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राजधानी रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण अस्पताल में मंगलवार की रात दर्दनाक हादसा हो गया. सफाई करने सिवरेज टैंक में उतरे तीन लोगों की मौत हो गई. घटना के बाद अस्पताल के गेट पर मृतकों के परिजन और लोगों की पुलिसकर्मियों के साथ झूमाझटकी हुई. मौके पर जमकर हंगामा हुआ और मृतकों के परिजन भीड़ अंदर घुस आई. मृतकों के परिजन बिलखते नजर आए.
जानकारी के मुताबिक, रामकृष्ण हॉस्पिटल के सिवरेज टैंक की सफाई के लिए तीनों मजदूरों को अंदर उतारा गया था. इसी दौरान टैंक में मौजूद जहरीली गैस की वजह से एक-एक कर तीनों की हालत बिगड़ गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई.
खर्च बचाने नियमों की अनदेखी का आरोप
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि बिना किसी सुरक्षा उपकरण के मजदूरों को सिवरेज टैंक में उतारा गया. अस्पताल प्रबंधन ने खर्च बचाने के लिए नियमों की अनदेखी की. प्रशिक्षित कर्मचारियों की बजाय सामान्य मजदूरों से सफाई कराई गई. अगर सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता तो यह हादसा टाला जा सकता था.
दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे परिजन
दरअसल, सिवरेजटैंक की सफाई बेहद जोखिम भरा काम होता है, जिसे आमतौर पर नगर निगम या प्रशिक्षित टीम द्वारा आधुनिक उपकरणों और सुरक्षा किट के साथ किया जाता है. इसमें गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन मास्क और अन्य सुरक्षा साधनों का उपयोग अनिवार्य होता है. घटना के बाद परिजन दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. वहीं, पुलिस और प्रशासन द्वारा मामले की जांच शुरू किए जाने की बात कही जा रही है. अस्पताल में तनाव का माहौल बना हुआ है. बताया जा रहा है कि मृतकों की पहचान गोविंद सेंद्रे, अनमोल मचकन और प्रशांत कुमार के रूप में हुई है, तीनों सिमरन सिटी निवासी हैं.
रायगढ़ जिला मुख्यालय में शुक्रवार की सुबह सेफ्टिक टैंक में एक व्यक्ति की लाश मिलने से पूरे गांव में सनसनी फैल गई। मृतक गांव में ही स्थित एन स्टील एलाइज कंपनी में काम करते आ रहा था और दो दिन पहले गांव घूमने जाने के नाम से घर से निकला था। उक्त मामला चक्रधर नगर थाना क्षेत्र का है।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार मृतक चरण सिंह मांझी पिता शालिक राम मांझी 47 साल ग्राम किरारी बाराद्वारा का रहने वाला था और वह पिछले 4-5 सालों से रायगढ़ के भेलवाटिकरा एन स्टील एलाइज कंपनी में काम करते आ रहा था। बताया जा रहा है कि मृत अपने पत्नी के अलावा अन्य 8-10 लोगों के साथ प्लांट के अंदर ही चाल बनाकर रहते थे। इस प्लांट में फ्लाइएश के छानकर लोहा निकालते थे। जिसे वापस प्लांट में बेचा जाता था। 9 अक्टूबर की रात मृतक चरण सिंह मांझी गांव घुमने जा रहा हूं कहकर निकला था। तब से वह लापता हो गया था।
प्लांट के बगल में मिला शव
परिजनों के अलावा प्लांट के अन्य कर्मचारियों के द्वारा उसकी खोजबीन की जा रही थी। इसी बीच आज सुबह प्लांट के बंगल में स्थित लखन यादव के बिल्डिंग के सैप्टिक टैंक में युवक का शव मिला। गांव के ग्रामीणों ने बताया कि आखरी बार कल शाम को ही युवक को आखरी बार देखा गया था। इस संबंध में उद्योगपति दीपक चटर्जी ने बताया कि उसके यहां के एक मजदूर चरण सिंह मांझी रात करीब 9 बजकर 40 मिनट से यहां से निकला था और रातभर घर नही पहंुचा जिसके बाद सुबह से ही उसकी खोजबीन की जा रही थी। साथ ही गांव के अन्य उसके रिश्तेदार के अलावा गांव में उसकी खोजबीन कर रहे थे।
बेटे ने लिखाई थी थाने में रिपोर्ट
इस मामले में मृतक के बेटे लव मांझी ने कल दोपहर 3 बजे चक्रधर नगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी लिखाई थी। इस बीच आज सुबह सेफ्टिक टैंक में उसकी लाश मिली है। उन्होंने बताया कि मृतक अपने घर में इकलौता कमाने वाला शख्स था और बीच-बीच में काम छोडकर खेती किसानी करने चले जाता था। भेलवाटिकरा गांव के पूर्व सरपंच हेमंत डनसेना ने बताया कि यह प्लांट बीते साढ़े चार-पांच साल पहले कमला राठिया के कार्यकाल के दौरान चालू हुआ था। यहां अलग-अलग जगहों से 20 से 25 मजदूर आते थे और काम करके वापस चले जाते थे।
मृतक के परिजनों को मिले मुआवजा
पूर्व सरपंच ने बताया कि इस प्लांट के जरिये लोगों का जीवन यापन हो रहा था। यह कोई बड़ा प्लांट नही है, यहां वेस्टेज आयरन लाते हैं और कुटाई और सफाई करके पुनः बाजार में बेचा जाता है। मृतक अपनी पत्नी और बच्चों के साथ यहां रहता था, प्लांट के मालिक को चाहिए कि उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।