकर उभरा है। रायगढ़ जिले में अब तक 2,705 परिवारों के घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप संयंत्र (Solar Rooftop) सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे ये परिवार पूरी तरह ऊर्जा आत्मनिर्भर हो गए हैं।
रायगढ़ जिले की उपलब्धियां
रायगढ़ जिले में स्थापित 2,705 सोलर संयंत्रों की कुल क्षमता 11,504 किलोवाट से अधिक है। इनसे प्रतिदिन लगभग 46 हजार यूनिट तथा प्रतिमाह करीब 13.80 लाख यूनिट हरित बिजली का उत्पादन हो रहा है। इससे उपभोक्ताओं की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता भी कम हो रही है।
बढ़ता जनविश्वास
योजना के तहत अब तक कुल 6,701 आवेदन प्राप्त हुए हैं। केवल मई माह में ही 912 नए आवेदन मिले, जिनमें से 411 घरों में सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं। जिले में हर हफ्ते औसतन 228 नए आवेदन आ रहे हैं और 100 से अधिक घरों में नियमित रूप से सोलर पैनल स्थापित किए जा रहे हैं।
भीषण गर्मी में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत
गर्मी के इस मौसम में जब एयर कंडीशनर और कूलर के चलने से बिजली की मांग और बिल दोनों बढ़ जाते हैं, तब यह योजना आम उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रही है। योजना से जुड़े परिवार अपनी जरूरत की अधिकांश बिजली खुद बना रहे हैं, जिससे उनका मासिक बिजली का खर्च (बिल) नगण्य हो गया है।
सब्सिडी और बिजली उत्पादन का गणित
विद्युत विभाग के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ को न्यूनतम कर दिया गया है। पात्र हितग्राहियों को 1 लाख 8 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। सोलर प्लांट लगाने के लिए बैंकों के माध्यम से आसान लोन की व्यवस्था भी है।
क्षमता और उत्पादन
1 किलोवाट के सोलर संयत्र प्लांट सेे प्रतिमाह लगभग 120 यूनिट बिजली उत्पादन हो रहा है। इसी प्रकार 2 किलोवाट के सोलर संयत्र प्लांट से प्रतिमाह लगभग 240 यूनिट बिजली उत्पादन और 3 किलोवाट के सोलर संयत्र प्लांट से प्रतिमाह लगभग 360 यूनिट बिजली उत्पादन हो रहा है।
आवेदन की प्रक्रिया हुई बेहद सरल और पारदर्शी
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को पूरी तरह ऑनलाइन और बिचौलियों से मुक्त रखा गया है। इच्छुक नागरिक निम्नलिखित माध्यमों से आसानी से आवेदन कर सकते हैं। पीएम सूर्यघर पोर्टल (PM Surya Ghar Portal) या मोबाइल ऐप, CSPDCL की विभागीय डिजिटल सेवा से या टोल-फ्री नंबररू उपभोक्ता 1912 पर कॉल करके सहायता ले सकते हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत उपभोक्ता अपनी मर्जी से अधिकृत वेंडर चुन सकते हैं। सौर ऊर्जा का यह बढ़ता कारवां न केवल रायगढ़ बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को स्वच्छ, प्रदूषण-मुक्त और हरित भविष्य की ओर ले जा रहा है। यह योजना आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को जमीनी धरातल पर सच कर रही है।
]]>जनपद पंचायत बीजापुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत संतोषपुर, जो कभी लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहा, आज बदलाव और विकास की नई पहचान बनता जा रहा है। ‘‘नियद नेल्लनार योजना‘‘ के शुरू होने के बाद गांव में बुनियादी सुविधाओं और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस बदलाव की कहानी के केंद्र हैं संतोषपुर निवासी रमेश पासपुल। कभी स्थायी रोजगार के अभाव में आर्थिक तंगी से जूझ रहे रमेश का जीवन आज पूरी तरह बदल चुका है। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच आय का कोई निश्चित साधन न होने से उनका भविष्य अनिश्चित नजर आता था।
परिस्थितियां तब बदलीं जब ‘‘नियद नेल्लनार योजना‘‘ के तहत उन्हें राजमिस्त्री (मेसन) का प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की बारीकियों, तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कौशल में दक्षता हासिल की। यह प्रशिक्षण उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। प्रशिक्षण के बाद वित्तीय वर्ष 2024-25 में रमेश को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की स्वीकृति मिली। पहली किश्त प्राप्त होते ही उन्होंने अपने घर का निर्माण स्वयं शुरू किया और निर्धारित समय-सीमा में इसे पूरा कर लिया। उनके कार्य की गुणवत्ता देखकर गांव के अन्य हितग्राहियों ने भी अपने-अपने आवास निर्माण के लिए उन्हें बुलाने लगे, जिससे उनके लिए नियमित आय का साधन तैयार हो गया।
आज रमेश पासपुल एक कुशल राजमिस्त्री के रूप में गांव में पहचान बना चुके हैं। वे न केवल आत्मनिर्भर बने, बल्कि अन्य ग्रामीणों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। उनकी बढ़ती मांग ने उनके जीवन में स्थिरता और खुशहाली ला दी है। रमेश की यह प्रेरक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सही दिशा में मिला प्रशिक्षण और अवसर किसी भी व्यक्ति के जीवन को नई दिशा दे सकता है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र से निकलकर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ना आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने अपने परिश्रम और शासन की योजनाओं के सहयोग से इसे संभव कर दिखाया। यह कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन की सशक्त मिसाल है।
]]>रायपुर,
छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती महोत्सव के अवसर पर मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले की महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि ग्रामीण प्रतिभा को सही दिशा, मार्गदर्शन और मंच प्राप्त हो, तो वे अवसर को आजीविका का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त कदम बढ़ा सकती हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित बिहान योजना से जुड़ी ग्राम केवटटोला, मोहला और भोजटोला की महिलाओं ने सामूहिक प्रयासों से अपने पारंपरिक ज्ञान और रचनात्मकता का उपयोग करते हुए दीपावली के उपयोगी उत्पाद जैसे रंगोली पाउडर, रुई की बाती, माता लक्ष्मी की मिट्टी से निर्मित मूर्तियाँ, अगरबत्ती, मिट्टी के दीये, मटके, पारंपरिक साड़ियाँ एवं मनिहारी सामग्री स्वयं तैयार कीं। समूह की महिलाओं ने उत्पादों की गुणवत्ता और पारंपरिक स्वरूप बनाए रखा, जिससे बाजार में अच्छी डिमांड रही।
त्योहार के आरंभ से पूर्व ही महिलाओं ने मोहला के साप्ताहिक बाजार में अपने उत्पादों की बिक्री प्रारंभ की। हस्तनिर्मित वस्तुओं को ग्राहकों द्वारा मिली सराहना ने महिलाओं का उत्साह और आत्मविश्वास दोनों बढ़ाया। बिक्री से प्राप्त आय ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता बनाया है।
इस पहल में शामिल कई महिलाओं ने पहली बार घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर व्यवसायिक गतिविधियों में भाग लिया। उन्होंने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के पश्चात उन्हें प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हुआ, जिसके परिणामस्वरूप उनमें आत्मविश्वास विकसित हुआ। यह पहल केवल आय का स्रोत नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान और सशक्तिकरण का माध्यम भी सिद्ध हुई।
बिहान योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना एवं उन्हें आजीविका के स्थायी साधन उपलब्ध कराना है। मोहला की महिलाओं की दीपावली के अवसर पर आरंभ हुई यह आर्थिक यात्रा केवल एक पर्व तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण महिला उद्यमिता, स्वावलंबन और सामुदायिक विकास की दिशा में एक नई शुरुआत है।
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